Friday, 16 June 2017

भारत को एक ट्रिलियन डालर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने की महत्वपूर्ण कड़ी निजी क्षेत्र की साझेदारी

           भारत सरकार के सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रोनिक एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रोद्योगिकी क्षेत्र के उद्यमियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। 

       इस दौरान डिजिटल आर्थिक सेवाओं और ई-कॉमर्स पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। भारत को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए एक कारगर कार्ययोजना के प्रारूप पर भी विचार-विमर्श हुआ।
        इलैक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी और कानून और विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर इलैक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी और कानून और विधि राज्यमंत्री पी.पी. चौधरी, इलैक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय की सचिव सुश्री अरूणा सून्दराराजन इलैक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय अतिरिक्त सचिव डॉ. अजय कुमार भी उपस्थित थे। उद्योग जगत और उद्योग संघो की ओर से इन्फोसिस,आईबीएम,विप्रो, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, महिन्द्रा टेक, इन्टेल कॉरेपोरेश्न, पेनासोनिक इंडिया,क्विकहील, हाइक,लावा इन्टरनेशल लिमिटेड, आईवीसीए, एनपीसीआई, एनएएसएससीओएम, आईएएमएआई आदि ने प्रतिनिधित्व किया।
        उद्योगपतियों ने सरकार के वर्तमान कदमों का स्वागत किया और जोर देते हुए कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के बीच प्रभावी साझेदारी भारत को एक ट्रिलियन डालर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने की महत्वपूर्ण कड़ी है।

         निजी एवं सार्वजनिक साझेदारी वाली परियोजनाओं से जुड़े विवादों के निपटान के लिए बेहतर प्रणाली, उद्योगों के सहयोग से उभरती हुई तकनीकों के प्रयोग, डाटा सुरक्षा के लिए कानूनी ढाचे की मजबूती जैसे क्षेत्रों में सरकार को सुधार करने की आवश्यकता है ताकि कार्य योजना को कारागर तरीके से लागू किया जा सकें।

इस्पात आधुनिक दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण उत्पाद, ऑटोमोबाइल रक्षा जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता

        इस्पात मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने भुवनेश्वर में हाल ही में गठित राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता परिषद की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की।

        इस बैठक में भारत सरकार की इस्पात सचिव के साथ ही मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सिंह ने वैश्विक इस्पात उद्योग मे भारत की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय इस्पात उद्योग विश्व के तीसरे सबसे बड़े इस्पात उत्पादक के रूप में उभरा है। वैश्विक उद्योग के नक्शे पर चीन के बाद गर्व से दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और यह दुनिया के दूसरे सबसे बड़े इस्पात उत्पादक बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
        वैश्विक इस्पात उद्योग के नक्शे पर चीन के बाद भारतीय इस्पात प्रमुखता से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने की ओर बढ़ रहा है। मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इस्पात का देश के लिए रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों जैसे विनिर्माण, अवसंरचना, बिजली, एयरोस्पेस और औद्योगिक मशीनरी से लेकर उपभोक्ता उत्पाद तक में व्यापक उपयोग होता है। 
          उन्होंने कहा कि सरकार इस्पात क्षेत्र के महत्व और इसके गतिशील परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय इस्पात नीति (एनएसपी) 2017 को सामने लाई है। नई इस्पात नीति के लागू होने के बाद भरोसा किया जा रहा है कि घरेलू इस्पात को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त माहौल बनाने में उचित नीति का साथ मिलने से इस्पात उद्योग तेजी से वृद्धि करेगा और इसके जरिये यह भी सुनिश्चित करना है कि इस्पात उत्पादन उसकी मांग में हो रही अपेक्षित वृद्धि को पूरा करे। 
           राष्ट्रीय इस्पात नीति के मुख्य क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, राष्ट्रीय इस्पात नीति का कच्चे माल की उपलब्धता, आयात प्रतिस्थापन, इस्पात खपत को बढ़ाने, वैल्यू-एडेड स्टील में शोध एवं अनुसंधान पर ज़ोर, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास को बढ़ाने, भारत की किफ़ायती और गुणवत्तापरक इस्पात उत्पादक के रूप में पहचान कायम करने, और इस्पात उद्योग का कार्बन फुट प्रिंट कम करने पर मुख्य रूप से ज़ोर होगा। सिंह ने घरेलू निर्मित लौह और इस्पात को प्राथमिकता देने की इस्पात नीति के बारे में बताते हुए कहा कि इससे घरेलू इस्पात की खपत में बढ़ोत्तरी होगी और इससे भारतीय इस्पात उद्योग को काफी मदद होगी। 
           इस्पात मंत्री ने कहा कि इस्पात आधुनिक दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण उत्पादों में से एक है और इसके साथ ही यह किसी भी औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है। इस्पात की खपत बढ़ाने के लिए इसके गुणों और लाभों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाना बहुत ही ज़रूरी है। इस्पात की “लो लाइफ सायकल कॉस्ट” पर ज़ोर देते हुए, मंत्री ने कहा कि यह वृहद विनिर्माण, भवनों, और निजी उपयोगकर्ताओं तक के लिए व्यवहारिक विकल्प है उन्होंने इस्पात की खपत को बढ़ाने के लिए कहा; मंत्रालय ने निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों जैसे ग्रामीण विकास, शहरी बुनियादी ढांचे, सड़क एवं राजमार्ग, रेलवे इत्यादि पर प्रमुखता से ज़ोर दे रही है।
           सिंह ने कहा, हमें 2019-20 तक ऑटो ग्रेड स्टील, सीआरजीओ, सीआरएनओ समेत वैल्यू एडेड एवंस्पेशल स्टील के उत्पादन के लिए अपने अनुसंधान एवं विकास प्रयासों को और तेज करना है। यह भारत को ऑटोमोबाइल और रक्षा जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बना देगा, जिसके लिए अभी हमें आयात पर निर्भर करना पड़ता है। 
          उन्होंने कहा, आर्सेलर मित्तल - सेल के संयुक्त उद्यम के जल्द शुरू होने के बारे मेन भी बताया। उन्होंने लौह अयस्क और कोल की किफ़ायती कीमत की आवश्यकता की ओर भी इशारा किया। सिंह ने आगे कहा, जिस दिन हम हमारे उद्योगों में उपयोग किए जा रहे किसी भी तरह के और किसी भी गुणवत्ता के स्टील की आवश्यकता को खुद से पूरा करने में सक्षम हो जाएंगे, उस दिन मेक इन स्टील फॉर मेक इन इंडिया का सपना साकार रूप लेगा।

विश्व में भारत इस्‍पात का तीसरा बड़ा उत्पादक

           राष्ट्रीय इस्‍पात उपभोक्ता परिषद की दूसरी बैठक केन्द्रीय इस्‍पात मंत्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में भुवनेश्वर में । इसकी थीम ‘इस्‍पात उद्योग की वर्तमान स्थिति और आगे की राह’ है। 

      इस्‍पात उपभोक्ता परिषद सरकार को लोहे और इस्‍पात की आपूर्ति, उपलब्धता, गुणवत्ता और बाजार के रुझानों से संबंधित मसलों पर सलाह देती है। विश्व में भारत इस्‍पात का तीसरा बड़ा उत्पादक है, जबकि भारत की घरेलू स्टील खपत सिर्फ 60 किलो प्रति व्यक्ति है जो कि विश्व औसत 208 किलो के मुकाबले काफी कम है। स्टील मंत्रालय घरेलू स्टील खपत को बढ़ाने के लिए स्टील के तरह-तरह के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रेरित करता रहता है। 
            हाल ही में, केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने एक नीति को मंजूरी दी जिसमें सरकारी खरीद में लोहे के घरेलू उत्पादकों और स्टील उत्पादों को प्राथमिकता दी गई है। इस बैठक में स्टील से जुड़े सभी मुद्दों पर बातचीत रही। स्टील उद्योग के विकास में उड़ीसा के सार्वजनिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उड़ीसा जैसे राज्य, देश में स्टील की ग्रामीण खपत के बड़े संभावित केन्द्र हो सकते हैं। 
             भारत में स्टील बनाने के लिए उड़ीसा एक अनुकूल जगह हो सकती है। राज्य की प्रतिभावान आबादी और उसके भौगोलिक लाभ भी हो सकते हैं। सम्मेलन के लिए उड़ीसा के भुवनेश्वर का चयन देश में स्टील उत्‍पादन में इस राज्य के अहम योगदान को ध्यान में रखते हुए आदर्श चयन है।
             यह बैठक घरेलू स्टील खपत, घरेलू स्टील उद्योग परिदृश्य, वैश्विक स्टील रुझान और निर्माण कार्यों में स्टील के इस्तेमाल के लाभ की चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करेगी।

         इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि, कई उद्योग संघ, लोहे और स्टील उद्योग के उत्पादक और उपभोक्ता, भवन निर्माता और उससे जुड़े उद्योग, उद्योग विशेषज्ञ और अग्रणी घरेलू स्टील निर्माता शामिल।