Tuesday, 28 March 2017

सांसदों को फुटबॉल पेश करेंगी सुमित्रा

           लोकसभा अध्‍यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन संसद भवन में महात्‍मा गांधी की प्रतिमा के निकट आयोजित किये जाने वाले एक समारोह में संसद के दोनों ही सदनों के सभी सांसदों को फुटबॉल पेश करेंगी। 

           केन्‍द्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा कि इस वर्ष अक्‍टूबर में भारत फीफा अंडर-17 फुटबॉल वर्ल्‍ड कप की मेजबानी करेगा। उन्‍होंने कहा कि देश में फुटबॉल संस्‍कृति को बढ़ावा देने के लिए ही यह कदम उठाया जा रहा है। गोयल ने सभी सांसदों से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में खेलों विशेषकर फुटबॉल के बारे में जागरूकता सृजित करने का अनुरोध किया क्‍योंकि इससे प्रतिभाशाली लोगों को इससे जोड़ने और देश भर में इस खेल को आगे ले जाने में मदद मिलेगी। 

              उन्‍होंने कहा कि फीफा अंडर-17 विश्‍व कप का आयोजन अखिल भारतीय फुटबॉल संघ की साझेदारी में किया जा रहा है। फुटबॉल संस्‍कृति सृजित करने के उद्देश्‍य से ‘मिशन 11 मिलियन’ शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्‍य 15000 स्‍कूलों और जन संपर्क कार्यक्रमों के जरिये देश भर में 11 मिलियन बच्‍चों तक फुटबॉल को ले जाना है। 

            प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 26 मार्च, 2017 को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में फीफा अंडर-17 वर्ल्‍ड कप का उल्‍लेख किया था। कहा था कि यह फुटबॉल को सबसे आगे ले जायेगा। युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए प्रोत्‍साहित करेगा।

अजमेर-रतलाम एक्‍सप्रेस को क्‍यू-ट्रैक

            लोकसभा अध्‍यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन और रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्‍ली स्थित रेल भवन से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये नव-निर्मित बड़ी लाइन क्‍यू-ट्रैक के रास्‍ते ट्रेन संख्‍या 19653/19654 रतलाम-अजमेर एक्‍सप्रेस के इंदौर तक विस्‍तारीकरण को झंडी दिखाकर रवाना किया गया। 

          रेल भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिन गणमान्‍य व्‍यक्तियों ने भाग लिया उनमें स्‍थानीय क्षेत्र के सांसद एवं विधायक, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए. के. मित्तल, रेलवे बोर्ड के सदस्‍य (यातायात) मोहम्‍मद जमशेद और रेलवे बोर्ड के अन्‍य सदस्‍य तथा वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी शामिल थे। 

            इस अवसर पर लोकसभा अध्‍यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘आज का ट्रेन विस्तार मध्‍य प्रदेश क्षेत्र के प्रत्‍येक व्‍यक्ति के लिए लाभप्रद साबित होगा। सुरेश प्रभु के नेतृत्‍व में इंदौर क्षेत्र में रेल कनेक्‍टि‍विटी से संबंधि‍त ज्‍यादातर मांगें पहले ही पूरी कर दी गई हैं। इस क्षेत्र में अब और कोई मांग नहीं रह गई है। इंदौर-दाहौद पटरी का कार्य प्रगति पर है। औद्योगिक टाउनशिप पीथमपुर के साथ रेलवे कनेक्टिविटी पूरी हो गई है। कंटेनर सेवाएं भी शुरू कर दी गई हैं। महू स्टेशन का विकास सुनिश्चित किया गया है। सेना ने इसके लिए जमीन दी है। मध्‍य प्रदेश विकास में पीछे नहीं रहेगा। मैं सुरेश प्रभु जी के नेतृत्‍व की सराहना करती हूं जिनकी देख-रेख में जम्‍मू-कश्‍मीर क्षेत्र में सुरंग बनाने का दुष्‍कर कार्य पूरा किया गया। 

              इस अवसर पर रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा, ‘यह स्‍पष्‍ट है कि लोग अपने-अपने क्षेत्रों में रेलवे कनेक्टिविटी चाहते हैं। आज, हिंदू नव वर्ष एवं गुड़ी पड़वा के अवसर पर यह इंदौर और मध्‍य प्रदेश के लोगों के लिए शुभ शुरुआत है। मध्‍य प्रदेश हमारे लिए एक महत्‍वपूर्ण राज्‍य है। मध्‍य प्रदेश के लोगों ने बेहतर रेल संपर्क या कनेक्टिविटी के लिए सदा ही अभिवेदन दिया है। पिछले दो वर्षों में मध्‍य प्रदेश के लिए आवंटन को बढ़ाकर 2871 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पिछले साल यह राशि 632 करोड़ रुपये थी, जो 354 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। वर्ष 2017-18 के रेल बजट आवंटन में इसे और बढ़ाकर 750 प्रतिशत कर दिया गया।

          विकास प्रक्रिया में धनराशि कोई अवरोध नहीं है। मध्‍य प्रदेश में गेज परिवर्तन, दोहरीकरण और तिहरीकरण परियोजनाओं ने गति पकड़ ली है। 56,547 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। 7 नये सर्वेक्षण कराये गये हैं और इन्‍हें मंजूरी दी गई है। चित्तौड़गढ़, रतलाम, इंदौर से गेज परिवर्तन कार्य को पूरा कर लिया गया है। भारतीय रेलवे और मध्‍य प्रदेश सरकार जल्‍द ही संयुक्‍त उद्यम कंपनी का गठन करेंगी। राज्‍य सरकार ने मंजूरी दे दी है। अगले वर्ष गुड़ी पड़वा पर इसे मूर्त रूप दिया जायेगा।’

झारखंड के देवघर में हवाईअड्डे के विकास के लिए समझौता

            झारखंड के देवघर जिले में देवघर हवाईअड्डे के विकास के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और झारखंड सरकार ने त्रिपक्षीय समझौता दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। 

         मौजूदा देवघर हवाईअड्डे को विकसित करके उसे ए-320 और सी-130 विमानों के संचालन में सक्षम बनाया जाएगा। समझौते पर हस्ताक्षर संबंधी समारोह मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित हुआ। उल्लेखनीय है कि देवघर हवाईअड्डे के पास इस समय 53.41 जमीन है और झारखंड सरकार ने 600.34 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। इसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंप दिया जाएगा। हवाईअड्डे के विकास, संचालन और रख-रखाव के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, झारखंड सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण क्रमशः 200 करोड़ रुपए और 50 करोड़ रुपए प्रदान करेंगे। 

             देवघर हवाईअड्डे के विकास के लिए दो वर्ष की समयसीमा निर्धारित की गई है। इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास, नागारिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, झारखंड के यातायात मंत्री सी.पी. सिंह, सांसद राम टहल चौधरी और सांसद निशीकांत दुबे भी उपस्थित थे। इनके अलावा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. गुरू प्रसाद महापात्रा, झारखंड सरकार की प्रमुख सचिव सुश्री राजबाला वर्मा, झारखंड सरकार के विकास आयुक्त अमित खरे, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सदस्य आयोजना सुधीर रहेजा, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के आरईडी (ईआर) संजय जैन, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अपर निदेशक एच.एस. चौधरी, रांची के विमानपत्तन निदेशक अनिल विक्रम तथा झारखंड सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

             केन्द्रीय नागारिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री रघुबर दास, झारखंड के यातायात मंत्री सी.पी. सिंह और सांसद निशीकांत दुबे की उपस्थिति में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (ईआर) संजय जैन, झारखंड सरकार के उप सचिव यातायात (नागारिक उड्डयन) राम नारायण राम और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अपर निदेशक ग्रुप कैप्टन एच.एस. चौधरी, झारखंड के देवघर जिले में देवघर हवाईअड्डे के विकास संबंधी समझौता दस्तावेज का आदान-प्रदान करते हुए।

मणिपुर को 48 करोड़ का अनुदान

               मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह ने यहां पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह से मुलाकात की।

          राज्य में चलने वाली तमाम परियोजनाओं से संबंधित विस्तृत विषयों पर चर्चा की। मणिपुर के मुख्यमंत्री और पूर्वोत्तर विकास राज्य मंत्री के बीच अकेले में मुलाकात हुई। उसके बाद राज्य सरकार तथा पूर्वोत्तर राज्य विकास मंत्रालय के अधिकारियो के साथ एक संयुक्त बैठक में दोनों नेताओं ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान इंफाल के पास खेल विश्वविद्यालय की स्थापना पर भी चर्चा की गई, जिसकी घोषणा लगभग दो वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी। 

            बहरहाल, कुछ प्रक्रिया और भू-अधिग्रहण संबंधी मुद्दों के कारण इसमें विलंब हो गया था। बैठक में फैसला किया गया कि खेल मंत्रालय के साथ बातचीत करके परियोजना को तेजी के साथ पूरा किया जाएगा। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि एनएलसीपीआर के जरिए पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय मणिपुर को 48 करोड़ रुपए का अनुदान देगा, ताकि खुमन-लाम्पक खेल परिसर के हॉकी स्टेडियम में फ्लड-लाईट लगाई जा सकें। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय राज्य के विभिन्न जिलों में महिलाओं के बाजार के निर्माण के लिए मणिपुर सरकार की मदद करेगा।

              मणिपुर के विभिन्न जिलों में मिनी-सचिवालयों के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा गया, जिस पर आगे चलकर अमल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कुछ महीने पहले ‘हवाई अस्पताल-एम्बुलेंस’ हैलीकॉप्टर सेवा शुरू करने का अभिनव विचार पेश किया था। इसे पूर्वोत्तर परिषद के जरिए पूरा किया जाएगा। इस सेवा के शुरू हो जाने से दूर-दराज के इलाकों में रहने वालों को बहुत लाभ होगा, जिन्हें आसानी से स्वास्थ्य केन्द्रों पर पहुंचने में कठिनाई होती है। हवाई अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहेंगे। 

            ओपीडी सुविधाओं से यह लैस रहेगा। हैलीकॉप्टर के जरिए आवश्यकता पड़ने पर बीमार व्यक्तियों को ले जाया जाएगा। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बिरेन सिंह को सुझाव दिया कि दिल्ली में मणिपुर के विभिन्न दस्तकारी और अन्य समृद्ध विरासत को पेश करने का आयोजन करें, ताकि पूरा देश उनसे लाभान्वित हो सकें।

जल क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत व बवेरिया  का संयुक्‍त दल

           केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने जल क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए भारत और बवेरिया के बीच संयुक्‍त दल के गठन का सुझाव दिया है। 

             सुश्री भारती ने यह सुझाव उस समय दिया जब जर्मनी के बवेरिया प्रांत की पर्यावरण मंत्री सुश्री उलरिक शाफ नई दिल्‍ली में उनसे मिलीं। दोनों नेताओं ने जल संसाधन क्षेत्र में पारस्‍परिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। सुश्री भारती ने कहा कि जर्मनी की डेन्‍यूब नदी की सफाई के बारे में बवेरिया प्रांत का बहुत अच्‍छा अनुभव है। 

          भारत गंगा संरक्षण कार्यक्रम में उसके इस अनुभव का लाभ उठा सकता है। मंत्री ने बवेरिया की मंत्री को भारत के न‍मामि गंगे कार्यक्रम की विस्‍तृत जानकारी देते हुए इस कार्यक्रम में बवेरिया के सहयोग की अपील की। 

          केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए बवेरिया की मंत्री ने कहा कि बवेरिया और भारत जल संसाधन के क्षेत्र में अपने अनुभवों और ज्ञान का आदान प्रदान करेंगे। सुश्री शाफ ने सुश्री उमा भारती को बवेरिया आने का भी निमंत्रण दिया।

राष्ट्रीय राइफल्स पर पुस्तक का विमोचन

            साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भारतीय सेना के उग्रवाद विरोधी दल (काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स) राष्ट्रीय राइफल्स के इतिहास पर लिखी पुस्तक “होम ऑफ द ब्रेव” का विमोचन किया। 

          यह पुस्तक नितिन ए गोखले, रक्षा एवं सुरक्षा विश्लेषक और ब्रिगेडियर एस के चटर्जी (सेवानिवृत्त) द्वारा लिखी गई है। इस पुस्तक के विमोचन के अवसर पर सेना प्रमुख (सीओएएस), राष्ट्रीय राइफल्स के महानिदेशक, राष्ट्रीय राइफल्स महानिदेशालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी समेत पुस्तक के लेखक भी शामिल हुए। “होम ऑफ द ब्रेव” पुस्तक में राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के शुरुआती इतिहास, इसके संगठन, इसकी स्थापना और पंजाब, उत्तर-पूर्व (पूर्वोत्तर) तथा जम्मू और कश्मीर में तैनाती के बारे में बताया गया है।

              राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) जो एक अभेद्य उग्रवाद विरोधी दल (काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स) है, ने ऑपरेशनों से कई ख्यातियां अर्जित की है।इसके साथ ही राष्ट्र की सुरक्षा के अपने प्रमुख जनादेश को पूरा करने के अलावा इस बल (फोर्स) ने लोगों के दिलों और दिमागों को जीतने के लिए कई नरम उपाय भी किए हैं- एक महत्वपूर्ण और मूल्यवान अभ्यास जिसे भारतीय सेना ने भी सराहा और स्वीकार किया है। यह पुस्तक भारतीय सेना के पेशेवराना अंदाज और सैन्य नैतिकता तथा मूल्यों को मजबूत करने में राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) की भूमिका प्रतिबिंबित करती है। 

           “होम ऑफ द ब्रेव” पुस्तक सेना की सभी इकाइयों और सेना प्रशिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) की उपलब्धियों के एक प्रामाणिक रिकॉर्ड के रूप में भी कार्य करेगा। रक्षा नीति योजनाकारों, शोध विद्वानों और सैन्य इतिहासकारों के लिए यह पुस्तक तथ्यात्मक और अच्छी तरह से सिलसिलेवार जानकारी प्रदान करती है।