Tuesday, 31 October 2017

सरदार पटेल के बहुमूल्य योगदान को याद रखना चाहिए

    नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि प्रत्येक देशवासी को आधुनिक व एकीकृत भारत के निर्माण में सरदार पटेल के बहुमूल्य योगदान को याद रखना चाहिए।

      भारत आज विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक है। वे यहां सरदार पटेल के जीवन पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर उपस्थित जन समुदाय का संबोधित कर रहे थे। 
   सम्मेलन का विषय है ‘गांधीवादी और राष्ट्रवादी- सरदार पटेल का जीवन व कार्यकाल’। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार) और पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. महेश शर्मा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरदार पटेल ने नि:स्वार्थ भावना से देश की सेवा की। उन्होंने देश के हितों को सर्वोपरि रखा और समर्पण की भावना से भारत के भाग्य को आकार दिया। सरदार पटेल ने देशी रियासतों का एकीकरण किया। 
    यह उनके उत्कृष्ट कूटनीतिक समझ को दर्शाता है। इसमें न तो खून बहा और न ही किसी तरह के विद्रोह का सामना करना पड़ा। इस प्रकार उन्होंने नए भारत के निर्माण के लक्ष्य को हासिल किया।
      उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत राष्ट्र के निर्माण में सरदार पटेल के बहुमूल्य योगदान को रेखांकित करते हुए पंडित नेहरू ने कहा था, ‘इतिहास उन्हें नए भारत का निर्माता और इसे सशक्त बनाने वाले के रूप में याद रखेगा’। उन्होंने उद्धरण देते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था, ‘मेरे कई अनुयायी हैं, लेकिन मैं यह निर्णय नहीं कर पा रहा हूं कि मेरा उप-कमांडर कौन होगा। 
    तब मैंने वल्लभ भाई के बारे में सोचा’। सरदार पटेल केवल उच्च कोटि के संगठनकर्ता ही नहीं थे, बल्कि वे एक लोकप्रिय जन नेता थे।

राष्ट्र की एकता, अखंडता व सुरक्षा बनाए रखने की शपथ

    नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने आज 31 अक्टूवबर को सरदार बल्लभ भाई पटेल के 142 वां जन्मदिवस के मौके पर नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

  राधा मोहन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरूआत भारत सरकार द्वारा की गई थी और वर्ष 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। सिंह ने कहा कि कि इस आयोजन का उद्देश्य सरदार बल्लभ भाई पटेल को श्रृद्धांजलि अर्पित करना है।
     उन्होंने लगभग 550 आजाद रियासतों को भारत में मिलाकर अखंड भारत का सपना साकार किया था। इसलिए भारत के लौहपुरूष श्री सरदार बल्लकभ भाई पटेल के जन्म दिवस पर प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को एकता दिवस मनाया जाता है। 
     केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल एक विश्व स्तर के नेता होने के साथ भारतीय राजनीतिक एकीकरण के जनक थे। उन्होंने भारत की छोटी-छोटी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने का सपना देखा था। उनके सफल नेतृत्व और दृढ़ प्रयास से अनेक रियासतों को मिलाकर वृहद संघ बना और भारतीय संघ में शामिल हो गया। 
   उनके प्रयासों के फलस्वरूप क्षेत्रवाद, राष्ट्र में परिवर्तित हो गया था। वे लोगों से कहते थे कि बड़ा सोचो और शक्तिशाली बनो। आज भारत के प्रत्येक भाग में एकता दिवस मनाया जा रहा है। यह आजादी के तत्काल बाद सरदार पटेल द्वारा एकीकरण के लिए किए गए प्रयासों का ही फल है कि आज भारत के प्रत्येक भाग में इसे जश्न के रूप में मनाया जा रहा है। 
    राधा मोहन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय एकता दिवस से हमारे देश के लोगों को अपनी अंतर्निहित शक्ति को सुदृढ़ करने का अवसर प्राप्त होता है। इसके द्वारा हमारे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के समक्ष मौजूद वास्तविक और संभाव्य खतरों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस व्यापक पैमाने पर मनाया जा रहा है। 
     इस अवसर पर भारत के इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ पर सरदार पटेल की भूमिका को उजागर करने के लिए राष्ट्रीय एकता को कायम रखने के लिए शपथ ली जाती है तथा जन सभाएं, अर्द्धसैनिक बलों का मार्च पास्ट, एकता के लिए दौड़, पोस्टर और क्विज प्रतियोगताएं करने के साथ-साथ प्रदर्शनियां भी लगाई जाती हैं।
   केन्द्रीय कृषि मंत्री ने भी कृषि भवन के लॉन में आयोजित समारोह में लोगों को राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने की शपथ दिलाई। वस्तुत यह अवसर अत्यधिक शुभ और पवित्र है। चूंकि इस अवसर पर राष्ट्र भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अद्वितीय व्यक्तित्व के प्रति न केवल अपना आभार व्यक्त करता है अपितु भारत की नई पीढ़ी को उनके बारे में नवीनतम जानकारी भी उपलब्ध कराता है।
   पिछले वर्ष 31 अक्टूबर, 2016 को एकता के लिए दौड़ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था आज हम तिरंगे को कश्मीर से कन्याकुमारी तक और हिमालय से सागर तक लहराता हुआ देख रहे हैं। हम राष्ट्रीय ध्वज को देश में चारों दिशाओं में लहराता हुआ देख रहे हैं।
  इस सब का श्रेय सरदार बल्लभ भाई पटेल को जाता है। इस अवसर पर सिंह ने कहा कि हम आज के दिन अपने आप को देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने तथा एक साथ मिलकर कार्य करने के लिए पुन: समर्पित हो जाएं ताकि हम अपने देश को और अधिक मजबूत और गतिशील बना सके।

रन फॉर यूनिटी का शुभारंभ

 नई दिल्ली। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रधानमंत्री ने रन फॉर यूनिटी का शुभारंभ किया। 

   राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर नई दिल्ली में पटेल चौक पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। 
 इसके पश्चात प्रधानमंत्री ने मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम से रन फॉर यूनिटी को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के योगदानों, विशेष रूप से देश की एकता में उनके योगदानों को याद किया। 
   प्रधानमंत्री ने यह जोर देकर कहा कि भारत का युवा वर्ग सरदार पटेल और हमारे राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान का सम्मान करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी विविधता पर गर्व है और रन फॉर यूनिटी जैसे अवसर हमें इस गर्व और एकता के भाव को पुनः सुदृढ़ करने के अवसर देते हैं। प्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों को एक शपथ भी दिलाई।

शासन का लाभ देश के प्रत्‍येक नागरिक तक पहुंचे

   नई दिल्ली। उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि हमें यह सुनिश्‍चित करना चाहिए कि लोकतांत्रिक शासन का लाभ देश के प्रत्‍येक नागरिक तक पहुंचे।

  वे सतर्कता जागरूकता सप्‍ताह, 2017 का उद्घाटन करने के बाद उपस्‍थित जन समुदाय को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा किया गया था। इस कार्यक्रम की थीम है ‘मेरा विजन-भ्रष्‍टाचार मुक्‍त भारत’।
  इस अवसर पर केन्‍द्रीय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह, कैबिनेट सचिव पी.के. सिन्‍हा, केंद्रीय सतर्कता आयुक्‍त के.वी. चौधरी और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्‍ति उपस्‍थित थे। 
   उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि हमें भ्रष्‍टाचार के जड़ पर चोट करनी चाहिए। देश रूपी सुंदर वृक्ष को कीड़ों-मकोड़ों से बचाने के लिए हमें निरंतर निगरानी करने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि जहां तक शासन की बात है, सरदार पटेल भारतीय परंपरा के सर्वश्रेष्‍ठ मूल्‍यों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं।
  उन्‍होंने पूरे देश में अखंडता सुनिश्‍चित की और वे स्‍वयं भी सार्वजनिक जीवन में सत्‍यनिष्‍ठा के उज्‍जवल उदाहरण हैं। केन्‍द्रीय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में सरकार ने, ‘न्‍यूनतम सरकार-अधिकतम शासन’ के सिद्धांत का अनुसरण किया है।
   सरकारी अधिकारी सरकार के उपकरण होते हैं और खराब उपकरणों से अच्‍छा परिणाम प्राप्‍त नहीं किया जा सकता। सरकार ने भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति अपनाई है और साथ ही ईमानदार अधिकारियों को सुरक्षा भी प्रदान की है। उन्‍होंने छोटे पदों में नियुक्‍ति के लिए साक्षात्‍कार खत्‍म करने और स्‍वप्रमाणन का भी जिक्र किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक आरटीआई पोर्टल की शुरूआत की गई है।
   इस पोर्टल पर कोई भी व्‍यक्‍ति कहीं से भी आवेदन भेज सकता है। उन्‍होंने कहा कि हमें 2020 तक भारत को भ्रष्‍टाचार मुक्‍त करने की शपथ लेनी चाहिए। वी.के. चौधरी ने कहा कि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ सीवीसी ने बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इसमें दंडात्‍मक उपाय, सुरक्षा उपाय और सक्रियता के साथ भाग लेने की रणनीति शामिल है और ये एक-दूसरे के पूरक हैं। 
  केवल दंडात्‍मक उपयों से वांछित परिणाम प्राप्‍त नहीं किया जा सकता। प्रणाली में बदलाव की जरूरत है और विलंब करने वाले कारणों की पहचान करनी चाहिए। दंडात्‍मक सतर्कता, सुरक्षात्‍मक सतर्कता और सक्रिय भागीदारी सतर्कता के अंतर्गत किए गए उल्‍लेखनीय कार्यों को मान्‍यता प्रदान करने के लिए इस वर्ष से दो प्रकार के पुरस्‍कारों की शुरुआत की जा रही है। 
     प्रारंभ में सरकारी संगठनों और सरकारी उपक्रमों समेत 25 संगठनों के लिए इंटेग्रिटी इंडेक्‍स बनाया जाएगा। इस इंडेक्‍स के लिए आईआईएम अहमदाबाद तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। उन्‍होंने कहा कि इस वर्ष के सतर्कता जागरूकता सप्‍ताह के लिए ‘मेरा विजन भ्रष्‍टाचार मुक्‍त भारत’ को थीम के रूप में चुना गया है। 
    उपराष्‍ट्रपति ने अधिकारियों और संगठनों को दंडात्‍मक सतर्कता, सुरक्षात्‍मक सतर्कता और सक्रिय भागीदारी सतर्कता के क्षेत्र में सतर्कता उत्‍कृष्‍टता पुरस्‍कार प्रदान किए। इस अवसर पर श्री एम. वेंकैया नायडू ने सीवीसी के ई-लर्निंग प्रोजेक्‍ट को भी जारी किया। 
     सुरक्षात्‍मक सतर्कता की पहल विषय पर एक पुस्‍तिका भी जारी की गई। कार्यक्रम के दौरान ‘द राईज ऑफ ए क्रप्‍शन फ्री इंडिया’ फिल्‍म दिखाई गई। इससे पहले मुख्‍य सतर्कता आयुक्‍त के.वी. चौधरी ने सहभागियों को सत्‍यनिष्‍ठा की शपथ दिलाई।
    इस अवसर पर कैबिनेट सचिव पी.के. सिन्‍हा, सतर्कता आयुक्‍त राजीव व डॉ. टी.एम. भसीन तथा मंत्रालयों-सरकारी संगठनों, केंद्रीय लोक उपक्रमों के वरिष्‍ठ अधिकारी एवं उद्योग संघों, गैर सरकारी संगठनों, शैक्षिक संस्‍थाओं के प्रतिनिधि तथा छात्र उपस्‍थित थे।

आतंकवाद वैश्विक संकट, निपटने के लिए साझा लड़ाई की जरूरत

  नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि आतंकवाद वैश्विक चिंता का विषय है। इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर आपसी सहयोग की जरूरत है।

   इटली के प्रधानमंत्री जेंटिलोनी से मुलाकात के दौरान उन्होंने यह बात कही। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र सम्मेलन और तत्काल आपसी समाधान में विश्वास रखता है।
  उपराष्ट्रपति ने एमटीसीआर में भारत की सदस्यता का समर्थन करने के लिए इटली को धन्यवाद दिया। नायडू ने कहा कि एनएसजी यानि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता भारत सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है, और आशा है भारत को इस मसले पर भी आगे इटली से समर्थन मिलेगा। 
  उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और इटली के बीच 8.7 बिलियन अमरीकी डॉलर का दविपक्षीय व्यापार होता है जोकि और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने व्यापार सुगमता के लिए कई कदम उठाए हैं जिससे इटली की कंपनियों के सामने व्यापार करने के असीमित अवसर हैं। 
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन दोनों ही देशों के लिए बेहद महत्तवपूर्ण मसला है। भारत ने जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते का 3 अक्टूबर 2017 को अनुमोदन कर दिया है। भारत ने 2022 तक 175 गीगा वॉट नवकरणीय ऊर्जा उत्पन्न करने का लक्ष्य तय किया है। 
   उपराष्ट्रपति ने कहा कि इटली के लोग भारतीय खान-पान, संस्कृति, संगीत, योग और आयुर्वेद में रुचि रखते हैं। भारत इटली के साथ परंपरागत भारतीय औषधि विज्ञान के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मज़बूत करना चाहता है।

Monday, 30 October 2017

पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 25 हजार करोड़ का पैकेज

     हैदराबाद। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने युवा पुलिस अधिकारियों से कहा कि साइबर दुनिया के ज़रिए आतंक के उभरते खतरों से निपटने के लिए वह खुद को तैयार रखें। 

  हैदराबाद में सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में भारतीय पुलिस सेवा के प्रशिक्षुओं की पासिंग आउट परेड समारोह को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया आज आतंकवाद और अतिवाद से जूझ रही है। आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन इंटरनेट के जरिए घृणा फैलाने के काम में लगे हैं। हम भी इस खतरे से अछूते नहीं है। 
  गृह मंत्री ने मौजूदा खतरों से सफलतापूर्वक निपटने के लिए खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के कामकाज पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
    सिंह ने कहा कि हम जानते हैं कि राज्य पुलिस बल को केंद्र से मदद की जरूरत पड़ती है इसलिए भविष्य में जब भी आवश्यकता होगी केंद्र हरसंभव मदद करेगा। गृह मंत्री ने कहा कि पुलिस के आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले महीने पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए 25 हजार करोड़ रुपए के पैकेज को मंजूरी दी है। 
  राजनाथ सिंह ने कहा कि हमें आतंकवाद और अतिवाद जैसी समस्याओं का स्थाई समाधान ढूढ़ने की जरूरत है। इस दिशा में सरकार काम कर रही है। अगले 5 वर्षों में हमें देश से आतंकवाद, अतिवाद औऱ संप्रदायवाद को खत्म करना है।
  राजनाथ सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्रालय कल्याण कोष से सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी को 5 करोड़ रुपए अनुदान देने की भी घोषणा की।
  इस अवसर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के निदेशक श्री डीआर डोले बर्मन, नेपाल पुलिस अकादमी के कार्यकारी निदेशक, रॉयल भूटान पुलिस के कर्नल रिनज़िन दोरजी, मालदीव पुलिस बल के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अली सुजाउ और कई सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

असम के लिए 200 मिलियन डॉलर का ऋण समझौता

    नई दिल्ली। भारत सरकार और विश्‍व बैंक के बीच असम के कृषि व्‍यापार और ग्रामीण रूपांतरण परियोजना के लिए 200 मिलियन डॉलर का ऋण समझौता हुआ। 

  सरकार और विश्‍व बैंक ने असम के कृषि व्‍यापार और ग्रामीण रूपांतरण परियोजना के लिए आज 200 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किए। 
  यह परियोजना असम सरकार को कृषि व्‍यापार निवेश व कृषि पैदावर बढ़ाने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने तथा छोटे किसानों को बाढ़ और सूखे को सहन करने वाले फसलों की खेती के लिए प्रोत्‍साहन प्रदान करने हेतु सहायता प्रदान करेगी।
   इस समझौते पत्र पर भारत सरकार की ओर से वित्‍त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग के संयुक्‍त सचिव समीर कुमार खरे व असम सरकार की ओर से प्रधान वित्‍त सचिव रवि कोटा तथा विश्‍व बैंक की तरफ से विश्‍व बैंक भारत के ऑपरेशंस मैनेजर हिशम एबडो ने हस्‍ताक्षर किए।
   इस अवसर पर वित्‍त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग के संयुक्‍त सचिव समीर कुमार खरे ने कहा कि असम सरकार ने व्‍यापार को आसान बनाने, कृषि बाजार और मत्‍स्‍य पालन समेत कई नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। यह परियोजना असम के 16 जिलों में लागू की जाएगी।
    इस परियोजना से 5,00,000 छोटे किसानों के परिवार लाभान्वित होंगे। इस परियोजना की गतिविधियों में हिस्‍सा लेने वालों की कुल संख्‍या की 30ऽ महिलाएं होंगी। महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों पर विशेष ध्‍यान दिया जाएगा।
     विश्‍व बैंक भारत के ऑपरेशंस मैनेजर हिशम एबडो ने इस अवसर पर कहा कि असम सरकार कृषि आय को दोगुना करना चाहती है। कृषि क्षेत्र को विकास का स्‍थायी स्‍त्रोत बनाना चाहती है। वरिष्‍ठ कृषि विशेषज्ञ और परियोजना के लिए विश्‍व बैंक के टीम लीडर मणिवन्‍नन पथी ने कहा कि बाजार से जुड़ी उत्‍पादन प्रणाली और मूल्‍य संवर्धन कृषि क्षेत्र की प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने मे महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
   मौसम के बदलावों का असम के कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में धान की खेती वाले 50ऽ से अधिक कृषि क्षेत्र या तो पानी में डूब जाते है या सूखे के शिकार हो जाते है। 
   इंटरनेशल बैंक फॉर रिकंसट्रक्‍शन एंड डेवलपमेंट (आईबीआरडी) द्वारा दिए गए इस 200 मिलियन डॉलर के ऋण के लिए सात वर्षों की अनुग्रह अवधि और 16.5 वर्षों की परिपक्‍वता अवधि है।
 

लोकतांत्रिक प्रशासन के लाभ देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे

   नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोकतांत्रिक प्रशासन के लाभ देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। 

   वह आज केंद्रीय सतर्कता आयोग के ‘माई विजन- करप्‍शन-फ्री इंडिया’ विषय के तहत शुरू हुए सतर्कता सप्‍ताह का उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। केन्‍द्रीय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह, कैबिनेट सचिव पी.के. सिन्‍हा, केंद्रीय सतर्कता आयुक्‍त के.वी. चौधरी और अन्‍य गणमान्‍य नागरिक इस अवसर पर उपस्‍थित थे। 
    उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि हमें भ्रष्‍टाचार की जड़ों पर प्रहार करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि वृहद खूबसूरत वृक्ष रूपी देश को हानिकारक तत्‍वों से नुकसान न पहुंचे इसके लिए सतत निगरानी की आवश्‍यकता है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि सरदार वल्‍लभ भाई पटेल भारतीय परंपराओं के मूल्‍यों के सच्‍चे प्रतिनिधि थे। 
   उन्‍होंने देश की अखंडता के लिए कार्य किया और सार्वजनिक जीवन में विश्‍वसनीयता और शुचिता के सर्वश्रेष्‍ठ उदाहरण हैं। नायडू ने कहा कि हमें सरदार पटेल के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि ईमानदारी और सत्‍यनिष्‍ठता सामाजिक पूंजी के आवश्‍यक तत्‍व हैं।
   उन्‍होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया और अधिक नागरिक केंद्रित होनी चाहिए। प्रत्‍येक नागरिक को भ्रष्‍टाचार रहित बिना परेशानी और बिना देरी के गुणवत्‍तापूर्ण सेवाएं मिलनी चाहिए। उपराष्‍ट्रपति ने केंद्रीय सतर्कता अयोग द्वारा भ्रष्‍टाचार के खिलाफ उठाए गए कदमों की सराहना की।

हथियार उत्पादन के क्षेत्र में मेक इन इंडिया को बढ़ावा

  नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने हथियार और गोला-बारूद के उत्पादन को मेक इन इंडिया अभियान के तहत बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में रोज़गार बढ़ाने के लिए नियमों को उदार बनाया है। 

  नियमों के उदार होने से इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और मेक इन इंडिया अभियान के तहत हथियार प्रणालियों और गोला-बारूद के देश में निर्मित उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। 
   उदार नियमों के कारण वैश्विक स्तर के देश में ही निर्मित हथियारों के ज़रिए सेना और पुलिस बल की हथियार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।
    नए नियम गृह मंत्रालय द्वारा छोटे हथियारों के निर्माण को प्रदान किए जाने वाले लाइसेंस पर लागू होंगे साथ ही यह नियम औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग के तहत लाइसेंस प्राप्त करने वाले टैंक, हथियारों से लैस लड़ाकू वाहन, रक्षक विमान, स्पेस क्राफ्ट, युद्ध सामग्री और अन्य हथियारों के पुर्जे तैयार करने वाली इकाईयों पर लागू होंगे।
    उदार नियमों की विशेषताएं हैं। उत्पादन के लिए दिया गया लाइसेंस लाइफ-टाइम के लिए वैध होगा। प्रत्येक 5 वर्ष के बाद लाइसेंस के नवीकरण की शर्त को हटा दिया गया है। हथियार उत्पादकों द्वारा निर्मित छोटे और हल्के हथियारों को केंद्र और राज्य सरकारों को बेचने के लिए गृह मंत्रालय की पूर्व अनुमति की अब ज़रूरत नहीं होगी।
    जितने उत्पादन की अनुमति है अगर उससे 15 फीसदी अधिक तक का उत्पादन ज्यादा किया जाता है तो इसके लिए सरकार से स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी। सिर्फ उत्पादक इकाई को लाइसेंस देने वाले प्राधिकरण को सूचना देनी होगी। इस संबंध में नए संशोधित नियमों को गृह मंत्रालय ने 27 अक्टूबर 2017 को जारी कर दिया है।

भारत को निरक्षरता, अज्ञानता से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयास किए जाएं

     बेंगलूरु। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने बेंगलूरु में दशमाह सौंदर्य लहरी पारायणोत्‍सव महासमर्पणे में भाग लिया। सौंदर्य लहरी आदि शंकराचार्य द्वारा रचित श्‍लोकों का संग्रह है। इस कार्यक्रम में सौंदर्य लहरी का सामूहिक पाठ किया गया। 

   इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस सामूहिक पाठ से वातावरण में एक विशेष ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कुछ दिनों पहले केदारनाथ की अपनी यात्रा को याद किया और कहा कि वह आदि शंकराचार्य द्वारा उनके अपेक्षाकृत छोटे जीवनकाल में दूर-दराज के जगहों के साथ-साथ भारत के अन्‍य स्‍थानों पर किए गए कार्य को देखकर श्रद्धा से भर गए हैं। 
    उन्‍होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने वेदों और उपनिषदों के जरिये भारत को एकजुट किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य की रचना- सौंदर्य लहरी से सामान्‍य मानवी खुद को जोड़ सकता है। उन्‍होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने समाज से बुराइयों को दूर किया। उन्‍हें भविष्‍य की पीढि़यों तक पहुंचने से रोका। 
    उन्‍होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने विभिन्‍न विचारधाराओं की अच्‍छाइयों को आत्‍मसात किया और उन पर विचार किया। उन्‍होंने कहा कि आदि शंकराचार्य का तप आज भी भारतीय संस्‍कृति के मौजूदा स्‍वरूप में विद्यमान है। यह एक ऐसी संस्‍कृति है जो सबको स्‍वीकार करती है और साथ मिलकर आगे बढ़ती है।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि यही संस्‍कृति नए भारत की बुनियाद है। यह सबका साथ, सबका विकास के मंत्र का पालन करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक तरह से भारत की सांस्‍कृतिक विरासत में सभी वैश्विक समस्‍याओं के जवाब मौजूद हैं। 
   उन्‍होंने कहा कि भारत में प्रकृति के शोषण को रोकने पर हमेशा जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस एलईडी बल्‍ब की लागत पहले 350 रुपये से भी अधिक होती थी वह अब उजाला योजना के तहत महज 40 से 45 रुपये में उपलब्‍ध है। 
     उन्‍होंने कहा कि अब तक 27 करोड़ से अधिक एलईडी बल्‍ब वितरित किए जा चुके हैं। उन्‍होंने कहा कि इससे बिजली बिल में भी बचत हुई है। प्रधानमंत्री ने उल्‍लेख किया कि उज्‍ज्‍वला योजना के जरिये 3 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्‍शन वितरित किए गए हैं। 
    इससे न केवल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्‍मक बदलाव आया है बल्कि इसने पर्यावरण को स्‍वच्‍छ रखने में भी योगदान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि समय की जरूरत है कि भारत को निरक्षरता, अज्ञानता, कुपोषण, कालेधन और भ्रष्‍टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयास किए जाएं।

प्रधानमंत्री ने श्री मंजूनाथ स्‍वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की

  कर्नाटक। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी अपनी कर्नाटक यात्रा के पहले चरण में मंगलूरु पहुंचे। वह धर्मस्‍थल के लिए रवाना हुए जहां उन्‍होंने श्री मंजूनाथ स्‍वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की। उजिरे में आयोजित एक जनसभा में प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाताधारकों को रुपे कार्ड वितरित किया। 

    उन्‍होंने 'धरती माता को बचाओ और अगली पीढ़ी को हस्‍तांतरित करो' (प्रिजर्व मदर अर्थ एंड ट्रांसफर टु नेक्‍स्‍ट जेनेरेशन) कार्यक्रम की शुरुआत के लिए एक लोगो का अनावरण किया। सभा को संबोधित करते हुए उन्‍होंने भगवान मंजूनाथ की पूजा करने का अवसर प्राप्‍त होने पर खुशी जताई। 
  उन्होंने कहा कि वर्तमान शताब्‍दी कौशल विकास की है। उन्‍होंने कहा कि भारत एक युवा देश है और इसलिए हमें जनसांख्यिकीय लाभांश का अवश्‍य फायदा उठाना चाहिए। 
   प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे संतों और महात्‍माओं द्वारा स्‍थापित एवं पोषित संस्‍थानों ने सदियों से समाज की मदद की है। महिला स्‍वयं सहायता समूहों को रुपे कार्ड सौंपने के अवसर के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह डिजिटल लेनदेन के प्रति जबरदस्‍त उत्‍साह को देखकर खुश हैं। 
     उन्‍होंने लोगों से भीम ऐप का इस्‍तेमाल करने और नकदी रहित लेनदेन को अपनाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ईमानदारी और अखंडता का युग है जहां व्‍यवस्‍था को धोखा देने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार का प्रत्‍येक रुपया और हरेक संसाधन भारतीयों के कल्‍याण के लिए समर्पित है। उन्‍होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास का फल बिना किसी भ्रष्‍टाचार के अपेक्षित लाभार्थियों तक पहुंचे।
    नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि इस दिन और काल में जल संरक्षण हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्‍होंने कहा कि हमें प्रकृति के साथ सामंजस्‍यपूर्वक रहने को भी महत्‍व देने की आवश्‍यकता है और हमें अल्‍पावधि फायदे के बारे में नहीं सोचना चाहिए। 
   उन्‍होंने कर्नाटक के किसानों से ड्रिप सिंचाई जैसे तरीकों को अपनाने की अपील की जो जल संरक्षण में मदद करता है।

वाइस एडमिरल अजित कुमार पी को नौसेना उपप्रमुख का पदभार

     नई दिल्ली। वाइस एडमिरल अजित कुमार पी, एवीएसएम, वीएसएम ने आज सुबह नई दिल्ली के साउथ ब्लाक में आयोजित एक औपचारिक समारोह में वाइस एडमिरल करमबीर सिंह, एवीएसएम से नौसेना उपप्रमुख का पदभार ग्रहण किया। 

  वाइस एडमिरल करमबीर सिंह 31 अक्टूबर,2017 को विशाखापट्नम स्थित नौसेना की पूर्वी कमान में फ्लैग आफिसर कमान्डिंग–इन-चीफ का पदभार ग्रहण करेंगे।
   वाइस एडमिरल अजित कुमार भारतीय रक्षा अकादमी से पासआउट हुए थे। 1जुलाई,1981 को वो भारतीय नौसेना में शामिल हुए। 
    अजित कुमार मिसाइल्स और तोपखाना में विशेषज्ञ हैं।कुमार को अग्रिम पंक्ति के युद्दपोतो के संचालन में व्यापक अनुभव प्राप्त है। उन्होंने नौसेना उच्च कमान कोर्स किया है। नौसेना युद्ध महाविद्यालय, न्यूपोर्ट, रोहडे द्वीपसमूह, अमरीका में अध्ययन किया है।

Sunday, 29 October 2017

देश मे 163.7 मिलियन टन दूध का उत्पादन

   मोतिहारी। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारत, डेयरी राष्ट्रों के बीच एक नेतृत्व के रूप में उभर रहा है। देश मे 2016-17 के दौरान 163.7 मिलियन टन दूध उत्पादित किया गया है जिसकी कीमत 4 लाख करोड़ रु. से अधिक है।

  सिंह ने यह बात सेमवापुर (केसरिया), मोतिहारी मे लगे पशु आरोग्य मेले में लोगों को सम्बोधित करते हुए कही। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में कुल दूध उत्पादन वर्ष 2015-16 में 8.29 मिलियन मीट्रिक टन था जो पूरे देश का 5.33ऽ है। बिहार में देश के कुल पशु का 6.67ऽ है। अतः बिहार में दूध उत्पादन एवं दूध उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता है। सिंह ने कहा कि बिहार में कोंफेड/सुधा दुग्ध संग्रह, प्रसंस्करण, एवं विपणन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 
   केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत में गोपशु पालन एक पारम्परिक आजीविका अर्जन का विकल्प रहा है। इसका कृषि अर्थ व्यवस्था से गहरा संबंध है। देश में वर्तमान में 19 करोड़ गोपशु हैं जो विश्व के कुल गोपशु का 14ऽ हैं। इनमें से 15.1 करोड़ देशी गोपशु हैं जो कुल गोपशु का 80ऽ हैं। देश की डेयरी सहकारिताएं किसानों को औसत रूप से अपनी बिक्री का 75 से 80 प्रतिशत प्रदान करती हैं।
     बिहार मे कोंफेड या सुधा, सहकारी मंडलियों के माध्यम से किसानो को दूध का उचित मूल्य प्रदान कर रहा है। इस क्षेत्र में 15 मिलियन पुरूषों की तुलना में 75 मिलियन महिलाएं कार्यरत हैं। सिंह ने कहा कि भारत में 30 करोड़ बोवाईन हैं, जो विश्व की कुल बोवाईन आबादी का 18 प्रतिशत हैं। पारंपरिक तथा वैज्ञानिक ज्ञान के माध्यम से सैकड़ो वषों की मेहनत के बाद देश के देशी बोवाईन आनुवंशिक संसाधन विकसित हुए हैं। आज हमारे पास गोपशुओं की 40 नस्लों के साथ याक और मिथुन के अलावा भैंसों की 13 नस्लें हैं।
     केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश में देशी पशु विशेष रूप से अपने-अपने प्रजनन क्षेत्रों की जलवायु और पर्यावरण के लिए अधिक उपयुक्त हैं। जलवायु परिवर्तन से देशी नस्लें कम से कम प्रभावित होंती हैं। बछोर, बिहार की देशी गोपशु नस्ल है। प्रदेश मे बछोर नस्ल के गोपशुओं की संख्या 6.73 लाख है जिसमें से 2.99 लाख प्रजनन योग्य पशु हैं।
  सिंह ने कहा कि व्यावसायिक फार्म प्रबंधन और संतुलित पोषाहार के जरिये भारत में देशी नस्लों की उत्पा्दकता में वृद्धि करने की अत्यधिक संभावना है। भारत सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन नामक कार्यक्रम संगठित तथा वैज्ञानिक ढंग से स्वदेशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन के उदेश्य से देश मे पहली बार शुरू किया है। योजना के अंतर्गत अब तक 27 राज्यों से आए प्रस्तावों को 1077 करोड़ रुपये की राशि के साथ स्वीकृत किया जा चुका है।
   इस योजना के अंतर्गत अब तक 499.08 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। बिहार को ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन' के तहत 67 करोड़ रुपये की राशि की स्वीकृति दी गयी है। योजना के कार्यान्वायन के लिए अब तक 22.5 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। इस योजना के कार्यान्वयन से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन एवं उत्पादकता मे वृद्धि होगी।
     इस के तहत कृत्रिम गर्भाधान को किसान के घर द्वार तक पहुंचाने के लिए 1250 मैत्री केन्द्रों को भी स्थापित किया जा रहा है। इससे देशी नस्लों के संरक्षण को नयी दिशा मिलेगी। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के ही अंतर्गत गोकुल ग्राम स्थापित करना अन्य घटकों के साथ शामिल है।
   एक गोकुल ग्राम बिहार के बक्सर जिले में स्थापित किया जाएगा। गोकुल ग्राम, 500 उच्च आनुवांशिक गुणों वाले पशुओं के लिए होगा इनमें से 300 प्रजनन योग्य पशु होंगे। इस गोकुल ग्राम पर बछोर के साथ साथ लाल सिंधी, साहिवाल एवं गिर नस्लों के पशुओं को भी रखा जाएगा।

चेन्‍नई बंदरगाह से मोंगला बंदरगाह के लिए ट्रकवाहक पोत को झंडी

  चेन्‍नई। जहाजरानी, सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा जल संसाधन, नदी विकास और गंगा जीर्णोद्धार मंत्री नितिन गडकरी ने चेन्‍नई बंदरगाह से बांग्‍लादेश में मोंगला बंदरगाह के लिए एक रोरो-एवं-सामान्‍य माल वाहक पोत एम वी आईडीएम डूडल को 185 ट्रकों की खेप के साथ डिजिटली झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसमें लादे गए। 

  इस अवसर पर गडकरी ने कहा कि ये ट्रक मैसर्स अशोक लेलैंड द्वारा निर्यात किए जा रहे हैं, जो अभी तक सड़क मार्ग से भेजे जा रहे थे। जिससे करीब 1500 कि.मी. का सफर तय करना पड़ता था। समुद्री मार्ग से इस सफर में करीब 15 से 20 दिन की बचत होगी। 
     समुद्री मार्ग से परिवहन के कारण भारत-बांग्‍लादेश सीमा पर पेट्रापोल-बेनापोल चेक प्‍वाइंट पर वाहनों की भीड़ से बचा जा सकेगा। तटीय परिवहन से समय की बचत के साथ ही लागत में भी कमी आती है। यह पर्यावरण के अनुकूल भी है।
    मैसर्स अशोक लेलैंड द्वारा वर्तमान में करीब 12000 ट्रक बांग्‍लादेश, श्रीलंका और अफ्रीकी देशों को निर्यात किए जा रहे हैं। भारत और बांग्‍लादेश के बीच तटवर्ती शिपिंग समझौते पर हस्‍ताक्षर जून 2015 में प्रधान मंत्री नरेन्‍द्र मोदी की बांग्‍लादेश यात्रा के समय किए गए थे। 
   चेन्‍नई बंदरगाह से रो रो यात्रा का शुभारंभ 5 अगस्‍त 2016 को उस समय हुआ था जब 800 ह्यूंदी कारें स्‍थानीय वितरण के लिए रो रो पोतों पर चेन्‍नई से पिपावाव भेजी गई थीं। समुद्री मार्ग से माल ढुलाई पर प्रति टन ईंधन की लागत भी काफी कम आती है।

भाभा का परमाणु शांति मिशन सभी दोषों से मुक्‍त

  नई दिल्‍ली। केन्‍द्रीय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), एमओएस पीएमओ, कार्मिक जन शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍यमंत्री डा जितेन्‍द्र कुमार ने कहा है कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक डा होमी भाभा का परमाणु शांति मिशन सभी प्रकार की बुराइयों से मुक्‍त रहा है।

   वे राष्‍ट्रीय राजधानी में 9वें परमाणु ऊर्जा सम्मेलन में उद्घाटन भाषण दे रहे थे। उन्‍होंने कहा कि 60 वर्षों के बाद हम समूचे विश्‍व के समक्ष यह दावा करने की स्थिति में हैं कि भारत का परमाणु कार्यक्रम आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए देश की ऊर्जा आवश्‍यकताओं को पूरा करने का प्रमुख संसाधन रहा है। 
    उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 60 प्रतिशत विद्युत उत्‍पादन कोयले और अन्‍य संसाधनों से होता है, परन्‍तु आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा सहित हरित संसाधनों का विद्युत उत्‍पादन में प्रमुख योगदान होगा। उन्‍होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमें देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विस्‍तार पर विशेष ध्‍यान देने के लिए प्रेरित किया है।
    वरिष्‍ठ परमाणु वैज्ञानिकों, डा अनिल काकोदकर, डा एस के शर्मा और अन्‍य विशेषज्ञों ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्‍यक्‍त किए।

रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया कार्यक्रम को धार

   नई दिल्‍ली। रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीता रमण ने रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया कार्यक्रम को धार देने के लिए एक राउंड टेबल बैठक में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रतिनिधियों से वार्तालाप किया, जिनमें भारतीय कंपनियों और विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे।

  वर्तमान सरकार ने रक्षा उत्‍पादन नीति-2016 लागू करने सहित अनेक महत्‍वपूर्ण नीतिगत उपाय किए हैं। इस नीति में अन्‍य बातों के अलावा रक्षा साजोसामान के डिजाइन और विर्माण में स्‍वदेशी को बढ़ावा दिया गया है।
     राउंड टेबल बैठक में रक्षा विनिर्माण में निजी भागीदारी संबंधी विभिन्‍न मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इसमें यह आश्वासन दिया गया कि वर्तमान सरकार रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने के मार्ग में आने वाली सभी बाधाएं दूर करने के प्रति वचनबद्ध है ताकि इस क्षेत्र में अधिकाधिक विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके।

युवा डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को सफल बनाने में योगदान करें

  कोलकाता। युवा मामले और खेल राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) कर्नल राज्‍यवर्द्धन राठौड़ ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल से एनएसएस के राज्‍य स्‍तरीय पदाधिकारियों और स्‍वयं सेवकों से वार्तालाप किया।

  वार्तालाप सत्र में 1000 से अधिक अधिकारियों और एनएसएस स्‍वयंसेवकों, कार्यक्रम समन्‍वयकों, 25 विश्‍वविद्यालयों-संस्‍थानों, हायर सेकेंडरी स्‍कूलों के प्रधानाचार्यों और एनएसएस पदाधिकारियों ने हिस्‍सा लिया। 
 इस अवसर पर राठौड़ ने एकत्र लोगों को संबोधित करते हुए युवाओं को राष्‍ट्र निर्माण में योगदान करने के लिए प्रेरित किया। अपने सैन्‍य जीवन और खेल जगत के अनुभवों को साझा किया। उन्‍होंने प्रधानमंत्री के स्‍वच्‍छ भारत अभियान का उल्‍लेख किया। 
     कहा कि युवा और वरिष्‍ठ नागरिकों सहित सभी लोग इस दिशा में महत्‍वपूर्ण योगदान कर सकते हैं। उन्‍होंने सरकार के विभिन्‍न कार्यक्रमों का हवाला दिया। युवाओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को सफल बनाने में योगदान करें। 
     उन्‍होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे सरदार वल्‍लभभाई पटेल की जयंती मनाने के लिए 31 अक्‍टूबर को राष्‍ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर रन फॉर यूनिटी नामक दौड़ में हिस्‍सा लें। उन्‍होंने प्रतिभागियों को संकल्‍प से सिद्धि की शपथ भी दिलायी।

Friday, 27 October 2017

31 अक्‍टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जायेगा

   नई दिल्ली। सरकार 31 अक्‍टूबर को सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्‍य में राष्ट्रीय एकता दिवस मना कर हमारे देश की मजबूत एकता, अखंडता और सुरक्षा को संरक्षित करने में सरकार के समर्पण को व्‍यक्‍त करने के लिए इसे विशेष दिवस के रूप में मनाती है।

 राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सुबह 07 से 08 बजे तक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी पटेल चौक पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिसके बाद शपथ दिलाई जाएगी और एकता दौड़ को झंडी दिखाई जाएगी। एकता दौड़ नेशनल स्‍टेडियम से शुरू होकर सी-हैक्‍जागोन और शाहजहां रोड़ से होती हुई इंडिया गेट (1.5 किलोमीटर) पहुंचेगी।
     इस दौड़ में बड़ी संख्‍या में लोगों के शामिल होने की आशा है। सुश्री पी.वी. सिंधु (बैडमिंटन), सुश्री मिताली राज (क्रिकेट) और श्री सरदार सिंह (हॉकी) के इसमें शामिल होने की संभावना है। ये दौड़ भारतीय खेल प्राधिकरण के अनुभवी कोचों द्वारा आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम के आयोजकों में गृह मंत्रालय, आवास और शहरी मामले मंत्रालय, खेल विभाग, युवा मामले विभाग, रेल मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा जीएनसीटीडी एवं सीपीडब्‍ल्‍युडी, एनडीएमसी, डीडीए, एसएआई, सीएपीएफ एवं दिल्‍ली पुलिस सहित कई संगठन शामिल हैं।
    सभी राज्‍य-केन्‍द्र शासित प्रदेश अपनी-अपनी राजधानियों में राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम आयोजित करेंगे और युवा कार्य तथा खेल मंत्रालय 623 जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए स्‍थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करेंगे, जबकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय केन्‍द्रीय तथा नवोदय विद्यालय में कार्यक्रम आयोजित कर रहे है। रेल मंत्रालय 1500 रेलवे स्‍टेशनों पर कार्यक्रम आयोजित करेंगे, जबकि इस्‍पात, विद्युत, श्रम, पर्यटन और आवास तथा शहरी मामले मंत्रालय, स्‍मार्ट एवं अमृत शहरों, पर्यटन स्‍थलों, ईपीएफ-ईएसआई कार्यालयों तथा संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
    संस्‍कृति मंत्रालय एकता दिवस के अवसर पर विभिन्‍न शहरों में उचित सांस्‍कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगा। 31 अक्‍टूबर, 2017 को केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और दिल्‍ली पुलिस अपने-अपने मैदानों पर मार्चपास्‍ट करेंगे। सीएपीएफ राज्‍य स्‍तरीय और अन्‍य स्‍तर के कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग ले रहे है। राष्‍ट्रीय एकता दिवस समारोह विदेश स्थित सभी भारतीय दूतावासों और मिशनों में भी आयोजित किये जाएंगे।

तिरूपति, पलक्‍कड़, गोवा, धारवाड़, जम्‍मू, भिलाई में छह नए आईआईटी के स्‍थायी परिसरों की स्‍थापना

    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 अक्‍टूबर, 2017 को 6 नए आईआईटी के स्‍थायी परिसरों के निर्माण के लिए 7,002 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी।

 इन्‍हें 31 मार्च, 2020 तक पूरा कर लिया जाना है। प्रत्‍येक परिसर में 1200 छात्रों के रहने की व्‍यवस्‍था होगी, जिनका अकादमिक सत्र 2020-2021 से शुरू होगा। इस समय ये संस्‍थान अस्‍थायी परिसरों से चल रहे हैं। 
    इनमें छात्रों की कुल संख्‍या 1530 है। परिसरों के निर्माण के बाद छात्र संख्‍या 7200 तक हो जाएगी। वित्‍तमंत्री ने अपने 2014-15 के बजट भाषण में आंध्र प्रदेश, केरल, जम्‍मू एवं कश्‍मीर, गोवा और छत्‍तीसगढ़ में 5 नए आईआईटी की स्‍थापना की घोषणा की थी।
    इसके बाद 2015-16 के बजट भाषण में कर्नाटक में आईआईटी की स्‍थापना की घोषण भी की गई। बजट घोषणाओं के अनरूप तिरूपति और पलक्‍कड़ के आईआईटी में अकादमिक सत्र 2015-16 में तथा धारवाड़, भिलाई, जम्‍मू और गोवा में अकादमिक सत्र 2016-17 में अस्‍थायी परिसरों में शुरू हो गए। 
   स्‍थायी परिसरों के निर्माण की विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट इन संस्‍थानों के एक दल ने तैयार की थी, जिसके लिए 7 वर्षों के दौरान स्‍थायी परिसरों के निर्माण के लिए 20304.88 करोड़ रुपये की आवश्‍यकता बताई गई थी।

तिरुवनंतपुरम में टेक्नोसिटी परियोजना लांच

    तिरुवनंतपुरम। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने तिरुवनंतपुरम में टेक्नोसिटी परियोजना लांच की और टेक्नोसिटी में पहले सरकारी भवन के लिए आधारशिला रखी।

   इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि बुनियादी साक्षरता और कौशल में केरल की शक्ति तथा सेवा क्षेत्र और उपभोक्ता प्रेरक उद्योगों में केरल के लोगों का अनुभव आईटी पारिस्थितिकीय प्रणाली में केरल के लिए स्थान बनाता है। 
   उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी न केवल स्वयं में महत्वपूर्ण है बल्कि पूरी सेवा अर्थव्यवस्था के लिए कार्य में गति लाने वाला है। सूचना प्रौद्योगिकी ने स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन क्षेत्र में गेम चेंजर की भूमिका अदा की है। यह क्षेत्र केरल की शक्ति हैं। 
     उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि टेक्नोसिटी के विकास से केरल के लोगों को नए क्षेत्र मिलेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के अनेक भागों में केरल के लोग आर्थिक गतिविधि का आवश्यक हिस्सा बने हुए हैं।
    यह उपलब्धि केवल भारत तक सीमित नहीं है। केरल के हमारे भाइयों और बहनों की कड़ी मेहनत के बिना संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी के अन्य देशों की आर्थिक हालत वर्तमान स्थिति जैसी नहीं होती। इन देशों में काम कर रहे केरल के प्रवासी श्रमिक विदेशी मुद्रा भेज कर भारत के विकास में योगदान कर रहे हैं। 
  राष्ट्र निर्माण में हम उन्हें और उनकी भूमिका को भुला नहीं सकते। राष्ट्रपति ने कहा कि केरल को तीन क्षेत्रों में स्पष्ट बढ़त है। ये क्षेत्र हैं- सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन और स्वास्थ्य। इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर हैं विशेष कर केरल के प्रतिभावान युवक और युवतियों के लिए।

कर्नाटक में तटीय संरक्षण के लिए 65.5 मिलियन डॉलर का ऋण

    नई दिल्ली। भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कर्नाटक में तटीय संरक्षण में सहायता के लिए 65.5 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किए।

     एशियाई विकास बैंक और भारत सरकार ने कल यहां राष्‍ट्रीय राजधानी में 65.5 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किए। कर्नाटक के पश्चिमी तट पर तटीय क्षरण रोकने के लिए निरंतर आवश्‍यक कदम उठाने के उद्देश्‍य से यह समझौता किया गया है। 
  ऋण सतत तटीय संरक्षण एवं प्रबंधन निवेश कार्यक्रम के तहत 250 मिलियन डॉलर की वित्त पोषण सहायता की दूसरी किस्‍त है। 
  इस धनराशि का उपयोग तटीय संरक्षण की तत्‍कालिक जरूरतों को पूरा करने और कनार्टक के लोक निर्माण, बंदरगाह एवं अंतर्देशीय जल परिवहन विभाग की संस्‍थागत क्षमता बढ़ाना है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्‍त सचिव समीर कुमार खरे ने भारत सरकार की ओर से और एडीबी के इंडिया रेजीडेंट मिशन के कंट्री डॉयरेक्‍टर केनिची योकोयामा ने एडीबी की ओर से इस ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किए।
    एक पृथक परियोजना समझौते पर कनार्टक सरकार की ओर से अपर मुख्‍य सचिव एम. लक्ष्‍मीनारायण ने हस्‍ताक्षर किए।

धरोहर गोद ले योजना के अंतर्गत 14 स्‍मारक, सात कंपनियों का चयन

   नई दिल्ली। नई दिल्‍ली के जनपथ पर आयोजित पर्यटन पर्व के हुए समापन समारोह में पर्यटन मंत्रालय की धरोहर गोद ले योजना के अंतर्गत 14 स्‍मारकों के लिए सात कंपनियों को आशय पत्र सौंपे गये। ये कंपनियां भविष्‍य की स्‍मारक मित्र होगी ।

   अंतर मंत्री स्‍तरीय निगरानी और दूरदर्शी समिति के सदस्‍यों ने शुरूआती चरण में प्रतिष्ठित संगठनों से मिली सकारात्‍मक प्रतिक्रिया की सराहना की, जिसमें सत्‍तावन (57) प्रतिक्रियाएं प्राप्‍त हुई। सात (7) अभिरूचि व्‍यक्‍त करने के जरिये चौदह (14) स्‍मारकों का चयन किया गया।
  विस्‍तृत जांच के बाद स्‍मारक मित्र चुनने के लिए आतिथ्‍य, यात्रा और बैंकिंग उद्योग की निम्‍नलिखित कंपनियों का चयन किया गया। दिल्‍ली स्थित जंतर-मंतर को गोद लेने के लिए एसबीआई फाउंडेशन का चयन किया गया।
    कोणार्क का सूर्य मंदिर, भुवनेश्‍वर का राजा रानी मंदिर, जयपुर और ओडिशा के रत्‍नागिरी स्‍मारक को गोद लेने के लिए टी के इंटरनेशनल लिमिटेड को चुना गया। कर्नाटक के हम्‍पी, जम्‍मू-कश्‍मीर के लेह पेलेस, दिल्‍ली का कुतुब मीनार, महाराष्‍ट्र की अजंता गुफा को गोद लेने के लिए यात्रा ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड का चयन किया गया।
    कोच्चि के मत्‍तानचेरी पेलेस संग्रहालय और दिल्‍ली का सफदरजंग मकबरा गोद लेने के लिए ट्रेवल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को चुना गया। गंगोत्री मंदिर क्षेत्र और गोमुख तक के मार्ग और जम्‍मू कश्‍मीर के माउंट स्टोककांगरी, लद्दाख को गोद लेने के लिए एडवेन्‍चर टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया का चयन किया गया।
    दिल्‍ली की अग्रसेन की बावड़ी को गोद लेने के लिए स्‍पेशल होलीडेज ट्रेवल प्राइवेट लिमिटेड का चयन दिल्‍ली के रोटरी क्‍लब के साथ किया गया। दिल्‍ली के पुराने किले को गोद लेने के लिए एनबीसीसी को चुना गया। विश्‍व पर्यटन दिवस अर्थात् 27 सितम्‍बर, 2017 को राष्‍ट्रपति ने पर्यटन मंत्रालय की ‘एक धरोहर गोद ले योजना’ का शुभारंभ किया था। 
   इसके बाद पर्यटन मंत्रालय ने निजी, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और कॉरपोरेट जगत के व्‍यक्तियों को स्‍मारक स्‍थलों को गोद लेने और संरक्षण तथा विकास के माध्‍यम से स्‍मारकों और पर्यटन स्‍थलों को स्‍थायी बनाने का दायित्‍व निभाने के लिए आमंत्रित किया था। यह योजना संस्‍कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के सहयोग से पर्यटन मंत्रालय का असाधारण प्रयास है।
     इसके जरिये देशभर के स्‍मारकों, धरोहरों और पर्यटन स्‍थलों को विकसित कर पर्यटक अनुकूल बनाने के लिए योजनाबद्ध और चरणबद्ध तरीके से पर्यटन संभावना तथा सांस्‍कृतिक महत्‍व को बढ़ाना है। भारत अपने समृद्ध और विविध सांस्‍कृतिक तथा प्राकृतिक स्‍मारकों के लिए विश्‍वभर में प्रसिद्ध है।

भारतीय नौसेना में शिप-बोर्न मल्टी-रोल हेलीकाप्टरों व पनडुब्बियों की कमी

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में आयोजित किये जा रहे नौसेना के कमांडरों के सम्मेलन को आज संबोधित किया। जो इस साल के द्विवार्षिक नौसेना कमांडरों के सम्मेलन का दूसरा संस्करण है।


 रक्षा मंत्री ने देश के समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना के सभी कर्मियों को बधाई दी। उन्होंने पड़ोसी समुद्री इलाकों में हाल में हुए घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए, भारतीय नौसेना को समुद्र में मजबूत बनने और समुद्रीय क्षेत्र में किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए सदैव तैयार और सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया। 
     रक्षा मंत्री ने पूर्व में दक्षिणी चीन सागर और जापान सागर से लेकर पश्चिम में फारस की खाड़ी और अटलांटिक महासागर तथा अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती रोकने के केन्द्रित प्रयासों सहित दक्षिण में आस्ट्रेलिया के तटों पर पिछले वर्ष के दौरान जहाजों, पनडुब्बियों और वायुयानों की नियमित तैनाती के माध्यम से उच्च परिचालन गति बनाये रखने की प्रशंसा की।
      कई द्विपक्षीय अभ्यासों में भागीदारी और इस वर्ष की शुरूआत में अमेरिका और जापानी नौसेना के साथ मालाबार अभ्यास की अभूतपूर्व सफलता की भी उन्होंने सराहना की। स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भारतीय नौसेना द्वारा ली गई बढ़त की प्रशंसा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सेना मुख्यालयों, मंत्रालय और उद्योग की सामूहिक जिम्मेदारी है कि भारत में उपकरणों और प्रणालियों के विकास का संवर्धन करने के लिए सूक्ष्म लघु और मध्यम, उद्यमों को बढ़ावा देने वाले एक अधिक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करे ताकि रक्षा क्षेत्र में आयात निर्भरता को कम किया जा सके।
     उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना शिप-बोर्न मल्टी-रोल हेलीकाप्टरों, परम्परागत पनडुब्बियों और खदान काउंटर मापन जहाजों की कमी का सामना कर रही है जिसे नौसेना की क्षमता को बनाए रखने के लिए तुरन्त दूर किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कमांडरों को आश्वासन दिया कि इन मुद्दों को उचित महत्व दिया जा रहा है। जल्द से जल्द इन कमियों को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
  रक्षा मंत्री ने हिंद महसागर क्षेत्र के तटों पर अपनी क्षमता का निर्माण करने और क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नौसेना के रचनात्मक प्रयासों की भी सराहना की, उन्होंने नियमित आधार पर हिंद महासागर क्षेत्र के तटवर्ती राष्ट्रों से नौसेना कर्मियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिलाने के लिए भारतीय नौसेना द्वारा की गई पहलों का भी उल्लेख किया। 
    हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मुद्दों के सामूहिक समाधानों का पता लगाने में सहायता करने हेतु और अगले मास गोवा में आयोजित किये जाने वाले गोवा समुद्रीय सम्मेलन के माध्यम से व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक दर्शकों को भारत और भारतीय नौसेना के रणनीतिक और परिचालन दृष्टिकोण को सामने लाने में मदद के लिए पूर्ण रूपेण क्षेत्रीय मंच के संस्थानीकरण की भी उन्होंने प्रशंसा की। 
    उन्होंने कहा कि अगले वर्ष की शुरूआत में पोर्ट ब्लेयर में आयोजित होने वाला ‘मिलान 2018’ क्षेत्रीय समुद्री मुद्दों और सुरक्षा चुनौतियों के बारे में आम प्लेटफार्म पर विचार विमर्श करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच होगा। 
   रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी देश के समुद्री हितों का उसके आर्थिक विकास के साथ एक महत्वपूर्ण संबंध है। मजबूत तथा विश्वसनीय भारतीय नौसेना को सुनिश्चित करके इन हितों की हर कीमत पर सुरक्षा की जाएगी। चार दिवसीय नौसेना के कमांडरों के सम्मेलन के विचार-विमर्श का आज तीसरा दिन है, जिसमें नौसेना का शीर्ष स्तर का नेतृत्व पिछले छह महीनों के दौरान की गई प्रमुख परिचालन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक गतिविधियों की समीक्षा कर रहा है। 
    सम्मेलन में समुद्री क्षेत्र में (नए मिशन आधारित तैनाती अवधारणा) पूरे अभियान के दौरान तैनाती के बारे में भारतीय नौसेना की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।

Thursday, 26 October 2017

श्रोता मापन प्रणाली लोकतांत्रिक होनी चाहिए

   नई दिल्ली। सूचना और प्रसारण तथा कपड़ा मंत्री श्रीमती जुबिन स्मृति इरानी ने कहा है कि प्रसारण के आदर्श ढांचे को लोकतांत्रिक दर्शक पर फोकस करना चाहिए।

 सूचना और प्रसारण तथा कपड़ा मंत्री श्रीमती जुबिन स्मृति इरानी ने कहा इसका आधार सटीक मापन प्रणाली होनी चाहिए जो क्षेत्रीय भाषाओं की शक्ति, दर्शकों उपभोक्ताओं की विभिन्न रूचियों को दर्शाती हो। एजेंडा निर्धारण, सृजनात्मक विषय वस्तु तथा मुख्यधारा और क्षेत्रीय मंचों से संबंधित विषयों की खाई को पाट सके। 
    श्रीमती इरानी यहां लोकतंत्र के लिए आदर्श प्रसारण विषय पर 2017 का सरदार पटेल स्मारक व्याखान दे रही थीं।
   सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि प्रसारण क्षेत्र कारोबारी प्रस्तावों और प्रौद्योगिकी उन्नयन पर आधारित है। प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम इस बात का आदर्श उदाहरण है कि कैसे टेक्नोलॉजी प्लेटफार्म प्रधानमंत्री के संदेश को नागरिकों की समझदारी से जोड़ता है। प्रधानमंत्री के द्वारा प्रत्येक प्रसारण में उठाए गए विषयों पर जागरूकता होती है।
     प्रसारण क्षेत्र के समाचार भाग में वर्तमान प्रवृत्तियों की चर्चा करते हुए श्रीमती इरानी कहा कि आज समाचार एक ‘दर्शक का खेल’ हो गया है, क्योंकि टेक्नोलॉजी ने विषय-वस्तु और प्रसारण के बीच की रेखा को धुंधली बना दिया है। इसके परिणामस्वरूप मीडिया का एक वर्ग तो संहिता, आचार और मर्यादा नियमों का पालन करता है, जबकि दूसरा वर्ग टीआरपी की दौड़ में लगा रहता है। 
   परिणामस्वरूप शीर्षक हैश टैग के साथ स्पर्धा करते हैं। यह देश में सोशल मीडिया विस्फोट की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सोशल मीडिया सूचना प्रसार का नया मार्ग प्रदान कर रहा है। सार्वजनिक प्रसारणकर्ता के बारे में श्रीमती स्मृति इरानी ने कहा कि सार्वजनिक प्रसारणकर्ता ने निजी चैनलों के कारोबार और मुनाफा हित से ऊपर जनहित को रखा है। यह प्रसार भारती के अनिवार्य है कि देश की प्रगति के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष बात कहे।
    सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने सार्वजनिक प्रसारणकर्ता से साधारण व्यक्ति के इर्द-गिर्द कहानियां गढ़ने का आह्वान किया ताकि इसका प्रभाव भारत के अंदर और बाहर पड़े। सूचना और प्रसारण मंत्रालय इंटरनेट, मोबाइल, कंटेंट, एनीमेशन और गेमिंग के क्षेत्र में युवा पीढ़ी के द्वारा टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग को देखते हुए डिजीटल क्षेत्र में विशेष सृजन के लिए ‘डिजाइन थिंकर्स’ की अवधारणा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास करेगा।
   इसमें प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए 2022 तक के नए भारत के विजन के तत्वों को शामिल किया जाएगा। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की शक्तियों का उल्लेख करते हुए श्रीमती इरानी ने कहा कि सूचना सेवा अधिकारियों के प्रोफाइल को भविष्य में कौशल और एकीकृत प्रशासनिक अनुभव प्रदान कर मजबूत बनाया जाएगा ताकि सूचना के माध्यम से अधिकारी लोगों की नीति और कार्यक्रमों को प्रस्तुत कर सकें।
    यह सूचना प्रसार चैनल के माध्यम से लोगों की सेवा की ढांचा बनाने के सरदार पटेल के विजन के अनुरूप होगा। इस वार्षिक व्याखान का आयोजन भारत के पहले सूचना और प्रसारण मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के सम्मान में आकाशवाणी द्वारा किया गया था। 
  व्याखान का पहला आयोजन 1955 में किया गया था और पहला स्मृति व्याखान श्री सी. राजगोपालाचारी ने दिया था। पहले के वर्षों के वक्ताओं में डॉ. जाकिर हुसैन, श्री मोरारजी देसाई, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और अन्य प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं।

बिजली भारत में आर्थिक विकास का भविष्य

   नई दिल्ली। विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आर.के. सिंह ने यहां तीसरे ग्लोबल इंवेस्टर्स इंडिया फोरम को संबोधित किया।

   इस समारोह का थीम था विचार, नवाचार, और भारत में लागू और निवेश करना। इसमें विश्व उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों ने भाग लिया। समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत में भविष्य की बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए आशा की जाती है कि प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत अंधाधुंध गति से बढ़ेगी और अगले 5 से 7 वर्षों में तिगुनी हो जाएगी।
    विद्युत मंत्री ने उद्योग जगत के सदस्यों को आश्वासन दिया कि सरकार बिजली क्षेत्र में निवेश करने में सभी संभव सहायता देगी और सभी बाधाओं को दूर करेगी। उन्होंने कहा कि बिजली भारत में आर्थिक विकास का भविष्य है और यह विकास उद्योग जगत की भागीदारी के बिना नहीं हो सकता। 
   सिंह ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने का आमंत्रण दिया। भारत में बिजली क्षेत्र को नया स्वरूप दिए जाने के बारे में आर.के. सिंह ने कहा उनका मंत्रालय राज्य सरकार/बिजली खरीद समझौता (पीपीए) का सम्मान करने वाली बिजली वितरण कंपनियों तथा दोष के लिए दंड सहित अनेक विषयों पर कानूनों को संहिताबद्ध करने के अंतिम चरण में है। 
  लाइसेंस नवीकरण के पहले व्यस्त लोड सहित 100 प्रतिशत बिजली आवश्यकता कवर करने के लिए बिजली वितरण कंपनियों को पीपीए से जोड़ना होगा। नवीकरणीय खरीद दायित्वों को वैधानिक बनाया जाएगा, स्मार्ट मीटर अनिवार्य किए जाएंगे और बिजली बिल भुगतान नहीं करने के लिए दंड लगाया जाएगा। 
   सिंह ने बताया कि निकट भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से होने वाले परिवर्तनों के साथ चलने के लिए उद्योग को हरित ऊर्जा गलियारा, बैट्री भंडारण प्रौद्योगिकी, ग्रिड सुधार व इलेक्ट्रिक वाहन कार्यक्रम में निवेश करने के लिए सरकार के साथ साझेदारी करने की आवश्यकता है। 
    उन्होंने उपरोक्त लक्ष्य को हासिल करने के लिए भविष्य की रणनीति सरकार के साथ मिलकर तय करने के लिए उद्योग जगत को आमंत्रित किया। सिंह ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा में दुनिया का नेतृत्व करने का हमारा समय आ गया है और इस कोशिश में उद्योग जगत को पीछे नहीं रहना चाहिए। 
   समारोह का आयोजन एसौचेम द्वारा किया गया जिसमें विश्व उद्योग जगत के दिग्गज उपस्थित थे, जिन्होंने विद्युत मंत्री तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से विचार-विमर्श किया।

सुलभ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का हब बन रहा भारत

  नई दिल्ली। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि भारत सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का हब बन रहा है जहाँ दुनिया के सभी देशों के नौजवान शिक्षा हेतु बड़ी संख्या में आ रहे हैं। 

  नई दिल्ली में मलेशिया में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे संगठन पिंटा के 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से भेंट के दौरान नकवी ने कहा कि केंद्र सरकार के पिछले 3 वर्षों के दौरान शिक्षा प्राप्त करने हेतु भारत आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में बड़े पैमाने में बढ़ोतरी हुई है। नकवी ने कहा कि शिक्षा ही सशक्तिकरण का केंद्र बिंदु है। 
  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार अल्पसंख्यकों सहित सभी तबकों के शैक्षिक सशक्तिकरण के प्रति मजबूती से काम कर रही है। नकवी ने पिंटा के प्रतिनिधिमंडल को केंद्र सरकार द्वारा समाज के सभी कमजोर तबकों सहित अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण एवं रोजगारपरक कौशल विकास के लिए शुरू की गई योजनाओं जैसे 3टी- टीचर, टिफ़िन, टॉयलेट, ग़रीब नवाज़ कौशल विकास योजना, बेगम हजरत महल बालिका छात्रवृति आदि की जानकारी दी। 
     नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय ने बड़ी संख्या में मदरसों को 3टी से जोड़कर उन्हें मुख्यधारा एवं आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने हेतु बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। पिंटा प्रतिनिधिमंडल से भेंट में अल्पसंख्यक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन के सचिव, फाउंडेशन के सदस्य, एवं अन्य बुद्धिजीवी भी उपस्थित रहे।
   पिंटा प्रतिनिधिमंडल ने अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा सभी अल्पसंख्यक तबकों के शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए चल रही योजनाओं की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार द्वारा मदरसों को मुख्यधारा एवं आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने के प्रयासों की भी सराहना की।

जम्‍मू-कश्‍मीर सीमा पर बंकरों का निर्माण शीघ्र

    नई दिल्ली। जम्मू और कश्मीर की मुख्यमंत्री सुश्री महबूबा मुफ्ती ने यहां केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक की।

 बैठक में गृह राज्‍यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर, केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और गृह मंत्रालय तथा राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
    बैठक में निर्णय लिया गया कि सड़क, बिजली और स्‍वास्‍थ्‍य सहित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए ऋणभार मुक्‍त भूमि उपलब्‍ध कराकर प्रधानमंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के अंतर्गत परियोजनाओं में तेजी लाई जाए। 
  प्रधानमंत्री के विकास पैकेज के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के लिए (80,068 करोड़ रुपये) केन्द्र सरकार के मंत्रालयों से संबंधित 63 प्रमुख विकास परियोजनाओं के लिए, 62,599 करोड़ रुपये (लगभग 78 प्रतिशत) की मंजूरी दी गई है। 22,042 करोड़ रुपये (लगभग 28 प्रतिशत) की राशि जारी की गई है।
   सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) के तहत परियोजनाओं का चयन करते हुए सीमा क्षेत्रों (0-10 किलोमीटर) के विकास पर विशेष बल दिया जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि सीमा क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीमा पर बंकरों का निर्माण शीघ्र ही किया जाएगा। 
   यह भी फैसला किया गया कि कश्मीरी प्रवासियों, पारगमन आवास, सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से नकद राहत/मानदेय के हस्तांतरण और जम्मू-कश्मीर के युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए अतिरिक्त रोजगार से संबंधित विकास परियोजनाओं को गति प्रदान की जाएगी।

अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्‍स डब्‍ल्‍यू. टिलरसन ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

     नई दिल्ली। अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्‍टेट (विदेश मंत्री) रेक्‍स टिलरसन ने दोपहर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से मुलाकात की। 

    प्रधानमंत्री ने सेक्रेटरी टिलरसन का उनके वर्तमान कार्यकाल की पहली भारत यात्रा पर स्‍वागत किया। प्रधानमंत्री ने इस साल जून में राष्‍ट्रपति ट्रंप के साथ‍ द्विपक्षीय सामरिक भागीदारी पर हुई सकारात्‍मक और दूरगामी वार्ता की गर्मजोशी की सराहना की। सेक्रेटरी टिलरसन ने प्रधानमंत्री से द्विपक्षीय सहयोग की सामग्री, गति और संभावनाओं को मजबूती एवं रफ्तार देने की दिशा में आगे और कदम उठाने का संकल्‍प साझा किया। 
   उन्‍होंने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका की मजबूत भागीदारी न केवल दोनों देशों के पारस्‍परिक फायदे के लिए है बल्कि यह क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्थिरता और समृद्धि की संभावनाओं पर भी उल्‍लेखनीय सकारात्‍मक प्रभाव डालती है।
  राष्‍ट्रपति ट्रंप की नई दक्षिण एशिया नीति के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने अफगानिस्‍तान में शांति एवं स्थिरता लाने के दौरान आतंकवाद, आतंकवादी ढांचे, सुरक्षित ठिकानों और समर्थन को खत्म करने के उद्देश्‍यों में समानता का उल्‍लेख किया। 
    इस संदर्भ में सेक्रेटरी टिलरसन ने इस क्षेत्र की अपनी हालिया यात्रा के बारे में प्रधानमंत्री के साथ विचार-विमर्श किया। उन्‍होंने क्षेत्रीय स्थिरता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने और आतंकवाद का उसके सभी रूपों से मुकाबला करने के लिए प्रभावी तौर पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। 
   इससे पहले सेक्रेटरी टिलरसन ने विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज और राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ भी विस्‍तृत चर्चा की।

Wednesday, 25 October 2017

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण महत्वपूर्ण

     नई दिल्ली। रक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने कहा है कि स्वदेशीकरण किसी भी संगठन के लिए महत्वपूर्ण होता है। लेकिन रक्षा क्षेत्र के लिए यह अधिक आवश्यक है क्योंकि इससे आत्मनिर्भरता बढ़ती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। 

   उन्होंने यहां समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय सेना का स्वदेशी प्रौद्योगिकीय सशक्तिकरण विषय पर एक सम्मेलन का उद्घाटन किया। डॉ. भामरे ने कहा है कि सभी हितधारकों को स्वदेशीकरण के महत्व को पूरी तरह से अपनाना चाहिए और भविष्य के सभी अधिग्रहण कार्यक्रमों में मेक इन इंडिया को लागू करना चाहिए। 
   उन्होंने भारतीय सेना की सराहना करते हुए कहा कि सेना ने इस उद्देश्य की दिशा में न केवल कई पहल की है बल्कि सैन्य डिजाइन ब्यूरो भी गठित किया है, जो भारतीय उद्योग तथा शैक्षणिक समुदायों की चर्चाओं और सहभागिता सुविधा उपलब्ध कराने के लिए असाधारण संगठन है। रोजमर्रा के सभी पहलुओं में प्रौद्योगिकी व्याप्त है। 
    उन्होंने बताया कि युद्ध में इसकी प्रासंगिगता सबसे महत्वपूर्ण है। बेहतर प्रौद्योगिकियों वाले पक्ष की हमेशा जीत होगी। उन्होंने कहा, पूरी तरह से स्वदेश में विकसित प्रौद्योगिकी से रक्षा क्षेत्र सही मायने में आत्मनिर्भर होगा। रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि हाल ही में सरकार ने रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए कई पहल की है। रक्षा मंत्रालय में विशिष्ट परियोजनाओं के लिए प्रौद्योगिकीय विकास कोष है। 
    उन्होंने कहा कि देश में मेड इन इंडिया मंच को पूरी तरह से अंगीकार करने के लिए स्किल इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया जैसी पहलों से रक्षा क्षेत्र में आवश्यक पारिस्थितिकीय तंत्र का निर्माण होगा। डॉ. भामरे ने कहा है कि सरकार ने रक्षा क्षेत्र को अपने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के केंद्र में रखा है। 
    उन्होंने कहा कि विभिन्न कंपनियां देश के अत्यधिक प्रतिभावान और कुशल जन बल का उपयोग कर भारत में निवेश करने की इच्छा व्यक्त कर रही हैं। इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं और मित्र देशों को भी उत्पादों का निर्यात किया जा सकता है।
  डॉ. भामरे ने समारोह स्थल पर समाधान और नवाचार की एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि सेना के लिए आवश्यक उपकरणों की जरूरतों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए सेना ने देश में शैक्षिक और उद्योग को प्रोत्साहित किया है।
      इस अवसर पर फिक्की के महासचिव डॉ. संजय बारू, भारत फोर्ज लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) श्री बाबा एन कल्याणी और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सुब्रत साहा ने भी अपने विचार रखे। इस कार्यक्रम में भारतीय सेना, रक्षा मंत्रालय, फिक्की के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग तथा शैक्षिक समुदाय के कई प्रतिनिधि शामिल हुए।

कर्नाटक भारतीय अर्थव्यवस्था का इंजन

    कर्नाटक। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बैंगलुरू में विधान सौध के 60 वर्ष पूरा होने के अवसर पर आयोजित वज्र महोत्सव – हीरक जयंती समारोह में कर्नाटक विधान सभा और विधान परिषद के सदस्यों को संबंधित किया। 

   इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह इस भवन (विधान सौध) की 60वीं वर्षगांठ ही नहीं है, बल्कि दोनों सदनों में बहसों और चर्चाओं की हीरक जयंती है। जिनके आधार पर विधेयक और नीतियां पारित की गईं। जिनसे कर्नाटक के लोगों का जीवन बेहतर हुआ। इतना ही नहीं दोनों सदन कर्नाटक के लोगों के सिद्धांतों और आकांक्षाओं तथा ऊर्जा और गतिशीलता का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। 
     यह इमारत कर्नाटक में लोक सेवा के इतिहास का स्मारक है। इन दोनों सदनों की कार्यवाहियों में राजनीतिक जगत के कई दिग्गज शामिल हुए हैं। उन्होंने कई स्मरणीय चर्चाएं की हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि कर्नाटक का स्वप्न अकेले कर्नाटक के लिए ही नहीं है बल्कि पूरे देश का सपना है।
    कर्नाटक भारतीय अर्थव्यवस्था का इंजन है। यह एक छोटा भारत है जो अपनी सांस्कृतिक और भाषाई विशिष्टता खोए बिना पूरे देश के युवाओं का ध्यान खिंचता है। युवा यहां पर ज्ञान और नौकरी पाने के लिए आते हैं। वे अपना श्रम तथा बुद्धि निवेश करते हैं, जिससे सभी लाभांवित होते हैं।
   राष्ट्रपति ने कहा कि विधायक लोक सेवक होने का साथ ही राष्ट्र निर्माता हैं। दरअसल जो भी व्यक्ति ईमानदारी और समर्पण से अपने कर्तव्य निभाता है वह राष्ट्र निर्माता है। इस भवन का प्रबंधन करने वाले राष्ट्र निर्माता हैं। इसकी सुरक्षा करने वाले राष्ट्र निर्माता हैं। सामान्य नागरिकों के प्रयासों से नियमित रूप से जो प्रतिदिन कार्य किए जाते हैं, उससे राष्ट्र निर्मित होता है। 
     इस विधान सौध में बैठ कर काम करने वाले विधायकों को विश्वास होता है कि वे इसे कभी नहीं भूलेंगे। इससे प्रेरणा लेकर अपना कार्य जारी रखेंगे। 
  राष्ट्रपति ने कहा कि हम विधायिका के तीन ‘डी’ से वाकिफ हैं। जिनका अर्थ है - डिबेट (बहस), डीसेंट (असहमति) और डिसाइड (फैसला) करने का स्थान है। और अगर हम इसमें चौथा ‘डी’ डिसेंसी (सभ्यता) जोड़ दें तो पांचवा डी अर्थात डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) वास्तविकता बन जाएगा। 
     विधायिका राजनीतिक विश्वास, जाति और धर्म, लिंग या भाषा से ऊपर कर्नाटक के लोगों की इच्छाओं, आकांक्षाओं और आशाओं का प्रतीक है। हमारे लोगों के सपनों को पूरा करने के लिए दोनों सदनों की सामूहिक बुद्धिमत्ता की आवश्यकता है। 
  राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र के पवित्र मंदिर के रूप में विधान सभा और विधान परिषद को कार्य करना चाहिए एवं राजनीतिक तथा नीतिगत स्तर को उठाने में योगदान देना चाहिए। कर्नाटक के लोगों के प्रतिनिधि के रूप में दोनों सदनों के सदस्यों के ऊपर विशेष जिम्मेदारी है।
      उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि हीरक जयंति को न केवल अतीत के गौरव के रूप में बल्कि इसे बेहतर भविष्य के लिए प्रतिबद्ध होने के रूप में मनाया जाए।

भारत-एशियाई विकास बैंक के बीच 300 मिलियन डॉलर का समझौता

    नई दिल्ली। भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने पश्चिम बंगाल में वित्तीय सुधारों के लिए 300 मिलियन डॉलर के एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं ताकि राज्य में सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। 

    दूसरे पश्चिम बंगाल विकास वित्त कार्यक्रम का उद्देश्य अनुत्पादक व्यय को कम करके और राजस्व संग्रह में बढ़ोत्तरी के माध्यम से सार्वजनिक निवेश को बढ़ाना है। कार्यक्रम के पहले चरण में 400 मिलियन डॉलर का व्यय हुआ था।
  वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग में सयुंक्त सचिव समीर कुमार खरे नें बताया कि कार्यक्रम का लक्ष्य सुधारों का दायरा बढ़ाना, व्यय को तार्किक बनाना, राजकोषीय प्रशासन में सुधार और राज्य में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाना है।
    भारत के लिए एडीबी के निदेशक केनी केची योकोयामा ने कहा, नया कार्यक्रम राज्य में उच्च सार्वजनिक निवेश को बनाए रखने के लिए आवश्यक वित्तीय माहौल बनायेगा, जो राज्य की वित्त प्रणाली को संतुलित और स्थायी बनाने में मददगार होगा। 
     समझौता पत्र पर पश्चिम बंगाल की ओर से वित्त विभाग के सचिव परवेज़ अहमद सिद्दकी ने किए जबकि एडीबी की ओर से भारत के लिए एडीबी के निदेशक केनी केची योकोयामा ने हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम राज्य में सार्वजनिक निवेश के साथ-साथ निजी क्षेत्र के निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा।
    इससे जरूरी ढांचागत सुविधाएं और सहयोग प्रदान किया जाएगा। सार्वजनिक और निजी साझेदारी का जोर मुख्यत: स्वास्थ्य और शिक्षा में क्षेत्र में रहेगा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए पंजीकरण और लाइसेंस की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।

Tuesday, 24 October 2017

50 नए बीओपी स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव

    ग्रेटर नोएडा। केन्‍द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भारत-तिब्‍बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 56वीं स्‍थापना दिवस परेड में आज आईटीबीपी की 39वीं बटालियन, सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा में शामिल हुए। 

  इस अवसर पर संस्‍कृति राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) और पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन राज्‍य मंत्री डॉ. महेश शर्मा, आईटीबीपी के महानिदेशक आर के पचनंदा और वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्थित थे। राजनाथ सिंह ने सलामी ली और स्‍थापना दिवस परेड का निरीक्षण किया। परेड में महिला दल के नेतृत्‍व में कमांडो, स्‍कि‍ईंग, पर्वतारोहण, नक्‍सलियों के खिलाफ अभियानों और विभिन्‍न सीमावर्ती टुकडि़यों ने बल के सभी पहलुओं को प्रदर्शित किया।
      परेड में पहली बार हाल ही में आईटीबीपी में शामिल किए गए हिम स्‍कूटर, सभी क्षेत्रों के अनुकूल विभिन्‍न प्रकार के वाहनों और आधुनिक एसयूवी, पोल नेट भी थे। 
    इस अवसर पर केन्‍द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आईटीबीपी के जवानों ने 9000 फुट से लेकर 18000 फुट तक की ऊंचाई पर कठिन परिस्थितियों में सीमा की सुरक्षा करते हुए अपने प्राणों के बलिदान दिए हैं। उन्‍होंने कहा कि आईटीबीपी न केवल भारत-चीन सीमा की रक्षा करती है बल्कि इसकी देश की आंतरिक सुरक्षा में भी जिम्‍मेदार भूमिका है। 
    उन्‍होंने कहा कि आईटीबीपी के जवान पूर्वोत्तर तथा वामपंथी नक्‍सल प्रभावित क्षेत्रों में भी तैनात किए जाते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्‍होंने स्‍वयं भारत-चीन सीमा चौकियों (बीओपी) का दौरा किया और देखा है कि आईटीबीपी के जवान -40 डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान तथा ऑक्‍सीजन की कमी वाली कठिन परिस्थितियों में कैसे अपना कर्तव्‍य निभाते हैं।
      उन्‍होंने कहा कि गृह मंत्रालय को 50 नए बीओपी स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुआ है, जिस पर विचार किया जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि लद्दाख में ‘मॉडल बीओपी’ निर्मित किए जा रहे हैं। जिसका उद्देश्‍य बीओपी के अंदर 20 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखना है। उन्‍होंने कहा कि बाद में अन्‍य इलाकों में भी इसके समान बीओपी स्‍थापित किए जाएंगे। 
   आईटीबीपी कर्मियों की तकलीफों के बारे में बताते हुए उन्‍होंने कहा कि इन क्षेत्रों में निगरानी के लिए जवानों को हिम स्‍कूटर दिए गए हैं। इस प्रकार के अन्‍य क्षेत्रों में भी यह सुविधा उपलब्‍ध कराई जाएगी। राजनाथ सिंह ने कहा कि 35 बीओपी में उन्‍नयन कार्य भी शुरू किया गया है। इन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और खर्च के बारे में उन्‍होंने कहा कि दिवाली के अवसर पर सैनिकों को तोहफा दिया गया था जिसमें कॉल दरें 6.50 रुपये प्रति मिनट से घटाकर 1 रुपये प्रति मिनट कर दी गई थी। 
   उन्‍होंने कहा कि 11000 फुट की ऊंचाई पर तैनात सैनिकों को कम वजन वाले विशेष वस्‍त्र प्रदान किए गए हैं। उन्‍होंने कहा कि जल्‍द ही ऐसे वस्‍त्र और पर्वतारोहण के उपकरण 9000 फुट की ऊंचाई पर तैनात सैनिकों को भी दिए जाएंगे। उन्‍होंने आईटीबीपी में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आईटीबीपी के महानिदेशक की भी सराहना की।
     गृह मंत्री ने कहा कि चीन की सीमा पर तैनात सैनिकों को उनके प्रशिक्षण के दौरान चीनी भाषा भी सिखाई जाएगी। राजनाथ सिंह ने अधिकारियों से एक शहीद के परिवार की जिम्‍मेदारी उठाने का भी आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि शहीदों के परिजनों की मदद के लिए ‘भारत के वीर’ नाम से पोर्टल का शुरू किया गया है। शहीद के परिवार को कम-से-कम एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। 
   उन्‍होंने कहा कि अपना कर्तव्‍य निभाते हुए अपंग होने वाले सैनिकों की भी इस कोष से मदद की जाएगी। इस अवसर पर विशिष्‍ट सेवा के लिए 6 कर्मियों को राष्‍ट्रपति के पुलिस पदक और सराहनीय सेवा के लिए 26 कर्मियों को पुलिस पदक से सम्‍मानित किया गया। 
     गृह मंत्री द्वारा बल के पशुओं की सेवा के लिए विशेष पदक श्रेणी में छत्तीसगढ़ के नक्‍सल रोधी अभियानों में तैनात 29वीं बटालियन के बुनियादी प्रशिक्षण केन्‍द्र, भानु के अश्‍व ‘ब्‍लैक ब्‍यूटी’ और श्‍वान ‘मछली’ को सर्वेश्रेष्‍ठ अश्‍व तथा सर्वेश्रेष्‍ठ श्‍वान पदक से सम्‍मानित किया गया। 
  38वीं बटालियन को वर्ष-2017 की ‘सर्वेश्रेष्‍ठ गैर-सीमा बटालियन’ जबकि पहली बटालियन को ‘सर्वेश्रेष्‍ठ बटालियन’ की ट्रॉफी से नवाजा गया।

एक्‍सप्रेस-वे पर वायु सेना का सुपर हरक्‍यूलि‍स विमान उतारा

    लखनऊ। भारतीय स्‍टील प्राधिकरण (सेल) द्वारा 33,500 मीट्रिक टन इस्‍पात की आपूर्ति से निर्मित आगरा-लखनऊ एक्‍सप्रेस-वे पर भारतीय वायु सेना के विमानों को टच एंड गो लैंडिंग की सुविधा प्रदान की गई। 

   सेल ने इस परियोजना के लिए मुख्‍य रूप से भूकंप रोधी टीएमटी सरियों से बने कई उत्‍पादों की आपूर्ति की थी। सेल की बेहतरीन गुणवत्ता के भूकंप रोधी ईक्‍यूआर टीएमटी स‍रियें विभिन्‍न प्रकार के होते हैं। भारतीय वायु सेना ने 35000 किलोग्राम भार से शुरू होने वाले सी-130जे सुपर हरक्‍यूलिस विमान का आज एक्‍सप्रेस-वे पर टच एंड गो लैंडिंग का अभ्‍यास किया। 
    एक्‍स्प्रेस-वे पर भारतीय वायु सेना के विमान उतारने के विशेष अभियान में पहली बार सी-130जे परिवहन विमान को शामिल किया गया। इससे पहले वायु सेना ने अपने मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को यमुना एक्‍सप्रेस-वे और लखनऊ-आगरा एक्‍सप्रेस-वे पर उतारा था।
    ‘सबके जीवन में थोड़ा-सा सेल है’ इस टैग लाइन की भावना को ध्‍यान में रखते हुए कंपनी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की विशेष आवश्‍यकताओं और रक्षा जैसे महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों तथा बाजार की जरूरतों के अनुरूप विश्‍व स्‍तरीय स्‍टील उत्‍पादों का निर्माण करने पर ध्‍यान केन्द्रित कर रही है। 
  सेल सरदार सरोवर बांध, ढोला-सादिया पुल, चेनानी-नाशरी सुरंग से लेकर विभिन्‍न मेट्रो परियोजनाओं, बिजली संयंत्रों और गुजरात में लगने वाली एकता की प्रतिमा जैसे राष्‍ट्रीय महत्‍व की परियोजनाओं का अभिन्‍न अंग है।