Wednesday, 4 October 2017

समाज इसरो की सभी गतिविधियों का केंद्र

    श्रीहरिकोटा। उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का टीम वर्क और कार्य परिणाम अन्‍य विभागों और संस्‍थाओं के लिए आदर्श है।

    उपराष्‍ट्रपति आज आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में विश्‍व अंतरिक्ष सप्‍ताह कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्‍यपाल ई.एस.एल.नरसिह्म तथा इसरो के अध्‍यक्ष कृष्‍णकुमार तथा अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति उपस्थित थे। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की शक्ति को देखकर गर्व होता है क्‍योंकि अंतरिक्ष खोज के क्षेत्र में हमने नई उपलब्धियां हासिल की हैं। यह दोहरी प्रसन्‍नता की बात है कि रॉकेट प्रक्षेपनों का अंतरराष्‍ट्रीय ख्‍याति का स्‍थल उनके पैतृक जिला नेल्‍लोर में है। 
     उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि यूरोपीय लोगों से हजारों वर्ष पहले भारत के लोगों का शून्‍य का ज्ञान था। उन्‍होंने कहा कि थुम्‍बा इक्‍वेटोरियल, रॉकेट लांच स्‍टेशन (टीआरएलएस) द्वारा 1963 में रॉकेट लांच करने और 1975 में प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट लांच किए जाने के बाद से भारत ने लम्‍बी छलांग लगाई है। भारत आज प्रोफेसर विक्रम साराभाई, प्रोफेसर सतीश धवन और पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ. एपीजे अब्‍दुल कलाम जैसे दूरदर्शी लोगों के नेतृत्‍व में अंतरिक्ष के क्षेत्र में अग्रणी देश बन गया है। 
    उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि एक ही प्रयास में 104 उपग्रहों को कक्षा में स्‍थापित करने और 3,136 किलो ग्राम का सबसे भारी भारतीय उपग्रह जीसेट-19 को इस वर्ष कक्षा में स्‍थापित करने के साथ भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने न केवल भारत को गौरवान्वित किया है, बल्कि विश्‍व को भारत के उपलब्धियों के प्रति विश्‍व को आकर्षित भी किया है। 
     यह केवल प्रौद्योगिकी प्रगति का प्रश्‍न नहीं है, बल्कि कम लागत में सफलतापूर्वक एक के बाद एक उपग्रह भेजना प्रत्‍येक भारतीय के लिए गौरव की बात है। 
     उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि उपग्रह लांच करने का यह केंद्र विश्‍व का व्‍यस्‍ततम केंद्र है और वसुधैव कुटुम्‍बकम की भावना के साथ विश्‍व की आवश्‍यकताओं को पूरा करता है।
     उन्‍होंने कहा कि इसरो की सभी गतिविधियों का केंद्र समाज है। इसरो विश्‍व का सर्वाधिक ख्‍याति प्राप्‍त और अग्रणी अंतरिक्ष एजेंसी है और युवा वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उपराष्‍ट्रपति एसएचएआर में वेकिल असम्‍बली यूनिट भी देखने गए। 

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध, दाल और जूट उत्‍पादक

    आंध्र प्रदेश। उपराष्‍ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि कोई भी भूखा न रहे और सभी के लिए पर्याप्‍त पोषण के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए खाद्यान्‍न का उत्‍पादन बढ़ाकर और उसके उचित वितरण से देश आगे बढ़ सकता है।

    उपराष्‍ट्रपति आज आंध्र प्रदेश के नेल्‍लौर जिले में आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्‍वविद्यालय (एएनजीआरएयू) में 49वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्‍यपाल और एएनजीआरएयू के चांसलर ई.एस.एल. नरसिम्‍हन, आंध्र प्रदेश के कृषि मंत्री सोमीरेड्डी चन्‍द्र मोहन रेड्डी और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति मौजूद थे। 
    उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध, दाल और जूट उत्‍पादक है। चावल, गेंहू, गन्‍ना, मूंगफली, सब्जियों, फलों और कपास उत्‍पादन में उसका दूसरा स्‍थान है। 
      उन्‍होंने कहा कि हमारे देश की बढ़ती हुई जनसंख्‍या की बढ़ती हुई जरूरतों को देखते हुए जरूरी है कि हम अपने घर में ही तैयार खाद्य सुरक्षा रणनीति तैयार करें। उपराष्‍ट्रपति ने सुझाव दिया कि सबसे पहले हमें 4-1 यानी सिचाई, निवेश ऋण और बीमा को मिलाकर बने पारिस्थितिकी तंत्र (ई2ई) को शुरू से अंत तक प्रदान करना होगा। दूसरा प्रयोगशाला से जमीन (एल2एल) तक प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण है। 
     उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि ग्रामीण सड़कों में बुनियादी सुधार, निर्भरता योग्‍य गुणवत्‍तापूर्ण बिजली, गोदाम, शीत गृह की सुविधा, रेफ्रीजरेटिड वैन और बाजार यार्ड में सुधार कृषि क्षेत्र की कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए आवश्‍यक पूर्व शर्त है। 
       उन्‍होंने कहा कि उचित ब्‍याज दरों पर समय पर ऋण की सुविधा और किसानों के अनुकूल बीमा पॉलिसियां एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कृषि का महत्‍वपूर्ण अंग है। इस अवसर पर उपराष्‍ट्रपति ने डिग्री लेने वाले सभी छात्रों, स्‍वर्ण पदक विजेताओं और पुरस्‍कार विजेताओं को बधाई दी।

पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में जल संसाधन के उचित प्रबंध के लिए उच्‍च स्‍तरीय समिति का गठन

     नई दिल्ली। सरकार ने नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष की अध्‍यक्षता में पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में जलसंसाधनों के उचित प्रबंध के लिए एक उच्‍च स्‍तरीय समिति का गठन किया है। अगस्‍त महीने में पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री की गुवाहाटी यात्रा के बाद यह कदम उठाया गया है। 

  समिति पनबिजली, कृषि, जैवविविधता संरक्षण, अपक्षरण, अंतरदेशीय जल परिवहन, वानिकी मछलीपालन और पारिस्थितिकी पर्यटन के रूप में उचित जल प्रबंधन के लाभों को बढ़ाने में सहायता देगी। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय समन्‍वय कार्य करेगा। यह समिति कार्य योजना सहित अपनी रिपोर्ट जून 2018 तक देगी।
    असम, मणिपुर, नगालैंड तथा अरुणाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्रियों के साथ बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के बाद प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में जल संसाधनों के समग्र प्रबंधनों के लिए उच्‍च स्‍तरीय समिति बनाने की घोषणा की थी।
   बैठक में कहा गया था कि जल संसाधनों का अधिकतम प्रबंधन बहुपक्षीय कार्य है और इसके लिए बहुक्षेत्रीय सक्रियता तथा ठोस रणनीति की आवश्‍यकता होगी। इसमें उपरी भाग में जलग्रहण क्षेत्रों का प्रबंधन शामिल है। ब्रह्मपुत्र और बराक नदी बाढ़ से प्रभावित होती है। 
     ब्रह्मपुत्र विश्‍व की सबसे बड़ी नदी प्रणाली है और अक्‍सर बाढ़ आने और कटाव होने से इस क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। समिति के विचार संबंधी विषय निम्‍नलिखित हैं। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए वर्तमान व्‍यवस्‍था संस्‍थागत प्रबंधों का मूल्‍यांकन। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के जल संसाधनों के अधिकतम प्रबंधन के लिए वर्तमान व्‍यवस्‍था संस्‍थागत प्रबंधों में अंतरों की पहचान।
        पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में विकास कार्यों में तेजी के लिए जल संसाधनों के अधिकतम दोहन के उद्देश्‍य से नीतिगत सुझाव। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में जल संसाधनों के अधिकतम प्रबंधनों के लिए कार्य करने योग्‍य उपायों की व्‍याख्‍या। संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों, उनसे सबंद्ध कार्यालयों, स्‍वशासी संस्‍थाओं की योजनाओं कार्यक्रमों को नया रूप देने के लिए कार्ययोजना तैयार करना और पूर्वोत्‍तर राज्‍यों की योजनाओं को नया रूप देना।
     इस समिति में पूर्वोत्‍तर क्ष्‍ोत्र विकास मंत्रालय, सीमा प्रबंधन विभाग, अंतरिक्ष विभाग, विद्युत, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालयों के सचिव राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव तथा पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के 8 राज्‍यों के मुख्‍य सचिवों को शामिल किया गया है। 
     यह समिति अन्‍य मंत्रालयों, विभागों के सचिवों तथा इस क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्‍त लोगों को विशेष आमंत्रित के रूप में बुला सकती है।

इलाहाबाद में जैवविविधता पार्क, कछुआ शरणस्‍थली स्‍थापित की जाएगी

    नई दिल्ली। गंगा नदी में समृद्ध जलीय जैव विविधता पर मानवजनित दबाव से रक्षा के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत इलाहाबाद में कछुआ शरणस्‍थली विकसित करने और संगम पर नदी जैवविविधता पार्क विकसित करने को मंजूरी दी गई है।

  1.34 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की इस परियोजना में गंगा-यमुना और सरस्‍वती के संगम पर नदी जैव विविधता पार्क विकसित किया जाएगा। कछुआ पालन केंद्र (त्रिवेणी पुष्‍प पर स्‍थायी नर्सरी तथा अस्‍थायी वार्षिक पालन) स्‍थापित किया जाएगा। 
  गंगा नदी के महत्‍व और इसके संरक्षण की आवश्‍यकता के प्रति जागरुकता लाने की भी स्‍वीकृति दी गई है। यह परियोजना एक आवश्‍यक मंच प्रदान करेगी ताकि आगंतुक अपनी पारिस्थितिकीय प्रणाली, अपनी भूमिका और जिम्‍मेदारियों को जान सकें और पर्यावरण के साथ सह-अस्तित्‍व की जटिलता को समझ सकें। 
     इस परियोजना से लोग महत्‍वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले मानवीय गतिविधियों के प्रभावों के प्रति जागरुक हो सकेंगे। परियोजना में गंगा नदी के बारे में ज्ञान में आ रही कमी को रोकने के कार्य को उत्‍साह से किया जाएगा। यह परियोजना 100 प्रतिशत केंद्र पोषित परियोजना है। 
      गंगा नदी में घडि़याल, डॉलफिन तथा कछुए सहित 2000 जलीय प्रजातियां हैं जो देश की आबादी की 40 प्रतिशत की जीवन रेखा की समृद्ध जैव विविधता को दिखाती हैं।
    इलाहाबाद में गंगा और यमुना में विलुप्‍त हो रही कछुओं की प्रजातियां (बतागुर कछुगा, बतागुर धोनगोका, निल्‍सोनिया गैंगेटिका, चित्रा इंडिका, हरदेला टूरजी आदि) हैं। गंगा और यमुना में राष्‍ट्रीय जलीय प्रजाति – गांगेय डॉलफिन, घडि़याल हैं तथा असंख्‍य प्रवासी और आवासीय प‍क्षियों ने भी बसेरा बना रखा है।

भारत व स्विट्जरलैंड के बीच रेल क्षेत्र में तकनीकी सहायता समझौता

   नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रेल क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए भारत गणराज्‍य के रेल मंत्रालय और स्विस कंफेडरेशन के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ द इनवायरमेंट, ट्रांसपोर्ट, एनर्जी एण्‍ड कम्‍यूनिकेशन्‍स के बीच समझौता के बारे में अवगत कराया गया।

  इस एमओयू पर 31 अगस्‍त, 2017 को हस्‍ताक्षर किए गए थे। इस समझौता ज्ञापन से निम्‍नलिखित क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग प्राप्‍त होगा। कर्षण चल स्‍टॉक, ईएमयू तथा ट्रेन सेट्स, कर्षण प्रोपल्‍शन उपकरण, फ्रेट और पैसेंजर कार, टिल्टिंग ट्रेन, रेल विद्युतीकरण उपकरण, रेलगाड़ी शिड्यूलिंग और परिचालन में सुधार, रेलवे स्‍टेशन आधुनिकरण, मल्‍टीमॉडल ट्रांसपोर्ट, सुरंग बनाने संबंधी प्रौद्योगिकी। 
   रेल मंत्रालय ने विभिन्‍न विदेशी सरकारों और राष्‍ट्रीय रेलों के साथ रेल क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए समझौता पर हस्‍ताक्षर किए हैं। सहयोग के चिन्हित क्षेत्रों में अन्‍य बातों के साथ-साथ हाई स्‍पीड कॉरिडोर, मौजूदा मार्गों की गति बढ़ाना, विश्‍वस्‍तरीय स्‍टेशनों को विकसित करना, भारी कर्षण का परिचालन और रेल अवसंरचना का आधुनिकीकरण आदि शामिल है।
      यह सहयोग रेलवे के प्रौद्योगिकी और परिचालन क्षेत्र में विकासात्‍मक कार्यों की सूचा का आदान-प्रदान करके, आपस में जानकारी साझा करके, तकनीकी दौरा करके, प्रशिक्षण और आपसी हितों के क्षेत्रों में सेमिनारों और वर्कशॉपों का आयोजन करके प्राप्‍त किया जाता है।
      ये समझौता भारतीय रेलवे को रेल क्षेत्र में हुए नवीनतम विकासात्‍मक कार्यों और आपस में जानकारी बांटने का प्‍लेटफॉर्म उपलब्‍ध कराते है। इन समझौता से तकनीकी विशेषज्ञों, रिपोर्टों और तकनीकी प्रलेखों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और सेमिनारों वर्कशॉपों, जिनमें विशिष्‍ट प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर ध्‍यान केन्द्रित किया जाता है और आपस में अन्‍य जानकारी बांटने के लिए सम्‍पर्क मुहैया होता है।