Thursday, 14 December 2017

स्वास्थ्य सुविधा में सहयोग के लिए भारत-मोरक्को में सहमति-समझौता

   नई दिल्ली। स्वास्थ्य सुविधा में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत और मोरक्को ने आज यहां सहमति-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। सहमति-ज्ञापन पर भारत की तरफ से स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जे.पी.नड्डा और मोरक्‍को के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. अब्‍दुलकादिर अमारा ने हस्‍ताक्षर किये। 

   इस अवसर पर केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के आला अधिकारियों सहित मोरक्‍को का उच्‍चस्‍तरीय प्रतिनिधिमंडल उपस्थित था। जे.पी.नड्डा ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत और समृद्ध पारंपरिक रिश्‍ते हैं। 
  उन्‍होंने भारत की बेहतरीन जेनेरिक दवाओं का उल्‍लेख करते हुए कहा कि भारत इन दवाओं का 200 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है। हमारे यहां एक मजबूत जन स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली काम करती है।
    इस प्रणाली की निगरानी राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के जरिये की जाती है। श्री नड्डा ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहमति-ज्ञापन के दायरे में दोनों देश आपसी सहयोग बढ़ाने में सक्षम होंगे और स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।
     दोनों देशों के बीच सहयोग के मुख्‍य क्षेत्र इस प्रकार हैं। बाल हृदय रोग और कैंसर सहित गैर-संचारी रोग। औषधि नियमन एवं गुणवत्‍ता नियंत्रण। संचारी रोग। मातृत्‍व, बाल एवं पूर्व-प्रसव स्‍वास्‍थ्‍य। बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं के आदान-प्रदान के लिए अस्‍पतालों के बीच सहयोग। स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं और अस्‍पतालों के प्रबंधन और प्रशासन में प्रशिक्षण। एक दूसरा सहमति-ज्ञापन जवाहरलाल इंस्‍टीट्यूट ऑफ पोस्‍ट-ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जिपमर) और और मराकेश मोहम्मद विश्व विद्यालय अस्पताल के बीच हुआ।
    इस अवसर पर दोनों देशों के मंत्री मौजूद थे। दोनों देशों के संस्‍थानों ने टेली-मेडिसन के क्षेत्र में सहयोग पर सहमति व्‍यक्‍त की।

भारत-मोरक्को में जल संसाधन, सड़क व समुद्री क्षेत्रों में सहयोग के लिए समझौता

   नई दिल्ली। भारत और मोरक्को ने जल संसाधन, सड़क और समुद्री क्षेत्रों में सहयोग के लिए समझौतों पर हस्‍ताक्षर किये।

  मोरक्‍को सरकार के एक शिष्‍टमंडल ने वहां के उपकरण, यातायात, लॉजिस्टिक्‍स और जल मंत्री अब्‍दुलकादिर अमारा के नेतृत्‍व में सड़क यातायात एवं राजमार्ग, नौवहन और जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी से आज यहां मुलाकात की।
   दोनों पक्षों ने सड़क यातायात, जल संसाधन और समुद्री क्षेत्र में भारत-मोरक्‍को द्विपक्षीय सहयोग संबंधी विषयों पर चर्चा की।
   दोनों देशों ने सहमति-ज्ञापनों/समझौतों पर हस्‍ताक्षर किये। जल संसाधन के क्षेत्र में सहयोग पर सहमति-ज्ञापन। भारतीय समुद्री विश्‍वविद्यालय और मोरक्‍को के हायर इंस्‍टीट्यूट ऑफ मैरीटाइम स्‍टडीज के बीच सहयोग के लिए समझौता। मोरक्‍को के नेशनल पोर्ट्स एजेंसी और भारतीय समुद्री विश्‍वविद्यालय के बीच प्रशिक्षण में सहयोग के लिए समझौता। मोरक्‍को के इंस्‍टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग इन इंजन्‍स एंड रोड मेन्टिनेंस तथा भारतीय राजमार्ग अभियन्‍ता अकादमी (आईएएचई) के बीच समझौता। 
   इस अवसर पर नितिन गडकरी ने कहा कि वे दोनों देशों के बीच सड़क यातायात, जल संसाधन और समुद्री क्षेत्रों में बड़े सहयोग की उम्‍मीद करते हैं।

सेवा की शुद्ध भावना के साथ मानवता की सेवा की आवश्यकता

    मसूरी। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने आज लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी, मसूरी में प्रशिक्षण ले रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया। 180 अधिकारियों ने अभी हाल ही में कार्यभार संभाला है, जबकि लगभग 80 अधिकारी अभी सेवाकालीन प्रशिक्षण ले रहे हैं।

  श्री रिजिजू ने राष्ट्र निर्माण, उसके सुदृढ़न तथा प्रजातांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखने में अधिकारी वर्ग की भूमिका पर जोर दिया।
  उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि वह लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विनम्र, सहज एवं संवेदनशील बनें। उपलब्धि और सफलता के बीच अंतर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उच्च सेवा में आना जहां एक उपलब्धि है, देश के लोगों की सेवा के लिए अपनी सर्वोत्तम योग्यता के अनुसार कार्य निष्पादन तथा उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप खरा उतरना सफलता है, जो मायने रखती है।
  गृह राज्यमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों तथा सरकार द्वारा उग्रवाद तथा वामपंथी अतिवाद की प्रवृति को कम करने के लिए किए गए प्रयासों के बारे में बताया।
      उन्होंने सरकार के पूर्व की ओर देखो नीति तथा पूर्वोत्तर के दक्षिणोत्तर एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में अखंड विकास की ओर सरकार के ध्यान केंद्रित किए जाने की भी चर्चा की।
    श्री रिजिजू ने भारत की एकता और अखंडता में अधिकारी वर्ग के महत्व को दोहराया और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आकांक्षी राष्ट्र की बढ़ती हुई अपेक्षाओं के बारे में स्मरण करवाया और उन्हें चुनौतियों का सामना करने के लिए अपेक्षित कौशल के साथ स्वयं को सुसज्जित करने तथा कठोर परिश्रम, संवेदनशीलता और सेवा की शुद्ध भावना के साथ मानवता की सेवा की आवश्यकता पर जोर दिया।

हज़ 2018 के प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के लिए पोर्टल

    नई दिल्ली। केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं के मेहरम (पुरूष साथी) के बिना हज़ पर जाने पर लगे प्रतिबंध को सरकार द्वारा हटाने के फैसले के बेहद सकारात्मक परिणाम निकले हैं क्योंकि देश भर की महिलाएं मेहरम के बिना हज़ पर जाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन कर रही हैं।

  आज यहां निजी टूर ऑपरेटरों के लिए एक पोर्टल की शुरूआत करते हुए श्री नकवी ने कहा कि मेहरम के बिना मुस्लिम महिलाओं को हज़ पर जाने की इजाज़त देने के सरकार के फैसले का देश भर में स्वागत हुआ है।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा महिलाओं को अधिकार सम्पन्न बनाने की दिशा में यह एक अन्य महत्वपूर्ण कदम है।
    उन्होंने कहा कि हज़ 2018 के लिए आवेदन की प्रक्रिया 15 नवम्बर को शुरू हो चुकी है। मेहरम के बिना हज़ जाने के लिए अब तक (13 दिसम्बर) 1000 से अधिक महिलाएं आवेदन कर चुकी हैं। हज़ के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 दिसम्बर तक बढ़ा दी गई है। नई हज़ नीति के अनुसार 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं जो पुरूष साथी के बिना हज़ पर जाना चाहती हैं, उन्हें 4 या अधिक महिलाओं के समूह में हज़ यात्रा पर जाने की इजाज़त दे दी गई है। 
     श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के लिए पहली बार पोर्टल शुरू किया है ताकि हज़ से जुड़ी सम्पूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो सके। यह पोर्टल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को आगे बढाने के लिए विकसित किया गया है। इस पोर्टल से प्राइवेट टूर ऑपरेटरों और हज़ यात्रियों के अनेक मुद्दों का समाधान हो सकेगा।
     इस पोर्टल के जरिये प्राइवेट टूर ऑपरेटर आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदनों की जांच अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का हज़ डिवीजन करेगा। इसके बाद ऑनलाइन ड्रा निकाला जाएगा और कोटा आवंटित किया जाएगा। 
   इस पोर्टल का उद्देश्य देश भर के प्राइवेट टूर ऑपरेटरों द्वारा पेश की जाने वाली दरों, पैकेजों और सुविधाओं का विवरण दर्शाना है। अत: इससे हज़ यात्रियों के पास न केवल अपने क्षेत्र के बल्कि देश के किसी भी अन्य भाग से अपनी पसंद का ऑपरेटर चुनने का विकल्प होगा।
    पोर्टल और उसके विभिन्न भागों का सरलता से संचालन करने के लिए यह फैसला किया गया है कि इन ऑपरोटरों से हज़ 2018 के लिए ऑनलाइन और हाथ से आवेदन आमंत्रित किये जाएंगे। श्री नकवी ने कहा कि एक तरफ निजी टूर ऑपरेटरों के लिए समूची प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है जबकि दूसरी तरफ यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि निजी टूर ऑपरेटरों के जरिये जाने वाले हज़ यात्रियों के लिए सुविधाओं में किसी भी प्रकार की विसंगतियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 
    अल्पसंख्यक मामलो के मंत्रालय ने इस संबंध में कड़े उपाय किये हैं। श्री नकवी ने कहा कि हज़ के लिए अब तक 2 लाख 63 हजार से अधिक लोगों ने आवेदन दिये हैं, जिनमें से करीब 1 लाख 38 हजार आवेदन ऑनलाइन किये गए हैं। 
     इससे समूची हज़ प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के फैसले को बल मिला है। इसके अलावा हज़ के लिए लोग मोबाइल एप से भी आवेदन कर रहे हैं। श्री नकवी ने कहा कि हज़ समिति और प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के बीच कोटा का वितरण पिछले वर्ष की तरह रखा गया है।
    उन्होंने कहा कि हज़ 2018 के लिए नई हज़ नीति के अनुसार संचालित होगा। सऊदी अरब सरकार ने वर्ष 2017 में भारत का हज़ कोटा बढ़ाकर 1 लाख 70 हजार 25 कर दिया था।

पनडुब्‍बी कलवरी राष्‍ट्र को समर्पित

    मुंबई। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज मुंबई में आयोजित एक समारोह में नौसेना की पनडुब्‍बी आईएनएस कलवरी को राष्‍ट्र को समर्पित किया।

  इस अवसर पर देश के लोगों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने आईएनएस कलवरी को ‘मेक इन इंडिया’ का प्रमुख उदाहरण बताया।
  उन्‍होंने इसके निर्माण में शामिल सभी लोगों की सराहना की। उन्‍होंने इस पनडुब्‍बी को भारत और फ्रांस के बीच तेजी से बढ़ रही रणनीतिक साझेदारी का उत्‍कृष्‍ट उदाहरण बताया। उन्‍होंने कहा कि आईएनएस कलवरी से भारतीय नौसेना की शक्ति और सुदृढ़ होगी। 
     प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी को एशिया की सदी कहा जाता है। यह भी तय है कि 21वीं सदी के विकास का मार्ग हिंद महासागर से होकर जाता है। इसलिए सरकार की नीतियों में हिंद महासागर का विशेष स्‍थान है। 
    प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दृष्टिकोण को विशेष नाम सागर (एसएजीएआर) – यानि सुरक्षा और इस क्षेत्र में सभी का विकास के जरिए समझा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हिंद महासागर में अपने वैश्विक, रणनीतिक और आर्थिक हितों को लेकर पूरी तरह से सजग है।
     उन्होंने कहा कि इसलिए आधुनिक और बहुमुखी भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में शांति और स्थायित्व को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्र में निहित शक्तियां हमारे राष्ट्र निर्माण के लिए आर्थिक शक्ति प्रदान करती है।
      उन्होंने कहा कि इसलिए भारत समुद्री आतंकवाद, समुद्री डकैती और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों को लेकर सजग है, जो न केवल भारत बल्कि इस क्षेत्र के अन्य राष्ट्रों के लिए भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि भारत इन चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का मानना है कि विश्व एक परिवार है और इसी भावना के साथ वह अपने वैश्विक उत्तरदायित्वों को निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने साझेदार देशों के संकट के समय में ‘सबसे पहले’ उनके साथ खड़ा हुआ है।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय कूटनीति और भारतीय सुरक्षा तंत्र का मानवीय पहलू हमारी विशिष्टता है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ और सक्षम भारत की संपूर्ण मानवता के लिए प्रमुख भूमिका है। उन्होंने कहा कि विश्व के देश भारत के साथ शांति और स्थिरता के पथ पर चलने के इच्छुक हैं।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्ष में रक्षा और सुरक्षा से संबंधित संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव की शुरूआत हुई है। उन्होंने कहा कि आईएनएस कलवरी के निर्माण के दौरान एकत्रित कौशल भारत की संपदा है। 
    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता के कारण ही काफी समय से लंबित ‘वन रैंक वन पेंशन’ के मुद्दे का समाधान निकल पाया है।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों और सैन्य बलों की वीरता से ही जम्मू और कश्मीर में छद्म युद्ध के रूप में आतंकवाद के इस्तेमाल को असफल किया गया है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र सुरक्षा में अपना जीवन समर्पित करने वाले व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।