Thursday, 4 January 2018

जम्‍मू कश्‍मीर में दो द्विदिशी जोजिला सुरंग के निर्माण की स्‍वीकृति

   नई दिल्ली। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में जम्‍मू कश्‍मीर में समानांतर बचाव (निकास) सुरंग के साथ दो लेन की दो द्विदिशी जोजिला सुरंग के निर्माण, परिचालन एवं अनुरक्षण हेतु, जिसमें श्रीनगर-लेह खंड पर राष्‍ट्रीय राजमार्ग-1ए को 95.00 किलोमीटर तथा जम्‍मू कश्‍मीर में 118.00 किलोमीटर पर जोड़ने वाले पहुंच मार्ग शामिल नहीं है, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण के ईपीसी मोड, की स्‍वीकृति दी है।

   इस सुरंग के निर्माण से श्रीनगर-‍करगिल तथा लेह के बीच सभी मौसमों के दौरान संपर्क उपलब्‍ध रहेगा तथा इन क्षेत्रों में समग्र आर्थिक और सामाजिक-सांस्‍कृतिक एकीकरण की भी सुविधा रहेगी। इस परियोजना का कूटनीतिक तथा सामाजिक-आर्थिक महत्‍व है और यह जम्‍मू कश्‍मीर में आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों के विकास का एक माध्‍यम होगी। परियोजना विवरण : परियोजना के निर्माण की अवधि 7 वर्ष है जो निर्माण के शुरूआत की तारीख से ही आंकी जाएगी। परियोजना के निर्माण की लागत 4899.42 करोड़ रुपये है।
     परियोजना की कुल पूंजीगत लागत 6808.69 करोड़ रुपये है, जिसमें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनरूद्धार एवं अन्‍य निर्माण-पूर्व कार्यकलाप तथा 4 वर्ष तक सुरंग के अनुरक्षण तथा परिचालन की लागत शामिल है। परियोजना का उद्देश्‍य जम्‍मू और कश्‍मीर राज्‍य में बालताल तथा मीनामार्ग के बीच पहुंचमार्गों को छोड़कर 14.200 किलोमीटर लम्‍बी समानांतर निकास सुरंग के साथ एकल ट्यूब वाली दो लेन की द्विदिशी 14.150 किलोमीटर लम्‍बी सुरंग का निर्माण करना है। 
    इस सुरंग के पहुंच मार्गों का निर्माण अलग से शुरू किया जा रहा है। परियोजना का कार्यान्‍वयन राष्‍ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के माध्‍यम से सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएंडएच) द्वारा किया जाएगा। 
   प्रभाव : परियोजना का मुख्‍य उद्देश्‍य जम्‍मू तथा कश्‍मीर में सामरिक दृष्टि से महत्‍वपूर्ण लेह क्षेत्र को पूरे साल संपर्क प्रदान करना है, जो कि इस समय रास्‍तों पर बर्फ तथा हिमस्‍खलन के डर के कारण अधिक से अधिक 6 महीने तक ही सीमित है। 
     इस परियोजना से अन्‍य चालू परियोजनाओं यथा गगनगिर में 6.5 किलोमीटर लंबी जेड-एमओआरएच सुरंग के साथ-साथ कश्‍मीर और लद्दाख के दो क्षेत्रों के बीच सुरक्षित, तीव्र तथा किफायती संपर्क सुनिश्चित होगा। इससे परियोजना कार्य-कलापों में स्‍थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार की संभावना में और अधिक वृद्ध‍ि होगी। 
    परियोजना पूर्ण होने पर रोजगार में भारी इजाफा होगा, क्‍योंकि स्‍थानीय व्‍यापार राष्‍ट्रीय बाजार से जुड़ जाएंगे और इस सुंदर क्षेत्र में पूरे साल पर्यटक यातायात उपलब्‍ध रहेगा। इन क्षेत्रों में बहु-स्‍तरीय रोजगार सृजित होगा।

बचत बॉन्ड 2018 लांच करने की घोषणा

   नई दिल्ली। भारत सरकार ने 10 जनवरी, 2018 से शुरू होने वाले 7.75 प्रतिशत बचत (कर योग्य) बॉन्ड, 2018 लांच करने की घोषणा की ताकि देश के नागरिक/ एचयूएफ कर योग्य बॉन्ड में निवेश कर सकें। 

  निवेश की जाने वाली धनराशि की कोई सीमा नहीं है। बॉन्ड की मुख्य विशेषताएं : कौन निवेश कर सकता है – बॉन्ड में कोई भी व्यक्ति (संयुक्त स्वामित्व सहित) और हिंदू अविभाजित परिवार निवेश कर सकते हैं। एनआरआई इन बॉन्डों में निवेश नहीं कर सकते। 
   सदस्यता – बॉन्ड लेजर एकाउंट के प्रारूप में आवेदन, एजेंसी बैंकों तथा एसएचसीआईएल की नामित शाखाओं में जमा किए जा सकते हैं। मूल्य – बॉन्ड 100 रुपये के सम मूल्य पर जारी किए जायेंगे। बॉन्ड में न्यूनतम राशि 1000 रुपये या इसके गुणज में निवेश किया जा सकता है। बॉन्ड डीमैट प्रारूप में जारी किए जायेंगे।
    अवधि – बॉन्ड अगली अधिसूचना तक टैप पर होंगे और संचयी तथा गैर-संचयी रूपों में जारी किए जायेंगे। निवेश की सीमा – इन बॉन्डों में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होगी। कर – बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज आयकर अधिनियम 1961 के अतंर्गत कर योग्य होगा। संपत्ति कर अधिनियम 1957 के अंतर्गत बॉन्ड को संपत्ति कर से छूट दी गई है।
     परिपक्वता और ब्याज की दर – बॉन्डों की परिपक्वता अवधि 7 वर्ष होगी और इस पर 7.75 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलेगा। ब्याज छमाही देय होगा। 1000 रुपये के बॉन्ड की कीमत 7 वर्षों के पश्चात 1703 रुपये होगी। 
   हस्तांतरण – बॉन्ड हस्तांतरणीय नहीं है। बॉन्ड द्वितियक बाजार में व्यापार योग्य नहीं होगा। बैंक, वित्तीय संस्थान, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी में ऋण के लिए बॉन्ड का उपयोग समर्थक ऋण संपत्ति के रूप में नहीं किया जा सकेगा। नामांकन – एकमात्र धारक या बॉन्ड का एकमात्र जीवित धारक नामांकन कर सकता है।

भारतीय रेल के लिए टेक्‍नोलॉजी मिशन पर सहमति

    नई दिल्ली। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के लिए प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप एक अनूठे प्रयास के तहत भारतीय रेल के टेक्‍नोलॉजी मिशन (टीएमआईआर) को आगे बढ़ाने के लिए केन्‍द्र सरकार के तीन मंत्रालय एक साथ आये है।

  04 जनवरी को नई दिल्‍ली के रेल भवन में रेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग (विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय) ने टीएमआईआर को संयुक्‍त रूप से धनपोषण करने के लिए एक सहमति ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किये।
    सहमति ज्ञापन पर रेल मंत्रालय की ओर से टीएमआईआर के अध्‍यक्ष प्रो.एन.एस. व्‍यास, टीएमआईआर के सह-अध्‍यक्ष आलोक कुमार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से अपर सचिव (टी.ई) आर.सुब्रमण्‍यम तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से विज्ञान और टेक्‍नोलॉजी विभाग के सलाहकार डॉ. नीरज शर्मा ने हस्‍ताक्षर किये।
      इस अवसर पर रेल बोर्ड के अध्‍यक्ष अश्विनी लोहानी ने कहा कि यह सहमति ज्ञापन भारतीय रेल के टेक्‍नोलॉजी मिशन में विभिन्‍न पक्षों के बीच सहयोग के लिए किया जा रहा है। इस सहमति ज्ञापन से अप्‍लाइट अनुसंधान के लिए चिन्ह्ति रेल परियोजनाओं के साझे निवेश का मार्ग प्रशस्‍त होगा। 
    इस परियोजना में रेल मंत्रालय 30 प्रतिशत, मानव संसाधन विकास मंत्रालय 25 प्रतिशत तथा विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग 25 प्रतिशत निवेश करेगा। यह टेक्‍नोलॉजी मिशन माननीय प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को गति प्रदान करेगा। इससे सफलतापूर्वक स्‍वदेशी टेक्‍नोलॉजी विकसित की जा सकेगी।
      भारतीय रेल को जहां विश्‍वस्‍तरीय टेक्‍नोलॉजी मिलेगी, वहीं अकादमिक और अनुसंधान संस्‍थान अनेक अप्‍लाइड अनुसंधान परियोजना में शामिल होंगे और इससे उन्‍हें राष्‍ट्रीय उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए अनुसंधान में मदद मिलेगी।
   श्री लोहानी ने कहा कि मैं ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे के साथ इस टेक्‍नोलॉजी मिशन की सफलता की कामना करता हूं और आशा करता हूं कि मिशन के अंतर्गत किये गये नवीन अप्‍लाइड अनुसंधान से भारतीय रेल को अपने यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक, बाधा मुक्‍त और प्रदान करने में मदद मिलेगी। 
    इस अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव के.के.शर्मा और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ.आशुतोष शर्मा ने भी विचार व्‍यक्‍त किये। रेल मंत्रालय ने अप्‍लाइड अनुसंधान के लिए चिन्ह्ति रेल परियोजनाओं के साझे निवेश के लिए रेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के कंसोर्टियम के रूप में भारतीय रेल के लिए टेक्‍नोलॉजी मिशन (टीएमआईआर) बनाया था। 
   इस सहमति ज्ञापन के अनुसार मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय दोनों टीएमआईआर परियोजना में 75-75 करोड़ रुपये निवेश करेंगे, जबकि भारतीय रेल और उद्योग अपना-अपना हिस्‍सा देंगे। 
    टेक्‍नोलॉजी मिशन से भारी ढुलाई, सुरक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण तथा शहरी, रेलवे के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास परियोजनाएं चलाएगा। परियोजनाएं मिशन क्रियान्‍वयन तथा समन्‍वय समिति के माध्‍यम से लागू की जाएगी। इस समिति में तीनों मंत्रालयों शिक्षा तथा उद्योग जगत के सदस्‍य रहेंगे। परियोजनाएं राष्‍ट्रीय अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं और अकादमिक संस्‍थानों में लागू की जाएंगी, जहां आवश्यक होगा, वहां इसी तरह के विदेशी संस्‍थानों के साथ सहयोग किया जाएगा। 
    रेलवे, आरडीएसओ, मानव संसाधन और विकास मंत्रालय तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधियों वाली मिशन क्रियान्‍वयन तथा समन्‍वय समिति, (एमआईसीसी) के अध्‍यक्ष मिशन अध्‍यक्ष के रूप में आईआईटी कानपुर के प्रो. एन.एस. व्‍यास होंगे।
      मिशन के सह-अध्‍यक्ष मुख्‍य प्रशासनिक अधिकारी निर्माण/एनआर आलोक कुमार होंगे। मिशन मोड में प्रौद्योगिकी विकास के लिए कंसोर्टियम से भारतीय रेल को उचित दर पर विश्‍वस्‍तरीय स्‍वदेशी प्रौद्योगिकी प्राप्‍त होगी और शैक्षिक अनुसंधान संस्‍थानों को अप्‍लाइड अनुसंधान से लाभ होगा। भारतीय उद्योग भारतीय रेल के उपयोग में लाई जाने वाली नई सामग्रियों का उत्‍पादन करेगे।

भारत और ब्रिटेन के ‘ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन’ के बीच सहमति

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और ग्रेटर लंदन अथॉरिटी एक्‍ट, 1999 (ब्रिटेन) के तहत स्‍थापित वैधानिक निकाय ‘ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन’ के बीच सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किये जाने एवं इस पर अमल को मंजूरी दे दी है।

  इस एमओयू से देश में समग्र रूप से सार्वजनिक परिवहन प्रणाली एवं यात्री सेवाओं को बेहतर करने और भारत में ज्‍यादा क्षमता वाली बसों के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
  इससे भारत एवं ब्रिटेन के बीच आपसी रिश्‍तों को मजबूत करने और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने में काफी हद तक मदद मिलेगी।
  उपर्युक्‍त एमओयू से सभी के लिए एकीकृत सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने में भी सहूलियत होगी। इससे समाज के कमजोर तबकों के लोगों की पहुंच उच्‍च गुणवत्‍ता वाली सार्वजनिक परिवहन प्रणाली तक सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

अब बिलासपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान की स्‍थापना

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) में नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान की स्‍थापना को मंजूरी दी है। 

   संस्‍थान की स्‍थापना प्रधानमंत्री स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा योजना के तहत की जाएगी। परियोजना की लागत 1351 करोड़ रुपये है। मुख्‍य विशेषताएं : नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान का निर्माण 48 महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
    इसका पूर्व निर्माण-चरण 12 महीनों का, निर्माण-चरण 30 महीने का और शुरू होने का चरण 6 महीने का रखा गया है। संस्‍थान में 750 बिस्‍तरों की क्षमता वाला एक अस्‍पताल बनाया जाएगा। इसके अलावा ट्रॉमा सेंटर सुविधाएं भी उपलब्‍ध होंगी। 
    संस्‍थान के तहत एक मेडिकल कॉलेज भी होगा, जिसमें प्रति वर्ष 100 एमबीबीएस छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। संस्‍थान में नर्सिंग कॉलेज भी होगा, जिसमें प्रति वर्ष बीएससी (नर्सिंग) पाठ्यक्रम में 60 लोगों को प्रवेश दिया जाएगा। 
   नई दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान के अनुरूप आवासीय परिसर तथा संबंधित सुविधाओं/सेवाओं को उपलब्‍ध कराया जाएगा। अस्‍पताल में 20 स्‍पेशलि‍टी/सुपर स्‍पेशलि‍टी विभाग होंगे, जिनमें 15 ऑपरेशन थियेटर भी शामिल हैं। पारम्‍परिक औषधि प्रणाली के तहत उपचार सुविधाएं प्रदान करने के लिए 30 बिस्‍तरों वाला एक आयुष विभाग भी निर्मित किया जाएगा।
     प्रभाव : नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान की स्‍थापना से दोहरे उद्देश्‍य को पूरा किया जाएगा, जिसमें आबादी को सुपर स्‍पेशलिटी स्‍वास्‍थ्‍य सेवा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा क्षेत्र में चिकित्‍सकों और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य सेवियों का समूह सृजित किया जाएगा, जो राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के तहत प्राथमिक तथा द्वितीयक स्‍तर के संस्‍थानों/सुविधाओं के लिए सेवाएं देंगे।
     पृष्‍ठभूमि : इस योजना के तहत भुवनेश्‍वर, भोपाल, रायपुर, जोधपुर, ऋषिकेश और पटना में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थानों की स्‍थापना की जा चुकी है तथा रायबरेली में संस्‍थान का निर्माण प्रगति पर है। इसके अलावा 2015 में नागपुर (महाराष्‍ट्र), कल्‍याणी (पश्चिम बंगाल) तथा गुंटूर (आंध्र प्रदेश) के मंगलागिरि में तीन संस्‍थानों को और 2016 में भठिंडा तथा गोरखपुर में एक-एक संस्‍थानों को मंजूरी दी गई है। कामरूप (असम) में भी एक संस्‍थान को स्‍वीकृति दी गई है।

गंगा मिशन ने 295 करोड़ रुपए की नमामि गंगे परियोजनाओं को दी मंजूरी

    नई दिल्ली। राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन ने नमामि गंगे परियोजना से संबंधित 295.01 करोड़ रुपए लागत की पाँच परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।

    इनमें से 278.6 करोड़ रुपए लागत की तीन परियोजनाएं पश्‍चिम बंगाल में जल-मल प्रबंधन से संबंधित हैं। 4.68 करोड़ रुपए की एक परियोजना उत्‍तराखंड में जल-मल प्रबंधन से संबंधित है और 11.73 करोड़ रुपए लागत की एक अन्‍य परियोजना वाराणसी में घाटों के सुधार से संबंधित है।
     इसके साथ ही गंगा नदी के किनारे स्‍थित उच्‍च प्रदूषण वाले सभी शहरों के लिए जल-मल प्रबंधन की सभी परियोजनओं को स्‍वीकृत किया जा चुका है।
     पश्‍चिम बंगाल के लिए जिन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है उसमें हाईब्रिड एनयूटी प्रणाली पर आधारित 172.10 करोड़ रुपए लागत की कामरहाटी और बाड़ानगर नगरपालिकाओं में 60 एमएलडी क्षमता वाला जल-मल शोधन संयंत्र लगाना और सीवर लाइनों की सफाई शामिल है। 52.20 करोड़ रुपए की लागत से बेरहामपुर नगरपालिका में गंगा नदी पर 3.5 एमएलडी लागत का जल-मल संयंत्र लगाया जाएगा। साथ ही सीवर नेटवर्क भी सुधारा जाएगा।
     नवद्वीप नगरपालिका में 54.30 करोड़ रुपए की लागत से 9.5 एमएलडी का एक जल-मल शोधन संयंत्र लगाया जाएगा और 10.5 एमएलडी वाले एक जल-मल शोधन संयंत्र का पुनर्रुद्धार किया जाएगा। उत्‍तराखंड में 4.68 करोड़ रुपए की लागत से हरिद्वार के कुछ इलाकों में सीवर लाइनें बिछाने की योजना है।
    वाराणसी में 11.73 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्‍न घाटों की मरम्‍मत और इनका सौंदर्यीकरण किया जाएगा जिसमें घाटों में मजबूत पत्‍थर लगाकर वहाँ की सीढ़ियों को सुधारा जाएगा ताकि यात्रियों को उस पर चलते समय किसी प्रकार की असुविधा और खतरा न हो।