Sunday, 31 December 2017

जनजाति कल्याण हेतु बजट 24,005.00 करोड़ से बढ़कर 31,920.00 करोड़

    नई दिल्ली। वर्ष 2017 के दौरान जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने प्रयास जनजातियो के सामाजिक- आर्थिक विकास के लिए जारी रखा। जैसे उचित शिक्षा, भवन, तथा अन्य ज़रूरी योजनाओं से एक अंतर को कम करने की कोशिश की गई।

  सरकार का इस मंत्रालय को यह निर्देश देता है कि वह ‘ट्राइबल सब प्लान’ के अंतर्गत दी जाने वाली धनराशि की देखरेख करे जिसे नीति आयोग ने तैयार किया है। बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के प्रयास में मंत्रालय लगातार सभी योजनाओं की समीक्षा कर रहा है।
     जनजातीय कार्य मंत्रालय के लिए वार्षिक बजट वर्ष 2016-17 में 4827.00 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 5329.00 करोड़ कर दिया गया है। इसके अलावा सभी मंत्रालयों में जनजाति कल्याण हेतु बजट 24,005.00 करोड़ से बढ़कर 31,920.00 करोड़ देखा गया। मंत्रालय इस राशि का 70ऽ हिस्सा पहले ही जनजाति कल्याण की विभिन्न योजनाओं पर खर्च कर चुकी है। 2280.49 करोड़ की धनराशि दो विशेष क्षेत्रों के कल्याण हेतु (शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका/आय बढ़ोतरी) जारी की जा चुकी है। 
    पब्लिक फाइनेंसियल सिस्टम को लागू करके मंत्रालय जारी धनराशि के सदुपयोग और पारदर्शिता पर धयान लगे हुए है। जनजातिकल्याण हेतु धनराशि की देखरेख : 32 केन्द्रीय मंत्रालय और विभाग ‘ट्राइबल सब प्लान’ की धनराशि को देख रहे हैं जो जनजातियों की विभिन्न 273 योजनाओं के लिए आबंटित है। सरकार का ॠएङ ने जनवरी 2016 में इस मंत्रालय को यह निर्देश दिया था कि वह‘ट्राइबल सब प्लान’ के अंतर्गत दी जाने वाली धनराशि की देखरेख करे जिसे नीति आयोग ने तैयार किया है। इसकी देखरेख के लिए एक ऑनलाइन सिस्टम भी बने गया है।
     यह ढांचा जनजातियों के कल्याण की योजनाओं, प्रदर्शन, और परिणाम की भी जांच करता है। साथ ही क्षेत्र आधारित प्रदर्शन की जांच करता है जिससे जिम्मेदारी का निर्धारण किया जा सके। इसके लिए एक नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है जोमंत्रालय के साथ संपर्क बनाए रहता है। इस पूरे कार्यक्रम को छमाही समीक्षा के अंतर्गत मंत्रालय और नीति आयोग देखेंगे जिसके आधार पर इसके प्रदर्शन का आकलन किया जायेगा। 15.12.2017 तक 68ऽ धनराशि विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा जारी की जा चुकी है जो जनजातियों के कल्याण की विभिन्न योजनाओं जैसे – शिक्षा, स्वास्थ्य. कृषि, सिंचाई, सड़क, भवन, बिजली, रोजगार उत्पादन एवं कौशल निर्माण पर खर्च किया गया है।
      एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल की योजना : 51 एकलव्यमॉडल रेजिडेंशियल स्कूल पिछले तीन वर्षों में बनाए गए, लक्ष्य 190 ऐसे स्कूलों का है। 2017-18 में 14 ऐसे स्कूलों को मंजूरी दी गई जिसके लिए 322.10 करोड़ की राशि जारी की गई। अब 271 ऐसे स्कूलों की मंजूरी मंत्रालय दे चुका है। 235.48 करोड़ की धनराशि 2017-18 के दौरान राज्यों को जारी गई जिसमे 190 स्कूलों में 56000 जनजातीय विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं जिन पर प्रति विद्यार्थी 42000 का सालाना खर्च है।
     कौशल विकास : 165.00 करोड़ की धनराशि विभिन्न राज्यों को विशेष केन्द्रीय सहायता योजना के तहत जारी की जा चुकी है जो अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत 71 हज़ार से ज्यादा पुरुष/महिला जनजाति लाभार्थियों के कौशल विकास के लिए है। जैसे- दफ़्तर प्रबंधन, सोलर टेकनीशियन, इलेक्ट्रीशियन, ब्यूटिशियन, हस्तकारीगर, मजदूरी कार्य जैसे- प्लम्बर, मिस्त्री, फिटर, वेल्डर, बढई, फ्रिज एवं ए.सी ठीक करना, मोबाईल ठीक करना,पोषण, आयुर्वेदिक एवं ट्राइबल औषधियाँ, आई टी, डाटा एंट्री, कपड़ा, नर्सिंग, वहां चालक एवं ठीक करना, बिजली की मोटर बांधना, सुरक्षाकर्मी, गृहप्रबंधन, खुदरा दुकानदारी, हॉस्पिटैलिटी, ईको-पर्यटन एवं एडवेंचर पर्यटन।
     जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के लिए संग्रहालयों का निर्माण : सरकार अपनी इच्छानुसार जनजातीय संग्रहालयों का निर्माण उन राज्यों में कर रही है जहाँ ये लोग रहे, अंग्रेजों के खिलाफ़ संघर्ष किया और सर झुकाने से इनकार किया। सरकार ऐसे राज्यों में प्रतीक रूप में जनजातीय संग्रहालय बनाएगी जिससे आने वाली पीढियां यह जान सकें कि किस प्रकार हमारी ये जनजातियाँ बलिदान देने में कितनी आगे थीं।  
    सरकार ने यह तय किया है कि वह स्टेट ऑफ़ आर्ट ट्राइबल म्यूजियम का निर्माण गुजरात में करेगी जिसका कुल खर्च 75 करोड़ है जिसमें जनजातीय कार्य मंत्रालय 50 करोड़ देगा। इसका 25 करोड़ पहले ही राज्य को दिया जा चुका है। अति संवेदन शील जनजाति समूहों के अंतर्गत पहल : मंत्रालय अति संवेदन शील जनजाति समूहों के विकास हेतु धनराशि 270 (2016-17) करोड़ से बढाकर 340 (2017-18) करोड़ कर चुका है। राज्य सरकारों को विभिन्न स्तरों पर खर्च करने की आज़ादी दी गई है। पी.वी.टी.जी. के सर्वांगीण विकास के लिए सूक्ष्मस्तर की योजना तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। पी.वी.टी.जी. के पारंपरिक शिल्प, पारंपरिक औषधीय प्रक्रिया,खानपान एवं सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने पर ध्यान दिया जा रहा है। आर्थिक सहायता 212.19करोड़ से बढ़ाकर 265.00करोड़ कर दी गई है।
     जनजाति विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा हेतुराष्ट्रीय अनुदान एवं छात्रवृत्ति योजना : योजना के लिए आर्थिक सहायता 80 करोड़ से बढ़ाकर 120करोड़ कर दी गई है। छात्रवृत्ति योजना : उच्च दक्षता वाले विद्यार्थियों के आवेदन के लिए एन.एस.पी. काइस्तेमाल किया जा रहा है। ट्यूशन फीस संस्थानों को सीधा भेजी जा रही है। कुल पारिवारिक आय की सीमा 4.50 लाख से बढ़कर 6.00 लाख कर दी गई है।
     आदि महोत्सव : जनजातिकार्य मंत्रालय ने ट्रिफेड (च्र्ङक्ष्क़कक़्) के सहयोग से एक राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव का आयोजन 16 नवम्बर 2017 से 30 नवम्बर 2017 तक किया । इस महोत्सव की शुरुआत महान आदिवासी जन नेता और स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के 142वें जन्मदिवस पर अखबारोंएवं सोशल मीडिया मेंएक विज्ञापन देकर श्रद्धांजलि दी गई ।
    आदि महोत्सव का उदघाटन उप-राष्ट्रपति ने 16 नवम्बर के दिन किया । आदिवासी संस्कृति कला, शिल्प, खानपान और व्यवसाय का यह महोत्सव दिल्ली में 15 दिन तक लाखों दिल्लीवासियों के बीच मनाया गया । यहाँ आदिवासी कलाकारों की बेहतरीन शिल्प कला का नज़ारा दिखा । इसमें सुन्दर साड़ियाँ, ड्रेस मटिरिअल, आभूषण, बांस और सरकंडे से बनी बस्तुओं, पेंटिंग जैसी कई चीज़ें शामिल थी । 27 राज्यों से आए करीब 800 कलाकार और कारीगरों ने इसमें भाग लिया और अपने उत्पाद बेचे ।
    इसी बीच आदिबासी नृत्य और लोकसंगीत की भी कई प्रस्तुतियां दी गईं लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान 85 आदिवासी रसोइयों के हाथों बनी स्वादिष्ट व्यंजनों ने खींचा। इसमें तेलंगाना से बंजारा बिरयानी, ओडिशा से खोदियार रोटी और चिकन के साथ उत्तर पूर्व के राज्यों से कई स्वादिष्ट शाकाहारी और मासाहारी व्यंजन शामिल थे ।दिल्ली के लोगों ने इन सब चीज़ों का लुत्फ़ उठाया। 15 दिन के मेले में आदिवासी कारीगरों ने करीब 1.60 करोड़ की बिक्री की जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है ।
    इस महोत्सव में कुल बिक्री 4.10 करोड़ की हुई जिसे लेकर पूरा आदिवासी समूह उत्साहित था। गैर सरकारी अनुदान : मंत्रालय उन गैर सरकारी संगठनों को जो स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं उन्हें विशेष अनुदान दे रहा है । इस विषय में पारदर्शिता लाने और सरकार की नीतियों का पालन करने के लिए एक एन.जी ओ ग्रांट पोर्टल शुरू किया गया है । इस तरह अब हर आवेदन इसी ऑनलाइन पोर्टल के जरिये मंगवाया जाता है । 
    इसी के साथ मैरिट के आधार पर नई परियोजनाओं को अनुदान भी कई सालों बाद शुरू किया जाएगा। लघु वन उत्पाद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य : साल 2013-14 में इस योजना की शुरुआत 10 लघु वन उत्पादों के लिए हुई थी जिसमें बाद में 31.10.16 को बदलाव किए गए साथ ही अन्य कई उपादों को इस श्रेणी में जोड़ा गया और इसे देश भर में लागू करने को स्वीकृति दी गई । इससे पहले यह योजना पांचवी अनुसूची वाले राज्यों में ही लागू थी। 
   इसी तरह जिन 10 वस्तुओं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य शुरू से था ट्रिफेडने टेरी के सहयोग से किए गए शोध के बाद इन पर पुनर्विचार किया । साल के बीज, सालकी पत्तियाँ, बीज के साथ चिरौंजी पौध, रंगीनी लाख और कुसुमी लाख जैसे पांच उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य नवम्बर 2017 में बढाए गए।

दुनिया का सबसे बड़ा सर्वे ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2018’ किया जाएगा

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। ‘मन की बात’ का, इस वर्ष का यह आख़िरी कार्यक्रम है और संयोग देखिए कि आज, वर्ष 2017 का भी आख़िरी दिन है। 

   इस पूरे वर्ष बहुत सारी बाते हमने और आपने की। ‘मन की बात’ के लिए आपके ढ़ेर सारे पत्र, विचारों का ये आदान-प्रदान, मेरे लिए तो हमेशा एक नई ऊर्जा लेकर के आता है। कुछ घंटों बाद, वर्ष बदल जाएगा लेकिन हमारी बातों का यह सिलसिला आगे भी इसी तरह जारी रहेगा। आने वाले वर्ष में हम, और नयी-नयी बातें करेंगे, नये अनुभव करेंगे। आप सबको 2018 की अनेक-अनेक शुभकामनाएँ।
    अभी पिछले दिनों 25 दिसम्बर को विश्वभर में क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। भारत में भी लोगों ने काफी उत्साह से इस त्योहार को मनाया। क्रिसमस के अवसर पर हम सब ईसा मसीह की महान शिक्षाओं को याद करते हैं और ईसा मसीह ने सबसे ज़्यादा जिस बात पर बल दिया था, वह था- सेवा-भाव। सेवा की भावना का सार हम बाइबल में भी देखते हैं।
      प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह दिखाता है कि सेवा का माहात्म्य क्या है! विश्व की कोई भी जाति होगी, धर्म होगा, परम्परा होगी, रंग होंगे लेकिन सेवाभाव, ये मानवीय मूल्यों की एक अनमोल पहचान के रूप में है। हमारे देश में ‘निष्काम कर्म’ की बात होती है, यानी ऐसी सेवा जिसमें कोई अपेक्षा न हो। हमारे यहाँ तो कहा गया है – सेवा परमो धर्मः। ‘जीव-सेवा ही शिव-सेवा’ और गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस तो कहते थे – शिव-भाव से जीव-सेवा करें यानी पूरे विश्व में ये सारे समान मानवीय मूल्य हैं। आइए, हम महापुरुषों का स्मरण करते हुए, पवित्र दिवसों की याद करते हुए, हमारी इस महान मूल्य परम्परा को, नयी चेतना दें, नयी ऊर्जा दें और ख़ुद भी उसे जीने का प्रयास करें। 
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह वर्ष गुरुगोविन्द सिंह जी का 350वाँ प्रकाश पर्व का भी वर्ष था। गुरुगोविन्द सिंह जी का साहस और त्याग से भरा असाधारण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। गुरुगोविन्द सिंह जी ने महान जीवन मूल्यों का उपदेश दिया और उन्हीं मूल्यों के आधार पर उन्होंने अपना जीवन जिया भी। एक गुरु, कवि, दार्शनिक, महान योद्धा, गुरुगोविन्द सिंह जी ने इन सभी भूमिकाओं में लोगों को प्रेरित करने का काम किया। 
    उन्होंने उत्पीड़न और अन्याय के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। लोगों को जाति और धर्म के बंधनों को तोड़ने की शिक्षा दी। इन प्रयासों में उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत कुछ गँवाना भी पड़ा। लेकिन उन्होंने कभी भी द्वेष की भावना को जगह नहीं दी। जीवन के हर-पल में प्रेम, त्याग और शांति का सन्देश - कितनी महान विशेषताओं से भरा हुआ उनका व्यक्तित्व था! ये मेरे लिए सौभाग्य की बात रही कि मैं इस वर्ष की शुरुआत में गुरुगोविन्द सिंह जी 350वीं जयन्ती के अवसर पर पटनासाहिब में आयोजित प्रकाशोत्सव में शामिल हुआ।
      प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आइए, हम सब संकल्प लें और गुरुगोविन्द सिंह जी की महान शिक्षा और उनके प्रेरणादायी जीवन से, सीख लेते हुए जीवन को ढालने का प्रयास करें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वोट की शक्ति, लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति है। लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए ‘वोट’ सबसे प्रभावी साधन है। आप केवल मत देने के अधिकारी नहीं बन रहे हैं। आप 21वीं सदी का भारत कैसा हो? 21वीं सदी के भारत के आपके सपने क्या हों? आप भी तो भारत की 21वीं सदी के निर्माता बन सकते हैं और इसकी शुरुआत एक जनवरी से विशेष रूप से हो रही है। और आज अपनी इस ‘मन की बात’ में, मैं 18 से 25 वर्ष के ऊर्जा और संकल्प से भरे हमारे यशस्वी युवाओं से बात करना चाहता हूँ।
      नया भारत जो ये जातिवाद, साम्प्रदायवाद, आतंकवाद, भ्रष्टाचार के ज़हर से मुक्त हो। गन्दगी और ग़रीबी से मुक्त हो। नया भारत, जहाँ शांति, एकता और सद्भावना ही हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आप ये जानकर के हैरान रह जाएंगे कि 1990 में आतंकवादियों ने उनके पैतृक-घर को जला दिया था। वहाँ आतंकवाद और हिंसा इतनी अधिक थी कि उनके परिवार को अपनी पैतृक-ज़मीन को छोड़ के बाहर निकलना पड़ा। एक छोटे बच्चे के लिए उसके चारों ओर इतनी हिंसा का वातावरण, दिल में अंधकारात्मक और कड़वाहट पैदा करने के लिए काफ़ी था - पर अंजुम ने ऐसा नहीं होने दिया।
     उन्होंने कभी आशा नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने लिए एक अलग रास्ता चुना - जनता की सेवा का रास्ता। वो विपरीत हालात से उबर कर बाहर आए और सफलता की अपनी कहानी ख़ुद लिखी। आज वो सिर्फ जम्मू और कश्मीर के ही नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। अंजुम ने साबित कर दिया है कि हालात कितने ही ख़राब क्यों न हों, सकारात्मक कार्यों के द्वारा निराशा के बादलों को भी ध्वस्त किया जा सकता है। 
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अभी पिछले हफ़्ते ही मुझे जम्मू-कश्मीर की कुछ बेटियों से मिलने का अवसर मिला। उनमें जो जज़्बा था, जो उत्साह था, जो सपने थे और जब मैं उनसे सुन रहा था, वो जीवन में कैसे-कैसे क्षेत्र में प्रगति करना चाहती हैं। और वो कितनी आशा-भरी ज़िन्दगी वाले लोग थे! उनसे मैंने बातें की, कहीं निराशा का नामोनिशान नहीं था - उत्साह था, उमंग था, ऊर्जा थी, सपने थे, संकल्प थे। उन बेटियों से, जितना समय मैंने बिताया, मुझे भी प्रेरणा मिली और ये ही तो देश की ताकत हैं, ये ही तो मेरे युवा हैं, ये ही तो मेरे देश का भविष्य हैं। 
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि प्यारे देशवासियो, हमारे देश के ही नहीं, जब भी कभी विश्व के प्रसिद्ध धार्मिक-स्थलों की चर्चा होती है तो केरल के सबरीमाला मंदिर की बात होनी बहुत स्वाभाविक है। विश्व-प्रसिद्ध इस मंदिर में, भगवान अय्यप्पा स्वामी का आशीर्वाद लेने के लिए हर वर्ष करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं। जहाँ इतनी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हों, जिस स्थान का इतना बड़ा माहात्म्य हो, वहाँ स्वच्छता बनाये रखना कितनी बड़ी चुनौती हो सकती है ? और विशेषकर उस जगह पर, जो पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित हो। लेकिन इस समस्या को भी संस्कार में कैसे बदला जा सकता है, समस्या में से उबरने का रास्ता कैसे खोजा जा सकता है और जन-भागीदारी में इतनी क्या ताक़त होती है- ये अपने आप में सबरीमाला मंदिर एक उदाहरण के तौर पर है।
      स्वच्छता के लिए जागरूकता का एक स्वैच्छिक-अभियान शुरू किया। और एक ऐसी परम्परा बना दी कि जो भी यात्री आते हैं, उनकी यात्रा तब तक पूरी नहीं होती जब तक कि वो स्वच्छता के कार्यक्रम में कोई-न-कोई शारीरिक श्रम न करते हों। इस अभियान में न कोई बड़ा होता है, न कोई छोटा होता है। हर यात्री, भगवान की पूजा का ही भाग समझ करके कुछ-न-कुछ समय स्वच्छता के लिए करता है, काम करता है, गन्दगी हटाने के लिए काम करता है। हर सुबह यहाँ सफाई का दृश्य बड़ा ही अद्भुत होता है और सारे तीर्थयात्री इसमें जुट जाते हैं। कितना ही धनी व्यक्ति क्यों न हो, कितना ही बड़ा अफ़सर क्यों न हो, हर कोई एक सामान्य-यात्री के तौर पर इस ‘पुण्यम पुन्कवाणम’ कार्यक्रम का हिस्सा बन जाते हैं, सफाई को करके ही आगे बढ़ते हैं। हम देशवासियों के लिए ऐसे कई उदाहरण हैं।
     सबरीमाला में इतना आगे बढ़ा हुआ ये स्वच्छता - अभियान और उसमें ‘पुण्यम पुन्कवाणम’ ये हर यात्री के यात्रा का हिस्सा बन जाता है। वहाँ कठोर-व्रत के साथ स्वच्छता का कठोर-संकल्प भी साथ-साथ चलता है।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, 2 अक्तूबर 2014 पूज्य बापू की जन्म जयन्ती पर हम सब ने संकल्प किया है कि पूज्य बापू का जो अधूरा काम है यानी कि ‘स्वच्छ-भारत’, ‘गन्दगी से मुक्त-भारत’। पूज्य बापू जीवन-भर इस काम के लिए जूझते रहे, कोशिश भी करते रहे। और हम सब ने तय किया कि जब पूज्य बापू की 150वीं जयंती हो तो उन्हें हम उनके सपनों का भारत, ‘स्वच्छ भारत’, देने की दिशा में कुछ-न-कुछ करें।
     स्वच्छता की दिशा में देशभर में व्यापक स्तर पर प्रयास हो रहा है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक जन-भागीदारी से भी परिवर्तन नज़र आने लगा है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता के स्तर की उपलब्धियों का आकलन करने के लिए आगामी 4 जनवरी से 10 मार्च 2018 के बीच दुनिया का सबसे बड़ा सर्वे ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2018’ किया जाएगा। ये सर्वे, चार हज़ार से भी अधिक शहरों में लगभग चालीस (40) करोड़ आबादी में किया जाएगा। इस सर्वे में जिन तथ्यों का आकलन किया जाएगा उनमें हैं – शहरों में खुले में शौच से मुक्ति, कूड़े का कलेक्शन, कूड़े को उठा कर ले जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था, वैज्ञानिक तरीक़े से कूड़े के लिए किए जा रहे प्रयास, और स्वच्छता के लिए किये गए प्रयास और इस काम के लिए जन-भागीदारी। 
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जन-जन का स्वभाव बने, शहर का स्वभाव बन जाए। स्वच्छता, सिर्फ़ सरकार करे ऐसा नहीं। हर नागरिक एवं नागरिक संगठनों की भी बहुत बड़ी ज़िम्मेवारी है। और मेरी हर नागरिक से अपील है कि वे, आने वाले दिनों में जो स्वच्छता-सर्वे होने वाला है उसमें बढ़-चढ़ करके भाग लें। और आपका शहर पीछे न रह जाए, आपका गली-मोहल्ला पीछे न रह जाए - इसका बीड़ा उठाएं। मुझे पूरा विश्वास है कि घर से सूखा-कूड़ा और गीला-कूड़ा, अलग-अलग करके नीले और हरे उपयोग, अब तो आपकी आदत बन ही गई होगी।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, कुछ बातें ऐसी होती हैं जो दिखने में बहुत छोटी लगती हैं लेकिन एक समाज के रूप में हमारी पहचान पर दूर-दूर तक प्रभाव डालती रहती हैं। आज ‘मन की बात’ के इस कार्यक्रम के माध्यम से मैं आपके साथ ऐसी एक बात करना चाहता हूँ। हमारी जानकारी में एक बात आयी कि यदि कोई मुस्लिम महिला, हज-यात्रा के लिए जाना चाहती है तो वह ‘महरम’ के बिना नहीं जा सकती है। जब मैंने इसके बारे में पहली बार सुना तो मैंने सोचा कि ऐसा कैसे हो सकता है? ऐसे नियम किसने बनाए होंगें? और मैं जब उसकी गहराई में गया तो मैं हैरान हो गया - आजादी के सत्तर (70) साल के बाद भी ये लगाने वाले हम ही लोग थे। 
    दशकों से मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा था लेकिन कोई चर्चा ही नहीं थी। यहाँ तक कि कई इस्लामिक देशों में भी यह नियम नहीं है। लेकिन भारत में मुस्लिम महिलाओं को यह अधिकार प्राप्त नहीं था। और मुझे खुशी है कि हमारी सरकार ने इस पर ध्यान दिया। आवश्यक कदम भी उठाए और ये सत्तर (70) साल से चली आ रही परंपरा को नष्ट कर के इसको हमने हटा दिया। आज मुस्लिम महिलाएँ, ‘महरम’ के बिना हज के लिए जा सकती हैं और मुझे खुशी है कि इस बार लगभग तेरह सौ (1300) मुस्लिम महिलाएँ ‘महरम’ के बिना हज जाने के लिए हैं और देश के अलग-अलग भागों से- केरल से ले करके उत्तर तक महिलाओं ने बढ़-चढ़ करके हज-यात्रा करने की इच्छा ज़ाहिर की है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को मैंने सुझाव दिया है कि वो यह सुनिश्चित करें कि ऐसी सभी महिलाओं को हज जाने की अनुमति हैं।
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मैं पूरे विश्वास से कहता हूँ और ये मेरी दृढ़ मान्यता है कि भारत की विकास यात्रा, हमारी नारी-शक्ति के बल पर, उनकी प्रतिभा के भरोसे आगे बढ़ी है और आगे बढ़ती रहेगी। हमारा निरंतर प्रयास होना चाहिए कि हमारी महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर समान अधिकार मिले, समान अवसर मिले ताकि वे भी प्रगति के मार्ग पर एक-साथ आगे बढ़ सकें।
       प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, 26 जनवरी हमारे लिए एक ऐतिहासिक-पर्व है। लेकिन इस वर्ष 26 जनवरी 2018 का दिन, विशेष रूप से याद रखा जाएगा। इस वर्ष गणतंत्र-दिवस समारोह के लिए सभी दस आसियान देशों के नेता मुख्य-अतिथि के रूप में भारत आएँगे। गणतंत्र-दिवस पर इस बार ‘एक’ (1) नहीं बल्कि ‘दस’ (10) मुख्य अतिथि होंगे। ऐसा भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है। 2017, आसियान के देश और भारत,दोनों के लिए ख़ास रहा है। आसियान ने 2017 में अपने 50 वर्ष पूरे किए और 2017 में ही आसियान के साथ भारत की साझेदारी के 25 वर्ष भी पूरे हुए हैं। 26 जनवरी को विश्व के 10 देशों के इन महान नेताओं का एक साथ शरीक़ होना हम सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है।

संसद का इस्तेमाल राजनीतिक मतभेदों से निपटने में नहीं किया जाना चाहिए

    कोलकाता। भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि संसद को राजनीतिक विवादों का निबटारा करने का अखाड़ा नहीं बनाना चाहिए। वे आज कोलकाता में कोलकाता चैम्‍बर ऑफ कॉमर्स के 187 वें वार्षिक समारोह के अवसर पर 'भारत में संसदीय लोकतंत्र का जीर्णोद्धार' विषय पर सेमिनार को संबोधित को संबोधित कर रहे थे। 

   उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि राजनीतिक दलों को इस बात पर गंभीर अंतर्मंथन करना चाहिए कि संसद राजनीतिक विवाद के बिन्‍दुओं का समाधान करने का मंच नहीं बनना चाहिए। 
   उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के अलावा कोई विकल्‍प नहीं है कि संसद देश में शांति, प्रगति और खुशहाली को बढ़ावा देने में कारग़र ढंग से काम करे। उन्‍होंने हाल के दिनों में देश में संसदीय कार्यप्रणाली की विभिन्‍न हलकों में हुई आलोचना पर चिंता प्रकट की। 
   उन्‍होंने कहा कि स्‍वयं सांसदों ने भी इस प्रणाली की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस आलोचना का कारण संसद और राज्‍य विधान मंडलों के कामकाज का तरीका है। इसकी वजह यह है कि हाल के वर्षों में संसदीय कार्य में मात्रात्‍मक और गुणात्‍मक दोनों ही दृष्टि से गिरावट आयी है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि संसदीय सत्र के दौरान व्‍यवधान गंभीर चिंता का विषय है।
     श्री नायडू ने कहा कि वर्तमान में 'स्‍वस्‍थ बहस और विचार-विमर्श तथा संसद की विश्‍ववसनीयता' जैसे मूल्‍यों पर व्‍यवधान, टकराव और सदन को जबरन स्‍थगित कराने जैसे कुप्रवृत्तियां हावी होती जा रही हैं। उन्‍होंने कहा कि महत्वपूर्ण विषयों पर राजनीतिक पार्टियों के बीच आम सहमति बनाने की आवश्‍यकता जिससे संसद का मूल्‍यवान समय बचाया जा सकता है।
    उन्‍होंने कहा कि कोलकाता चैम्‍बर ऑफ कॉमर्स के 187 वें वार्षिक समारोह में हिस्सा लेते हुए मुझे अत्‍यन्‍त हर्ष हो रहा है। इसकी स्थापना 5 जुलाई 1830 को हुई थी और उस समय इसका नाम कोलकाता ट्रेडर्स असोसिएशन था।
   उन्‍होंने कहा कि 1977 में कोलकाता ट्रेडर्स असोसिएशन को ''कोलकाता चैम्‍बर्स ऑफ कॉमर्स'' का नाम दिया गया। मुझे खुशी है कि यह संगठन पिछले 180 से अधिक वर्षों से कोलकाता और देश के विकास में योगदान कर रहा है। मुझे यह जानकार खुशी हुई कि कोलकाता चैम्‍बर ऑफ कॉमर्स जरूरतमंद और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप, वजीफे और पुरस्‍कार प्रदान करता है।
     उन्‍होंने कहा कि मैं इस फाउंडेशन की इस बात के लिए सराहना करता हूं कि वह प्रतिभाशाली पुरुष एवं महिला खिलाडि़यों को ''प्रभा खेतान पुरस्‍कार'' से सम्‍मानित करती है। मैं आपके संगठन से अपील करता हुं कि कॉर्पोरेट सामाजिक गतिविधियों के अंतर्गत अपनी गतिविधियों का विस्‍तार करें और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी सुविधाएं प्रदान किए जाने में सहायता करें।
    संसदीय लोकतंत्र का जीर्णोद्धार : संसद भारत के लोकतंत्र का केन्‍द्र बिन्‍दु है और वह लोगों के हितों तथा अधिकारों की संरक्षक है। यह लोकतंत्र का मंदिर है और एक पवित्र सार्वजनिक संस्‍थान है। पिछले वर्षों में भारत का लोकतंत्र परिपक्‍व हुआ है।
   उन्‍होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में संसद सर्वाधिक ध्रुवीय संस्थान है। हाल के दिनों में देश में संसदीय कार्यप्रणाली की विभिन्‍न हलकों में आलोचना हुई है। स्‍वयं सांसदों ने भी इस प्रणाली की आलोचना की है। इस आलोचना का कारण संसद और राज्‍य विधान मंडलों के कामकाज का तरीका है। इसकी वजह यह है कि हाल के वर्षों में संसदीय कार्य में मात्रात्‍मक और गुणात्‍मक दोनों ही दृष्टि से गिरावट आयी है।
    उन्‍होंने कहा कि मित्रों मेरा यह मानना है कि लोगों की सार्वभौम इच्‍छा का प्रतिनिधित्‍व करने वाली संसद की भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए तत्काल सुधारों की आवश्‍यकता है। लोकतंत्र का अस्तित्‍व बनाए रखने के लिए भी यह अत्‍यन्त आवश्‍यक है कि संसद का लोगों के दिलो दिमाग पर एक सम्‍मानित स्‍थान कायम रहे।''

Friday, 29 December 2017

माजुली द्वीप अब और नहीं सिकुड़ेगा

    असम। जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण, सड़क, परिवहन तथा राजमार्ग और शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने आशा व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि माजुली द्वीप की बाढ़ और क्षरण से बचाव के लिए प्रारंभ की गई विभिन्‍न योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के पश्‍चात माजुली द्वीप का सिकुड़ना रूक जाएगा। 

   संभव है कि जो जमीन पानी के अंदर जा चुकी है, वह भी प्राप्‍त हो जाए। इसे उचित भूमि प्रबंधन प्रणाली के तहत माजुली की मुख्‍य भू‍मि से जोड़ा जा सकता है। केन्‍द्रीय मंत्री ने आज असम के माजुली को बाढ़ और क्षरण से बचाने के लिए सुरक्षा कार्यों की आधारशिला रखी।
     इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि योजना के अनुरूप कार्य प्रारंभ हो जाएंगे और दो कार्य- मौसमों में खत्‍म हो जाएगा। जल संसाधन मंत्रालय ने विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर ब्रहमपुत्र बोर्ड ने बाढ़ और क्षरण से द्वीप को बचाने के लिए जनवरी, 2004 से विभिन्‍न चरणों में सुरक्षा कार्य प्रारंभ किया। इन कार्यों में नदी किनारों पर तटबंध का निर्माण और सुदृढ़ीकरण, आरसीसी स्‍क्रीन को बिछाना, अवरोधों का निर्माण शामिल हैं।
     उन्‍होंने कहा कि 2007 के मानसून में आई अप्रत्‍याशित बाढ़ की वजह से निचले माजुली में भूमि का अत्‍यधिक क्षरण हुआ है। ब्रह्मपुत्र बोर्ड द्वारा किये गये निर्माण कार्यों का परिणाम 2007 तक संतोषजनक था और प्रभावित क्षेत्रों में क्षरण को रोका जा सकाल था।
     मंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि 2014 के पश्‍चात ब्रह्मपुत्र बोर्ड ने विभिन्‍न कार्य किए। पत्‍थरों से बनने वाले चार अवरोधों का निर्माण पूरा किया। सलमारा में भी अवरोध निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। तटबंधों तथा आरसीसी अवरोधों का निर्माण कार्य भी पूरा हो गया है। पांच ऊंचे प्‍लेटफार्मों का निर्माण कार्य पूरा हो गया है और इसे जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है। इन परियोजनाओं पर नवम्‍बर, 2017 तक कुल 189.07 करोड़ रुपये की धनराशि व्‍यय हुई है।
    श्री गडकरी ने कहा कि ब्रह्मपुत्र बोर्ड के कार्यों से क्षरण प्रक्रिया रूक गई, लेकिन गाद जमा होने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई। सेटलाइट दृश्‍य के आधार पर माजुली द्वीप की भूमि का क्षेत्रफल 2004 में 502.21 वर्ग किलोमीटर था, जो नवम्‍बर, 2016 में 524.29 वर्ग किलोमीटर हो गया। ब्रह्मपुत्र बोर्ड, जल संसाधन मंत्रलाय द्वारा गठित त‍कनीकी सलाहकार समिति की अनुशंसाओं के आधार पर कार्य करता है। समि‍ति ने मार्च, 2017 में द्वीप का विस्‍तृत दौरा किया और एक डीपीआर रिपोर्ट (233.54 करोड़ रुपये) तैयार की। 
     श्री गडकरी ने कहा कि मंत्रालय ने परियोजना को स्‍वीकृति दी और पूर्वोत्‍तर विकास मंत्रालय ने 207 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित करने पर सहमति दी है। शेष राशि ब्रह्मपुत्र बोर्ड द्वारा उपलब्‍ध कराई जाएगी। मंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि इस परियोजना के चार घटक हैं। माजुली के 27 किलोमीटर लम्‍बे तट पर तटबंधों और अवरोधों का निर्माण, 41 स्‍थलों पर आरसीसी स्‍क्रीन बिछाना, एक पायलट चैनल का निर्माण और बिरिनाबारी में नहर का निर्माण। 
    नितिन गडकरी ने माजुली में ब्रह्मपुत्र बोर्ड कार्यालय के निर्माण की आधारशिला रखी। कार्यालय के निर्माण की अनुमानित लागत 40 करोड़ रुपये है। श्री गडकरी ने असम सरकार द्वारा दिए जाने वाले सहयोग और मदद के लिए मुख्‍यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल को बधाई दी।
      माजुली द्वीप दक्षिण में विशाल ब्रह्मपुत्र नदी से तथा उत्‍तर में खेरकाटिया सूटी, लुइत सूटी और सुबनश्री नदियों से घिरा हुआ है और प्रत्‍येक वर्ष द्वीप पर बाढ़ आने तथा क्षरण होने का खतरा बना रहता है। 1914 में माजुली द्वीप का क्षेत्रफल 733.79 वर्ग किलोमीटर था, जो 2004 में 502.21 वर्ग किलोमीटर रह गया। 60 के दशक में असम सरकार ने तटबंधों का निर्माण किया, परंतु ये तटबंध द्वीप को आंशिक रूप से ही सुरक्षा दे पाए।
      प्रति वर्ष होने वाले क्षरण के कारण द्वीप का क्षेत्रफल कम होता गया। असम सरकार के निवेदन पर जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्रालय ने माजुली द्वीप को बाढ़ तथा क्षरण से बचाव का कार्य 2003 में ब्रह्मपुत्र बोर्ड को सौंपा।

देश के 91 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर 2 प्रतिशत नीचे गया

    नई दिल्ली। देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 87.663 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 54 प्रतिशत है। 21 दिसंबर, 2017 को समाप्त सप्ताह के दौरान यह 56 प्रतिशत था। 28 दिसंबर, 2017 का संग्रहण स्‍तर पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 95 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 94 प्रतिशत रहा।

   इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधित लाभ देते हैं। 
   उत्तरी क्षेत्र : उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं।इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 10.01 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 56 प्रतिशत है। 
  पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 47 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 55 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण के बराबर है। 
    पूर्वी क्षेत्र : पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 13.83 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 73 प्रतिशत है।
    पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 79 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 69 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के संग्रहण से कम है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से बेहतर है।
     पश्चिमी क्षेत्र : पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में सीडब्ल्यूसी की निगरानी में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 17.27 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 55 प्रतिशत है।
    पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 60 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 56 प्रतिशत थी। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
    मध्य क्षेत्र : मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 21.78 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 51 प्रतिशत है।
   पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 75 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 57 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
   दक्षिणी क्षेत्र : दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 24.77 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 48 प्रतिशत है।
    पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 36 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 56 प्रतिशत थी। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से बेहतर है लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कम है।
     पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, एपी और टीजी (दोनों राज्‍यों में दो मिश्रित परियोजनाएं) आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। 
   पिछले वर्ष की इसी अवधि के लिए पिछले साल की तुलना में कम संग्रहण करने वाले राज्यों में पंजाब, राजस्‍थान, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और तेलंगाना शामिल हैं।

सांसदों को सामाजिक सद्भाव और शांति के लिए एकजुट होना चाहिए

   नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि संसद के सभी सदस्यों को भाव और उद्देश्य के साथ सामाजिक सौहार्द और शांति हासिल करने के लिए एकजुट होना चाहिए।

  उपराष्ट्रपति 2018 के लिए लोकसभा कैलेंडर जारी करने के बाद भारतीय संसदीय समूह (आईपीजी) की वार्षिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर लोकसभा की अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
  उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संसदीय समूह हमारी संसद और विश्व की अन्य संसदों के बीच सेतू का काम कर रहा है और संसदीय शिष्टमंडलों का आदान-प्रदान सद्भावना मिशन, पत्राचार तथा दस्तावेजों की देखरेख करता है। 
    उन्होंने कहा कि इस वार्षिक बैठक से विभिन्न उपलब्धियों की समीक्षा करने, नई योजनाएं बनाने तथा आने वाले वर्ष के लिए नए लक्ष्य तय करने का अवसर मिलेगा। ऐसी बैठकों का उद्देश्य सदस्यों में नई ऊर्जा और संकल्प शक्ति भरना भी है, ताकि आगे कार्यक्रम जारी रखा जा सके।
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष का थीम अनूठा और प्रेरक है तथा यह संसद के शानदार गुम्बदों, मेहराबों, कक्षों तथा अन्य स्थानों पर अंकित प्रेरक शब्दों और कथनों को दिखाता है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट संदेश, सार्वभौमिक और सार्वकालिक है। अंकित शब्द और कथन अपने आप में बौद्धिक रूप से मोती हैं और हमारे इतिहास और दार्शनिक परम्पराओं के प्रमाणिक स्रोत हैं।
    उन्होंने कहा कि संसद में राष्ट्रीय व्यापक गतिविधियों पर विचार किया जाता है और देश की नियती तय की जाती है। इसलिए इस महान संस्था के विचार-विमर्श का सत्य की उच्च परम्परा से प्रेरित होना स्वाभाविक है।

राष्‍ट्रीय अखण्‍डता यात्रा सेना की एक अच्‍छी पहल

    नई दिल्ली। राष्‍ट्रीय अखण्‍डता यात्रा पर आए अरूणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी के 24 छात्रों के एक समूह ने आज यहां गृह राज्‍य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की। 

    यह यात्रा भारतीय सेना के जम्‍मू-कश्‍मीर राइफल्‍स की 19वीं माउंटेन डिविजन द्वारा आयोजित की गई है। यह यात्रा 24 दिसंबर, 2017 से 06 जनवरी, 2018 तक राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र, आगरा और लखनऊ भ्रमण के लिए निर्धारित है।
   इस अवसर पर श्री रिजिजू ने जम्‍मू-कश्‍मीर राइफल्‍स को राष्‍ट्रीय एकता यात्रा आयोजित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसी यात्रा से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्‍चों को राष्‍ट्रीय राजधानी व अन्‍य ऐतिहासिक स्‍थलों को देखने का सुअवसर प्राप्‍त होता है। छात्रों से बातचीत करते हुए श्री रिजिजू ने कहा कि राष्‍ट्रीय अखण्‍डता यात्रा सेना की एक अच्‍छी पहल है, क्‍योंकि इनमें से अधिकांश छात्र पहली बार अपने राज्‍य से बाहर भ्रमण के लिए निकले हैं। 
     उन्‍होंने छात्रों से कहा कि उन्‍हें अपने अनुभव अपने परिवार के सदस्‍यों और मित्रों के साथ साझा करने चाहिए। उन्‍होंने छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि उन्‍हें अपनी पढ़ाई में कठिन मेहनत करनी चाहिए। राष्‍ट्रीय अखण्‍डता यात्रा का उद्देश्‍य सद्भाव और जागरूकता को प्रोत्‍साहित करना है। 
      यात्रा का लक्ष्‍य छात्रों को राष्‍ट्र के साथ जोड़ना तथा विभिन्‍नता में एकता के विचार को बढ़ावा देना है। छात्र ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, आगरा किला, राजघाट, इंडिया गेट, राष्‍ट्रीय संग्रहालय, दिल्‍ली मेट्रो तथा लखनऊ स्थित इमामबाड़ा की यात्रा पर हैं।

Thursday, 28 December 2017

भारत सहित अनेक देशों में पर्यटन आर्थिक विकास का मुख्‍य इंजन

    नई दिल्ली। पर्यटन के विकास व प्रोत्‍साहन से संबंधित राष्‍ट्रीय नीतियां व कार्यक्रमों के निर्माण के लिए पर्यटन मंत्रालय नोडल एजेंसी है।

  इसके लिए मंत्रालय केन्‍द्रीय मंत्रालयों-एजेंसियों, राज्‍य सरकारों-केन्‍द्रशासित प्रशासनों तथा निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों जैसे विभिन्‍न हितधारकों के साथ विचार विमर्श और सहयोग करता है। भारत सहित अनेक देशों में पर्यटन, आर्थिक विकास का मुख्‍य इंजन है तथा विदेशी मुद्रा कमाने का एक प्रमुख स्रोत है। 
   यह बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करने में सक्षम है। इनमें विशिष्ट रोजगार से लेकर अकुशल रोजगार तक शामिल हैं। रोजगार के अतिरिक्‍त अवसर सृजित करने में यह क्षेत्र महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। न्‍याय के साथ विकास प्राप्‍त करने में भी यह प्रमुख भूमिका निभा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्‍य भारत में पर्यटन के लिए सुविधाएं बढ़ाना तथा पर्यटन को बढ़ावा देना है। मंत्रालय की कुछ प्रमुख जिम्‍मेदारियां हैं।
    पर्यटन अवसंरचना का विकास, वीजा प्रक्रिया को सरल बनाना, पर्यटन सेवा प्रदाताओं द्वारा मानदंडों के अनुरूप सेवाएं प्रदान करना आदि। यात्रा व पर्यटन प्रतिस्‍पर्धा सूचकांक 2017(टीटीसीआई) में भारत 2013 की तुलना में 25 पायदान ऊपर पहुंचा (टीटीसीआई)। टीटीसीआई रिपोर्ट 2017 में भारत का स्‍थान 40वां था, जब‍कि 2015 में यह 52वें तथा 2013 में 65वें स्‍थान पर था। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में जनवरी-नवम्‍बर 2017 में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 90.01 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए। जनवरी-नवम्‍बर 2015 की तुलना में जनवरी-नवम्‍बर 2016 के दौरान 9.4 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी के साथ 77.83 लाख विदेशी पर्यटक भारत आए।
    पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में जनवरी-नवम्‍बर 2017 में 58.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9.17 लाख विदेशी पर्यटक ई-पर्यटन वीजा पर भारत आए। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में जनवरी-नवम्‍बर 2017 के दौरान 16.9 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी के साथ 1,60,865 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। 2016 के दौरान घरेलू पर्यटकों की संख्‍या 1613.6 मीलियन दर्ज की गई। इसमें 2015 की तुलना में 12.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 
     पर्यटन अवसंरचना का विकास : पर्यटकों को बेहतर पर्यटन अनुभव प्रदान के लिए पर्यटन अवसंरचना के विकास को प्राथमिकता दी गई है। स्‍वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत थीम आधारित पर्यटन यात्रा मार्गों को विकसित किया गया है। 2017-18 के दौरान 824.80 करोड़ रुपये की लागत से 11 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस योजना के अंतर्गत 5648.71 करोड़ रुपये की लागत से कुल 67 परियोजनाओं की स्‍वीकृति दी गई है। 
    राष्‍ट्रीय तीर्थस्‍थल पुन:स्‍थापना और आध्‍यात्मिक, विरासत विकास मिशन(पीआरएएसएचएडी) योजना के अंतर्गत तीर्थस्‍थलों की पहचान करके समग्र विकास करने के कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। 2017-18 के दौरान 98.84 करोड़ रुपये की लागत से कुल 3 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत अब तक 587.29 करोड़ रुपये की लागत से कुल 21 परियोजनाओं को मंजूर किया गया है।
     पर्यटन केन्‍द्रों का समग्र विकास : पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन केन्‍द्रों पर विश्‍वस्‍तरीय सुविधाएं प्रदान करने के कार्य को प्राथमिकता में रखा है। इसके अन्‍तर्गत अवसंरचना का विकास, जनसुविधाएं, बहुभाषा केन्‍द्र तथा कौशल विकास जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। पर्यटन मंत्रालय ने केन्‍द्र सरकार के अन्‍य मंत्रालयों, राज्‍य सरकारों और उद्योग जगत के हितधारकों के साथ मिलकर ‘विरासत गोद लें’ नाम से एक कार्यक्रम लॉंच किया है। सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और व्‍यक्तिगत स्‍तर पर भी इन स्‍थलों में सुविधाएं विकसित करने का कार्य किया जा सकता है। ऐसा करने वालों को ‘स्‍मारक मित्र’ के नाम से जाना जाएगा।
    2017-18 के बजट में यह घोषणा की गई थी कि राज्‍यों के साथ मिलकर विशेष पर्यटन क्षेत्र विकसित किए जायेंगे। राज्‍य सरकारों और निजी क्षेत्रों के साथ विचार-विमर्श करके पर्यटन मंत्रालय ने इस नई योजना के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। विशेष पर्यटन क्षेत्र के निर्माण से उस क्षेत्र का समग्र विकास होगा। जीविका के अवसरों का निर्माण होगा और स्‍थानीय लोगों के जीवन स्‍तर में वृद्धि होगी। अक्‍तूबर 2017 को 31 राज्‍यों व केन्‍द्रशासित प्रदेशों में पर्यटन पर्व का आयोजन किया गया। 
    इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य पर्यटन के लाभों को रेखांकित करना था। इसमें देश की सांस्‍कृतिक विभिन्‍नता को दर्शाया गया। ‘सभी के लिए पर्यटन’ इस कार्यक्रम की मुख्‍य अवधारणा थी। इस कार्यक्रम में सांस्‍कृतिक कार्यक्रम, फूड फेस्टिवल, पर्यटन प्रदर्शनी, हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प उत्‍पादों का प्रदर्शन, योग सत्र, पर्यटन व विरासत भ्रमण, छात्रों के लिए पर्यटन आधारित प्रतियोगिता, जागरूकता कार्यक्रम, सेमीनार और कार्यशालाएं शामिल थीं।
    केंद्र, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यटन, संस्कृति युवा मामले और खेल मंत्रियों तथा सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन : जनवरी, 2017 में संस्कृति और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के साथ पर्यटन मंत्रालय ने गुजरात सरकार के सहयोग से धोर्दो, कच्छ के रन में केंद्रीय और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के पर्यटन, संस्कृति युवा मामले और खेल मंत्रियों तथा सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया।
     सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने विडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से किया। सम्मेलन की थीम पर्यटन, संस्कृति युवा मामले और खेलों को युवा भारत और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ बनाने की दिशा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विषयों के साथ समन्वय स्थापित करना है।
    भारत पर्व : पर्यटन मंत्रालय को भारत सरकार द्वारा लाल किले पर गणतंत्र दिवस आयोजन एक भाग के रूप में 26 से 31 जनवरी, 2017 तक आयोजित भारत पर्व कार्यक्रम के लिए नोडल मंत्रालय बनाया गया है। इस कार्यक्रम के तहत देश के विभिन्न भागों से गणतंत्र दिवस परेड, झाकियां, सशस्त्र बल बेंडों द्वारा प्रस्तुति, फुड फेस्टिवल, शिल्प मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाऐंगे।
    पर्यटन मंत्रालय द्वारा 5-7 दिसम्बर, 2017 तक गोवाहटी, असम में छठा अंतर्राष्ट्रीय हाट (आईटीएम) आयोजित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट एक वार्षिक कार्यक्रम है जिसे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पर्यटन संभवनाओं को दर्शाने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र में आयोजित किया जाता है। इस हाट में 29 देशों के 76 विदेशी क्रेता प्रतिनिधिमंडल, देश के विभिन्न भागों से पर्यटन क्षेत्र के 50 घरेलू भागीदार और पूर्वोत्तर राज्यों के 86 क्रेताओं ने भाग लिया।
     पूर्वोत्तर राज्यों के राज्य पर्यटन विभागों द्वारा एक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें संबंधित भागीदार राज्यों के पर्यटन संबंधी उत्पादों को दर्शाने के लिए सुंदर हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। तीन रेलवे स्टेशनों पर पर्यटन संबंधी सुविधाओँ का विकास : गोवा में कोंकण रेलवे की यात्रा सुंदर परिदृश्यों के कारण देश में सबसे यादगार ट्रेन यात्राओं में से एक है। पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटन दृष्टिकोण से कोंकण रेलवे के महत्व पर विचार करते हुए गोवा में मडगांव, कारमली और थिविम रेलवे स्टेशनों पर पर्यटन सुविधाओं का विकास करने के लिए 2499.98 लाख रुपये स्वीकृत किए है।
      कांच की छत वाले डिब्बे : पर्यटन मंत्रालय अपनी रेल पर्यटन नीति के तहत तीन कांच वाले डब्बे बनाने के लिए रेल मंत्रालय के साथ सहयोग कर रहा है जिन्हें देश के प्राकृतिक दृश्यों वाले मार्गों पर संचालित किया जाएगा। कांच की छत वाले इन डब्बों में अधिक चौड़े आरामदायक बैठने के स्थान, बड़ी खिड़कियां और एक किनारे पर एक तरफ से दिखाई देने वाली खिड़कियां, कांच की छत, घूमने वाले सीट, स्वचालित सरकने वाले दरवाजे, छोटी पेंट्री और चौड़े दरवाजे लगाए गए हैं।
   कांच की छत वाले दो डब्बे 2017 में विशाखापत्तनम-अरकू घाटी और दादर से मडगांव मार्ग पर चलाए गए है। तीसरा कांच की छत वाला डब्बा जम्मू और कश्मीर राज्य में काजीगंड-बारामूला मार्ग पर चलने के लिए पुनः ठीक किया जा रहा है। अप्रैल, 2017 में आईडब्लूएआई ने सेना के 8 ट्रकों को रो-रो जहाज के माध्यम से पांडु से डिब्रूगढ पहुँचाया। मई, 2017 में आईडब्लूएआई ने पूर्वोत्तर विभाग की सहायता से एक रोड शो का आयोजन किया। 
    इसमें मुख्य रूप से ब्रह्मपुत्र नदी में कार्गो द्वारा यात्रियों के परिवहन की क्षमता को दिखाया गया था। जुलाई, 2017 में आईडब्लूएआई ने धुबरी और हत्सिंगीमरी के बीच रो-रो सेवा प्रारम्भ की। इसके लिए रो-रो जहाज एम.वी.गोपीनाथ बोरदोलोई का उपयोग किया गया, जो एक साथ 8 ट्रकों और 100 यात्रियों को ढो सकता है। सितम्बर, 2017 में बंग्लादेश में चूना पत्थर लदे कार्गो को करीम गंज से आसूगंज ले जाया गया। 
   पावर ग्रीड के विशाल ट्रांसफॉर्मर को ब्रह्मपुत्र (एनडब्ल्यू-2) के मार्ग से ले जाया गया। इसे रेल या सड़क के मार्ग से ले जाना संभव नहीं था।
    ब्रह्मपुत्र में नदी पर्यटन काफी लोकप्रिय है। दो जहाजों-एमवी महाबहु और एमवी चाराईडिऊ- का सोऊलकूची और मजौली के मध्य संचालन किया जा रहा है। विदेशी और घरेलू पर्यटक इसका आनंद ले रहे है। आईडब्लूएआई दो रो-रो जहाज प्राप्त करने की प्रक्रिया में है।
    पहले जहाज की क्षमता 8 ट्रकों सहित 100 यात्रियों को ढोने की होगी जबकि दूसरे जहाज में 12 ट्रक और 100 यात्री ढोए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त आईडब्लूएआई चार अन्य रो-रो जहाज प्राप्त करने की प्रक्रिया में है, जिन्हें ब्रह्मपुत्र में संचालित किया जाएगा।

दूध का उत्पादन 163.7 मिलियन टन

     नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि आज भारत विश्व में उस पटल पर पहुँच गया है जहाँ दुग्ध व्यवसाय में वैश्विक स्तर पर उदयमियों के लिए अनेक संभावनाएँ उभर कर सामने आ रही है। 

   केन्द्रीय कृषि मंत्री ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित डेयरी विकास पर परामर्श हेतु गठित समिति की बैठक में कही।
  श्री सिंह ने कहा कि डेयरी विकास हेतु 3 महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं- राष्ट्रीय डेयरी परियोजना-1 (एनडीपी 1), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) तथा डेयरी उदयमिता विकास योजना। 
    राष्ट्रीय डेयरी योजना : इस योजना का कार्यान्वयन एऩडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) द्वारा राज्य सरकार के माध्यम से संबंधित राज्य की सहकारी दुग्ध संगठनों/ दुग्ध फेडरेशन के द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम : इस योजना का कार्यान्वयन राज्य सरकार के माध्यम से संबंधित राज्य की सहकारी दुग्ध संगठनों/दुग्ध फेडरेशन के द्वारा किया जा रहा है। 
     डेयरी उद्यमिता विकास योजना : इस योजना का कार्यान्वयन नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्राम विकास बैंक) द्वारा राज्य सरकार के माध्यम से जिले में स्थित राष्ट्रीयकृत बैंकों के द्वारा किया जा रहा है। डेयरी प्रसंस्करण और अवसंरचना विकास निधि : दुग्ध किसान की आय को दुगुना करने के उद्देश्य से तथा श्वेत क्रांति के पूर्व प्रयासों को तीव्र गति से आगे बढ़ाने हेतु एक महत्वकांक्षी योजना वर्ष 2017-18 से प्रारंभ की गयी है।
     इस योजना का कार्यान्वयन एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) द्वारा राज्य सरकार के माध्यम से संबंधित राज्य की सहकारी दुग्ध संगठनों/दुग्ध फेडरेशन के द्वारा किया जा रहा है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से भारत विश्व में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला देश बना हुआ है। इस उपलब्धि का श्रेय दुधारू पशुओं की उत्पादकता बढाने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई अनेक योजनाओं को जाता है। जहाँ 1960 के दशक में करीब 17-22 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता था, वह बढकर वर्ष 2016-17 में 163.7 मिलियन टन हो गया है।
     विशेषकर 2013-14 की तुलना में 2016-17 की अवधि में 19ऽ की वृद्धि हुई है। इसी तरह प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 2013-14 में 307 ग्राम से बढ कर वर्ष 2016-17 में 351 ग्राम हो गई है जोकि 14.3ऽ की वृद्धि है। इसी प्रकार 2011-14 की तुलना में 2014-17 में डेयरी किसानों की आय में 23.77 ऽ प्रतिशत की वृद्धि हुई। गत 3 वर्षों में प्रति वर्ष 5.53ऽ की दर से दूध उत्पादन बढकर विश्व में दुग्ध उत्पादन की वार्षिक दर से आगे निकल गया है जहाँ दुग्धविकास की दर 2.09ऽ रही है। श्री सिंह ने कहा कि ग्रामीण स्तर पर विशेषकर भूमिहीन एवं सीमांत किसानों के लिए डेयरी व्यवसाय उनके जीवनयापन एवं खाद्य सुरक्षा प्रदान करने का जरिया बन गया है। 
    करीब 7 करोड ऐसे ग्रामीण किसान परिवार डेयरी व्यवसाय से जुडे हुए है जिनके पास कुल गायों की 80ऽ आबादी है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं की रुचि धीरे धीरे अधिक प्रोटीन वाले उत्पादों की ओर बढ रही है एवं वेल्यु एडेड (मूल्य वर्द्धि) उत्पादों का चलन भी बढने के कारण दूध की मांग तेजी से बढ रही है। गत 15 वर्षों में दुग्ध सहकारी संस्थाओं ने अपने कुल उपार्जित दूध के 20ऽ हिस्से को वेल्यु एडेड (मूल्य वर्द्धि) दुग्ध पदार्थों मे परिवर्तित किया है जिससे तरल दूध की अपेक्षा 20ऽ अधिक आय प्राप्त होती है।
     श्री सिंह ने बताया कि ऐसी अपेक्षा है कि वर्ष 2021-22 तक 30ऽ दूध को मूल्य वर्द्धि पदार्थों मे परिवर्तित किया जाएगा। राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ (वर्ष 2022) तक किसानों की आय को दोगुना करने हेतु किए गए संकल्प के आधार पर डेयरी किसानों की आय को भी दोगुना करने हेतु विभाग द्वारा अनेक योजनाएँ चलाई जा रही है।
     इस दिशा में डेयरी किसानों की आय बढाने के दो आधार रखे गए है: एक – हमारे दुधारु पशुओं की उत्पादकता बढाकर दुग्ध उत्पादन में बढोतरी कर आय में वृद्धि कराना एवं दूसरा डेयरी किसानों को दी जाने वाली प्रति किलो दूध की मूल कीमत में वृद्धि करवाना।
      केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए इस समय आवश्यकता इस बात की है कि हमारी कार्यप्रणाली को धीरे धीरे आधुनिक तकनीक वाले वातावरण में बदला जाए। इसी संबंध में विभाग द्वारा एक राष्ट्रीय कार्य योजना विजन 2022 की रचना की जा रही है जिसमे संगठित क्षेत्र द्वारा गाँवो एवं दुग्ध उत्पादकों की संख्या के साथ साथ दुग्ध उत्पादन में लगातार बढोतरी को मद्देनजर रखते हुए दुग्ध प्रसंस्करण एवं वेल्यु एडेड दुग्ध पदार्थों की मांग को पूर्ण करने हेतु अतिरिक्त अवसंरचना की आवश्यकताओं के लिए समुचित वित्तीय प्रावधान रखे गए है।
    इस योजना का मुख्य लक्ष्य दुग्ध उत्पादकों की आय को दोगुना करना है जो अतिरिक्त अवसंवरचना के निर्माण के बगैर संभव नही है। इस योजना में यह भी ध्यान रखा गया है कि मौजूद संसाधनों का समुचित विकास एवं उपयोग किया जा सके ताकि इसमें शामिल दुग्ध उत्पादकों सहित सभी हितधारकों को पूर्ण लाभ मिल सकें।
    कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री, श्रीमती कृष्णा राज, संसद के सदस्य, डॉ. तापस मंडल (लोक सभा), सुश्री शोभा करंदलाजे (लोकसभा), संजय शामराव धोत्रे (लोकसभा), रोडमल नागर (लोकसभा) और श्रीमती कमला देवी पाटले (लोकसभा) भी बैठक में मौजूद थे।

Wednesday, 27 December 2017

अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं का कौशल विकास

      नई दिल्‍ली। अल्पसंख्यक मंत्रालय ने अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित युवाओं के कौशल विकास हेतु विशेष योजनाएं प्रारंभ की हैं।

    सीखो और कमाओ : यह नियोजन से जुड़ी अल्पसंख्यकों हेतु कौशल विकास योजना है जिसका उद्देश्य विभिन्न आधुनिक/परंपरागत कौशलों में अल्पसंख्यक युवाओं के कौशल को उन्नयित करना है जो उनकी अर्हता, मौजुदा आर्थिक प्रवाह तथा बाजार संभावना पर निर्भर है जिससे वे उपयुक्त रोजगार प्राप्त कर सकते हैं या वे स्वरोजगार के लिए अच्छी तरह कुशल बन सकते हैं।  
    इस योजना के तहत कम से कम 75 प्रतिशत प्रशिक्षुओं का नियोजन सुनिश्चित किया गया है जिसमें से कम से कम 50 प्रतिशत नियोजन संगठित क्षेत्र में होगा। योजना का कार्यान्वयन केरल सहित पूरे देश में चुनिंदा परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों (पीआईएज) के माध्यम से किया जाता है। पिछले तीन वर्षों के दौरान केरल राज्य से 1700 अल्पसंख्यक युवाओं को पीआईएज ने प्रशिक्षित किया है।
    परंपरागत कलाओं-शिल्प में विकास के लिए कौशल और प्रशिक्षण का उन्नयन (यूएसटीटीएडी): अल्पसंख्यकों की परंपरागत कलाओं को शिल्पों की समृद्ध धरोहर के संरक्षण के लिए 14 मई 2015 को यह योजना शुरू की गयी।
     इस योजना का उद्देश्य मास्टर शिल्पियोंञ्कर्मकारों के परंपरागत कौशलों को अद्यतन बनाना तथा क्षमता निर्माण करना, अल्पसंख्यकों की चिन्हित परंपरागत कलाओंञ्शिल्पों का प्रलेखन, परंपरागत कौशलों के मानक निर्धारित करना, मास्टर शिल्पियों के माध्यम से पहचान की गयी विभिन्न परंपरागत कलाओं-शिल्पों में अल्पसंख्यक युवाओं को प्रशिक्षण देना तथा राष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय बाजार संपर्क बढ़ाना है।
   पीआईए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी जिनके साथ-साथ कार्यकलाप भी चलाये जाएंगे ताकि ये सुनिश्चित हो कि परंपरागत कला-शिल्प के संरक्षण के लिए वांछित उपलब्धि मिले, बाजार संपर्क स्थापित हों तथा नई पीढ़ी में परंपरागत कलाओं और शिल्पों को एक पेशे के रूप में अपनाने की रूचि जागृत हो। आज तक इस योजना के अंतर्गत केरल राज्य से किसी भी अल्पसंख्यक युवा को प्रशिक्षित नहीं किया गया है।
     नई मंजिल : यह योजना 8 अगस्त 2015 से शुरू की गयी है जिसका उद्देश्य उन अल्पसंख्यक युवाओं को लाभ पहुंचाना है जिनके पास औपचारिक स्कूल प्रमाण पत्र नहीं है अर्थात जो स्कूल बीच में छोड़ने वालों की कोटि में हैं या मदरसों जैसे सामुदायिक शिक्षा संस्थानों में पढ़े हैं उनको औपचारिक शिक्षा तथा कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से तथा उनको संगठित क्षेत्र में बेहतर रोजगार प्राप्त करने के योग्य बनाने और इस प्रकार उन्हें बेहतर जीवन जीने के लिए प्रवृत करना है।
   अब तक केरल राज्य से इस योजना के तहत किसी भी अल्पसंख्यक युवा को प्रशिक्षित नहीं किया गया है। यह सूचना अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

भारत विश्‍व की तेजी से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍थाओं में एक

     आंध्र प्रदेश। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज आंध्र प्रदेश के गुंटूर में इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के शताब्‍दी सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। 

   इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत विश्‍व की तेजी से बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍थाओं में एक है। उन्‍होंने कहा कि वृद्धि के बिना कोई विकास नहीं हो सकता और फिर से बांटने का दायरा कम रह जाता है। वृद्धि आवश्‍यक है लेकिन यह पर्याप्‍त नहीं। 
   समाज में असमानताओं से निपटने के लिए विभिन्‍न वर्गों के बीच सामाजिक और आर्थिक असमानता पर विजय पाना होगा। यह असमानता विभिन्‍न क्षेत्रों में भी है और इसके लिए दूरदर्शी नीति की आवश्‍यकता है। 
    राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारे नागरिक आज भी गरीबी में और गरीबी के बहुत निकट रह रहे है। उन्‍हें पर्याप्‍त चिकित्‍सा सेवा, शिक्षा, आवास तथा नागरिक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। यह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्‍य पिछड़े वर्गों और महिलाओं जैसे समाज के परंपरागत रूप से कमजोर वर्गों के मामले में विशेष रूप से सत्‍य है।
     राष्‍ट्रपति ने कहा कि 2022 तक, जब भारत अपनी स्‍वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनायेगा, नए भारत के सपनों को हासिल करने के लिए इन समस्‍याओं का समाधान आवश्‍यक है। हमें स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा में निवेश को मानव पूंजी में निवेश मानना होगा।
     राष्‍ट्रपति ने कहा कि सहकारी संघवाद के युग में और विशेषकर 14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद से राज्‍यों पर अधिक जिम्‍मेदारी आई है और राज्‍यों से आशा भी बढ़ी है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि विचारों के विकास को धन के विकेन्‍द्रीकरण का पूरक होना चाहिए इससे राज्‍यों को लाभ मिलेगा और अंतत: भारत के सामाजिक, विकास तथा सूक्ष्‍म अर्थव्‍यवस्‍था की जरूरतें पूरी होंगी। 
   राष्‍ट्रपति ने कहा कि औपचारिक रोजगार का जमाना रोजगार के अवसर प्रदान कर रहा है और मैन्‍यूफैक्‍चरिंग, सेवा क्षेत्र और डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था में स्‍वरोजगार का अवसर प्रदान कर रहा है। हम इसे अनऔपचारिक अर्थव्‍यवस्‍था कहें या सूक्ष्‍म ऋण और चाहे सामाजिक उद्यमिता के नियम अपनाए यह क्षेत्र केवल बढ़ेगा। हमें यह समझकर इसके अनुरूप नीतियां बनानी होंगी। 
    राष्‍ट्रपति ने कहा कि कामगारों की सुरक्षा के लिए हमें सामाजिक सुरक्षा उपाए और सुरक्षा नेट तैयार करने होंगे।
    इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्‍यपाल ईएसएल नरसिम्‍हन, आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एन. चन्‍द्रबाबू नायडू, नोबल पुरस्‍कार विजेता और बांग्‍लादेश में ग्रामीण बैंक के संस्‍थापक प्रोफेसर मोहम्‍मद यूनुस, रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. सी रंगराजन, इंडिया इकोनॉमिक एसोसिएशन के अध्‍यक्ष प्रोफेसर सुखदेव थोरट तथा आचार्य नागार्जुन विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ए. राजेन्‍द्र प्रसाद उपस्थित थे।

175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्‍य

     नई दिल्‍ली। नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने ‘नये भारत’ के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के एक स्‍वच्‍छ ऊर्जा भविष्‍य के स्‍वप्‍न को साकार करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत ने विश्‍व में सबसे बड़ा नवीकरणीय क्षमता विस्‍तार कार्यक्रम आरंभ किया है।

    सरकार का लक्ष्‍य नवीकरणीय ऊर्जा पर भरपूर जोर देने के जरिए स्‍वच्‍छ ऊर्जा के हिस्‍से में बढ़ोतरी करना है। भारत में नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा के विकास तथा उपयोग के मुख्‍य वाहक ऊर्जा सुरक्षा, बिजली की कमी, ऊर्जा पहुंच, जलवायु परिवर्तन आदि रहे हैं। 
     ग्रिड कनेक्‍टेड नवीकरणीय ऊर्जा के तहत पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान 27.07 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का क्षमता संवर्धन किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा से 12.87 गीगावाट, पवन ऊर्जा से 11.70 गीगावाट, लघु पनबिजली से 0.59 गीगावाट तथा जैव ऊर्जा से 0.79 गीगावाट शामिल है।
   स्‍वच्‍छ ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि दर से उत्‍साहित होकर भारत सरकार ने लक्षित राष्‍ट्रीय निर्धारित योगदान (आईएनडीसी) पर संयुक्‍त राष्‍ट्र जलवायु परिवर्तन संरचना सम्‍मेलन को प्रस्‍तुत अपने प्रतिवेदन में कहा है कि भारत प्रौद्योगिकी के अंतरण एवं हरित जलवायु निधि समेत निम्‍न लागत अंतराष्‍ट्रीय वित्‍त की सहायता से 2030 तक गैर-फॉसिल ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से 40 प्रतिशत संचयी बिजली ऊर्जा क्षमता अर्जित करेगा।
     30.11.2017 तक देश में सोलर रूफ टॉप परियोजनाओं से 863.92 मेगावाट समेत 16611.73 मेगावाट की सकल क्षमता के साथ सौर ऊर्जा परियोजनाएं संस्‍थापित की गई हैं। सरकार सृजन आधारित प्रोत्‍साहनों (जीबीआई), पूंजी एवं ब्‍याज सब्सिडियों, व्‍यावहार्य अंतराल निधियन, रियायतपूर्ण वित्‍त, वित्‍तीय प्रोत्‍साहनों जैसे विभिन्‍न प्रोत्‍साहनों के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
        राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का उद्देश्‍य फॉसिल आधारित ऊर्जा विकल्‍पों के साथ सौर ऊर्जा को प्रतिस्‍पर्धी बनाने के अंतिम उद्देश्‍य के साथ बिजली सृजन एवं अन्‍य उपयोगों के लिए सौर ऊर्जा के विकास एवं उपयोग को बढ़ावा देना है। 
    राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का लक्ष्‍य दीर्घकालिक नीति, बड़े स्‍तर पर परिनियोजन लक्ष्‍यों, महत्‍वाकांक्षी अनुसंधान एवं विकास तथा महत्‍वपूर्ण कच्‍चे माल, अवयवों तथा उत्‍पादों के घरेलू उत्‍पादन के माध्‍यम से देश में सौर ऊर्जा सृजन की लागत को कम करना है। 
     नवीकरणीय ऊर्जा, फॉसिल ईंधन आधारित सृजन की तुलना में लगातार लागत प्रतिस्‍पर्धी बनती जा रही है। वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए पिछले दो वर्षों के दौरान सोलर पार्क, सोलर रूफटॉप योजना, सौर रक्षा योजना, नहर के बांधों तथा नहरों के ऊपर सीपीयू सोलर पीवी पॉवर प्‍लांट के लिए सौर योजना, सोलर पंप, सोलर रूफटॉप आदि के क्रियान्‍वयन के लिए बड़े कार्यक्रम/योजनाएं आरंभ की गई हैं।
    वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्‍न योजनाओं को वित्‍तीय समर्थन उपलब्‍ध कराने के अतिरिक्‍त विभिन्‍न नीतिगत उपाय आरंभ किये जा रहे हैं तथा विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
    इनमें नवीकरणीय खरीद बाध्‍यता (आरपीओ) के मजबूत क्रियान्‍वयन और नवीकरणीय सृजन बाध्‍यता (आरजीओ) के लिए बिजली अधिनियम एवं टैरिफ नीति में अनुकूल संशोधन करना; हरित ऊर्जा गलियार परियोजना के माध्‍यम से बिजली पारेषण नेटवर्क का विकास; टैरिफ आधारित प्रतिस्‍पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्‍यम से सौर एवं पवन ऊर्जा की खरीद के लिए दिशा-निर्देश, राष्‍ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति को अधिसूचित किया जाना, पवन ऊर्जा परियोजनाओं को फिर से मजबूत बनाने, सोलर फोटोवोल्‍टेक सिस्‍टम्‍स/डिवाइसिस की तैनाती के लिए मानक निर्धारित करना, अंतरराज्‍यीय पारेषण प्रणाली प्रभारों तथा मार्च, 2019 तक कमीशन की जाने वाली परियोजनाओं के लिए सौर तथा पवन बिजली के अंत:राज्‍यीय बिक्री से होने वाले नुकसान की माफी के लिए आदेश; रूफटॉप परियोजनाओं के लिए बड़े सरकारी परिसरों/भवनों की पहचान करने; मिशन वक्‍तव्‍य एवं स्‍मार्ट सिटी के विकास के लिए दिशा-निर्देशों के तहत रूफटॉप सोलर एवं 10 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के प्रावधान को अनिवार्य बनाना, नये निर्माण या उच्‍चतर फर्श क्षेत्र अनुपात के लिए रूफटॉप सोलर के अनिवार्य प्रावधान के लिए भवन उपनियमों में संशोधन; सौर परियोजनाओं के लिए अवसंरचना दर्जा; कर मुक्‍त सोलर बांड जारी करने; दीर्घकालिक ऋण उपलब्‍ध कराने; बैंकों/एनएचबी द्वारा गृह ऋण के हिस्‍से के रूप में रूफटॉप सोलर का निर्माण; वितरण कंपनियों को प्रोत्‍साहित करने तथा नेट-मीटरिंग को अनिवार्य बनाने के लिए समेकित बिजली विकास योजना (आईपीडीएस) में उपयों को शामिल करना तथा इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए हरित जलवायु निधि के रूप में भी द्वीपक्षीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय दानकर्ताओं से फंड जुटाना आदि शामिल हैं। 
    नवीकरणीय ऊर्जा की अनुमानित क्षमता : स्‍वदेशी नवीकरणीय संसाधनों के बढ़ते उपयोग से महंगे आयातित फॉसिल ईंधनों पर भारत की निर्भरता में कमी आने की उम्‍मीद है। लगभग 3 प्रतिशत बंजर भूमि के अनुमान के साथ भारत के पास 1096 गीगावाट की वाणिज्यिक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से अनुमानित अक्षय ऊर्जा क्षमता है, जिसमें पवन - 302 गीगावॉट; लघु हाइड्रो - 21 गीगावाट; जैव ऊर्जा 25 गीगावाट; और 750 गीगावाट सौर ऊर्जा शामिल है। 
    लक्ष्‍य : भारत सरकार ने 2022 के आखिर तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा संस्‍थापित क्षमता का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। इसमें से 60 गीगावाट पवन ऊर्जा से, 100 गीगावाट सौर ऊर्जा से, 10 गीगावाट बायोमास ऊर्जा से तथा पांच गीगावाट लघु पनबिजली से शामिल है। 2017-18 के लिए 14550 मेगावाट ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा (पवन 4000 मेगावाट, सौर 10000 मेगावाट, लघु पनबिजली ऊर्जा 200 मेगावाट, जैव ऊर्जा 340 मेगावाट एवं अवशिष्‍ट से ऊर्जा 10 मेगावाट) निर्धारित किया गया है।

देश में अटल टिंकरिंग लैब की स्‍थापना के लिए 1500 और स्‍कूलों का चयन

    नई दिल्‍ली। नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) के तहत अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) की स्‍थापना के लिए 1500 और स्‍कूलों का चयन किया गया है। इतने सारे और स्‍कूलों का चयन करने से ‘भावी अन्‍वेषकों के रूप में भारत में एक मिलियन बच्‍चों की प्रतिभा संवारने’ से जुड़े मिशन के सपने को साकार करने में काफी मदद‍ मिलेगी। 

   नई अटल टिंकरिंग लैब से जुड़ी इस घोषणा के साथ ही एआईएम के तहत एटीएल की स्‍थापना के लिए देश भर में अब तक 2441 स्‍कूलों का चयन किया गया है। इस दिशा में औपचारिक प्रयास एक साल से भी अधिक समय पहले शुरू किए गए थे।
    भारत सरकार के एक प्रमुख कार्यक्रम अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) का उद्देश्‍य देश भर में फैले स्‍कूलों, विश्‍वविद्यालयों और उद्योगों में नवाचार (इनोवेशन) एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना है। एटीएल छठी कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए अपने अभिनव विचारों को साकार रूप देने का कार्य स्‍थल है। 
    इन कार्य स्‍थलों पर कुछ ऐसा नया करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ा होता है। अत्‍याधुनिक प्रौद्योगिकियों जैसे 3डी प्रिंटर, रोबोटिक्‍स, संवेदी प्रौद्योगिकी किट, इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स (आईओटी), सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक्स से युक्‍त ये कार्य स्‍थल विद्यार्थियों को उभरती प्रौद्योगिकियों का इस्‍तेमाल कर स्‍थानीय सामुदायिक समस्‍याओं को गहराई से समझने एवं सुलझाने में समर्थ करते हैं।
      विद्यार्थियों को ‘खुद से करो’ की अवधारणा का उपयोग कर अपने अभिनव विचारों को मूर्त रूप देने और भारत की सामाजिक, सामुदायिक अथवा आर्थिक समस्‍याओं का अभिनव समाधान वि‍कसित करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है। अपने स्कूलों में एटीएल में कार्य करते हुए रचनात्‍मक प्रौद्योगिकी प्‍लेटफॉर्मों के जरिए अपनी जिज्ञासा, रचनात्मकता और कल्पनाशीलता काफी हद तक बढ़ा चुके युवा विद्यार्थियों ने अपने अभिनव समाधानों का प्रारूप तैयार करना शुरू भी कर दिया है और इसके साथ ही उन्‍होंने कई रचनात्‍मक परियोजनाओं पर काम भी शुरू कर दिया है, जिनमें बेहतर सिंचाई प्रबंधन एवं कचरा प्रबंधन भी शामिल हैं।
    इसी तरह अपनी लैब में आईओटी उपकरणों तथा रोबोटिक्‍स का उपयोग कर सेंसर आधारित समाधान विकसित करना भी इन परियोजनाओं में शामिल है। यह वर्ष 2022 तक अपने सपनों का ‘नया भारत’ बनाने की दृष्टि से विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा अवसर साबित होगा। इन प्रयोगशालाओं (लैब) को कुछ इस तरह से तैयार किया गया है जिससे कि रचनात्‍मकता को बढ़ावा मिले और विद्यार्थी नियमित पाठ्यक्रम एवं अपनी पाठ्य पुस्‍तकों से इतर कुछ अभिनव जानकारियां हासिल करें। इस तरह की लैब से विद्यार्थियों को भावी कौशल जैसे कि रचनात्‍मक एवं अभिकलनात्मक सोच, अनुकूल शिक्षण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) से युक्‍त करने में भी मदद मिलेगी। 
    इस दिशा में आवेदनों के दो दौर पूरे हो चुके हैं। इस दौरान 25000 से भी अधिक आवेदन प्राप्‍त हुए हैं जिनमें से 2441 स्‍कूलों का चयन कि‍या गया है। इससे एटीएल की कवरेज बढ़कर 98 प्रतिशत से भी अधिक स्‍मार्ट सिटी और 93 प्रतिशत से भी अधिक जिलों (655 से भी ज्‍यादा जिले) तक हो जाएगी।
   इसकी कवरेज में व्‍यापक वृद्धि की पुष्टि इस सत्‍य से होती है कि अब देश भर में 34 राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों में कम-से-कम एक या उससे भी अधिक एटीएल होगी। नव चयनित 1500 स्‍कूलों की सराहना करते हुए मिशन के निदेशक (एटीएल) आर. रामानन ने कहा कि ‘भारत को एक अभिनव देश में बदलने’ से जुड़े हमारे मिशन के तहत एटीएल निश्चित तौर पर अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं और इसके साथ ही अपने निहितार्थों की दृष्टि से दूरगामी हैं।
       उन्‍होंने नए स्‍कूलों से यह भी अपील की कि वे एटीएल की स्‍थापना के साथ-साथ आगामी नए शैक्षणिक सत्रों से एटीएल का नियमित परिचालन सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित धनराशि प्राप्‍त करने हेतु एटीएल से जुड़े दिशा-निर्देशों के मुताबिक तय आवश्‍यकताएं जल्‍द से जल्‍द पूरी करें।
    अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) प्रधानमंत्री के ‘एक रचनात्‍मक भारत, एक अभिनव भारत’ बनाने के सपने को साकार करते हुए हमारे समाज के सभी तबकों को लाभान्वित करेंगी।

Tuesday, 26 December 2017

देश में धर्मनिरपेक्षता की जड़ो को और सशक्त करना होगा

    गुजरात। उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने कहा है कि देश में धर्मनिरपेक्षता की जड़ो को ओर सशक्त करना होगा और स्वार्थी तत्वो और धार्मिक चरमपंथियों द्वारा धर्म के नाम पर भेदभाव पैदा करने के प्रयासों को कुचलना होगा। 
 
   श्री नायडू गुजरात के पवित्र उदवाड़ा गांव में ईरानशाह उदवाड़ा उत्सव-2017 के अवसर पर पारसी समुदाय के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि पारसी समुदाय ने परमाणु ऊर्जा से लेकर औषधि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में देश की प्रगति में बहुमूल्य योगदान दिया है।
      उन्होंने महात्मा गांधी के कथन का उद्धरण कहते हुए कहा मुझे अपने देश भारत में पारसी समुदाय की निम्न संख्या के बावजूद उनके शानदार योगदान पर गर्व है और यह दान और मानवीय सौहार्द्ध की दिशा में यह अद्धितीय एवं अप्रतिम हैं।
    उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने कहा कि भारत की मिलीजुली संस्कृति और सदाचार भारत की धर्मनिरपेक्षता का आधार है। संविधान में सम्मिलित होने से पूर्व ही धर्मनिरपेक्षता प्रत्येक भारतीय के डीएनए में है। सर्व धर्म समभाव भारत के धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है।
     श्री नायडू ने कहा कि नगर में पर्यटन की संभावना को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने गन्तव्य विकास परियोजना की शुरूआत की है और ईरानशाह अग्नि मंदिर में और निकट कुछ आधारभूत सुविधाओ का निर्माण किया है।उन्होंने कहा इस विरासत नगर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुझाव पर धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया किया गया है।

Monday, 25 December 2017

नोएडा और दिल्ली के बीच नए मेट्रो लिंक का उद्घाटन

    नोएडा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नोएडा और दिल्ली के बीच एक नए मेट्रो लिंक (संपर्क) का उद्घाटन किया। 

   उन्होंने दिल्ली मेट्रो की मंजेटा लाइन के एक हिस्से के उद्घाटन के अवसर पर बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन पर एक पट्टिका का अनावरण किया। इस मेट्रो लाइन का यह हिस्‍सा नोएडा स्थित बॉटेनिकल गार्डन को दक्षिण दिल्ली स्थित कालकाजी मंदिर से जोड़ता है।
    उन्‍होंने एक सार्वजनिक सभा के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले मेट्रो ट्रेन से कुछ मिनटों तक सफर भी किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने ‘क्रिसमस’ के अवसर पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने यह भी कहा कि आज ही दो ‘भारत रत्नों’ पंडित मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन है।
     उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता की बदौलत ही देश को एक मजबूत और स्थिर सरकार मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि वह उत्तर प्रदेश के लोगों के स्‍नेह के लिए हमेशा उनके आभारी रहेंगे। उन्‍होंने कहा कि हम वर्तमान में एक ऐसे युग में रह रहे हैं जिसमें कनेक्टिविटी अत्‍यंत मायने रखती है। उन्‍होंने यह भी क‍हा कि महज थोड़ी देर पहले जिस मेट्रो लाइन का उद्घाटन किया गया है वह न सिर्फ वर्तमान पीढ़ी, बल्कि आने वाली पीढ़ि‍यों को भी अपनी सेवाएं प्रदान करेगी।
    उन्होंने कहा कि उनकी यह परिकल्‍पना है कि वर्ष 2022, जब हम आजादी का 75वां साल मनाएंगे, तक हम एक ऐसे भारत में रहने लगेंगे जो पेट्रोल आयात पर अपेक्षाकृत कम निर्भर होगा। उन्‍होंने कहा कि इस सपने को साकार करने के लिए अत्याधुनिक जन परिवहन प्रणाली समय की मांग है।
    नरेन्द्र मोदी ने इस बात का उल्‍लेख किया कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने दिसंबर 2002 में दिल्ली मेट्रो से सफर किया था और उस समय से लेकर अब तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मेट्रो नेटवर्क का काफी विस्तार हो चु‍का है।
     प्रधानमंत्री ने विशेष जोर देते हुए कहा कि जब तक ऐसी सोच दिलोंदिमाग पर हावी रहेगी कि ‘मेरा क्‍या‘ और ‘मुझे क्‍या’, तब तक प्रभावकारी गवर्नेंस संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह का नजरिया अब बदल रहा है। उन्‍होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित को ध्‍यान में रखकर निर्णय लेती है।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे पहले सरकारें नए कानून बनाने में गर्व महसूस करती थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार दरअसल एक ऐसी सरकार बनने की कामना रखती है जो अप्रचलित कानूनों को जड़ से समाप्‍त कर दे। उन्‍होंने कहा कि पुराने पड़ चुके कानून निर्णय लेने में बाधक साबित हो रहे हैं इसलिए इन कानूनों के रहते सुशासन संभव नहीं है।
   प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी और उन्‍होंने कहा कि सुशासन पर उनका विशेष ध्यान राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। प्रधानमंत्री ने नोएडा आकर इस शहर से जुड़े अंधविश्वास को समाप्‍त करने का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि कोई यह सोचता है कि किसी जगह पर न जाने से उसका मुख्यमंत्री कार्यकाल लंबा हो जाएगा और किसी जगह पर जाने से उसका कार्यकाल छोटा हो जाएगा, तो ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री बनने का कतई हकदार नहीं है।
    प्रधानमंत्री ने रेलवे के बेहतर बुनियादी ढांचे के लिए किए जा रहे कार्यों, सड़क नेटवर्क के विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्‍लेख किया। उन्होंने श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को ‘भारत मार्ग विधाता’ के रूप में निरूपित या वर्णित किया और इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमें विकास की राह दिखाई है।
     इससे पहले अपने भाषण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि प्रधानमंत्री ने इस देश की राजनीति को एक नया अर्थ या आशय दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा यही कहते हैं कि हमें विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना है।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह एसएसबी के 54वें वर्षगांठ परेड में शामिल हुए

   नई दिल्‍ली। सशस्‍त्र सीमा बल (एसएसबी) ने यहां 25वीं बटालियन के भव्‍य परिसर में 54वां वर्षगांठ समारोह मनाया। 

     केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्‍य अतिथि के तौर पर भव्‍य परेड की सलामी ली और एसएसबी के महानिदेशक रजनी कांत मिश्रा के साथ परेड का निरीक्षण किया।
    एसएसबी की सातों सीमाओं के सैन्‍य दलों तथा एक महिला दल ने परेड में हिस्‍सा लिया। परेड के पश्‍चात गृहमंत्री ने वीरता के लिए सीटी/जीडी संजीत कुमार (मरणोपरांत) को राष्‍ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किया। 
   पुरस्‍कार को उनकी पत्‍नी श्रीमती मनु शर्मा ने ग्रहण किया। स्‍वर्गीय सीटी/जीडी संजीत कुमार ने 2015 में झारखंड के दुमका में नक्‍सलियों के खिलाफ लड़ाई में अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दी थी। राजनाथ सिंह ने 23 सुरक्षा बल कर्मियों को उनकी विशिष्‍ट सेवा के लिए भारतीय पुलिस मेडल प्रदान किए। 
    उन्‍होंने एसएसबी के चार कर्मियों को प्रशिक्षण में विशिष्‍टता के लिए केंद्रीय गृहमंत्री मेडल से सम्‍मानित किया। कार्यक्रम के पश्‍चात एसएसबी कर्मियों ने बहादुरी के अद्भूत करतबों का प्रदर्शन किया। डॉग स्‍क्‍वैर्ड, डेयर डेविल टीम और पारकर कार्यक्रम के प्रदर्शन बहुत रोमांचकारी थे। 
   वीरगति प्राप्‍त सुरक्षा कर्मियों के स्‍मरण में एक झांकी निकाली गई। इस झांकी का नाम ‘प्राइड ऑफ इंडिया’ था और इसमें सुरक्षा कर्मियों की बहादुरी और उनके बलिदानों की प्रस्‍तुति की गई थी।

Sunday, 24 December 2017

भारतीय राष्‍ट्रवाद की भावना से प्रेरित होकर एकता की भावना के साथ प्रयास करें

    महाराष्‍ट्र। उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने इस बात पर बल देते हुए कहा कि भारतीय नागरिक होने का अर्थ आध्‍यात्मिक होना है, क्‍योंकि यह संकीर्ण और विभेदकारी मानसिकताओं से ऊपर उठकर एक वृहद पहचान बनाने हेतु प्रयास करने के लिए प्रेरित करता है। 

    महाराष्‍ट्र में आज दूसरे वैश्वि‍क साईं मंदिर शिखर सम्‍मेलन में मुख्‍य अतिथि के तौर पर श्री नायडू ने अपने संबोधन में आध्‍यात्मिक खोज और राष्‍ट्रवाद की समानताओं को रेखांकित किया।
   श्री नायडू ने कहा कि शिरडी साईं बाबा ने हिन्‍दूवाद और सूफीवाद के तत्‍वों को मिलाकर एक सर्वशक्तिमान ईश्‍वर– ‘सबका मालिक एक’ (एक ईश्‍वर सभी पर शासन करता है) का संदेश प्रचारित किया। बाबा के संदेश का अर्थ मानवता की एकता के सिद्धांतों में ही विश्‍व के सभी धर्मों के मुख्‍य तत्‍व समाहित हैं। आध्‍यात्मिकता का अर्थ ‘उच्‍च सत्‍य’ को जानने का प्रयास करना है और स्‍वयं के साथ शांति स्‍थापित करना है। 
    श्री नायडू ने कहा कि राष्‍ट्रवाद, चेतना के उच्‍च स्‍तर को प्रोत्‍साहित करता है। श्री नायडू ने कहा कि शिरडी साईं बाबा ने व्‍यक्तियों की मन की चिंताओं को दूर करने का रास्‍ता दिखाया है। भारत सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक मामलों में चुनौतियों का सामना कर रहा है। 
     इन पर विजय पाने का सबसे अच्‍छा तरीका है कि सभी भारतीय राष्‍ट्रवाद की भावना से प्रेरित होकर एकता की भावना के साथ प्रयास करें। नए भारत के निर्माण के लिए एक प्रकार की आध्‍यात्मिक उच्‍चता की आवश्‍यकता है।
    श्री नायडू ने कहा है कि भारतीय सभ्‍यता में ‘सर्वजन सुखिनो भवंतु’ तथा ‘वसुधैव कुटुम्‍बकम’ का सिद्धांत बहुत पहले से रहा है। सभी भारतीय इन सिद्धांतों से प्रेरणा पाते हैं। उपराष्‍ट्रपति ने साईं बाबा के भक्‍तों से उनके शांति, एकता और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने से सम्‍बन्धित शपथ लेने की अपील की।

नोएडा और दक्षिण दिल्‍ली के बीच यात्रा समय में कमी आएगी

   नोएडा। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 25 दिसम्‍बर को दिल्‍ली मेट्रो की नई मेजंटा लाइन के एक हिस्‍से का उद्घाटन करेंगे। यह लाइन नोएडा में बोटोनिकल गार्डन को दिल्‍ली के कालका जी मंदिर से जोड़ेगी। 

  इससे नोएडा और दक्षिण दिल्‍ली के बीच यात्रा में लगने वाले समय में महत्‍वपूर्ण कमी आएगी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नोएडा में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
   नई लाइन के चालू हो जाने से देश में शहरी परिवहन को आधुनिक बनाने में सरकार के प्रयासों में एक ओर अध्‍याय जुड़ जाएगा। यह लाइन प्रौद्यागिकी केंन्द्रित और पर्यावरण के अनुकूल तीव्र शहरी परिवहन प्रणालियों की दिशा में एक कदम सिद्ध होगी। 2017 में यह तीसरी मेट्रो लाइन है जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे, इससे पहले उन्‍होंने जून में कोच्चि मेट्रो और नवम्‍बर में हैदराबाद मेट्रो राष्‍ट्र को समर्पित की थी। इन दोनों अवसरों पर प्रधानमंत्री ने जनसभा के स्‍थल पर पहुंचने से पहले नई मेट्रो लाइनों से कुछ दूरी तक यात्रा की थी।
      नरेन्‍द्र मोदी राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अपने कार्यक्रमों में हिस्‍सा लेने के लिए मेट्रो से सफर करते हैं। जून 2016 में प्रधानमंत्री और फ्रांस के राष्‍ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने दिल्‍ली से गुरूग्राम तक यात्रा की थी जहां उन्‍हें संयुक्‍त रूप से इंटरनेशनल सोलर एलाइंस के मुख्‍यालय की आधारशिला रखनी थी। 
    हाल ही में अप्रैल 2017 में प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्‍ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्‍कम टर्नबुल ने अक्षरधाम मंदिर तक मेट्रो से सफर किया था। तीव्र परिवहन प्रणालियों के जरिए कनेक्टिविटी बढाने के लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए पिछले साढ़े तीन वर्ष की अवधि में करीब 165 किलोमीटर की दूरी कवर करने वाली नौ मेट्रो परियोजनाएं चालू की हैं। 
   पांच नई मेट्रो रेल परियाजनाओं का अनुमोदन किया गया है जिनसे 140 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो लाइन का निर्माण होगा। अगले दो वर्षों में करीब 250 किलोमीटर लम्‍बी मेट्रो लाइनों को चालू करने का प्रस्‍ताव है।

Friday, 22 December 2017

नया उपभोक्ता सरंक्षण विधेयक संसद के चालू सत्र में पेश होने की संभावना

    नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि मंत्रिमंडल ने नए उपभोक्ता सरंक्षण विधेयक को स्वीकृति दे दी है। 

   इस विधेयक को संसद के चालू सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। श्री पासवान ने कहा कि बीआईएस अधिनियम – 2016 तथा उपभोक्ता संरक्षण विधेयक उपभोक्ता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण घटना है। 
   राम विलास पासवान राष्ट्रीय उपभोक्त दिवस 2016 के उद्घाटन समारोह में अध्यक्षीय भाषण दे रहे थे। राष्ट्रीय उपभोक्त दिवस 2017 का थीम उभरते डिजिटल बाजार : उपभोक्ता सरंक्षण के लिए विषय और चुनौतियां है। इसका आयोजन आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उपभोक्ता मामले विभाग ने किया। 
    श्री पासवान ने कहा कि 1986 में बना वर्तमान उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम 31 वर्ष पुराना है। इस बीच बाजार का पूरा परिदृश्य बदल गया है। किसी ने यह कल्पना नहीं की थी कि स्मार्ट फोन अपने आप में पूरी दुनिया बन जायेंगे। 
      उन्होंने कहा कि अगले 25 वर्षों में डिजिटल विश्व की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। राम विलास पासवान ने कहा कि सरकार ने बाजार में हो रहे परिवर्तनों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए उपभोक्ता सरंक्षण कानून को आधुनिक बनाने का काम प्रारंभ किया है ताकि उपभोक्ताओं को उचित उत्पाद और सेवा मिल सके और उपभोक्ता संरक्षण में बाधक स्थिति में कार्यकारी हस्तक्षेप हो सके।
    उन्होंने कहा कि यह टेक्नालाजी का युग है और उपभोक्ताओं को शिक्षित करना और डिजिटल विश्व में शिकायतों का समाधान महत्वपूर्ण है। श्री पासवान ने कहा कि डिजिटल साक्षरता तथा वित्तीय साक्षरता दोनों साथ साथ चलनी चाहिए ताकि सरकार के नकद रहित अर्थव्यवस्था विजन में डिजिटल भुगतान तथा विभिन्न वित्तीय उत्पादों के उपयोग के बारे में उपभोक्ता कुशल हो सकें।
    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री सी आर चौधरी ने कहा कि आज व्यापार व्यवसाय वैश्विक हो गए हैं। इसलिए उपभोक्ता नीतियों का प्रणालीबद्ध विकास आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि हम न केवल उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना चाहते हैं बल्कि उन्हें सशक्त बनाना भी चाहते हैं।
      एनसीडीआरसी के अध्यक्ष जस्टिस डी के जैन ने कहा कि इस वर्ष एनसीडीआरसी के समक्ष दायर मामलों में 139 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह वृद्घि उपभोक्ताओं की बढ़ती जागरुकता दिखाती है। उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव अविनाश के. श्रीवास्तव ने बताया कि ऑनलाइन वर्ल्ड में उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए विभाग ने तीन महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 
     इनमें कानूनी मेट्रोलाजी (पैकेज सामग्री) नियम, 2011 में संशोधन करके ई-कामर्स प्लेटफार्म पर प्रदर्शित सामग्रियों पर नियम के अंतर्गत आवश्यक घोषणा शामिल करना अनिवार्य करना प्रमुख ई-कामर्स कंपनियों को कंवर्जन्स प्लेटफार्म पर लाना तथा ई-कामर्स के लिए नियम बनाना शामिल है।

देश के 15,183 गांवों में विद्युतीकरण, उजाला के तहत 28 करोड़ एलईडी

     नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने 2019 तक देश भर में 24न्7 बिजली प्रदान करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रम शुरू किया है। आधी अवधि पूरा होने के बाद ही सरकार ने विद्युत क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किए हैं। 

   ग्रामीण विद्युतीकरण पर दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजूजेवाई) के तहत विशेष ध्यान दिया गया है। शहरी विद्युतीकरण पर एकीकृत ऊर्जा विकास योजना (आईपीडीएस) के अंतर्गत विशेष ध्यान दिया गया है।
     मार्च 2019 तक सौभाग्य योजना के तहत, अब अलग-अलग घरेलू विद्युतीकरण पर जोर दिया जा रहा है। ऊष्मीय विद्युत उत्पादन, पनबिजली और सबसे महत्वपूर्ण सौर, पवन और अन्य हरित ऊर्जा से संबंधित कई ऐतिहासिक निर्णय पहले ही लिए जा चुके हैं, इसके साथ ही प्रेषण और वितरण को सुदृढ़ बनाने, फीडर को अलग करने और उपभोक्ताओं के लिए बिजली के मीटर व्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। 
     इसके तहत न सिर्फ क्षमता बढ़ाने की उपलब्धियां शामिल हैं बल्कि वर्तमान बुनियादी ढांचे में भी ऊर्जा दक्षता बढ़ाने हेतु महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं और साथ ही विद्युत के नुकसान को कम करने एवं उत्तरदायित्व और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई मोबाइल एप्लिकेशन तथा वेबसाइट जैसे ऊर्जा एप, सौभाग्य पोर्टल, केन्द्रीय विद्युत पोर्टल, मेरिट पोर्टल की शुरूआत की गई है।
     दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना : दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजूजेवाई) के तहत 32 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में कुल 42,565 करोड़ रूपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। देश में ग्रामीण विद्युतीकरण की स्थिति : संचयी रूप से (30 नवंबर 2017 तक), 1,24,219 गांवों में विद्युतीकरण और 4,68,827 गांवों में गहन विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो गया है। 277.20 लाख बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन जारी किए गए हैं। 
     देश में 18,452 जनगणना गांवों (2011 की जनगणना के अनुसार 5,97,644 के कुल ग्रामीण बस्तियों में से) में 1 अप्रैल 2015 तक राज्यों द्वारा विद्युतीकृत नहीं किए गए थे। 30 नवंबर 2017 तक, 15,183 गांवों में विद्युतीकरण पूरा हो गया है और 1,052 गांवों में गैर-बसे हुए (गैर-आबाद) लोगों की सूचना मिली है। बचे हुए 2217 गांवों में 1 मई 2017 तक विद्युतीकरण होने की उम्मीद है। 
     ये 2217 गांव विभिन्न राज्यों अरूणाचल प्रदेश (1069), असम (214), बिहार (111), छत्तीसगढ़ (176), जम्मू और कश्मीर (99), झारखंड (176), कर्नाटक (8), मध्य प्रदेश (34), मणिपुर (54), मेघालय (50), मिजोरम (11), ओडिशा (182) और उत्तराखंड (33) में स्थित हैं। सौभाग्य : प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना, भारत सरकार ने सितंबर 2017 में देश में सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण हासिल करने के लिए "प्रधानमंत्री सहज बिजल हर घर योजना (सौभाग्य)" नामक एक योजना की शुरूआत की, इस योजना की कुल लागत 16,320 करोड़ रुपये है जिसमें 12,320 करोड़ रूपये का सकल बजटीय समर्थन शामिल है।
       इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सभी परिवारों को जोड़ना एवं बिजली कनेक्शन प्रदान करना है। ग्रामीण इलाकों में एसईसीसी आंकड़ों के आधार पर और शहरी इलाकों में आर्थिक रूप से गरीब परिवारों के आधार पर कम-से-कम वंचित रहने वाले सभी गैर-विद्युतीकृत परिवारों को मुफ्त बिजली के कनेक्शन दिए जायेगें। 
    इसके अलावा दूसरे परिवारों से बिल के साथ दस समान किश्तों में प्रति परिवार 500 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित घरों को सौर फोटोवोल्टाइक (एसपीवी) आधारित स्टैंडअलोन पद्दति के साथ एलईडी लाइट, पंखे, पावर प्लग इत्यादि प्रदान किया जाएगा। 2011 के एसईसीसी आंकड़ों को आधार मानते हुए सामाजिक आर्थिक स्थितियों के अनुसार लाभार्थियों की पहचान की जाएगी। 31 मार्च 2019 तक सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
    इस योजना की शुरूआत 28 नवंबर 2017 को मणिपुर में हुआ था और मणिपुर के 1.75 लाख परिवारों (1.62 लाख ग्रामीण परिवारों और 0.13 लाख शहरी परिवारों) को इस योजना के तहत शामिल करने का प्रस्ताव है। एकीकृत ऊर्जा विकास योजना : आईपीडीएस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में गुणवत्ता और विश्वसनीय 24ज्र्7 निर्बाध बिजली आपूर्ति प्रदान करना है। अब तक, निगरानी समिति ने 3,616 शहरों के लिए कुल 26,910 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। राज्यों से संबंधित संस्थाओं को 23,448 करोड़ रुपये मूल्य का कार्य दिया गया है।
     इस योजना में आईटी और तकनीकी सहायता के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में 24ज्र्7 बिजली की आपूर्ति को सुनिश्चित करेगा, लेकिन बिलिंग और संग्रहण दक्षता में भी सुधार करने में मदद मिलेगी, जिसके परिणामस्वरूप तकनीकी और वाणिज्यिक (ए टी एंड सी) नुकसान में भी कमी आएगी। अब तक, आर-एपीडीआरपी के तहत 1363 शहरों को "गो-लाइव" घोषित किया गया है, 52 शहरों में स्काडा नियंत्रण प्रणाली की स्थापना की गई है, 20 स्काडा शहरों में कार्य पूरा कर लिया गया है।
     इस योजना के भाग-1 के तहत 21 डेटा केंद्रों में से 20 अधिकृत हो चुके हैं। 970 शहरों में भाग-बी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। भारत में 45/57 डिस्कॉम (निजी सहित) में उपभोक्ताओं के लिए ऑल इंडिया शॉर्ट कोड '1912' की शुरूआत हो चुकी है। उज्ज्वल डिस्‍कॉम एश्योरेंस योजना : उज्ज्वल डिस्‍कॉम एश्योरेंस योजना (यूडीएवाई), जो बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय और परिचालन को घाटे से उबार कर लाभ में लाने के लिए एक योजना है, सरकार द्वारा विभिन्न हितधारकों के परामर्श से रूप-रेखा देकर दिनांक 20.11.2015 को शुरू की गई थी।
   इस योजना का उद्देश्य लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपयों के लंबे समय से कर्ज और भविष्य में संभावित नुकसान का स्थायी समाधान करना है। इस योजना में सभी क्षेत्रों - उत्पादन, प्रेषण, वितरण, कोयला और ऊर्जा दक्षता में सुधार लाने हेतु उपायों की परिकल्‍पना भी की गई है। योजना की वैधता अवधि दिनांक 31-03-2017 को समाप्त हो गई है। नागालैंड, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव ने दिनांक 20 नवंबर 2017 को यूडीएवाई योजना के तहत भारत सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही, अब तक यूडीएवाई में 27 राज्य और 4 संघ राज्‍य क्षेत्र शामिल हो चुके हैं।
   राष्ट्रीय विद्युत योजना पर तैयार प्रारूप दस्‍तावेज 2021-22 की समय-सीमा में 226 गीगावॉट परियोजना की अधिकतम मांग को पूरा करने हेतु 2017-22 की योजनागत अवधि के लिए अंतर-क्षेत्रीय पारेषण लिंक सहित पारेषण प्रणाली (पारेषण लाइनों और संबद्ध सबस्टेशनों) को कवर करता है। सीबीटीई को सुविधाजनक बनाने के लिए पड़ोसी देशों को विशेष रूप से बिजली आपूर्ति के लिए भारतीय उत्पादक केंद्रों को पड़ोसी देशों के पारेषण प्रणाली से जोड़ने हेतु स्वतंत्र पारेषण  प्रणाली बनाने के अनुमोदन के लिए सक्षम प्राधिकरण (सीए) के लिए आचरण व्यापार नियम (सीबीआर) जारी किए गए हैं। 
     थर्मल : पराई जलाने के कारण उत्‍पन्‍न प्रदूषण को कम करने के लिए ऊर्जा मंत्रालय ने चूर्णित कोयले की आग से चालित बॉयलरों में को-फायरिंग के माध्यम से बिजली उत्पादन के लिए बायोमास उपयोग हेतु एक नीति जारी की है।
    हाइड्रो पावर परियोजनाएं : हाइड्रो पावर सेक्टर में, 1305 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता वाली 11 हाइड्रो पावर परियोजनाएं वर्ष 2017-18 में चालू होने की संभावना है। इन परियोजनाओं में से, 465 मेगावाट की स्थापित क्षमता वाली 7 परियोजनाओं को 30.11.2017 तक पहले ही चालू कर दिया गया है और शेष क्षमता मार्च'18 तक चालू होने की संभावना है।
   वित्तीय वर्ष 2017-18 (जनवरी 2017 से नवंबर '2017) के लिए हाइड्रो पावर उत्पादन 120.87 बीयू है। 2880 मेगावाट की दिबांग बहुउद्देशीय परियोजना की डीपीआर को सीईए द्वारा वर्ष 2017 में मंजूरी प्रदान की गई है। 60 मेगावाट नटवर मोरी एचईपी के निवेश के अनुमोदन के बारे में एसजेवीएनएल को सूचित किया गया।
     सौर परियोजनाओं के लिए आईएसटीएस पारेषण प्रभारों की छूट की अवधि को आगे बढ़ाना और घाटा:: संशोधित टैरिफ पॉलिसी 2016 के प्रावधानों के अनुसार, विद्युत मंत्रालय ने अंतरराज्यीय पारेषण शुल्क की छूट के लिए तथा ऊर्जा के सौर और पवन स्रोतों से उत्पन्न बिजली के पारेषण में घाटे के संबंध में 30.9.2016 को एक आदेश जारी किया है। यह छूट उन पवन परियोजनाओं के लिए उपलब्‍ध थी जिन्‍होंने 31 मार्च 2019 तक सीओडी प्राप्त कर लिया था और उन सौर परियोजनाओं के लिए जिन्‍होंने 30 जून 2017 तक सीओडी प्राप्त किया गया था। दिनांक 14.6.2017 को एक संशोधन आदेश जारी किया गया है जिसके माध्यम से उन सौर परियोजनाओं के लिए आईएसटीएस पारेषण शुल्क की छूट और घाटे का प्रावधान उपलब्‍ध कराया गया है जो 31 दिसंबर 2019 तक सीओडी प्राप्त कर लेंगे।
    इससे देश में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। ऊर्जा (शहरी ज्योति अभियान) मोबाइल ऐप : ऊर्जा ऐप उपभोक्ता शिकायत निवारण, नए सेवा कनेक्शन जारी करने, उपभोक्ता द्वारा महसूस की गई बाधाओं की औसत संख्‍या, उपभोक्ता द्वारा महसूस की गई बाधाओं की औसत अवधि, ई-भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या, ऊर्जा हानि / बिजली की चोरी, यानी एटी एंड सी हानि, आईटी सक्षमता (गो-लाइव ऑफ टाउन्‍स), स्काडा का कार्यान्वयन, शहरी व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, राष्ट्रीय पावर पोर्टल पर फीडर डेटा, आईपीडीएस एनआईटी की प्रगति, आईपीडीएस पुरस्कार की प्रगति के बारे में जानकारी उपलब्‍ध कराता है।
      सौभाग्य वेबपोर्टल : 'सौभाग्य' वेब पोर्टल – पारदर्शी सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण की निगरानी के लिए एक प्‍लेटफॉर्म – को दिनांक 16 नवंबर, 2017 को शुरू किया गया। राष्ट्रीय विद्युत पोर्टल : राष्ट्रीय पावर पोर्टल (एनपीपी) - भारतीय पावर सेक्टर सूचना के समेकन और प्रसार के लिए एक केंद्रीयीकृत प्‍लेटफॉर्म - को दिनांक 14 नवंबर, 2017 को शुरू किया गया, जो मंत्रालय द्वारा पूर्व में आरंभ किए गए सभी पावर सेक्टर ऐप्स के लिए एक सिंगल प्‍वाइंट इंटरफेस होगा।