Friday, 9 March 2018

खाद्यान्नों का रिकॉर्ड कुल 275.68 मिलियन टन उत्पादन

   नई दिल्‍ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि पिछले तीन वर्षों में सरकार द्वारा उठाई गईं अनेक नीतिगत पहलों के परिणामस्‍वरूप मौजूदा वर्ष में देश में खाद्यान्‍न का रिकॉर्ड उत्‍पादन हुआ है। 

  वर्ष 2017-18 के लिए देश में कुल 275.68 मिलियन टन खाद्यान्‍न उत्‍पादन हुआ है जो कि वर्ष 2013-14 में हासिल 265.04 मिलियन टन खाद्यान्‍न उत्‍पादन की तुलना में 10.64 मिलियन टन (लगभग 4 प्रतिशत) ज्‍यादा है।
   वर्तमान वर्ष का उत्‍पादन 2011-12 से 2015-16 के औसत खाद्यान्‍न उत्‍पादन के मुकाबले लगभग 19 मिलियन टन ज्‍यादा है। बागवानी फसलें जिनका पोषणिक सुरक्षा में अहम योगदान है, का भी वर्ष 2016-17 में रिकॉर्ड उत्‍पादन हुआ है जो कि 300 के आंकडे को पार करके 305 मिलियन टन हो गया है जो कि पिछले साल के मुकाबले 4.8 प्रतिशत ज्‍यादा है। 
     फलों का उत्‍पादन 93 मिलियन टन और सब्‍जी उत्‍पादन 178 मिलियन टन के आंकडे को पार कर गया है। इस उपलब्धि को हासिल करने में कृषि विश्‍वविद्यालयों एवं आईसीएआर द्वारा विकसित उन्‍नत तकनीकों का विशेष योगदान है। 
    कृषि मंत्री ने आगे कहा कि राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि को  अधिक टिकाऊ और लाभप्रद बनाने के लिए बाधाओं को दूर करने के लिए तैयार हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि अनेक चुनौतियों के बावजूद कृषि विश्‍वविद्यालय एवं आईसीएआर प्रणाली द्वारा समय समय पर अनेक उल्‍लेखनीय सफलताएं हासिल की गईं हैं जिनसे देश की कृषि व्‍यवस्‍था और कृषि उत्‍पादन को बढ़ाने में मदद मिली है। इन उपलब्धियों में मुख्‍यतया: उत्‍पादन और उत्‍पादकता में बढ़ोतरी करना शामिल है जिससे किसानों विशेषकर छोटे व सीमांत किसानों की आय में वृद्धि होना शामिल है।
     प्रधानमंत्री के विजन ''वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करना'' को ध्‍यान में रखते हुए इस प्रणाली द्वारा इस दिशा में अग्रणीय कदम उठाये गये हैं। वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के संकल्‍प को साकार करने की दिशा में कृषि विश्‍वविद्यालयों एवं आईसीएआर संस्‍थानों ने  विभिन्‍न राज्‍य एवं केन्‍द्रीय एजेन्सियों के साथ समन्‍वय स्‍थापित करके एक कदम आगे बढ़ाते हुए विभिन्‍न राज्‍यों के लिए ''वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने हेतु रणनीति दस्‍तावेज को तैयार करके जारी किया है।
    इसकी मदद से निश्चित रूप से कृषि की प्रगति और किसानों की खुशहाली को बढ़ाने में मदद मिलेगी । इसके अतिरिक्‍त, नई तकनीकों का विकास करना, एकीकृत कृषि प्रणाली, संस्‍थान निर्माण, मानव संसाधन, कृषि का विविधीकरण, नए अवसर पैदा करना तथा जानकारी के नए स्रोतों का विकास करने पर भी विशेष बल दिया गया है।
   छोटे व सीमांत किसानों और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्‍याओं के समाधान के लिए देश के सभी 15 कृषि जलवायु क्षेत्रों को शामिल करते हुए कुल 45 एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल  तैयार किए गए हैं। इन मॉडलों को देशभर में फैले कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के माध्‍यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।
    इसके साथ ही आईसीएआर द्वारा कुल 623 जिला आकस्मिकता योजनाओं को विकसित करके उनका प्रमाणन किया गया और लगभग 40.9 लाख किसानों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत सरकार की पहल ''सॉयल हैल्‍थ कार्ड'' को सहयोग करने में मिट्टी की जांच के लिए एक मिनीलैब 'मृदापरीक्षक'' का विकास किया गया। 
   कृषि विश्‍वविद्यालयों एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा देशभर में फैले कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के माध्‍यम से 29 राज्‍यों में जलवायु अनुकूल तकनीकों को प्रदर्शित किया जा रहा है और उन्‍हें बढ़ावा दिया जा रहा है। अभी तक कुल 42 जैविक कृषि प्रौद्योगिकियां विकसित की गईं हैं जिनका कि परीक्षण किया गया और इनमें और सुधार किया जा रहा है।
  इसके साथ कृषि शिक्षा,कृषि अनुसंधान, कृषि विस्तार, संकल्प से सिद्धि, मेरा गांव, मेरा गौरव, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रोद्योगिकी हस्तांतरण, सूचना प्रोद्योगिकी के मोर्चे पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
   इस मौके पर कृषि एवं किसान कल्‍याण राज्‍य मंत्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत, नीति आयोग के सदस्‍य डॉ. रमेश चन्‍द, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, आईसीएआर डॉ. त्रिलोचन महापात्र, डेयर के विशेष सचिव सी. राउल, डेयर के वित्‍तीय सलाहकार, इंडियन एग्रीकल्‍चरल यूनिवर्सिटीज एसोसिएशन के अध्‍यक्ष, आईसीएआर में उप महानिदेशक (शिक्षा) डॉ. एन.एस. राठौड, कृषि विश्‍वविद्यालयों के कुलपति एवं संस्‍थानों के निदेशक भी मौजूद थे। 
   इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालयों के कुलपति, आईसीएआर संस्‍थानों के निदेशक एवं आईसीएआर के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्‍तार प्रणाली में सुधार करने के तौर-तरीकों पर विचार-विमर्श करेंगे।

वृहद जल परिवहन प्रणालियों के लिए वैकल्पिक प्रौद्योगिकी समय की मांग

   नई दिल्‍ली। केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश में वृहद जल परिवहन प्रणाली के लिए वैकल्पिक प्रोद्योगिक का इस्‍तेमाल समय की मांग है।

   नई दिल्‍ली में आज ‘‘अधिक मोटाई वाले पाइपों के इस्‍तेमाल’’ पर एक अंतर्राष्‍ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए श्री गडकरी ने पावर ग्रिड और सड़क नेटवर्क की तर्ज पर देश में जल ग्रिडों के वि‍कास की आवश्‍यकता पर जोर दिया।
  उन्‍होंने कहा कि हमारे देश में पानी की कमी नहीं है, लेकिन जल संसाधनों की उचित योजना और प्रबंधन की कमी है। उन्‍होंने कहा कि देश में 25 से 30 प्रतिशत कृषि क्षेत्र से जुड़े कामगार गांव से शहरी इलाकों की तरफ केवल इसलिए पलायन करते हैं, क्‍योंकि उन्‍हें सिंचाई और कृषि के क्षेत्र से जुड़ी अन्‍य समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। 
   ड्रिप सिंचाई के जरिए जल संसाधनों के प्रभावी इस्‍तेमाल के महत्‍व की चर्चा करते हुए श्री गडकरी ने मध्‍य प्रदेश का उदाहरण दिया, जिसने ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देकर कृषि के क्षेत्र में 23 प्रतिशत विकास दर हासिल कर ली है,जबकि राष्‍ट्रीय औसत केवल 4 प्रतिशत है। श्री गडकरी ने 8 लाख करोड़ रुपये के व्‍यय से देश में नदियों को जोड़ने की 30 प्रस्‍तावित परियोजनाओं का जिक्र किया। 
    उन्‍होंने कहा कि हमारे सामने चुनौती है कि हम उपयुक्‍त सस्‍ती, पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी का पता लगाएं,ताकि गुणवत्‍ता से समझौता किए बिना तेजी से जल का हस्‍तांतरण हो सके। केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्‍य मंत्री डॉ. सत्‍यपाल सिंह ने कहा कि हमारी सरकार की सर्वोच्‍च प्राथमिकता ‘हर खेत को पानी’ और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ है, क्‍योंकि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करना प्रधानमंत्री का सपना है।
  उन्‍होंने कहा कि नहरों के जरिए सिंचाई और जल परिवहन काफी महंगा है और पर्यावरण तथा वनों की निकासी तथा भूमि अधिग्रहण जैसी समस्‍याओं के कारण इसमें काफी समय लग जाता है। उन्‍होंने कहा कि मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र में नहरों के स्‍थान पर जल परिवहन के लिए पाइपों का इस्‍तेमाल शुरू कर दिया गया है। डॉ. सिंह ने विशेषज्ञों से आग्रह किया वे ‘हर खेत को पानी’ के उद्देश्‍य पूरा करने के लिए सस्‍ते और पर्यावरण अनुकूल विकल्‍पों का पता लगाएं। 
  जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में सचिव श्री यू.पी. सिंह ने जल परिवहन के लिए अधिक मोटाई वाले पाइपों के फायदों की जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि देश में कई वर्षों से अनेक नहरों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन वह अभी भी पूरा नहीं हुआ है। नहर प्रणाली के विपरीत पाइपों के जरिए जल परिवहन के लिए भूमि अधिग्रहण और वन की निकासी की जरूरत नहीं पड़ती। जल के दूषित होने और वाष्‍पीकरण के कारण नुकसान की समस्‍याएं काफी कम हो जाती है। 
   श्री सिंह ने कहा कि देश को सस्‍ती और पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी की जरूरत है। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि कार्यशाला में विशेषज्ञ ऐसा कोई समाधान निकालेंगे और आश्‍वासन दिया कि उनका मंत्रालय इस बारे में तेजी से कार्रवाई करेगा। एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के तत्‍वावधान में वाप्‍कोस और राष्‍ट्रीय जल विकास एजेंसी ने किया है।
    कार्यशाला में विनिर्माण कंपनियां, जल परिसंपत्ति प्रबंधन से जुड़े संगठन, इंजीनियरिंग विशेषज्ञ, केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों एवं निजी कंपनियों के जल संसाधन विभाग जैसे महत्‍वपूर्ण हितधारक भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में अमरीका, ब्राजील,इटली, चीन और दक्षिण अफ्रीका के भारतीय और विदेशी विशेषज्ञ अपने पेपर प्रस्‍तुत करेंगे।

Thursday, 8 March 2018

महिला उद्यमियों के लिए उद्यम सखी पोर्टल का शुभारंभ

   नई दिल्ली। अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सूक्ष्‍म,लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्रालय एमएसएमई की ओर से आज भारतीय महिला उद्यमियों के लिए एक पोर्टल शुरु किया गया।

   एमएसएमई राज्‍य मंत्री गिरिराज सिंह ने आज यहां एक कार्यक्रम मे पोर्टल का शुभारंभ किया। श्री सिंह ने इस अवसर पर कहा कि‍ देश में इस समय 80 लाख ऐसी महिलाएं हैं जिन्‍होंने अपना कारेाबार शुरु किया है सफलातपूर्व उसे चला रही हैं।
   उन्‍होंने कहा कि‍ एमएसएमई मंत्रालय का मानना है कि भारतीय महिलाएं देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
  पोर्टल के जरिए एक ऐसा नेटवर्क बनाने का प्रयास किया गया है जिसके जरिए उद्यमशीलता को बढावा दिया जा सके और साथ ही महिलाओं को स्‍वालंबी और सशक्‍त बनाने के लिए कम लागत वाली सेवाओं और उत्‍पादों के लिए कारोबार के नए मॉडल तैयार किए जा सकें। पोर्टल के जरिए महिला उद्यमि‍यों को कारोबार शुरु करने के लिए आवश्‍यक प्रशिक्षण,निवशेकों से सीधे संपर्क,बाजार सर्वेक्षण सुविधा तथा तकनीकी सहयोग जैसी मदद उपलब्‍ध करायी गयी है।
     मंत्रालय में सचिव डाक्‍टर अरुण कुमार पांडा ने इस मौके पर महिला उदृयमि‍यों को संबोधित करते हुए कहा कि‍ मंत्रालय खादी,ग्रामीण तथा कॅयर उद्योग सहित पूरे एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
   इस काम में अन्‍य मंत्रालयों,राज्‍य सरकारों और सभी हितधारकों से मदद ली जा रही है। इस अवसर पर मत्रालय की संयुक्‍त सचिव अल्‍का अरोड़ा तथा अतिरिक्‍त विकास आयुक्‍त अनंत शेरखाने भी उपस्थित थे।

वीएलई की संख्‍या दोगुनी होकर 47 हजार से एक लाख हो जाएगी

   नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रानिक्स,सूचना प्रौद्योगिकी और विधि तथा न्‍याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद और सूचना एवं प्रसारण तथा कपडा मंत्री श्रीमती जुबिन ईरानी ने आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर "स्त्री स्वाभिमान- महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) की एक पहल पर आज एक कार्यशाला" का उद्घाटन किया।

   कार्यशाला में सीएससी के माध्यम से महिला ग्रामीण उद्यमियों द्वारा देश की गरीब और वंचित महिलाओं के बीच स्‍वास्‍थ्‍य और स्‍वच्छता को बढ़ावा देने के लिए किए गए कार्यों की प्रगति और प्रभाव को दर्शाया गया।
   श्री प्रसाद ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ ही उनके स्‍वास्‍थ्‍य और स्‍वच्‍छता को बढावा देने के लिए स्‍त्री स्‍वाभिमान परियोजना के तहत सैनिटेरी नैपकीन बनाने वाली इकाईयां लगाने के ग्रामीण महिला उद्मियों के प्रयासो की सराहना की। स्‍वच्‍छ भारत अभियान तथा डिजी धन अभियान जैसे सरकारी अभियानो के साथ बडे पैमाने पर लोगों को जोड़ने की वीएलई की ताकत का जिक्र करते हुए श्री रविशंकर ने कहा कि आज देश में ऐसी महिलाओं की संख्‍या 47 हजार है। मैं चाहता हूं कि देश में इनकी संख्‍या बढकर एक लाख से ज्‍यादा हो जाए। 
  मंत्री ने कहा, "डिजिटल इंडिया" अभियान में महिलाओं के लिए अग्रिम स्‍थान सुनिश्‍चित करने से एक नया सामाजिक बदलाव आएगा जहां वे भेदभाव से मुक्त समाज के निमार्ण का वाहन बनेंगी। डिजिटल रूप से सशक्त महिलाएं ग्रामीण समुदायों को सशक्‍त बनाने की भूमिका निभा सकेंगी। कार्यशाला में देश भर से आयी लगभग 700 वीएलई जिनमें से कई ने सैनिटरी नैपकिन इकाइयां स्थापित की हैं के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के कयी वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
     सूचना और प्रसारण मंत्री श्रीमती ईरानी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला ग्रामीण उद्यमियों को बधाई देते हुए कहा,"मेरा मानना है कि हर दिन महिला दिवस है। महिला सशक्तिकरण, खासकर ग्रामीण भारत में रहने वाली महिलाओं का सशक्तिकरण, हमारी सरकार का प्रमुख उद्देश्‍य है। सरकार ने देश में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के लिए स्वच्छता से जुड़े दिशानिर्देश तैयार किए हैं। 
   उन्‍हेंने इस अवसर पर बंजारा समुदाय की महिलाओं के बीच "वीएलई" स्नेहलता देवी की पहल चुप्‍पी तोड़ो, सयानी बनो "का उल्लेख करते हुए कहा, "महिला वीएलई शासन का पहला पाठ पढ़ा रही हैं।" उन्होंने कहा, "पिछले तीन सालों में, 16 करोड़ से अधिक महिलाएं जन धन योजना के माध्यम से बैंक खाते खोल चुकी हैं। इसी तरह, हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई मुद्रा योजना से, 7.80 करोड़ महिला उद्यमी तैयार हुयी हैं।
     श्रीमती ईरानी ने "परिवर्तन का वाहक बनी महिला वीएलई के साथ एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए इस महीने 11 तारीख को बेंगलूर के पास एक महिला वीएलई द्वारा चलाया गये सामान्‍य सेवा केन्‍द्रका का दौरा करने का वादा किया। उन्‍होंने कहा, "मुझे आपके केन्‍द्र पर आकर एक कप चाय पीने से खुशी मिलेगी।"

राजस्थान के झुंझुनू में राष्ट्रीय पोषण मिशन तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान

   झुंझुनू। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजस्थान के झुंझुनू में आज राष्ट्रीय पोषण मिशन का शुभारंभ किया और साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के विस्तार की शुरूआत भी की। 

   प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि प्रौद्योगिकी के जरिये पूरा देश आज झुंझुनू से जुड़ गया है। उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के विस्तार के लिए झुंझुनू जिला प्रशासन द्वारा किये गए कार्यों की सराहना की और इस अभियान से जुड़ने के इच्छुक जिलों के अधिकारियों से मुलाकात भी की।
   उन्होंने अभियान की सफलता के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को प्रमाण पत्र प्रदान किये। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कार्यक्रम की लाभार्थी माताओं और बालिकाओं से बातचीत भी की। 
    प्रधानमंत्री ने कहा कि लड़के और लड़कियों के बीच किसी तरह के भेद भाव का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। उन्होंने लड़को के समान ही लड़कियों के लिए भी गुणवत्ता युक्त शिक्षा की पहुंच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेटियां बोझ नहीं हैं वे हमारे देश के लिए गौरव और समृद्धि का जरिया बन रही हैं। समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
    प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बच्चों को पोषक आहार दिये जाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ‘मिशन इंद्रधनुष’ के जरिये महिलाओं और बच्चों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया ने इस अवसर पर कहा कि एक महती योजना का शुभारंभ करने तथा दूसरी योजना के विस्तार के लिए प्रधानमंत्री द्वारा राजस्थान का चुनाव किये जाने से उन्हें बेहद खुशी हुई है। 
   उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों का राजस्थान सरकार हमेशा समर्थन करती रहेगी।

Wednesday, 7 March 2018

भारत 21वीं सदी के अशांत विश्व में आशा की किरण साबित होगा

    अलीगढ़। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आज उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। 

   इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने भारत की विकास यात्रा में विशेष भूमिका निभाई है और यह 2020 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व और खासतौर से एशिया और अफ्रीका में अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने इस अवसर पर 2017 की अपनी इथोपिया यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि उन्हें तब यह जानकर बहुत खुशी हुई थी कि इथोपिया के प्रधानमंत्री की पत्नी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा रह चुकी हैं। 
     श्री कोविंद ने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित छात्रों की लंबी सूची है। इन छात्रों ने राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, कानून, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी, साहित्य, कला तथा खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि भारत रत्न से सम्मानित खान अब्दुल गफ्फार खान, रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करने वाले कार्यकर्ता युसूफ मोहम्मद दादू और देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन, इस विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके हैं।
    उन्होंने इस अवसर पर आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. सैय्यद ज़हुर कासिम, प्रोफेसर ए. सलाहुद्दीन और डॉ. शाहिद जमील के योगदान का भी उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने कहा कि इस्मत चुगताई और मुमताज़ जहां जैसी प्रगतिशील विचारों वाल महिलाओं ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के साथ ही पूरे भारतीय समाज का सम्मान बढ़ाया है।
    उन्होंने इसरो के चंद्रयान अभियान में अहम भूमिका निभाने वाली अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा खुशबू मिर्ज़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके जैसी महिलाएं 21वीं सदी में अन्य महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं।
     राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए गए कार्य समाज की जरूरतों के अनुरूप रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास विश्वविद्यालय के अन्य विभागों में भी होने चाहिए, ताकि ज्ञान और नवाचार समाज में हो रहे परिवर्तन के अनुरूप बने रहें। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ ही प्रगतिशील सोच भी जरूरी है, जिससे समाज के सभी वर्ग बराबरी और भाईचारे के साथ आगे बढ़ सकें।
   श्री कोविंद ने कहा कि ज्ञान की खोज और मानव गरिमा की ललक एक दूसरे से गहरे जुड़े हैं। ये भारतीय लोकाचार और हमारी सभ्यता के केंद्र में रहे हैं। इन्होंने हमारी विविधता में योगदान दिया है, जो हमारे खुले दृष्टिकोण के साथ ही हमारी बड़ी ताकत भी है। एक दूसरे को सम्मान देना, एक दूसरे से सीखना, एक दूसरे के साथ विचारों को साझा करना तथा सोच और जीवन के वैकल्पिक तरीकों की स्वीकृति हमारे समाज के सिर्फ कोरे नारे नहीं हैं बल्कि ये भारतीय जीवन शैली के प्राकृतिक गुण हैं। 
    उन्होंने समाज और समुदायों को गहरे जोड़कर रखा है। इस भावना को लगातार मजबूत बनाए रखना जरूरी है। राष्ट्रपति ने कहा कि हम आज वैश्विकरण के युग में जी रहे हैं। हमें एक ऐसे विश्व का निर्माण करना है, जिसमें सबके लिए स्थान भी हो तथा विविधता का सम्मान भी किया जा सके।
     आधुनिक विज्ञान और समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं के जरिए हमें अपने सपनों के भारत का निर्माण करना है। ऐसा भारत प्रत्येक भारतीय के लिए लाभकर होगा। ऐसे भारत में बिना किसी भेदभाव और पृष्ठभूमि की भिन्नता के हर लड़का और लड़की अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगे। ऐसा भारत 21वीं सदी के अशांत विश्व में आशा की किरण साबित होगा। 
     श्री कोविंद ने कहा कि उम्मीद की जाती है कि आज के दौर में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी जगह बनाएंगे। आज का समय गतिशीलता का दौर है। हम सभी एक ऐसे ज्ञान समाज का हिस्सा हैं जिसका स्वरूप वैश्विक है। ऐसे गतिशील माहौल में ज्ञान का दायरा बढ़ाने के लिए छात्रों और अध्यापकों का दूसरी शिक्षण संस्थाओं के साथ संपर्क बढ़ाना लाभप्रद होगा।

खाद्य सब्सिडी में 17,500 करोड़ रूपये प्रति वर्ष की बचत

   नई दिल्ली। राम विलास पासवान, केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणालीकी पोर्टेबिलिटी पर काम कर रही है और यह धीरे-धीरे विस्तारित होगा। 

   श्री पासवान ने आज राज्यों /केंद्र शासित प्रदेशों से खाद्य आयोग के अध्यक्षों की पहली बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक वितरण की पोर्टेबिलिटी लागू हो जाने के बाद लाभार्थी किसी विशेष उचित दर दुकान से राशन लेने के लिये बाध्य नहीं रहेंगे, वह अपनी हकदारी का राशन किसी भी उचित दर दुकान से लेने के लिय स्वतंत्र होंगे।
   यह व्यवस्था आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली में पहले से ही चल रहा है। श्री पासवान ने कहा कि देश भर से 82 प्रतिशत राशन कार्ड आधार से जुड़े हैं और राशन की दुकानों पर 2.95 लाख मशीन स्थापित की गई हैं ताकि राशन प्रक्रिया को सुचारु रूप से स्थापित किया जा सके और चोरी को रोका जा सके। 
    करीब 2.75 करोड़ नकली और अवैध राशन कार्ड हटा दिए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप खाद्य सब्सिडी में रूपये 17,500 करोड़ प्रति वर्ष की बचत होगीप्र् केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस धनराशि का इस्तेमाल नए लोगों को सब्सिडी प्रदान करने के लाभ के लिए किया जाएगा। 
   श्री पासवान ने कहा कि जहां राज्य खाद्य आयोग का गठन नहीं किया गया है या आंशिक रूप से गठन किया गया है वहउन राज्यों / केंद्र शासितक्षेत्रों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखेंगे । केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक 20 राज्यों / केंद्र शासित राज्य क्षेत्रों में राज्य खाद्य आयोग की स्थापना की गई है। श्री पासवान ने कहा कि राज्यों को राज्य खाद्य आयोग की स्थापना और इसके कार्य करने के लिए पर्याप्त आजादी देने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
   केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि यदि आवश्यक हो तो केंद्र सरकार,राज्य / केंद्र शासित राज्यक्षेत्रों में आवश्यक सहयोग का विस्तार करेगा। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और राज्य / केंद्र शासित राज्य क्षेत्रों के खाद्य आयोग के अध्यक्ष के बीच यह पहली राष्ट्रीय स्तर की बैठक थी। श्री पासवान ने बताया कि राज्य / केंद्र शासित राज्य क्षेत्र के खाद्य आयोग की राष्ट्रीय / राज्य स्तर की बैठक हर तीन महीने में होनी चाहिए।

सुखद यात्रा एप तथा राजमार्ग पर यात्रा करने वालों के लिए आपात फोन नंबर

   नई दिल्ली। केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग, पोत परिवहन, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि जल्द ही देश में भारी वाहनों के चालकों को लाइसेंस देने की पूरी प्रक्रिया पूर्ण रूप से कम्प्यूटरीकृत कर दी जाएगी। 

   इस पूरी प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप नहीं होगा। आज नई दिल्ली में जिला वाहन चालक प्रशिक्षण केन्द्र का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ड्राइविंग लाइसेंस प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया पूर्ण रूप से कम्प्यूटरीकृत कर दी जाएगी।
  इससे जाली लाइसेंसों की संख्या में कमी आएगी तथा इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में भी कमी आएगी। केन्द्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ मंत्री ने एक मोबाइल एप तथा राजमार्ग पर यात्रा करने वालों के लिए टोल फ्री आपात फोन नंबर का भी शुभारंभ किया।
   नितिन गडकरी ने कहा कि सुखद यात्रा मोबाइल एप के माध्यम से राजमार्ग पर यात्रा करने वाले टोल प्लाजा पहुंचने के पूर्व टोल-दरों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इस एप की एक मुख्य विशेषता यह है कि यात्री किसी दुर्घटना, सड़क गुणवत्ता तथा किसी गड्डे की जानकारी एप पर अपलोड कर सकेंगे। यात्रियों को टोल प्लाजा पर लगने वाले समय की भी जानकारी मिलेगी। 
    इसके अतिरिक्त राजमार्ग नेस्ट/नेस्ट मिनी की जानकारी भी यह एप उपलब्ध कराएगा। इस एप की सहायता से उपयोगकर्ता फास्टटैग भी खरीद सकेंगे। श्री गडकरी ने कहा कि टोल फ्री नंबर 1033 की सहायता से उपयोगकर्ता किसी आपात स्थिति की जानकारी दे सकेंगे तथा राजमार्ग के अनुभव को साझा कर सकेंगे। इस सेवा को एम्बुलेंस तथा खराब व दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को ले जाने वाली सेवा के साथ भी जोड़ा गया है। यह सेवा कई भाषाओं में उपलब्ध है। इस सेवा में उपयोगकर्ता की अवस्थिति की जानकारी स्वतः उपलब्ध होगी इसलिए उन्हें त्वरित और सटीक सहायता मिलेगी।
    मंत्री ने कहा कि राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक आदर्श वाहन प्रशिक्षण केन्द्र का निर्माण किया जाएगा। मंत्रालय एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। एजेंसी भी इस योजना में समान राशि निवेश करेगी।
    इस योजना का उद्देश्य रोजगार निर्माण करना है तथा देश के भारी व हल्के वाहन चालकों की जरूरतों को पूरा करना है। जो चालक खतरनाक/जोखिम वाले वाहन चलाते है उन्हें भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पांच लाख रुपये की सहायता राशि उन स्वयंसेवी संस्थाओं/ट्रस्टों/सहकारी समितियों को दी जाएगी, जो सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करेंगी। प्रत्येक राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश में पांच लाख रुपये, दो लाख रुपये तथा एक लाख रुपये के तीन पुरस्कार दिए जाएंगे।
   केन्द्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने सड़क सुरक्षा के इस पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वाहन चालकों के प्रशिक्षण से प्रति वर्ष दस हजार करोड़ रुपये तक की धनराशि की बचत की जा सकेगी।
    श्री प्रधान ने सुझाव देते हुए कहा कि पेट्रोलियम तथा सड़क परिवहन क्षेत्रों की सभी सेवाओं को राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजाओं पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि एक वर्ष में 100 ऐसे केन्द्रों का निर्माण किया जा सकता है।

Tuesday, 6 March 2018

अब सुखद यात्रा ऐप और टोल फ्री इमरजेंसी नंबर

  नई दिल्ली। केन्‍द्रीय सड़क और राजमार्ग, जहाजरानी, जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा सरंक्षण मंत्री नितिन गडकरी राजमार्ग का इस्‍तेमाल करने वालों के लिए कल दिल्‍ली में एक मोबाइल ऐप और टॉल फ्री आपात नंबर जारी करेंगे। 

  सुखद यात्रा के नाम का यह मोबाइल ऐप राजमार्गों का इस्‍तेमाल करने वालों को सशक्‍त बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, एनएचएआई द्वारा तैयार किया गया है।
    ऐप की मुख्य विशेषताओं में उपयोगकर्ताओं को सड़क की गुणवत्ता संबंधी जानकारी या राजमार्ग पर किसी दुर्घटना या किसी प्रकार टूट-फूट की जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी शामिल है। इस ऐप के जरिए उपयोगकर्ता प्‍लाजाओं पर अपेक्षित प्रतीक्षा समय तथा राजमार्ग पर मिलने वाली नेस्‍ट/मिनी नेस्‍ट और अन्‍य पंसदीदा सुविधाओं के बारे में सटीक जानकारी प्राप्‍त कर सकेंगे। 
   इस ऐप का प्रयोग उपयोगकर्ताओं द्वारा फास्टैग टैग खरीदने तथा राजमार्ग पर चलने के अपने अनुभव को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए भी किया जा सकेगा। ऐप के साथ ही जारी किया जाने वाले टोल-फ्री नंबर, 1033 के जरिए उपयोगकर्ता राजमार्ग पर किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति की सूचना या राजमार्ग से संबंधित फीडबैक दे सकेंगे।
  आपातकालीन स्थिति में तेजी से सहायता सुनिश्चित करने के लिए इस नंबर के साथ एम्बुलेंस और वाहनों को उठा ले जाने जैसी सेवाओं को जोडा गया है। उपयोगकर्ताओं की शिकायतों के त्‍वरित समाधान तथा उनकी वास्‍त‍विक स्थिति का पता लगाने के लिए ऐप में बहुभाषी संवाद प्रणाली का भी प्रावधान है।
   मंत्रालय की ओर से हर राज्‍य या केंद्र शासित प्रदेशों के प्रत्‍येक जिले में कम से कम एक मॉडल ड्राईविंग प्रशिक्षण केंद्र स्‍थापित करने के लिए एक करोड़ रूपये की वित्‍तीय मदद दी जाएगी। योजना के तहत इतनी ही राशि एजेंसी की ओर से भी निवेश की जाएगी।
    योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य भारी और हल्‍के मोटर वाहनों के चालकों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्‍ध कराना और उनकी जरूरतों को पूरा करना है। इसका उद्देश्‍य वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा के प्रति ज्‍यादा जागरूक बना कर उनके व्‍यवहार और सोच में बदलाव लाना भी है।
  प्रशिक्षण पाठ्यक्रम कार्यक्रम उन वाहन चालकों के लिए होगा जो खतरनाक सामान लाने ले जाने का काम करते हैं। इस तरह के प्रशिक्षण केंद्र खोलने की इच्‍छुक एजेंसियों को भूमि, क्‍लास रूम और सिम्‍युलेटर जैसी जरूरी ढांचागत सुविधाएं उपलब्‍ध करानी होंगी। 
    सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए उत्‍कृष्‍ट कार्य करने वालों को पुरस्‍कृत करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों / न्‍यासों / सहकारी समितियों तथा एजेंसियों को पांच लाख रूपये तक की वित्‍तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है।
  प्रत्‍येक राज्‍य और केंद्र शासित प्रदेश में सड़क सुरक्षा जागरूकता और इससे जुड़ी गतिविधियां चलाने वाली एजेंसियों के लोगों को पांच लाख, दो लाख और एक लाख रूपये के पुरस्‍कार देने की व्‍यवस्‍था की गई है।

आतंकवाद मानवता के लिए खतरा

  नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि भारत एक शांतिप्रिय देश है और अपने पड़ोसियों से अच्छे संबंध रखना चाहता है। वे माल्टा गणराज्य के विदेशी मामलों तथा व्यापार संवर्धन मंत्री कारमिलो अबेला से चर्चा कर रहे थे जो उनसे आज यहां भेंट करने आए थे। 

   उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रमंडल तथा अंग्रेजी भाषा के उपयोग के संदर्भ में भारत और माल्टा समान विरासत साझा करते हैं। जब माल्टा स्वतंत्र हुआ तो दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए। उन्होंने आगे कहा कि भारत द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए उत्सुक है।
   दोनों देशों के बीच लाखों लोग आवागमन करते हैं। लंबे समय से दोनों देशों के बीच का संबंध मजबूत रहा है।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान सरकार के नेतृत्व में भारत तीन लक्ष्यों – सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन (रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म) को ध्यान में रखते हुए तेज प्रगति कर रहा है।
    उन्होंने आगे कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति में जीएसटी, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटीज, स्टार्ट अप इंडिया, एसपिरेशनल इंडिया जैसे पहल रणनीतिक बदलाव ला रहे हैं। माल्टा की वित्तीय कंपनियों के द्वारा निवेश के लिए देश में विभिन्न अवसर मौजूद हैं। तेज आर्थिक विकास के लिए परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण है।
    भारत आशा करता है कि माल्टा परमाणु आपूर्ति समूह में भारत की सदस्यता का समर्थन करेगा। माल्टा के विदेश मंत्री ने उपराष्ट्रपति को माल्टा भ्रमण का आमंत्रण दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके सुंदर देश की यात्रा कर उन्हें प्रसन्नता होगी।

Monday, 5 March 2018

कल्याण के लिए योग एक समग्र दृष्टिकोण

   उत्तराखंड। भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडु ने कहा है कि योग कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण है जिसके शारीरिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक आयाम हैं।

   वह आज उत्तराखंड के ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन में अंतरराष्ट्रीय योग समारोह के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ कृष्ण कांत पॉल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एवं अन्य गणमान्य मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि योग का विज्ञान प्राचीन, फिर भी अनंत है। इस ज्ञान का उपयोग हमारे समसामयिक जीवन को बेहतर, अधिक स्वस्थ और प्रसन्न बनाने के लिए किया जा सकता है।
    उन्होंने कहा कि हमने महसूस किया कि ज्ञान के इस खजाने को समस्त विश्व के साथ साझा किया जा सकता है क्योंकि योग आधुनिक विश्व को भारत का बहुमूल्य उपहार है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि परमार्थ निकेतन में अंतरराष्ट्रीय योग समारोह का आयोजन योग की शक्ति और सार्वभौमिक लोकप्रियता का वास्तविक साक्षी है। 
     उन्होंने कहा कि शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का मुकाबला करने के लिए योग को हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि योग एक समग्र प्रणाली है जिसमें दिमाग और शरीर सामंजस्य के साथ काम करते हैं और पूरी तरह युवा हो जाते हैं।
    उन्होंने कहा कि योग का लक्ष्य हमें एक संतुलन बिन्दु की स्थिति अर्जित करने में मदद करना है जिससे कि हम अपने आस पास एक शांतिपूर्ण वातावरण का सृजन कर सकें।

Sunday, 4 March 2018

डेफएक्सपो 2018 प्रदर्शनी: भारत एक उभरता रक्षा विनिर्माण हब

   नई दिल्ली। डेफएक्सपो 2018 प्रदर्शनी पहली बार विश्व के सामने भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करेगी। 

  यह प्रदर्शनी के टेग लाइन में परिलक्षित है जो ‘भारत: एक उभरता रक्षा विनिर्माण हब‘ है। डेफएक्सपो 2018 प्रदर्शनी भारत की सभी तीन सेनाओं -थल सेना, नौसेना एवं वायु सेना की कई रक्षा प्रणालियों एवं कंपोनेंट के एक रक्षा निर्यातक देश के रूप में ब्रांडिंग करेगी।
  यह प्रदर्शनी जहां भारत की उल्लेखनीय सार्वजनिक क्षेत्र की ताकतों को प्रदर्शित करेगी, वहीं यह भारत के बढ़ते निजी क्षेत्र उद्योग को भी सामने लाएगी तथा कंपोनेंट एवं सब-सिस्टम्स के लिए एमएसएमई आधार को विस्तारित करेगी। डेफएक्सपो 2018 प्रदर्शनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को विभिन्न फ्लाइंग प्लेटफॉर्म के रूप में प्रदर्शित करेगी।
   हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के प्लेटफॉर्म के अतिरिक्त, यह प्रदर्शनी घरेलू निजी उद्योग एवं एयरो-कंपोनेंट उद्योग को भी बढ़ावा देगी। डेफएक्सपो 2018 प्रदर्शनी का आयोजन समुद्र के तट चेन्नई से महाबलीपुरम के रास्ते पूर्वी तट पर किया जा रहा है, यह भारतीय नौसेना को अपने घरेलू डिजाइन एवं विनिर्माण क्षमताओं को भी प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगी।
  भारत गर्वपूर्वक जहाज निर्माण में अपनी नौसैनिक डिजाइनिंग क्षमताओं को प्रस्तुत करेगा। ज्हां तक भूमि प्रणालियों का प्रश्न है तो भारत डेफएक्सपो 2018 प्रदर्शनी में अपनी 155 एमएम एडवांस्ड टाउड आर्टिलरी गन (एटीएजी) का अनावरण करेगा। यह पहली बार है कि भारत के पास अपनी खुद की एटीएजी है जिसकी डिजाइन एवं जिसका विकास कल्याणी ग्रुप, टाटा पावर एवं ओएफबी के सहयोग से डीआरडीओ द्वारा किया गया है।
   भारत अपनी मिसाइल एवं रॉकेट विनिर्माण क्षमताओं का भी प्रदर्शन करेगा जिसमें सतह से वायु, वायु से वायु एवं समुद्र से वायु समेत सभी प्रकार के हमलों के लिए उपलब्ध ब्रह्मोस भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, डेफएक्सपो 2018 प्रदर्शनी का एक बड़ा आकर्षण आकाश मिसाइल सिस्टम भी होगा।
    भारत को एक उभरते रक्षा उत्पादक हब के रूप में रेखांकित करने पर फोकस को देखते हुए डेफएक्सपो 2018 प्रदर्शनी में कम से कम आधा स्थान घरेलू प्रदर्शकों के लिए निर्धारित किया गया है। यह डेफएक्सपो 2018 प्रदर्शनी को अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने एवं रक्षा विनिर्माण की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ समेकित हसेने का अब तक का सबसे बढ़ा अवसर उपलब्ध कराएगा।

भारत और वियतनाम की अर्थव्यवस्थाएं एक दूसरे की पूरक

   नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में वियतनाम के राष्ट्रपति ट्रान डई कुआंग की की मेजबानी की।

   उन्होंने उनके सम्मान में एक प्रीतिभोज का भी आयोजन किया। वियतनाम के राष्ट्रपति का भारत में स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने वियतनाम को जनवरी 2018 में नई दिल्ली में आयोजित आसियान भारत स्मारक शिखर सम्मेलन में ठोस परिणाम सुनिश्चित करने में एक समन्वयक देश की भूमिका निभाने के लिए धन्यवाद दिया।
  राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच 2000 सालों से पुराना सभ्यातागत संबंध हैं। बौद्ध धर्म, हिन्दू चम्पा सभयता और हमारे साझा दर्शन ने हमारे समान रिश्तों को सुदृढ़ बनाया है।
   उन्होंने कहा कि हमारे आर्थिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हमारे नेताओं ने 2020 तक 15 बिलियन डॉलर का व्यापार लक्ष्य निर्धारित किया है। हमें इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अपने प्रयासों में दोगुनी तेजी लानी होगी।
   राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा पर समान दृष्टिकोण हैं। बाद में, अपने प्रीतिभोज भाषण में राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे स्वाधीनता संग्राम के नेता महात्मा गांधी और राष्ट्रपति हो ची मिन्ह आधुनिक युग में हमारे संबंधों में नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं।
  राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि भारत और वियतनाम के बीच एक मजबूत साझीदारी हमारे लोगों के लिए तथा व्यापक क्षेत्र के लिए शांति और समृद्धि का रास्ता प्रशस्त करेगी।