Friday, 30 June 2017

सावधानीपूर्वक जल का संरक्षण करना भी एक उत्तरदायित्व

      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सावनी योजना के अधीन राजकोट के निकट अजी डैम की भराई का शुभारंभ किया। 

      इस अवसर पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दिनों की तुलना में गुजरात काफी आगे बढ़ा है जब यह पानी की अत्यधिक कमी की समस्या का सामना कर रहा था।
         उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में गुजरात की विकास यात्रा में काफी सकारात्मक बदलाव हुए हैं। जल्द से जल्द जल उपलब्ध करने के कार्य को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जितनी अधिक संख्या में लोगों को पानी मुहैया होगा, प्रगति के और भी अधिक द्वार खुलेंगे।
        उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक जल का सावधानीपूर्वक संरक्षण करना एक उत्तरदायित्व भी है। उन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का आह्वान किया।

कश्‍मीर को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए 345 किलोमीटर रेलवे लाइन

    रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने काजीगुंड-बारामूला के बीच पांच नये हॉल्ट स्टेशनों की आधारशिला रखी। कश्‍मीर घाटी क्षेत्र में जनता की नये हाल्‍ट स्‍टेशन बनाने की मांग को पूरा करने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने बारामूला-काजीगुंड रेल सेक्‍शन पर पांच नये हॉल्‍ट स्‍टेशनों-संगदान, मंगहल, रतनिपोर, नादिगाम और रजवान के निर्माण की आधारशिला रखी।

     इस बारे में श्रीनगर के शेर-ए-कश्‍मीर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन केन्‍द्र में एक समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में जम्‍मू कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री सुश्री महबूबा मुफ्ती, उप मुख्‍यमंत्री डॉ. निर्मल कुमार सिंह, राज्‍यसभा के सांसद नजर अहमद लॉय विशिष्‍ट अतिथि थे। उत्‍तर रेलवे के महाप्रबंधक आर.के. कुलश्रेष्‍ठ और वरिष्‍ठ रेलवे अधिकारी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। 
      बारामुला-काजीगुंड रेल सेक्‍शन के नये स्‍टेशन इस प्रकार हैं, संगदान (क्वाजीगुंड-सदुरा), मंगहॉल (सदुरा-अनंतनाग), रतनिपोरा (अवंतीपुरा-काकापोरा), नादिगाम और रजवान स्टेशन (बडगाम-मैजोम)।ये हॉल्‍ट स्‍टेशन इन क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों की परिवहन जरूरतों को पूरा करेंगे। कश्मीर घाटी में सभी मौसमों के लिए चलाई गई विशेष डेमू ट्रेन यहां के निवासियों के लिए वास्‍तविक जीवन रेखा बन गई हैं। इन डेमू ट्रेनों में रोजाना औसतन 25,000 यात्री सफर करते हैं और इनसे समतुल्‍य टिकट बिक्री आय लगभग साढ़े तीन लाख रुपये प्रतिदिन है।
          जम्मू-कश्मीर में एक वैकल्पिक और विश्वसनीय जन परिवहन सेवा उपलब्‍ध कराने के दृष्टिकोण से भारत सरकार ने कश्‍मीर घाटी को भारतीय रेलवे के नेटवर्क से जोड़ने के लिए 326 किलोमीटर (बाद में इसे बढ़ाकर 345 किलोमीटर कर दिया गया) रेलवे लाइन की योजना बनाई थी। स्‍थानीय जनता और पूरे देश के लिए एक महत्‍वपूर्ण परियोजना जम्मू-उधमपुर-कटरा-काजीगुंड-बारामूला रेल लाइन परियोजना को राष्‍ट्रीय परियोजना के रूप में घोषित किया गया है। 
        यह परियोजना भारतीय उपमहाद्वीप में बनाई जाने वाली शायद सबसे मुश्किल नई रेल लाइन परियोजना है। यह परियोजना हिमालय से गुजरती है, जो अपेक्षाकृत युवा पर्वत हैं और भौगोलिक आश्‍चर्यों से भरे तथा उच्‍च टेकटोनिक गतिविधि और बेहद ठंडे मौसम की परिस्थितियों से ग्रस्‍त हैं। 2005 में जम्मू-उधमपुर रेलवे लिंक का कार्य पूरा होने से रेल संपर्क में नए युग की शुरुआत हुई। 
     कश्‍मीर घाटी में रेलवे लाइन का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया गया। रेलवे ने 2 अक्‍टूबर, 2008 में अनंतनाग-मजहोम, फरवरी 2009 में मजहोम-बारामूला सेक्‍शन और अक्‍टूबर 2009 में काजीगुंड-अनंतनाग के मध्‍य बकाया 18 किलोमीटर लंबे सेक्‍शन के कार्य की शुरूआत की। इस प्रकार कश्‍मीर घाटी में 119 किलोमीटर लम्‍बी काजीगुंड-बारामूला रेलवे लाइन का निर्माण पूरा हुआ। 
        रेलवे तभी से 345 किलोमीटर लम्‍बी रेलवे लाइन के बकाया हिस्‍से को पूरा करने के लिए कार्य कर रहा है। उधमपुर-कटरा रेलवे लाइन का 25 किलोमीटर सेक्‍शन जुलाई, 2014 में शुरू हुआ और कटरा-बनिहाल की 111 किलोमीटर लम्‍बी लाइन का कार्य प्रगति पर है, जिसका मार्च, 2021 तक पूरा होने का लक्ष्‍य है। उत्‍तर रेलवे, केआरसीएल और आईआरसीओएन द्वारा निर्मित किये जा रहे इस सेक्‍शन में 97.34 किलोमीटर लम्‍बी सुरंगें, 27 बड़े और 10 छोटे पुल तथा 203 किलोमीटर की पहुंच सड़क होंगी।
      इस परियोजना का 45 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है, जिस पर 9419 करोड़ रुपये का खर्च आया है। यूएसबीआरएल परियोजना में बड़ी संख्‍या में सुरंगें और पुल बनाए जाएंगे। इनमें सबसे महत्‍वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण कार्य सलाल पन विद्युत बांध के पास चिनाब नदी की गहरी घाटी में निर्माण करना है। इससे भूकंप जोन पांच में लांग स्‍पेन पुल के निर्माण की जरूरत सामने आई है।
       चिनाब पुल की कुल लम्‍बाई 1315 मीटर है और 100 किलोमीटर की डिजाइन स्‍पीड है। यह पुल 266 किलोमीटर प्रति घंटे चलने वाली हवा के वेग को भी सहन कर सकता है और इसका जीवन काल 120 वर्ष होगा। स्‍टील मेहराब से बना यह पुल स्‍थानीय विशेषज्ञता और निर्माण सामग्री का उपयोग करके खूबसूरती से डिजाइन किया गया है। इस पुल की ऊंचाई 359 मीटर है, जो पेरिस के एफिल टॉवर से करीब 35 मीटर ऊंचा है। पूरा होने पर यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल होगा। 
       पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला जम्‍मू और कश्‍मीर घाटी को अलग करती है। इन्‍हें आपस में जोड़ने की परियोजना के रूप में भारतीय रेलवे ने पहले 11.21 किलोमीटर लम्‍बी सुरंग टी-80 का निर्माण किया था, जो एशिया में सबसे लम्‍बी परिवहन सुरंग है। 
        बनिहाल-बारामूला रेलवे सेक्‍शन के मौजूदा स्‍टेशनों में बनिहाल, शाहबाद हॉल्ट, काजीगुंड, सदुरा, अनंतनाग, बिजबेहरा, पंजगाम, अवंतिपुरा, काकापोरा, पंपोर, श्रीनगर, बडगाम, मझहोम, पट्टन, हामरे, सोपोर और बारामूला शामिल हैं। इस रेलवे सेक्‍शन में 15 जोड़े डेमू सेवाएं परिचालित हैं, जो इस क्षेत्र में सभी मौसम में कनेक्टिविटी उपलब्‍ध कराती हैं। 
      जुलाई 2015 में अतिरिक्‍त डेमू सेवाएं शुरू की गईं और उसके बाद कार्यालय जानेवालों तथा छात्रों की सुविधा के लिए फास्‍ट डेमू बनिहाल-बारामूला और बारामूला-बडगाम के बीच मई 2016 में शुरू की गई। वाडी की सायर-ए बच्‍चों की विशेष रेलगाड़ी है, जो 26 नवम्‍बर, 2016 को बनिहाल और बारामूला के बीच शुरू की गई थी, अब यह हर माह के दूसरे तथा चौथे रविवार को चलती है।

इतिहास की जड़ों से जुड़ें रहें नए इतिहास रचने के लिए

    गुजरात में साबरमती आश्रम शताब्दी समारोह के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि
इतिहास भूला देने की कितनी बडी कीमत चुकानी पड़ती है, क्या कुछ खोना पड़ता है? क्या कुछ गवाना पडता है? अगर इस बात को समझना है, मैं समझता हूं कि श्रीमद राजचन्द्र जी के व्यक्तित्व से, हम बहुत भली भांति समझ सकते हैं कि उनको भुलाकर हमने कितना गंवाया है क्या कुछ खोया है और आज यह बहुत ही सुभव योग है कि श्रीमद राजचन्द्र जी, पूज्य बापू उनको कविश्री के रूप में भी संबोधित करते थे। उनके 150 वर्ष और जिस तपोभूमि से सदियों की गुलामी के बाद भारत की अंतर चेतना को जगाने का एक पवित्र कार्य हुआ, वो साबरमति आश्रम का शताब्दी पर्व है।

     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 2017 का साल अनेक रूप से महत्वपूर्ण है, यही वर्ष था जब देश में पहला सत्याग्रह का बिगुल बजा। चंपारण की धरती पर और उसका भी यह शताब्दी का वर्ष है। पूज्य बापू 1915 में भारत वापिस आए थे अफ्रीका से और 2015 में जब उनका शताब्दी का वर्ष था तो भारत सरकार ने पूज्य बापू के भारत आगमन की उस शताब्दी को भी इसी गुजरात में, गांधीनगर में, महात्मा मंदिर में, दुनिया भर के प्रवासी भारतीयों को बुलाकर के उस अवसर को मनाने का प्रयास किया है। 
        इस कार्यक्रम से देश के बहुत लोगों को जो गांधी से जुडे हैं, जो गांधी के अभ्यासु हैं उनके लिए श्रीमद राज चन्द्र का नाम परिचित है। लेकिन एक पूरी पीढी है जिनके लिए श्रीमद राजचन्द्र जी का नाम नया है। दोष हम लोगों का है कि हमें इन महापुरूषों को पीढ़ी दर पीढ़ी याद रखते रहना चाहिए लेकिन हम कुछ न कुछ ऐसे गलत रास्ते पर चल दिए कि हमने उन्हें भुला दिया। 
        इस सरकार की कोशिश है कि इस महान राष्ट्र के महान सपुतों का, महान परंपराओं का, महान इतिहास का निरंतर स्मरण बनता रहे, इतिहास की जड़ों से हम जुड़ें रहें और नए इतिहास रचने के लिए पराक्रम के लिए तैयार रहे, इस मकसद से हमें आगे चलना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि साबरमती आश्रम की शताब्दी कभी-कभी मुझे लगता है कि विश्व को जिस रूप में गांधी से परिचित करवाने की जरूरत है, आग के समुद्र से गुजर रही मानवता को गांधी से संबल मिल सकता है, राह मिल सकती है। 
        प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अभी मैं नीरदलैंड से आया, परसों में नीदरलैंड में था। दो चीजें मेरे लिए बड़ी ही नई थी मेरी जानकारी के लिए। भारत में जितने मार्ग महात्मा गांधी के नाम पर है उसके बाद दुनिया में सबसे अधिक मार्ग के नाम गांधी पर किसी के होंगे तो वो नीदरलैंड के है। मेरे लिए यह नया अनुभव, नई जानकारी है। दूसरा वहां सुरीनाम के लोग आकर के बसे हुए हैं।
            प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 2019 में हम पूज्य बापू के 150 वर्ष मनाएंगे। ऐसे ही मनाएंगे क्या? जी नहीं, पूज्य बापू के 150 साल ऐसे ही मनाने का, किसी हिंदुस्तानी को हक नहीं है। पूज्य बापू के 150 साल मनाना मतलब गांधी की तरह कोई संकल्प लेकर के 150वीं जयंती तक उसको पूरा करके रहना और यह हर हिंदुस्तानी…। अप्रतीम संकल्प शक्ति के धनी थे वो। हमारे भीतर भी वो संकल्प शक्ति हो जिस संकल्प शक्ति को लेकर के हम भी निकल पड़े आज से और जब गांधी के 150 मनाएंगे तब हम इसको परिपूर्ण करके रहेंगें ये हर हिंदुस्तानी के दिल में…। 
         साबरमती आश्रम आजादी के आंदोलन का कलेवर जहां तैयार हुआ, पिंड तैयार हुआ वहां से ये करते हुए आजाद हिंदुस्तान पूज्य बापू के सपनों का हिंदुस्तान बनाने के लिए हम भी कुछ जिम्मेवारी निभा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गाय की रक्षा, गऊ की भक्ति महात्मा गांधी और विनोबा भावे से बढकर कोई हो नहीं सकता है। अगर गाय की भक्ति करनी है, गाय की रक्षा करनी है तो गांधी जी और विनोबा भावे जी ने हमें उत्तम राह दिखाई। उसी रास्ते पर देश को चलना ही पड़ेगा। 
        उसी में देश का कल्याण है। विनोबा जी जीवन भर गऊ रक्षा के लिए अपने आप को आहुत करते रहे। मेरा सौभाग्य था मैं एक बार वर्धा गया, विनोबा जी के दर्शन के लिए। मैं उनसे मिला, प्रणाम किया, बैठा। विनोबा जी शब्दों की बड़ी ताकत रखते थे। मैं बैठा, परिचय हुआ, मैं बैठा सामने देख रहा था। वे मुझे कह रहे कि मर जाओ, मर जाओ। मैं हैरान था कि विनोबा जी कह रहे हैं मर जाओ-मर जाओ। मैं चुपचाप बैठा रहा। फिर धीरे से कहे गाय के लिए, गाय माता के लिए। 
       आप कल्पना कर सकतें हैं कि विनोबा जी उस समय की सरकार के खिलाफ जीवन के अंत तक वो लड़ते रहे, अनेक बार अनशन किये गौरक्षा के लिए किए, गौभक्ति के लिए किए। भारत का संविधान भी हमें उसका महात्मय समझाता है लेकिन, क्या किसी इंसान को मारने का हम मिल जाता है? क्या ये गौभक्ति है, क्या ये गौरक्षा है? पूज्य बापु का रास्ता ये नहीं हो सकता।
        विनोबा भावे का जीवन हमें ये सन्देश नहीं देता है। और इसलिए साबरमती आश्रम की शताब्दी पर्व पर और पूज्य श्रीमद राजचन्द्र जी का 150वां जन्मवर्ष मनाने तब, हर हिंदुस्तानी के दिलो-दिमाग में, ये हमारे मूलभूत संस्कार हैं, हमारे मूलभूत पंरपरा है-अहिंसा। ये हम लोगों का जीवन धर्म रहा है। हम कैसे आपा खो रहे हैं। डॉक्टरों को मार रहे हैं। अकस्मात हो जाए ड्राइवरों को मार रहे हैं। गाय के नाम पर इंसानों को मार रहे हैं।