Sunday, 28 May 2017

देश दुग्ध उत्पादन में प्रथम, पशुधन बीमा कवरेज में अब 5 दुधारू पशु,  50 छोटे जानवर शामिल

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा पशु-पालन के क्षेत्र में गुजरात में अनेक नई पहल की गई हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत गोकुल ग्राम की तर्ज पर ‘ गिर गाय अभ्याहरण्य ’ स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। यह धर्मपुर, पोरबंदर में स्थापित किया जाएगा। 

          पशुधन बीमा कवरेज में जहां पहले 2 दुधारू पशुओं को शामिल किया गया था, वहीं अब इसमें 5 दुधारू पशुओं और 50 छोटे जानवरों को शामिल किया गया है। यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू कर दी गई है जबकि इससे पहले इसमें 15 जिले ही शामिल थे। वर्ष 2014-16 के दौरान राज्य में लगभग 26,000 पशुओं का बीमा किया गया। पशु-चिकित्सा शिक्षा में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए जूनागढ़ में एक कॉलेज स्थापित किया गया है। 

               कृषि मंत्री ने यह बात कामधेनु विश्वूविद्यालय, साबरकांठा, गुजरात में पॉली-टेक्नीबक के उद्घाटन के अवसर पर कही। कृषि मंत्री ने कहा कि यह बड़े गर्व का विषय है कि देश दुग्धक उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2015-16 में दुग्धह उत्पादन की वृद्धि दर 6.28 प्रतिशत रही है जिससे कुल उत्पादन 156 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इससे भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता औसतन 337 ग्राम प्रतिदिन हो गई है जबकि विश्वरस्तर पर यह औसतन 229 ग्राम ही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011-14 के मुकाबले वर्ष 2014-17 में दुग्ध उत्पादन वृद्धि 16.9 प्रतिशत हुई है। 

             उन्होंने कहा कि ज्यों-ज्यों शहरी एवं ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर बढ़ता जा रहा है त्यों-त्यों पशुजन्य‍ प्रोटीन की मांग भी बढ़ती जा रही है, इसलिए यह आवश्यक है कि हम पशुधन, मुर्गी एवं मछली उत्पांदन की निरन्तर वृद्धि की ओर प्रयत्नशील हो जिससे देश का प्रत्येक नागरिक सुपोषित और स्वस्थ रहे। इसलिए पशु-चिकित्सकों का यह कर्तव्य है कि वे पशुजन्य प्रोटीन की उपलब्ध्ता को अधिकाधिक बढ़ा कर देश को स्वस्थय बनाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि भारत सरकार सन् 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए, किसानों की आय को दोगुना करने के भारत सरकार के संकल्प में पशु-चिकित्सा क्षेत्र की महती भूमिका है। पशु स्वरस्थे रहेगा, तो उसकी उत्पादकता बढ़ेगी जिससे स्वत: ही किसान की आय बढ़ेगी और राष्ट्र आर्थिक खुशहाली के मार्ग पर आगे बढ़ेगा। 

              कृषि मंत्री ने कहा कि भारत में पशुधन की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा 512.05 मिलियन है जिसमें 199.1 मिलियन गोपशु, 105.3 मिलियन भैंस, 71.6 मिलियन भेड़ और 140.5 मिलियन बकरी हैं। बकरियों की संख्या. के मामले में भारत का दूसरा स्थान है और भारत की पशु संख्या में इसकी लगभग 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारतीय पोल्ट्री इंडस्ट्री भी विश्व के दूसरे सबसे बडे बाजार के रूप में उभर रही है जिसमें 63 बिलियन अण्डा और 649 मिलियन पोल्ट्री मीट उत्पादन शामिल है। भारत की समुद्रीय एवं फिश इंडस्ट्री लगभग 7 प्रतिशत की यौगिक वार्षिक वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रही है।

             कुल मिलाकर, भारतीय पशुधन सेक्टर तेज गति से आगे बढ़ रहा है और ग्लोबल बाजार में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है। कृषि मंत्री ने कहा कि भारत सरकार का विशेष जोर है कि विश्व विद्यालयों के विद्यार्थियों में शिक्षा की गुणवत्ता अंतर्राष्ट्रीय स्तव की हो। इस दिशा में आईसीएआर की पांचवीं डीन समिति की रिपोर्ट को अनुमोदित कर दिया गया है। स्टूसडेन्टक और आर्या जैसी योजनाएं स्कॉलरशिप के साथ प्रारंभ की गई है। छात्रों की स्कॉ‍लरशिप को भी बढ़ाया गया है।

      उन्होंने आखिर में कहा कि राष्ट्र की समृद्धि के लिए देश की कृषि की प्रगति और किसान को खुशहाल बनाने के लिए एकसाथ मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। कृषि आगे बढ़ेगी, किसान खुशहाल होगा, तो निश्चित रूप से राष्ट्र आगे बढ़ेगा।

Saturday, 27 May 2017

अब नमामि गंगे की प्रगति समीक्षा

           केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने नमामि गंगे परियोजनाओं का निरीक्षण करने के लिए गंगा निरीक्षण अभियान के पहले चरण में कोलकाता के निकट बैरकपुर स्‍थित केंद्रीय अंतर्देशीय मत्‍स्‍य पालन अनुसंधान संस्‍थान का दौरा किया। 

           इस संस्‍थान में गंगा में मत्‍स्‍य पालन को लेकर विशेष अनुसंधान होता है। सुश्री भारती अपने 15 दिनों की यात्रा के दौरान गंगा सागर से लेकर गंगोत्री तक गंगा किनारे स्‍थित विभिन्‍न स्‍थानों पर स्‍वयं जाकर नमामि गंगे परियोजना की प्रगति की समीक्षा करेंगी। सुश्री भारती लगभग ढ़ाई हजार किलोमीटर की अपनी यात्रा के दौरान काकद्वीप, गंगासागर, कपिलमुनि आश्रम, नबद्वीप, मुर्शीदाबाद, फरक्‍का, सुल्‍तानगंज(भागलपुर), मुंगेर, पटना, आरा, बक्‍सर, वाराणसी, इलाहाबाद, श्रृंगवेरपुर, फतेहपुर,कानपुर, फतेहगढ़, कासगंज, नरोरा, भृगुआश्रम, ब्रजघाट, विदुरकुटी, हरिद्वार, उत्‍तर काशी होते हुए गंगोत्री तक जाएंगी। 

            सुश्री भारती नदी, सड़क, रेल, हवाई और पैदल मार्ग से इस यात्रा को पूरा करेंगी। अपनी इस यात्रा के दौरान वे कोसीपुर घाट,कपिलमुनि आश्रम (गंगासागर), गांधीघाट (बैरकपुर), डायमंडहार्बर, हुगली, नबद्वीप, मुर्शीदाबाद, सुल्‍तानगंज (भागलपुर), मुंगेर,आरा, बक्‍सर, श्रृंगवेरपुर, इलाहाबाद, फतेहगढ़, कासगंज, भृगुआश्रम, विदुर कुटी और गंगोत्री में आयोजित गंगा चौपाल में भी भाग लेंगी। 

         गंगा चौपाल में मंत्री नमामि गंगा परियोजना से जुड़े विभिन्‍न हितधारकों के साथ नमामि गंगे परियोजना को सफल बनाने के उपायों पर चर्चा करेंगी। इनमें सरकारी, गैर–सरकारी संगठन, स्‍वयं सेवी संस्‍थाएं और स्‍थानीय निवासी शामिल होंगे।

मॉरीशस को पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति

          पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेन्‍द्र प्रधान ने भारत की यात्रा पर आए मॉ‍रीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्‍नाथ से मुलाकात की।

        पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान ने दो दिन की भारत की यात्रा पर आए मॉ‍रीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ से मुलाकात की। जनवरी 2017 में मॉरीशस के प्रधानमंत्री पद का कार्यभार ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री जगन्‍नाथ की यह पहली विदेश यात्रा है। बैठक के दौरान प्रधान ने हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में मॉरीशस के साथ चल रही बातचीत के बारे में चर्चा की। 2006 से भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम वाली रिफायनरी –मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्‍स लिमिटेड (एमआरपीएल) मॉरीशस को पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति कर रही है। 

        वर्तमान में दोनों देश तेल और गैस के क्षेत्र में कार्य करने को लेकर परस्‍पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने मॉरीशस में प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में सहयोग के बारे में बातचीत की। इस संदर्भ में दोनों नेताओं ने निर्णय लिया कि पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड(पीएलएल) का एक शिष्‍टमंडल जल्‍द ही मॉरीशस का दौरा करेगा। मॉरीशस में हितधारकों और अधिकारियों से बातचीत करेगा। अपने ‘विजन 2030’ के तहत मॉरीशस स्‍वयं को एक क्षेत्रीय हाइड्रोकार्बन व्‍यापार केन्‍द्र के रूप में विकसित करना चाहता है। बैठक के दौरान प्रधान ने मॉरीशस को उसकी ऊर्जा जरूरतों के संबंध में भारत की तरफ से लगातार सहयोग देने का वायदा किया। प्रधान ने मॉरीशस को तेल और गैस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास के माध्‍यम से क्षेत्रीय पेट्रोलियम हब बनाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

मनोरंजन के लिए प्रतिबद्ध दूरदर्शन

             सूचना प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार का पूरा ध्यान एकीकृत विकास, समेकित वृद्धि और सुशासन पर है। सरकार ने पिछले 3 साल में लोक कल्याण के लिए कई शुरुआत की है जिससे सबका साथ सबका विकास सुनिश्चित हो सके। 

        कई अहम सरकारी योजनाएं जिनका लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और देश में बड़ा बदलाव आया, उनकी सफलता को दर्शाने के लिए दूरदर्शन ने 14 लघु फिल्मों का निर्माण किया है. ये फिल्म देशभर में जमीनी स्तर पर आए बदलाव को सफलतापूर्वक और विस्तार से बताने में सफल रही है। केंद्रीय मंत्री ने अलग-अलग अहम सरकारी योजनाओं की सफलता पर दूरदर्शन द्वारा तैयार की गई 14 लघु फिल्मों के रिलीज के मौके पर आज ये बातें कही। नायडू ने कहा कि ये लघु फिल्में सभी दूरदर्शन केंद्रों पर हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में दिखाई जाएंगी जिसका लक्ष्य दूसरे लोगों को भी सरकारी योजनाओं के तहत लाभ लेने के लिए प्रेरित करना और इसकी जानकारी देना है। ये फिल्में सूचना मंत्रालय के दूसरे मीडिया यूनिट के जरिए भी दिखाईं जाएंगी ताकि देश के ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें।

             नायडू ने ये भी कहा कि सूचना प्रसारण मंत्रालय सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए मेकिंग ऑफ डेवलप्ड इंडिया यानि विकसित भारत निर्माण का एक उत्सव देशभर में मनाएगी जिसे मीडिया यूनिट के जरिए भी दिखाया जाएगा। दूरदर्शन की नई पहल फ्रीडिश पर वेंकैया नायडू ने कहा कि डीडी फ्री डिश सेवा देश में मौजूद सबसे बड़ी डीटीएच सेवा है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक 2 करोड़ 20 लाख परिवार तक इसकी पहुंच है। सरकार ने इसकी पहुंच और बढ़ाने के लिए डीडी डिटिएच बॉक्स को राज्य सरकारों के जरिए देश के सुदूर और आंतरिक इलाकों खासकर नक्सल पीड़ित इलाकों में मुफ्त में देने की योजना बनाई है। 

                उन्होंने ये भी कहा कि सूचना प्रसारण मंत्रालय 10 हजार बॉक्स छत्तीसगढ़ सरकार को नक्सली इलाकों में वितरण के लिए देगा। दूरदर्शन द्वारा निर्मित लघु फिल्मों में निम्नलिखित विषय-वस्तु को ध्यान में रखा गया है। मिशन इंद्रधनुष, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और सॉयल हेल्थ कार्ड, सबका साथ सबका विकास, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्किल इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, कौशल भारत कुशल भारत,   प्रधानमंत्री जन धन योजना, उज्जवल भारत के तहत राष्ट्रीय सोलर मिशन है। दूरदर्शन 28 मई 2017 को नई दिल्ली के एसियाड विलेज में एक स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आयोजन करने जा रहा है। 

             इसमें देश की जानी मानी खेल शख्सियतें, खेल संघ, खेल पत्रिकाओं और अखबारों के संपादक इसके लाइव प्रसारण के दौरान परिचर्चा में हिस्सा लेंगे। डीडी स्पोर्ट्स पर वाराणसी, गुवाहाटी और दूसरे जगहों के स्थानीय खिलाड़ी और राज्य खेल संघों के अधिकारी सीधे जुड़ेंगे और बातचीत करेंगे। इस खेल आयोजन में भारतीय खेल के भविष्य और स्थानीय खिल की गुणवत्ता को सुधारने के लिए नीति बनाने ताकि भारत आने वाले दिनों में खेल के क्षेत्र में मजबूती से उभरे, इस पर चर्चा होगी।

Friday, 26 May 2017

देश के तीसरे सबसे बड़े भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की आधारशिला

                प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने असम के गौमुख में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान की आधारशिला रखी। इस अवसर पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस कार्य के लिए असम सरकार तथा वहां के मुख्‍यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल को बधाई दी। आईएआरआई की आधारशिला रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे भविष्‍य में पूरे क्षेत्र में एक सकारात्‍मक प्रभाव पड़ेगा। उन्‍होंने कहा कि 21वीं सदी की जरूरतों के साथ आज कृषि को विकसित करने की जरूरत है। 

         प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को बदलती तकनीकों का लाभ मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने आधुनिक कृषि और क्षेत्र की विशेष जरूरतों पर ध्‍यान केन्द्रित करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने 2022 तक, स्‍वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर किसानों की आय दोगुनी करने के अपने उद्देश्‍य पर भी बात की। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने गोगामुख, धेमाजी, असम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, असम के शिलान्यास समारोह के अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री जी ने संकल्प लिया है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करेंगे और हम ऐसा करके दिखाने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। इसी क्रम में, देश के पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि, एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में उत्पादन को बढ़ाने की अपार संभावनाओं को देखते हुए कृषकों का ज्ञानवर्धन करने, उचित कृषि संबंधी जानकारी देने तथा देश में कृषि अनुसंधान तथा शिक्षा का उत्कृष्ट स्तर बनाये रखने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की एक और शाखा असम में खोली जा रही है। 


           उन्होंने कहा कि इस संस्थान की स्थापना कृषि उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के साथ उच्च स्तरीय शिक्षा एवं अनुसंधान प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है और आने वाले समय में देश के पूर्वोत्तर भाग में रहने वाले किसानों के जीवन स्तर में निश्चित तौर पर इससे बदलाव दिखाई पड़ेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और कृषि मंत्रालय की कुछ उपलब्धियां हैं।

             भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की यात्रा 1905 में उत्तरी बिहार के दरभंगा (समस्तीपुर) जिले के पूसा नामक जगह से प्रारंभ हुई थी। उस समय इसका नाम कृषि अनुसंधान संस्थान रखा गया था। बाद में इसका नाम 1911 में बदलकर इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च और 1919 में इंपीरियल एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट किया गया। इसके बाद 29 जुलाई, 1936 में यह संस्थान दिल्ली में स्थानांतरित किया गया।

            स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पुनः इस संस्थान का नाम बदलकर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान रख दिया गया और 1958 में इसे डीम्ड यूनीवर्सिटी का दर्जा दिया गया। हरित क्रांति का सूत्रधार होने की महत्वपूर्ण भूमिका भी इसी संस्थान द्वारा यहां विकसित तकनीकियों, नई एवं उन्नत किस्मों के विकास तथा किसानों के खेतों पर किये गये वैज्ञानिक प्रदर्शनों के माध्यम से निभाई गई। देशभर में जिस तरह से आईआईटी और आईआईएम जैसी उच्च शिक्षा संस्थानों का जाल बिछा हुआ है, ठीक उसी तरह कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, दिल्ली की तर्ज पर देश में और कृषि अनुसंधान संस्थानों की स्थापना करने की योजना मोदी सरकार द्वारा बनाई गई है। इस क्रम में पहले झारखंड और अब असम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की शुरूआत की जा रही है।

             सरकार कृषि के प्रति कितनी गंभीर है यह इसी बात से पता चलता है कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वर्तमान सरकार ने कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए गत चार वर्षों में कृषि बजट में (2014-15 से 2017-18) के लिए 1,64,415 करोड़ रूपये आवंटित किये गये जोकि यू.पी.ए. सरकार के वर्ष (2010-11 से 2013-14) 1,04,337 करोड़ रूपये की तुलना में 57.58 प्रतिशत अधिक है। जहां दूध का उत्पादन वर्ष 2011-2014 तीन वर्ष में 398 मिलियन मीट्रिक टन के अनुपात में वर्ष 2014-2017 में 465.5 मिलियन मीट्रिक टन है जो 16.9 प्रतिशत अधिक है। वहीं मछली उत्पादन में वर्ष 2011-14 तीन वर्ष में 272.88 लाख टन की तुलना में 2014-17 में बढकर 327.74 लाख टन हो गया जो 20.1 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी प्रकार वर्ष 2011-14 तीन वर्ष में 210.93 बिलियन की तुलना में अंडा उत्पादन 2014-17 में 248.72 बिलियन हो गया है जो 17.92 प्रतिशत अधिक है। शहद उत्पादन मे 2011-14 तीन वर्ष में 2,18,950 मि. टन की तुलना में वर्ष 2014-17 में 2,63,930 मि. टन हो गया है जो 20.54 प्रतिशत अधिक है। 

            वर्तमान सरकार द्वारा इस दौरान कई किसानोपयोगी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है, जिनमें मृदा उर्वरता में सुधार हेतु मृदा स्वास्थ्य कार्ड; जैविक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से परंपरागत कृषि विकास योजना के अलावा 400 करोड़ रुपये की लागत से शुरु की गई उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए जैविक वैल्यू चेन विकास मिशन का लाभ किसानों को मिल रहा है। देश की 585 थोक मंडियों को एक ई-प्लेटफार्म से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार या ई-नाम तेजी से काम कर रहा है। किसानों को आपदा से होने वाले नुकसान से बचाने हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना आदि का प्रमुख रूप से उल्लेख करना चाहूंगा। कृषि मंत्री ने आखिर में प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट किया कि उनके मार्गदर्शन में देश के पूर्वोत्तर हिस्से में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना का सपना पूरा हो रहा है।

पूर्वोत्‍तर में 1,50,000 करोड़ की लागत की परियोजनाओं का निर्माण

               प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बने 9.15 किलोमीटर लम्‍बे ढोला-सदिया पुल का उद्घाटन किया। इस पुल के बनने से ऊपरी असम और अरूणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग के लिए 24ज्र्7 संपर्क सुनिश्ति हो जायेगा। 

           पूर्वोत्‍तर में रोड़ संपर्क में एक प्रमुख बदलाव आयेगा। यह पुल तीन लेन का होगा जो असम के ढोला को अरूणाचल के सादिया से जोडेगा। इस पुल के अस्तित्‍व में आने से इस क्षेत्र में संपर्क का एक लम्‍बा अंतर खत्‍म हो जायेगा। अभी तक ब्रह्मपुत्र को पार करने के लिए केवल दिन के समय नौका का ही उपयोग किया जाता था, और बाढ़ के दौरान यह भी संभव नहीं होता था। इस पुल के बनने से असम के राष्‍ट्रीय राजमार्ग – 37 में रूपाई और अरूणाचल प्रदेश के राष्‍ट्रीय राजमार्ग-52 में मेका/रोईंग के बीच 165 किलोमीटर की दूरी कम हो जायेगी। इन दो स्‍थानों के बीच यात्रा करने में वर्तमान में 6 घंटे का समय लगता है, जो अब घटकर 1 घंटा हो जायेगा। इस तरह 5 घंटे के समय की बचत होगी।

             पुल का उद्घाटन करने के बाद इस अवसर पर एक जनसभा को सम्‍बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ढोला-सदिया पुल के शुरू हो जाने से पूर्वोत्‍तर में बड़े पैमाने पर आर्थिक विकास के अवसर पैदा होंगे। उन्‍होंने कहा कि देश के पूर्वी और उत्‍तर-पूर्वी भाग में आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यह पुल इस संदर्भ में केन्‍द्र सरकार के विजन की दिशा में एक स्‍तम्‍भ है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि पूर्वोत्‍तर और देश के अन्‍य हिस्‍सों के बीच आपसी सम्‍पर्क को बढ़ाना केन्‍द्र सरकार की पहली प्राथमिकता है। इस संदर्भ में तेजी से कार्य किया जा रहा है। 

          प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्‍तर में उन्‍नत सम्‍पर्क से इस क्षेत्र को दक्षिण पूर्व एशिया की अर्थव्‍यवस्‍था से जोड़ा जाएगा। केन्‍द्र सरकार ने ढोला-सदिया पुल का नाम महान गायक, गीतकार और कवि भूपेन हजारिका के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर सम्‍बोधित करते हुए केन्‍द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा नौवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि वर्तमान में पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में लगभग 40,000 करोड़ रुपये के राजमार्गों तथा अन्‍तर्देशीय जलमार्गों का निर्माण किया जा रहा है। इन राज्‍यों में अगले दो वर्षों के दौरान परियोजनाओं पर 1,50,000 करोड़ रुपये की योजना है।

            उन्‍होंने 8 पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के प्रमुख राजमार्ग परियोजनाओं के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी। बताया कि इन राज्‍यों में वर्तमान में लगभग 3,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। उन्‍होंने ब्रहमपुत्र नदी और बराक नदी पर चल रही योजना के बारे में जानकारी भी दी।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2017 का प्रमुख आयोजन लखनऊ में

            केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री( स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येस्‍सो नाइक ने नई दिल्ली में कहा कि इस वर्ष 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2017 के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में होगा। 

           इसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। नाइक ने कहा कि कार्यक्रम में कई केंद्रीय मंत्री, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री और अनेक योग गुरूओ के भाग लेने की आशा है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2017 के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ में रमाबाई अंबेडकर सभा स्थल में होगा। इसमें लगभग 51 हजार लोग, विशिष्ठ अतिथियो के साथ योग का प्रदर्शन करेंगे। नाइक ने कहा कि लखनऊ में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ दिल्ली में भी सात विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमो का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमो का आयोजन एनडीएमसी, डीडीए और अन्य योग संबधी संस्थाओ के सहयोग से किया जाएगा। 

           इस कार्यक्रम में एनडीएमसी द्वारा कनॉट प्लेस, नेहरू प्लेस,लोदी गार्डन और तालकटोरा गार्डन तथा डीडीए द्वारा द्वारका,रोहिणी और खुरेजी में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। नाइक ने कहा कि इन कार्यक्रमो के अतिरिक्त प्रमुख योग संगठनो द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2017 के अवसर पर दिल्ली के साथ-साथ देश के कई अन्य भागो और विदेशो में भी कार्यक्रमो का आयोजन किया जाएगा। नाइक ने कहा कि केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय, विभाग और उनसे संबंधित संगठन योग दिवस को बड़े समारोह के रूप में मनाने की योजना बना रहे हैं। इसके साथ-साथ राज्य सरकारो ने भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अनेक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।

             इसके साथ ही एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, प्रमुख शैक्षणिक संस्थान, रक्षा बल, अर्द्धसैनिक बल, व्यवसायिक संगठन भी योग दिवस समारोह में भागीदारी करेंगे। केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येस्सो नाइक ने कहा कि केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद(सीसीआरवाईएन)देश के लगभग सभी जिलो में सरकारी और निजी संगठनो के सहयोग से एक माह के निशुल्क योग शिविर का आयोजन कर रही है। इस संबंध में प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 मई, 2017 से प्रारंभ हो चुका है। नाइक ने कहा कि आयुष मंत्रालय देश भर में विशेष रूप से वर्ष भर योग गतिविधियो के संचालन के लिए कुछ योग पार्क प्रारंभ करने की योजना बना रहा है। 

            इनका संचालन योग संबधी और अन्य संगठन स्वंय करेंगे। उन्होंने कहा कि कि इस वर्ष लगभग 100 योग पार्क प्रारंभ होने की आशा है और शीघ्र ही इनका ओर विस्तार किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, आयुष सचिव सी के मिश्रा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के समापन के बाद भी देश में वर्ष भर योग गतिविधियो का आयोजन कर योग के संबंध में दीर्धकालिक वातावरण का सृजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के मुख्य कार्यक्रम में लखनऊ और इसके निकट के योग संस्थान और संगठन भी सक्रिय भागीदारी करेंगे। 

             अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह की निंरतरता बनाए रखने के लिए केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने राज्यो की राजधानी में कुछ योग उत्सवो का आयोजन किया है। भविष्य में ऐसे ओर कार्यक्रमो का आयोजन किया जाएगा। आयुष मंत्रालय ने विदेशो में भारतीय दूतावासो में योग उत्सवो के आयोजन के लिए विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया है।

देश में 500 अमृत शहर 98 स्मार्ट, चार लाख करोड़ निवेश

            केंद्रीय शहरी विकास और सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गत तीन वर्ष में राष्ट्र निर्माण में लोग अधिक एकजुट हुए हैं और सरकार ने उन्हें निराशा से निकाल कर नई आशाओ के प्रति प्रेरित किया है। आज हर नागरिक को भारतीय होने पर गर्व महसूस होता है। 

         उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गो के लोगो को सशक्त कर देशवासियो की आशाओ और उम्मीदो के नए देश की मजबूत बुनियाद रखी गई है। केंद्र सरकार के तीन वर्ष पूरा होने के अवसर पर वेंकैया नायडू ने अनेक टवीट कर कहा कि मोदी सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल ने देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए पहले से अधिक निश्चय और एकजुट किया है। लोग निराशा से बाहर निकले हैं और देश नए क्षितिज की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 

             2014 में मिले जनादेश के अनुरूप रचना हो रही है। धन्यवाद टीम इंडिया तीन वर्ष के निर्णायक, ईमानदार, देखभाल करने वाले, विचारशील, प्रगतिशील, उत्तरदायी और सशक्त सुशासन ने लोगो की आशाओ और आकांक्षाओं से भरे नए भारत की बुनियाद रखी है। गांव, गरीब, किसान, युवा, मजदूर, महिला, अनुसूचित जाति और जनजाति और महिलाओ को सशक्त किया गया है और देश और देशवासियो के सामर्थ्य की शुरूआत हुई है। मोदी सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल ने हर नागरिक को भारतवासी होने पर गर्व का अनुभव हुआ है। स्वंय और नेतृत्व पर विश्वास पुन स्थापित होने से देश विकास की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करेगा। 

           केंद्रीय शहरी विकास मंत्री नायडू ने ट्वीट कर कहा कि तीन वर्षों के शहरी सुधार कार्यक्रमो ने पुनरुत्थानशील शहरी भारत के निर्माण के लिए शहरो और राज्य सरकारो में नया जोश भरा है। एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे शहर उन्नत शहरी जीवन की आशा का संचार करते हैं। धन्यवाद टीम इंडिया। पहली बार 500 अमृत शहर और 98 स्मार्ट शहरो के पास शहरी आधारभूत ढांचे और जीवन स्तर में बदलाव के लिए पांच वर्ष की कार्ययोजना है। गत तीन वर्षों में शहरी आधारभूत ढांचे में सुधार के लिए चार लाख करोड़ रूपए से अधिक के निवेश को अनुमति प्रदान की गई है।

Thursday, 25 May 2017

स्‍वीडन के अंतरिक्ष क्षेत्र प्रमुख की डॉ.जितेन्‍द्र सिंह से मुलाकात

             स्‍वीडन के अंतरिक्ष क्षेत्र के प्रमुख पीटर एगार्डट ने पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्‍द्र सिंह से मुलाकात की।

           डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने पीटर एगार्डट ने वर्तमान में चल रहे विभिन्‍न साझा कार्यक्रमों के बारे में बातचीत की जिन्‍हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम (इसरो) और स्‍वीडिश नेशनल स्‍पेस बोर्ड (एसएनएसबी) द्वारा संयुक्‍त रूप से संचालित किया जा रहा है। दोनों देशों के बीच तीन दशकों से चले आ रहे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहयोग के बारे में चर्चा करते हुए डॉ. सिंह ने एगार्डट को बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों ने नई ऊंचाइयों को छुआ है, जिसकी प्रशंसा अमेरिका और रूस ने भी की है। 

            उन्‍होंने खुलासा किया कि मंगलयान द्वारा प्राप्‍त की गई तस्‍वीरों को अब नासा द्वारा प्रयोग किया जा रहा है। हाल में ही दक्षिण एशियाई उपग्रह को छोड़ा गया है जो इस क्षेत्र के देशों को महत्‍वपूर्ण जानकारियां उपलब्‍ध करायेगा। उन्‍होंने बताया कि वर्तमान सरकार के नेतृत्‍व में कई तरह के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को शुरू किया गया है जिनमें ढांचागत विकास परियोजनाएं और कृषि क्षेत्र की योजनाएं शामिल हैं।

          डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने स्‍वीडिश सरकार के उस कदम की प्रशंसा की जिसमें वहां की सरकार ने स्‍वीडिश नेशनल स्‍पेस बोर्ड (एसएनएसबी) के उच्‍च स्‍तरीय प्रतिनिधिमंडल को पिछले वर्ष जनवरी में इसरों में भेजा था।इस प्रतिनिधि मंडल का लक्ष्‍य उपग्रह नेवीगेशन, भू-केन्‍द्रों का उपयोग तथा वायुमंडीय अनुसंधान के माध्‍यम से अन्‍वेषण के नये क्षेत्रों के बारे में जानकारी हासिल करना था। पीटर एगार्डट ने डॉ. जितेन्‍द्र सिंह के शानदार स्‍वागत की प्रशंसा करते हुए कहा कि अंतरिक्ष कार्यक्रमों को और अधिक व्‍यापक बनाने की जरूरत है। उन्‍होंने डॉ. जितेन्‍द्र सिंह को स्‍वीडन आने का निमंत्रण भी दिया।

अफ्रीकी विकास बैंक का भारत को धन्यवाद

          अफ्रीकी विकास बैंक के अध्यक्ष अकिन्विमी एडिसिना ने गुजरात के गांधीनगर में आयोजित बैंक की वार्षिक बैठक के परिणामों पर खुशी व्यक्त की।

       गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बैंक के अध्यक्ष ने बैंक की वार्षिक बैठक की सफलता के लिए भारत और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद किया। एडिसिना ने कहा कि बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, बिजली मंत्री पीयूष गोयल और अन्य मंत्रियों के साथ उनकी बैठक काफी उपयोगी थी। उन्होंने कहा कि इन सभी बैठकों से बिजली, कृषि (खाद्य सुरक्षा), कनेक्टिविटी (परिवहन), औद्योगिकीकरण (कौशल विकास) और स्वास्थ्य के क्षेत्र से संबंधित 5 एस में बैंक के नए एजेंडे में पर्याप्त योगदान की संभावना है। 

          एडिसिना ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अफ्रीका के विकास के मुख्य गलियारे के लिए भारत और जापान के उल्लेख किए जाने से वह काफी खुश हैं और उन्हें विश्वास है कि इससे अफ्रीका में विकास की गति बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंक अफ्रीकी युवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने और भविष्य की तकनीकों में निवेश के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा कि अफ्रीका में गरीबी से निपटने के लिए वह चाहते हैं कि युवा कृषि संबंधी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर योगदान करें।

            बैंक के अध्यक्ष ने कहा कि वह फिल्मों के माध्यम से भी अफ्रीका के विकास की संभावनाएं देखते हैं। बॉलिवुड अफ्रीकी युवाओं को कृषि आदि के बारे में जागरूक करने में अहम योगदान दे सकता है। एडिसिना ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रोपानी और बैठक को सफल बनाने में अपना योगदान देने वाले सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद किया। बेनिन एवं सेनेगल के अध्यक्ष, कोट डी आइवायर के उपाध्यक्ष, अफ्रीकी संघ के महासचिव, अफ्रीकी संघ आयोग के आयुक्त और गुजरात के मुख्यमंत्री, राज्य के विभिन्न मंत्रियों के अलावा कई गणमान्य लोग इस मौके पर उपस्थित थे।

अफ्रीकी देशों में 6,40,000 सौर पंप

              केन्द्रीय बिजली, कोयला, खान तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) ऊर्जा सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने में एक अहम माध्यम के रूप में भूमिका अदा कर सकता है। 

     इससे एसडीजी में निर्धारित किए गए वैश्विक ऊर्जा पहुंच लक्ष्य को वर्ष 2030 से पहले हासिल करने में भी मदद मिल सकती है। वह कल अहमदाबाद में अफ्रीकी विकास बैंक (एफडीबी) की 52वीं वार्षिक बैठक के मौके पर फ्रांस और भारत द्वारा शुरू किए गए ‘स्केलिंग सौर मिनी ग्रिड’ के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। आईएसए फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले अफ्रीकी देशों में 6,40,000 सौर पंप लगाने, 56 मेगावाट मिनीग्रिड स्थापित करने और 5400 सौर यांत्रिकी की व्यवस्था करने के लिए भारत की विभिन्न कंपनियों से इच्छा की अभिव्यक्ति प्राप्त हुई है। अफ्रीकी देशों में विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए भारत सरकार 10 बिलियन अमरीकी डॉलर का ऋण मुहैया कराने के प्रतिबद्ध है।

              इस अवसर पर पीयूष गोयल ने मज़बूत भारत-अफ्रीका सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र कम लागत एवं अभिनव वित्तपोषण मॉडल, जोखिम न्यूनीकरण, ऊर्जा पार्कों की मदद से व्यापक स्तर की उर्जा परियोजनाओं की स्थापना आदि के संबंध में एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि भारत ने सौर शुल्क के मामले में ग्रिड समानता हासिल कर ली है। पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि स्केलिंग सोलर मिनीग्रिड आईएसए के सभी उद्देश्यों के साथ मिलकर काम करेगा। 22 अप्रैल 2016 को शुरू हुए कृषि उपयोग के लिए स्केलिंग सौर अनुप्रयोग और स्केल पर किफायती वित्त नामक दो कार्यक्रम वर्तमान अस्तित्व में हैं। 

           इन कार्यक्रमों के अतंर्गत मुख्य गतिविधियों में छोटे ग्रिडों का डिजाइन और उनकी तैनाती, समान मानकों को अपनाना, कुल मांग, वैश्विक ऋण वृद्धि और जोखिम कम करने वाले तंत्र को स्थापित करने में सहायता करना, मिनी ग्रिड के लिए मांग और लागतों की आवश्यकता का आकलन, उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक भुगतान मॉडल की पहचान / विकसित करना आदि शामिल हैं।

          कोमरोस गणराज्य के उप राष्ट्रपति अहमद सइद हसैनी जाफर ने अपने सम्बोधन में आईएसए द्वारा किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करते हुए कहा कि अफ्रीका सौर संसाधन संपन्न क्षेत्र है और सौर ऊर्जा में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकता है। आईएसए का तीसरा कार्यक्रम इनसुलर अथवा असंबद्ध बिजली ग्रिडों में सौर ऊर्जा को एकीकृत करने की चुनौतियों का समाधान करने का एक प्रयास है।

अक्षय ऊर्जा के लिए 2360 करोड़ के बांड

             प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अक्षय ऊर्जा के लिए 2,360  करोड़ रुयये के बांड जारी किए जाने हेतु अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। 2017-18 के दौरान भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (आईआरडीएए) के माध्यम से नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा बांड जारी किए जाएंगे। 

     सौर पार्क, हर‍ित ऊर्जा गलि‍यारा, पवन परियोजनाओं के लिए उत्‍पादन-आधारित प्रोत्साहनों, सीपीएसयू और रक्षा सौर परियोजनाओं, सौर परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अंतर-निधि, छत के ऊपर सौर प्रणाली, ऑफ-ग्रिड/ग्रि‍ड व‍ितरि‍त अक्षय ऊर्जा, न‍िगमों और स्‍वायत्‍त न‍िकायों आद‍ि में नि‍वेश में इस कोष का इस्‍तेमाल किया जाएगा। इस तरह के समयबद्ध निवेश से अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। 

          साथ ही, इससे अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा। जुटाए गए संसाधनों को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता के विकास के लिए उपयोग किया जाएगा जिसके परिणामस्वरूप अतिरिक्त रोज़गार पैदा होंगे। सरकार ने एनएचएआई,पीएफसी, आरईसी, आईआरडीए और आईडब्ल्यूएआई के जरिये व‍ित्‍त वर्ष 2016-17 के बजट में 31,300 करोड़ रुपये के बांड जारी करके अतिरिक्त धन जुटाने की घोषणा की थी । 

        इसके हि‍स्‍से के बांड सरकार ने आईआरईडीए को वर्ष 2016-17 के दौरान नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से भारत सरकार द्वारा पूर्णत: कर योग्‍य बांड जारी करके 4000 करोड़ रुपये जुटाने की अनुमत‍ि दी थी। इसके बाद वर्ष 2016-17 में 2360 करोड़ रुपये शेष राशि जुटाए जाने के लिए मंजूरी हेतु नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने मंत्रिमंडल से संपर्क किया था।

 

गन्ना का लाभकारी मूल्य 255 रुपये प्रति क्विंटल तय

               प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक समिति ने 2017-18 के लिए गन्ना के लिए उचित और लाभकारी मूल्य 255 रुपये प्रति क्विंटल तय करने को मंजूरी प्रदान कर दी है।

           इससे बेसिक तौर पर 9.5 प्रतिशत की रिकवरी होगी जो 2.68 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रत्येक प्वांट पर 0.1 प्रतिशत की वृद्धि होगी। अनुमोदित एफआरपी चीनी सीजन 2016-17 के एफआरपी पर 10.87ऽ की वृद्धि को दर्शाता है। स्वीकृत मूल्य 2017-18 के दौरान किसानों से गन्ना खरीद के लिए लागू होगा। यह फैसला सरकार के किसानों उन्नमुखी होने को दर्शाता है जिसे चीनी उद्योग और गन्ना किसानों के हितों को देखते हुए लिया गया है। 

               चीनी उद्योग एक महत्वपूर्ण कृषि आधारित उद्योग है, जो लगभग 50 मिलियन गन्ना किसानों की आजीविका पर प्रभाव डालता है और खेत श्रम एवं ट्रांसपोर्टरों सहित विभिन्न अनुषंगी गतिविधियों में कार्यरत लोगों के अलावा इससे लगभग 5 लाख श्रमिकों को सीधे चीनी मिलों में काम मिलता है। किसानों को गन्ने का उचित मूल्य मिले इस लिए यह फैसला लिया गया है। राज्य सरकारों और अन्य हिस्सेदारों के साथ विचार-विमर्श के बाद कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर गन्ने का एफआरपी तय किया जाता है। अनुशंसित एफआरपी को विभिन्न कारकों जैसे कि उत्पादन की लागत, समग्र मांग-आपूर्ति की स्थिति, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों, अंतर-फसल की कीमत समानता, प्राथमिक उप-उत्पादों के व्यापार की कीमतों को ध्यान में रखते तय किया जाता है। 

                         आम मूल्य स्तर और संसाधन उपयोग दक्षता पर नए गन्ना मूल्य का संभावित प्रभाव पड़ता है। पिछले तीन वर्षों में गन्ना किसानों को मदद देने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनकी बकाया राशि का चीनी मिलों द्वारा भुगतान किया जाए भारत सरकार ने एसईएफएएसयू- चीनी उत्पादन और निर्यात को प्रोत्साहित करने की योजना शुरू की है। इन कदमों से, गन्ना मिलों के लिए फंड उपलब्ध हो सकेगा जिससे वे गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान आसानी से कर सकेंगे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसानों के बैंक खाते में सीधे पैसे आएंगे। इसकी वजह से, 2014-15 और 2015-16 के लिए किसानों के गन्ना मूल्य बकाया की मंजूरी क्रमश: 99.33ऽ और 98.5ऽ तक पहुंच गई है। पिछले पांच वर्षों की तुलना में इसी अवधि में 2016-17 के लिए गन्ना मूल्य बकाया सबसे कम है।

              मौजूदा चीनी सीजन की उत्पादन में कमी और किसी भी संभावित प्रतिकूल कीमत की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने शून्य सीमा शुल्क पर पांच लाख मिट्रिक टन चीनी के आयात को मंजूरी भी दी है। हालांकि, भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए आयात मात्रा को क्षेत्रीय प्रतिबंधों के साथ प्रतिबंधित कर दिया गया है ताकि इसे केवल वास्तव में कमी वाले क्षेत्रों में उपलब्ध कराया जाए और गन्ना किसानों के हित की भी रक्षा की जा सके।

होटल जनपथ अब शहरी विकास मंत्रालय की संपत्ति

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की केंद्रीय समिति ने होटल जनपथ, नई दिल्ली की संपत्ति को शहरी विकास मंत्रालय के स्थानांतरण को मंजूरी प्रदान कर दी है। होटल जनपथ शहर के मुख्य केंद्रीय स्थान में स्थित है।

           इस संपत्ति का इस्तेमाल सरकारी कार्यालय बनाने और इसी तरह के प्रयोजनों को लेकर विचार किया जा सकता है। इससे सरकार काम के लिए कार्यालयों लेने पर होने वाले खर्च में बचत होगी। परियोजना के कार्यान्वयन, भूमि के उपयोग इत्यादि का विवरण बाद में कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की एक समिति द्वारा लिया जाएगा। आईआईटी रुड़की की एक निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक होटल जनपथ के भवन ढांचे को अनुपयोगी पाया गया इसलिए इसका पुनर्निर्माण किया जाना जरूरी है। इस होटल की इमारत भूकंप के झटकों के लिहाज भी संवेदनशील पाई गई।

                भारत सरकार ने होटल और भारतीय पर्यटन विकास निगम लिमिटेड की संपत्ति में विनिवेश की प्रक्रिया शुरू की है। पेशेवर नजरिया के तहत होटलों में विनिवेश का फैसला किया गया है क्योंकि सरकार का मानना है कि किसी होटल का संचालन सरकार या उसके किसी संस्था का काम नहीं है। विनिवेश नीति के तहत, उचित मूल्य निर्धारण के बाद संबंधित राज्यों के साथ संयुक्त रूप से होटल-प्रॉपर्टी पट्टे-उप-पट्टे या राज्यों को संपत्ति वापस करने का निर्णय लिया गया है।

           इसके बाद राज्यों के इसका विकल्प होगा कि वे होटल व्यवस्था को उन्नत बनाने के लिए निजी क्षेत्र को शामिल करें या उनकी संपत्ति का किस तरह इस्तेमाल किया जाए। राज्यों ने अपने हिसाब इन विकल्पों का इस्तेमाल किया है और वे अपनी जरूरतों के हिसाब से आगे बढ़े हैं।

             विनिवेश प्रक्रिया के पहले चरण में, तीन होटलों, होटल लेक, व्यू अशोक,भोपाल, होटल ब्रह्मपुत्र अशोक, गुवाहाटी और होटल भरतपुर अशोक को शामिल किया गया है। होटल जनपथ, नई दिल्ली उसी सूची की अगली कड़ी है।

 

Wednesday, 24 May 2017

अफ्री़की देशों के लिए भारत की कपास तकनीकी

              प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारत और अफ्री़का के बड़े संपन्‍न लोग हैं। महात्‍मा गांधी, एक और गुजराती, ने अपने अहिंसक संघर्ष को धार भी दक्षिण अफ्री़का में ही दी। उन्‍होंने गोपाल कृष्‍ण गोखले के साथ 1912 में तंजान्‍या की यात्रा की। 

             प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारतीय मूल के अनेक नेताओं ने श्री नेवरेरे, श्री केन्‍याटा तथा नेल्‍सन मंडेला सहित अफ्री़की स्‍वतंत्रता संघर्षों के नेताओं को अपना पूरजोर समर्थन दिया। अफ्री़की स्‍वतंत्रता के लिए अपनी आवाज बुलंद की। स्‍वतंत्रता संघर्ष के पश्‍चात भारतीय मूल के अनेक नेताओं को तंजानिया और दक्षिण अफ्री़का की कैबिनेटों में नियुक्‍त किया गया। तंजानिया में भारतीय मूल के छ: तंजानिकी नागरिक वर्तमान में संसद सदस्‍य हैं। पूर्वी अफ्री़का की ट्रेड यूनियन के आंदोलन की शुरूआत माखन सिंह ने की थी। ट्रेड यूनियन की बैठकों में ही केन्‍या की स्‍वतंत्रता की पहली आवाज उठी। एम. ए. देसाई और पियो गामा पिन्‍टो ने केन्‍याई संघर्ष में सक्रिय रूप से भाग लिया। भारत के तत्‍कालीन प्रधान मंत्री पंडित नेहरू ने एक भारतीय संसद सदस्‍य को श्री केन्‍याटा के रक्षा दल का भाग बनने के लिए उस समय भेजा जब 1953 में कापेनगुरिया मुकदमे के दौरान श्री केन्‍याटा को बंदी बना दिया गया था। केन्‍याटा के रक्षा दल में भारतीय मूल के दो अन्‍य व्‍यक्ति भी थे। भारत अफ्री़का की स्‍वतंत्रता के लिए अपने समर्थन के प्रति दृढ़ था। नेल्‍सन मंडेला ने कहा था, जिसे में यहां उद्धत कर रहा हूं, ‘’भारत ने तब हमारी सहायता की, जब बाकी देश हमारे अत्‍याचारियों के साथ खड़े थे। जब अंतर्राष्‍ट्रीय परिषद के दरवाजे हमारे लिए बंद हो चुके थे, तब भारत ने हमारे लिए दरवाजे खोले। भारत ने हमारी लड़ाई में इस तरह साथ साथ दिया जैसे कि ये उसकी लड़ाई हो।‘’  

              अफ्री़की विकास बैंक (एएफडीबी) की वार्षिक बैठक के उद्घाटन में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि गत दशकों के दौरान हमारे रिश्‍तें काफी मजबूत हुए हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के पश्‍चात मैंने भारत की विदेशी और आर्थिक नीति में अफ्री़का को वरीयता दी है। 2015 एक ऐतिहासिक वर्ष था। इस वर्ष के दौरान आयोजित तीसरे भारत अफ्री़का शिखर वार्ता में सभी 54 अफ्री़की देशों ने भाग लिया, जिनके भारत के साथ राजनयिक संबंध थे। इसमें 51 अफ्री़की देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों या सरकार ने भाग लिया। 2015 से मैंने 6 अफ्री़की देशों का दौरा किया, अर्थात दक्षिण अफ्री़का, मोजाम्बिक, तनजांनिया, केन्‍या, मारीशस और सेशल्‍स। हमारे राष्‍ट्रपति ने तीन देशों को दौरा किया, यानी नाम्बिया, घाना और आइवरी कोस्‍ट। हमारे उपराष्‍ट्रपति ने सात देशों का दौरा किया, अर्थात मोरक्‍को, टुनिसिया, नाइजीरिया, माली, अल्‍जीरीया, रवांडा और उगांडा। मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि अफ्री़का में कोई ऐसा देश नहीं है जिसका पिछले तीन वर्षों के दौरान किसी भारतीय मंत्री ने दौरा नहीं किया है। मित्रों, मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है कि एक समय ऐसा था जब मोम्‍बासा और मुंबई के बीच हमारे केवल व्‍यापारिक और समुद्रीय संपर्क व सहयोग थे, पर आज हमारे काफी कुछ है। 

             प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि यह मुझे हमारे विकास में सहयोग की याद दिलाता है। अफ्री़का के साथ भारत की भागीदारी एक ऐसे सहयोग मॉडल पर आधारित है, जो अफ्री़की देशों की जरूरतों के लिए संगत है। यह मांग आधारित है और इसके लिए कोई शर्ते नहीं हैं। इस सहयोग की पहल के रूप में, भारत एग्जिम बैंक के जरिए ऋण उपलब्‍ध कराता है। भारत ने अब तक 44 देशों को 152 ऋण उपलब्‍ध कराए हैं, जिसकी कुल राशि लगभग 8 बिलियन डालर है। तीसरी भारत-अफ्री़का शिखर वार्ता के दौरान भारत ने आगामी पांच वर्षों के दौरान विकास योजनाओं के लिए 10 बिलियन डालर दिए। हमने 600 मिलियन डालर की अनुदान सहायता भी प्रदान की। भारत को अफ्री़का के साथ अपने शैक्षणिक और तकनीकी संबंधों पर गर्व है। अफ्री़का के 13 वर्तमान या पूर्व राष्‍ट्राध्‍यक्षों, प्रधान मंत्रियों और उप-राष्‍ट्रपतियों ने भारत में शैक्षणिक या प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रतिभागिता की है। अफ्री़का के 6 वर्तमान या पूर्व सैन्‍य प्रमुखों को भारत की विभिन्‍न संस्‍थाओं में प्रशिक्षित किया गया है।

                   अफ्री़का के दो आंतरिक मंत्रियों ने भारतीय संस्‍थाओं में भाग लिया। भारत तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग लोकप्रिय कार्यक्रम के अंतर्गत, वर्ष 2007 से अब तक अफ्री़की देशों के 33 हजार से अधिक पदाधिकारियों को छात्रवृतियां प्रदान की गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि कौशल के क्षेत्र में हमारी सबसे अच्‍छी भागीदारी है ‘’सोलर मामाज़’’। प्रत्‍येक वर्ष 80 अफ्री़की महिलाओं को भारत में प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे सोलर पैनलों और सर्किटों में काम कर सकें। प्रशिक्षण के पश्‍चात जब वे अपने देश वापस जाती हैं तब वे अपने समुदाय को बिजली उपलब्‍ध कराने के लिए कार्य करती हैं। प्रत्‍येक महिला अपने देश लौटने पर 50 घरों को बिजली पहुंचाने के लिए जिम्‍मेदार होती है। महिलाओं के चयन के लिए आवश्‍यक शर्त यह है कि वे या तो पूर्ण रूप से अशिक्षित हों या थोड़ी बहुत शिक्षित हों। ये महिलाएं भारत में प्रशिक्षण के दौरान और अनेक कौशलों की भी जानकारी प्राप्‍त करती हैं, जैसे कि टोकरी बनाना, मधुमक्‍खीपालन और किचन गार्डिनिंग। 

             प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि हमने 48 अफ्री़की देशों को शामिल करते हुए टेली-मेडिशिन और टेली-नेटवर्क के लिए समूचे अफ्री़का ई-नेटवर्क परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया है। भारत में पांच अग्रणीय विश्‍वविद्यालयों ने अफ्री़की नागरिकों को सार्टिफिकेट, अंडर ग्रेजुवेट और पोस्‍ट ग्रेजुवेट कार्यक्रम प्रदान किए। भारत के बारह सुपर-सपेशियेलिटी अस्‍पतालों ने परामर्श और निरंतर चिकित्‍सीय शिक्षा प्रदान की। लगभग सात हजार छात्रों ने भारत में अपनी शिक्षा पूर्णं की। इसके अगले चरण की शुरूआत हम जल्‍दी करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि हम शीघ्र ही अफ्री़की देशों के लिए कपास तकनीकी सहायता कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे, जिसे वर्ष 2012 में आरंभ किया गया था। इस परियोजना का कार्यान्‍वयन बेनिन, बुरकिना फासो, चाड, मलावी, नाइजीरिया और उगांडा में किया गया था। अफ्री़का-भारत व्‍यापार गत 15 वर्षों में काफी ज्‍यादा बढ़ा है। पिछले पांच वर्षों के दौरान यह दुगुना हुआ है, जो बढ़कर 2014-15 में लगभग बहत्‍तर बिलियन अमेरिकी डालर पर था। वर्ष 2015-16 में अफ्री़का के साथ हमारा जिंस व्‍यापार अमेरिका से भी अधिक था।

            प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि अफ्री़का में विकास कार्यों को समर्थन देने के लिए भारत अमेरिका और जापान से भी बातचीत कर रहा है। मुझे अपनी टोकयो यात्रा के दौरान टोकयो के प्रधान मंत्री के साथ अपनी विस्‍तृत वार्ता अच्‍छी तरह याद है। हमने सभी देशों के लिए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर अपनी प्रतिबद्धता पर चर्चा की। हमारी संयुक्‍त घोषणा में हमने एशिया अफ्री़का ग्रोथ कोरिडोर का उल्‍लेख किया और अपने अफ्री़की भाईयों एवं बहिनों से आगे बातचीत जारी रखने का प्रस्‍ताव किया। भारतीय और जापानी अनुसंधानिक संस्‍थाओं ने एक विजन डॉक्‍यूमेंट प्रस्‍तुत किया है। इसे एक साथ प्रस्‍तुत करने के लिए मैं आरआईएस, ईआरआईए और आईडीई-जेटरो को उनके प्रयासों के लिए धन्‍यवाद देता हूं। इसे अंतिम रूप अफ्री़का के विद्वानों के साथ परामर्श कर दिया गया। मुझे विश्‍वास है कि विजन डॉक्‍यूमेंट को आगामी समय में बोर्ड के समक्ष प्रस्‍तुत किया जाएगा। हमारी सोच यह है कि अन्‍य इच्‍छुक साझेदारों के साथ भारत और जापन कौशल, स्‍वास्‍थय, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण तथा कनेक्टिविटी में संयुक्‍त पहलों की खोज करेंगे।

                     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भागीदारी मात्र सरकारों तक सीमित नहीं है। भारत का निजी क्षेत्र निवेश को लगातार बढ़ावा देने में सबसे आगे है। 1996 से लेकर 2016 तक भारत के विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेशों में अफ्री़का का योगदान लगभग 1/5  रहा है। भारत अफ्री़की महाद्वीप में निवेश करने वाले देशों में पांचवां सबसे बड़ा देश है। पिछले 20 वर्षों के दौरान भारत के निवेश 54 बिलियन डालर से भी अधिक थे, जिससे अफ्री़की नागरिकों के लिए रोजगार अवसर सृजित हुए। अंतर्राष्‍ट्रीय सौर संधि पहल, जिसकी शुरूआत नवंबर 2015, पेर‍िस में संयुक्‍त राष्‍ट्र जलवायु परिवर्तन सम्‍मेलन में हुई थी, के प्रति हम अफ्री़की देशों की प्रतिक्रिया से काफी प्रोत्‍साहित हैं। इस संधि को उन देशों के गठबंधन के रूप में देखा जा सकता है, जोकि सौर संसाधनों से समृद्ध हैं, ताकि उनकी विशेष सौर आवश्‍यकताओं की पूर्ति की जा सके। मुझे इस बात की खुशी है कि अनेक अफ्री़की देशों ने इस पहल को अपना समर्थन दिया है। 

               प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि नए विकास बैंक, जिसे आम रूप से ‘’ब्रिक्‍स बैंक’’ के रूप में जाना जाता है, के संस्‍थापक के रूप में, भारत ने दक्षिण अफ्री़का में क्षेत्रीय केंद्र की स्‍थापना की हमेशा ही हिमायत की है। यह अफ्री़की विकास बैंक सहित एनडीबी और अन्‍य विकास साझेदारों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। भारत अफ्री़की विकास फंड में 1982 में तथा अफ्री़की विकास बैंक में 1983 में शामिल हुआ। भारत ने बैंक की सभी समान्‍य पूंजी वृद्धियों में योगदान दिया है। हाल ही के अफ्री़की विकास फंड संपूर्ति के लिए भारत ने 29 मिलियन डालर गिरवी रखे हैं। हमने भारी ऋण से दबे गरीब देशों और बहुआयामी ऋण अवनयन योजनाओं में योगदान दिया है। इन बैठकों के साथ-साथ, भारत सरकार भारतीय उद्योग संघ की भागीदारी में एक सम्‍मेलन और संवाद का आयोजन कर रही है। भारत सरकार ने भारतीय वाणिज्‍य और उद्योग संघ के साथ एक प्रदर्शनी भी आयोजित की है। सम्‍मेलन और प्रदर्शनी में जिन मुख्‍य क्षेत्रों पर जोर दिया गया, उनमें कृषि से लेकर अभिनव तथा स्‍टार्ट-अप और अन्‍य विषय शामिल थे। इस कार्यक्रम का शीर्षक है ‘’अफ्री़का में संपदा सृजन के लिए कृषि में परिवर्तन’’। इसमें एक क्षेत्र ऐसा है जिसमें भारत और बैंक एक साथ सार्थक रूप से कार्य कर सकते हैं। इस सिलसिले में मैंने कपास तकनीकी सहायता कार्यक्रम का उल्‍लेख पहले ही किया है। यहां भारत में मैंने 2022 तक किसानों की आमदनी को दुगुना करने की मुहिम चलाई है जिसके लिए सतत रूप से प्रयास करने होंगे, जिनमें उन्‍नत फसल बीज और अधिकतम उत्‍पादन से लेकर फसल नुकसान कम करने तथा बेहतर विपणन बुनियादी ढांचा जैसे मुद्दे हैं। इस मुहिम पर चलते हुए भारत आपके अनुभवों से सीख लेने के लिए उत्‍सुक है। 

            प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि हमारे सम्‍मुख आज जो चुनौतियों हैं, वे एक जैसी हैं, जैसे कि हमारे किसानों और गरीबों का उत्‍थान, महिलाओं का सशक्तिकरण, हमारे ग्रामीण समुदायों के लिए वित्‍त से पहुंच सुनिश्चित करना तथा बुनियादी ढांचा खड़ा करना। हमें ये कार्य वित्‍तीय सीमाओं के अंतर्गत ही करने हैं। हमें मैक्रो-इकनोमिक स्थिरता को कायम रखना है ताकि महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके और हमारा भुगतान-शेष (बैलेंस ऑफ पेमेंट) संतुलित रहे। इन समस्‍त मुद्दों पर अपने अनुभव साझा कर हम काफी कुछ हासिल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कम-नकदी अर्थव्‍यवस्‍था की हमारी पहल में हमने उन सफल पहलों से काफी कुछ सीखा है, जो केन्‍या जैसे अफ्री़की देश ने मोबाइल बैंकिंग के क्षेत्र में की थीं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले तीन वर्षों में सभी मैक्रो-इकनोमिक सूचकांकों में भारत की स्थिति में सुधार आया है। राजकोषीय घाटा, भुगतान-शेष (बैलेंस ऑफ पेमेंट) घाटा तथा महंगाई कम हुई है। जीडीपी विकास दर, विदेशी मुद्रा भंडार तथा सार्वजनिक पूंजी निवेश बढ़ा है। इसके साथ-साथ, हमने विकास में भी काफी अच्‍छी उन्‍नति की है।

                   प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि अफ्री़की विकास बैंक के अध्‍यक्ष जी, हमें यह पता चला है कि आपने हमारे हालिया कदमों को अन्‍य विकासशील राष्‍ट्रों के सम्‍मुख पाठ्य पुस्तकों के रूप में प्रस्‍तुत किया है और हमें विकास पथ-प्रदर्शक कहा है। इस बात के लिए आपका धन्‍यवाद करते हुए, मुझे यह जानकार खुशी है कि आपने पूर्व में हैदराबाद में प्रशिक्षण लेते हुए काफी समय बिताया है। फिर भी, मैं यह कहता हूं कि मैं आने वाली अनेक चुनौतियों के प्रति सकेंद्रित रहूं। इस संदर्भ में मैंने सोचा कि मैं आपके साथ उन कार्यनीतियों को साझा कर सकूं, जिनका उपयोग हमने पिछले 3 वर्षों में किया है। गरीबों को मूल्‍य रियायतों के माध्‍यम से अप्रत्‍यक्ष रूप से सब्सिडी देने के बजाय, हमने उन्‍हें प्रत्‍यक्ष रूप से सब्सिडी देकर काफी राजकोषीय बचतें की हैं। केवल कुकिंग गैस में ही हमने तीन वर्षों में 4 बिलियन डालर की बचत की है। इसके अलावा, मैंने देश के संपन्‍न नागरिकों से अपनी गैस सब्सिडी स्‍वैच्छिक रूप से छोड़ने की अपील की थी। ‘गिव इट अप’ अभियान के तहत हमने यह वायदा किया था कि इस बचत का उपयोग हम किसी गरीब परिवार को गैस कनेक्‍शन देने के लिए करेंगे। यह जानकर हैरानी होगी कि इस अपील से 10 मिलियन से अधिक भारतीय नागरिकों ने अपनी गैस सब्सिडी स्‍वैच्छिक रूप से छोड़ दी। 

                बचतों के कारण हमने एक कार्यक्रम आरंभ किया है कि हम 50 मिलियन गरीब परिवारों को गैस कनेक्‍शन देंगे। इस दिशा में 15 मिलियन कनेक्‍शन पहले ही दिए जा चुके हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में कायांतरण होता है। इससे उन्‍हें लकड़ी जैसे ईधन के साथ खाना पकाने के दौरान स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी खतरों से मुक्ति मिलती है। इससे पर्यावरण भी परिरक्षित रहता है और प्रदूषण कम होता है। मैं जो ‘’रिफार्म टू ट्रांसफोर्म : जीवन-यापन में बदलाव लाने के लिए मिश्रित कार्य’’ की बात कहता हूं, उसका यह एक उदाहरण है। पूर्व में किसानों के लिए अपेक्षित कुछ सब्सिडीयुक्‍त यूरिया को गैर-कृषि कार्यों, जैसे कि रसायनों के उत्‍पादन के लिए इस्‍तेमाल करने हेतु अवैध रूप से डायवर्ट कर दिया जाता था। हमने यूरिया की सर्वव्‍यापी नीम-कोटिंग की शुरूआत की। इससे उर्वरक का डायवर्जन नहीं किया जा सकता है। इस दिशा में हमने न केवल काफी वित्‍तीय बचतें की हैं, बल्कि अध्‍ययनों में यह पाया गया है कि नीम कोटिंग से उर्वरक की प्रभावकारिता भी बढ़ी है।

ऑस्ट्रेलिया की तीन प्रतिमाओं की भारत में प्रदर्शनी

           केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ महेश शर्मा ने राष्ट्रीय संग्रहालय, जनपथ, नई दिल्ली में "ऑस्ट्रेलिया से तीन प्रतिमाओं की वापसी" प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। 

         इस प्रदर्शनी का आयोजन ऑस्ट्रेलिया से भारत में पत्थर की तीन प्रतिमाओं (बैठे हुए बुद्ध, बुद्ध के भक्‍त पूजा करने वाले और देवी  प्रत्‍यंगिरा) की सुरक्षित वापसी की सुरक्षित वापसी के अवसर पर किया गया। इन प्रतिमाओं को ऑस्ट्रेलिया कला संग्रहालय ने वर्ष 2007 में नैन्सी वीनर से न्यूयॉर्क में और वर्ष 2005 में आर्ट ऑफ़ द पास्ट से  न्यूयॉर्क में खरीदा था।

              डॉ महेश शर्मा को ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में ऑस्ट्रेलिया कला संग्रहालय (एनजीए) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भारत से चोरी की गई और बाद में तस्‍करी कर भारत से बाहर भेजी गई इन तीन प्राचीन कलाकृतियों को सीनेटर मिच फिफ्ल्ड द्वारा औपचारिक रूप से सौंपा गया था। इन तीनों प्राचीन कलाकृतियों को ऑस्ट्रेलिया कला संग्रहालय द्वारा अनजाने में अधिग्रहित किया गया। डॉ महेश शर्मा ने इस अवसर पर डॉ सत्यवृत्त त्रिपाठी द्वारा लिखित पुस्‍तक ' वॉर पेंटिंग्स ऑफ द इरिजि़स्‍टबल जाट किंग सूरजमल' का विमोचन किया।

          'स्‍वच्‍छता अभियान पर एक ऐप' का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति सचिव एन.के. सिन्हा, राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक, बी.आर. मणि और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

 

अब स्‍वच्‍छ भारत एप

            केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डॉ महेश शर्मा ने राष्ट्रीय संग्रहालय में ‘स्‍वच्‍छ भारत एप’ का शुभारंभ किया।

             स्‍वच्‍छ भारत का एप का मुख्‍य उद्देश्‍य लोगों को स्‍वच्‍छ भारत अभियान में भागीदारी करने के लिए प्रोत्‍साहित करना है। वर्तमान में यह एप एंड्रायड मोबाइल फोन के लिए उपलब्‍ध है जिसे गूगल प्‍ले स्‍टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। जब आप किसी स्‍मारक या संग्रहालय के निकट होंगे तो आपको स्‍वच्‍छ अभियान के संबंध में संदेश प्राप्‍त होगा और यह आपसे मौजूद  कूड़े की रिपोर्ट करने के लिए कहेगा। आपको सिर्फ अपने मोबाइल उपकरण के ब्‍लूटूथ का प्रयोग करना है। अगर आपके फोन में यह एप नहीं है तब भी स्‍वच्‍छ भारत अभियान के बारे में गूगल द्वारा आपको संदेश दिया जाएगा और एप लागू करने के लिए लिंक प्रदान किया जाएगा। एक बार एप इस्‍तेमाल करने के बाद यह आपसे कूड़े की फोटो लेने, संदेश लिखने और उसे भेजने के लिए कहेगा।

         इसे संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा। इस एप की निगरानी संस्‍कृति मंत्रालय द्वारा की जाएगी और यह नागरिकों में स्‍वच्‍छता के महत्‍व को जागृत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

Tuesday, 23 May 2017

देश में निर्मित उत्‍पादों को बढ़ावा

            सरकार विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता को कम करने और स्‍वदेशी रक्षा क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। यह बात रक्षा राज्‍य मंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने भारतीय वायुसेना (आईएएफ) भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा संयुक्‍त रूप से आयोजित एक सम्‍मेलन के दौरान कही।

          डॉ. भामरे ने कहा, ‘हमने एक नई खरीद श्रेणी को शामिल किया है जिसका नाम बाई इंडियन-आईडीडीएम (स्‍वदेशी डिजाइन, विकसित की गई और निर्मित) है, यह खरीद के लिए सबसे पसंदीदा श्रेणी होगी और यह देश में निर्मित उत्‍पादों को बढ़ावा देने में सहायक होगी तथा इससे रक्षा अनुसंधान और विकास में महत्‍वपूर्ण निवेश आयेगा।’ रक्षा उद्योग के साथ भागीदारी पर बोलते हुए डॉ. भामरे ने बताया, ‘‘भारत सरकार एक लंबी अवधि के लिए निजी उद्योग व क्षमता तैयार करने के लिए ‘सामरिक साझेदारी’ मॉडल तैयार करने की दिशा में कार्य कर रही है।’’ 

             सरकार ने सामरिक भागीदारों का चयन करने के लिए एक टास्‍क फोर्स का गठन किया था जिसमें विभिन्‍न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने मानदंडों का निर्धारण करने के लिए अपनी सुझाव दिये। टास्‍क फोर्स द्वारा प्रस्‍तुत की गई रिपोर्ट की सरकार ने जांच की है और जल्‍द ही सामरिक भागीदारों का चयन करने के लिए नीति जारी की जायेगी। उद्योग जगत की चिंताओं पर मंत्री ने कहा कि भारतीय निजी क्षेत्र के लिए विनिमय दर को सुरक्षा के साथ लागू किया गया है। उत्‍पादक शुल्‍क और कस्‍टम शुल्‍क में बीपीएसयू को मिलने वाले छूट को समाप्‍त कर दिया गया है। संशोधित नीति के अनुसार, सभी भारतीय उद्योगों (निजी और सार्वजनिक) के लिए एक ही प्रकार की नीति और उत्‍पाद शुल्‍क रहेंगे।

             इससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के बीच समान अवसर सुनिश्चित होंगे। सरकार द्वारा ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए एक और कदम उठाया गया है। इस अवसर पर वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा ने भी संबोधित किया। इनके अलावा सीआईआई राष्‍ट्रीय रक्षा कमेटी के सदस्‍य प्रत्‍यूष कुमार तथा रक्षा मंत्रालय एवं भारतीय वायु सेना के अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

Monday, 22 May 2017

64 लाख नए बीपीएल परिवारों को गैस कनेक्शन

           देश में सब्सिडी छोड़ने की पहल का डंका खूब गूंजा। 1.05 करोड़ परिवारों ने स्वैच्छिक रूप से एलपीजी सब्सिडी को त्याग दिया, ताकि सब्सिडी का लाभ ज़रूरतमंद उपभोक्ताओं को मिल सके। 

        वित्त वर्ष 2015-16 में करीब 64 लाख नए बीपीएल परिवारों को गैस कनेक्शन जारी किए गए। वाराणसी को दो वर्षों में पाइप लाइन के जरिए रसोई गैस मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा महत्वाकांक्षी गंगा ऊर्जा योजना की शुरुआत की गई। यह योजना वाराणसी के बाद, झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लोगों की ज़रूरतों को भी पूरा करेगी। यह योजना पांच राज्यों के 40 ज़िलों और 26 गांवों की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करेगी। 

            यह योजना तीन बड़े उर्वरक संयंत्रों के पुनरुत्थान के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी। यह 20 से अधिक शहरों में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देगी और 7 शहरों में गैस नेटवर्क का विकास करने में मदद करेगी, जिसके परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में नौकरियों की संभावना बढ़ेगी। पिछले कुछ सालों के दौरान देश में रिफाइनिंग क्षमता में काफी अधिक वृद्धि हुई है। पारादीप रिफाइनरी के चालू से वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान रिफाइनिंग क्षमता में 15 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) की क्षमता का विस्तार हुआ है। इस वृद्धि के साथ, अब रिफाइनिंग क्षमता 230.066 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष पर पहुंच गई है।

            सरकार ने घरेलू स्तर पर मांग को पूरा करने के लिए देश में तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई नीतिगत पहल और प्रशासनिक उपाय किए हैं। सरकार ने विभिन्न चरणों के अंतर्गत 01 अप्रैल 2017 से देशभर में बीएस-4 ऑटो ईंधन के कार्यान्वयन को अधिसूचित कर दिया है। यह निर्णय लिया गया है कि देश बीएस -4 से सीधे बीएस -6 ईंधन के मानकों पर पहुंचेगा और बीएस -6 मानकों को 1 अप्रैल, 2020 से लागू कर दिया जाएगा। इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) ने विशाखापट्टनम, मैंगलोर और पादुर में तीन स्थानों पर 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) की भंडारण क्षमता के साथ स्ट्रेटेजिक क्रूड ऑयल के भंडारण का निर्माण किया है। 

             सरकार ने राष्ट्रीय तेल कम्पनियां ओएनजीसी और ओआईएल द्वारा किए गए 69 हाइड्रोकार्बन खोजों से मुनाफा कमाने और धन अर्जित करने के लिए खोजी लघु क्षेत्र नीति को भी मंजूरी दी है। ये वही परियोजनाएं हैं, जहां पृथक स्थान, भंडारण का छोटा आकार, उच्च विकास लागत, तकनीकी बाधाएं, वित्तीय व्यवस्था आदि विभिन्न कारणों से कई वर्षों से धन अर्जित नहीं किया जा सका है। यह गुवाहाटी, बोंगाइगांव और नुमालिगढ़ रिफाइनरी के विस्तार, नुमालिगढ़ में बायो-रिफाइनरी की स्थापना और राज्य में प्राकृतिक गैस, पीओएल एवं एलपीजी पाइपलाइन के नेटवर्क को विकसित करने का प्रस्ताव करता है। हाइड्रोकार्बन विजन डॉक्यूमेंट 2030, पूर्वोत्तर में तेल और गैस क्षेत्र में वर्ष 2030 तक 1.3 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव करता है।

प्‍याज के मूल्‍यों में गिरावट

           केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह के संज्ञान में लाया गया है कि ओड़िशा राज्‍य में प्‍याज के मूल्‍यों में भारी गिरावट आई है। मण्‍डियों में प्‍याज 3-4 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है, जिससे कि किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

           सिंह ने कहा कि ओड़िशा राज्‍य सरकार ने आज तक प्‍याज की खरीद करने के लिए बाजार हस्‍तक्षेप योजना के तहत कोई भी प्रस्‍ताव भारत सरकार के समक्ष प्रस्‍तुत नहीं किया है। सिंह ने जानकारी दी कि ऐसी स्‍थिति में किसानों को वाजिब मूल्‍य दिलाने के लिए भारत सरकार की एक योजना है जिसका नाम है बाजार हस्‍तक्षेप योजना । इस योजना के तहत अगर सामान्‍य वर्ष की तुलना में पैदावार में 10ऽ से ज्‍यादा की वृद्धि होती है या बाजार मूल्‍य में 10ऽ से ज्‍यादा गिरावट आती है तब राज्‍य सरकार के प्रस्‍ताव पर भारत सरकार उन जिन्‍सों का जिनके लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य का निर्धारण नहीं होता, उनको क्रय करने का आदेश देती है। 

          इस योजना के तहत राज्‍य और केन्‍द्र सरकार नुकसान का बोझा बराबर (50:50) वहन करते हैं। सिंह ने यह भी बताया कि इस योजना के तहत पिछले एक साल में कर्नाटक राज्‍य में सुपाड़ी, आंध्र एवं तेलंगाना में मिर्चा, आंध्र और तमिलनाडु में ऑयलपाम और उत्‍तर प्रदेश में आलू क्रय करने का अनुमोदन दिया गया है। हाल ही में उत्‍तर प्रदेश में इस योजना के तहत आलू की खरीद से बाजार मूल्‍य में भी वृद्धि हुई और किसानों को पैदावार लागत प्राप्‍त हुई है। 

             सिंह ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ओड़िशा राज्‍य सरकार किसानों को वाजिब दाम दिलाने में होने वाले वित्‍तीय बोझ को वहन नहीं करना चाहती। इसी कारण से शायद आज तक प्‍याज की खरीद करने के लिए बाजार हस्‍तक्षेप योजना के तहत कोई भी प्रस्‍ताव भारत सरकार के समक्ष राज्‍य सरकार ने प्रस्‍तुत नहीं किया है।

डॉ. हर्षवर्धन अब पर्यावरण मंत्री भी

            विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने यहां आईपी भवन में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री का पदभार ग्रहण किया। केन्‍द्रीय पर्यावरण राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे का आकस्मिक निधन हो गया था। 

             डॉ. हर्षवर्धन ने आईपी भवन के परिसर में स्‍वर्गीय अनिल माधव दवे की याद में एक पौधा लगाकर अपने कार्य की शुरूआत की। उन्‍होंने कहा कि वे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन का मं‍त्री पद पाकर अनुगृहीत हैं तथा स्‍वर्गीय अनिल माधव दवे को याद करते हुए कहा कि वे नदी संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति समर्पित थे। दवे पर्यावरण का संरक्षण बच्‍चों के लिए करना चाहते थे। इसमें बच्‍चों के प्रति उनका स्‍नेह दिखाई पड़ता है। दवे जी ने देश की नदियों, वनों तथा पारितंत्र के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किया। पर्यावरण के प्रति उनका यह समर्पण उन्‍हें एक महान पर्यावरणविद बनाता है। 

                  डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अनिल माधव दवे कहा करते थे, ‘यदि मैं कर सकता हूं तो हम सभी कर सकते हैं।’ डॉ. हर्षवर्धन ने मंत्रालय के सचिव व अन्‍य अधिकारियों के साथ प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया। पिछले तीन वर्षों में मंत्रालय द्वारा किये गये कार्यों की प्रगति तथा प्रमुख कार्य योजनाओं की समीक्षा की गई। उन्‍होंने माना कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के मामले में कई जटिल समस्‍याएं हैं, जिसके लिए समन्वित व ठोस प्रयासों की आवश्‍यकता है। 

                  उन्‍होंने इस तथ्‍य पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में सरकार का प्रयास है कि पर्यावरण की चिंताओं को विकास की नीतियों और कार्यक्रमों से जोड़ा जाए, ताकि भारत के सतत विकास और प्रगति हेतु दोनों में संतुलन स्‍थापित किया जा सके। इसके लिए यह आवश्‍यक है कि मंत्रालय आधुनिक तकनीक को अंगीकृत कर मंजूरी देने की प्रक्रिया में तेजी लाए तथा नीतिगत प्रयासों को विकसित करे ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही तथा समय पर कार्य-निष्‍पादन में तेजी आ सके।
 

               मंत्री ने जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता संरक्षण, प्रदूषण की रोकथाम, चार ‘आर’  (रिड्यूस, रिकवर, रियूज, रिसाइकल) की अवधारणा के अंतर्गत अपशिष्‍ट प्रबंधन, जैव-पर्यटन, वानिकी तथा राज्‍यों को सीएएमपीए कोष प्रदान किये जाने पर विशेष ध्‍यान देने की बात कही। 

                  उन्‍होंने इस तथ्‍य को रेखांकित करते हुए कहा कि जल तथा वायु प्रदूषण पूरे देश के लिए विशेषकर दिल्‍ली तथा राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र हेतु चिंता का विषय है। मंत्रालय प्राथमिकता के साथ इस समस्‍या के निदान का प्रयास करेगा। उन्‍होंने आगे कहा कि जलवायु परिवर्तन तथा पेरिस समझौते हेतु भारत की प्रतिबद्धता मंत्रालय के समक्ष अन्‍य चुनौतियां हैं।

भारत की कृषि वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत

             केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के निर्देशन में तीन वर्ष में कृषि और किसानों की बेहतरी के लिए जो सतत प्रयास किए गये हैं उनके उत्साहजनक व सकारात्मक परिणाम  दिखने लगे हैं।  मोदी सरकार किसानों के कल्याण के लिए जिस मनोयोग से काम में जुटी है, इससे किसानों के जीवन में गुणात्मक सुधार आ रहा है।

             राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य दिया है जिसे हासिल करने के लिए कृषि मंत्रालय लगातार काम कर रहा है। सिंह ने ये बात मोदी सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कही। राधा मोहन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने देश के विकास के लिए इन तीन वर्षों में देश के सामने नई कार्यविधि, पारदर्शी कार्यशैली के नए प्रतिमान रचे हैं। सरकार ने समयबद्ध तरीके से प्रधानमंत्री जी के कुशल मार्गदर्शन में किसान कल्याण की योजनाओं के पूर्ण क्रियान्वयन के लक्ष्यों को मिशन मोड में परिवर्तित किया है। सुशासन के नये आयामों, नवाचारों एवं सुधारवादी दृष्टिकोण से एक आधुनिक और भविष्योन्मुख भारत की नींव हमारी सरकार ने रखी है। सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों के मन में देश की कृषि उन्नति के लिए की गई  नई पहलों के प्रति जागरूकता लाने में सफल हुई है। तीन वर्ष के कार्यकाल में किसानों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के जीवन स्तर में गुणात्मक परिवर्तन लाने का सतत् एवं सशक्त प्रयास किया है। 

                 केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान मंत्रालय द्वारा किया जाने वाला खर्च अधिकतर बजटीय प्रावधानों से कम रहता था। उदाहरण के लिए वर्ष 2011-12 में बजटीय प्रावधान रु 24,526 करोड़ था जबकि खर्च मात्र रु 23,290 करोड़ रहा। इसी तरह 2012-13 में बजटीय में 28,284 करोड़ था जबकि खर्च मात्र 24,630 करोड़ हुआ। वर्ष 2013-14 में बजटीय प्रावधान रु. 30,224 करोड़ था जबकि खर्च रु. 25,896 करोड़ हुआ। वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार में किसान हित में मंत्रालय द्वारा खर्च बजटीय प्रावधान से ज्यादा किया जा रहा है। उदाहरणस्वरूप 2016-17 में जहां बजटीय प्रावधान रु 45035 करोड़ था, वह संशोधित बजटीय आवंटन में यह बढकर रु 57503 करोड़ किया गया है।

                   मोदी सरकार द्वारा कृषि एवं किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए अधिक बजटीय आवंटन किया है। उदाहरणस्वरूप यूपीए सरकार के चार वर्ष यथा 2010-11 से 2013-14 के बजट में कुल रु 1,04,337 करोड़ का बजटीय प्रावधान कृषि क्षेत्र के लिए किया गया था, वहीं वर्तमान सरकार द्वारा 2014-15 से 2017-18 तक कृषि क्षेत्र को कुल 1,64,415 करोड़ रुपये आवंटित किए गये हैं जो कि 57.58 प्रतिशत अधिक है। राधा मोहन सिंह ने आगे कहा कि विगत तीन वर्षों के प्रारम्भिक दो वर्षों में कम मानसून में भी किसानों को सुरक्षा एवं विश्वास का संबल सरकार द्वारा दिया गया है। 

            स्वॅयल हैल्थ कार्ड का वितरण, सिंचाई सुविधाओं में विस्तार, कम लागत की जैविक खेती, राष्ट्रीय कृषि बाजार, बागवानी विकास, कृषि वानिकी, मधुमक्खी पालन, दुग्ध, मछली एवं अंडा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं विस्तार पर विशेष बल दिया गया है। सहकारी संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण में भी ज्यादा निवेश किया गया है। दलहन-तिलहन में आत्म-निर्भरता की ओर बढ़ने के लिए कई नई पहलें तीन वर्षों में प्रारम्भ की गयी हैं। सबसे कम प्रीमियम एवं विभिन्न जोखिमों को शामिल कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों को अभूतपूर्व सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है।

                 देश के सभी जिलों के लिए आकस्मिक योजना उपलब्ध कराए गए तथा सूखा एवं ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मिलने वाली राहत मानकों को बढ़ाकर सरकार ने अर्थव्यवस्था में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है। कहा कि मोदी सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में उन्नति एवं किसान कल्याण की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के द्वारा किसान सशक्तिकरण के लिए सतत् पहल एवं प्रयास के परिणाम दिखने लगे हैं। मोदी सरकार की कृषि में उपलब्धियां हैं। वर्ष 2016-17 में खादायान्न उत्पादन के पिछले सारे रिकार्ड टूट गये हैं। इस वर्ष  कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों की वृद्धि दर लगभग 4.4 प्रतिशत रही है।

·         2016-17 के दौरान तृतीय अग्रिम अनुमान के अनुसार देश में कुल खाद्यान्‍न का उत्‍पादन लगभग 273.38 मीलियन टन अनुमानित है जो वर्ष 2015-16 की तुलना में 8.67ऽ अधिक है। यहां यह भी उल्‍लेखनीय है कि खाद्यान्‍न का यह उत्‍पादन पिछले 5 वर्षों के औसत उत्‍पादन से भी 6.37ऽ अधिक है।·  2016-17 के दौरान दलहनों का कुल उत्‍पादन 22.40 मिलियन टन अनुमानित है जो अब तक का रिकार्ड उत्‍पादन होगा जो पिछले वर्ष 2015-16 से 37ऽ अधिक है। 16.05.2017 तक 725 लाख स्वॅयल हैल्थ कार्ड किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। नमूनों की जांच हो रही है। कार्ड छपाई का काम चल रहा है। आगामी तीन महीनों में शेष बचे किसानों का कार्ड उपलब्‍ध करा दिया जाएगा।

            वर्ष 2011-14 के दौरान जैविक खेती के तहत संचयी क्षेत्र 7.23 लाख हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2014-17 के दौरान 20 लाख हेक्टेयर हो गया है। अब तक राष्ट्रीय कृषि बाजार से 417 मंडियां जुड़ चुकी हैँ। 15.05.2017 तक 20,000 करोड़ रूपये के 84 लाख टन कृषि उत्‍पाद का कारोबार हो चुका है। 15.05.2017 तक 46 लाख किसानों, 90 हजार व्‍यापारियों और 46,411 कमीशन एजेंटों को प्‍लेटफार्म पर पंजीकृत किया जा चुका है। दूध का उत्पादन 2011-14 के दौरान 398.01 मिलियन टन हुआ था, जो कि 2014-17 के दौरान बढ़कर 465.5 मिलियन टन हो गया है। तीन वर्षों के उत्पादन विकास की वृद्धि दर 16.9ऽ रही है। वर्ष 2011-14 के दौरान अंडा उत्पादन 210.93 बिलियन था जो कि 2014-17 में बढ़कर 248.73 बिलियन हो गया। 

              तीन वर्षों के उत्पादन विकास की वृद्धि दर 17.92 ऽ रही है। वर्ष 2011-14 के दौरान मछली का उत्पादन 272.88 लाख टन था, जो कि 2014-17 के दौरान बढ़कर 327.74 लाख टन हो गया है। तीन वर्षों के उत्पादन विकास की वृद्धि दर 20.1ऽ रही है। वर्ष 2011-14 तक 223 किसान उत्पादक संगठन बने, जबकि 2014-17 तक 383 बनाये गये। वर्ष 2007-14 तक 6.7 लाख ज्वॉइंट लाइबिलीटी ग्रुप बनाकर 7 वर्ष में 6630 करोड़ राशि दी गई जबकि 2014-17 तीन वर्षों में 15.85 लाख समूह बनाकर 16,268 करोड़ की राशि दी गई। 

            मधुमक्खी पालन में 2011-14 तक 5.94 करोड़ खर्च किए गये जबकि 2014-17 तक 18.14 करोड़ खर्च किए गये। 205 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यू.पी.ए. के पांच वर्षों में राज्‍यों को राज्‍य आपदा अनुक्रिया कोष में 33,580 करोड रूपये स्‍वीकृत किए गये हैं। मोदी सरकार ने 5 वर्षों  के लिए 61,260 करोड रूपये आवंटित किए है। यू.पी.ए. सरकार के 2011-12 से 2013-14 के तीन साल के बीच राष्‍ट्रीय आपदा अनुक्रिया कोष में राज्‍यों को 9,099 करोड रूपये दिए गये। मोदी सरकार ने 2014-15 से 2016-17 के तीन वर्षों में राज्‍यों को 29,194 करोड दिये गये हैं, जबकि अभी इसके अलावा कर्नाटक, केरल एवं पुद्दूचेरी विचाराधीन है। 

            प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अन्‍तर्गत वर्ष 2016-17 में 8 लाख 40 हजार हेक्‍टेयर का रिकार्ड कवरेज सूक्ष्‍म सिंचाई के अधीन लाया गया है। राष्‍ट्रीय कृषि बीमा योजना अन्‍तर्गत सिर्फ खरीफ सीजन में 2011-14 के तीन साल में 6 करोड किसानों ने बीमा कराया। जिसमें 77 लाख गैर ऋणी किसान थे। जबकि 2014-17 के बीच 3 वर्ष में सिर्फ खरीफ सीजन में 9 करोड 47 लाख किसानों ने बीमा कराया जिसमें 2 करोड 61 लाख गैर ऋणी किसान है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आकर्षण के कारण खरीफ फसल में गैर ऋणी किसानों की संख्‍या में 238.96ऽ की वृद्धि हुई है तथा इसी तीन वर्ष में इसके पूर्व के तीन वर्षों की तुलना में रवी फसलों में भी गैर ऋणी किसानों की संख्या में 128.50ऽ की वृद्धि हुई है।

 ‘दी क्वें स्टा फोर ए वर्ल्डी विदआउट हंगर’ का लोकार्पण

                  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विख्‍यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम एस स्‍वामीनाथन के व्‍यक्तित्‍व पर लिखी गई पुस्‍तक शृंखला के दो भागों का लोकापर्ण किया। इस श्रृंखला का शीर्षक – एम एस स्‍वामीनाथन : दी क्‍वेंस्‍ट फोर ए वर्ल्‍ड विदआउट हंगर’ है। 

           इस अवसर पर अनेक केंद्रीय मंत्री और अन्‍य गणमान्‍य उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए प्रधानमंत्री ने उन क्षणों को याद दिलाया कि गुजरात के मुख्‍यमंत्री के कार्यकाल के रूप में उन्‍होंने प्रोफेसर स्‍वामीनाथन के साथ सलाह मशविरा करके मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड पहल की शुरूआत की थी। प्रोफेसर स्‍वामीनाथन की लगन और वचनबद्धता की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने उन्‍हें एक ‘किसान वैज्ञानिक’ बताया – मात्र ‘कृषि वैज्ञानिक’ की अपेक्षा वे किसानों के वैज्ञानिक थे। 

              प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रोफेसर स्‍वामीनाथन की विशेषताओं को जमीनी हकीकतों को यथार्थ धरातल से जोड़ती हैं। उन्‍होंने प्रोफेसर स्‍वामीनाथन की सादगी को भी सराहा। कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र की सफलता को पूर्वी भारत में विस्‍तार दिए जाने की आवश्‍यकता है और वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी गत उपायों को इसे यथार्थ रूप दिया जाना अपेक्षित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक पद्यतियों तथा पारंपरिक कृषि ज्ञान के सम्मिश्रण से सर्वोत्‍तम परिणाम प्राप्‍त किए जा सकते हैं। 

            कतिपय राज्‍यों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के प्रत्‍येक जिले की एक अपनी ‘कृषि पहचान,’ होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि इससे विपणन को बढ़ावा और औद्योगिक-क्‍लस्‍टरों की तर्ज पर कृषि-क्‍लस्‍टर का विकास करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लक्ष्‍य का उल्‍लेख किया और बताया कि इसके लिए अनेक महत्‍वपूर्ण क्षेत्र में लक्ष्‍य परक दृष्टिकोण अपनाये जाने की जरूरत है। उन्‍होंने इस बात संतोष प्रकट किया कि पिछली कृषि बीमा योजनाओं की अपेक्षा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को कृषक समुदाय बड़े पैमाने पर अंगीकार कर रहा है। 

         उन्‍होंने कहा कि इससे किसानों की जोखिम उठाने की सामर्थ्‍य बढ़ाने में मदद मिलेगी और नवाचार को ‘प्रयोगशाला से खेत’ तक पहुंचाने की प्रक्रिया आसान बनेगी। डॉ. एम एस स्‍वामीनाथन ने प्रधानमंत्री के उदगारों के प्रति धन्‍यवाद ज्ञापित किया और उनके दृष्टिकोण को सराहा। उन्‍होंने प्रौद्योगिकी और लोक नीति के बीच सामंजस्‍य के महत्‍व पर जोर डाला।

28 रेलवे स्‍टशनों पर नि:शुल्‍क वाई-फाई

            रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने यहां कुडाल रेलवे स्‍टेशन से कोंकण रेलवे के 28 रेलवे स्‍टेशनों पर वाई-फाई सुविधा का उद्घाटन किया। भारतीय रेलवे ने कोंकण रेलवे के 28 रेलवे स्‍टेशनों पर 24 घंटे नि:शुल्‍क टू एमबीपीएस पीयर टू पीयर वाई-फाई इंटरनेट बैंडविड्थ सुविधा के प्रावधान के लिए सिस्कोन-जॉयस्टर के साथ अनुबंध किया है। 

          सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप मैसर्स सिस्कोन-जॉयस्टर महाराष्ट्र राज्य में पुणे और मुम्बई के शैक्षणिक संस्थानों में जॉयस्पॉट ब्रांड वाई-फाई उपलब्‍ध करा रहे हैं। अब कोंकण मार्ग के ग्रामीण क्षेत्रों में नि:शुल्‍क वाई-फाई बैंडविड्थ उपलब्‍ध कराने के लिए अपनी नैगमिक सामाजिक जिम्‍मेदारी (सीएसआर) गतिविधि के एक हिस्‍से के रूप में अब यह जिम्‍मेदारी उठा रहे हैं। जॉयस्पॉट नि:शुल्क वाई-फाई मोबाइल ऐप असीमित अपलोड के साथ 2 एमबीपीएस हाई स्पीड वायरलेस इंटरनेट उपलब्‍ध कराता है। नि:शुल्‍क वाई-फाई इंटरनेट बैंडविड्थ को कोंकण रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध कराया गया है।

            कोलाड, माणगांव, वीर, करंजड़ी, विनयेर, दिवाणख़ावती, खेड, अंजनी, चिपलुन, कामथे, सावर्दा, अरावली रोड, संगमेश्वर, उक्शी, भोके, रत्नागिरि, निवासी, अडावाली, विलावेड़, राजापुर रोड, वैभववाडी रोड, नंदगाव रोड, कंकावली, सिंधुदुर्ग, कुडाल, ज़ाराप, सावंतवाड़ी रोड, मदुरे रेलवे स्‍टेशन पर 24 घंटे नि:शुल्‍क वाई-फाई है। पहले चरण में कोलाड से मदुरे के बीच 28 स्टेशनों पर असीमित नि:शुल्‍क वाई-फाई सुविधा 2 एमपीएसकी पीयर टू पीयर स्‍पीड के साथ उपलब्‍ध कराई जाएगी। यह प्रणाली बड़े स्टेशनों पर लगभग 300 उपयोगकर्ताओं और छोटे स्टेशनों पर लगभग 100 उपयोगकर्ताओं को यह सुविधा उपलब्‍ध कराएगी। 

          यह सुविधा यात्री जनता और पर्यटकों को आवश्‍यक जानकारी प्राप्‍त करने में मदद करेगी और यात्री रेलवे स्‍टेशनों पर रेल की प्रतीक्षा करते हुए अपने समय का लाभकारी उपयोग कर सकेंगे। कोंकण रेलवे सदैव अपने यात्रियों को बेहतर यात्री सुविधाएं उपलब्‍ध करवाने में विश्‍वास करती है ताकि उनकी यात्रा आरामदेय रहे।