Wednesday, 10 May 2017

भगवान बुद्ध की शिक्षाएं दुनिया में लोकप्रिय

            संस्कृति मंत्रालय ने "बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण के आशीर्वाद दिन" को शुभ वैशाख महीने के पूर्णिमा दिवस को केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ महेश शर्मा तथा गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू की उपस्थिति में एक समारोह मनाया।

           बुद्ध जयंती समारोह 2017 के इस शुभ अवसर पर संस्कृति मंत्रालय ने प्रो एस.आर. भट्ट, बौद्ध धर्म के एक प्रसिद्ध विद्वान जिन्होंने बौद्ध धर्म के संरक्षण और संवर्धन में अत्यधिक योगदान दिया है, को सम्मानित किया। थिवड़ा परंपरा में मंगलाचरण और महायान परंपरा के भिक्षुओं द्वारा जप किया गया। प्रोफेसर गेशे गुवांग सामतेन ने बुद्ध के उपदेश दिए और प्रख्यात नर्तक शोभना नारायण ने 'शुनायता' थीम पर नृत्य प्रस्तुत किया।

             केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं दुनिया भर में बहुत लोकप्रिय है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को पाठ पुस्तकों में शामिल करने के लिए काम कर रहा है क्योंकि उनकी शिक्षाएं अभी भी बहुत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा देने का उद्देश्य न केवल ज्ञान पाने और रोजगार हेतु कुशल बनाने तक ही सीमित होना चाहिए बल्कि एक आदर्श व्यक्ति को भी तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के पाठ्यक्रम ढांचे को सुधारने पर भी जोर दिया। 

                      संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ महेश शर्मा ने कहा कि बौद्ध धर्म ने हमारे देश के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला है। भगवान बुद्ध से संबंधित चीजें भारत में ही संपन्न हुई हैं। त्रिपिताका के रूप में जाने वाले उनके तीन टोकरी में नैतिक अनुशासन, मन के प्रशिक्षण की विधि और ज्ञान के फैलाव तथा प्रसार के लिए जमीन तैयार करने के तरीके शामिल हैं। भगवान बुद्ध से जुड़े आठ धार्मिक स्थानों में से सात भारत में स्थित हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सरकार तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए भारत में बौद्ध धर्म के स्मारकों, पवित्र मंदिरों और स्थानों के संरक्षण और प्रचार के लिए समर्पित है। 

              केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि पूरा विश्व भारत की ओर टकटकी लगाये बैठा है कि भारत बौद्ध धर्म के लिए क्या कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर भारत भगवान बुद्ध द्वारा दिखाए गए मार्गों का पालन करना जारी रखता है तो भारत फिर से सुपर पावर बन सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्रालय ने विदेशी पर्यटकों के लिए ई-वीजा के नियमों को आसान बनाने हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार बुद्ध जयंती वैसाख पूर्णिमा को पड़ता है यानि वैसाख महीने के पूर्ण चंद्र दिवस के दिन। गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण को एक ही दिन मनाने वाले बौद्धों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण दिन है। मई 1950 में श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित "बौद्ध धर्म विश्व फैलोशिप" की पहली बैठक में ही यह फैसला किया लिया गया था कि वैसाख पूर्णिमा को बुद्ध के तीनों-जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण को एक साथ मनाया जाए।

               भारत बौद्ध धर्म सहित कई विश्व धर्मों की उत्पत्ति राष्ट्र रहा है। बुद्ध से संबंधित सारी घटनाएं भारत में ही संपन्न हुईं। ईसा पूर्व 6वीं शताब्दी में बुद्ध शाक्यमुनि के आगमन ने भारत में दर्शन और आध्यात्मिकता की संस्कृति में एक क्रांतिकारी सुधार लाया। करुणा, क्षमा और मैत्री तथा दयालुता को उनकी शिक्षा में समान अवसर दिया गया। अहिंसा के सिद्धांतों के साथ बौद्ध धर्म ने शांति की संस्कृति में अत्यधिक योगदान दिया। बौद्ध धर्म भारत की प्राचीन गौरवशाली विरासत का एक महत्वपूर्ण अंग है, भारत सरकार ने बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए कई पहल की है। 1956 में भारत सरकार ने बुद्ध के महापरिनिर्वाण की 2500वीं वर्षगांठ का आयोजन अंतरराष्ट्रीय मेगा आयोजन के रूप में किया था।

             नालंदा में सीखने की प्राचीन पद्धति को पुनर्जीवित करने के लिए नालंदा, बिहार में 1951 में नवा नालंदा महावीर स्थापित किया गया था।1959 में लेह, लद्दाख में केन्द्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान स्थापित किया गया था। बौद्ध और तिब्बती अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए 1968 में केन्द्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान की स्थापना की गई थी। 2003 में अरूणाचल प्रदेश के दाहुंग में केन्द्रीय हिमालयन संस्कृति अध्ययन संस्थान स्थापित किया गया था। 2010 में फिर से नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना राजगीर में की गई जो प्राचीन ज्ञान का केंद्र रहा था। 

             इन संस्थानों के माध्यम से त्रिपिताका के प्रकाशनों को आगे लाने और प्राचीन नालंदा के खोए हुए कार्यों को शिक्षा केंद्रों के माध्यम से विकसित किया गया है। भारत सरकार बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण के दिन यानि बुद्ध पूर्णिमा (बैसाख पूर्णिमा) को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव सम्मेलन आयोजित करता है। "21 वीं सदी के संकट में बौद्ध अनुक्रिया" के तहत हाल ही में मार्च में राजगीर में आयोजित सम्मेलन में करीब 35 देशों के विद्वानों ने विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। 

              इस कार्यक्रम का उद्घाटन बौद्ध धर्मगुरू दलाईलामा ने किया तथा समापन राष्ट्रपति ने किया। यह बौद्ध धर्म को बढ़ावा देने के लिए संस्कृति और पर्यटन मंत्री डॉ महेश शर्मा के नेतृत्व में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित यह प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है। गहन आध्यात्मिक और अकादमिक नींव के साथ, बौद्ध धर्म ने भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर अतीत में काफी प्रभाव डाला है। जैसा कि भारत ने राष्ट्रीय ध्वज पर बौद्ध धर्म के नाट्य चक्र को समाहित किया। राष्ट्र शांतिपूर्ण समाज को विकसित करने और मानवता को उजागर करने के लिए बुद्ध के करुणा और दया के संदेश को प्रसारित करने हेतु समर्पित है।

भारत का निर्यात 500 बिलियन डॉलर

            भारत में व्यापार सफलता के मुख्य कारकों में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयास, निर्यात उन्मुख उद्योंगों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करना, व्यापार की प्रक्रिया को सरल करना, डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया शामिल हैं। 

           इन सभी ने न केवल नौकरी सृजन में वृद्धि, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि सुनिश्चित करने का काम किया। निर्यात दो अंकीय विकास में परिवर्तित हो गया । आने वाले सालों में भारत का व्यापारिक निर्यात 500 बिलियन डॉलर से अधिक और दोतरफा व्यापार 1 खरब डॉलर से अधिक होगा। यदि सेवाओं को निर्यात में शामिल किया जाता है, तो दोतरफा व्यापार एक खरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। भारत के व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक अन्य कारक अप्रत्यक्ष कर है, जो इस वर्ष जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर के रूप में लागू होने जा रहा है।

              एक राष्ट्र, एक कर और एक साझा बाज़ार व्यवस्था लेनदेन की लागत को कम करने के साथ-साथ लॉजिस्टिक में खपने वाले समय को कम करने जा रही है, ताकि व्यापार को कई गुणा बढ़ाया जा सके। वर्ष 2014-15 में 36 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 48 फीसद बढ़कर वर्ष 2015-16 में 53 बिलियन डॉलर पहुंच गया। इस प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के चलते व्यापार को भी गति मिली। वर्ष 2016-17 में दिसंबर माह तक भारत को 47 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि यह पिछले वर्ष के 53 बिलियन डॉलर के एफडीआई से आगे निकल जाएगा। 

                 विदेशी मुद्रा भंडार वर्ष 2014 के 312 बिलियन डॉलर से बढ़कर वर्ष 2016 में 365 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। नियमों का सरलीकरण, 1200 अप्रचलित कानूनों को खत्म करना, रियल एस्टेट नियामकों की स्थापना के लिए रियल एस्टेट विधेयक, एक मुख्य निर्यात वस्तु अर्थात् रत्न उद्योग के लिए ई-मार्केट की स्थापना और कई अन्य पहलों ने पिछले 2-03 वर्षों के दौरान व्यापार करने के प्रक्रिया को काफी सरल एवं बेहतर बनाया है। लोकप्रिय टार्गेट प्लस योजना को जारी रखने के संबंध में सर्वोच्च न्यायाल के फैसले को हाल ही में मंत्रिमंडल द्वारा मंज़ूरी दिए जाने से भी निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

            टार्गेट प्लस योजना के अंतर्गत एफओबी मूल्य का 5-15 प्रतिशत ड्यूटी क्रेडिट निर्यातकों को प्रदान किया जाता है। मार्च महीने में 30 प्रमुख निर्यात उत्पादों में से 25 उत्पादों में सकारात्मक वृद्धि के साथ ही निर्यात निश्चित रूप से सही दिशा में वापस आ रहा है। वर्ष 2016-17 में यह 325 बिलियन डॉलर के निर्यात के लक्ष्य को वापस प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि यह दो अंकों वाले उच्च विकास के रास्ते पर फिर से लौट आए। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा मार्च में शुरू की गई निर्यात के लिए व्यापार अवसंरचना योजना (टीआईईएस) भी व्यापार को बढ़ावा देने में मदद करेगी। 

            बुनियादी ढांचे के स्तर पर निर्यातकों के सामने चुनौतियां काफी बड़ी हैं, ऐसे में प्रयोगशालाओं एवं प्रमाणीकरण केन्द्र के अलावा टीआईईएस, बंदरगाहों की अंतिम दूरी तक पहुंच जैसे आधुनिक आधारभूत ढांचे का निर्माण करने में मदद करेगा। यह विभिन्न लॉजिस्टिक बाधाओं को खत्म करने के अलावा, इससे जुड़ी कई अन्य समस्याओं का निपटान करेगा। भारत में लॉजिस्टिक लागत दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सर्वोच्च स्तर पर है, ऐसे में केन्द्रीय मंत्री द्वारा शुरू की गई यह ईकाई लॉजिस्टिक लागत को कम करने में मदद करेगी। इसके अलावा, विश्व व्यापार संगठन में 21 वर्षों में पहली बार ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट नामक बहुपक्षीय समझौते, से व्यापार लगात औसतन 14.3 फीसद तक घटने की उम्मीद है।

              भारत जैसे विकासशील देशों को इससे लाभ होगा, क्योंकि ये वस्तुओं की गतिविधि, निकासी और निवारण के वैश्विक नियमों के अनुरूप होगा। यह व्यापार संबंधी प्रशासनिक गतिविधियों को सरल एवं कम लागत वाला बनाएगा, जिससे वैश्विक आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण एवं ज़रूरी बढ़ावा मिलेगा। यह वैश्विक वृद्धि को कम से कम 0.5 फीसद तक बढ़ाने में मदद करेगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। यह वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी को वर्तमान 1.9 फीसद से बढ़ाकर 5 फीसद तक लाने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों के साथ निर्यात को प्रोत्साहित करेगा। 

              विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ, तेज़ी के बढ़ते निर्यात का लाभ उठाने के लिए मोदी सरकार ने उलट आयात शुल्क संरचना को वापस पटरी पर लाने के लिए कई अहम उपाय किए हैं। सरकार द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे सुधार, 2020 तक अनुमानित 882 बिलियन डॉलर के भारत के व्यापार निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे। विभिन्न सेवा निर्यातों के साथ, भारत का कुल निर्यात करीब 1.3-1.4 ट्रिलियन डॉलर होगा। ऐसी परिस्थितियों में कुल दो तरफा व्यापार 2.5 ट्रिलियन डॉलर की सीमा को पार कर सकता है।

               यह एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, मगर सुधारों के मद्देनज़र इसको हासिल करना संभव है। 1991 के आर्थिक उदारवाद के बाद, जीएसटी अपने आप में दूरगामी और अत्यंत प्रभावशाली सुधार है, जो व्यापार, निर्यात एवं अर्थव्यवस्था के स्तर पर देश की विकास की गति को और तेज़ करेगा।

उत्‍तर प्रदेश ने 37 नहरें उत्‍तराखंड को सौंपी, उत्‍तराखंड ने 8 नहरें उत्‍तर प्रदेश को सौंपी

          उत्‍तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अंतर्गत जल संसाधनों के प्रबंधन में विकास के बारे में दूसरी बैठक नई दिल्‍ली में आयोजित की गई, जिसकी अध्‍यक्षता सचिव (डब्‍ल्‍यू आर, आरडी और जीआर) डा. अमरजीत सिंह ने की। 

      उत्‍तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्‍व राज्‍य सरकार में विशेष सचिव (सिंचाई) सी पी त्रिपाठी ने किया जबकि उत्‍तराखंड सरकार का प्रतिनिधित्‍व राज्‍य सरकार में प्रधान सचिव (सिंचाई) आनंद बर्धन ने किया। केन्‍द्र सरकार की ओर से बैठक में भाग लेने वाले अन्‍य प्रतिभागियों में केन्‍द्रीय जल आयोग के अध्‍यक्ष नरेन्‍द्र कुमार, केन्‍द्रीय जल आयोग के सदस्‍य एस. मसूद हुसैन (डब्‍ल्‍यूपी एंड पी), जल संसाधन, नदी विकास और गंगा जीर्णोद्धार मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव, संजय कुंडु, और गृह मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव (सीएस) शामिल थे। 

           बैठक में उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तराखंड के प्रतिनिधियों ने जल संसाधन परिसंपत्तियों और ढांचे के वितरण के बारे में बताया कि उत्‍तर प्रदेश द्वारा 37 नहरें (28 हरिद्वार जिले में और 9 उधम सिंह नगर जिले में) उत्‍तराखंड को सौंपी जा चुकी हैं। उत्‍तराखंड सरकार के नियंत्रण में मुरादाबाद जिले में स्थित 8 नहरें राज्‍य सरकार द्वारा उत्‍तरप्रदेश सरकार को हस्‍तांतरित की जा चुकी हैं। 

       गंगा प्रबंधन बोर्ड के गठन के बारे में बैठक में हुई व्‍यापक सहमति के बाद तत्‍संबधी अधिसूचना का मसौदा दोनों राज्‍यों को पहले ही भेजा जा चुका है। इस बारे में बैठक में व्‍यापक विचार-विमर्श किया गया और दोनों राज्‍यों से कहा गया कि वे अपनी औपचारिक प्रतिक्रियाएं भेजें ताकि बोर्ड का शीघ्र गठन किया जा सके।

अब भारत व हालैंड मिलकर करेंगे मलजल उपचार

         विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री डा. हर्ष वर्घन, नीदरलैंड के विदेश मंत्री बेर्ट कोएंडर्स और दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल अनिल बैजल ने नई दिल्‍ली में बारापूला नाले की सफाई परियोजना की आधारशिला रखी। 

इस अवसर पर जैवप्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर के विजयराघवन, डीडीए के उपाध्‍यक्ष अरूण गोयल और भारत में नीदरलैंड के राजदूत महामहिम अलफोन्‍सस स्‍टोएलिंगा भी उपस्थित थे। बारापूला नाले की सफाई परियोजना, लोटसएचआर (''लोकल ट्रीटमेंट ऑफ अर्बन सीवेज स्‍ट्रीम्‍स फार हेल्‍दी रीयूज'' यानी ''पुन: स्‍वस्‍थ इस्‍तेमाल के लिए मलजल नालों का स्‍थानीय उपचार'') भारत और हालैंड मिलकर संचालित करेंगे।

               इस परियोजना के शुभारंभ के प्रतीक के रूप में एक कलाकृति का अनावरण किया गया, जो लोटस और ट्यूलिप नामक फूलों के आकार में बनायी गई थी, जो भारत और हालैंड की शक्ति को दर्शाते हैं। इस अवसर पर डा. हर्ष वर्धन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नदियों की सफाई पर विशेष ध्‍यान केन्द्रित किया है, वास्‍तव में यह सरकार का प्रमुख मिशन है। उन्‍होंने कहा कि गंगा अभियान का नेतृत्‍व स्‍वयं प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि नदियों को स्‍वच्‍छ बनाने के लिए अनेक प्रौद्योगिकियां उपलब्‍ध हैं, उनका कार्यान्‍वयन तेजी से किया जाना चाहिए। 

              इसके साथ ही नई विकेंद्रित प्रौद्य‍ोगिकियां भी निरंतर विकसित करने की आवश्‍यकता है। कुछ नई प्रौद्य‍ोगिकियां लागत की दृष्टि से अधिक खिफायती या हमारे संदर्भ में बेहतर कार्यान्‍वयन योग्‍य हैं। इसी बात को ध्‍यान में रखकर जैव प्रौद्योगिकी विभाग और नीदरलैंड की एनडब्‍ल्‍यूओ साइंस एजेंसी ने मिलकर बारापूला नाले की सफाई के लिए समझौता किया है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने दिल्‍ली विकास प्राधिकरण के परामर्श से दिल्‍ली में सराय काले खां स्थित बारापूला नाले का चयन किया है, जहां प्रायो‍गिक संयंत्र के रूप में स्‍थल पर प्रयोगों के लिए एक परीक्षण प्रयोगशाला स्‍थापित की जाएगी, जिसकी आधारशिला भी रखी गई।

         इसके लिए डीडीए ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग को सन डायल पार्क के निकट 200 वर्ग मीटर का एक भूखंड 5 वर्ष के लिए लीज पर दिया है। दोनों एजेंसियों ने बारापूला नाले की सफाई के लिए डिमांस्‍ट्रेशन प्‍लांट लगाने का निर्णय किया है। इस परियोजना के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग और नीदरलैंड की एनडब्‍ल्‍यूओ साइंस एजेंसी संयुक्‍त रूप से धन उपलब्‍ध कराएंगी। कई संबद्ध राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍थाएं इस परियोजना में समन्‍वय कर रही हैं।

          इसका उद्देश्‍य गंदे पानी के प्रबंधन की एक नवीन समग्र प्रबंधन विधि का प्रदर्शन करना है, जिसके ज़रिए गंदे पानी का उपचार करके उसे पुन: इस्‍तेमाल योग्‍य (जैसे उद्योग, कृषि, निर्माण आदि कार्यों के लिए) बनाना है।