Tuesday, 10 January 2017

भारतीय रेल पर हर दिन 22.3 मिलियन यात्रियों का बोझ

     
            भारतीय रेल रेलों से प्रतिदिन करीब 22.3 मिलियन आरक्षित और अनारक्षित यात्रियों को उनके गंतव्य पर पहुंचाती है। इन यात्रियों से प्राप्त होने वाला दैनिक राजस्व करीब 130 करोड़ रुपये है। जिसमें से 80 करोड़ रुपये आरक्षित से, 42 करोड़ रूपये गैर उपनगरीय से और 8 करोड़ रुपये उपनगरीय से होते हैं।

        रेलमंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने डिजिटल लेन-देन के माध्यम से गैर किराया राजस्व में वृद्धि के लिए नीति पहलों का शुभारंभ किया। इन पहलों में आउट ऑफ होम विज्ञापन, मांग पर सामग्री, रेलों की ब्रॉंडिंग, गैर किराया राजस्व नीति, एटीएम नीति और आसान टिकट प्रक्रिया को प्रोत्साहन देना शामिल है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर रेल नेटवर्क पर एक वृत्तचित्र फिल्म भी जारी की। रेलमंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। भारतीय रेल में गैर-किराया राजस्व वृद्धि के लिए बहुत से नए सृजनात्मक अभिनव विचारों और गैर किराया राजस्व में कई नीति पहलों को शामिल कर लिया गया है। 

         डिजिटल लेन-देन से टिकिट प्रक्रिया को आसान बनाने की भी कई पहलें की गई हैं। इनमें आईआरसीटीसी कनेक्ट एप के अलावा मोबाइल एप पर यूटीएस पर अतिरिक्त भुगतान विकल्प शामिल है। वर्तमान में सिर्फ आर-वॉलेट के माध्यम से ही भुगतान विकल्प हैं। निजी वॉलेट्स (पेटीएम और मोबिक्विक) के माध्यम से नकदी रहित भुगतान सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त भविष्य में और अधिक वॉलेट्स (जैसे एसबीआई बडी) को भी समाकलित किया जाएगा। अप्रैल से नवम्बर, 2016 की अवधि के दौरान नकदी रहित आय का प्रतिशत आरक्षित वर्ग में 58 प्रतिशत था, गैर उपनगरीय में 7 प्रतिशत और उपनगरीय में 4 प्रतिशत था। 

        भारतीय रेल में नकदी रहित भुगतान को प्रोत्साहन देने के क्रम में आईवीआरएस के माध्यम से आरक्षित और अनारक्षित दोनों ही मामलों में टिकटिंग और कार्डों के द्वारा भुगतान की सुविधा के लिए पवाइंट और सेल मशीनें (पीओएस), स्टेशनों पर टिकट वेंडिंग मशीनें, इंटरनेट और मोबाइल एप्लीकेशन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ वॉलेट के माध्यम से अतिरिक्त नकदी रहित भुगतान विकल्पों की सुविधा प्रदान की जा रही है। 

           करीब 2084 स्थलों पर 2967 पीओएस मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं । इसके अलावा उपनगरीय स्टेशनों (483 स्टेशन) और ए1, ए और बी श्रेणी के स्टेशनों (709 स्टेशन) के सभी आरक्षण केंद्रों (3300) पर पीओएस मशीनें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। महत्वपूर्ण गैर-उपनगरीय स्टेशनों को भी पीओएस मशीनें प्रदान की जायेंगी। पीआरएस केंद्रों पर पीओएस मशीनों से कुल दैनिक आय का 3.5 से 4 प्रतिशत के करीब है। आरक्षित वर्ग में नकदी रहित लेनदेन के प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की गई है। यह वर्ष 2015-16 के औसत 58 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 68 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अनारक्षित वर्ग में भी वृद्धि दर्ज की गई है। यह 6.5 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

पशुओं के लिए भारत में अभी तक कोई समग्र कानून नहीं !

           
        पशुओं की रक्षा-सुरक्षा के लिए भारत में अभी तक कोई समग्र कानून नहीं है। हालांकि अब भारत सरकार पशु कल्याण, रक्षा-सुरक्षा के लिए कानून बनाने की दिशा में संवेदनशील है।

           कानून का मसौदा तैयार है। अब देश के बाशिंदों से सुझाव मांगे गये हैं। नए कानून के तहत पशुओं खास तौर कुत्ता आदि की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त की जा सकेगी। पशुओं को अनावश्यक दर्द से मुक्ति दिलाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता (स्वान प्रजनन और विपणन) निवारण नियम, 2016 की अधिसूचना पर सुझाव आमंत्रित किए है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पशु क्रूरता (स्वान प्रजनन और विपणन) निवारण नियम, 2016 की अधिसूचना पर सुझाव आमंत्रित किए हैं।

             मंत्रालय सार्वजनिक जानकारी के लिए भारत के राजपत्र में प्रस्तावित मसौदा नियम अधिसूचित करेगा। कोई भी इच्छुक व्यक्ति नियमों के प्रकाशित होने के 30 दिनों के भीतर केन्द्र सरकार को प्रारूप के लिए अपने लिखित सुझाव भेज सकता है। सुझाव उप सचिव, पशु कल्याण प्रभाग, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली को भेज सकते हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा कि अब तक देश में स्वान के प्रजनन, बिक्री और खरीद पर कोई नियम नहीं थे। मंत्री ने उम्मीद जताई कि स्वान की खरीद और बिक्री को ऑनलाइन बना दिया जाएगा। 

        नियमों का उद्देश्य स्वान प्रजनकों और उनके विपणकों को जवाबदेह बनाना और इस प्रक्रिया में किसी भी क्रूरता की सजा से बचाना है। इसमें प्रजनकों और प्रतिष्ठानों के अनिवार्य पंजीकरण से संबधित कोई विशेष नियम या दिशा- निर्देश भी नहीं हैं। स्वान के प्रजनन और उनके विपणन व्यापार नियमों में भी तेजी से विकास किया जाएगा। 

          प्रस्तावित नियमों में, सभी स्वान प्रजनकों और स्वान प्रजनन प्रतिष्ठानों को संबंधित राज्य सरकारों के राज्य पशु कल्याण बोर्ड के साथ खुद को अनिवार्य रुप से पंजीकृत कराना होगा। स्वान प्रजनकों के लिए यह अनिवार्य है कि वह नर और मादा स्वान के नस्लों, ब्रिकी, खरीद, मौत की संख्या, पुनर्वास आदि का समुचित रिकॉर्ड बनाए रखें। हर स्वान प्रजनक को प्रतिवर्ष स्वान की ब्रिकी, व्यापार या अन्य जानकारी की वार्षिक रिपोर्ट राज्य बोर्ड को प्रस्तुत करनी आवश्यक होगी।

चौबीस घंटे बिजली’का रोडमैप

           
         भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने दिल्‍ली में तमिलनाडु के साथ उज्‍ज्‍वल डिस्‍कॉम आश्‍वासन योजना (उदय) के लिए एक सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर किये। 

         यही नहीं, इस राज्‍य के साथ ‘सभी के लिए चौबीस घंटे बिजली रोडमैप के दस्‍तावेज पर हस्‍ताक्षर करने के साथ ही देश में एक को छोड़ सभी 28 राज्‍यों और सभी सातों केन्‍द्र शासित प्रदेशों के लिए रोडमैप को अब अंतिम रूप दे दिया गया है। इसका क्रियान्‍वयन शुरू कर दिया गया है। यह सहकारी संघवाद के सिद्धांतों पर आधारित इस पहल की दिशा में सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण मील का पत्‍थर है। वर्ष 2019 तक सभी नागरिकों, प्रतिष्‍ठानों को विश्‍वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुलभ कराना भारत के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के राष्‍ट्रीय विजन के मूल में है। 

          विद्युत मंत्रालय का लक्ष्‍य इसे मूर्त रूप प्रदान करना है। पीएफए से कई राज्‍यों को निवेश से संबंधित खाई को पाटने में भी मदद मिली है, जो सभी के लिए चौबीस घंटे बिजली सुनिश्चित करने हेतु अत्‍यंत आवश्‍यक है। चूंकि विद्युत एक समवर्ती विषय है। सरकार का फोकस सहकारी संघवाद पर है, इसलिए पहला मुख्‍य काम प्रत्‍येक राज्‍य के लिए रोडमैप तैयार करना, उस पर सहमति प्राप्‍त करना था।

          विद्युत मंत्रालय और केन्‍द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के  तहत हर राज्‍य के लिहाज से विशिष्‍ट रोडमैप तैयार किये गये। पीएफए’ पहल के तहत राज्‍यों के प्रयासों में और वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय अब उन सभी घरों में अंतिम छोर तक बिजली मुहैया कराने के लिए आवश्‍यक निवेश का वित्त पोषण करने हेतु विशेष योजना तैयार कर रहा है। जिन्‍हें अब तक दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) और अन्‍य राज्‍य स्‍तरीय योजनाओं के दायरे में नहीं लाया जा सका है।
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फिल्‍म सह-निर्माण के लिए भारत व पुर्तगाल के बीच समझौता !

             भारत के सूचना और प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन राठौड़ और पुर्तगाल के संस्‍कृति मंत्री लुईस फिलीप कास्‍त्रो मेंडेस के बीच बैठक में फिल्‍म सह-निर्माण की चर्चा की गई। 

       भारत और पुर्तगाल ने फिल्‍म क्षेत्र में सह-निर्माण समझौते के तौर तरीके तैयार करने पर सहमति व्‍यक्‍त की है। ऐसे समझौतों के वैधानिक पहलुओं को ध्‍यान में रखते हुए इस समझौते को समय सीमाबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा। दोनों देशों के सरकारी प्रसारकों के बीच समझौता की संभावनाओं और बेहतरीन तरीकों तथा तकनीकी एवं सामग्री से संबंधित मुद्दों पर सहयोग के बारे में भी चर्चा की गई। सूचना और प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन राठौड़ और पुर्तगाल के संस्‍कृति मंत्री लुईस फिलीप कास्‍त्रो मेंडेस के बीच के हुई बैठक में यह चर्चा की गई। 

              विचार-विमर्श के दौरान कर्नल राठौड़ ने पुर्तगाल के मंत्री को देश में फिल्‍म सुविधा कार्यालय के जरिए विदेशी फिल्‍म निर्माताओं को मंजूरी के लिए एकल खिड़की उपलब्‍ध कराने की सूचना और प्रसारण मंत्रालय की पहल के बारे में जानकारी दी। उन्‍होंने देश की समृद्ध फिल्‍मी धरोहरों का डिजीटीकरण और उन्‍हें संरक्षित करने के सरकार के प्रतिष्ठित राष्‍ट्रीय फिल्‍म विरासत अभियान के बारे में भी बताया। 

          इस अवसर पर मंत्री ने पुर्तगाल के मंत्री को देश में पत्रकारिता और फिल्‍म निर्माण के प्रमुख शैक्षिक संस्‍थानों क्रमश: भारतीय जनसंचार संस्‍थान (आईआईएमसी) और भारतीय फिल्‍म और टेलीविजन संस्‍थान (एफटीआईआई) के बारे में भी बताया। दोनों देशों के शैक्षिक संस्‍थानों के छात्रों का एक दूसरे के संस्‍थानों में पढ़ने की संभावनाओं पर भी दोनों मंत्रियों ने चर्चा की। दोनों नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा,सूचना और संचार प्रौद्योगिकी तथा स्‍टार्ट-अप के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी बातचीत की। मंत्रियों ने पहुंच बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया के बेहतर तरीकों और अनुभवों को साझा करने पर भी दिलचस्‍पी दिखाई।   

आर्थिक, व्यापार-उद्योग विकास में सहभागी बनेंगे जापान एवं भारत


          वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने जापान के आर्थिक, व्‍यापार एवं उद्योग मंत्री हीरोशिगे सीको की अगुवाई में आये जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्‍वागत किया। 

             इस बात को स्‍मरण किया कि नवम्‍बर, 2016 में भारत के प्रधानमंत्री की जापान यात्रा दोनों देशों के आपसी भागीदारी को और मजबूत करने के लि‍हाज से अत्‍यंत सफल रही थी। उन्‍होंने वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्‍मेलन के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ सार्थक चर्चाएं होने की उम्‍मीद जताई। कहा कि भारत-जापान व्‍यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के क्रियान्‍वयन की गति कमोबेश स्थिर रही है। इसकी गति तेज करने की जरूरत है, ताकि भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार की व्‍यापक संभावनाओं का दोहन किया जा सके। 

            जापान के आर्थिक, व्‍यापार एवं उद्योग मंत्री हीरोशिगे सीको ने ‘मेक इन इंडिया’ के लिए भारत सरकार द्वारा उठाये गये विभिन्‍न कदमों और भारत के विकास के लिए की गई अन्‍य पहलों का स्‍वागत करते हुए कहा कि भारत-जापान सहयोग बढ़ाने की काफी गुंजाइश हैं। उन्‍होंने इस बात का उल्‍लेख किया कि 25 जापानी कंपनियां बड़े ही उत्‍साह के साथ वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्‍मेलन में शिरकत कर रही हैं। 

        जापानी प्रतिनिधिमंडल ने यह आग्रह किया कि भारत में जापान के वाणिज्‍य एवं उद्योग मंडलों (जेसीसीआईआई) द्वारा समय-समय पर उठाये जाने वाले ट्रांसफर प्राइसिंग आकलन के मुद्दे के साथ-साथ अन्‍य मसलों को भी सुलझाये जाने की जरूरत है, ताकि भारत में और ज्‍यादा जापानी निवेश आकर्षित किया जा सके। जापान के व्‍यावसायिक प्रतिनिधियों ने भारत में अपने कारोबार के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही यह भी बताया कि वे भारत में विभिन्‍न क्षेत्रों में अपने व्‍यवसाय का विविधीकरण करना चाहते हैं। इनमें कृषि, वि‍द्युत, रेलवे व लॉजिस्टिक क्षेत्र और एटीएम का निर्माण इत्‍यादि शामिल हैं। 

            उन्‍होंने कहा कि वे भारत के विकास में अपनी ओर से योगदान करना चाहते हैं। श्रीमती सीतारमण ने भारत से जापान को होने वाले विभिन्‍न उत्‍पादों के नि‍र्यात में वृद्धि के लिए जापानी प्रतिनिधिमंडल से आवश्‍यक कदम उठाने का अनुरोध किया। इनमें तिल के बीज, सुरिमी फिश और भारतीय जेनेरिक दवाएं शामिल हैं।  दोनों पक्षों ने यह उम्‍मीद जताई कि वचनबद्धता के निरंतर जारी रहने से दोनों देशों के बीच साझेदारी और ज्‍यादा बढ़कर नये स्‍तर पर पहुंच जायेगी।