Wednesday, 20 December 2017

भारतीय रेल की स्‍वर्ण परियोजना

    नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के उद्देश्‍य से स्‍वर्ण परियोजना लॉच करने का निर्णय लिया है। 

   डिब्‍बों की आंतरिक सजावट, शौचालय, डिब्‍बों की साफ – सफाई, कर्मचारियों का व्‍यवहार, खान – पान व्‍यवस्‍था, कम्‍बल व चादरें, समय की पाबंदी, सुरक्षा, यात्रा के दौरान मनोरंजन की सुविधा, त्‍वरित जानकारी सुविधा जैसे यात्री सुविधा के 9 आयाम इस स्‍वर्ण परियोजना में शामिल हैं।
    कुल 14 राजधानी तथा 15 शताब्दी रेलों में ये सुविधाएं दी जाएगीं। स्‍वर्ण मानक के आधार पर डिब्‍बों के उन्‍नयन के लिए भारतीय रेल ने प्रति रैक 50 लाख रूपये खर्च करने की स्‍वीकृती दी है। राजधानी और शताब्‍दी रेलों को बेहतर बनाने के उद्देश्‍य से स्‍वर्ण परियोजना लॉंच की गई है। भोपाल वर्कशॉप में कुछ डिब्‍बों को महामना रेलों के लिए मॉडल रैक के रूप में विकसित किया जा रहा है। 
     वर्तमान समय में तीन ऐसी रेलें चल रही हैं – नई दिल्‍ली से वाराणसी, भोपाल से खजुराहो और वडोदरा से वाराणसी। रेल राज्‍य मंत्री राजेन गोहेन द्वारा लोक सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में दी गई जानकारी पर आधारित है। 
    बुलेट ट्रेन परियोजना : मुम्‍बई – अहमदाबाद उच्‍च गति रेल परियोजना की मुख्‍य विशेषताएं, साबरमती और मुम्‍बई (508 किमी) के मध्‍य रेल पटरी जमीन के ऊपर स्‍तंभों पर आधारित होगी। इसमें 12 स्‍टेशन होंगे। अधिकतम गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि संचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। एक तेज ट्रेन के लिए मुम्‍बई से साबरमती के बीच यात्रा अवधि 2.07 घंटे होगी। रास्‍ते में पड़ने वाले सभी स्‍टेशनों पर रूकने वाली ट्रेन के लिए यह अवधि 2.58 घंटे होगी।
     परियोजना की अनुमानित लागत : 1,08,000 करोड़ रूपये। कुल परियोजना लागत की 81 प्रतिशत राशि जापान सरकार द्वारा ऋण के रूप में उपलब्‍ध कराई गई है। 0.1 प्रतिशत ब्‍याज दर वाला यह ऋण 15 वर्षों की अनुग्रह अवधि के साथ 50 वर्षों में देय है। 2022 – 23 में इस परियोजना को पूरा किये जाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है।
   दिल्‍ली - चेन्‍नई समेत कई रेल मार्गों के लिए संभावना – रिपोर्ट तैयार करने की मंजूरी दे दी गई है। रेल राज्‍य मंत्री राजेन गोहेन द्वारा लोक सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में दी गई जानकारी पर आधारित है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 30 करोड़ खाते खोले गए

   नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत कुल मिलाकर 30.71 करोड़ खाते खोले गए हैं। जिनमें से 18.05 करोड़ खाते ग्रामीण/अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं।

    विभिन्‍न बैंक अपनी-अपनी शाखाओं में उन व्‍यक्तियों के पीएमजेडीवाई खाते खोल रहे हैं, जो बैंकिंग सुविधाओं से वंचित हैं। पीएमजेडीवाई खाते खोलने की सुविधा प्राप्‍त बैंक मित्रों को इस कार्य के लिए तैनात किया गया है। 
    बैंक मित्र 1000-1500 परिवारों वाले उन उप-सेवा क्षेत्रों (एसएसए) में खाते पहले से खोल रहे हैं, जिन्‍हें अब तक कवर नहीं किया जा सका है।
    राजस्‍व विभाग ने यह जानकारी दी है कि 08 नवम्‍बर, 2016 से लेकर 30 दिसंबर, 2016 तक की अवधि के दौरान 3,74,14,844 पीएमजेडीवाई खातों में 42,187 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे। 
   राजस्‍व विभाग को इस बारे में जानकारी 187 रिपोर्टिंग निकायों ने दी है। ज्‍यादा जोखिम वाले मामलों की पहचान करने, संदिग्‍ध मामलों के त्‍वरित सत्‍यापन और आवश्‍यकता पड़ने पर प्रवर्तन कर्रवाई के लिए सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। नकद लेन-देन से संबंधित सूचनाएं एकत्रित करना, इस तरह की सूचनाओं का विश्‍लेषण करना और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एवं डेटा विश्‍लेषणात्‍मक उपकरणों (टूल) का व्‍यापक उपयोग करना इन कदमों में शामिल हैं।