Saturday, 6 March 2021

अमृत है देशी गाय का घी

    देशी गाय का घी धरती पर अमृत सरीखा माना गया है। यह करीब 80 प्रकार के रोग जो वात-पित्त के असंतुलन से होते है पर अंकुश लगाता है। इतना ही नही देशी गाय का घी शरीर को संतुलित करता है, इसमें दिमाग की गर्मी को शांत करने की अद्भुत क्षमता है। क्रोध व चिड़चिड़ा पन स्वभाव वालो को भी शांत रखने में इसकी अहम भूमिका है।

    देशी गाय के घी में जो चिकनाई होती है, उसे स्नेह कहा जाता है। इसे खाने से शरीर व मन दोनों को ताकत मिलती है। मस्तिष्क का करीब 20 प्रतिशत भाग चिकनाई से बना है। अध्ययनों की माने तो मस्तिष्क केवल 3.5 माइक्रोन से छोटी चिकनाई को ही ग्रहण कर पाता है। देशी गाय का बिलौने का घी 3.1 से 3.3 माइक्रोन का होता है, अन्य सभी चिकनाई 4.8 माइक्रोन से अधिक होती हैं। अर्थात् मस्तिष्क के लिए एक ही चिकनाई है देशी गाय का घी। प्रसव या ऑपरेशन के कारण हुए घाव को देशी गाय का घी सबसे तेजी से भरता है। 

    आयुर्वेद कहता है कि देशी गाय का घी बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने में सहायक है। दही मथकर बिलौने से तैयार किया गया है। गिर गाय के घी में सोने जैसे तत्व पाए जाते है। स्वास्थ्य के लिहाज यह घी बहुत ही गुणकारी है। सामान्य तौर पर बाजार में बिकने वाले ज्यादातर घी दूध से सीधीे फैट निकाल कर तैयार किए जाते हैं। इनमें बिलौने वाले घी का गुण नहीं होता। देशी नस्ल की गाय को सूर्यग्रंथी यानी उसका डिल ही खास बनाता है। सूर्यग्रंथी के कारण ही इने दूध की गुणवत्ता सामान्य गाय से बेहतर होती है।  

    पारंपरिक वैदिक प्रक्रिया का उपयोग करके इसके दूध से बिलौना वाला घी बनाया जाता है। सबसे पहले गाय के दूध को दही में बदल कर मक्खन (बिलौना) बनाने के बाद घी तैयार किया गया है। देशी घी शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार करने के लिए एंटी ऑक्सीडेंट प्रदान करता है। याद रखिए कि जब भी आप देसी गाय से जुड़े कोई भी उत्पाद खरीदते हैं तो किसी ना किसी रूप में आप गौ सेवा में अपना योगदान व अंशदान दे रहे होते हैं जो देसी गायों के संरक्षण में अहम भूमिका अदा करेगी।

    आर्गेनिक हाट करौंदी में जैविक खाद्य पदार्थ के साथ ही शुद्ध व कुटीर उद्योग के जुड़े उत्पाद मिलते हैं। हमारे यहां गिर गाय का घी, सरसो के फूल वाला शहद, अर्जुन छाल पाउडर, बेल चूर्ण, आंवला चूर्ण, अश्वगंधा, शतावरी, कालमेघ, त्रिफला चूर्ण तथा शहद के साथ ही जैविक जौ का आटा, मडुवा आटा, मल्टीग्रेन, तिल व सरसो का जैविक तेल, बाजरा, मूंगफली, च्यवनप्राश, सुगंधित चावल, गुड़ के साथ ही रसोइ में उपयोग के सभी सामान मिलते हैं।

     आनंद कुमार मिश्र

ऐसे रखें हृदय को चुस्त-दुरुस्त

   व्यस्ततापूर्ण दिनचर्या, अनियमित खानपान, तनाव और श्रमहीन, विलासिता पूर्ण जीवन जीना, यह पांच महाशत्रु वैसे तो रोगों की जड़ है, हद्वय के विभिन्न रोग और रक्त चाप की समस्या भी इन्हीं पांच सेहत के दुश्मनों की ही देन है। हद्वय को शक्तिशाली बनाने और रक्तचाप से बचाव के लिए क्या आहार लें क्या सजगता रखें, इस विषय पर बहुत ही ज्ञानवर्धक और सरल सहज जानकारी श्रीनाथ चिकित्सालय भगवतदास घाट सिविल लाइंस कानपुर की मुख्य चिकित्सक डा. रजनी पोरवाल ने दी है।


   जरूर ध्यान दीजिए :उच्च रक्तचाप और अनियमित दिल की धड़कने सर्दी के मौसम में हार्टअटैक ब्रेन स्ट्रोक या अन्य जानलेवा हद्वय रोगों का कारण बन जाती है। भोजन में नमक की ज्यादा मात्रा अधिक वजन, धूम्रपान शराब का सेवन भी हद्वय रोगों व रक्तचाप के लिए घातक माना जाता है।

   जानिए रक्तचाप क्या है :हद्वय द्वारा पम्प किए गए शुद्ध रक्त को धनमियां शरीर के अन्य भागों तक ले जाती है। इसके बाद अशुद्ध खून को अन्य रक्त को अन्य रक्त वाहिकाएं हद्वय तक वापस लेकर आती हैं। हद्वय द्वारा खून को पम्प किए जाने पर रक्त वाहिकाओं में उत्पन्न दबाव को ही रक्तचाप कहते हैं। रक्तचाप को पारे के मिली मीटर एमएम/एचजी में मापा जाता है। जब हद्वय रक्त को बाहर निकालने के लिए धड़कता है तब रक्त का दबाव सिस्टोमिक यानी ऊपर वाला रक्त चाप कहलाता है। जब दिल की दो धड़कनों के बीच हद्वय आराम की स्थिति में होता है तो उसे डायस्टोमिक यानी नीचे वाला रक्त चाप कहते हैं। 130/80 एमएस/एचजी रक्तचाप को आदर्श समझा जाता है।

     अच्छी आदतें सच्ची मित्र :समय पर सोना, समय पर जागना, समय पर नाश्ता खाना लेना, आरामदायक वस्त्र पहनना, भरपूर पानी पीना फाइबर युक्त अन्न और ताजे फलों गाजर, टमाटर का ताजा रस अच्छी सेहत की आधारशिला है।

     ऐसे करें दिन की शुरूआत :रक्तचाप और हद्वय रोगों से बचाव के लिए प्रात: सूर्योदय के पूर्व सोकर उठें। शौच आदि से निवृत्त होकर दस मिनट तक योगासन, पांच मिनट का हार्ट फुलनेस ध्यान का प्रारंभिक सोपान आपके सोच में जबर्दस्त सकारात्मकता, उडत्साह और निर्णय लेने की क्षमता में जबर्दस्त वृद्धि करेगा। मानसिक तनाव से उलझना नहीं बल्कि सहज रूप से उससे छुटकारा पाना ही श्रेष्ठ है। बिस्तर पर चाय पान मसाला, बीड़ी सिगरेट का सेवन जहरतुल्य है।

    आलस्य और विलासता बड़े दुश्मन :आलस्य और दिलासता आपके अच्छे स्वास्थ्य एवं लंबी उम्र का स्पीड ब्रेकर है। श्रम करने में शरमाएं नहीं, विलासिता की चीजों का दुरूपयोग न करें या दूसरों को दिखाने को उन पर अपनी बादशाहत कायम करने के लिए विलासिता की चीजों का अनावश्यक प्रयोग सेहत के लिए खराब है। दिखावा करने वाले मार्निंग वाक से निरोगता प्राप्त होना कठिन है। हमें अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए बढ़ती उम्र के रोगों से बचाव के लिए ईमानदारी से कदम उठाने चाहिए।

     भोजन में इन्हें शामिल करें :आहार में नींबू शामिल करें। इसका विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट रक्तचाप को काबू में रखता है। दाल या सब्जी में नींबू निचोड़कर खाने से एसिडिटी और गैस से बचाव करता है। प्रोटीन कैल्शियम विटामिन बी6 बी 12 से भरपूर दही हद्वय के लिय रामबाण है। कच्चे लहसुन की दो चार कलियां हद्वय व रक्तचाप के रोगों को नियंत्रण में रखती है। सहजन की सूखी पत्तियों का 5 से 10 ग्राम चूर्ण प्रात: खाली पेट पानी से लेना हद्वय रोगों, जोड़ों का दर्द और इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे अच्छा साधन है। अलसी या तीसी को भूनकर उसका पाउडर दूध के साथ लेने से जो लाभ मिलते हैं, उन्हें शब्दों में कहना कठिन है। यह बुढ़ापे पर ब्रेक रोगों से बचाव व शरीर में दुख दे रही बीमारियों को खदेड़ कर अच्छा स्वास्थ्य देता है। अदरक और तुलसी की पत्ती का रस भी हद्वय को बल देकर रक्तचाप को बेकाबू होने से रोककर जीवन की रक्षा करता है।

     बाजरा है सुपर फूड :सर्दी में बाजरा का आटा श्रेष्ठ सुपर फूड है। इसमें गेहूं की तुलना में एक तिहाई कैलोरी होती है किन्तु प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट और भरपूर फाइबर के साथ फालेट आयरन मैग्नीशियम नियासिन थियासिन फास्फोरस जिंक और अनेक विटामिनों का बेहतरीन श्रोत है। बाजरा ग्लूटेन फ्री होता है। इसके एंटीआक्सीडेंट, पालीफेनाल्स और फाइटो केमिकल हद्वय रोगों और रक्तचाप से बचाव का सशक्त हथियार है। आयुर्वेद दृष्टि से भी बाजरा शरीर के तापक्रम का नियमन करके सर्दी ठंड ज्यादा लगना जैसी समस्याओं से रक्षा करता है।