Wednesday, 17 May 2017

असम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना को मंजूरी

          केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि कैबिनेट ने शत प्रतिशत परिव्यय के साथ असम सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गयी 587 एकड़ भूमि पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) असम की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। 

      राधा मोहन सिंह ने बताया कि आईएआरआई- असम कृषि शिक्षा में उच्चतर अध्ययन का एक स्नातकोत्तर संस्थान होगा और इसमें खेत फसलों, बागवानी फसलों, कृषि वानिकी, पशु पालन, मात्स्यिकि, कुक्कुट पालन, शुकर पालन, रेशम कीट पालन, शहद उत्पादन आदि जैसे कृषि के सभी क्षेत्रों समेत वे सारी हॉलमार्क पहचान होंगी जो नई दिल्ली के आईएआरआई में है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि आईएआरआई असम द्वारा पूर्वोत्तर भारत में कृषि क्षेत्र के समग्र और टिकाउ विकास के लिए उत्पादकता, गुणवत्ता एवं लाभप्रदता बढ़ाने, कृषि आधारित उद्योगों को बढावा देने तथा रोजगार अवसरों का सृजन करने हेतु गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन विकसित करने, किसान अनुकूल प्रौदोगिकियों के सृजन की दिशा में अपने मिशन में अनुसंधान, शिक्षा विस्तार कार्यक्रमों को आरंभ करने के लिए सभी वर्तमान केन्द्रीय एवं राज्य सरकार के अनुसंधान एवं विकास संस्थानों तथा निजी क्षेत्र के उद्यमों के समन्वय से पूर्वोत्तर भारत की कृषि चुनौतियों एवं जटिलताओं पर कार्य किया जाएगा।

       सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद प्रधानंमंत्री ने घोषणा की थी कि पूर्वोत्तर राज्यों के कृषि विकास के लिए असम में आईएआरआई स्थापित किया जाएगा। छ माह पहले असम की नयी सरकार ने धेमाजी में जमीन दी है। कैबिनेट ने आज मंजूरी दे दी है अब निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया।


 

 भारत फलस्तीन के विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध

           राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्‍ट्रपति भवन में फलस्‍तीन के राष्‍ट्रपति महामहिम महमूद अब्‍बास का स्‍वागत किया। 

         उन्‍होंने उनके सम्‍मान में एक प्रीतिभोज की भी मेजबानी की। फलस्‍तीन के राष्‍ट्रपति का स्‍वागत करते हुए राष्‍ट्रपति ने अक्‍तूबर 2015 में फलस्‍तीन की अपनी यात्रा एवं फलस्‍तीन की सरकार तथा वहां के लोगों के भावभीने स्‍वागत का स्‍मरण किया। राष्‍ट्रपति ने महमूद को फतेह पार्टी के चैयरमैन के रूप में उनके पुनर्निर्वाचन पर बधाई दी। 

            उन्‍होंने कहा कि महमूद के पुनर्निर्वाचन के साथ फलस्‍तीन के लोगों ने यह स्‍पष्‍ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिक आकांक्षा शांति और मजबूत नेता की है, जो उन्‍हें उनकी आकांक्षाओं की दिशा में आगे ले जाये। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत, फलस्‍तीन के साथ अपने द्वीपक्षीय सम्‍बन्‍धों को काफी महत्‍व देता है, जिसमें हाल के वर्षों में काफी गति आई है और वृद्धि हुई है। 

            उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच सहयोग और अधिक विस्‍तारित होगा। राष्‍ट्रपति ने कहा कि फलस्‍तीन के ध्‍येय के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और फलस्‍तीन के लोगों के साथ भारत की मित्रता देश की विदेश नीति का एक अंदरूनी हिस्‍सा बन चुका है।

मनरेगा के अंतर्गत 80 लाख हेक्टेयर जल संरक्षण

             ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्य सरकारों की साझेदारी से मनरेगा श्रमिकों के पारिश्रमिक का समय से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है। 

          समय पर पारिश्रमिक का भुगतान चिंता का विषय रहा है। चालू वित्त वर्ष में 20.88 करोड़ मानव दिवस कार्य हुए। 89.08 प्रतिशत पारिश्रमिक भुगतान काम करने के 15 दिनों के अंदर कर दिए गए। पुद्दुचेरी सहित 22 राज्यों ने पारिश्रमिक भुगतान सीधे राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड मेनेजमेंट प्रणाली से प्राप्त किया। शेष राज्यों ने लगभग सभी मामलों में इलेक्ट्रॉनिक फंड मेनेजमेंट सिस्टम को एक्सेस किया। मंत्रालय राज्यों की साझेदारी के साथ निरंतर रूप से मनरेगा श्रमिकों के पारिश्रमिकों का समय से आधार से जुड़े बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। 

           85 प्रतिशत से अधिक सक्रिय मनरेगा श्रमिकों ने अपना आधार ब्यौरा एनआरईजीएएसओएफटी एमआईएस (सहमति से) में दर्ज कराया है। 4.85 करोड़ श्रमिक पहले से ही अपने बैंक खातों को आधार से जोड़ चुके हैं। मंत्रालय का बल जल संरक्षण पर है और राज्यों ने देश के 2264 जल दबाव और सिंचाई सुविधा की कमी वाले ब्लॉकों पर फोकस करते हुए मिशन जल संरक्षण के दिशा-निर्देशों को अपनाया है। 

            2015-17 में मनरेगा के अंतर्गत 80 लाख हेक्टेयर जल संरक्षण कार्य का मूल्यांकन आर्थिक विकास संस्थान द्वारा किया जा रहा है और अंतिम रिपोर्ट 30 सितंबर, 2017 तक उपलब्ध होगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय मिशन जल संरक्षण पर बल देते हुए टिकाऊ परिसंपत्ति सृजन और मांग पर रोजगार प्रदान करने का सभी प्रयास कर रहा है।