Friday, 1 December 2017

देश के 91 प्रमुख जलाशयों में जल संग्रहण स्तर 2 प्रतिशत नीचे गया

      नई दिल्‍ली। देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 98.578 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 62 प्रतिशत है। 23 नवंबर, 2017 को समाप्त सप्ताह के दौरान यह 64 प्रतिशत था। 30 नवंबर, 2017 का संग्रहण स्‍तर पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 96 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 95 प्रतिशत रहा।

      इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है।
     इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधित लाभ देते हैं। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं।इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। 
    इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 11.81 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 66 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 59 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 66 प्रतिशत था। 
      इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण के बराबर है।
      पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 14.32 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 76 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 82 प्रतिशत थी।
       पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 72 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के संग्रहण से कम है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से बेहतर है।
     पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में सीडब्ल्यूसी की निगरानी में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 19.32 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 79 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 78 प्रतिशत थी।
     पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 72 प्रतिशत थी। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
    मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 24.15 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 57 प्रतिशत है।
    पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 83 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 63 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है। 
     दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 28.99 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 56 प्रतिशत है।
      पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 41 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 63 प्रतिशत थी। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से बेहतर है लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कम है।
      पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, एपी और टीजी (दोनों राज्‍यों में दो मिश्रित परियोजनाएं) आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। 
   पिछले वर्ष की इसी अवधि के लिए पिछले साल की तुलना में कम संग्रहण करने वाले राज्यों में पंजाब, राजस्‍थान, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और तेलंगाना शामिल हैं।

नागालैंड में आकर्षक पर्यटन केन्द्र बनने की क्षमता

     नागालैंड। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किसामा में नागालैंड के होर्नबिल महोत्‍सव और राज्य स्थापना दिवस आयोजन का उद्घाटन किया। 

     इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि होर्नबिल महोत्‍सव संगीत, नृत्‍य और भोजन के रूप में सालों से अपनाई गई नगा की समृद्ध संस्‍कृति और परंपराओं का प्रदर्शन है। किसामा में होर्नबिल महोत्‍सव और अंतर्राष्‍ट्रीय संगीत समारोह नगा समाज की विभिन्‍नता का द्योतक है।
      राष्‍ट्रपति ने कहा कि पिछली अर्द्ध शताब्‍दी नागालैंड की उपलब्‍धियों और कठिनाइयों का समय रही हैं। नागालैंड के लोगों ने कई तरह की परीक्षाएं दी। परंतु उनकी महत्‍वपूर्ण योग्‍यताएं और अच्‍छाइयां स्‍पष्‍ट रूप से प्रकट हुई। आज नागालैंड इतिहास रचने के कगार पर है। काफी सालों के दंगों के बाद अब कुछ उम्मीद हुई है। राज्य की जनता, सिविल सामाजिक संस्थाओं और सभी भागीदारों की सहायता से अब स्थाई शांति अवसर आया है। 
      उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के लिए न्याय-पूर्ण और सभी की अपेक्षाओं को पूरा करने वाला अंतिम समझौता शीघ्र ही कर लिया जाएगा। राष्ट्रपति ने कहा कि नागालैंड के युवा देश का गौरव हैं। वे स्वतंत्रता के बाद 1948 में लंदन में आयोजित ओलंपिक खेलों में राष्ट्रीय फुटबाल टीम का नेतृत्व करने वाले प्रथम कैप्टन डॉ. टी ए ओ के सच्चे अनुयायी हैं। 
      नागालैंड के युवा शेष भारत के लिए आदर्श हैं। इस राज्य की उल्लेखनीय बेटी टेम्सटुला इंसोंग ने वाराणसी में गंगा नदी के घाटों की सफाई का महत्वपूर्ण कार्य कर देश का दिल जीत लिया है। दूसरी नागा लड़की चिइवेलोउ थेले दिल्ली पुलिस के अपने अधिकारी बैच में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु कमांडो चुनी गई है।
      सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के रूप में राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें नागा सैनिकों और अधिकारियों के ऊपर अत्यधिक गर्व है। उनका स्थान देश के सर्वश्रेष्ठ सैनिकों में आता है। राष्ट्रपति ने कहा कि नागालैंड अभी और बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। राज्य की ताकत उसकी जैविक फसल, फूल और फलों के उत्पादन में है। नागालैंड में दुर्लभ औषधीय पौधे और जड़ी बूटियां हैं जो रोजगार पैदा करने और अर्थव्यस्था को आगे बढाने में मदद कर सकती हैं।
    उन्होंने स्थानीय रूप से किंग चिल्ली कही जाने वाली नागा जोलोकिया (सबसे तेज मिर्च) का जिक्र किया जो विश्व में सबसे अधिक तीखी मिर्च है। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे तीखे बिकने वाले सॉस में शामिल करने के लिए इसे बोतलबंद बनाने की आवश्यकता है। 
    उन्होंने कहा कि नागालैंड में आकर्षक पर्यटन केन्द्र बनने की भी क्षमता है। जो विरासत और संस्कृति का एक अद्वितीय मिश्रण और शानदार प्राकृतिक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा देश बड़ी तेजी से प्रगति कर रहा है और यह दुनिया की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
     हम एक विविध राष्ट्र हैं। हमारी भाषाई, जातीय, धार्मिक और भौगोलिक विविधता भारत को विशेष बनाती है - और यह हमारी सबसे बड़ी ताकत है। अब भारतीय होने का यह रोमांचकारी समय है और यह नागावासी होने का भी एक रोमांचक समय है। नागालैंड और पूर्वोत्तर भारत की कथा के केन्द्र हैं। नागालैंड के विकास के बिना, भारत का विकास अधूरा होगा।

नमामि गंगे के लिए 5 बिलियन डॉलर से भी अधिक निवेश

     नई दिल्‍ली। संयुक्त गणराज्य में भारतीय कंपनियों, अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओज्) ने नमामि गंगे अभियान के तहत ही घाटों, नदियों के अहातों, श्मशान घाटों और पार्कों जैसी सुविधाएं जुटाने के लिए 5 बिलियन डॉलर से भी अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।

    लंदन में 29 नवम्‍बर 2017 को आयोजित एक रोड शो में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा नौवहन मंत्री नितिन गडकरी देश के प्रमुख उद्योगपतियों से गंगा सफाई अभियान में भाग लेने की अपील की। 
   रोड शो का आयोजन गंगा सफाई राष्ट्रीय अभियान तथा संयुक्त गणराज्य में भारतीय उच्च आयोग द्वारा किया गया। 
   जिन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गए, उनमें पटना में गंगा नदी पर घाटों और सुविधाओँ हेतु वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल, कानपुर के लिए फोरसाइट समूह के रवि मल्होत्रा, हरिद्वार के लिए हिंदुजा समूह, कोलकाता के लिए इंडो रामा समूह के प्रकाश लोहिया शामिल हैं।
    परियोजनाओं का विकास, निर्माण तथा परिचालन इन कंपनियों द्वारा अपने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरादायित्व (सीएसआर) संबंधी कार्यकलापों के अंतर्गत किया जाएगा। लंदन वाटर केल्टिक रेनुएबल्स, मेडिफार्म, एनएचवी प्रौद्योगिकियां और अरकाताप सहित कई कंपनियों के साथ नदी सफाई हेतु नवीन प्रौद्योगिकियों के लिए समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किये गए।
    इनके अलावा, बहुत सी कंपनियों और व्यक्तियों ने 200 से अधिक परियोजनाओं की सूची में से, जिनके लिए निजी धन जुटाने की मांग की गई थी, कुछ परियोजनाएं अपने हाथ में लेने की सहमति जताई। घाटों, श्मशान घाटों, जलाशयों, पार्कों, स्वच्छता सुविधाओं, जन सुविधाओं और नदी अहातों के विकास की, जिनके लिए अधिक धन राशि की आवश्यकता है, 10 हजार करोड़ रूपये से भी अधिक की परियोजनाएं बनाई गई हैं।
     2500 करोड रूपये से भी अधिक की परियोजनाएं जिनके लिए निजी स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता है, एक पुस्तिका के रूप में भी प्रकाशित की गई हैं और स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय अभियान (एनएमसीजी) की वेबसाइट पर ई-बुकलेट के रूप में भी उपलब्ध हैं।
     सरकार व्यापारिक समुदाय से निवेदन कर रही है कि वे अपनी पसंद की परियोजनाओं में धन लगाकर नदी सफाई से जुड़े नामामि गंगे अभियान में योगदान दें।

अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से रेल की 180 किमी प्रति घण्टा की गति

   नई दिल्‍ली। प्रबंध निदेशक/एनसीआरटीसी विनय कुमार सिंह तथा मिग्यूल निइतो मेनॉर, महानिदेशक, एडीआईएफ ऑफ स्पेन ने पिछली सायं हरदीप सिंह पुरी, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री तथा मंत्रालय में सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा की उपस्थिति में इंडो- स्पेनिश तकनिकी सहयोग (सरकार से सरकार) समझौते पर हस्ताक्षर किये। 

   इस समारोह में फरनाण्डों नोकोलॉस पुईगार, अंतर्राष्ट्रीय निदेशक/एआईडीएफ, वरिष्ठ मंत्रालय अधिकारी, विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि तथा भारत में स्पेनिश दूतावास के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
     इस अवसर पर हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि इस समझौते से रेलपथ, संकेतन प्रणाली, चल स्टॉक, संरक्षा बहुल आकारीय एकीभवन, स्टेशन अभिकल्प इत्यादि के तकनीकि क्षेत्रों में प्रशिक्षण तथा सहयोग के अलावा विशिष्ट मामलों में तकनीकि परामर्श भी उपलब्ध होगा। 
     परियोजना के महत्व पर जोर देते हुए मिश्रा ने बताया कि इस समझौते से शहरी परिवहन के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग तथा विशेष रूप से आरआरटीएस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए संस्थानिक तंत्र की व्यवस्था होगी। 
   भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के संयुक्त उपक्रम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रेल आधारित क्षेत्रीय द्रुत पारगमन प्रणाली (आरआरटीएस) का अभिकल्प, निर्माण, परिचालन तथा रखरखाव का कार्य सौंपा गया है। प्रथम चरण में तीन आरआरटीएस गलियारे: दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-पानीपत तथा दिल्ली-अलवर स्मार्ट लाइनों को कार्यान्वयन की प्राथमिकता दी गई है।
    दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ चालू किये जाने वाला पहला गलियारा होगा जिसके लिए जियो-तकनीकी जांच, विस्तृत अभिकल्प, सुविधाओं के बदलाव की योजना तथा यातायात के बदलाव के कार्य सहित निर्माण पूर्व गतिविधियां प्रगति पर हैं। भारत में आरआरटीएस अपने प्रकार की पहली परियोजना होगी जिसमें रेलपथ, चल-स्टॉक तथा सिग्नल प्रणाली के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर 180 कि.मी प्रति घण्टा की गति की व्यवस्था होगी।
      भारत में उच्च स्पीड की इन प्रौद्योगिकियों की विशेषज्ञता और अनुभव की कमी के कारण परियोजना के कुशल कार्यान्वयन, प्रणाली संचलन तथा देश में ही क्षमता विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञता का सहारा लेना पडेगा।
     एआईडीएफ स्पेन, राज्य अधीन रेलवे संरचना कंपनी को नियोजन, विकासन, निर्माण, परिचालन तथा उच्च गति की रेलों के रखरखाव तथा मैड्रिड में सर्कानियस जैसी क्षेत्रीय रेल प्रणालियों का अनुभव है। एसएनसीएफ, फ्रांस की राजकीय रेलवे कंपनी ने भी आरआरटीएस परियोजनाओं में सहायता करने की इच्छा व्यक्त की है।
     इस सप्ताह के शुरू में एसएनसीएफ के प्रतिनिधि मंडल के हाल ही के दौरे के दौरान एनसीआरटीसी तथा एसएनसीएफ के बीच इसी प्रकार के समझौते की संभावनाओं को तलाशा गया था।

कृषि और पादप स्‍वच्‍छता सहयोग के लिए भारत-इटली के बीच समझौता

    नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि और पादप स्‍वच्‍छता के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और इटली के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर करने को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। 

    यह ज्ञापन जनवरी 2008 में हुए पूर्ववर्ती समझौता ज्ञापन का स्‍थान लेगा जो जनवरी, 2018 को समाप्‍त होने जा रहा है। इस समझौता ज्ञापन में पादप स्‍वच्‍छता संबंधी मामलों, कृषि उत्‍पादन और पशुपालन, कृषि अनुसंधान, खाद्य प्रसंस्‍करण और दोनों पक्षों द्वारा परस्‍पर रूप से अनुमत अन्‍य क्षेत्रों सहित दूसरे क्षेत्रों की वृहद श्रृंखला को शामिल करने का प्रावधान किया गया है।
   इस समझौता ज्ञापन में कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित सूचना के आदान-प्रदान, तकनीकी आदान-प्रदान प्रक्रिया के सुदृढ़ीकरण और कृषि मशीनीकरण/फार्म मशीनों एवं कृषि औद्योगिक अवसंरचनाओं, तकनीकी अवरोधों के समापन तथा आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों तथा प्रौद्योगिकियों आदि सहित पशुपालन के क्षेत्र में अर्जित अनुभवों के आदान-प्रदान का प्रावधान किया गया है। 
      इस समझौता ज्ञापन में कृषि सहयोग के लिए दीर्धकालिक पहल पर विचार करने के साथ-साथ विशिष्‍ट संयुक्‍त प्रकियाओं में पादप स्‍वच्‍छता जोखिमों में कमी लाने के दृष्टिगत कृषि सहयोग हेतु कृषि के क्षेत्र में द्विपक्षीय आदान-प्रदान की दृष्टि से एक संयुक्‍त कार्यदल की स्‍थापना का प्रावधान किया गया है।
     इससे दोनों देशों की सरकारी एंजेसियों, वैज्ञानिक एवं अकादमिक संस्‍थानों और व्‍यवसायिक समुदायों के बीच संपर्कों को प्रोत्‍साहन एवं सुविधा होगी और वे दोनों देशों के संबंधित अनुसंधान संस्‍थानों के बीच सहयोग को आगे बढ़ा पाएगें।

राष्‍ट्रीय पोषण मिशन की स्‍थापना को मंजूरी

     नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 9046.17 करोड़ रूपये के तीन वर्ष के बजट के साथ 2017-18 से शुरू होने वाले राष्‍ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) की स्‍थापना को मंजूरी प्रदान कर दी है। 

  एनएनएम एक शीर्षस्‍थ निकाय के रूप में मंत्रालयों के पोषण संबंधी हस्‍तक्षेपों की निगरानी, पर्यवेक्षण, लक्ष्‍य निर्धारित करने तथा मार्गदर्शन करेगा। 
   कुपोषण का समाधान करने हेतु विभिन्‍न स्‍कीमों के योगदान का प्रतिचित्रण। अत्‍यधिक मजबूत अभिसरण तंत्र प्रारंभ करना। आईसीटी आधारित वास्‍तविक समय निगरानी प्रणाली। लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने वाले राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों को प्रोत्‍साहित करना। आईटी आधारित उपकरणों के प्रयोग के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को प्रोत्‍साहित करना। आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों द्वारा रजिस्‍टरों के प्रयोग को समाप्‍त करना। आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्‍चों की ऊंचाई के मापन प्रारंभ करना। सामाजिक लेखा परीक्षा। लोगों को जन आंदोलन के जरिए पोषण पर विभिन्‍न गतिविधियों आदि के माध्‍यम से शामिल करना, पोषण संसाधन केंद्रों की स्‍थापना करना इत्‍यादि शामिल है। 
    यह कार्यक्रम लक्ष्‍यों के माध्‍यम से ठिगनेपन, अल्‍प पोषाहार, रक्‍त की कमी तथा जन्‍म के समय बच्‍चे के वजन कम होने के स्‍तर में कमी के उपाय करेगा। इससे बेहतर निगरानी समय पर कार्यवाही के लिए सावधानी जारी करने में तालमेल बिठाने तथा निर्धारित लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए मंत्रालय और राज्‍यों/संघ शासित क्षेत्रों को कार्य करने, मार्गदर्शन एवं निगरानी करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाएगा। इस कार्यक्रम से 10 करोड़ से ज्‍यादा लोगों को लाभ पंहुचेगा। 
     सभी राज्‍यों और जिलों को चरणबद्ध रूप से अर्थात् 2017-18 में 315 जिले, वर्ष 2018-19 में 235 जिले तथा 2019-20 में शेष जिलों को शामिल किया जाएगा। वर्ष 2017-18 से प्रारंभ तीन वर्षों के लिए 9046.17 करोड़ रूपये हैं। इसका सरकारी बजटीय समर्थन (50 प्रतिशत) तथा आईबीआरडी अथवा अन्‍य एमडीबी द्वारा 50 प्रतिशत वित्‍त पोषण होगा। 
     केंद्र तथा राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के बीच 60:40 पूर्वोत्‍तर क्षेत्रों तथा हिमालीय राज्‍यों के लिए 90:10 तथा संघ राज्‍य क्षेत्रों के लिए 100 प्रतिशत सरकारी बजटीय समर्थन होगा। तीन वर्ष की अवधि के लिए भारत सरकार का कुल अंश 2849.54 करोड़ रूपये होगा।
    राष्‍ट्रीय पोषण मिशन का लक्ष्‍य ठिगनापन, अल्‍पपोषण, रक्‍ताल्‍पता (छोटे बच्‍चों, महिलाओं एवं किशोरियों में) को कम करना तथा प्रति वर्ष अल्‍पवजनी बच्‍चों में क्रमश: 2 प्रतिशत, 2 प्रतिशत, 3 प्रतिशत तथा 2 प्रतिशत की कमी लाना है।
    हालांकि ठिगनेपन को कम करने का लक्ष्‍य 2 प्रतिशत है, मिशन वर्ष 2022 (2022 तक मिशन 25) तक 38.4 (एनएफएचएस-4) से कम कर के 25 प्रतिशत तक लाने का प्रयास करेगा। छह वर्ष से कम आयु के बच्‍चों और महिलाओं के बीच कुपोषण के मामले से निपटने के लिए सरकार ने कई स्‍कीमें लागू की हैं। इन योजनाओं के बावजूद देश में कुपोषण तथा संबंधित समस्‍याओं का स्‍तर ऊंचा है।
    योजनाओं की कोई कमी नहीं है किंतु आम लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए योजनाओं को एक-दूसरे के साथ तालमेल स्‍थापित करने में कमी देखने में आई है। एनएनएम सुदृढ़ व्‍यवस्‍था स्‍थापित करके वांछित तालमेल को कायम करेगा।