Friday, 23 June 2017

116 शहरों में जीवन गुणवत्‍ता का मूल्‍यांकन, 16 शहरों को 500 करोड़ की प्रोत्‍साहन राशि

         शहरी विकास मंत्रालय ने एक और बड़ी पहल करते हुए 116 बड़े शहरों में जीवन गुणवत्‍ता को मापने के लिए ‘शहरी जीवन क्षमता सूचकांक’ का शुभारंभ किया। 

    इनमें स्‍मार्ट सिटी, राजधानियां और 10 लाख से ज्‍यादा की आबादी वाले शहर सम्मिलित हैं। शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने शहरी रूपांतरण पर आधारित राष्‍ट्रीय कार्यशाला में सूचकांक जीवन गुणवत्‍ता का शुभारंभ किया। यह सूचकांक इन शहरों के लिए उनकी स्थिति को जानने और उसे बेहतर करने के लिए आवश्‍यक हस्‍तक्षेप की सामान्‍य न्‍यूनतम संदर्भ रूपरेखा है। 
          शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने पिछले तीन वर्षों के दौरान नवीन शहरी मिशन के अंतर्गत सोच समझकर शुरू किये गए आधारभूत अवसंरचना विकास के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए शहरों की ओर इंगित करते हुए कहा, अब समय आ गया है कि शहरों की जीवन गुणवत्‍ता का आकलन करके उसके अनुरूप उनको सूचीबद्ध किया जाए।
         देश में इस तरह के पहले सूचकांक को लागू करके शहरों के आधारभूत ढांचे को 79 व्‍यापक मानदंडों पर मूल्‍यांकित किया जाएगा। इन मानदंडों में सड़कों की उपलब्‍धता, शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख, गति‍शीलता, रोजगार के अवसर, आपातकालीन अनुक्रिया, शिकायत निवारण, प्रदूषण, खुले और हरे-भरे वातावरण की उपलब्‍धता, सांस्‍कृतिक और मनोरंजन के अवसरों इत्‍यादि शामिल हैं। 
          अगले महीने इस कार्य को करने वाली एजेंसी का चुनाव करने के बाद लगभग अगले 6 महीने में आंकडे संकलित करने का काम पूरा कर लिया जाएगा। शहरी विकास मंत्रालय ने वर्ष 2016-17 के दौरान शहरी सुधारों के कार्यांवयन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 16 राज्‍यों को 500 करोड़ रूपये की प्रोत्‍साहन राशि वितरित की। 
        इसका निर्धारण ई-गवर्नेंस, लेखा परीक्षण, कर राजस्‍व संचयन और कर संशोधन नीति, ऊर्जा और जल लेखा परीक्षा, संसाधन गतिशीलता के लिए राज्‍य स्‍तरीय वित्‍तीय मध्‍यस्‍थ स्‍थापित करना, ऋण मूल्‍यांकन जैसे सुधारों की प्रगति के आधार पर किया गया। आध्रप्रदेश इस सूची में 96.06 प्रतिशत अंको लेकर शीर्ष पर रहा। 
          योग्‍यता सूची के क्रम के आधार पर जिन अन्‍य राज्‍यों को प्रोत्‍साहन राशि प्राप्‍त हुई उनमें ओडिशा (95.38 प्रतिशत), झारखंड (91.98 प्रतिशत), छत्‍तीसगढ़ (91.37 प्रतिशत), मध्‍य प्रदेश (90.20 प्रतिशत), तेलंगाना (86.92 प्रतिशत), राजस्‍थान (84.62 प्रतिशत), पंजाब (77.02 प्रतिशत), केरल (75.73 प्रतिशत), गोवा (75.38), मिजोरम (75.00 प्रतिशत), गुजरात (73.80 प्रतिशत), चंडीगढ़ (72.73 प्रतिशत), उत्‍तर प्रदेश (70.67 प्रतिशत) और महाराष्‍ट्र (70.52 प्रतिशत) शामिल हैं। 
            इन राज्‍यों द्वारा प्राप्‍त किये गए अंकों के आधार पर प्रोत्‍साहन राशि प्रदान की गई। अधिक अंक हासिल करने वाले राज्‍यों को अंकों के अनुरूप अधिक प्रोत्‍साहन राशि दी गई। 
           शहरी विकास मंत्रालय के सचिव राजीव गाबा ने कहा कि भावी पी‍ढ़ी के सुधारों के लिए वर्तमान में आवंटित 900 करोड़ रूपये की सुधार प्रोत्‍साहन राशि को अगले 3 वित्‍तीय वर्षों में बढ़ाकर 1000 करोड़ रूपये किया जाएगा। इससे शहरी निकायों के प्रशासन और सेवाओं के वितरण और संसाधनों की गतिशीलता संतोषजनक अंतर आएगा।

देश के दो लाख से ज्‍यादा गांव खुले में शौच मुक्‍त घोषित

       स्‍वच्‍छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत उत्‍तराखंड और हरियाणा ने खुद को देश का चौथा और पांचवां खुले में शौच मुक्‍त राज्‍य घोषित किया है। 

     ये दोनों राज्‍य सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और केरल की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जो पहले ही खुले में शौच मुक्‍त राज्‍य घोषित हो चुके हैं। स्‍वच्‍छ भारत मिशन ग्रामीण शुरू होने के ढ़ाई महीने के भीतर ही राष्‍ट्रीय स्‍तर पर स्‍वच्‍छता का दायरा 42 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है। 
         उत्‍तराखंड में 13 जिले, 95 ब्‍लॉक, 7256 ग्राम पंचायतें और 15751 गांव हैं, जबकि हरियाणा में 21 जिले, 124 ब्‍लॉक और 6083 ग्राम पंचायतें हैं। इन सभी ने क्रमश: देहरादून और चंडीगढ़ में खुद को खुले में शौच मुक्‍त घोषित किया। 
       इस अवसर पर पेयजल और स्‍वच्‍छता मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने देहरादून में कहा कि 2 अक्‍टूबर, 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्‍वच्‍छ भारत मिशन की शुरूआत की थी। आज यह वास्‍तव में जन आंदोलन बन चुका है। इस मील के पत्‍थर तक पहुंचने में उत्‍तराखंड और हरियाणा की जनता, सरकारी अधिकारियों और अन्‍य संस्‍थानों के प्रतिनिधियों ने योगदान दिया।
            इस उपलब्धि को हासिल करने के बारे में टिप्‍पणी करते हुए उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री त्रिवेन्‍द्र सिंह रावत ने कहा कि सहयोगपूर्ण सामुदायिक भागीदारी के कारण उत्‍तराखंड खुले में शौच मुक्‍त राज्‍य का दर्जा हासिल कर सका। प्रधानमंत्री के स्‍वच्‍छ भारत के आह्वान के परिणामस्‍वरूप यह विशेष उपलब्धि हासिल हुई। 
         उन्‍होंने उत्‍तराखंड को खुले में शौच मुक्‍त बनाने के लिए ग्राम प्रधानों की भूमिका की सराहना की। खुले में शौच मुक्‍त घोषित राज्‍य को बधाई देते हुए पेयजल और स्‍वच्‍छता मंत्रालय के सचिव परमेश्‍वरन अय्यर ने कहा कि देशभर में खुले में शौच मुक्‍त की दिशा में जबरर्दस्‍त प्रगति के बाद स्‍वच्‍छ भारत ग्रामीण के लिए अगला कदम इस स्थिति को लम्‍बे समय तक बनाए रखने के साथ ही ग्रामीण भारत में ठोस और कचरा प्रबंधन की नियमित व्‍यवस्‍था करना होगी। पांच राज्‍यों के खुले में शौच मुक्‍त होने के साथ ही देशभर में दो लाख से ज्‍यादा गांवों और 147 जिलों को खुले में शौच मुक्‍त घोषित किया जा चुका है। 

सर्वे ऑफ इंडिया : भारत विश्‍व का सबसे बेहतर सर्वे किये जाने वाला देश

         संचार मंत्री मनोज सिन्‍हा ने कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया दुर्गम हिमालय, गर्म रेगिस्‍तान और जानवरों से परिपूर्ण जंगलों के सर्वे करने की चुनौतियों का सामना करने में सफल रहा है। 

   यह विभाग नई प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहा है और अब यह डिजिटल मैपिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के क्षेत्र में भी सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है। सिन्‍हा सर्वे ऑफ इंडिया की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर दो स्‍मारक डाक टिकटों तथा एक लघु चित्र जारी करते हुए अपने संबोधन में यह जानकारी दी।
          सिन्‍हा ने कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया को इसके सदस्‍य सहृदयता से ‘विभाग’ बुलाते है। उन्‍होंने यह भी कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया मजबूत नींव, शक्तिशाली परम्‍पराओं और गहरे जड़ों पर आधारित है, जो भारत को विश्‍व के सबसे बेहतर रूप से सर्वे किये जाने वाला देश बनाना चाहता है।
          इसके लिए संगठन नये तकनीकों का उपयोग करते हुए नई चुनौतियों का सामना करने में सफल रहा है। इसने अपने लक्ष्‍य ‘ए सेतु हिमाचलम्’ (अर्थात् सेतु से हिमालय तक, सम्‍पूर्ण भारत) के प्रति हमेशा प्रतिबद्धता जताई है। सिन्‍हा ने कहा कि डाक विभाग उन संस्‍थाओं के लिए स्‍मारक डाक टिकट जारी करता है, जिसे राष्‍ट्रीय-अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर ख्‍याति मिली हो या जिसने राष्‍ट्रीय-अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर योगदान दिया हो। 
            उन्‍होंने जानकारी देते हुए कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया का इतिहास 1767 ई. से प्रारम्‍भ होता है, जब मेजर जेम्‍स रीनेल को बंगाल का सर्वेअर जनरल नियुक्‍त किया गया था। यह भारत का सबसे पुराना वैज्ञानिक विभाग है और साथ ही यह विश्‍व के सबसे पुराने सर्वे विभागों में से एक है। 
           सर्वे ऑफ इंडिया को भारत के पहले डाक टिकट की छपाई करने तथा भारतीय संविधान की पहली प्रति छापने का विशिष्‍ट सम्‍मान प्राप्‍त है। मंत्री ने कहा कि सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी व कर्मचारी अपने कार्यों के लिए दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचे है। यह दूसरों के लिए अनुकरणीय है। उन्‍हें घने जंगल, मरूस्‍थल और ऊंचे बर्फीले पहाड़ों तक जाना पड़ता है।
           वास्‍तव में ये लोग देश के अछूते व निर्जन क्षेत्रों तक पहुंचने वाले पहले व्‍यक्तियों में थे। सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मी निरंतर प्रयत्‍नशील होकर, विश्‍वास के साथ और बाधाओं को दूर करते हुए मानचित्र बनाने का कार्य करते है, जो विकास, प्रतिरक्षा और प्रशासन के लिए अत्‍यंत आवश्‍यक है।
          सर्वे ऑफ इंडिया भारत सरकार के सभी सर्वे से संबंधि‍त कार्यों जैसे भूगणित, फोटोग्रैमेट्री, मानचित्र बनाना और मानचित्र का पुन: प्रस्‍तुतिकरण आदि के लिए सलाहकार के रूप में कार्य करता है।

स्‍मार्ट सिटी की कुल संख्‍या 90 हुई, 30 नए शहर स्‍मार्ट सिटी घोषित

       केन्‍द्र सरकार ने स्‍मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के लिए 30 और शहरों का चयन किया है। इन्‍हें मिलाकर 25 जून, 2015 को घोषित स्‍मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शहरों की कुल संख्‍या 90 हो गई है।

      नए शहरों के नामों की घोषणा यहां श‍हरी रूपांतरण के बारे में आयोजित एक राष्‍ट्रीय कार्यशाला में आवास और श‍हरी गरीबी उपशमन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने की। उन्‍होंने कहा कि स्‍मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत अभी 40 शहर और शामिल किए जाने थे, जिनके लिए 45 शहरों से प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए, लेकिन केवल 30 का चयन किया गया, क्‍योंकि इस मिशन की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने निर्देश दिया था कि नागरिकों की आकांक्षाओं के अनुरूप सुविधाएं जुटाने के लिए यह सुनिश्चित किया जायेगा कि केवल व्‍यवहार्य और साध्‍य योजनाएं इसमें शामिल की जाएं।
            घोषित 30 शहरों में त्रिवेन्‍द्रम (केरल), नया रायपुर (छत्‍तीसगढ़), राजकित (गुजरात), अमरावती (आंध्रप्रदेश), पटना (बिहार), करीमनगर (तेलंगाना), मुजफ्फरपुर (बिहार), पुदुचेरी (पुदुचेरी), गांधी नगर (गुजरात), श्रीनगर (जम्‍मू-कश्‍मीर), सागर (मध्‍यप्रदेश), करनाल (हरियाणा), सतना (म.प्र), बेंगलूरू (कर्नाटक), शिमला (हिमाचल प्रदेश), देहरादून (उत्‍तराखंड), तिरुप्पुर (तमिलनाडू), पिम्‍परी चिंचवाड (महाराष्‍ट्र), बिलासपुर (छत्‍तीसगढ़), पासीघाट (अरुणाचल प्रदेश), जम्‍मूकश्‍मीर (जम्‍मू-कश्‍मीर), दाहोद (गुजरात), तिरुनेलवेलि (तमिलनाडू), थूटुक्‍कुडी (तमिलनाडू), तिरुचिरापल्‍ली (तमिलनाडू), झांसी (उत्‍तरप्रदेश), आइजौल (मिज़ोरम), इलाहाबाद (उत्‍तरप्रदेश), अलीगढ़ (उत्‍तरप्रदेश), गंगटोक (सिक्किम) है। 
          नायडू ने बताया कि घोषित 30 शहरों की स्‍मार्ट सिटी योजना के लिए रू. 46,879 करोड़ के व्‍यय का प्रस्‍ताव है। उन्‍होंने बताया कि शेष 10 स्‍लॉटों के लिए 20 शहरों के बीच प्रतिस्‍पर्धा है।
           नायडू ने बताया कि स्‍मार्ट सिटी के रूप में विकसित किए जाने के कार्यक्रम के अंतर्गत शहरों का चयन सही वक्‍त पर किया जा रहा है और शेष शहर खाली स्‍लॉटों के लिए शीघ्र ही अपनी संशोधित स्‍मार्ट सिटी योजनाएं प्रस्‍तुत करेंगे।