Sunday, 11 February 2018

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग फूड चेन से जुड़े

   सोनीपत। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने हरियाणा के सोनीपत में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमशीलता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम), सोनीपत के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

   इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तभी से कृषि आधारित रही है जब से हमारे पूर्वजों ने सिंधु घाटी में अनाज रोपण आरंभ किया था। पोषक अनाजों की विभिन्न किस्में एवं विविध प्रकार के दलहन भारतीय अनुभव की प्रतीक हैं।
   इसी प्रकार, खाने की आदते और व्यंजन भी हर जिले में अलग नहीं भी सही, लेकिन हर राज्य में विभिन्न जरुर है। यह भारत की विस्तृत और विविध संस्कृति की परिचायक है-जो हमारी ताकत है। इसकी जड़ में हमारे किसान हैं। लाखों किसान, पृरुष और महिला, अनथक मेहनत करते हैं और बड़े जतन से हमारे लिए भोजन उगाते हैं।
   राष्ट्रपति ने कहा कि वे न केवल खाद्य सुरक्षा की बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देते हैं। जो किसान ऐसे निस्वार्थ भाव से अपना दायित्व निभाते हैं, उन्हें अक्सर बहुत कम लाभ मिलता है और उन्हें मॉनसून तथा बाजार की अनिश्चितताओं पर निर्भर रहना पड़ता है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि एक समाज एवं एक व्यक्ति के रूप में अपने किसानों का जीवन बेहतर बनाने और उन्हें प्रकृति और मौसम की प्रकृति की तथा कुछ हद तक मांग एवं आपूर्ति की अनिश्चितताओं से मुक्त कराना हमारा दायित्व है।
     उन्होंने कहा कि यह सरकार का संकल्प है और सरकार ने इसके लिए कई नीतियों एवं कार्यक्रमों का निर्माण किया है। फूड चेन से जुड़े विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग इन कार्यक्रमों के लिए अनिवार्य है। और यहीं एनआईएफटीईएम जैसे संस्थान और यहां से निकलने वाले स्नातक एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेंगे। 
     राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे जैसे सामाजिक आदतें बदलती हैं और बड़ी संख्या में एकल परिवार उभर कर आ रहे हैं, पैकेज्ड और रेडी टू इट फूड उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है। खाने एवं इसके अवयवों की गुणवत्ता, सुरक्षा एवं लेबेलिंग मानदंडों को वैश्विक बेंचमार्क के अनुरूप बना कर रखना एक बड़ी चुनौती है। 
   उन्होंने कहा कि फूड इंडस्ट्री पर नवोन्मेषण करने एवं हमारे देश की जीवन शैली से संबंधित बढ़ते रोगों के सरल समाधान ढूंढने की जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने कहा कि एनआईएफटीईएम का उद्भव इसी परिप्रेक्ष्य में हुआ है।
      इस संस्थान से जो स्नातक निकलेंगे, वे किसानों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमशीलता एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ने के केंद्र बिंदु के रूप में कार्य करेंगे। यह उनका दायित्व होगा कि वे विविध हितधारकों-उद्योग, विनियामकों, नीति निर्माताओं, उपभोक्ताओं, वित्तीय एवं ऋण संस्थानों और निश्चित रूप से किसानों के बीच साझीदारियों का निर्माण करें।

राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान से देश के 32 करोड़ बच्चों का फायदा

   गुरुग्राम/हरियाणा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने आज गुरुग्राम में राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस का उद्घाटन किया।

  इस मौके पर उन्होंने कहा, राष्ट्रीय कृमि निवारण अभियान के तहत देश के 32 करोड़ बच्चों का फायदा मिलेगा। भारत सरकार प्रत्येक बच्चे को उच्च श्रेणी की स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करने और उसे देश के अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
   राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है। इस मौके पर भारत सरकार में केमिकल्स और फर्टिलाइजर के राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, हरियाणा सरकार में पीडब्लयूडी मंत्री राव नरबीर सिंह और एनएचएम के एएस और एमडी मनोज झलानी मौजूद थे। 
   केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस के इस चरण में 32 करोड़ बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य है। श्री नड्डा ने कहा कि 2015 में राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस की शुरुआत की गई थी,जिसमें 11 राज्यों/ संघशासित क्षेत्रों के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए 1 से लेकर 19 वर्ष के उम्र के बच्चों को ध्यान में रखकर क्रियान्वित किया गया। उसके बाद से पूरे देश में इस कार्यक्रम को लागू किया गया है।
   श्री नड्डा ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्ष फरवरी 2017 के चक्र में 25.6 करोड़ बच्चों और अगस्त 2017 वाले चक्र में 22.8 करोड़ बच्चों तक पहुंचने का सफल प्रयास किया गया और उन्हें राष्ट्रीय कृमि निवारक दिवस पर कृमि निवारक उपचार मुहैया कराया गया। उन्होंने कार्यक्रम में कृमि निवारण से संबंधित फैक्टशीट को भी पेश किया। 
   श्री नड्डा ने कहा सरकार की प्राथमिकता देश के सभी इलाकों में रहने वाले और उनके हालात को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना है। हम अपने सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जीवन चक्र की तरह देखते हैं। जिसमें गर्भावस्था से लेकर किशोरावस्था तक मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। माताओं और बच्चों को स्वस्थ बनाने की दिशा में हमारी कोशिश लगातार जारी है। हमारे कार्यक्रम जैसे राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस सभी बच्चों के लिए है. इसके जरिए न केवल स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आ रही है बल्कि उनके संपूर्ण विकास में मदद मिल रही है। 
    श्री नड्डा ने कहा कि ये सभी प्रयास देश को संपूर्ण विकास की दिशा में आगे बढ़ा रही है। सभी हितधारकों को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि आप सभी लोग इस अभियान में अपना योगदान दें। भारत, कृमि से तभी मुक्त हो सकता है जब हम सभी एक साथ मिलकर हाथ से हाथ मिलाकर आगे बढ़ें। इस मौके पर मैं सभी स्वास्थ्य कर्मियों से अपील करता हूं कि वो पूरे उत्साह से इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें और देखें कि कैसे और किस तरह से इसे और कामयाब बनाया जा सकता है।
      इस मौके पर मैं उन स्वास्थ्यकर्मियों को अभिवादन करता हूं जिन्होंने जमीनी स्तर पर इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दिया। श्री नड्डा ने कहा कि वो सभी हितधारकों और सार्वजनिक जीवन में रहने वालों से अपील करते हैं कि वो लोग आगे बढ़कर इस कार्यक्रम के बारे में जागरुकता अभियान चलाएं, आपस में चर्चा करें ताकि देश के चतुर्दिक विकास के महत्वपूर्ण कारकों में से एक इस कारक पर ध्यान केंद्रित हो सके। 
    श्री नड्डा ने कहा कि राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस सभी स्वास्थ्य कर्मियों, राज्य सरकारों और दूसरे हितधारकों को स्वॉयल ट्रांसमिटेड हेल्मिंथ संक्रमण (आम तौर पाया जाने वाला संक्रमण) के खात्मे के लिए निवेश करने के लिए प्रेरित करेगा। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य कम कीमत पर एसटीएच उपचार उपलब्ध कराना है जिसमे एल्बेंडजोल टैबलेट शामिल हैं। इस टैबलेट का कोई दुष्प्रभाव नहीं है और अगर किसी वजह से कोई डोज भूल जाता है तो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय माप अप सेशंस आयोजित करता है ताकि कोई बच्चा छूट न जाए। एल्बेंडजोल टैबलेट के साथ साथ साफसफाई, शौचालयों के प्रयोग, जूता या चप्पल पहनने और हाथ धोने के बारे में भी जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही ये भी जरूरी है कि दोबारा से संक्रमण न हो। 
  राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस एक दिन का कार्यक्रम है जिसका मकसद बच्चों में इंटेस्टाइनल कृमि संक्रमण को दूर करना होता है, इसमें 1 से 19 उम्र समूह के बच्चों को शामिल किया जाता है और हर वर्ष 10 फरवरी और 10 अगस्त को इस कार्यकर्म को आयोजित किया जाता है। फरवरी 2015 से पांच चक्रों में राष्ट्रीय क़ृमि निवारण दिवस को आयोजित किया गया है। कृमि निवारण कार्यकर्म में स्कूल और आंगनवाड़ी से जुड़े सभी बच्चों को शामिल किया गया है। 
    इन बच्चों को कृमि मुक्त करने के लिए उपचार मुहैया कराया जाता है। अगर कोई भी बच्चा किसी वजह से खासतौर से गैरहाजिर होने या बीमार होने की वजह से राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस में नहीं शामिल हो का उसे 15 फरवरी को दवा दी जाएगी। आंगनवाड़ी और स्कूल आधारित एक बड़े समूह के लिए कृमि निवारण कार्यक्रम सुरक्षित और लागत प्रभावी है इसके साथ ही आसानी से करोड़ों बच्चों तक पहुंचा जा सकता है।
     कृमि निवारण के जरिए स्कूलों में अनुपस्थित पर लगाम लगी है इसके साथ ही बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और इसके जरिए कोई बच्चा आगे चलकर बेहतर नौकरी हासिल कर सकता है। कृमि निवारण के लिए एल्बेंडजोल की स्वीकार्यता पूरे विश्व में है इसके साथ ही ये लाभदायक और सुरक्षित होने के साथ कृमि से हुए संक्रमण का सामना करने के लिए प्रभावी भी है।
    लिहाजा राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस को इस तरह से डिजाइन किया है जिसमें बिना किसी भेद के सभी बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य शामिल है। इसके अलावा सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, आंगनवाड़ियों को शामिल होने के साथ सभी राज्य सरकारें बच्चों तक पहुंचने के लिए विशेष प्रयास करेंगी। देश के सभी प्राइवेट स्कूलों ने भी इस कार्यक्रम के प्रति अपनी रुचि दिखाई है ताकि उनके स्कूलों के बच्चे कृमि से मुक्त रहें।
       राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस की तैयारी के लिए शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों को टैबलेट देने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया। आशा और दूसरी एजेंसियां बच्चों को कृमि मुक्त करने के लिए जागरुकता अभियान में हिस्सा लेंगी। पंचायती राज और युवा कल्याण मंत्रालय के अलग अलग विभाग पंचायत सदस्यों के साथ हाथ से हाथ मिलाकर अलग अलग समुदायों को कृमि मुक्त भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अपना सहयोग प्रदान करेंगे।
   कृमि निवारण के कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, इसके साथ रही कुछ बच्चों में खासतौर से ऐसे बच्चे जिनमें कृमि की समस्या ज्यादा हो वो मितली, पेट में हल्का दर्द डायरिया और कमजोरी का अनुभव कर सकते हैं। इन सब स्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय कुछ विशेष प्रोटोकाल के अनुपालन की व्यवस्था की है।
    कृमि निवारण के साथ साथ बच्चों में साफ सफाई के अभ्यास पर विशेष जोर दिया गया है ताकि वो कृमि समस्या का सामना न करें। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस दिशा में खुले में शौच से मुक्ति के लिए विशेष उपायों पर जोर दे रही है ताकि इस तरह के वातावरण का निर्माण हो सके जिससे किसी भी समुदाय को इस तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
   स्वच्छ भारत के निर्माण में स्वच्छ भारत अभियान के जरिए जो कदम उठाए गए हैं उनके जरिए राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस के मकसद को हासिल करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ने हरियाणा राज्य के लिए पहले अमृत फॉर्मेसी का उद्घाटन किया।
   इस मौके पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय हरियाणा सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्री अमित झा, एनएचएम की एमडी श्रीमति अमनीत पी कुमार इसके साथ ही हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी मौजूद थे।