Wednesday, 27 December 2017

अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं का कौशल विकास

      नई दिल्‍ली। अल्पसंख्यक मंत्रालय ने अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित युवाओं के कौशल विकास हेतु विशेष योजनाएं प्रारंभ की हैं।

    सीखो और कमाओ : यह नियोजन से जुड़ी अल्पसंख्यकों हेतु कौशल विकास योजना है जिसका उद्देश्य विभिन्न आधुनिक/परंपरागत कौशलों में अल्पसंख्यक युवाओं के कौशल को उन्नयित करना है जो उनकी अर्हता, मौजुदा आर्थिक प्रवाह तथा बाजार संभावना पर निर्भर है जिससे वे उपयुक्त रोजगार प्राप्त कर सकते हैं या वे स्वरोजगार के लिए अच्छी तरह कुशल बन सकते हैं।  
    इस योजना के तहत कम से कम 75 प्रतिशत प्रशिक्षुओं का नियोजन सुनिश्चित किया गया है जिसमें से कम से कम 50 प्रतिशत नियोजन संगठित क्षेत्र में होगा। योजना का कार्यान्वयन केरल सहित पूरे देश में चुनिंदा परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (पीआईएज) के माध्यम से किया जाता है। पिछले तीन वर्षों के दौरान केरल राज्य से 1700 अल्पसंख्यक युवाओं को पीआईएज ने प्रशिक्षित किया है।
    परंपरागत कलाओं-शिल्प में विकास के लिए कौशल और प्रशिक्षण का उन्नयन (यूएसटीटीएडी): अल्पसंख्यकों की परंपरागत कलाओं को शिल्पों की समृद्ध धरोहर के संरक्षण के लिए 14 मई 2015 को यह योजना शुरू की गयी।
     इस योजना का उद्देश्य मास्टर शिल्पियोंञ्कर्मकारों के परंपरागत कौशलों को अद्यतन बनाना तथा क्षमता निर्माण करना, अल्पसंख्यकों की चिन्हित परंपरागत कलाओंञ्शिल्पों का प्रलेखन, परंपरागत कौशलों के मानक निर्धारित करना, मास्टर शिल्पियों के माध्यम से पहचान की गयी विभिन्न परंपरागत कलाओं-शिल्पों में अल्पसंख्यक युवाओं को प्रशिक्षण देना तथा राष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय बाजार संपर्क बढ़ाना है।
   पीआईए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी जिनके साथ-साथ कार्यकलाप भी चलाये जाएंगे ताकि ये सुनिश्चित हो कि परंपरागत कला-शिल्प के संरक्षण के लिए वांछित उपलब्धि मिले, बाजार संपर्क स्थापित हों तथा नई पीढ़ी में परंपरागत कलाओं और शिल्पों को एक पेशे के रूप में अपनाने की रूचि जागृत हो। आज तक इस योजना के अंतर्गत केरल राज्य से किसी भी अल्पसंख्यक युवा को प्रशिक्षित नहीं किया गया है।
     नई मंजिल : यह योजना 8 अगस्त 2015 से शुरू की गयी है जिसका उद्देश्य उन अल्पसंख्यक युवाओं को लाभ पहुंचाना है जिनके पास औपचारिक स्कूल प्रमाण पत्र नहीं है अर्थात जो स्कूल बीच में छोड़ने वालों की कोटि में हैं या मदरसों जैसे सामुदायिक शिक्षा संस्थानों में पढ़े हैं उनको औपचारिक शिक्षा तथा कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से तथा उनको संगठित क्षेत्र में बेहतर रोजगार प्राप्त करने के योग्य बनाने और इस प्रकार उन्हें बेहतर जीवन जीने के लिए प्रवृत करना है।
   अब तक केरल राज्य से इस योजना के तहत किसी भी अल्पसंख्यक युवा को प्रशिक्षित नहीं किया गया है। यह सूचना अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

भारत विश्‍व की तेजी से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍थाओं में एक

     आंध्र प्रदेश। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज आंध्र प्रदेश के गुंटूर में इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के शताब्‍दी सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। 

   इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत विश्‍व की तेजी से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍थाओं में एक है। उन्‍होंने कहा कि वृद्धि के बिना कोई विकास नहीं हो सकता और फिर से बांटने का दायरा कम रह जाता है। वृद्धि आवश्‍यक है लेकिन यह पर्याप्‍त नहीं। 
   समाज में असमानताओं से निपटने के लिए विभिन्‍न वर्गों के बीच सामाजिक और आर्थिक असमानता पर विजय पाना होगा। यह असमानता विभिन्‍न क्षेत्रों में भी है और इसके लिए दूरदर्शी नीति की आवश्‍यकता है। 
    राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारे नागरिक आज भी गरीबी में और गरीबी के बहुत निकट रह रहे है। उन्‍हें पर्याप्‍त चिकित्‍सा सेवा, शिक्षा, आवास तथा नागरिक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। यह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्‍य पिछड़े वर्गों और महिलाओं जैसे समाज के परंपरागत रूप से कमजोर वर्गों के मामले में विशेष रूप से सत्‍य है।
     राष्‍ट्रपति ने कहा कि 2022 तक, जब भारत अपनी स्‍वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनायेगा, नए भारत के सपनों को हासिल करने के लिए इन समस्‍याओं का समाधान आवश्‍यक है। हमें स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा में निवेश को मानव पूंजी में निवेश मानना होगा।
     राष्‍ट्रपति ने कहा कि सहकारी संघवाद के युग में और विशेषकर 14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद से राज्‍यों पर अधिक जिम्‍मेदारी आई है और राज्‍यों से आशा भी बढ़ी है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि विचारों के विकास को धन के विकेन्‍द्रीकरण का पूरक होना चाहिए इससे राज्‍यों को लाभ मिलेगा और अंतत: भारत के सामाजिक, विकास तथा सूक्ष्‍म अर्थव्‍यवस्‍था की जरूरतें पूरी होंगी। 
   राष्‍ट्रपति ने कहा कि औपचारिक रोजगार का जमाना रोजगार के अवसर प्रदान कर रहा है और मैन्‍यूफैक्‍चरिंग, सेवा क्षेत्र और डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था में स्‍वरोजगार का अवसर प्रदान कर रहा है। हम इसे अनऔपचारिक अर्थव्‍यवस्‍था कहें या सूक्ष्‍म ऋण और चाहे सामाजिक उद्यमिता के नियम अपनाए यह क्षेत्र केवल बढ़ेगा। हमें यह समझकर इसके अनुरूप नीतियां बनानी होंगी। 
    राष्‍ट्रपति ने कहा कि कामगारों की सुरक्षा के लिए हमें सामाजिक सुरक्षा उपाए और सुरक्षा नेट तैयार करने होंगे।
    इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्‍यपाल ईएसएल नरसिम्‍हन, आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एन. चन्‍द्रबाबू नायडू, नोबल पुरस्‍कार विजेता और बांग्‍लादेश में ग्रामीण बैंक के संस्‍थापक प्रोफेसर मोहम्‍मद यूनुस, रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. सी रंगराजन, इंडिया इकोनॉमिक एसोसिएशन के अध्‍यक्ष प्रोफेसर सुखदेव थोरट तथा आचार्य नागार्जुन विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ए. राजेन्‍द्र प्रसाद उपस्थित थे।

175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्‍य

     नई दिल्‍ली। नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने ‘नये भारत’ के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के एक स्‍वच्‍छ ऊर्जा भविष्‍य के स्‍वप्‍न को साकार करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत ने विश्‍व में सबसे बड़ा नवीकरणीय क्षमता विस्‍तार कार्यक्रम आरंभ किया है।

    सरकार का लक्ष्‍य नवीकरणीय ऊर्जा पर भरपूर जोर देने के जरिए स्‍वच्‍छ ऊर्जा के हिस्‍से में बढ़ोतरी करना है। भारत में नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा के विकास तथा उपयोग के मुख्‍य वाहक ऊर्जा सुरक्षा, बिजली की कमी, ऊर्जा पहुंच, जलवायु परिवर्तन आदि रहे हैं। 
     ग्रिड कनेक्‍टेड नवीकरणीय ऊर्जा के तहत पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान 27.07 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का क्षमता संवर्धन किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा से 12.87 गीगावाट, पवन ऊर्जा से 11.70 गीगावाट, लघु पनबिजली से 0.59 गीगावाट तथा जैव ऊर्जा से 0.79 गीगावाट शामिल है।
   स्‍वच्‍छ ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि दर से उत्‍साहित होकर भारत सरकार ने लक्षित राष्‍ट्रीय निर्धारित योगदान (आईएनडीसी) पर संयुक्‍त राष्‍ट्र जलवायु परिवर्तन संरचना सम्‍मेलन को प्रस्‍तुत अपने प्रतिवेदन में कहा है कि भारत प्रौद्योगिकी के अंतरण एवं हरित जलवायु निधि समेत निम्‍न लागत अंतराष्‍ट्रीय वित्‍त की सहायता से 2030 तक गैर-फॉसिल ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से 40 प्रतिशत संचयी बिजली ऊर्जा क्षमता अर्जित करेगा।
     30.11.2017 तक देश में सोलर रूफ टॉप परियोजनाओं से 863.92 मेगावाट समेत 16611.73 मेगावाट की सकल क्षमता के साथ सौर ऊर्जा परियोजनाएं संस्‍थापित की गई हैं। सरकार सृजन आधारित प्रोत्‍साहनों (जीबीआई), पूंजी एवं ब्‍याज सब्सिडियों, व्‍यावहार्य अंतराल निधियन, रियायतपूर्ण वित्‍त, वित्‍तीय प्रोत्‍साहनों जैसे विभिन्‍न प्रोत्‍साहनों के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
        राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का उद्देश्‍य फॉसिल आधारित ऊर्जा विकल्‍पों के साथ सौर ऊर्जा को प्रतिस्‍पर्धी बनाने के अंतिम उद्देश्‍य के साथ बिजली सृजन एवं अन्‍य उपयोगों के लिए सौर ऊर्जा के विकास एवं उपयोग को बढ़ावा देना है। 
    राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का लक्ष्‍य दीर्घकालिक नीति, बड़े स्‍तर पर परिनियोजन लक्ष्‍यों, महत्‍वाकांक्षी अनुसंधान एवं विकास तथा महत्‍वपूर्ण कच्‍चे माल, अवयवों तथा उत्‍पादों के घरेलू उत्‍पादन के माध्‍यम से देश में सौर ऊर्जा सृजन की लागत को कम करना है। 
     नवीकरणीय ऊर्जा, फॉसिल ईंधन आधारित सृजन की तुलना में लगातार लागत प्रतिस्‍पर्धी बनती जा रही है। वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए पिछले दो वर्षों के दौरान सोलर पार्क, सोलर रूफटॉप योजना, सौर रक्षा योजना, नहर के बांधों तथा नहरों के ऊपर सीपीयू सोलर पीवी पॉवर प्‍लांट के लिए सौर योजना, सोलर पंप, सोलर रूफटॉप आदि के क्रियान्‍वयन के लिए बड़े कार्यक्रम/योजनाएं आरंभ की गई हैं।
    वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्‍न योजनाओं को वित्‍तीय समर्थन उपलब्‍ध कराने के अतिरिक्‍त विभिन्‍न नीतिगत उपाय आरंभ किये जा रहे हैं तथा विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
    इनमें नवीकरणीय खरीद बाध्‍यता (आरपीओ) के मजबूत क्रियान्‍वयन और नवीकरणीय सृजन बाध्‍यता (आरजीओ) के लिए बिजली अधिनियम एवं टैरिफ नीति में अनुकूल संशोधन करना; हरित ऊर्जा गलियार परियोजना के माध्‍यम से बिजली पारेषण नेटवर्क का विकास; टैरिफ आधारित प्रतिस्‍पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्‍यम से सौर एवं पवन ऊर्जा की खरीद के लिए दिशा-निर्देश, राष्‍ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति को अधिसूचित किया जाना, पवन ऊर्जा परियोजनाओं को फिर से मजबूत बनाने, सोलर फोटोवोल्‍टेक सिस्‍टम्‍स/डिवाइसिस की तैनाती के लिए मानक निर्धारित करना, अंतरराज्‍यीय पारेषण प्रणाली प्रभारों तथा मार्च, 2019 तक कमीशन की जाने वाली परियोजनाओं के लिए सौर तथा पवन बिजली के अंत:राज्‍यीय बिक्री से होने वाले नुकसान की माफी के लिए आदेश; रूफटॉप परियोजनाओं के लिए बड़े सरकारी परिसरों/भवनों की पहचान करने; मिशन वक्‍तव्‍य एवं स्‍मार्ट सिटी के विकास के लिए दिशा-निर्देशों के तहत रूफटॉप सोलर एवं 10 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के प्रावधान को अनिवार्य बनाना, नये निर्माण या उच्‍चतर फर्श क्षेत्र अनुपात के लिए रूफटॉप सोलर के अनिवार्य प्रावधान के लिए भवन उपनियमों में संशोधन; सौर परियोजनाओं के लिए अवसंरचना दर्जा; कर मुक्‍त सोलर बांड जारी करने; दीर्घकालिक ऋण उपलब्‍ध कराने; बैंकों/एनएचबी द्वारा गृह ऋण के हिस्‍से के रूप में रूफटॉप सोलर का निर्माण; वितरण कंपनियों को प्रोत्‍साहित करने तथा नेट-मीटरिंग को अनिवार्य बनाने के लिए समेकित बिजली विकास योजना (आईपीडीएस) में उपयों को शामिल करना तथा इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए हरित जलवायु निधि के रूप में भी द्वीपक्षीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय दानकर्ताओं से फंड जुटाना आदि शामिल हैं। 
    नवीकरणीय ऊर्जा की अनुमानित क्षमता : स्‍वदेशी नवीकरणीय संसाधनों के बढ़ते उपयोग से महंगे आयातित फॉसिल ईंधनों पर भारत की निर्भरता में कमी आने की उम्‍मीद है। लगभग 3 प्रतिशत बंजर भूमि के अनुमान के साथ भारत के पास 1096 गीगावाट की वाणिज्यिक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से अनुमानित अक्षय ऊर्जा क्षमता है, जिसमें पवन - 302 गीगावॉट; लघु हाइड्रो - 21 गीगावाट; जैव ऊर्जा 25 गीगावाट; और 750 गीगावाट सौर ऊर्जा शामिल है। 
    लक्ष्‍य : भारत सरकार ने 2022 के आखिर तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा संस्‍थापित क्षमता का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। इसमें से 60 गीगावाट पवन ऊर्जा से, 100 गीगावाट सौर ऊर्जा से, 10 गीगावाट बायोमास ऊर्जा से तथा पांच गीगावाट लघु पनबिजली से शामिल है। 2017-18 के लिए 14550 मेगावाट ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा (पवन 4000 मेगावाट, सौर 10000 मेगावाट, लघु पनबिजली ऊर्जा 200 मेगावाट, जैव ऊर्जा 340 मेगावाट एवं अवशिष्‍ट से ऊर्जा 10 मेगावाट) निर्धारित किया गया है।

देश में अटल टिंकरिंग लैब की स्‍थापना के लिए 1500 और स्‍कूलों का चयन

    नई दिल्‍ली। नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) के तहत अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) की स्‍थापना के लिए 1500 और स्‍कूलों का चयन किया गया है। इतने सारे और स्‍कूलों का चयन करने से ‘भावी अन्‍वेषकों के रूप में भारत में एक मिलियन बच्‍चों की प्रतिभा संवारने’ से जुड़े मिशन के सपने को साकार करने में काफी मदद‍ मिलेगी। 

   नई अटल टिंकरिंग लैब से जुड़ी इस घोषणा के साथ ही एआईएम के तहत एटीएल की स्‍थापना के लिए देश भर में अब तक 2441 स्‍कूलों का चयन किया गया है। इस दिशा में औपचारिक प्रयास एक साल से भी अधिक समय पहले शुरू किए गए थे।
    भारत सरकार के एक प्रमुख कार्यक्रम अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) का उद्देश्‍य देश भर में फैले स्‍कूलों, विश्‍वविद्यालयों और उद्योगों में नवाचार (इनोवेशन) एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना है। एटीएल छठी कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए अपने अभिनव विचारों को साकार रूप देने का कार्य स्‍थल है। 
    इन कार्य स्‍थलों पर कुछ ऐसा नया करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ा होता है। अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकियों जैसे 3डी प्रिंटर, रोबोटिक्‍स, संवेदी प्रौद्योगिकी किट, इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स (आईओटी), सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक्स से युक्‍त ये कार्य स्‍थल विद्यार्थियों को उभरती प्रौद्योगिकियों का इस्‍तेमाल कर स्‍थानीय सामुदायिक समस्‍याओं को गहराई से समझने एवं सुलझाने में समर्थ करते हैं।
      विद्यार्थियों को ‘खुद से करो’ की अवधारणा का उपयोग कर अपने अभिनव विचारों को मूर्त रूप देने और भारत की सामाजिक, सामुदायिक अथवा आर्थिक समस्‍याओं का अभिनव समाधान वि‍कसित करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है। अपने स्कूलों में एटीएल में कार्य करते हुए रचनात्‍मक प्रौद्योगिकी प्‍लेटफॉर्मों के जरिए अपनी जिज्ञासा, रचनात्मकता और कल्पनाशीलता काफी हद तक बढ़ा चुके युवा विद्यार्थियों ने अपने अभिनव समाधानों का प्रारूप तैयार करना शुरू भी कर दिया है और इसके साथ ही उन्‍होंने कई रचनात्‍मक परियोजनाओं पर काम भी शुरू कर दिया है, जिनमें बेहतर सिंचाई प्रबंधन एवं कचरा प्रबंधन भी शामिल हैं।
    इसी तरह अपनी लैब में आईओटी उपकरणों तथा रोबोटिक्‍स का उपयोग कर सेंसर आधारित समाधान विकसित करना भी इन परियोजनाओं में शामिल है। यह वर्ष 2022 तक अपने सपनों का ‘नया भारत’ बनाने की दृष्टि से विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा अवसर साबित होगा। इन प्रयोगशालाओं (लैब) को कुछ इस तरह से तैयार किया गया है जिससे कि रचनात्‍मकता को बढ़ावा मिले और विद्यार्थी नियमित पाठ्यक्रम एवं अपनी पाठ्य पुस्‍तकों से इतर कुछ अभिनव जानकारियां हासिल करें। इस तरह की लैब से विद्यार्थियों को भावी कौशल जैसे कि रचनात्‍मक एवं अभिकलनात्मक सोच, अनुकूल शिक्षण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) से युक्‍त करने में भी मदद मिलेगी। 
    इस दिशा में आवेदनों के दो दौर पूरे हो चुके हैं। इस दौरान 25000 से भी अधिक आवेदन प्राप्‍त हुए हैं जिनमें से 2441 स्‍कूलों का चयन कि‍या गया है। इससे एटीएल की कवरेज बढ़कर 98 प्रतिशत से भी अधिक स्‍मार्ट सिटी और 93 प्रतिशत से भी अधिक जिलों (655 से भी ज्‍यादा जिले) तक हो जाएगी।
   इसकी कवरेज में व्‍यापक वृद्धि की पुष्टि इस सत्‍य से होती है कि अब देश भर में 34 राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों में कम-से-कम एक या उससे भी अधिक एटीएल होगी। नव चयनित 1500 स्‍कूलों की सराहना करते हुए मिशन के निदेशक (एटीएल) आर. रामानन ने कहा कि ‘भारत को एक अभिनव देश में बदलने’ से जुड़े हमारे मिशन के तहत एटीएल निश्चित तौर पर अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं और इसके साथ ही अपने निहितार्थों की दृष्टि से दूरगामी हैं।
       उन्‍होंने नए स्‍कूलों से यह भी अपील की कि वे एटीएल की स्‍थापना के साथ-साथ आगामी नए शैक्षणिक सत्रों से एटीएल का नियमित परिचालन सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित धनराशि प्राप्‍त करने हेतु एटीएल से जुड़े दिशा-निर्देशों के मुताबिक तय आवश्‍यकताएं जल्‍द से जल्‍द पूरी करें।
    अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) प्रधानमंत्री के ‘एक रचनात्‍मक भारत, एक अभिनव भारत’ बनाने के सपने को साकार करते हुए हमारे समाज के सभी तबकों को लाभान्वित करेंगी।