Sunday, 9 July 2017

देश के 100 जिलों में गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र की स्थापना

       केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा स्थापित किये जा रहे गरीब नवाज़ कौशल विकास केंद्रों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) एकाउंटिंग-प्रोग्रामिंग और अन्य सम्बंधित विषयों पर सर्टिफिकेट कोर्स कराया जायेगा। 

       हैदराबाद के विजयनगर कॉलोनी में पहले गरीब नवाज़ कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन करते हुए कहा नकवी ने कहा कि इस लगभग तीन महीने के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) कोर्स से प्रशिक्षित युवा, ना केवल छोटे-मंझोले उद्यमियों और आम जनता की मदद कर पाएंगे बल्कि इस कोर्स को करने के बाद इन प्रशिक्षित युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। 
      नकवी ने कहा की देश भर में एक राष्ट्र-एक टैक्स के लिए लागू जीएसटी से देश भर में सम्बंधित विषयों की जानकारी रखने वाले प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ जाएगी। ऐसे में गरीब नवाज़ कौशल विकास केंद्र द्वारा कराये गए जीएसटी सर्टिफिकेट कोर्स की उपयोगिता भी बढ़ जाएगी जिसका सीधा लाभ अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को मिलेगा। ये पाठ्यक्रम राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय एक्सपर्ट्स की सहायता से चलाये जायेंगे। 
       नकवी ने कहा कि देश के 100 जिलों में गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र की स्थापना की जाएगी जहाँ लाखों की संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं का रोजगारपूरक कौशल विकास होगा। हैदराबाद के अलावा आने वाले 6 महीनों में नोएडा, लखनऊ, जयपुर, नागपुर, औरंगाबाद, भोपाल, इंदौर, इलाहाबाद, मैसूर, चेन्नई, गोवा, गौहाटी, कोलकता, पटना, किशनगंज, देहरादून, शाहजहांपुर, रामपुर, रांची, गिरीडीह, मेवात, तिजारा, पानीपत, दिल्ली, उधमसिंह नगर, अमृतसर, चंडीगढ़, मुंबई आदि स्थानों पर गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र शुरू किये जायेंगे।
       नकवी ने कहा कि गरीब नवाज़ कौशल विकास केंद्र अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं की तरक्की और सशक्तिकरण का केंद्र साबित होंगे। गरीब नवाज़ कौशल विकास केंद्र अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं को अल्पकालिक रोजगार उन्मुख कौशल विकास मुहैय्या कराने की योजना शुरू की गई है। इन अल्पकालिक पाठ्यक्रमों में मोबाइल एवं लैपटॉप रिपेयरिंग, कंप्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग, रिटेल प्रबंधन कार्यक्रम, मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग, सुरक्षा गार्ड प्रशिक्षण, औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन में डिप्लोमा, हाउसकीपिंग पाठ्यक्रम भी शामिल हैं।
          नकवी ने हैदराबाद के राजेंद्र नगर में अल्पसंख्यक मंत्रालय की बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के तहत निर्मित आवासीय स्कूल की आधारशिला रखी। इसके अलावा येडापल्ली और रेंजल में आंगनवाड़ी केंद्रों की आधारशिला रखी। नकवी ने कहा कि एजुकेशन (शिक्षा), एम्प्लॉयमेंट (रोजगार), एम्पावरमेंट (सशक्तिकरण) के माध्यम से अल्पसंख्यक मंत्रालय ने गरीब, पिछड़े एवं कमजोर वर्ग के अल्पसंख्यकों को प्रगति की मुख्यधारा का हिस्सेदार-भागीदार बनाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। 
         कोई भी गरीब शिक्षा से वंचित ना रहे इसके लिए हम तहरीके तालीम शुरू कर रहे हैं, जिसके तहत हम शिक्षा के संसाधन एवं सुविधा का हर क्षेत्र में व्यापक जाल बिछाएंगे। इससे पहले नकवी ने हैदराबाद में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम (एनएमडीएफसी) की राज्य चैनेलाइजिंग एजेंसियों (एससीए) के वार्षिक सम्मेलन को भी सम्बोधित किया। नकवी ने कहा की अल्पसंख्यक मंत्रालय की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में एनएमडीएफसी ने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 
        नकवी ने इस अवसर पर एनएमडीएफसी की योजनाओं पर बने हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू के मोबाइल ऐप को भी लॉन्च किया। एनएमडीएफसी, अपनी योजनाओं पर मोबाइल ऐप लॉन्च करने वाला पहला शीर्ष निगम है। यह ऐप लक्षित समूहों के लोगों को एनएमडीएफसी की योजनाओं की जानकारी मुहैया कराने के साथ-साथ एनएमडीएफसी की योजनाओं के अंतर्गत, ऋण हासिल करने में, उनका मार्गदर्शन करने में भी मददगार साबित होगा। 
          नकवी ने अल्पसंख्यक समुदायों के दस्तकारों के लाभ के लिए दस्तकार ऋण योजना की भी शुरूआत की। इस योजना के अंतर्गत, दस्तकारों को उनकी पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती ऋण मिल सकेगा। उम्मीद है कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के तहत एनएमडीएफसी की इस पहल से देश के पारंपरिक कला और शिल्प की विरासत को पुनर्जीवित करने में दूरगामी परिणाम निकलेंगे।
          बैठक के दौरान, एनएमडीएफसी की एससीए के द्वारा एनएमडीएफसी की योजनाओं को लागू करने में, सीजीटीएसएमई के साथ संभावित टाई-अप करने के लिए, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएसएमई) के बारे में सिडबी द्वारा एक प्रस्तुति दी गई।
       एनएमडीएफसी की योजनाओं को मुद्रा बैंक से जोड़कर, इसे लागू करने की संभावनाओं पर भी एक प्रस्तुति सम्मेलन के दौरान दी गई। चालू वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान, एनएमडीएफसी और संबंधित राज्य चैनेलाइजिंग एजेंसियों के बीच वार्षिक आवंटन और लक्ष्य के समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।

विजाग-चेन्‍नई औद्योगिकी कॉरिडोर भारत के लिए महत्‍वपूर्ण

       वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री का एशियाई विकास बैंक के अध्‍यक्ष के साथ बुनियादी ढांचे के विकास पर विमर्श केन्‍द्रीय वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने एशियाई विकास बैंक (एबीडी) के अध्‍यक्ष टेकहिको नाकाओ के साथ मुलाकात की।
     उन्‍होंने भारत में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एशियाई विकास बैंक के प्रयासों का स्‍वागत किया और उनकी सराहना की। उन्‍होंने कहा कि सरकार राज्‍यों को बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के वित्‍त पोषण में मदद करेगी।
      श्रीमती सीतारमण ने विजाग-चेन्‍नई औद्योगिकी कॉरिडोर में हुई प्रगति के बारे में भी चर्चा की। उन्‍होंने यह भी उल्‍लेख किया कि ईसीईसी का विजाग से ओडिशा और पश्चिम बंगाल का उत्‍तरी विस्‍तार बहुत महत्‍वपूर्ण है। एडीबी को इस कार्य में तेजी लानी चाहिए।
       श्रीमती निर्मला सीतारमण ने यह भी उल्‍लेख किया कि चेन्‍नई से कन्‍याकुमारी तक दक्षिणी विस्‍तार में कोलाचल बंदरगाह और विझीनजम का विस्‍तार भी शामिल किया जाना चाहिए, क्‍योंकि इससे इन क्षेत्रों के लिए अनेक आर्थिक लाभ उपलब्‍ध होंगे। इन परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन की नजदीकी से निगरानी की जानी चाहिए और इसके लिए समय सीमा का पालन किया जाना चाहिए।
         एडीबी अध्‍यक्ष ने ईस्‍ट कोस्‍ट इक्‍नोमिक कारिडोर (ईसीईसी) में हुई प्रगति के बारे में चर्चा की और जीएसटी लागू करने की दिशा में सरकार के सुधारों की प्रशंसा करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया। जीएसटी लागू करने के विभिन्‍न पहलुओं के बारे में भी विस्‍तार से चर्चा हुई।
      एडीबी के दक्षिण एशिया विकास के महानिदेशक हुन किम ने उल्‍लेख किया कि वे ईसीईसी के साथ-साथ विकास के लिए अगले पांच वर्षों के दौरान पांच बिलियन अमरीकी डॉलर से भी अधिक का निवेश बढ़ाने के इच्‍छुक हैं।    

जल संरक्षण कार्यों में दिहाड़ी मजदूरों की मांग बढ़ी

        मनरेगा के तहत खासकर जल संरक्षण कार्यों में दिहाड़ी मजदूरों की मांग बढ़ी है। लगभग 75 करोड़ व्यक्ति के लिए पहले से ही काम उपलब्ध है। इसके बढ़ने की संभावना है। 

      मनरेगा के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 80 लाख से 1 करोड़ लोग प्रतिदिन काम कर रहे हैं। इनमें से 86 फीसदी से ज्यादा लोगों को 15 दिन के भीतर भुगतान किया है। 99 फीसदी भुगतान इलेक्ट्रॉनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (ई-एफएमएस) के जरिये किया जाता है। मनरेगा में कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के कार्यक्षेत्र पर 74 फीसदी व्यय किया जा रहा है। 
        प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन ने जल संचयन और जल संरक्षण के लिए 2,264 जल ब्लॉकों पर विशेष ध्यान दिया। पूरे देश भर में वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2.62 लाख जल संरक्षण के कामों को पूरा किया गया जिसमें 1,31,789 खेत तालाब भी शामिल है। पिछले दो वर्षों में मनरेगा ने 91 लाख हैक्टेयर से ज्यादा सिंचाई क्षमता का सृजन किया, जिसका हाल ही में आकलन आर्थिक विकास संस्थान (आईईजी), नई दिल्ली द्वारा किया गया। मनरेगा की 1.45 करोड़ परिसंपत्तियां भू-चिन्हित और पब्लिक डोमेन में है। 
          आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) से पहले से ही 5.2 करोड़ कामगार जुड़े हैं। नरेगा सॉफ्ट एमआईएस में 9 करोड़ से ज्यादा कामगारों ने अपनी आधार की जानकारियों को जोड़ने पर सहमति दी। 87 फीसदी जॉब कार्डों को सत्यापित किया जा चुका है। 1.1 करोड़ जॉब कार्डों को कारणों की वजह से रद्द कर दिया गया। वंचित घरों को काम देने के लिए 89 लाख नये जॉब कार्डों के पंजीकरण को सुनिश्चित किया गया। 
        स्वतंत्र सामाजिक लेखा-परीक्षा इकाइयों का 24 राज्यों में गठन किया गया और राज्यों के 3100 संसाधन व्यक्तियों को सामाजिक लेखा-परीक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया गया। गांव के संसाधन व्यक्तियों के रूप में महिला स्वयं सहायता समूह को बड़े स्तर पर सामाजिक लेखा-परीक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया गया। 19 राज्यों में बेयर फूट तकनीशियनों (बीएफटी) ने कार्यक्षेत्र के स्तर पर तकनीकी सहायता का प्रशिक्षण दिया।
         सभी कार्यस्थलों पर सार्वजनिक सूचना और नागरिक सूचना केन्द्रों हो यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। रिकार्ड के रख-रखाव का सरलीकरण किया गया और 90 फीसदी से ज्यादा ग्राम पंचायतें सरलीकरण के लिए सात रजिस्टारों को अपना चुकी है। 
      मनरेगा कर्मचारियों को कौशल विकास के जरिए डीडीयूजीकेवाई के तहत दिहाड़ी मजदूरी और राज्यों में ग्रामीण स्व-रोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरईएसटीआई) बैंक श्रृंखला के जरिये स्व-रोजगार के लिए प्रभावी तरीके से काम कर रहा है। गरीबों घरों की आर्थिकी को बेहतर बनाने के लिए महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के जरिये, आजीविका की विविधता के लिए मनरेगा पर जोर दिया।

देश के 37 जलाशय से 60 मेगावाट से अधिक पनबिजली

          देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 29.665 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 19 प्रतिशत है। दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 91 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। 

      इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.66 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 26 प्रतिशत है।
            पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 24 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 31 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है,लेकिन पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से यह कमतर है। 
       पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 2.86 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 15 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 17 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 17 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।
          पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 5.84 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 22 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 9 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 20 प्रतिशत थी। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे भी औसत संग्रहण से बेहतर है।
         मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 11.83 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 28 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 20 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 17 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। 
         दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.47 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 9 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 10 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 21 प्रतिशत था।
          इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कमतर है, और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।
           पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पंजाब, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और कर्नाटक शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बराबर है, उनमें हिमाचल प्रदेश, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं) शामिल हैं। 
      इसी अवधि के लिए पिछले साल की तुलना में कम संग्रहण करने वाले राज्यों में राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, उत्‍तराखंड, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं।