Tuesday, 3 October 2017

भारत को नॉलेज सुपर पावर बनाना लक्ष्‍य

     नई दिल्ली। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने नई दिल्ली में सेवाकालीन अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षण हेतु नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) के एक कार्यक्रम प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा (डी.एल.एड) की शुरुआत की। 

     यह शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी सहायता रहित मान्यता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों के समस्‍त सेवाकालीन अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है। अब तक लगभग 15 लाख शिक्षकों को नामांकित किया गया है। यह शिक्षकों की प्रोफेशनल दक्षता बेहतर करने और सूचना एवं संचार आधारित क्षमता निर्माण सुनिश्चित करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) के ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल) मोड में एक पहल है। 
    गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से एनआईओएस देश भर में फैले सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी सहायता रहित मान्यता प्राप्त स्कूलों के सेवाकालीन शिक्षकों के प्रशिक्षण पहलुओं के तहत उनकी गुणवत्ता और उत्कृष्टता पर अपना ध्यान केंद्रित करता रहा है। 
      इस अवसर पर प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों को मार्च, 2019 तक प्रशिक्षित किया जाएगा। शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा छात्रों के अधिकार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार 31 मार्च 2019 तक लगभग 15 लाख अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षण देगी और पाठ्यक्रम के सफल समापन के बाद शिक्षकों को डिप्लोमा मिलेगा। 
     उन्होंने यह भी बताया कि ‘स्‍वयं’ की शुरुआत के बाद पहले वर्ष में हमने ऑनलाइन प्रशिक्षण में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि 31 मार्च, 2019 के बाद इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि का कोई और विस्तार नहीं किया जाएगा।
      उपेंद्र कुशवाहा, मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री (स्कूली शिक्षा और साक्षरता) ने गुणवत्ता, नवाचार और अनुसंधान के संबंध में शैक्षिक आवश्यकता में नई गतिशीलता लाने की दिशा में श्री प्रकाश जावड़ेकर के ईमानदार प्रयासों की सराहना की, जिसका लक्ष्‍य लोगों को बेहतर कौशल और ज्ञान से युक्‍त करके भारत को एक ‘नॉलेज सुपर पावर’ बनाना है। उन्होंने शिक्षकों की गुणवत्ता बेहतर करने के उद्देश्य के लिए एनआईओएस को भी बधाई दी।

भारत में नवजात शिशुओं की मृत्‍यु दर में गिरावट, 10 लाख बच्‍चों को मृत्‍यु से बचाया

     नई दिल्ली। भारत में 2005 से 5 वर्ष से कम आयु के 10 लाख बच्‍चों को निमोनिया, डायरिया, नवजात शिशु संक्रमण, जन्‍म के समय दम घुटने अभिघात, खसरे और टिटनेस से होने वाली मृत्‍यु से बचाया है। लैनसेट पत्रिका के ताजा अंक में प्रकाशित अध्‍ययन ‘इंडियाज मिलियन डेथ स्‍टडी’ ऐसा पहला अध्‍ययन है जिसको प्रत्‍यक्ष रूप से भारत में बच्‍चों की कारण विशेष मृत्‍यु में हुए बदलावों का अध्‍ययन किया गया है।

      इसे भारत के रजिस्‍ट्रार जनरल द्वारा लागू किया गया है और इसमें 2000-15 के बीच के अकस्‍मात चुने गए घरों को शामिल करते हुए राष्‍ट्रीय और उपराष्‍ट्रीय रूप में बच्‍चों की कारण विशेष मृत्‍यु का अध्‍ययन किया गया है। 
   अध्‍ययन में कहा गया है कि राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के अंतर्गत प्रथमिकता के रूप में तय स्थितियों का बहुत गहरा प्रभाव मृत्‍यु में गिरावट में दिखा। निमोनिया और डायरिया से होने वाली मृत्‍यु में 60 प्रतिशत से अधिक (कारगर इलाज के कारण) की गिरावट आई। जन्‍म संबंधी स्‍वांस कठिनाई और प्रसव के दौरान अभिघात से होने वाली मृत्‍यु में 66 प्रतिशत ( अधिकतर जन्‍म अस्‍पतालों में होने के कारण) की कमी आई।
      खसरे और टिटनेस से होने वाली मृत्‍यु में 90 प्रतिशत (अधिकतर विशेष टीकाकरण अभियान के कारण) की कमी आई। अध्‍ययन में कहा गया है नवजात शिशु कि मृत्‍यु दर (1000 प्रति जन्‍म) में 2000 के 45 शिशुओं से 2015 में 27 हो गई (3.3 प्रतिशत वार्षिक गिरावट) और 1-59 महीने के बच्‍चों की मृत्‍यु दर 2000 के 45.2 से गिरकर 2015 में 19.6 रह गई(5.4 प्रतिशत वार्षिक गिरावट)। 1 - 59 महीने के बच्‍चों के बीच निमोनिया से होने वाली मृत्‍यु में 63 प्रतिशत की कमी आई। 
      डायरिया से होने वाली मृत्‍यु में 66 प्रतिशत तथा खसरे से होने वाली मृत्‍यु में 90 प्रतिशत से अधिक कमी आई। यह गिरावट लड़कियों में रही। लड़कियों में गिरावट संकेत देता है कि भारत में लड़के और लड़कियां समान संख्‍या में मर रही हैं। यह पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी सुधरी स्थिति है। 1-59 माह के बच्‍चों में नियमोनिया तथा डायरिया से होने वाली मृत्‍यु में 2010 व 2015 के बीच महत्‍वपूर्ण कमी आई। 
   यह कमी राष्‍ट्रीय वार्षिक गिरावट को 8-10 प्रतिशत के औसत से रही। गिरावट विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब राज्‍यों में दिखी। मिलियन डेथ स्‍टडी में प्रत्‍यक्ष रूप से 1.3 मिलियन (13 लाख) घरों में मृत्‍यु के कारणों की प्रत्‍यक्ष मॉनिटरिंग की गई। 2001 से 900 कर्मियों द्वारा सभी घरों में रह रहे लगभग 1 लाख लोगों के साक्षात्कार लिए गए जिनके बच्‍चों की मृत्‍यु हुई थी (लगभग 53,000 मृत्‍यु जीवन के पहले महीने में हुई तथा 1-59 महीनों में 42,000 मृत्‍यु)। मृत्‍यु की मॉनिटरिंग में स्‍थानीय भाषा में आधे पन्‍ने में बीमारी के लक्षण और उपचार की जानकारी के साथ साधारण दो पन्‍नों का एक फार्म तैयार किया गया।
       रिकार्डों का डि‍जटीकरण किया गया है। इसमें विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा स्‍वीकृत प्रक्रियाओं का उपयोग करते हुए 400 प्रशिक्षित चिकित्‍सकों में से दो चिकित्‍सकों द्वारा स्‍वतंत्र रूप से मृत्‍यु के कारण को एकरुपता के साथ कोड किया गया है। यह प्रत्‍यक्ष अध्‍ययन है जो परिवारों के साथ आमने-सामने के साक्षात्‍कार पर आधारित है। 
     यह अध्‍ययन छोटे नमूने लेकर मॉ‍डलिंग और प्रोजेक्‍शन पर आधारित नहीं है। अध्‍ययन में निकले परिणाम बताते हैं कि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा उठाए गए रणनीतिक कदम के लाभ दिखने शुरु हो गए हैं और कम गति से आगे बढ़ने वाले राज्‍यों पर फोकस करने के प्रयास सफल हो रहे हैं।

एनएचएआई की नई वेबसाइट, मोबाइल एप लॉन्च

     नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार ने संगठन की विश्‍वस्‍तरीय नई बहुभाषी वेबसाइट लॉन्च की। उन्होंने कहा कि दो महीने के भीतर आम लोग इस वेबसाइट के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों की रेटिंग कर पाएंगे। 

     इस अवसर पर उन्होंने एक प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इन्फॉर्मेशन सिस्टम (पीएमआईएस) मोबाइल एप भी लॉन्च किया जो मोबाइल फोन पर राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित परियोजनाओं की इन-हाउस मॉनिटरिंग की सुविधा प्रदान करेगा।
     दीपक कुमार ने कहा कि एनएचएआई जल्द ही पीएमआईएस डेस्कटॉप और एप संस्करणों का एक सार्वजनिक इंटरफेस लॉन्च करने की योजना बना रहा है, ताकि आम जनता राजमार्ग नेटवर्क के किसी भी परियोजना की वास्तविक समय स्थिति को देख सकें। 
       एनएचएआई की वेबसाइट को अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर तैयार किया गया है और यह एक केन्द्रियकृत मंच प्रदान करता है। इसमें एनएचएआई के विभिन्‍न सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन एक दूसरे से जुड़े हुए हैं तथा उपयोगकर्ताओं के अनुकूल प्रयोग करने के लिए उपलब्‍ध हैं। वेबसाइट में संस्‍थान, एचआर, परियोजनाओं, नीतियों, वीडियो और परियोजना के फोटोग्राफ के बारे में पूरी जानकारी है।
     पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जानकारी को सार्वजनिक किया गया है। इसके अलावा सभी प्रासंगिक सूचनाओं का वर्णन भी वेबसाइट पर बिन्‍दुवार दिया गया है। अपनी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए एनएचएआई ने एक अत्‍याधुनिक प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इन्फॉर्मेशन सिस्टम (पीएमआईएस) विकसित किया है। इसके माध्‍यम से वह डिजिटल रूप से इनकी निगरानी कर रहा है। 
      इसे बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के साथ मिलकर तैयार किया गया है। पीएमआईएस के पास बड़ी संख्‍या में आंकड़े हैं, जिसमें प्रत्‍येक परियोजना से संबंधित 180 से अधिक डेटा संबंधी क्षेत्रों का पता किया जा सकता है तथा पीपीपी परियोजना के लिए 500 फील्‍ड से संबंधित, परियोजनाओं की प्रगति, भूमि अधिग्रहण, अनुबंध की प्रगति, निर्माण की प्रगति, मुआवजा वितरण, टोल और यातायात,रियायत/अनुबंध संबंधी जानकारी उपलब्‍ध रहेगी। 
     राष्‍ट्रीय, क्षेत्रीय स्‍तर के कार्यालय (आरओ), चालू परियोजना (पीआईयू) और परियोजना स्‍तर के डेटा की जानकारी उपलब्‍ध कराने के लिए डैशबोर्डस की एक श्रृंखला तैयार की है। इन डैशबोर्डों में हर परियोजना की अलग-अलग जानकारी उपलब्‍ध कराई जाएगी, जिसकी जिम्‍मेदारी परियोजना निदेशक की होगी और नियमित तौर पर इसकी निगरानी एनएचएआई के अध्‍यक्ष और एनएचएआई के सदस्‍यों द्वारा की जाएगी।
      डैशबोर्ड डेटा के अलावा पीएमआईएस भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) से सुसज्जित है, जो भारतीय नक्‍शे पर एनएचएआई की सभी परियोजनाओं की चित्र सहित भौगोलिक जानकारी प्रदान करता है। पीएमआईएस तक पहुंच की सुविधा प्रदान करने के लिए, जो अभी तक डेस्‍कटॉप संस्‍करण के रूप में उपलब्‍ध है, अब एनएचएआई ने पीएमआईएस एप भी लांच किया है, जिसे बोस्‍टन कंसल्टिंग ग्रुप के सहयोग से तैयार किया जा रहा है।
    यह एप एंड्रॉइड और एप्‍पल दोनों संस्‍करणों में उपलब्‍ध रहेगा और फील्‍ड तथा मुख्‍यालय में काम करने वाले सभी अधिकारियों तक इसकी पहुंच होगी। इस एप में दो अतिरिक्‍त सुविधाएं भी प्रदान कीगई हैं, जिसमें एक टास्‍क मैनेजर है और दूसरा फोटो अपलोड करने की सुविधा प्रदान करने वाला फीचर, जिसके माध्‍यम से परियोजना निदेशक फोटो खींचकर पीएमआईएसपर परियोजना की नवीनतम जानकारी उपलब्‍ध करा सकेंगे।

आंध्र प्रदेश में राष्‍ट्रीय राजमार्गों के लिए एक लाख करोड़ रुपये निवेश की योजना

     विजयवाड़ा। उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि नदियों को आपस में जोड़ने और नदियों को संरक्षित रखना देश के प्रत्‍येक व्‍यक्ति का पवित्र कर्तव्‍य है। 

     उपराष्‍ट्रपति आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में राष्‍ट्रीय राजमार्ग सुधार परियोजना और अंतरदेशीय जल मार्ग परियोजना की आधारशिला रखने के बाद समारोह को संबं‍धोति कर रहे थे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्‍यपाल ईएसएल नरसिम्‍हन, आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एन.चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग, शिपिंग तथा जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नीतिन गडकरी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्‍वी विज्ञान राज्‍य मंत्री वाई.एस.चौधरी तथा अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति उपस्थित थे। 
     उपराष्‍ट्रपति ने आंध्र प्रदेश में 4153 करोड़ रुपये की लागत वाली 6 राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं तथा समर्पित 7 राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखी। 
     उन्‍होंने आंध्रप्रदेश के अमरावती राजधानी क्षेत्र में मु‍कत्‍याला और विजयवाड़ा के बीच कृष्‍णा नदी में अंतरदेशीय जलमार्ग विकास परियोजना की भी आधारशिला रखी। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि 2014 तक आंध्र प्रदेश में राज्‍यमार्गों की कुल लम्‍बाई 4193 किलो मीटर की। 2014 के बाद 3720 किलो मीटर के नये राष्‍ट्रीय राजमार्गों को घोषित किया गया।
      अब आंध्र प्रदेश में राष्‍ट्रीय राजमार्ग की लम्‍बाई 7913 किलोमीटर है। आंध्र प्रदेश में विभिन्‍न योजनाओं के अंतर्गत राष्‍ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना है। उपरष्‍ट्रपति ने कहा कि राष्‍ट्रीय राजमार्ग 340 के रायाचोटी से अंगल्‍सु सेक्‍शन की पेव शोल्‍डर की दो लेन का निर्माण किया जाएगा।
    इसकी लम्‍बाई 57.98 किलो मीटर होगी और इस पर 319.28 करोड़ रुपये की लागत आएगी। उन्‍होंने कहा कि इन परियोजनाओं के अंतर्गत एनएच-43 पर विजयानगरम शहर तक 4 लेन बाइपास निर्माण का काम शुरू किया जाएगा। इसकी लम्‍बाई 17.2 किलो मीटर होगी और इस पर 429.43 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
     एनएच 216 के इपूरुपलेम-ओंगोल सेक्‍शन के 57.87 किलो मीटर लम्‍बाई वाली पेव शोल्‍डर की दो लेन की 574.19 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना विचाराधीन है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि कृष्‍णा और गोदावरी नदियों को जोड़ने वाली पत्‍तीसीमा लिफ्ट सिचांई योजना से कृष्‍णा नदी में पानी कम होने से सुखे जैसी स्थिति से कृष्‍णा डेल्‍टा को बचाया जा सका। 
    उन्‍होंने कहा कि जितनी अधिक नदियों को आपस में जोड़ा जाएगा उतना ही बड़ा लाभ देश को अन्‍न देने वाले किसानों को लाभ होगा। प्रत्‍येक व्‍यक्ति को इस नेक काम में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। उपराष्‍ट्रपति ने स्‍कूलों में तेलुगू भाषा को अनिवार्य बनाने के लिए मुख्‍यमंत्री को बधाई दी। 
      उन्‍होंने आंध्र प्रदेश में नौकरियों में तेलुगू के ज्ञान को अनिवार्य बनाने की सलाह दी और कहा कि राज्‍य के स्‍कूलों की भाषाओं पर ध्‍यान दिए‍ बिना तेलुगू को सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। 
     उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि वह दूसरी भाषाओं को सीखने के विरोधी नहीं हैं, केवल यह चाहते हैं कि लोग दूसरी भाषाओं को सीखने से पहले अपनी मातृभाषा में दक्ष हो जाएं।

भारत में रजवाड़ों का विलय सरदार पटेल के ही अथक प्रयास से हुआ

   गुजरात। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि गाँधी जयंती के पावन अवसर पर मुझे प्रात:काल बापू की समाधि पर जाकर श्रद्धा सुमन अर्पित करने का और उसके बाद उनके जन्मस्थान पोरबंदर में कीर्ति मंदिर जाकर नमन करने का सौभाग्य मिला। 

    राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि यहाँ का कार्यक्रम भी बापू की स्मृति और आदर्शों से जुड़ा हुआ है। जैसा कि हम सभी जानते है बापू पूरे समाज का समग्र विकास चाहते थे। वे श्रम की गरिमा में विश्वास करते थे। यहाँ आज जिन सुविधाओं की शुरुआत की गयी है उनसे यहाँ के मेहनतकश लोगों का आर्थिक विकास होगा और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। 
    राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि समुद्र तट पर रहने वाले सौराष्ट्र के लोग खारे पानी तथा प्रकृति की अन्य चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी मेहनत से अपने जीवन का निर्माण करते हैं। यहाँ के लोग अपने परिश्रम और पुरुषार्थ के लिए जाने जाते हैं। इस प्रकार इस क्षेत्र के लोग गुजरात की उद्यमशीलता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
   राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि हम सब गुजराती भाई-बहनों के लिए अक्तूबर का मास बहुत ही महत्वपूर्ण महीना है। आज के दिन, पूरे विश्व में अपनी कीर्ति फैलाने वाले महात्मा गांधी का जन्म इसी राज्य में हुआ था। 15 दिन बाद ही गुजराती नूतन वर्ष का आगमन होगा जब पूरे देश में दीवाली का त्योहार मनाया जाएगा। आप सभी को गुजराती नूतन वर्ष और दीवाली की अग्रिम शुभकामनाएं।
    राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि 31 अक्तूबर को हमारे देश के वर्तमान स्वरूप को सुनिश्चित करने वाले लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती हम सब मनाते हैं। भारत की आजादी के निर्णय के समय लगभग चालीस प्रतिशत क्षेत्र 550 से अधिक रजवाड़ों के अधीन था। इन सभी रजवाड़ों का भारत में विलय सरदार पटेल के ही अथक प्रयास से हुआ था। तब के जूनागढ़ रियासत के इस क्षेत्र का भारत के संघ में विलय भी सरदार पटेल की अद्भुत क्षमताओं के कारण ही संभव हो सका था। देश को वर्तमान स्वरुप प्रदान करने के लिए पूरा भारत उनका ऋणी है। हम पूरी श्रद्धा से उनको नमन करते है।
      राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि गुजरात में मैंने यहाँ की उस विशेष ऊर्जा का अनुभव किया है जो गुजरात के किसानो, उद्यमियों और सभी नागरिको में देखने को मिलती है। इसी विशेष ऊर्जा के कारण गुजरात विकास के अनेक पैमानों पर देश में अपना विशेष स्थान रखता है। कृषि, उद्योग, शिक्षा, कला, साहित्य, राजनीति आदि अनेक क्षेत्रों में गुजरात ने देश का गौरव बढ़ाया है। कोस्टल गुजरात ने प्राचीन काल से ही देश के विकास में अपना योगदान दिया है।
      देश के बंदरगाहों से होने वाले कुल आवागमन का लगभग 48 प्रतिशत गुजरात के बंदरगाहों से ही होता है। यह गुजरात के लिए गर्व की बात है। प्राचीन काल से ही विख्यात कांडला के बड़े बंदरगाह के अलावा गुजरात में 40 से अधिक बंदरगाह हैं।
     राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि समुद्री मछलियों के कारोबार में गुजरात का देश में पहला स्थान है और इस कारोबार में पूरे देश का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा कोस्टल गुजरात से आता है। फिशिंग हार्बर्स और फिश लैंडिंग सेंटर्स का निर्माण तथा पुराने हार्बर्स और लैंडिंग सेंटर्स को नए तरीके से विकसित करके गुजरात के इस कारोबार को और अधिक बढाया जा सकता है। 
    इसीलिए जिन योजनाओं की आज यहाँ शुरूआत की गई है उनसे यहाँ की अर्थवयवस्था को फायदा होगा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। यूरोपियन यूनियन के मानकों के स्तर पर पहुँचने के प्रयास में यह योजनाएं सहायक सिद्ध होंगी। 
     राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री तथा आज के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनों को साकार रूप देने की दिशा में मुख्यमंत्री रूपाणीजी ने अथक प्रयास किया है और इन योजनाओं को ठोस रूप दिया है। उदाहरण के लिए, मंगरोल के तीसरे चरण की जिस योजना का आज शिलान्यास किया गया है उससे यहाँ की बर्थिंग और लैंडिंग क्षमता में तीन गुने से भी अधिक का इजाफा होगा। 
   राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि आज यहाँ 400 नौकाओं को बर्थिंग और लैंडिंग सुविधा प्रदान करने की क्षमता है, जिसे बढाकर 1400 नौकाओं को यह सुविधाएँ दी जा सकेगी।
        राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि इन सभी योजनाओं के विस्तार में जाने पर उनके व्यापक और दूरगामी फायदे स्पष्ट हो जाते हैं। आज शुरू की गयी योजनाओं के कारण, यहाँ के मछुआरे बंधुओं के लिए आज का दिन ऐतिहासिक सिद्ध होगा, ऐसा मेरा विश्वास है। 
    राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि इस क्षेत्र के 45 गांवों में पानी की आपूर्ति को बेहतर बनाने की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना का शुभारंभ करके मुझे हार्दिक प्रसन्नता हुई है। इस क्षेत्र की जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इन योजनाओं के लिए मैं राज्य सरकार को, गुजरात की जनता को और खासकर सौराष्ट्र के लोगों को बधाई देता हूँ।
      राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि अंत में, मैं राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्य स्मृति में आप सब के साथ एक कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से बापू को सादर नमन करता हूँ।