Wednesday, 26 April 2017

विश्वविद्यालयों का विकास शिक्षा के मंदिरों के रूप में हो

           राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हैदराबाद में उस्मानिया विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोहों के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। 

          राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हमें विश्वविद्यालयों का उच्चतर शिक्षा के मंदिरों के रूप में विकास करना चाहिए। उन्हें अध्ययन वातावरण के सृजन का स्थान होना चाहिए जहां विचारों का स्वतंत्र आदान प्रदान हो सके और छात्रों एवं शिक्षकों के रूप में ताकतवर मस्तिष्‍क आपस में विचारों का आदान प्रदान कर सकें। उस्मानिया विश्वविद्यालय की स्थापना इसी ध्येय के साथ की गई थी कि यह उत्कृष्टता का एक ऐसा संस्थान बनेगा जहां स्वतंत्र मस्तिष्‍क स्‍वतंत्रता के साथ विचारों का आदान प्रदान कर सकें, आपस में बातचीत कर सकें और शांतिपूर्ण सह अस्तित्‍व के साथ रह सकें। 

            राष्ट्र्पति ने कहा कि प्राचीन समय में भारत ने उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई थी। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला आदि जैसे विश्वविद्यालयों ने छात्रों एवं शिक्षकों के रूप में ताकतवर मस्तिष्कों को आकर्षित किया था।
 

            राष्ट्र्पति ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि आज उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में शैक्षणिक अवसंरचना में प्रचुर विकास हुआ है। बहरहाल, अभी भी चिंता के कुछ क्षेत्र हैं। उच्चतर शिक्षा के 100 से अधिक केंद्रीय संस्थानों की यात्रा कर चुकने के कारण, वह लगातार इस विषय पर जोर देते रहे हैं कि भारत के इन संस्थानों को अंतरराष्‍ट्रीय रैंकिंग प्रक्रिया में उनका उचित स्थान प्राप्त होना चाहिए। 

              उन्होंने कहा कि इस पहलू पर ध्यान दिए जाने के अतिरिक्त, मूलभूत अनुसंधान एवं शिक्षा पर भी बल दिए जाने की आवश्यकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि उद्योग एवं शिक्षा क्षेत्र के बीच कारगर अंत:संयोजन एवं परस्पर संपर्क किए जाने की जरूरत है। हम अलग थलग नहीं रह सकते। हमें अनुसंधान एवं नवप्रवर्तन में निवेश करने की आवश्यकता है जिससे कि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अपना उचित स्था्न प्राप्त कर सकें। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि इन विचारों को अनिवार्य रूप से व्यवहारिक कदम के रूप में रूपांतरित किया जाना चाहिए।

गरीबों के आवास के लिए एक लाख करोड़ का निवेश

            आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय ने 4200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए 1,00,537 और मकानों को मंजूरी दी है। 

            इसके साथ ही अब तक कुल मिलाकर 1,00,466 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी गई है। यह शहरी क्षेत्रों में किफायती मकानों के लिए वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2014 तक मंजूर किये गये 32,713 करोड़ रुपये के निवेश से 307 प्रतिशत ज्‍यादा है। नवीनतम मंजूरी के साथ ही मंत्रालय ने अब तक 34 राज्‍यों-केन्‍द्र शासित प्रदेशों में 2151 शहरों एवं कस्‍बों में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबकों के लिए 18,75,389 मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है। वहीं, दूसरी ओर 2004-2015 अवधि के दौरान 32,009 करोड़ रुपये के स्‍वीकृत निवेश के साथ 13.80 लाख मकानों को मंजूरी दी गई थी। 

              अब तक स्‍वीकृत किये गये कुल निवेश में 29409 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता, राज्‍य सरकारों की ओर से प्राप्‍त सहायता और लाभार्थियों का अंशदान शामिल है। नवीनतम मंजूरी के तहत मध्‍य प्रदेश को 57131 मकान, तमिलनाडु को 24576, मणिपुर को 6231, छत्‍तीसगढ़ को 4898, गुजरात को 4261, असम को 2389, केरल को 643, झारखंड को 331 और दमन एवं दीव को 77 मकान हासिल हुए हैं। कुल 2,66,842 मकानों को दी गई स्‍वीकृति के साथ मध्‍य प्रदेश पहली बार 18,283 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत दी गई मंजूरियों के मामले में पहली बार नंबर-1 बना है। तमिलनाडु 9,112 करोड़ रुपये की परियोजना लागत वाले 2,52,532 मकानों के साथ दूसरे नंबर पर है।

             मध्‍य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्‍ट्र, बिहार, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा, त्रिपुरा, पंजाब, राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़, केरल, असम, उत्‍तर प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, मिजोरम, उत्‍तराखंड, जम्‍मू-कश्‍मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा के लिए मकानों को मंजूरी दी गई है। अब तक जितने मकानों को मंजूरी दी गई हैं, उनमें से 6,89,829 मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है, जबकि 1,00,395 मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है।

प्रधानमंत्री ‘उड़ान’ नामक प्रथम उड़ान को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे

          प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 27 अप्रैल, 2017 को ‘उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) नामक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) के तहत शिमला-दिल्‍ली रूट पर प्रथम उड़ान को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

         इसके साथ ही प्रधानमंत्री ‘उड़ान’ के तहत कडप्पा-हैदराबाद और नांदेड़-हैदराबाद क्षेत्रों पर भी प्रथम उड़ान को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। नागरिक उड्डयन मंत्रालय उन हवाई अड्डों को हवाई कनेक्टिविटी सुलभ कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां वर्तमान में या तो हवाई सेवा बिल्‍कुल भी उपलब्‍ध नहीं है या बेहद कम संख्‍या में उपलब्‍ध है। क्षेत्रीय दृष्टि से महत्‍वपूर्ण शहरों में रहने वाले लोगों को हवाई यात्रा सुलभ कराने के लिए मंत्रालय ने अक्‍टूबर, 2016 में ‘उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) नामक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) शुरू की थी। विभिन्‍न मुद्दों पर विस्‍तारपूर्वक विचार-विमर्श करने और हितधारकों के साथ सलाह-मशविरा करने के बाद उड़ान योजना तैयार की गई थी। बाजार आधारित व्‍यवस्‍था के जरिये क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली यह योजना विश्‍व भर में अपनी तरह की पहली स्‍कीम है।

             उड़ान योजना राष्‍ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति (एनसीएपी) का एक अहम हिस्‍सा है, जिसे नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 15 जून, 2016 को जारी की थी। भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण (एएआई) क्रियान्‍वयनकारी एजेंसी है, जिसने आरसीएस-उड़ान के तहत प्राप्‍त 27 प्रस्‍तावों के लिए अनुबंध पत्र जारी किये हैं। हवाई अड्डों को कनेक्‍ट किया जाएगा, इन 27 प्रस्‍तावों के जरिये 27 मौजूदा सेवारत हवाई अड्डों, 12 मौजूदा कम सेवारत हवाई अड्डों और मौजूदा समय में गैर-सेवारत 31 हवाई अड्डों (कुल मिलाकर 70 हवाई अड्डे) को कनेक्‍ट किया जाएगा। 

           भौगोलिक विस्‍तार, इन प्रस्‍तावों के तहत भौगोलिक विस्‍तार काफी ज्‍यादा है, पश्चिम भारत के 24 हवाई अड्डों, उत्‍तर भारत के 17 हवाई अड्डों, दक्षिण भारत के  11 हवाई अड्डों, पूर्वी भारत के 12 हवाई अड्डों और पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के 6 हवाई अड्डों को कनेक्‍ट करने का प्रस्‍ताव हैं। इन 27 प्रस्‍तावों के जरिये 22 राज्‍यों और 2 केन्‍द्र शासित प्रदेशों को कनेक्‍ट किया जाएगा। रूट एवं नेटवर्क,  16 सुविचारित प्रस्‍ताव एकल रूटों (दो शहरों को जोड़ने वाले) और 11 प्रस्‍ताव नेटवर्कों (तीन या उससे अधिक शहरों को जोड़ने वाले) से संबंधित है।
 

        हवाई जहाज से लगभग 500 किलोमीटर की एक घंटे की यात्रा अथवा हेलिकॉप्‍टर से 30 मिनट के सफर का हवाई किराया अधिक‍तम 2500 रुपये होगा। अलग-अलग दूरी एवं अवधि वाले रूटों पर हवाई सफर का किराया समानुपातिक आधार पर तय किया जाएगा।

फर्जी प्रमाणपत्रों पर केंद्रीय जनजाति आयोग ने मांगी रिपोर्ट

            केंद्रीय जनजाति आयोग ने गोंड जनजाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनाये जाने पर उत्‍तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

           केंद्रीय जनजाति आयोग के सचिव ने उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍य सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि आयोग के संज्ञान में आया है कि उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, बस्‍ती, आजमगढ, मउ एवं बलिया जिलों में नायक ब्राह्मण एवं ब्राह्मण ओझा समुदाय के लोगों ने नौकरी प्राप्‍त करने के लिए गोंड जाति के फर्जी प्रमाणपत्र बनवा लिये हैं।
उत्‍तरप्रदेश के मुख्‍य सचिव से पूछा गया है कि उत्‍तर प्रदेश में जनजातियों की संख्‍या एवं प्रतिशत क्‍या है। साथ ही गोंड जाति की जनसंख्‍या एवं उसके प्रतिशत के बारे में जानकारी चाही गयी है। आयोग की ओर से यह भी पूछा गया है कि नायक ब्राह्मण एवं ब्राह्मण ओझा समुदाय के कितने लोगों को गोंड जाति का प्रमाणपत्र जारी किया गया है।

          आयोग ने उत्‍तर प्रदेश सरकार से यह भी पूछा है कि फर्जी प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने वाले लोगों के खिलाफ सरकार ने क्‍या फौजदारी अथवा प्रशासनिक कार्यवाई की है। आयोग ने एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से दिए गए प्रतिवेदन के बाद इस प्रकरण पर संज्ञान लिया है।

देश के  विकास में हुडको की भूमिका महत्‍वपूर्ण

            आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन (एचयूपीए) मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने आवास एवं शहरी विकास निगम लिमिटेड (हुडको) के 47वें स्‍थापना दिवस का उद्घाटन किया। 

         उन्‍होंने कहा कि देश में वित्तीय समावेश को आगे ले जाने में हुडको महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। दरअसल, आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबकों की आवास वित्त संबंधी जरूरतों को पूरा करने पर हुडको अपना ध्‍यान केन्द्रित करता रहा है। नायडू ने कहा कि पिछले 47 वर्षों में हुडको ने देश भर में 16 मिलियन आवासीय इकाइयों का निर्माण किया है। इनमें से 92 प्रतिशत से भी ज्‍यादा आवासीय इकाइयों ने आर्थिक दृष्टि से कमजोर तबकों और निम्‍न आय समूहों को लाभान्वित किया है। 

              उन्‍होंने यह भी कहा कि हुडको ने लगभग 67 लाख व्यवहार्य और कम लागत वाली स्वच्छता इकाइयों के निर्माण में सहायता की है। इस अवसर पर मंत्री ने पुरस्‍कार प्रदान किये। अनेक प्रकाशनों यथा 'शेल्टर', 'हुडको दर्पण', 'हुडको डिजाइन पुरस्कार 2016', 'संकल्प' और 'शहरी भारत' का विमोचन किया।

            इस अवसर पर मुख्य सतर्कता आयुक्त के. वी. चौधरी, सचिव (एचयूपीए) डॉ. नंदिता चटर्जी, हुडको के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एम. रवि कंठ और एचयूपीए के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी मौजूद थे।

स्वच्छ भारत मिशन में 10 नए शहर व स्थान शामिल

            स्वच्छ भारत मिशन के तहत पेय जल एवं स्वच्छता मंत्रालय की पहल स्वच्छ महत्वपूर्ण स्थान के संबंध में दूसरी तिमाही समीक्षा बैठक कटरा, जम्मू-कश्मीर स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन में आयोजित की गई। 10 स्वच्छ महत्वपूर्ण स्थान पहले चरण में कार्य योजना का कार्यान्वयन कर रहे हैं।

           इस अवसर पर ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेय जल एंव स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने दूसरे चरण के अतंर्गत 10 नए महत्वपूर्ण स्थानों की घोषणा की। ये 10 स्थान गंगोत्री, यमुनोत्री, महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन, चार मीनार, हैदराबाद, चर्च एंड कॉन्वेंट ऑफ सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी, गोवा, आदि शंकराचार्य निवास, कालडी एर्नाकुलम में, श्रवणबेलगोला में गोमतेश्वर, बैजनाथ धाम, देवघर, बिहार में गया तीर्थ और गुजरात में सोमनाथ मंदिर हैं।

             उल्लेखनीय है कि पहले चरण में 10 महत्वपूर्ण स्थान हैं, अजमेर शरीफ दरगाह, सीएसटी मुंबई, स्वर्ण मंदिर, अमृतसर, कामख्या मंदिर, असम, मणिकर्णिका घाट, वाराणसी, मीनाक्षी मंदिर, मदुरै, श्री माता वैष्णो देवी, कटरा, जम्मू-कश्मीर, श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी, ताज महल, आगरा,  तिरुपति मंदिर, तिरुमला। 

           बैठक में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन. एन. वोहरा, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेय जल एंव स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह, जम्मू-कश्मीर के मंत्री अजय नंदा, पेय जल एवं स्वच्छता सचिव परमेश्वरन अय्यर तथा पेय जल एवं स्वच्छता मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, राज्य, सहभागी सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और अन्य स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि शामिल हुए।