Friday, 9 February 2018

प्रधानमंत्री की शोधार्थी योजना ‘ब्रेन-ड्रेन’ को ‘ब्रेन-गेन’ में बदल देगी

   नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रधानमंत्री की शोधार्थी योजना को लागू करने संबंधी मंत्रिमंडल के निर्णय का स्वागत किया है।

   इस योजना का उद्देश्य देश के सबसे प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित करके शोध की गुणवत्ता में सुधार करना है। आज यहां मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि इस योजना से देश की प्रतिभाओं की क्षमताओं का उपयोग करने में मदद मिलेगी, ताकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में घरेलू स्तर पर अनुसंधान और शोध किए जा सकें। 
    उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत किए जाने वाले शोध से हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी और देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में बेहतरीन शिक्षकों की कमी पूरी होगी। सरकार का यह कदम ‘ब्रेन-ड्रेन’ को ‘ब्रेन-गेन’ में बदल देगा। 
  मंत्री ने कहा कि आईआईएससी, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर, आईआईआईटी से बी-टेक या एकीकृत एम-टेक या विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में एम.एस.सी. का पाठ्यक्रम पूरा करने वाले या अंतिम वर्ष के लगभग 1,000 सर्वश्रेष्ठ छात्रों को इस योजना के तहत आईआईटी, आईआईएससी में पीएचडी कार्यक्रम में सीधा प्रवेश दिया जाएगा।
     इन छात्रों को पहले दो वर्षों के दौरान प्रति माह 70,000 रुपये की फैलोशिप, तीसरे वर्ष के दौरान प्रत्येक माह 75,000 रुपये और चौथे तथा पांचवे वर्ष के दौरान प्रतिमाह 80,000 रुपये की फैलोशिप दी जाएगी। इसके अलावा पांच सालों के लिए प्रत्येक शोधार्थी को दो लाख रुपये अनुसंधान अनुदान दिया जाएगा, ताकि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय शोध सम्मेलनों में हिस्सा लेने और शोध प्रबंध लिखने में सहायता हो।
      वर्ष 2018-19 से शुरू होने वाली तीन वर्षीय अवधि के लिए अधिकतम तीन हजार शोधार्थियों को चुना जाएगा। मंत्री ने प्रधानमंत्री की छात्रों से होने वाली बातचीत पर आधारित कार्यक्रम, ‘परीक्षा पे चर्चा’ के बारे में भी जानकारी दी। यह कार्यक्रम 16 फरवरी, 2018 को नई दिल्ली स्थित तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।
       इस कार्यक्रम में 2000 से अधिक स्कूल और कॉलेज के छात्र, शिक्षक और प्राचार्य भाग लेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी परीक्षा तनाव को कम करने तथा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए परीक्षा देने के संबंध में छात्रों को सलाह देंगे। मंत्री ने कहा कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम देश के अधिकांश परिवारों से जुड़ा हुआ है क्योंकि विभिन्न स्तरों की परीक्षाएं प्रारंभ होने वाली हैं।

शहरी गरीबों के लिए 1,86,777 किफायती मकानों को मंजूरी

   नई दिल्ली। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2797 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता के साथ 11,169 करोड़ रुपये के निवेश से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के हित में 1,86,777 और किफायती मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है। 

   इस राशि को मंजूरी कल यहां केंद्रीय अनुमोदन और निगरानी समिति (सीएसएमसी) की 30वीं बैठक में दी गई। हरियाणा के लिए 799 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता के साथ 4322 करोड़ रुपये के निवेश से 38 शहरों एवं कस्बों में 53290 मकानों को मंजूरी दी गई है।
     इसी तरह तमिलनाडु के लिए 2314 करोड़ रुपये के निवेश और 609 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता के साथ 65 शहरों एवं कस्बों में 40623 मकानों को मंजूरी दी गई है। कर्नाटक के लिए 1461 करोड़ रुपये के निवेश एवं 490 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता के साथ 95 शहरों एवं कस्बों में 32656 किफायती मकानों को स्वीकृति दी गई है।
   गुजरात के लिए 234 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता के साथ 946 करोड़ रुपये के निवेश से 45 शहरों एवं कस्बों में 15584 मकानों को मंजूरी दी गई है। महाराष्ट्र के लिए 182 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता के साथ 868 करोड़ रुपये के निवेश से 13 शहरों एवं कस्बों में 12123 मकानों को स्वीकृति दी गई है।
   केरल के लिए 142 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता के साथ 284 करोड़ रुपये के निवेश से 52 शहरों एवं कस्बों में 9461 मकानों को मंजूरी दी गई है। उत्तराखंड के लिए 93 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता के साथ 258 करोड़ रुपये के निवेश से 57 शहरों एवं कस्बों में 6226 मकानों को स्वीकृति दी गई है। ओडिशा के लिए 77 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता के साथ 156 करोड़ रुपये के निवेश से 26 शहरों एवं कस्बों में 5133 मकानों को मंजूरी दी गई है।
   प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) (शहरी) के लाभार्थी की अगुवाई वाले निर्माण (बीएलसी) घटक के तहत 1,08,095 नये मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई जिसके तहत तमिलनाडु में 26672, कर्नाटक में 16630, हरियाणा में 13663, बिहार में 11411, केरल में 9461, गुजरात में 8768, महाराष्ट्र में 7088, उत्तराखंड में 5698 और ओडिशा में 5133 मकानों का निर्माण प्रस्तावित है। 
  साझेदारी में किफायती मकान (एएचपी) घटक के तहत हरियाणा में 36056, कर्नाटक में 16026, तमिलनाडु में 13951, गुजरात में 6246, महाराष्ट्र में 5035 और उत्तराखंड में 528 मकानों का निर्माण प्रस्तावित है। उपर्युक्त प्रस्तावित मकानों के साथ ही सीएसएमसी से अंतिम मंजूरी के बाद पीएमएवाई (शहरी) के तहत कुल मकानों की संख्या बढ़कर 37,83,392 हो जाएगी।
  यही नहीं, आरएवाई स्कीम की परियोजनाओं को मिलाने के बाद पीएमएवाई (शहरी) के तहत वित्त पोषित किये जा रहे मकानों की कुल संख्या बढ़कर 39,25,240 हो जाएगी।

कनाडा के साथ परमाणु ऊर्जा सहयोग

   नई दिल्ली। भारत सरकार और कनाडा सरकार के बीच परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए 27 जून 2010 को एक समझौता हुआ।

  15 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री के कनाडा दौरे के दौरान, भारत सरकार ने 2015-2020 के दौरान यूरेनियम अयस्क की आपूर्ति के लिए कनाडा की मैसर्स सीएएमसीओ कम्पनी से समझौता किया। 
    परमाणु प्रौद्योगिकी का विकास हो रहा है और इसका इस्तेमाल कैंसर से बचाव सहित स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य सरंक्षण, ऊर्जा उत्पादन के अलावा अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।
  ऐसा, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन तथा अंतरिक्ष व परमाणु ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज राज्यसभा में श्री मजीद मेनन द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में कहा। 

भारत को डिजिटल क्रांति की अगुवाई करनी चाहिए

  नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और कानून एवं विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारत को किफायती साइबर सुरक्षा केंद्र बनाने की कोशिशों में मदद के लिए आज नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर का आह्वान किया।

  इससे पड़ोसी देशों में प्रौद्योगिकी के विकास में भारत की भूमिका बढ़ाने में मदद मिलेगी। वह आज साइबर सुरक्षा और नवाचार पर द्वितीय ‘नेशनल मीट ऑन ग्रासरूट इन्फॉर्मेटिक्स- विविड: वीविंग ए डिजिटल इंडिया’ का उद्घाटन कर रहे थे।
   इस मौके पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार की डिजिटल पहलों का उद्देश्य न सिर्फ डेटा अर्थशास्त्र और डेटा नवाचार के क्षेत्र में पहले पायदान पर पहुंचना है बल्कि सस्ती और समावेशी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के जरिए नागरिकों को सशक्त बनाते हुए भारत को बदलना भी है।
    उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी की रीढ़ एनआईसी को अपने राज्यों/जिलों की बेहतरी के लिए ना सिर्फ नए उत्पादों का सृजन करना चाहिए बल्कि नई प्रौद्योगिकी से आम लोगों को अभ्यस्त भी कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे नागरिकों को प्रौद्योगिकी में शिक्षित करने की सरकार की कोशिशों में तेजी आएगी और पांच साल के समय में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को एक लाख करोड़ तक पहुंचाने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी होगी। 
     उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव का राजनीतिक तौर पर कुछ लेना-देना नहीं होना चाहिए। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमारी सरकार डिजिटल जुड़ाव और भौतिक जुड़ाव में भी विश्वास करती है। उन्होंने बताया कि देश की डिजिटल प्रौद्योगिकी की रीढ़ और ई-गवर्नेंस का अन्वेषक होने के कारण एनआईसी के जिला अधिकारी ही पूरे देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रबंधन करते हैं।
    उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल क्रांति में भारत को वैश्विक मार्गदर्शक बनाना चाहती है। उन्होंने भारत को सस्ता साइबर सुरक्षा केंद्र बनाने की भी इच्छा जताई जो भारत के साथ ही पूरी दुनिया के अनुकूल हो। एनआईसी ने आज दो नए पोर्टल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एप्लीकेशन सिक्योरिटी (सीओईएएस) और सुरक्षित तौर पर मापनीय एवं सुगम्य वेबसाइट (एस3डब्ल्यूएएएस) शुरू किए जिनका उद्घाटन रविशंकर प्रसाद ने किया।
     ग्रासरूट इन्फॉर्मेटिक्स पर राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए देश भर के एनआईसी अधिकारियों सहित भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, राज्यों के सूचना प्रौद्योगिकी सचिव भी भाग लेंगे।
    तीन दिवसीय सम्मेलन में अजय साहनी, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सुश्री नीता वर्मा, महानिदेशक, एनआईसी, सुश्री रमा नागपाल, उप-महानिदेशक, एनआईसी, जी के गौर, उप-महानिदेशक, एनआईसी और सुश्री नंदिता चौधरी, उप-महानिदेशक, एनआईसी ने भाग लिया।