Thursday, 16 February 2017

देश में 52.21 मिलियन टन दूध उत्पादन

             एकीकृत नमूना सर्वेक्षण पूरे देश भर में 15 प्रतिशत नमूना के सामान्य सिद्धांत पर किया गया एक नियमित नमूना सर्वेक्षण है। 

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समस्त ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से नूमना गांव और शहरी वार्डों का चयन करके यह सर्वेक्षण तीन मौसमों में आयोजित किया जाता है। नवीनतम पशुधन जनगणना गांवों की सूची नमूना लेने के ढांचे का गठन करती है। सामान्य सिद्धांत के अनुसार पशुधन संख्या का अनुमान लगाने के लिए 5-5 प्रतिशत यानि 15 प्रतिशत गांव/ शहरी वार्डों का किसी राज्य से दो स्वतंत्र उप-नमूनों के रूप में चयन किया जाता है। उसी के आधार पर बिना रिप्लेसमेंट के सामान्य बेतरतीब नमूना लेने की प्रणाली का उपयोग करके पशुधन और कुक्कुट की पूरी जनगणना की जाती है। 

               इसके बाद जनगणना वृद्धि दर का अनुमान लगाने के लिए प्रत्येक उप-नमूने में से 5 नमूने छांटे जाएंगे। प्रत्येक जिले में गांव की संख्या के अनुसार नमूनों की संख्या घट या बढ़ जाएगी। सर्वेक्षण में 2015-16 (बरसात) के दौरान कुल दूध उत्पादन 52.21 मिलियन टन हुआ था जो 2016-17 (बरसात) में बढ़कर 54.50 मिलियन टन हो गया। इस प्रकार दूध उत्पादन में 4.38ऽ वृद्धि दर्ज की गई। 2016-17 के दौरान उत्पादन का लक्ष्य 163.74 मिलियन टन रखा गया था। गर्मी और बरसात दो सीजनों में कुल उत्पादन 105.42 मिलियन टन हुआ।

            इस प्रकार इसने 64.38ऽ उपलब्धि दर्शायी। इसके अलावा पिछले वर्ष 2015-16 (बरसात) की तुलना में देशी श्रेणी की गायों और भैंसों के प्रतिदिन औसत दूध उत्पादन में थोड़ा सा सुधार हुआ है। उत्तर प्रदेश,राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और आंध्रप्रदेश राज्य बरसात के मौसम में सबसे अधिक दूध का उत्पादन करने वाले पहले पांच राज्य हैं। अंडा उत्पादन: 2015-16 (बरसात) के दौरान देश में अंडों का कुल उत्पादन 27.33 बिलियन रहा था जो 2016-17 (बरसात) के दौरान बढ़कर 29.09 बिलियन पर पहुंच गया। इस प्रकार अंडों के उत्पादन में 6.42ऽ बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी। 2016-17 के दौरान 87.05 अंडे के लक्षित उत्पादन की तुलना में गर्मी और बरसात के दो सीजन में अंडों का अनुमानित उत्पादन 55.11 बिलियन रहा है जो इस बारे में 63.31ऽ उपलब्धि को दर्शाता है।

              बरसात के मौसम में पांच सबसे बड़े अंडा उत्पादक राज्यों में  तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और हरियाणा है। मांस उत्पादन, 2015-16 (बरसात) के दौरान देश में 2.24 मिलियन टन मांस का कुल उत्पादन हुआ था जबकि 2016-17 (बरसात) में 2.43 मिलियन टन मांस का उत्पादन हुआ है। इस प्रकार मांस उत्पादन में 8.74ऽ की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है। 2016-17 के दौरान 7.37 मिलियन टन मांस के उत्पादन लक्ष्य की तुलना में गर्मी और बरसात के दो सीजनों में कुल 4.67 मिलियन टन मांस का उत्पादन हुआ जो 63.28ऽ उपलब्धि को दर्शाता है।

       बरसात के मौसम में पांच सबसे बड़े मांस उत्पादक राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना है। ऊन उत्पादन: 2015-16 (बरसात) के दौरान कुल 5.91 मिलियन किलोग्राम ऊन का उत्पादन हुआ था जबकि 2016-17 (बरसात) के दौरान केवल 5.78 मिलियन किलोग्राम ऊन का ही उत्पादन हुआ है।

              इस प्रकार ऊन उत्पादन में 2.16ऽ की गिरावट दर्ज हुई है। 2016-17 के दौरान 44.07 मिलियन किलोग्राम ऊन उत्पादन के लक्ष्य की तुलना में गर्मी और बरसात के दो सीजनों के दौरान ऊन का कुल अनुमानित उत्पादन 20.66 मिलियन किलोग्राम रहा है जो 46.89ऽ उपलब्धि को दर्शाता है। बरसात के मौसम में पांच सबसे बड़े ऊन उत्पादक राज्यों में कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर है।

कृषि क्षेत्र की प्रगति दर 4.1 प्रतिशत का अनुमान

                केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने कहा है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने मुश्किल चुनौतियों के बावजूद 87 साल के अपने अब तक के कार्यकाल में अनेक सफलताएं हासिल की है जिन्हें कृषि की प्रगति में मील का पत्थर कहा जा सकता है। 

          खेती बाड़ी में उत्पादकता और आय में वृद्धि, संस्थान निर्माण, मानव संसाधन, नई तकनीकों का विकास, कृषि विविधिकरण जैसे क्षेत्रों में आईसीएआर ने सफलता के नये प्रतिमान स्थापित किए हैं। सिंह ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सोसायटी की 88 वीं वार्षिक आम बैठक में कही। इस अवसर पर सोसायटी के गणमान्य सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सिंह ने कहा कि सरकार, पांच सालों में किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। 

            इस बार के बजट में कृषि के समग्र विकास पर फोकस किया गया है जिसमें किसानों को वहन करने योग्य  कर्ज उपलब्ध कराने, बीजों और उर्वरकों की सुनिश्चित आपूर्ति, सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से उत्पादकता में सुधार लाने,  ई-नैम के माध्यम से एक सुनिश्चित बाजार और लाभकारी मूल्य दिलाने पर जोर दिया गया है। सिंह ने कहा कि कृषि की बेहतरी और किसानों की खुशहाली के लिए सरकार ने बजट में कई पहल की हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बजट में वर्ष 2017-18 के लिए ग्रामीण, कृषि और सम्बद्ध सेक्टर के लिए 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे रूपये 1,87, 223 करोड़ किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष में कृषि क्षेत्र की प्रगति दर 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

           केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 में अच्‍छे मानसून और सरकार की नीतिगत पहल के कारण इस वर्ष में देश में खाद्यान्‍न का रिकॉर्ड उत्‍पादन हुआ है। वर्ष 2016-17 के लिए दूसरे अग्रिम आकलन के अनुसार देश में कुल 271.98 मिलियन टन खाद्यान्‍न उत्‍पादन का अनुमान लगाया गया है जो वर्ष 2013-14 में हासिल 265.04 मिलियन टन खाद्यान्‍न के पिछले रिकॉर्ड उत्‍पादन की तुलना में 6.94 मिलियन टन ज्‍यादा है एवं पिछले वर्ष 2015-16 के मुकाबले वर्तमान वर्ष 2016-17 का उत्पादन उल्लेखनीय रूप से 20.41 मिलियन टन ज्यादा है। सिंह ने कहा कि इस बार रबी में  पिछले साल 2015-16 की तुलना में गेहूं में 7.71 प्रतिशत, दलहन में 12.96 प्रतिशत और तिलहन में 10.65 प्रतिशत ज्यादा बुवाई हुई है जो कि सभी फसलों को मिलाकर पिछले वर्ष की तुलना में 6.86 प्रतिशत ज्यादा बुवाई है।

               सिंह ने कहा कि भारतीय कृ‍षि वैज्ञानिकों ने अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास करके हरित क्रांति लाने और उतरोत्तर  कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 1951 से लेकर अब तक देश के खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 5 गुणा, बागवानी उत्पादन में 9.5 गुणा, मत्स्य उत्पादन में 12.5 गुणा, दूध उत्पादन में 7.8 गुणा और अंडा उत्पादन में 39 गुणा की वृद्धि हुई है। इसका राष्ट्रीय खाद्य व पोषणिक सुरक्षा पर उल्लेखनीय प्रभाव पडा है। हमारे वैज्ञानिकों ने उच्चतर कृषि शिक्षा की उत्कृष्टता बढ़ाने में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष 2016 में देशभर में दलहन के 150 बीज हब स्थापित किए गए हैं। 

            सबसे पहले परिपक्व होने वाली मूंग की किस्म ‘आईपीएम 205-7 (विराट)’ को खेती के लिए जारी किया गया। कृषि क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहन देने के प्रयासों में पिछले ढाई वर्ष में उल्लेखनीय प्रगति  हुई है। वर्ष 2012 से मई 2014 तक जहां विभिन्न फसलों की कुल 261 नई किस्में  जारी की गई थीं वहीं लगभग इतनी ही अवधि, जून, 2014 से दिसम्बर, 2016 में कुल 437 नई किस्में  जारी की गई हैं। 

              कृषि के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में अक्तूबर 2016 में नई दिल्ली में समन्वय इकाई के साथ कृषि में ब्रिक्स अनुसंधान प्लेटफार्म की स्थापना करने के लिए एक समझौता किया गया। इस इकाई का प्रबंधन डेयर, भारत सरकार द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा, वर्ष 2016 में 17 अंतर्राष्ट्रीय सहयोगात्मक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

             राधा मोहन सिंह ने कहा कि  कृषि चूंकि राज्य का विषय है, इसलिए इसकी प्रगति में राज्यों के माननीय कृषि मंत्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस मौके पर प्रतिनिधियों से अपील की कि वे वैज्ञानिक-राज्य-किसान सम्पंर्क विकसित करें और कृषि की प्रगति और किसानों की आमदनी व खुशहाली बढ़ाने की दिशा में केन्द्र के साथ मिलकर काम करें।

भारत व नार्वे के बीच मत्स्य पालन, डेयरी क्षेत्र में सहयोग

             केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने नार्वे के कृषि मंत्री माननीय जॉन जॉर्ज डेल के साथ मुलाकात की। 

            इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत और नार्वे के संबंध काफी गहरे रहे हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि भविष्य में भी हमारे संबंध मजबूत बने रहे। उन्होंने कहा कि भारत और नार्वे के बीच मत्स्य पालन में द्वीपक्षीय सहयोग आगे बढ़ा है। इस क्षेत्र में संबंधों को आगे बढ़ाने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि दोनों ही देश जलवायु अनुकूल मत्स्य तकनीकों को विकसित करने संबंधी प्रक्रिया में सहयोग करने के साथ कम दोहित मत्स्य क्षेत्रों का दोहन करने संबंधी प्रोद्योगिकी का पता लगाने तथा ऐसी प्रोद्योगिकी विकसित करने के साथ भारत और नार्वे जरूरत पड़ने पर एक दूसरे को समुद्री उत्पादों के निर्यात में वृद्धि करने के लिए एक दूसरे का सहयोग कर सकते हैं। 

                 उन्होंने यह भी कहा कि नार्वे, भारत में दूध के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए डेयरी के क्षेत्र में सहयोग करने पर विचार कर सकता है। कृषि मंत्री ने नार्वेयन इंस्टीट्यूट ऑफ बायो-इकोनामी रिसर्च (एनआईबीआइओ) कृषि मंत्रालय द्वारा भारत के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडू में क्लाइमावाटर, क्लाइमाराइस और क्लाइमाएडेप्ट पर किए जा रहे अनुसंधान कार्य की सराहना की। क्लाइमाएडेप्ट में कृषि एवं जल क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन पर जोर दिया जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नार्वे इन अनुसंधान कार्यों को भारत के अन्य राज्यों में भी करने पर विचार कर सकता है।
 

               उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में कृषिगत जिंसों के नार्वे के साथ किए गए भारतीय व्यापार में 17.65 मिलियन अमेरीकी डॉलर का निर्यात शामिल है, जो अगले वर्ष बढ़कर 25.57 अमेरीकी  मिलियन डॉलर हो गया। वर्ष 2015-16 में 2.48 मिलियन अमेरीकी डालर का आयात किया गया लेकिन दोनों देश अब  अब इस द्विपक्षीय व्यापार में और अधिक वृद्धि कर सकते हैं। भारत ने ग्लोबल क्रॉप डाइवर्सिटी ट्रस्ट् में वर्ष 2006 में हस्ताक्षर किया है ताकि वैश्विक खाद्य सुरक्षा तथा सतत कृषि का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए खाद्य और कृषि के वास्ते पौध अनुवांशिक संसाधनों के दीर्घकालिक संरक्षण एवं उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। भारत सरकार ने दोहराव से बचने के लिए वर्ष 2014 में स्वाल्बर्ड ग्लोबल सीड वाल्टर में पीजन पी (अरहर) की 25 किस्में जमा कराई है।

                    अब भारत सरकार फरवरी, 2017 के दौरान सोरगम की 100 किस्में तथा धान (पैडी) की 100 किस्में जमा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने समान विचार धारा वाले देशों के बीच न केवल अपने व्यापार और निवेश संभावनाओं को बढ़ाने बल्कि विगत कई वर्षों से अर्जित  जानकारी को अपने मित्र देशों के साथ साझा करने पर विशेष जोर दिया है। कृषि मंत्री ने आशा जताई कि नार्वे के कृषि मंत्री जॉन जॉर्ज डेल का भारत दौरा कृषि में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक बनाने और मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 

                   इसके बाद कृषि मंत्री ने कृषि भवन में राष्ट्रीय बीज निगम के खाद्य बिक्री केन्द्र का उद्घाटन किया। भारत सरकार की आम आदमी तक उचित दरों पर खाद्य सामग्री पहुँचाने की मुहिम को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय बीज निगम ने अपने अमान्य बीजों के मूल्य संवर्द्धन के बाद चावल, आटा, बेसन, दालें, सरसों का तेल, दलिया, ओट इत्यादि बनाने का कार्य शुरू किया है। इसके लिए निगम ने कृषि भवन  में खाद्य बिक्री केन्द्र खोला है । यह गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपभोक्ताओं को बाजार दरों से कम दरों पर निगम के ''फार्म सोना'' ब्रांड  के अंतर्गत उपलब्ध करवाई जायेगी । इससे न केवल निगम की आमदनी बढ़ेगी बल्कि अमान्य बीजों का सदुपयोग भी होगा। साथ ही खाद्य पदार्थ निगम के फार्मों से सीधे उपभोक्ता  की रसोई तक पहुँचेगा ।

              कृषि मंत्री ने इसके बाद जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि भवन में जैविक जलपान गृह (आर्गेनिक कैंटीन) का उद्घाटन किया। इस जैविक जलपान गृह में खाने की सामग्री जैविक उत्पादों द्वारा तैयार की जाएगी। यह जैविक जलपान गृह सिक्किम के सिम्फेड के सौजन्य से खोला गया है।

 

महिलाओं, बच्‍चों तथा वरिष्‍ठ नागरिकों को सर्वोच्‍च प्राथमिकता

             केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर दिल्‍ली पुलिस के 70वां स्‍थापना दिवस के मुख्‍य अतिथि रहे। अहीर ने 70वें स्‍थापना दिवस के अवसर पर गार्ड ऑफ ओनर का निरीक्षण किया। 

              इस अवसर पर हंसराज गंगाराम अहीर ने कहा कि दिल्‍ली पूरे देश में हो रही राजनीतिक, सामाजिक, सांस्‍कृतिक तथा वाणिज्यिक गतिविधियों के केन्‍द्र में है। दिल्‍ली पुलिस को कानून व्‍यवस्‍था बनाये रखने और अपराध को नियं‍त्रित रखने के नियमित कर्तव्‍यों को पूरा करने के अतिरिक्‍त बड़े पैमाने पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। 

             गृह राज्‍य मंत्री ने आतंरिक आतंकवाद के प्रति नागरिकों को सचेत किया और दिल्‍ली पुलिस बल में विश्‍वास व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि दिल्‍ली पुलिस किसी भी आपातस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह लैस है। उन्‍होंने मै‍त्रीपूर्ण व्‍यवहार वाले पुलिस बल की आवश्‍यकता पर जोर देते हुए महिलाओं, बच्‍चों तथा वरिष्‍ठ नागरिकों के हितों को सर्वोच्‍च प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। उन्‍होंने निर्भय कोष की राशि 25 करोड़ रूपये बढ़ाये जाने की जानकारी दी। आश्‍वासन दिया कि पुलिस बल की आधुनिकीकरण और डिजिटीकरण आवश्‍यकताओं पर गृह मंत्रालय सार्थक दृष्टि रखेगा। 

              मुख्‍य अतिथि ने 44 पुलिसकर्मियों को शौर्य पदक, विशिष्‍ट सेवा के लिए राष्‍ट्रपति पदक और सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक दिया। दिल्‍ली के पुलिस आयुक्‍त अमूल्‍य पटनायक ने मोबाइल ऐप तथा गुमशुदगी रिपोर्ट के लिए हेल्‍प लाइन, वरिष्‍ठ नागरिकों, संकट में फंसे महिलाओं तथा बच्‍चों, पुलिस मंजूरी तथा ट्रैफिक अपडेट सहित दिल्‍ली पुलिस द्वारा उठाये गये कदमों की सराहना की। 

                उन्‍होंने कहा कि वह पुलिस बल को मित्रतापूर्ण बनाने के लिए तथा डिजिटीकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि महानगर में अपराध के बदलते स्‍वभाव से निपटा जा सके। पटनायक ने कहा कि दिल्‍ली पुलिस पूरी तरह लैस है। किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए दिल्‍ली पुलिस बल का मनोबल ऊंचा है।

जलाशयों के जलस्तर में 3 प्रतिशत की कमी

           देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 71.683 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 45 प्रतिशत है। 

         यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 128 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 102 प्रतिशत है। उधर 9 फरवरी, 2017 को समाप्तव सप्ताजह में यह 48 प्रतिशत आंका गया था। इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थारपित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं। क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति उत्ततरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्था0न आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीाय जल आयोग (सीडब्यू सी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 6.00 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 33 प्रतिशत है।

                 पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिकति 36 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 39 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है। 

               पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चि म बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धल संग्रहण 12.74 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 68 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिरति 50 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 55 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। 

                 पश्चिसमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्रल आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धष संग्रहण 16.04 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 59 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिउति 31 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 54 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है।यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। 

                 मध्यऔ क्षेत्र में उत्त।र प्रदेश, उत्तसराखंड, मध्यल प्रदेश तथा छत्तीकसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धह संग्रहण 24.72 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 58 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिरति 46 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 40 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

                दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्योंं में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धआ संग्रहण 12.19 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 24 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थि।ति 24 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 41 प्रतिशत था। 

              इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण के बराबर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कमतर है। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं) और तेलंगाना शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कमतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, उत्तलराखंड, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं।

‘स्‍वच्‍छता पखवाड़ा’ पर स्‍वच्‍छता की शपथ

             पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यहां आरंभ किए गए स्‍वच्‍छता पखवाड़ा के अवसर पर पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ‘स्‍वच्‍छता शपथ’ दिलाई। 

           पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय 16 फरवरी से लेकर 28 फरवरी, 2017 तक ‘स्‍वच्‍छता पखवाड़ा’ मना रहा है। इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हमें स्‍वच्‍छता को अपनी आदतों में शुमार कर देना चाहिए। उन्‍होंने यह भी कहा कि स्‍वच्‍छता पखवाड़ा मनाए जाने के बाद भी स्‍वच्‍छता से जुड़ी गतिविधियों को निरंतर जारी रखा जाना चाहिए। इस संबंध में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि लोगों के नजरिए में बदलाव लाने की जरूरत है। 

             उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2014 में शुरू किए गए ‘स्‍वच्‍छ भारत मिशन’ में युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चाहे स्‍वच्‍छ भारत मिशन हो या नोटबंदी का निर्णय, देश भर के लोगों ने केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन किया है। उन्‍होंने कहा कि पूर्वोत्‍तर क्षेत्र साफ-सफाई के लिए जाना जाता है। 

          उदाहरण के लिए, सिक्‍किम खुले में शौच मुक्‍त (ओडीएफ) राज्‍य बन गया है। यह भारत का पहला ऐसा राज्‍य है। जिसने इस समस्‍या से पूरी तरह निजात पाई है। उन्‍होंने यह भी बताया कि मेघालय के एक गांव ने एशिया के सबसे स्‍वच्‍छ गांव का खिताब जीता है। मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के इन शानदार उदाहरणों से शेष भारत को प्रेरणा लेनी चाहिए।

             उन्‍होंने कहा कि पूर्वोत्‍तर क्षेत्र को स्‍वच्‍छता अभियान में अग्रणी की भूमिका निभानी चाहिए। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय में सचिव नवीन वर्मा और पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण भी इस अवसर पर उपस्‍थित थे।

 

गरीबों के लिए याचिका दाखिल करना आसान

             मध्‍यम और गरीब आय वर्ग के लोगों के लिए देश की कानूनी सहायता लेना आसान हो गया है। माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने मध्‍यम आय समूह योजना लागू की है। यह आत्‍म समर्थन देने वाली योजना है। 

            इसके तहत 60,000 रूपये प्रति महीने और 7,50,000 रूपये वार्षिक आय से कम आय वाले लोगों के लिए कानूनी सहायता दी जाएगी। सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860(2) के अन्‍तर्गत सोसायटी के प्रबंधन का दायित्‍व गवर्निंग बॉडी के सदस्‍यों को दिया गया है। गवर्निंग बॉडी में भारत के प्रधान न्‍यायाधीश संरक्षक होगे। अटार्नी जनरल पदेन उपाध्‍यक्ष होंगे। सोलिसीटर जनरल ऑफ इंडिया मानद सदस्‍य होंगे। 

              उच्‍चतम न्‍यायालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता सदस्‍य होंगे। उच्‍चतम न्‍यायालयों के नियमों के अनुसार न्‍यायालय के समक्ष याचिका केवल एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के जरिये दाखिल की जा सकती है। सेवा शुल्‍क के रूप में उच्‍चतम न्‍यायालय मध्‍य आय समूह कानूनी सहायता सोसाइटी (एससीएमआईजीएलएएस) को 500 रूपये का भुगतान करना होगा। आवेदक को सचिव द्वारा बताई गई फीस जमा करानी होगी। एमआईजी कानूनी सहायता के अंतर्गत सचिव याचिका दर्ज करेंगे। इसे पैनल में शामिल एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड/दलील पेश करने वाले वकील/वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता को भेजेगे।

             यदि एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड इस बात से संतुष्‍ट हैं कि यह याचिका आगे की सुनवाई के लिए उचित है, तो सोसाइटी आवेदक के कानूनी सहायता अधिकार पर विचार करेगी। जहां तक योजना का लाभ प्राप्‍त करने के लिए आवेदक की पात्रता का प्रश्‍न है याचिका के बारे में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड की राय अंतिम राय मानी जाएगी। योजना के अंतर्गत मध्‍यम वर्ग के वैसे लोग जो उच्‍चतम न्‍यायालय में मुकद्दमों का खर्च नहीं उठा सकते, वे कम राशि देकर सोसाइटी की सेवा ले सकते है। 

            इस योजना के लाभ लेने के इच्‍छुक व्‍यक्ति को निर्धारित फार्म भरना होगा। इसमें शामिल सभी शर्तों को स्‍वीकार करना होगा। योजना के अनुसार याचिका के संबंध आने वाले विभिन्‍न खर्चों को पूरा करने के लिए आकस्मिक निधि बनाई जाएगी। याचिका की स्‍वीकृति के स्‍तर तक आवेदक को इस आकस्मिक निधि‍ में से 750 रूपये जमा कराने होंगे। यह सोसाइटी में जमा किये गये शुल्‍क के अतिरिक्‍त होगा। यदि एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड यह समझते है कि याचिका आगे अपील की सुनवाई योग्‍य नहीं है, तो समिति द्वारा लिये गये न्‍यूनतम सेवा शुल्‍क 750 रूपये को घटाकर पूरी राशि चैक से आवेदक को लौटा दी जाएगी। 

           यदि योजना के अन्‍तर्गत नियुक्‍त अधिवक्‍ता सौंपे गये केस के मामले में लापरवाह माने जाते हैं तो उन्‍हें आवेदक से प्राप्‍त फीस के साथ केस को वापस करना होगा। इस लापरवाही की जिम्‍मेदारी सोसाइटी पर नहीं होगी। मवक्कील से जुड़े अधिवक्‍ता की पूरी जिम्‍मेदारी होगी। अधिवक्‍ता का नाम पैनल से समाप्‍त कर दिया जाएगा। समाज के कम आय वर्ग के लोगों के लिए याचिका दाखिल करने के काम को सहज बनाने के लिए माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने यह योजना लागू की है।

‘हुनर हाट’ का फेसबुक पेज लॉन्‍च

            अल्‍पसंख्‍यक कार्य मामले (स्‍वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्‍य मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने नई दिल्‍ली में अल्‍पसंख्‍यक मामले के दूसरे हुनर हाट का फेसबुक पेज लॉन्‍च किया।

           हुनर हाट का फेसबुक पेज लॉन्‍च करते हुए नकवी ने कहा कि ‘शिल्‍पकला और व्‍यंजन का संगम’ थीम पर आधारित दूसरा हुनर हाट में अब तक 15 लाख से अधिक लोग आये। यह हुनर हाट इस दृष्टि से अनूंठा है कि इसमें देश के विभिन्‍न भागों की शिल्‍पकला और पारंपरिक व्‍यंजनों को प्रस्‍तुत किया गया है। हुनर हाट में एक ‘बावर्चीखाना’ भी है, जहां लोग देश के विभिन्‍न हिस्‍सों के व्‍यंजनों का भी आनंद ले रहे है। नकवी ने कहा कि अल्‍पसंख्‍यक मामलों का मंत्रालय हुनर हाट को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है। फेसबुक पेज लॉन्‍च करना इस प्रयास का हिस्‍सा है। फेसबुक पेज पर मंत्रालय द्वारा आयोजित दो हुनर हाट के बारे में जानकारी दी गई है।

             इसमें शिल्‍पकारों के राज्‍य, शिल्‍पकला का विवरण तथा खान-पान के बारे में जानकारी दी गई है। फेसबुक पेज पर हुनर हाट के चित्र और वीडियो भी उपलब्‍ध हैं। दूसरे हुनर हाट के 130 स्‍टॉलों पर सभी राज्‍यों और संघ‍शासित प्रदेशों से आए 100 से अधिक शिल्‍पकार और 30 खानपान विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। शिल्‍पकारों में राज्‍य तथा राष्‍ट्रीय स्‍तर के अनेक पुरस्‍कार विजेता हैं। ये उत्‍तर प्रदेश, राजस्‍थान,जम्‍मू और कश्‍मीर, गुजरात, मणिपुर, असम, ओडिशा, केरल, तेलंगाना, बिहार आदि राज्‍यों से आये है। पहले हुनर हाट का आयोजन नवम्‍बर, 2016 में 14 से 27 नवम्‍बर तक आयोजित भारत अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार मेले में किया गया था। 

              नकवी ने बताया कि हुनर हाट जैसे कार्यक्रमों तथा अन्‍य सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों को सभी राज्‍यों में आयोजित करने के लिए ‘हुनर हब’ स्‍थापित करने के बारे में अल्‍पसंख्‍यक मामलों का मंत्रालय काम कर रहा है। दो हुनर हाट की सफलता से उत्‍साहित मंत्रालय निकट भविष्‍य में ऐेसे आयोजन मुम्‍बई, कोलकाता, हैदराबाद, लखनऊ, पटना, गुवाहाटी तथा अन्‍य स्‍थानों पर करेगा।

दिल्‍ली वसंतोत्‍सव : अमेरिका, कनाडा; जर्मनी; वेनेजुएला भी आए

                  वस्‍त्र सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा ने ग्रेटर नोएडा स्‍थित इंडिया एक्‍सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित रंगारंग समारोह के दौरान ‘आईएचजीएफ-दिल्‍ली वसंतोत्‍सव 2017’ के 43वें संस्‍करण का उद्घाटन किया।

              यह मेला ग्रेटर नोएडा स्‍थित अत्‍याधुनिक इंडिया एक्‍सपो सेंटर में 16 से लेकर 20 फरवरी, 2017 तक आयोजित किया जाएगा। इस मेले का उद्घाटन करते हुए वस्‍त्र सचिव ने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकॉर्ड्स में आईएचजीएफ-दिल्‍ली मेले को स्‍थान दिलाने में मदद करने के लिए ईपीसीएच को बधाई दी। श्रीमती वर्मा ने कहा कि जब भी वह मेले का मुआयना करने जाती हैं तो उन्‍हें नई उत्‍पाद श्रृंखला देखने को मिलती है। 

                उन्‍होंने कहा कि यही कारण है कि दुनिया भर से बड़ी संख्‍या में खरीदार अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए आईएचजीएफ में आते हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि प्रतिस्‍पर्धी बनने के लिए क्राफ्ट क्‍लस्‍टरों में कार्यरत भारतीय हस्‍तशिल्‍प के कारीगरों एवं निर्माताओं का मार्गदर्शन किया जाना चाहिए, ताकि वे नए उत्‍पादों का सृजन कर सकें। उन्‍होंने कहा कि विभिन्‍न क्राफ्ट क्‍लस्‍टरों में कार्यरत कारीगरों, शिल्‍पकारों और नए उद्यमियों की सहायता करने और आईएचजीएफ-दिल्‍ली मेले में उन्‍हें प्‍लेटफॉर्म सुलभ कराने में ईपीसीएच अहम भूमिका निभा रही है, ताकि वे अंतर्राष्‍ट्रीय खरीदारों से उनका सीधा संवाद संभव हो सके। इस प्रत्‍यक्ष क्रेता-विक्रेता बैठक के जरिए भारतीय हस्‍तशिल्‍प का न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्‍कि इनकी बदौलत विश्‍व भर के घरेलू, फैशन, लाइफस्‍टाइल एवं वस्‍त्र बाजार में भारत की छवि और बेहतर हो सकती है। 

               वस्‍त्र सचिव ने इस बात पर काफी संतुष्‍टि जताई कि लकड़ी की वस्‍तुओं के लिए दिए जा रहे ‘वृक्ष’ प्रमाण पत्र को विश्‍व भर में स्‍वीकार किया गया है। उन्‍होंने यह भी कहा कि विकास आयुक्‍त (हस्‍तशिल्‍प) का कार्यालय हस्‍तशिल्‍प वस्‍तुओं की ब्रांडिंग की दिशा में ठीक उसी तरह से अथक प्रयास कर रहा है, जिस तरह से हथकरघा क्षेत्र के लिए ‘इंडिया हैंडलूम’ ब्रांड को लांच किया गया है। श्रीमती वर्मा ने कहा कि इससे अंतर्राष्‍ट्रीय बाजारों में हस्‍तशिल्‍प उत्‍पादों से जुड़े गुणवत्‍ता आश्‍वासन, प्रमाणन एवं बिक्री करने में मदद मिलेगी। 

               ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि एक ही छत के नीचे हस्‍तशिल्‍प उत्‍पादकों के सबसे बड़े समूह के रूप में आईएचजीएफ-दिल्‍ली मेले को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकॉर्ड्स में स्‍थान दिलाने का श्रेय प्रत्‍येक हितधारक को जाता है, जिनमें प्रदर्शक, खरीदार, विकास आयुक्‍त (हस्‍तशिल्‍प) का कार्यालय और ईपीसीएच की टीम शामिल हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि आईएचजीएफ-दिल्‍ली मेले के अगले संस्‍करण के दौरान ईपीसीएच डिजाइन संबंधी पंजीकरण के लिए एक प्रक्रिया पेश करेगी, ताकि विभिन्‍न वस्‍तुओं के सृजकों के हितों की रक्षा हो सके। निर्माताओं के समुदाय में उत्‍पादों की नकल करने की प्रवृत्‍ति को हतोत्‍साहित किया जा सके।

              जानी-मानी अंतर्राष्‍ट्रीय खरीदार कंपनियों जैसे कि न्‍यू एडिशन होम बी.वी. नीदरलैंड; टीओके एंड स्टोक, ब्राजील; ईएंडएल, ऑस्ट्रेलिया; रूस्‍ट, अमेरिका; एक्सेंट डेकोर इंक अमेरिका; टूज कंपनी इंक., अमेरिका; मोइज होम, कनाडा ; कंगारू जीएमबीएच, जर्मनी; और कॉपिको, वेनेजुएला के खरीदार मेले के इस संस्‍करण में आए हुए हैं। विदेशी खरीदारों के अलावा भारत की अनेक प्रमुख रिटेल चेन के घरेलू खुदरा खरीदारों के साथ-साथ ई-कॉमर्स कंपनियों के खरीदार भी इस मेले में नियमित रूप से आते रहे हैं। पिछले संस्‍करणों की तरह इस मेले के पहले दिन भी काफी गहमागहमी रही। 

             विभिन्‍न खरीदार मार्ट के परिसर के साथ-साथ प्रदर्शनी वाले हॉल में भी व्‍यावसायिक सौदे करने में जुटे रहे। अप्रैल 2016-जनवरी 2017 के दौरान हस्‍तशिल्‍प निर्यात में रुपये के लिहाज से 13.06 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कुल मिलाकर 20,282.18 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। इस दौरान डॉलर के लिहाज से हस्‍तशिल्‍प निर्यात में 9.43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कुल मिलाकर 3018.58 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ। ईपीसीएच के अध्‍यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि वर्ष 2016-17 के लिए निर्यात लक्ष्‍य 3600 मिलियन अमेरिकी डॉलर (23,560.00 करोड़ रुपये) का रखा गया है।

                परिषद को यह लक्ष्‍य पा लेने का भरोसा है। हस्‍तशिल्‍प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच), जो हस्‍तशिल्‍प के संवर्धन एवं विकास के लिए एक प्रमुख एजेंसी है, पिछले 23 वर्षों से भारतीय हस्‍तशिल्‍प एवं उपहार मेले का आयोजन कर रही है। आईएचजीएफ-दिल्‍ली वसंतोत्‍सव 2017 में बड़ी संख्‍या में पूछताछ होने और ऑर्डर मिलने की आशा है।

स्टॉक एक्सचेंज में सरकारी बीमा कंपनियों को सूचीबद्ध करने की मंजूरी

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने स्टॉक एक्सचेंज में सरकारी बीमा कंपनियों को सूचीबद्ध करने को मंजूरी प्रदान कर दी है।

            जिन कंपनियों को सूचीबद्ध किया जाएगा उनके नाम द न्यू इंडिया एस्योरेंस कंपनी लिमिटेड, यूनाइटेड इंडिया इंस्योरेंस कंपनी लिमिटेड, ओरियंटल इंस्योरेंस कंपनी लिमिटेड, नेशनल इंस्योरेंस कंपनी लिमिटेड, जनरल इंस्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया हैं । इन सार्वजनिक क्षेत्र की आम बीमा कंपनियों की हिस्सेदारी 100 प्रतिशत से 75 कर दी जाएगी। यह काम एक या किस्तों-किस्तों में भी किया जा सकता है। 

                 विनिवेश की प्रक्रिया के दौरान भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण(इरडा) के मौजूदा नियमों और विनियमों का पालन किया जाएगा। सरकारी बीमा कंपनियों के सूचीबद्ध होने से लाभ मिलेंगे। कंपनियों के स्टॉक एक्सचेंज में सूचिबद्ध किए जाने से उन्हें लेखाकंन का खुलासा किया जाना आवश्यक होगा, जो एक अतिरिक्त निरीक्षण तंत्र के रूप में कार्य करता है। इससे पारदर्शिता कायम होगी। खुलासे से कंपनियों के कामकाज और उनकी इक्विटी के बारे में पारदर्शिता आएगी। 

            सूचीबद्ध किए जाने से कॉरपोरेट कामकाज में सुधार होने की संभावना बनेगी और जोखिम प्रबंधन से कार्य क्षमता में सुधार आएगा। सूचीबद्ध किए जाने पर कंपनियां को पूंजी बाजार संसाधन जुटाने का रास्ता खुलेगा जिससे पूंजी के लिए सरकार पर निर्भर रहने के बजाय अपने कारोबार को विस्तार देने के लिए फंड जुटाने में सहूलियत होगी। 

              वित्त मंत्री ने अपने 2016-17 के बजट भाषण में घोषणा की थी कि सरकारी कंपनियों में सार्वजनिक शेयरहोलिडिंग्स से उच्चस्तरीय पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। साथ ही आम बीमा कंपनियों के स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किए जाने से उनके उद्देश्यों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

भारत व रवांडा के बीच हवाई सेवा समझौता

         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत व रवांडा के बीच हवाई सेवा समझौता पर हस्ताक्षर को मंजूरी प्रदान कर दी। 

            इस समझौते से दोनों देशों के बीच नागरिक उड्डयन क्षेत्र में विकास तेज होगा। व्यापार, निवेश, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की संभावना को अधिक से अधिक प्रोत्साहित करेगा। यह समझौता निर्बाध संपर्क के पर्यावरण को सक्षम बनाने जबकि दोनों देशों के बीच अधिक से अधिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, पक्षों के वाहक के लिए व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराने का मौका प्रदान करेगा।

भारतीय स्टेट बैंक के सहायक बैंकों के अधिग्रहण को स्वीकृति

              प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय स्टेट बैंक द्वारा अपने सहायक बैंकों के अधिग्रहण को मंजूरी प्रदान कर दी।

           इन बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ बिकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला तथा स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर शामिल हैं। मंत्रिमंडल ने इसके साथ ही भारतीय स्टेट बैंक (सहायक बैंक) अधिनियम 1959 और हैदराबाद स्टेट बैंक अधिनियम 1956 को निरस्त करने के लिए संसद में एक विधेयक प्रस्तुत करने को स्वीकृति प्रदान कर दी। इस विलय से बड़ी बचत होगी जो अनुमानित तौर पर पहले साल में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। साथ ही इनके एक साथ आने से कार्य करने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी और लागत कम होगी। 

              सहायक बैंकों के ग्राहक भारतीय स्टेट बैंक के वैश्विक नेटवर्क का लाभ ले सकेंगे। विलय से उच्च प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। इससे मुद्रा के प्रवाह पर निगरानी व नियंत्रण रखा जा सकेगा। इन छह बैंकों के लिए अलग अलग निगरानी व्यवस्था करने के बजाय एक तंत्र के तहत उपर्युक्त गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी।

              भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम 1955 के धारा 35 के तहत किया गया है। इससे किसी भी भौगोलिक क्षेत्र में सहायक बैंकों के सामने पेश आ रही दिक्कतें कम हो जाएंगी। साथ ही इससे आर्थिक और संचालन में कुशलता के मोर्चे पर सुधार होगा। 

          इससे जोखिम प्रबंधन और एकीकृत ट्रेजरी परिचालन में भी सुधार होगा। सरकारी बैंकों के एकत्रीकरण के जरिये भारतीय स्टेट बैंक के सहायक बैंकों का अधिग्रहण बैंक क्षेत्र को मजबूत बनाएगा। यह सरकार के इंद्रधनुष कार्ययोजना का अनुसरण है। संभावना है कि इससे कार्यकुशलता और लाभ के मामले में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार आएगा।