Friday, 5 March 2021

सुपरफूड है मोरिंगा पाउडर

   मोरिंगा पाउडर मोरिंगा के पेड़ की पत्तियों से बनाया जाता है और इसमें ढेर सारे औषधीय गुण हैं। इस सुपरफूड का इस्तेमाल आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता है। मोरिंगा के पत्तों को सुपरफूड के रूप में देखा जाता है क्योंकि एक कप कटी हुई पत्तियां आयरन, कैल्शियम, विटामिन सी, विटामिन बी 6 और राइबोफ्लेविन का अच्छा स्रोत हैं।

    इसके अलावा इसमें पोटेशियम, विटामिन , विटामिन और मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होती है। संतरे की तुलना में इसके पत्ते में विटामिन सी अधिक होता है। मोरिंगा बेहतर दृष्टि और इम्यूनिटी से लेकर हड्डियों की हेल्थ और त्वचा को ग्लोइंग बनाने तक, सब कुछ कर सकता है।

    यह प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत है। स्मूदी या सूप में मोरिंगा पाउडर को मिलाएं। एक बड़े चम्मच मोरिंगा पाउडर में तीन ग्राम प्रोटीन और सभी आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं, जो मसल्स की मरम्मत, एनर्जी के उत्पादन और मूड को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक हैं। मोरिंगा के पत्तों से बने पाउडर माइल्ड फ्लेवर का होता है, इसलिए इसका इस्तेमाल आप कई अलग-अलग व्यंजनों के साथ कर सकती हैं। इसका फेस मास्क के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

    लिवर की करता है रक्षा :लिवर को शरीर का डिटॉक्सिफायर समझें। यह ब्लड को फिल्टर करता है, केमिकल्स को डिटॉक्सीफाई करता है और फैट को मेटाबोलाइज करता है। मोरिंगा इसे बेहतर काम करने में मदद करता है।

    सूजन होती है कम :मोरिंगा पाउडर लेने से सेल्स में सूजन कम हो जाती है। सूजन कम करने वाली पॉलीफेनोल्स और आइसोथियोसाइनेट्स के साथ, मोरिंगा शरीर में सूजन एंजाइम और प्रोटीन को दबाकर सूजन को कम करता है।

   ब्लड शुगर को बैलेंस करने में मददगार :इंसुलिन और ब्लड शुगर के बढ़ने से मूड स्विंग और शुगर की समस्या हो सकती है और यहां तक कि टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे का भी कारण हो सकता है। मोरिंगा पाउडर लिपिड और ग्लूकोज के लेवल को कम करने और ऑक्सीडेटिव तनाव को नियंत्रित करने में प्रभावी होता है।

    ब्रेन के लिए अच्छा :65 वर्ष से अधिक उम्र के आठ लोगों में से एक को अल्जाइमर रोग परेशान करता है। मोरिंगा का पत्ता विटामिन सी और से भरपूर होता है, जो अल्जाइमर से जुड़े ऑक्सीडेटिव तनाव का मुकाबला करता है। मोरिंगा डोपामाइन और सेरोटोनिन (हैप्पी हार्मोन) को बढ़ाने में मदद करता है और इसका उपयोग भविष्य में डिप्रेशन के इलाज में मदद के लिए किया जाता है।

     त्वचा और बालों के लिए अच्छा :मोरिंगा पाउडर बालों के लिए फायदेमंद है और बालों को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करता है। हेल्दी त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। यह त्वचा के संक्रमण और घावों को ठीक करने में उपयोगी होता है।

     आर्गेनिक हाट करौंदी में जैविक खाद्य पदार्थ के साथ ही शुद्ध कुटीर उद्योग के जुड़े उत्पाद मिलते हैं। यहां मोरिंगा पाडर, मोरिंगा जैगरी, मोरिंगा टेबलेट तथा मोरिंगा से बना साबुन उपलब्ध है। इसके अलावा गिर गाय का घी, अर्जुन छाल पाउडर, बेल चुर्ण, आंवला चूर्ण, अश्वगंधा, शतावरी, कालमेघ, त्रिफला चूर्ण तथा शहद के साथ ही जैविक जौ का आटा, मडुवा आटा, मल्टीग्रेन, तिल सरसो का जैविक तेल, बाजरा, मूंगफली, च्यवनप्राश, सुगंधित चावल, गुड़ के साथ ही रसोइ में उपयोग के सभी सामान मिलते हैं।

    आनंद कुमार मिश्र

वैश्विक स्तर का हो अयोध्याधाम का अयोध्या महोत्सव

      अयोध्या। भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ल ने कहा अयोध्या महोत्सव का आयोजन सिर्फ़ अयोध्याधाम की धरती पर ही नही बल्कि इस प्रकार का आयोजन वैश्विक स्तर का हो। 


    इस कार्यक्रम के बतौर अध्यक्ष श्री शुक्ल ने कहा हिंदुओं के आराध्य दशरथ कौशल्या नंदन प्रभु श्रीराम के अयोध्याधाम में गत आठ दिनों से अयोध्या महोत्सव का आज जो माहौल बना है, उसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अहम योगदान है।

    श्री शुक्ल ने कहा आधुनिकता की आपाधापी में लोककलाएं व लोकसंस्कृति विलुप्त होती जा रही हैं। ऐसी स्थित में अयोध्याधाम में हो रहे अयोध्या महोत्सव के माध्यम से लोककलाओं के लोकप्रिय लोक कलाकारों को भी समाज में सम्मानित होने का अवसर मिलेगा और लोक संस्कृति की परंपराएं जीवित रहेंगीं।

एयर ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में हाहाकार, कोमा से निकालने को चाहिए 13 लाख करोड़

   कोविड ने भारत सहित पूरी दुनिया के संपूर्ण हवाई परिवहन उद्योग को नीचे से ऊपर तक इतना जख्मी कर दिया कि वो अपने पंखों को पसार कर आकाश में स्वच्छंद उड़ान भरने के लायक नहीं रह गया है। विमान निर्माण कंपनियों से लेकर एयर लाइंस, एयरपोर्ट्स और एयर नैविगेशन सेवा प्रदाता तक को मिलाकर 35 लाख करोड़ रु का अभूतपूर्व नुकसान उठाना पड़ा है।

    यात्रियों की कमी से अगले पांच-छ:महीनों में ८ हजार विमानों के खड़े होने पर 88-90 हजार पायलट के बेरोजगार होने का अंदेशा विशेषज्ञों ने जताया है। विश्व जीडीपी में वार्षिक 2.7 ट्रिलियन डालर (लगभग 4 फीसद) का योगदान करने वाले और वर्तमान में संकटग्रस्त इस उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए 12-13 लाख करोड़ रु धनराशि की जरूरत आंकी गई है।


    पिछले बाईस सालों में एयर ट्रांसपोर्ट उद्योग को पांच झटके लगे। इनमें कोविड ने 'मेगा शाॅक' का रोल निभाया। वर्ष 1998 में एशियाई संकट, 2001 सितंबर में अमेरिका में आतंकी हमला, 2003 में सार्स प्रकोप और 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट (लेहमन), पांचवां सबसे भारी पड़ा। जानकार बताते हैं कि उद्योग विभन्न मामलों में आठ-दस से लेकर पंद्रह साल पीछे चला गया। 2019 के स्तर पर पहुंचने में कम से कम चार से छ: साल तो लग ही जाएंगे, वो भी स्थितियां सामान्य रहेंगी तभी।

     अपने देश से शुरू करते हैं। भारत ने 2020 में मार्च 23-25 से हवाई सेवाए निरस्त कीं थीं। 25 मई से घरेलू सेवाएं आंशिक रूप से खुलीं और विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के मकसद से वंदे मातरम मिशन भी मई में शुरू किया गया। इंडिगो को चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल -जून 2020 में 2884 करोड़ रु, दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर में 1194 करोड़ रु का नुकसान लगा और स्पाइस जेट को 600 करोड़ रु व 112 करोड़ रु, साथ ही दोनों ने वेतन में 10 से 30 फीसद कटौती लागू की। गोएयर ने अप्रैल में अपने अधिकांश स्टाफ को बगैर वेतन की छुट्टी पर भेज दिया।

    विस्तारा ने भी बगैर वेतन छुट्टी कर हानि कम करने की कोशिश की। एयर इंडिया के बाबत कुछ कहने की जरूरत नहीं। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (एआईटीए), एयर पोर्ट्स कांउसिल इंटरनेशनल (एसीआई), केपीएमजी, एयरबस इंडस्ट्रीज़ और सेंटर फाॅर एविएशन (सीएपीए) सहित विभिन्न माध्यमों से जुटाई गई जानकारी से पता चलता है कि कोविड-19 में वैश्विक पर्यटन के ठंडा पड़ने से एयर ट्रांसपोर्ट उद्योग में यात्रियों का टोटा पड़ गया। साथ ही माल असबाब की हवाई ढुलाई भी प्रभावित हुई।

     यूं तो छोटी मध्यम और बड़ी मिलाकर दुनिया में कोई 5 हजार एयर लाइंस हैं। इनमें से वित्तीय आधार पर सशक्त एयर लाइंस अल्पसंख्या में हैं। आय, बाजार पूंजीकरण, परिसंपत्ति (एसेट्स) के हिसाब से विश्व में सबसे धनी डेल्टा एयर लाइंस है, 4.32 लाख करोड़ रु है। विमानों का सबसे बड़ा बेड़ा अमेरिकन एयरलाइंस ग्रुप के पास है। इसकी परिसंपत्ति 4.24 लाख करोड़ रु है। ये दोनों अमेरिकी हैं। जर्मन कंपनी लुफ्थांसा में सबसे ज्यादा कर्मचारी हैं। परिसंपत्ति के आधार पर यह तीसरे पायदान पर आती है।

    कोविड के फैलने का नतीजा यह हुआ कि थाई एयरवेज़, दक्षिण अफ्रीकी एयरवेज़, और यूरो विंग्स दिवालिया हो गईं हैं। वर्जिन एयरवेज़ ने अपने 600 पायलटों सहित 3 हजार कर्मचारियों को जबरिया छुट्टी (ले आॅफ) दे दी। लुफ्थांसा एयरलाइन 72 विमानों को दो किस्तों में खड़ा कर रही है। फिन एयरवेज़ ने 12 विमान खड़े कर 2400 कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया। फिजी एयरवेज़ ने 700 कर्मचारियों को जबरिया छुट्टी दे दी।

     कमोबेश यही स्थिति नार्वेज़ियन एयर लाइंस, ब्रसेल्स एयरलाइन, एयरमाॅरिशस, आईएजी (ब्रिटिश एयरवेज़), लक्स एयर रयान एयर, विज़ एयर, एचओपी, और यू (वाईओयू) की हो गई है। यात्री अभाव से ग्रस्त अमीरात एयरवेज़ ने 'ए 380' श्रेणी के 38 विमान खड़े कर दिए। तमाम कर्मचारियों से अवकाश लेने को भी कह दिया है। एतिहाद एयरवेज़ ने 720 कर्मचारियों को छुट्टी पर जाने का निर्देश जारी कर दिया है। स्थिति वर्ष 2008 के स्तर पर आ गई। विश्व में इस वक्त लगभग 16900 यात्री जेट सक्रिय चल रहे हैं। बारह वर्ष पूर्व 2008 में 17000 विमान आ जा रहे थे। 2019 के अंतिम दौर में 23600 विमान यात्री सेवाएं दे रहे थे।

      अब विमान निर्माण क्षेत्र पर नजर डालें। शिकागो स्थित बोइंग निर्माता कंपनी के करीब 600 विमानों के खरीद आर्डर रद्द कर दिए गए। बोइंग के प्रतिद्वंद्वी‌ फ्रांस स्थित एयरबस ग्रुप के पास 55 से अधिक नवनिर्मित विमान डिलीवरी के इंतज़ार में खड़े हुए हैं। वर्ष 2020 के शुरू में विश्व में 28 हजार से अधिक विमान यात्री परिवहन में और कोई 3 हजार विमान माल ढुलाई में लगे थे।

     इंटरनेशनल सिविल एविएशन आॅर्गनागज़ेशन (आईसीएओ) के क्षेत्रवार आकड़ों से साफ होता है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक 8.4 लाख करोड़ रु का नुकसान एयर ट्रांसपोर्ट उद्योग को हुआ। यूरोप में‌ 7 लाख करोड़ रु उ.अमेरिका में 6.16 लाख करोड़ रु, मध्य पूर्व में 1.54 लाख करोड़, लैटिन अमेरिका में 1.82 लाख करोड़ और अफ्रीका‌ में 98 हजार करोड़ रु सहित 26 लाख करोड़ की हानि हुई। इसके अलावा हवाई अड्डों को 8.05 लाख करोड़ रु और नेविगेशन सेवा प्रदाताओं को 91 हजार करोड़ रु का नुकसान लगा।

     विभिन्न देशों की सरकारें संकट से उबारने के लिए पैकेज भी मुहैया करा रहीं हैं। वैसे इस इस उद्योग से सरकारों को समग्र रूप से सालाना 7 लाख करोड़ रु का कर राजस्व मिलता था। विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार पुनर्जीवन देने के लिए इस उद्योग को 12-13 लाख करोड़ रु की जरूरत है।

   प्रणतेश नारायण बाजपेयी