Monday, 4 December 2017

अनुसंधान व वैज्ञानिक अभिनवों का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाना हो

      कानपुर। भारत के उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा है कि अनुसंधान और वैज्ञानिक अभिनवों का उद्देश्य किसानों को लाभ पहुंचाना होना चाहिए। 

    उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू आज कानपुर में कृषि एवं प्रौद्योगिकी चन्द्र शेखर आजाद विश्वविद्यालय में 19वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
    उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि एवं प्रौद्योगिकी चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय, कानपुर ने 1893 में एक कृषि विद्यालय के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी, जो अब कृषि शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संस्था ने अपनी स्थापना से ही गुणवत्ता शिक्षण और अनुसंधान की एक समृद्ध परंपरा बनाये रखी है।
    उन्‍होंने कहा कि यहां विकसित खाद्यान्नों की बेहतर उपज वाली उन्‍नत किस्मों ने हरित क्रांति और हमारे देश में एक जीवंत कृषि क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कृषि भारतीयों की बुनियादी संस्कृति और हरित क्रांति ने हमें आत्मनिर्भर बनाने और बढ़ती आबादी के खाद्यान्‍न आपूर्ति में सक्षम किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि को लाभदायक और टिकाऊ बनाने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण होना चाहिए।
    उन्होंने आगे कहा कि फसलों की विविधता को प्रोत्साहित करने के अलावा, ग्रामीण सड़कों, बिजली, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं, ग्रामीण गोदामों और प्रशीतन वाहनों के रूप में अवसंरचना प्रदान करने पर जोर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्‍होंने यह भी कहा कि किसानों को समय पर ऋण सुनिश्चित करने और कृषि पर सार्वजनिक खर्च में वृद्धि की भी आवश्यकता है। 
     उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब समय की मांग है कि हमारी कृषि प्रणाली स्थायी हो, क्‍योंकि कृषि भूमि में कोई वृद्धि नहीं होगी, जबकि खेती वाले परिवारों और उनकी जरूरतों में वृद्धि हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कृषि सिंचाई योजना, फार्म यांत्रिकरण अभियान, राष्ट्रीय कृषि विपणन योजना, ग्रामीण भंडारण योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जैसी कई कृषि एवं किसान कल्याण योजनाएं शुरू की गई हैं ताकि आजीविका सुरक्षा और खाद्य उत्पादन में वृद्धि हो।
     उन्होंने कहा कि किसानों को नई और अभिनव प्रौद्योगिकियों के लाभों से एक साधारण और सुगम भाषा में अवगत कराया जाना चाहिए।उपराष्ट्रपति ने सभी नये स्नातकों को बधाई दी और उन्‍हें आशीर्वाद दिया। 
      उन्होंने उन्हें गौतम बुद्ध के "आप्‍पो दीप्पो भव" के दर्शन का पालन करने की सलाह दी, जिसका अर्थ है: 'स्‍वयं में ही प्रकाश बनो', चूंकि बुद्धि का प्रकाश दोनों वास्तविक एवं शाब्दिक रूप में स्‍वयं आपको तथा पूरी मानवता को सफलता, शांति और समृद्धि के मार्ग का अनुसरण करने में सहायक हो सकता है।

भारत आयुर्वेदिक व वैकल्‍पिक औषधि का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक

   नई दिल्‍ली। आयुष और तंदुरूस्‍ती पर पहले अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन ‘आरोग्‍य 2017’ का वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु और आयुष राज्‍य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज नई दिल्‍ली में उद्घाटन किया।

  प्रदर्शनी और सम्‍मेलन का आयोजन 4 से 7 दिसम्‍बर, 2017 तक विज्ञान भवन में किया गया है। आरोग्‍य 2017 का आयोजन फार्मेक्‍सिल सहित आयुष मंत्रालय और वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय ने फिक्‍की के साथ औषधि की परंपरागत प्रणाली की ताकत और वैज्ञानिक मूल्‍यांकन को प्रदर्शित करने के लिए संयुक्‍त रूप से किया है। 
   आरोग्‍य 2017 में भारत और 60 देशों के करीब 1500 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि आरोग्‍य 2017 अपने तरह का पहला अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन है, जिसका आयोजन भारत में किया गया है।
      उन्‍होंने कहा कि हालांकि भारत ही अकेला ऐसा देश नहीं है, जिसके पास परंपरागत औषधि का ज्ञान है, आरोग्‍य 2017 के जरिए हमने भारत के परंपरागत औषधि ज्ञान को दुनिया के लोगों के बीच बांटने का फैसला किया है। इस सम्‍मेलन से हमें उम्‍मीद है कि दुनिया के अन्‍य देशों से आए प्रतिनिधियों से हमें सीखने को मिलेगा और भारत सरकार को सभी देशों के साथ इस क्षेत्र में कार्य करने पर खुशी होगी। 
   आयुष राज्‍य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि आयुष मंत्रालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में आयुष को विस्‍तार से समाहित करने का प्रयास कर रहा है। आयुष मंत्रालय के जरिए हम न केवल राष्‍ट्रीय स्‍तर पर परंपरागत औषधि के विकास संबंधी क्रियाकलापों को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्‍कि हमें अधिक अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग और द्विपक्षीय, बहु पक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्‍विक स्‍तरों पर सहयोग के अवसर कायम करने का इंतजार है।
      इस दिशा में संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा 21 जून अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस घोषित करने से दुनिया की योग में दिलचस्‍पी पैदा हुई है और साथ ही योग संबंधी जानकारी, विशेषज्ञता प्राप्‍त और काबिल, प्रमाणित और मान्‍यता प्राप्‍त योग प्रशिक्षकों के आदान-प्रदान के लिए सहयोग के अवसर पैदा हुए हैं। 
   उन्होंने कहा कि इसी प्रकार से डब्‍ल्‍यूएचओ के साथ सहयोगपूर्ण समझौते के जरिए हम सदस्‍य देशों के लाभ के लिए आयुष संबंधित तकनीकी दिशा-निर्देश और दस्‍तावेज तैयार कर रहे हैं। नाइक ने कहा कि इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत ने कुछ देशों की सरकारों और अंतर्राष्‍ट्रीय विश्‍वविद्यालयों के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए हैं। 
    उन्‍होंने कहा कि हमें सबूतों पर आधारित दृष्‍टिकोण, साझा व्‍यावाहरिक अनुभवों और परंपरागत औषधि प्रणालियों की सर्वश्रेष्‍ठ कार्यप्रणाली के साथ संस्‍थागत तंत्र और स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍थाएं बनानी चाहिए। आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेजा ने कहा कि भारत शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां परंपरागत औषधि का अलग मंत्रालय है। इससे औषधि प्रणाली के विकास की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दिखाई देती है।
     उन्‍होंने कहा कि हमें उम्‍मीद है कि अगले 5 वर्षों में उत्‍पादों और सेवाओं सहित हम आयुष का आकार तीन गुना बढ़ा लेंगे। इसके लिए सरकार अनेक देशों के साथ सहमति ज्ञापनों पर हस्‍ताक्षर करने के साथ, सहयोगपूर्ण अनुसंधान और शैक्षणिक क्रियाकलाप तथा आयुष में अंतर्राष्‍ट्रीय छात्रवृत्‍ति देने सहित बहु आयामी रणनीति अपना रही हैं।
   फार्मेक्‍सिल के महानिदेशक उदय भास्‍कर; फिक्‍की के महासचिव डॉ. संजय बारू; फिक्‍की के उप महासचिव विनय माथुर; ज्ञान भारती के महानिदेशक ए.जेकुमार; डब्‍ल्‍यूएचओ में आयुष विशेषज्ञ डॉ. जी.गीता कृष्‍णन; श्री श्रीतत्‍व के प्रबंध निदेशक अरविन्‍द वर्चस्‍वी ने देश और विदेश में आयुष क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
   आरोग्‍य 2017 प्रदर्शनी और सम्‍मेलन आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्‍सा, यूनानी, सिद्ध, सोआ रिगपा, होम्योपैथी और स्‍वास्‍थ्‍य पर आधारित है। इसमें वैकल्‍पिक औषधि के 250 से अधिक निर्माता अपने उत्‍पादों और सेवाओं को प्रदर्शित कर रहे हैं।
   इस प्रदर्शनी के माध्‍यम से आयुष क्षेत्र के प्रमुख साझेदारों को भारत की वैकल्‍पिक औषधि प्रणाली के क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधान और विकास को दिखाने तथा आयुष उत्‍पादों का निर्यात बढ़ाने का अवसर मिला है। आसियान और बिम्सटेक देशों में आयुष नियमों और पंजीकरण के लिए एक रोड मैप रखने के लिए फ्रॉस्‍ट और सूलीवन ने एक श्‍वेत पत्र आयुष फॉर द वर्ल्‍ड रखा।
     इसमें कहा गया है कि भारत आयुर्वेदिक और वैकल्‍पिक औषधि का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है और इसमें 3 मिलियन नौकरियां सृजित करने की संभावना है। भारत का जड़ी-बूटी बाजार करीब 5 हजार करोड़ रूपये का है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 14 प्रतिशत है।

मीडिया को सनसनीखेज पत्रकारिता नहीं करनी चाहिए

  गुवाहटी। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि मीडिया को सनसनीखेज पत्रकारिता से बचते हुए ख़बरों बिना किसी वैचारिक रंग के पेश करना चाहिए। 

   उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू आज गुवाहटी में सदिन प्रतिदिन ग्रुप के प्रतिदिन अचीवर्स पुरस्कार प्रदान करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर असम के राज्यपाल जगदीश मुखी और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
     उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि मीडिया को सनसनीखेज पत्रकारिता से बचते हुए ख़बरों बिना किसी वैचारिक रंग के पेश करना चाहिए। 
  उपराष्ट्रपति ने विभिन्न पेशों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वालों को पुरस्कार प्रदान करने लिए प्रतिदिन ग्रुप की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन पुरस्कारों को प्राप्त करने वाले और नई ऊंचाइयां छूने के लिए प्रोत्साहित होंगे साथ ही और लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर करने के लिए प्रेरित करेंगे। 
    नायडू ने कहा कि यह खुशी की बात है कि इस मीडिया ग्रुप ने केवल असम से ही नहीं बल्कि समूचे पूर्वोत्तर से लोगों का चयन किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि असम और समूचा पूर्वोत्तर अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं, साहित्य, लोक कलाओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है।
      उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के पुरस्कार विजेताओं ने सिर्फ खुद को ही नहीं बल्कि समूचे पूर्वोत्तर सहित राष्ट्र को गौरान्वित किया है। उपराष्ट्रपति ने मीडिया घरानों से स्वच्छता को बढ़ावा देने और स्वच्छता के प्रति जागरुकता पैदा करने लिए के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन करने और अभियान चलाने की अपील की। 
         उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा, शराब की लत और ड्रग्स के खतरों, धार्मिक कट्टरता, भ्रष्टाचार, निरक्षरता और आतंक के खिलाफ जागरुकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

भारत के लिए जर्मनी का 200 मिलियन यूरो का समझौता

    नई दिल्‍ली। भारत और जर्मनी ने ‘पर्यावरण अनुकूल शहरी गतिशीलता क्ष्क्ष्क्ष्’ परियोजना के लिए ऋण के रूप में वित्‍तीय सहायता के लिए 200 मिलियन यूरो तक की राशि और चार परियोजनाओं के लिए अनुदान के रूप में 11 मिलियन यूरो के संलग्‍न उपायों को औपचारिक रूप देने के लिए आज यहां समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए।

  समझौते पर जर्मनी की ओर से भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. मार्टिन नेय और भारत की ओर से वित्‍त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्‍त सचिव एस. सेल्‍वाकुमार ने हस्‍ताक्षर किए। समझौते के भाग-1 में मई, 2017 में हस्‍ताक्षर किए जा चुके हैं। 
    इसके अलावा भारत-जर्मन द्विपक्षीय विकास सहयोग के अंतर्गत दोनों देशों के बीच ऋण समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए। समुदाय आधारित सतत वन प्रबंधन- घटक। मणिपुर के लिए 15 मिलियन यूरो के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए।
      इस परियोजना का विस्‍तृत उद्देश्‍य जल ग्रहण वाले ऊपरी क्षेत्रों में नष्‍ट हो चुके जंगलों को बहाल करना, छोड़े गए कृषि क्षेत्रों में भूमि सुधार, जैव विविधता संरक्षण, जल संसाधन संरक्षण और परियोजना वाले क्षेत्र में वनों पर निर्भर ग्रामीण जनजातीय लोगों की आजीविका में सुधार करना है। मध्‍य प्रदेश शहरी स्‍वच्‍छता और पर्यावरण कार्यक्रम परियोजना के लिए कम ब्‍याज दर पर 50 मिलियन यूरो के ऋण और 2.5 मिलियन यूरो के अनुदान का समझौता किया गया। 
    इस परियोजना का विस्‍तृत उद्देश्‍य मध्‍य प्रदेश के कुछ चुने हुए क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति, स्‍वच्‍छता और सीवरेज शोधन संयंत्र की सुविधा में सुधार और कुछ शहरों में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन और उसके निपटारे की प्रणाली में सुधार, बाढ़ के पानी को कम करने के लिए जमीनी निकासी प्रणाली में सुधार करना है। निरंतर शहरी बुनियादी ढांचा विकास ओडिशा-चरण, परियोजना के लिए कम ब्‍याज दर पर 55 मिलियन यूरो के ऋण और 2 मिलियन यूरो के अनुदान का समझौता किया गया। 
    इस परियोजना का मूल उद्देश्‍य शहरी बुनियादी ढांचे को सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़कर उनमें सुधार करना है। परियोजना का विस्‍तृत उद्देश्‍य ओडिशा में शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार करना और लोगों को बेहतर जीवन प्रदान करना है।
   महाराष्‍ट्र में हरित ऊर्जा गलियारा- अंतरराज्‍यीय पारेषण प्रणाली परियोजना के लिए कम ब्‍याज दर पर 12 मिलियन यूरो के ऋण का समझौता किया गया। परियोजना का विस्‍तृत उद्देश्‍य नवीकरणीय ऊर्जा ले जाने के लिए पारेषण प्रणाली स्‍थापित करना है।