Monday, 10 July 2017

सब उड़ें सब जुड़े उड़ान प्रोत्‍साहन के लिए विशेष पैकेज

       नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा विंग्‍स 2017 – सब उड़ें, सब जुड़े बढ़ती क्षेत्रीय कनेक्‍टविटी के प्रथम संस्‍करण का आयोजन किया गया। 

      केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री पी.अशोक गजपति राजू ने पूरे सत्र की अध्‍यक्षता की।इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्‍य मंत्री जयंत सिन्‍हा भी उपस्थि‍त थे। विंग्‍स 2017 में लगभग 338 प्रति‍निधियों ने भाग लिया। विमानन क्षेत्र के प्रमुख भागीदारों जैसे राज्‍य सरकार, पर्यटन विभाग, भ्रमण संचालक, विमान कंपनियां, हवाई अड्डा संचालन कंपनियां, कार्गों कंपनियों ने कार्यक्रम में हिस्‍सा लिया।
       19 राज्‍यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने केंद्र सरकार द्वारा आरसीएस-उड़ान के अंतर्गत दी जा रही सुविधाओं के अतिरिक्‍त प्रोत्‍साहन के लिए विशेष पैकेज प्रदान करने का आश्‍वासन दिया। उड्डयन क्षेत्र के अंतर्गत राज्‍य सरकारें एक प्रमुख भागीदार हैं और वे अपने राज्‍यों के अंदर सहित राज्‍य के बाहर भी उड्डयन क्षेत्र का विस्‍तार करना चाहती हैं।
       विंग्‍स 2017 की उपलब्धियों में प्रमुख हैं-नए मार्गों की पहचान और विक्रय, गंतव्‍य स्‍थान और सबसे बढ़कर पूरे देश के नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को सुलभ बनाना। भारत में नागरिक उड्डयन प्रक्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और वर्तमान में यह विश्‍व का नौवां सबसे बड़ा बाजार है। 
     2020 तक भारत विश्‍व का तीसरा सबसे बड़ा बाजार हो जाएगा।पिछले 70 वर्षों के दौरान कुल 75 हवाई अड्डे संचालन में रहेंगे जबकि मात्र एक वर्ष में 33 हवाई अड्डों को नियमित उड़ानों के लिए शामिल किया जा रहा है।
        क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण की अगले दो वर्षों में 50 हवाई अड्डों को पुनर्जीवित करने और संचालित करने की योजना है।



 

भारत विश्‍व की सबसे बड़ी गोपशु आबादी, जापान से 20,057 करोड़ का ऋण

    भारत 1998 से विश्‍व के दूध उत्‍पादक राष्‍ट्रों में पहले स्‍थान पर है तथा यहां विश्‍व की सबसे बड़ी गोपशु आबादी है। 

     भारत में 1950-51 से लेकर 2014-15 के दौरान दूध उत्‍पादन 17 मिलियन टन से बढ़कर 146.31 मिलियन टन हो गया है। 2015-16 के दौरान दूध उत्‍पादन 155.49 मिलियन टन था। अधिक दूध के उत्‍पादन व दुग्‍ध किसानों के हितार्थ, इस प्रतिशत हिस्‍सा को बढ़ाना होगा जिससे कि अधिकाधिक दुग्‍ध संगठित बाजार से लाभान्वित हो सके।
         स्‍पष्‍ट है कि, बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए 2021-22 तक 200-210 मिलियन एमटी तक होने का अनुमान है, देश को ग्राम स्‍तर पर, विशेष रूप से दूध की खरीद और उच्‍च मूल्‍य वाले दूध उत्‍पादों के उत्‍पादन के लिए अवसंरचना के उन्‍नयन की आवश्‍यकता है। लक्ष्‍य ग्रामीण दूध उत्‍पादकों की पहुंच बढ़ाकर संगठित दूध प्रसंस्‍करण तक पहुंचाने का है ताकि कार्य स्‍तर पर उत्‍पादकों की आय बढ़ सके। पशुपालन, डेयरी और मत्‍स्‍यपालन विभाग ने डेयरी विकास के लिए राष्‍ट्रीय कार्य योजना का प्रारूप तैयार किया है जिसमें थोक मिल्‍क कूलिंग, प्रसंस्‍करण अवसंरचना, मूल्‍य संवर्धित उत्‍पाद (वीएपी), दूध इकट्टा करने के केंद्र-डेयरी सहकारिता सोसाइटियों का संवर्द्धन तथा बढ़े हुए दूध के हैडंलिंग की आवश्‍यकताआ को पूरा करने के लिए दूध ढुलाई सुविधा तथा विपणन अवसंरचना सहित दूध शीतन सुविधाओं का सृजन शामिल है। 
         इन्‍हीं कारणों से केन्‍द्र सरकार ने अगले पांच वर्षों तक किसानों की आय को दोगुना करने के सरकार के लक्ष्‍य के अनुरूप सहकारिताओं के माध्‍यम से डेयरी व्‍यवसाय-राष्‍ट्रीय डेयरी अवसंरचना योजना के लिए जापान अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाईका) से ऋण प्राप्‍त करने के लिए एक प्रस्‍ताव तैयार किया है। इस परियोजना का कुल परिव्‍यय 20,057 करोड़ रुपए है। 
       परियोजना के मुख्‍य लाभ, यथा, 1.28 लाख अतिरिक्‍त गांवों में 121.83 लाख अतिरिक्‍त दूध उत्‍पादकों को आच्‍छादित करना, ग्राम स्‍तर पर 524.20 लाख कि.ग्रा. दूध प्रतिदिन की दूध शीतन क्षमता का सृजन करने जिस हेतु ग्राम स्‍तर पर 1.05 लाख बल्‍क मिल्‍क कूलर स्‍थापित करना तथा 76.5 लाख कि.ग्रा. प्रतिदिन की क्षमता वाली दूध और दूध उत्‍पाद प्रससंस्‍कण अवसंरचना का सृजन करना है। 
        इसके अलावा परियोजना के तहत ऑपरेशन फल्‍ड के समय के जर्जर 20-30 वर्षों पहले बनाए गए पुराने दूध तथा दूध उत्‍पाद संयंत्रों का नवीनीकरण-विस्‍तार करेगा तथा मूल्‍य संवर्धित उत्‍पादों के लिए दूध और दूध उत्‍पाद संयंत्रों का भी सृजन करना है जिससे लगभग 160 लाख विद्यमान किसानों को लाभ होगा। समस्‍त योजना का क्रियान्‍वयन राष्‍ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्‍यम से किया जाएगा। 
         आर्थिक कार्य विभाग ने इस प्रस्‍ताव को जापान अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाईका) हेतु सैद्धान्तिक सहमति भेज दी है। जाईका मिशन ने 27 फरवरी से 03 मार्च, 2017 के दौरान भारत का दौरा किया। मिशन की टिप्‍पणियों पर विचार-विमर्श करने के लिए तातुमी कुनीतके की अध्‍यक्षता वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ 26 मई, 2017 को एक बैठक आयोजित की गई। 
         मिशन की टिप्‍पणियों के अनुसार एनडीडीबी गरीबी उन्‍मूलन पर ध्‍यान केंद्रित करते हुए इस प्रस्‍ताव को आशोधित कर रहा है। इस कार्यक्रम से संबद्ध पद्धतियों की समय-सीमा के बारे में जीका प्रतिनिधि मंडल से विचार-विमर्श किया गया तथा गतिविधिवार चार्ट को अंतिम रूप दिया गया है। जाईका को शीघ्रातिशीघ्र मूल्‍यांकन प्रक्रिया प्रारंभ करनी है।

अल्पसंख्यक मंत्रालय ऑनलाइन, हर योजना डिजिटल

         केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि केंद्र सरकार में पारदर्शिता ही गरीबों-जरूरतमंदों की प्रगति का पैमाना है।

      नई दिल्ली में मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन के निरीक्षण अधिकारियों की कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए नकवी ने कहा कि वह स्वयं भी सभी योजनाओं की निगरानी कर रहे हैं ताकि इन योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक बिना किसी परेशानी के एवं पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँच सके। 
       नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय पूरी तरह से ऑनलाइन-डिजिटल हो गया है। हर योजना डिजिटल कर दी गई है जिससे बिचौलियों के लिए कोई जगह नहीं रह गई है और हर योजना का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुँच रहा है। छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न प्रकार की स्कॉलरशिप्स का पैसा भी सीधे उनके बैंक खातों में जा रहा है। चाहे वह विकास योजनाएं हो या हज का मामला, अल्पसंख्यक मंत्रालय ने ऑनलाइन-डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से पारदर्शिता सुनश्चित की है। 
          नकवी ने कहा कि नई योजनाओं की घोषणा से ज्यादा महत्वपूर्ण है, योजनाओं का जमीनी स्तर पर पूरी पारदर्शिता एवं ईमानदारी से कार्यान्वयन। नकवी ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि वो आम लोगों से मिल कर योजनाओं के कार्यान्वयन की हकीकत की जानकारी लें। नकवी ने कहा कि इसी मकसद से उन्होंने प्रोग्रेस पंचायत शुरू की ताकि लोगों के बीच जा कर उनकी समस्याओं को सुना जा सके और उनका समाधान किया जा सके। 
        नकवी ने कहा कि मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन के लगभग 280 निरीक्षण अधिकारियों का इस्तेमाल फाउंडेशन की शैक्षिक योजनाओं के अलावा अल्पसंख्यक मंत्रालय की अन्य विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन की देखरेख करने के लिए भी किया जायेगा। ये एक तरह से योजनाओं के निगहबान की तरह काम करेंगे। 
         इन निरीक्षण अधिकारियों में अधिकांश सेवा निवृत उच्च प्रशासनिक अधिकारी एवं शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले अनुभवी लोग शामिल हैं। जिनके अनुभव का लाभ मंत्रालय की योजनाओं के कार्यान्वयन में मिलेगा। इस कार्यशाला में निरीक्षण अधिकारियों को मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन और अल्पसंख्यक मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की पूरी जानकारी दी गई। 
          मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन अपनी योजनाओं के लिए गैर-सरकारी संस्थाओं को आर्थिक अनुदान इन निरीक्षण अधिकारियों द्वारा संस्थानों एवं उनके काम की रिपोर्ट के आधार पर जारी करता है।