Friday, 27 October 2017

31 अक्‍टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जायेगा

   नई दिल्ली। सरकार 31 अक्‍टूबर को सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्‍य में राष्ट्रीय एकता दिवस मना कर हमारे देश की मजबूत एकता, अखंडता और सुरक्षा को संरक्षित करने में सरकार के समर्पण को व्‍यक्‍त करने के लिए इसे विशेष दिवस के रूप में मनाती है।

 राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सुबह 07 से 08 बजे तक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी पटेल चौक पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिसके बाद शपथ दिलाई जाएगी और एकता दौड़ को झंडी दिखाई जाएगी। एकता दौड़ नेशनल स्‍टेडियम से शुरू होकर सी-हैक्‍जागोन और शाहजहां रोड़ से होती हुई इंडिया गेट (1.5 किलोमीटर) पहुंचेगी।
     इस दौड़ में बड़ी संख्‍या में लोगों के शामिल होने की आशा है। सुश्री पी.वी. सिंधु (बैडमिंटन), सुश्री मिताली राज (क्रिकेट) और श्री सरदार सिंह (हॉकी) के इसमें शामिल होने की संभावना है। ये दौड़ भारतीय खेल प्राधिकरण के अनुभवी कोचों द्वारा आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम के आयोजकों में गृह मंत्रालय, आवास और शहरी मामले मंत्रालय, खेल विभाग, युवा मामले विभाग, रेल मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा जीएनसीटीडी एवं सीपीडब्‍ल्‍युडी, एनडीएमसी, डीडीए, एसएआई, सीएपीएफ एवं दिल्‍ली पुलिस सहित कई संगठन शामिल हैं।
    सभी राज्‍य-केन्‍द्र शासित प्रदेश अपनी-अपनी राजधानियों में राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम आयोजित करेंगे और युवा कार्य तथा खेल मंत्रालय 623 जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए स्‍थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करेंगे, जबकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय केन्‍द्रीय तथा नवोदय विद्यालय में कार्यक्रम आयोजित कर रहे है। रेल मंत्रालय 1500 रेलवे स्‍टेशनों पर कार्यक्रम आयोजित करेंगे, जबकि इस्‍पात, विद्युत, श्रम, पर्यटन और आवास तथा शहरी मामले मंत्रालय, स्‍मार्ट एवं अमृत शहरों, पर्यटन स्‍थलों, ईपीएफ-ईएसआई कार्यालयों तथा संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
    संस्‍कृति मंत्रालय एकता दिवस के अवसर पर विभिन्‍न शहरों में उचित सांस्‍कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगा। 31 अक्‍टूबर, 2017 को केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और दिल्‍ली पुलिस अपने-अपने मैदानों पर मार्चपास्‍ट करेंगे। सीएपीएफ राज्‍य स्‍तरीय और अन्‍य स्‍तर के कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग ले रहे है। राष्‍ट्रीय एकता दिवस समारोह विदेश स्थित सभी भारतीय दूतावासों और मिशनों में भी आयोजित किये जाएंगे।

तिरूपति, पलक्‍कड़, गोवा, धारवाड़, जम्‍मू, भिलाई में छह नए आईआईटी के स्‍थायी परिसरों की स्‍थापना

    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 अक्‍टूबर, 2017 को 6 नए आईआईटी के स्‍थायी परिसरों के निर्माण के लिए 7,002 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी।

 इन्‍हें 31 मार्च, 2020 तक पूरा कर लिया जाना है। प्रत्‍येक परिसर में 1200 छात्रों के रहने की व्‍यवस्‍था होगी, जिनका अकादमिक सत्र 2020-2021 से शुरू होगा। इस समय ये संस्‍थान अस्‍थायी परिसरों से चल रहे हैं। 
    इनमें छात्रों की कुल संख्‍या 1530 है। परिसरों के निर्माण के बाद छात्र संख्‍या 7200 तक हो जाएगी। वित्‍तमंत्री ने अपने 2014-15 के बजट भाषण में आंध्र प्रदेश, केरल, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, गोवा और छत्‍तीसगढ़ में 5 नए आईआईटी की स्‍थापना की घोषणा की थी।
    इसके बाद 2015-16 के बजट भाषण में कर्नाटक में आईआईटी की स्‍थापना की घोषण भी की गई। बजट घोषणाओं के अनरूप तिरूपति और पलक्‍कड़ के आईआईटी में अकादमिक सत्र 2015-16 में तथा धारवाड़, भिलाई, जम्‍मू और गोवा में अकादमिक सत्र 2016-17 में अस्‍थायी परिसरों में शुरू हो गए। 
   स्‍थायी परिसरों के निर्माण की विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट इन संस्‍थानों के एक दल ने तैयार की थी, जिसके लिए 7 वर्षों के दौरान स्‍थायी परिसरों के निर्माण के लिए 20304.88 करोड़ रुपये की आवश्‍यकता बताई गई थी।

तिरुवनंतपुरम में टेक्नोसिटी परियोजना लांच

    तिरुवनंतपुरम। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने तिरुवनंतपुरम में टेक्नोसिटी परियोजना लांच की और टेक्नोसिटी में पहले सरकारी भवन के लिए आधारशिला रखी।

   इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि बुनियादी साक्षरता और कौशल में केरल की शक्ति तथा सेवा क्षेत्र और उपभोक्ता प्रेरक उद्योगों में केरल के लोगों का अनुभव आईटी पारिस्थितिकीय प्रणाली में केरल के लिए स्थान बनाता है। 
   उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी न केवल स्वयं में महत्वपूर्ण है बल्कि पूरी सेवा अर्थव्यवस्था के लिए कार्य में गति लाने वाला है। सूचना प्रौद्योगिकी ने स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन क्षेत्र में गेम चेंजर की भूमिका अदा की है। यह क्षेत्र केरल की शक्ति हैं। 
     उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि टेक्नोसिटी के विकास से केरल के लोगों को नए क्षेत्र मिलेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के अनेक भागों में केरल के लोग आर्थिक गतिविधि का आवश्यक हिस्सा बने हुए हैं।
    यह उपलब्धि केवल भारत तक सीमित नहीं है। केरल के हमारे भाइयों और बहनों की कड़ी मेहनत के बिना संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी के अन्य देशों की आर्थिक हालत वर्तमान स्थिति जैसी नहीं होती। इन देशों में काम कर रहे केरल के प्रवासी श्रमिक विदेशी मुद्रा भेज कर भारत के विकास में योगदान कर रहे हैं। 
  राष्ट्र निर्माण में हम उन्हें और उनकी भूमिका को भुला नहीं सकते। राष्ट्रपति ने कहा कि केरल को तीन क्षेत्रों में स्पष्ट बढ़त है। ये क्षेत्र हैं- सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन और स्वास्थ्य। इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर हैं विशेष कर केरल के प्रतिभावान युवक और युवतियों के लिए।

कर्नाटक में तटीय संरक्षण के लिए 65.5 मिलियन डॉलर का ऋण

    नई दिल्ली। भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कर्नाटक में तटीय संरक्षण में सहायता के लिए 65.5 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किए।

     एशियाई विकास बैंक और भारत सरकार ने कल यहां राष्‍ट्रीय राजधानी में 65.5 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किए। कर्नाटक के पश्चिमी तट पर तटीय क्षरण रोकने के लिए निरंतर आवश्‍यक कदम उठाने के उद्देश्‍य से यह समझौता किया गया है। 
  ऋण सतत तटीय संरक्षण एवं प्रबंधन निवेश कार्यक्रम के तहत 250 मिलियन डॉलर की वित्त पोषण सहायता की दूसरी किस्‍त है। 
  इस धनराशि का उपयोग तटीय संरक्षण की तत्‍कालिक जरूरतों को पूरा करने और कनार्टक के लोक निर्माण, बंदरगाह एवं अंतर्देशीय जल परिवहन विभाग की संस्‍थागत क्षमता बढ़ाना है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्‍त सचिव समीर कुमार खरे ने भारत सरकार की ओर से और एडीबी के इंडिया रेजीडेंट मिशन के कंट्री डॉयरेक्‍टर केनिची योकोयामा ने एडीबी की ओर से इस ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किए।
    एक पृथक परियोजना समझौते पर कनार्टक सरकार की ओर से अपर मुख्‍य सचिव एम. लक्ष्‍मीनारायण ने हस्‍ताक्षर किए।

धरोहर गोद ले योजना के अंतर्गत 14 स्‍मारक, सात कंपनियों का चयन

   नई दिल्ली। नई दिल्‍ली के जनपथ पर आयोजित पर्यटन पर्व के हुए समापन समारोह में पर्यटन मंत्रालय की धरोहर गोद ले योजना के अंतर्गत 14 स्‍मारकों के लिए सात कंपनियों को आशय पत्र सौंपे गये। ये कंपनियां भविष्‍य की स्‍मारक मित्र होगी ।

   अंतर मंत्री स्‍तरीय निगरानी और दूरदर्शी समिति के सदस्‍यों ने शुरूआती चरण में प्रतिष्ठित संगठनों से मिली सकारात्‍मक प्रतिक्रिया की सराहना की, जिसमें सत्‍तावन (57) प्रतिक्रियाएं प्राप्‍त हुई। सात (7) अभिरूचि व्‍यक्‍त करने के जरिये चौदह (14) स्‍मारकों का चयन किया गया।
  विस्‍तृत जांच के बाद स्‍मारक मित्र चुनने के लिए आतिथ्‍य, यात्रा और बैंकिंग उद्योग की निम्‍नलिखित कंपनियों का चयन किया गया। दिल्‍ली स्थित जंतर-मंतर को गोद लेने के लिए एसबीआई फाउंडेशन का चयन किया गया।
    कोणार्क का सूर्य मंदिर, भुवनेश्‍वर का राजा रानी मंदिर, जयपुर और ओडिशा के रत्‍नागिरी स्‍मारक को गोद लेने के लिए टी के इंटरनेशनल लिमिटेड को चुना गया। कर्नाटक के हम्‍पी, जम्‍मू-कश्‍मीर के लेह पेलेस, दिल्‍ली का कुतुब मीनार, महाराष्‍ट्र की अजंता गुफा को गोद लेने के लिए यात्रा ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड का चयन किया गया।
    कोच्चि के मत्‍तानचेरी पेलेस संग्रहालय और दिल्‍ली का सफदरजंग मकबरा गोद लेने के लिए ट्रेवल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को चुना गया। गंगोत्री मंदिर क्षेत्र और गोमुख तक के मार्ग और जम्‍मू कश्‍मीर के माउंट स्टोककांगरी, लद्दाख को गोद लेने के लिए एडवेन्‍चर टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया का चयन किया गया।
    दिल्‍ली की अग्रसेन की बावड़ी को गोद लेने के लिए स्‍पेशल होलीडेज ट्रेवल प्राइवेट लिमिटेड का चयन दिल्‍ली के रोटरी क्‍लब के साथ किया गया। दिल्‍ली के पुराने किले को गोद लेने के लिए एनबीसीसी को चुना गया। विश्‍व पर्यटन दिवस अर्थात् 27 सितम्‍बर, 2017 को राष्‍ट्रपति ने पर्यटन मंत्रालय की ‘एक धरोहर गोद ले योजना’ का शुभारंभ किया था। 
   इसके बाद पर्यटन मंत्रालय ने निजी, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और कॉरपोरेट जगत के व्‍यक्तियों को स्‍मारक स्‍थलों को गोद लेने और संरक्षण तथा विकास के माध्‍यम से स्‍मारकों और पर्यटन स्‍थलों को स्‍थायी बनाने का दायित्‍व निभाने के लिए आमंत्रित किया था। यह योजना संस्‍कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के सहयोग से पर्यटन मंत्रालय का असाधारण प्रयास है।
     इसके जरिये देशभर के स्‍मारकों, धरोहरों और पर्यटन स्‍थलों को विकसित कर पर्यटक अनुकूल बनाने के लिए योजनाबद्ध और चरणबद्ध तरीके से पर्यटन संभावना तथा सांस्‍कृतिक महत्‍व को बढ़ाना है। भारत अपने समृद्ध और विविध सांस्‍कृतिक तथा प्राकृतिक स्‍मारकों के लिए विश्‍वभर में प्रसिद्ध है।

भारतीय नौसेना में शिप-बोर्न मल्टी-रोल हेलीकाप्टरों व पनडुब्बियों की कमी

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में आयोजित किये जा रहे नौसेना के कमांडरों के सम्मेलन को आज संबोधित किया। जो इस साल के द्विवार्षिक नौसेना कमांडरों के सम्मेलन का दूसरा संस्करण है।


 रक्षा मंत्री ने देश के समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना के सभी कर्मियों को बधाई दी। उन्होंने पड़ोसी समुद्री इलाकों में हाल में हुए घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए, भारतीय नौसेना को समुद्र में मजबूत बनने और समुद्रीय क्षेत्र में किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए सदैव तैयार और सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया। 
     रक्षा मंत्री ने पूर्व में दक्षिणी चीन सागर और जापान सागर से लेकर पश्चिम में फारस की खाड़ी और अटलांटिक महासागर तथा अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती रोकने के केन्द्रित प्रयासों सहित दक्षिण में आस्ट्रेलिया के तटों पर पिछले वर्ष के दौरान जहाजों, पनडुब्बियों और वायुयानों की नियमित तैनाती के माध्यम से उच्च परिचालन गति बनाये रखने की प्रशंसा की।
      कई द्विपक्षीय अभ्यासों में भागीदारी और इस वर्ष की शुरूआत में अमेरिका और जापानी नौसेना के साथ मालाबार अभ्यास की अभूतपूर्व सफलता की भी उन्होंने सराहना की। स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भारतीय नौसेना द्वारा ली गई बढ़त की प्रशंसा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सेना मुख्यालयों, मंत्रालय और उद्योग की सामूहिक जिम्मेदारी है कि भारत में उपकरणों और प्रणालियों के विकास का संवर्धन करने के लिए सूक्ष्म लघु और मध्यम, उद्यमों को बढ़ावा देने वाले एक अधिक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करे ताकि रक्षा क्षेत्र में आयात निर्भरता को कम किया जा सके।
     उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना शिप-बोर्न मल्टी-रोल हेलीकाप्टरों, परम्परागत पनडुब्बियों और खदान काउंटर मापन जहाजों की कमी का सामना कर रही है जिसे नौसेना की क्षमता को बनाए रखने के लिए तुरन्त दूर किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कमांडरों को आश्वासन दिया कि इन मुद्दों को उचित महत्व दिया जा रहा है। जल्द से जल्द इन कमियों को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
  रक्षा मंत्री ने हिंद महसागर क्षेत्र के तटों पर अपनी क्षमता का निर्माण करने और क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नौसेना के रचनात्मक प्रयासों की भी सराहना की, उन्होंने नियमित आधार पर हिंद महासागर क्षेत्र के तटवर्ती राष्ट्रों से नौसेना कर्मियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिलाने के लिए भारतीय नौसेना द्वारा की गई पहलों का भी उल्लेख किया। 
    हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मुद्दों के सामूहिक समाधानों का पता लगाने में सहायता करने हेतु और अगले मास गोवा में आयोजित किये जाने वाले गोवा समुद्रीय सम्मेलन के माध्यम से व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक दर्शकों को भारत और भारतीय नौसेना के रणनीतिक और परिचालन दृष्टिकोण को सामने लाने में मदद के लिए पूर्ण रूपेण क्षेत्रीय मंच के संस्थानीकरण की भी उन्होंने प्रशंसा की। 
    उन्होंने कहा कि अगले वर्ष की शुरूआत में पोर्ट ब्लेयर में आयोजित होने वाला ‘मिलान 2018’ क्षेत्रीय समुद्री मुद्दों और सुरक्षा चुनौतियों के बारे में आम प्लेटफार्म पर विचार विमर्श करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच होगा। 
   रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी देश के समुद्री हितों का उसके आर्थिक विकास के साथ एक महत्वपूर्ण संबंध है। मजबूत तथा विश्वसनीय भारतीय नौसेना को सुनिश्चित करके इन हितों की हर कीमत पर सुरक्षा की जाएगी। चार दिवसीय नौसेना के कमांडरों के सम्मेलन के विचार-विमर्श का आज तीसरा दिन है, जिसमें नौसेना का शीर्ष स्तर का नेतृत्व पिछले छह महीनों के दौरान की गई प्रमुख परिचालन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक गतिविधियों की समीक्षा कर रहा है। 
    सम्मेलन में समुद्री क्षेत्र में (नए मिशन आधारित तैनाती अवधारणा) पूरे अभियान के दौरान तैनाती के बारे में भारतीय नौसेना की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।