Monday, 31 July 2017

आयकर रिटर्न दाखिल करने की तिथि अब 5 अगस्‍त

     आयकर रिटर्न की ई-फाइलिंग के लिए फिलहाल ई-फाइलिंग वेबसाइट पर आधार अथवा आधार के लिए आवेदन करने पर मिली पावती संख्‍या को दर्ज कर देना ही पर्याप्‍त होगा। 

        इसके बाद आधार से पैन को वास्‍तव में 31 अगस्‍त, 2017 से पहले कभी भी जोड़ा जा सकता है। हालांकि, जब तक पैन से आधार को नहीं जोड़ा जाएगा या लिंक किया जाएगा, तब तक आयकर रिटर्न की प्रोसेसिंग नहीं होगी। 
  रिटर्न की ई-फाइलिंग में सहूलियत के लिए आयकर रिटर्न की ई-फाइलिंग की तिथि 5 दिन आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है। अब आयकर रिटर्न 5 अगस्‍त, 2017 तक दाखिल किया जा सकता है।

स्वच्छ गंगा मिशन ने 425 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी

     राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की कार्यकारी समिति ने यहां अपनी चौथी बैठक में सीवेज से जुड़े बुनियादी ढांचे, घाटों के विकास और शोध के क्षेत्र में 425 करोड़ रुपये की लागत वाली सात परियोजनाओं को मंजूरी दी। 

         उत्तर प्रदेश और बिहार में सीवेज (दूषित जल की निकासी) की तीन-तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। उत्तर प्रदेश में उन्नाव, शुक्लागंज और रामनगर के लिए जल अवरोधन यानी पानी का बहाव रोकने, बहाव में परिवर्तन और एसटीपी (सीवेज शोधन संयंत्र) से जुड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन तीनों परियोजनाओं का उद्देश्य 29 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की सीवेज शोधन क्षमता (उन्नाव में 13 एमएलडी, शुक्लागंज में 6 एमएलडी और रामनगर में 10 एमएलडी) सृजित करना है। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर 238.64 करोड़ रुपये की लागत आएगी। 
        वहीं, बिहार में सुल्तानगंज, नौगछिया और मोकामा में 175 करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं से 27 एमएलडी की सीवेज शोधन क्षमता (सुल्तानगंज में 10 एमएलडी, मोकामा में 8 एमएलडी और नौगछिया में 9 एमएलडी) सृजित होगी।
        इन सभी छह परियोजनाओं पर आने वाली परिचालन और रख-रखाव लागत को केन्द्र सरकार 15 साल तक वहन करेगी। इन परियोजनाओं के लिए 100 फीसदी केंद्रीय सहायता दी जाएगी। यहां पर इस बात का उल्‍लेख करना भी आवश्‍यक है कि उन्‍नाव और सुल्‍तानगंज परियोजनाओं का क्रियान्‍वयन हाइब्रिड वार्षिकी पर आधारित पीपीपी मॉडल के अंतर्गत किया जाएगा, जिसके तहत पूंजीगत लागत का 60 प्रतिशत एसटीपी का निर्माण करने वाले ठेकेदार को अगले 15 वर्षों की अवधि के दौरान दिया जाएगा। ठेकेदार को इस राशि का भुगतान शोधित अपशिष्‍ट जल के अपेक्षित मानकों पर खरा उतरने से संबंधित उसके कार्य प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।
      पानी और तलछट दोनों में ही गंगा नदी के गैर-दुर्गंधयुक्‍त गुणों को समझने के लिए 4.96 करोड़ रुपये की लागत वाले एक शोध अध्ययन को भी मंजूरी दी गई थी।यह अध्‍ययन राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग शोध संस्थान (एनईईआरआई) द्वारा किए गए शोध कार्य के एक विस्‍तार के रूप में होगा, ताकि नदियों के पानी में निहित विशेष गुणों के बारे में पता लगाया जा सके। इस शोध के तहत इन विशेष गुणों के पीछे के वैज्ञानिक कारणों पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि इन खूबियों को अक्षुण्‍ण बनाए रखने की रणनीति तैयार की सके।

6 लाख से कम आय वाले परिवार के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता

       केन्द्र सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के छात्रों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील है।

     उच्च शिक्षा में गरीब छात्रों की पर्याप्त भागीदारी के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है। केन्द्र सरकार की योजना के अंतर्गत कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों को छात्रवृत्ति योजना के तहत मदद दी जा रही है। इसके तहत 6 लाख प्रतिवर्ष से कम आय वाले परिवार के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के दौरान दैनिक खर्च के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। किसी बोर्ड परीक्षा में 10अ2 पैटर्न या इसके समकक्ष नियमित पाठ्यक्रम में सफल हुए छात्रों में से संबंधित संकाय में 80 फीसदी अंक प्राप्त करने वाले ऐसे छात्र योजना के तहत पात्र है जिन्हें किसी अन्य छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल रहा है।
         यह जानकारी केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. मेहन्द्र नाथ पाण्डेय ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होनें बताया की 4.50 लाख रुपये से कम आय वाले माता-पिता के बच्चे को पढ़ाई के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है। इसके तहत मान्यता प्राप्त व्यावसायिक पाठ्यक्रम की अवधि और अतिरिक्त के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है।

किशनगंगा परियोजनाओं से 4458.69 मिलियन यूनिट बिजली

       विद्युत, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने राज्‍य सभा में एक लिखित प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया कि एनपीसी द्वारा अपनी दो निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाओं अर्थात पार्बती-क्ष्क्ष् पनबिजली परियोजना (800 मेगावाट) और किशनगंगा पनबिजली परियोजना (330 मेगावाट) से 4458.69 मिलियन यूनिट (एमयू) अतिरिक्‍त बिजली (डिजाइन ऊर्जा पर आधारित) का उत्‍पादन किया जाएगा। 

    हिमाचल प्रदेश स्‍थित पार्बती-क्ष्क्ष् पनबिजली परियोजना अक्‍टूबर, 2018 में चालू होगी, जबकि जम्‍मू-कश्‍मीर स्‍थित किशनगंगा पनबिजली परियोजना को जनवरी, 2018 में चालू किया जाएगा। देश में पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति की स्‍थिति के बारे में जानकारी देते हुए गोयल ने कहा कि वर्तमान समय में देश भर में कुल मिलाकर 11792.5 मेगावाट की 41 पनबिजली परियोजनाएं (25 मेगावाट से ज्‍यादा) निर्माणाधीन हैं। 
       मंत्री ने कहा कि उपर्युक्‍त सभी परियोजनाएं तय समय से पीछे चल रही हैं, जिसके कई कारण हैं। प्राकृतिक आपदाएं, भौगोलिक कारक, वन मंजूरी एवं भूमि अधिग्रहण में देरी और कानून एवं व्‍यवस्‍था की समस्‍याएं इन कारणों में शामिल हैं। गोयल ने सदन को बताया कि लंबित परियोजनाओं के त्‍वरित क्रियान्‍वयन के लिए सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। 
       केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 73 (एफ) को ध्‍यान में रखते हुए निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाओं (25 मेगावाट से ज्‍यादा) पर करीबी नजर रखी जा रही है। परियोजना स्‍थल का मुआयना करके और डेवलपरों तथा अन्‍य हितधारकों के साथ बातचीत करके हर परियोजना की प्रगति पर निरंतर नजर रखी जाती है।
       विद्युत मंत्रालय द्वारा गठित विद्युत परियोजना निगरानी पैनल (पीपीएमपी) भी स्‍वतंत्र रूप से पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति पर करीबी नजर रखता है। विद्युत मंत्रालय भी सीईए के संबंधित अधिकारियों, उपकरण निर्माताओं, राज्‍यों के उपक्रमों- परियोजना डेवलपरों इत्यादि के साथ मौजूदा पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति की संख्‍या नियमित रूप से करता है।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में 50 दिन अतिरिक्त अकुशल रोजगार उपलब्ध

         सरकार ने जानकारी दी कि कठिनाई के समय में होने वाले पलायन को रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। राज्य सभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि मंत्रालय ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा के तहत 50 दिन के लिए अतिरिक्त अकुशल रोजगार उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए हैं। 2016-17 के दौरान मनरेगा के अंतर्गत सात सूखा प्रभावित राज्यों को 150 दिन के काम की अनुमति दी गई। 

   वर्तमान वर्ष में इस प्रावधान के तहत केरल और पुद्दुचेरी को काम दिया गया है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ग्रामीण और शहरी अंतर को पाटने तथा ग्रामीण इलाकों से शहरी क्षेत्रों में होने वाले पलायन को रोकने के उद्देश्य से श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण केंद्रों का भी निर्माण कर रहा है। 
    मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि स्वतंत्र आकलनकर्ताओं के जरिये मंत्रालय द्वारा कराए गए अध्ययन में पाया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के परिणामस्वरूप विशेष मौसम में होने वाले पलायन में कमी आई है। अन्य अध्ययनों में भी दर्शाया गया कि घर के नजदीक काम देने और कार्यस्थल पर उचित माहौल उपलब्ध कराने से पलायन कम करने में मनरेगा का प्रत्यक्ष और सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
           उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा ऐसे अध्ययनों का सार ‘मनरेगा समीक्षा’ नामक प्रकाशन में दिया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की सिफारिश पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान ने पलायन की समस्या पर दो अध्ययन करवाए हैं। 
        इनके नाम हैं, कठिन समय में होने वाले पलायन पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम का प्रभाव : भारत के चयनित राज्यों का एक अध्ययन और जनजातीय लोगों के पलायन पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम का प्रभाव : पश्चिम बंगाल के जंगलमहल जिले में एक मामले का अध्ययन।