Friday, 30 December 2016

नेपाल को 80 मेगावाट अतिरिक्त बिजली 

         नेपाल को 80 मेगावाट अतिरिक्त बिजली हस्तांतरण की आशा है। इस के साथ, भारत से नेपाल को बिजली की कुल आपूर्ति 400 मेगावाट हो जाएगी। 

      नेपाल के ऊर्जा मंत्री जनार्दन शर्मा ने भारत यात्रा के दौरान केंद्रीय विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल के साथ विचार-विमर्श किया। विद्युत/ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों के विस्तार और सहयोग की समीक्षा के अलावा, नेपाल के ऊर्जा मंत्री ने सर्दियों के महीनों में घरेलू पनबिजली परियोजनाओं से मौसम के कारण बिजली आपूर्ति में कमी को दूर करने के लिए भारत से 80 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली आपूर्ति का अनुरोध किया था। 

        इस अनुरोध पर त्वरित प्रतिक्रिया करते हुए 20 दिन की अवधि के भीतर, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (पीजीसीआईएल) ने भारत के मुजफ्फरपुर में एक अतिरिक्त 220/132 किलोवॉट,  100 एमवीए का ट्रांसफार्मर स्थापित किया। इस ट्रांसफार्मर के माध्यम से मुजफ्फरपुर (भारत) से  धालकेबार (नेपाल) पारेषण लाइन से 80 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली आपूर्ति नेपाल को दी जाएगी। इस वृद्धि के साथ, इस ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से अब नेपाल के लिए कुल 160 मेगावाट की आपूर्ति की जा सकती है। फ़रवरी 2016 में, भारत और नेपाल के प्रधानमंत्रियों ने भारत के मुजफ्फरपुर से नेपाल के धालकेबार के लिए 400 केवी की प्रथम उच्च क्षमता की सीमा पार लाइन का उद्घाटन किया गया है।

चीनी का 66 लाख मीट्रिक टन उत्पादन  


चीनी उत्पादन करीब 22.5 मिलियन मीट्रिक टन तक रहने की आशा है। वर्तमान चीनी सीजन 2016-17 के दौरान, देश की चीनी मिलों ने पेराई आरंभ कर दिया है।

          अब तक चीनी का करीब 66 लाख मीट्रिक टन उत्पादन किया है। इस सीजन के अंत तक चीनी का उत्पादन करीब 22.5 मिलियन मीट्रिक टन रहने की आशा है। 7.71 मिलियटन मीट्रिक टन भंडार के साथ करीब 25 मिलियन मीट्रिक टन की अनुमानित घरेलू मांग को पूरा करने के लिए चीनी की कुल उपलब्धता पर्याप्त है। वर्तमान चीनी सीजन (सितंबर, 2017) की समाप्ति पर भंडार की स्थिति के 5.21 मिलियन मीट्रिक टन रहने की संभावना है। इसे अगले चीनी सीजन 2017-18 में आगे ले जाया जाएगा। इसके अलावा अगले चीनी सीजन (2017-18) में चीनी उत्पादन के अच्छा होने की उम्मीद है।

         इसके जल्द ही शुरू होने की भी संभावना है इसलिए भारत में घरेलू स्तर पर उत्पादित चीनी की कोई कमी नहीं होगी। नवंबर, 2017 तक, शीघ्र पेराई से 2 मिलियन मीट्रिक टन चीनी उपलब्ध होगी। सरकार देश में चीनी के पर्याप्त भंडार बनाए रखने और इसके मूल्यों को नियंत्रण में रखने के लिए आवश्यक कदम उठा चुकी है।

भारत का निर्यात लक्ष्य 900 बिलियन यूएस डॉलर


     भारत का लक्ष्य 2020 तक भारत को वैश्विक स्तर पर मुख्य निर्यात हिस्सेदार बनाना और साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संगठनों के स्तर पर भारत के बढ़ते महत्व के अनरूप नेतृत्वकारी भूमिका में लाना है। लक्ष्य भारत के उत्पाद निर्यात और सेवाओं को मौजूदा 465.9 बिलियन यूएस डॉलर (2013-14) से बढ़ा कर 2019-20 तक 900 बिलियन यूएस डॉलर बढ़ाना है।

     विश्व निर्यात के स्तर पर भारत की हिस्सेदारी को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। दिसंबर 2014 के बाद से 18 महीनों तक नकारात्मक बढ़ोतरी के बाद जून 2016 में निर्यात आंकड़ों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के महीने में निर्यात में सकारात्कम वृद्धि देखी गई। अप्रैल से नवंबर 2016 के दौरान 174.9 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हुआ जबकि इसी अवधि के दौरान 2015 में 174.7 बिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हुआ था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों और सोने के निर्यात में अहम गिरावट से जनवरी 2016 के शुरुआत से ही व्यापार घाटा एक अंकों में रहा।

      वर्तमान में जीईएम पीओसी पोर्टल के जरिये 86 श्रेणियों में 4000 से अधिक उत्पाद और परिवहन सेवाएं उपलब्ध हैं। फिलहाल, जीईएम में 1600 उत्पाद विक्रेता और सेवा प्रदाता तथा करीब 1500 सरकारी अधिकारी पंजीकृत हैं। जीईएम से 45 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हो चुका है। जीईएम के जरिये खरीदारी में दामों में 10-20 प्रतिशत की कमी और कुछ मामलों में तो 56 प्रतिशत तक की कमी आई है। जीईएम अधिकतम सुशासन, न्यूनतम सरकार, मेक इन इंडिया, व्यापार में सुगमता व डिजीटल इंडिया को प्रोत्साहित करने का माध्यम है। विक्रेताओं को समय से भुगतान कर जीईएम न केवल प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित कर रहा है बल्कि लघु व्यापारिक ईकाइयों/व्यापारियों को भी सरकारी संगठनों के साथ व्यापार करने को भी प्रोत्साहित कर रहा है। डब्ल्यूटीओ का व्यापार सुविधा समझौता एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार कर व्यापार में लागत को कम करने की दिशा में मील का पत्थर है।

    व्यापार सुविधा समझौता (टीएफए) में सामानों की आवाजाही, उनकी निकासी और पारगमन की प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रावधान हैं। इस समझौते में व्यापार सुविधा और कस्टम के अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर कस्टम एवं अन्य उपयुक्त प्राधिकरणों में कारगर सहयोग के लिए विभिन्न उपायों का भी उल्लेख किया गया है। ये उद्देश्य भारत की ‘कारोबार में सुगमता’ वाली पहल के अनुरूप हैं। विशेष और अलग व्यवहार के अनुरूप विकासशील व कम विकसीत देशों को अलग श्रेणियों “ए” “बी” “सी” में बांटा गया है। “ए” श्रेणी में उन वचनबद्धताओं को रखा गया है जिसे अधिसूचित देश को टीएफए के लागू होने के साथ ही पूरा करना होता है। ‘बी’ श्रेणी में उन वचनबद्धताओं को शामिल किया गया है जिसे पूरा करने के लिए अधिसूचित देश थोड़ा समय मांग सकता है जबकि श्रेणी ‘सी’ में शामिल वचनबद्धताओं के लिए विकासशील व कम विकसित देश तकनीकी सहायता पाने के हकदार होंगे। फरवरी, 2016 में मंत्रीमंडल से मंजूरी मिलने के बाद भारत ने मार्च, 2016 में डब्ल्यूडीओ को टीएफए के अंतर्गत ‘ए’ श्रेणी की वचनबद्धातओं को अधिसूचित कर अप्रैल, 2016 में इसे मंजूरी दे दी। टीएफए के अंतर्गत कुल प्रावधानों का तकरीबन 70 प्रतिशत ‘ए’ श्रेणी में अधिसूचित किया गया है। भारत ने ‘सी’ श्रेणी में किसी भी प्रावधान को नहीं रखा है। 

       मंत्रीमंडल ने इन प्रावधानों को लागू करने व घरेलू समन्वय के लिए मंत्रीमंडल सचिव की अध्यक्षता में व्यापार सुविधा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीटीएफ) के गठन को भी मंजूरी दे दी है। डीजीएफटी ने 27 अक्टूबर, 2016 को विदेशी मुद्रा प्राप्ति और आयात निर्यात कोड से जुड़े आंकड़ों को साझा करने के लिए वस्तु एवं सेवा नेटवर्क (जीएसटीएन) के साथ एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए। इससे जीएसटी के तहत करदाताओं के निर्यात लेन-देन की प्रोसेसिंग के मजबूत होने, पारदर्शिता बढ़ने और मानवीय हस्तक्षेप कम होने की उम्मीद है। डीजीएफटी ने 14 राज्यों, 2 केंद्र सरकार की एजेंसियों व जीएसटीएन के साथ आंकड़ों को साझा करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। राज्यों के स्तर पर 14 राज्यों के वाणिज्य कर विभाग ने डीजीएफटी के साथ वैट वापसी के लिए ई-बीआरसी प्राप्त करने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। ये राज्य महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, गोवा, बिहार हैं।इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्रालय, परवर्तन निदेशालय, कृषि व खाद्य प्रसंस्करण निर्यात विकास प्राधिकरण और जीएसटीएन ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

    भारत ने 12-14 अक्टूबर, 2016 को नई दिल्ली के भारत व्यापार प्रोत्साहन संगठन, प्रगति मैदान  में ब्रिक्स देशों के पहले व्यापार मेले का आयोजन किया। ब्रिक्स व्यापार मेले में 397 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया और 14,612 व्यापारिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। मेले में प्रमुख क्षेत्रों जैसे कि कृषि व कृषि प्रसंस्करण, ऑटो और ऑटो उपकरणों, रसायनों, स्वच्छ ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य और औषधि, कपड़ा तथा परिधान, बुनियादी ढांचा, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग सामान, पर्यटन, रत्न एवं आभूषणों का प्रतिनिधित्व रहा। ब्रिक्स व्यापार मेले में 1601 बिजनेस टू बिजनेस (बीटूबी) बैठकों का आयोजन हुआ। ब्रिक्स व्यापार मेले के दौरान ब्रिक्स व्यापार मंच की बैठक भी हुई जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, ढांचागत विकास व वित्त जैसे मसलों पर चर्चा की गई। भारतीय गणराज्य के वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय तथा रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच द्विपक्षीय व्यापार व आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए।

         भारत और भूटान के बीच व्यापार, वाणिज्य व पारगमन पर प्रस्तावित सहमति पर को हस्ताक्षर हुए। भारत-ग्रीस जेईसी का सत्र हुआ। जीईसी के मिनट्स पर सहमति हस्ताक्षर हेलेनिक गणराज्य के विदेश मामलों के अतिरिक्त मंत्री जॉर्ज कत्रोग्लोस ने किया। इननोप्रोम, रूस के येकातेरिनबर्ग में हर साल होने वाला सबसे बड़ा व्यापार मेला है। जुलाई, 2016 तक चले इननोप्रोम-2016 में भारत ने ‘साझेदार देश’ के रूप में 117 भारतीय कंपनियों के साथ हिस्सा लिया। महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश व झारखंड राज्य सहित कई सारे मंत्रालय विभाग सार्वजनिक उपक्रम जैसे कि भारी उद्योग मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक व आईटी विभाग, पर्यटन मंत्रालय, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, एनटीपीसी, एनएचपीसी, नीपको व पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ने इसमें हिस्सा लिया। मेले में 95 देशों के 700 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। इननोप्रोम 2016 में प्रतिभाग से वैश्विक व रूसी उत्पादकों के साथ सीधे संवाद करने, अपने आप में सर्वोत्तम उत्पादन तकनीकों से परिचित होने व अंतरराष्ट्रीय तथा अंतर-औद्योगिक नेटवर्क बनाने का मौका मिला।