Friday, 21 July 2017

1050 मेगावाट पवन ऊर्जा के लिए समझौता

       बिजली, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्‍य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने यहां नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन प्रथम विंड ऑक्‍शन योजना के तहत 1050 मेगावाट पवन ऊर्जा की खरीद के लिए ऊर्जा खरीद समझौतों (पीपीए) पर हस्ताक्षर होने वाले कार्यक्रम की अध्यक्षता की।  

        इन समझौतों पर कारोबारी कंपनी पीटीसी इंडिया लिमिटेड और सफल पवन ऊर्जा डेवलपर्स के बीच हस्ताक्षर किए गए। समझौतों के अनुसार माईत्रह एनर्जी, इनॉक्‍स विंड और ऑस्‍ट्रो कच्‍छ विंड प्राइवेट लिमिटेड में से प्रत्‍येक 250 मेगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा की आपूर्ति करेंगे।
       इसके अलावा ग्रीन इन्‍फ्रा 249.9 मेगावाट और अडानी ग्रीन एनर्जी 50 मेगावाट अन्‍तर्राज्‍यीय पारेषण प्रणाली के जरिये पवन ऊर्जा उपलब्‍ध कराएंगे। यह समझौते खुली और पारदर्शी नी‍लामी प्रक्रिया के जरिये किये गये हैं। पीटीसी इंडिया ने कई राज्‍यों के डिस्‍कॉम के साथ पवन ऊर्जा की बिक्री हेतु समझौता किया है।
          इसके तहत उत्‍तर प्रदेश को 449.9 मेगावाट, बिहार 200 मेगावाट, झारखंड 200 मेगावाट, दिल्‍ली 100 मेगावाट, असम 50 मेगावाट और ओडिशा को 50 मेगावाट बिजली प्राप्‍त होगी। नवीकरणीय ऊर्जा की कीमतों में भारी कमी लाने संबंधी प्रयासों के लिए पीयूष गोयल ने सभी हितधारकों को बधाई दी।
        मंत्री ने कहा कि विभिन्‍न नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा खरीद शर्तों को अलग-अलग लागू किया जाए और राज्‍यों को यह आजादी हो कि वे अपनी ऊर्जा आवश्‍यकताओं को ध्‍यान में रखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा का चयन कर सकें। 
        गोयल ने कहा कि पवन ऊर्जा संबंधी बोली प्रक्रिया हर महीने की जाए। उन्‍होंने मंत्रालय के अधिकारियों को सुझाव दिया कि वे नवीकरणीय ऊर्जा को सस्‍ती दरों पर आम आदमी तक पहुंचाने की दिशा में काम करें। इस अवसर पर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा सचिव आनंद कुमार ने बताया कि मंत्रालय ने अंतर्राज्‍यीय पारेषण शुल्‍क को समाप्‍त कर दिया है।
          उल्‍लेखनीय है कि यह शुल्‍क पवन ऊर्जा वाले राज्‍यों से गैर-पवन ऊर्जा वाले राज्‍यों को नवीकरणीय ऊर्जा के हस्‍तांतरण पर लगाया जाता था। इस अवसर पर ऊर्जा सचिव ए.के.भल्‍ला, पीटीसी इंडिया के अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक दीपक अमिताभ, एसईसीआई के प्रबंध निदेशक डॉ. अश्विनी कुमार तथा मंत्रालय और उद्योग जगत के वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री ने रामनाथ को राष्‍ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी

         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामनाथ कोविंद को भारत का राष्‍ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी है।

        प्रधानमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविंद जी को भारत का राष्‍ट्रपति चुने जाने पर बधाई। मैं उनके प्रेरक और उपयोगी कार्यकाल की कामना करता हूं। मुझे खुशी है कि संसद सदस्‍यों और विभिन्‍न राज्‍यों के विधायकों ने रामनाथ कोविंद का व्‍यापक समर्थन किया है। 
       मैं निर्वाचक मंडल के सदस्‍यों का आभार व्‍यक्‍त करता हूं। मैं मीरा कुमार जी के अभियान के लिए भी उन्‍हें बधाई देता हूं, जो लोकतांत्रिक शिष्‍टाचार और मूल्‍यों के अनुकूल था, जिन पर हमें गर्व है।

इस्पात उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री

         केन्द्रीय इस्पात मंत्री बीरेन्द्र सिंह ने देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में एमएसटीसी मेटल मंडी के जरिए आरआईएनएल द्वारा इस्पात उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के लिए आज एक समर्पित ई-पोर्टल लांच किया। 

      इस अवसर पर इस्पात राज्य मंत्री विष्णु देव साई, इस्पात सचिव डॉ. अरुणा शर्मा, आरआईएनएल के सीएमडी पी. मधुसूदन और एमएसटीसी के सीएमडी बी.बी. सिंह भी उपस्थित थे। बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि ई-पोर्टल प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन के बीच तालमेल का उत्कृष्ट उदाहरण है।
         उन्होंने कहा, इस साल फरवरी में जब हमने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के बीच संसाधनों की पूलिंग के लिए एक समन्वय समिति गठित की थी तो हमारे मन में इस तरह की परियोजनाओं के लिए व्यापक संभावनाएं थीं। मुझे खुशी है कि यह परियोजना शुरू की जा रही है और यह इस तरह की अभिनव परियोजनाओं का एक अच्छा उदाहरण होना चाहिए। 
         मंत्रालय ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में इस्पात की खपत बढ़ाने के लिए प्रथम क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया था। हमारी सरकार इस क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और वहां अनेक नई परियोजनाएं शुरू एवं क्रियान्वित की जा रही हैं। 
        हमारी इस्पात कम्पनियों को इस बाजार का दोहन अवश्य ही करना चाहिए और इसके साथ ही वहां की इस्पात जरूरतों की पूर्ति करनी चाहिए। हमें ऐसे कई और क्षेत्रों की तलाश करनी चाहिए जहां हमारे पीएसयू उत्पादन स्तर बढ़ाने, नये बाजारों की तलाश करने और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने के लिए आपस में मिल-जुलकर काम कर सकें। ई-पोर्टल में विभिन्न उपलब्ध उत्पादों, उनके विनिर्देशों, कीमतों इत्यादि के बारे में सूचनाएं हैं।
       घर के दरवाजे पर डिलीवरी इस पहल की आकर्षक विशेषताओं में से एक है। समूची प्रक्रिया पारदर्शी है और एक यूजर अनुकूल इंटरफेस के जरिए आपस में बातचीत करना संभव है।
          वेब के जरिए बिक्री पूछताछ आधारित प्रणाली है जिसके तहत पंजीकृत क्रेता पोर्टल के जरिए इस्पात (मुख्यतः टीएमटी सरिया और स्ट्रक्चरल उत्पाद) की अपनी जरूरतों के लिए एन्क्वायरी भेज सकता है। एन्क्वायरी मिलने पर आरआईएनएल इस बिक्री पर अमल के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
        एमएसटीसी की वेब सेवाओं का उपयोग करते हुए आपसी लाभ के लिए इस्पात मंत्रालय के अधीनस्थ संसाधनों की पूलिंग करने से जहां एक ओर आरआईएनएल को लागत में बचत संभव होगी, वहीं दूसरी ओर नये बाजारों के विकास का अवसर मिलेगा।

साइबर हमले में 150 देशों में 4 अरब डॉलर का नुकसान

        रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने भारतीय रेलों में साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गोलमेज सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ए के मित्तल,रेलवे बोर्ड के अन्य सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

       इस अवसर पर सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि भारतीय रेलवे परिवर्तन के अपने मिशन पर आगे बढ़ रही है। पिछले तीन वर्षों में रेलवे के उन्नयन, आधुनिकीकरण और रख-रखाव में काफी कार्य किया गया है। इन प्रक्रियाओं में प्रौद्योगकी का काफी उपयोग किया जाता है।
    भारतीय रेल ने अभी हाल ही में रेल क्लाउड सर्वर, रेल सारथी ऐप की शुरूआत की है। ईआरपी विकसित करने का काम भी चल रहा है। प्रौद्योगिकियों के संपूर्ण उपयोग के कारण आलोचनीयता की भी काफी संभावनाएं रहती हैं। 
        भारतीय रेल सुरक्षा जांच सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट आयोजित करती है। साइबर सुरक्षा एक शीर्ष प्राथमिकता है इसलिए गोलमेज का विचार सभी हितधारकों को एक मंच पर लाना है ताकि ये विचार-विमर्श साइबर सुरक्षा के लिए प्रभावी परिणाम सुनिश्चित कर सकें। विचार-विमर्श के दौरान साइबर खतरों, सुरक्षा घटनाओं और उन्नत समाधानों के बारे में विचारों का आदान-प्रदान हुआ। 
       विचार-विमर्श में शामिल मुद्दों को समझने और सभी हितधारकों में बेहतर जागरूकता का सृजन करने में मदद की। इसने भारतीय रेलवे में सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली को (आईटी) को साइबर सुरक्षा खतरों से निपटने में प्रभावी समाधान उपलब्‍ध कराने में भी सहायता की। 
        भारतीय रेलवे में कम्प्यूटरीकरण लगभग 3 दशक पहले शुरू हुआ था और टिकीटिंग, माल भाड़ा परिचालन, ट्रेन परिचालन और परिसंपत्ति प्रबंधन अब अधिकांश रूप से सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियों पर निर्भर है। भारतीय रेलवे में साइबर सुरक्षा को अब एक केंद्रित क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है। सूचना प्रौ़द्योगिकी प्रणालियों की ऑडिटिंग मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन (एसटीक्यूसी) द्वारा की जाती है। 
          भारतीय रेलवे ने सीईआरटी-इन के साथ तालमेल के साथ मिलकर कुछ उठाए हैं। साइबर सुरक्षा उपायों को सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग ने स्वीकार्य मानकों के अनुसार लागू किया जाना चाहिए। इससे प्रमुख बुनियादी ढांचे की साइबर हमले से सुरक्षा के लिए सर्वश्रेष्‍ठ प्रतिक्रियाओं का सृजन किया जाएगा। कार्य के बढ़ते हुए डिजीटल मोड में ऐसे अनेक अनुप्रयोग हैं जिन पर मोबाइल फोन जैसे व्यक्तिगत उपकरणों के माध्यम से पहुंच स्‍थापित की जा सकती है। 
       ऐसे अनुप्रयोगों की सुरक्षा को मजबूत बनाये जाने की जरूरत है। इसके अलावा भारतीय रेलवे की डिजिटल संपत्तियों की महत्वपूर्ण रक्षा के लिए तत्परता और तैयारी पूरी तरह होनी चाहिए। इसके लिए अनुप्रयोगों का डिजाइन इतना मजबूत होना चाहिए कि इसकी योग्‍यता उन्नत हमलों का गति निपुणता से सामना कर सके। 
         इस तैयारी से सूचना प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग पूरी भारी रेलवे में तेजी से गोपनीय रूप से उपयोग किए जा सकते हैं। हालांकि, भारतीय रेलवे के सूचना प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों को पर्याप्त सुरक्षा विशेषताओं के साथ विकसित किया गया है।
        इन मानक सिद्धांतों के आधार पर मई 2017 में हुए वैश्विक साइबर हमले में दर्शाया है कि हम कभी भी संतुष्ट नहीं हो सकते। इस हमले में 150 देशों में 200,000 से भी अधिक संगठनों को प्रभावित किया था। सीबीएस एक न्यूज़ रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हमले के अनुमानित नुकसान लगभग 4 अरब डॉलर हुआ था।