Monday, 20 February 2017

अब देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में बड़े पैमाने पर ‘हुनर हाट’

                 प्रधानमंत्री कार्यालय राज्‍य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह एवं अल्‍पसंख्‍यक मामले राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) मुख्‍तार अब्‍बास नकवी हुनर हाट देखने गए।

                अल्‍पसंख्‍यक मामले मंत्रालय का द्वितीय ‘हुनर हाट’ आगंतुकों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है। अभी तक 20 लाख से अधिक लोग हुनर हाट देख चुके हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्‍य मंत्री एवं पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) डा. जितेंद्र सिंह एवं अल्‍पसंख्‍यक मामले राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्‍य मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने नई दिल्‍ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पा आयोजित हुनर हाट का अवलोकन किया। डा. सिंह ने देश भर के हस्‍त शिल्‍पों के विभिन्‍न स्‍टॉलो का अवलोकन किया तथा उस्‍ताद कारीगरों को प्रोत्साहित किया।

                         उन्‍होंने हुनर हाट की सफलता के लिए अल्‍पसंख्‍यक मामले मंत्रालय की सराहना की। डा. सिंह ने कहा कि ‘हुनर हाट’ पारंपरिक कलाओं/शिल्‍पों के विकास के लिए अवसर उपलब्‍ध कराएगा एवं उस्‍ताद पारंपरिक कारीगरों को बढ़ावा देगा एवं प्रोत्‍साहित करेगा। इस अवसर पर, नकवी ने कहा कि द्वितीय ‘हुनर हाट’ शिल्‍प और कुजीन का संगम की थीम पर आधारित है। इसे सभी क्षेत्रों से बेशुमार प्रतिक्रिया प्राप्‍त हुई है। 

                   हस्‍त शिल्‍प एवं विभिन्‍न व्‍यंजनों के अतिरिक्‍त, लोग विभिन्‍न सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों, कव्‍वाली, गजल आदि का आनंद भी उठा रहे हैं। ‘हुनर हाट’ का फेसबुक पेज लांच किया गया था। इसमें दो ‘हुनर हाट’ के बारे में जानकारी संकलित है। जिसका आयोजन मंत्रालय द्वारा किया गया है। इसमें कारीगरों के गृह राज्‍यों, हस्‍त शिल्‍प, अन्‍य वस्‍तुओं एवं भोजन के बारे में भी विवरण हैं। ‘हुनर हाट’ के फोटो एवं वीडियो भी उपलब्‍ध हैं। 

              सभी राज्‍यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 100 से अधिक कारीगर एवं 30 से अधिक व्‍यंजन विशेषज्ञ द्वितीय ‘हुनर हाट’ के लगभग 130 स्‍टॉलों में भाग ले रहे हैं। दो ‘हुनर हाटों ’ की सफलता से उत्‍साहित होकर मंत्रालय अब देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में बड़े पैमाने पर ऐसे ही समारोहों का आयोजन करने की योजना बना रहा है।

किशोरों के लिए ‘साथिया’ रिसोर्स किट एवं ‘ साथिया सलाह ’ मोबाइल ऐप लांच

                स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण सचिव सी के मिश्रा ने यहां राष्‍ट्रीय किशोर स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम (आरकेएसके) के एक हिस्‍से के रुप में किशोर वय के लड़कियों एवं लड़कों के लिए ‘साथिया’ रिसोर्स किट एवं ‘ साथिया सलाह ’ मोबाइल ऐप लांच किया।

            इस कार्यक्रम के तहत एक प्रमुख कदम पीयर एजुकेटर्स (साथिया) की प्रस्‍तुति है जो किशोर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए मांग का सृजन करने के लिए एक उत्‍प्रेरक के रूप में काम करता है। उनके समकक्ष समूहों में प्रमुख किशोर स्‍वास्‍थ्‍य मुद्दों पर उम्र से संबंधित उपयुक्‍त ज्ञान प्रदान करता है। साथियों को ऐसा करने में सुसज्जित करने एवं उन्‍हें इसके लिए सक्षम बनाने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने ‘साथिया’ रिसोर्स किट (‘साथिया’ सलाह मोबइल ऐप) लांच किया। 

                रिसोर्स किट एवं मोबाइल ऐप को प्रस्‍तुत करते हुए स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण सचिव सी के मिश्रा ने कहा कि हमारे देश में 253 मिलियन किशोर वय की लड़कियां एवं लड़के हैं जो कि संख्‍या के लिहाज से विश्‍व में सर्वाधिक है। जब दुनिया भर में आरएमएनसीएच लांच किया गया तो भारत ‘अॠ’ अर्थात आरएमएनसीएच में किशोर संघटक जोड़ने वाला पहला देश था जिसने इसे आज का आरएमएनसीएच अॠ प्रोग्राम बना दिया। 

              उन्‍होंने जोर देकर कहा कि किशोर वय की लड़कियां एवं लड़के देश की महत्‍वपूर्ण संपत्ति हैं जो भविष्‍य में देश की अर्थव्‍यवस्‍था के सबसे बड़े लाभदायक हिस्‍से बन जाएंगे, इसलिए उनका स्‍वास्‍थ्‍य एवं तंदरुस्‍ती हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। देश की किशोर वय की लड़कियों एवं लड़कों की स्‍वास्‍थ्‍य एवं विकास आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने के लिए स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने जनवरी 2014 में राष्‍ट्रीय किशोर स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम (आरकेएसके) आरंभ किया। 

            आरकेएसके किशोर वय के लड़कियों एवं लड़कों के लिए छह कार्यनीतिक प्राथमिकताओं- पोषाहार, यौन एवं प्रजनक स्‍वास्‍थ्‍य (एसआरएच), गैर-संचारी बीमारियां (एनसीडी), मादक द्रव्‍यों का दुरुपयोग, जख्‍म एवं हिंसा ( जेंडर आधारित हिंसा समेत) तथा मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की पहचान करता है। 

          लांच के अवसर पर उपस्थित मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों के अलावा इस अवसर पर डेवलपमेंट पार्टनर्स ( यूएनएफपीए, पीएफआई) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे जिन्‍होंने रिसोर्स किट के विकास में योगदान दिया।

उत्तराखंड में भूकंप से निपटने की तैयारियों  का नकली अभ्यास

            राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) इस सप्ताह उत्तराखंड के सभी जिलों में भूकंप की तैयारियों का जायजा लेने के लिए दो नकली अभ्यासों का आयोजन करेगा।

             अभ्यास राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित किये जायेंगे जिनमें उच्च तीव्रता के भूकंप की स्थिति में विभिन्न हितधारक विभागों की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। पहला अभ्यास देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग जिलों में आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक समन्वय सम्मेलन और एक टेबल टॉप अभ्यास आयोजित किया गया। तैयारी संबंधी इन बैठकों में एनडीआरएफ, स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा, अग्निशमन, सिविल डिफेंस, जन संपर्क, परिवहन, आदि के सभी हितधारक विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। 

                   अगला समन्वय सम्मेलन और एक टेबल टॉप अभ्यास बुधवार को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद गुरुवार को पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत, अल्मोड़ा, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों में दूसरा नकली अभ्यास आयोजित किया जाएगा। इन अभ्यासों में भूकंप के नकली परिदृश्यों से निपटा जाएगा। जिसके लिए प्रतिभागियों को दुर्घटना मोचन दलों, आपातकालीन ऑपरेशन सेंटर (ईओसी) के गठन, विभिन्न प्रतिभागी एजेंसियों में तालमेल, फंसे हुए व्यक्तियों को निकालना और चिकित्सीय तैयारी जैसे आपदा प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। 

            मुख्य हितधारकों की तैयारियों और प्रतिक्रिया तंत्र बढ़ाने के उद्देश्य से यह अभ्यास उन क्षेत्रों का भी पता लगाने में मदद करेंगे, जहां सुधार करने की जरूरत है। इन अभ्यासों का नेतृत्व करने वाले एनडीएमए के विशेषज्ञ मेजर जनरल वी. के. दत्ता (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इन नकली अभ्यासों से अंतराल को भरने और बेहतर संचार कायम करने में सहायता मिलेगी। इस प्रकार जीवन की वास्तविक स्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के मध्य तालमेल सुधारने में मदद मिलेगी। 

              उन्होंने उत्तराखंड में ऐसे अभ्यास नियमित रूप से आयोजित करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पूरा पहाड़ी राज्य भूकंपीय जोन 5 या 4 के अंतर्गत आता है। इसने अतीत में कई उच्च तीव्रता वाले भूकंपों को झेला है। अभ्यास के बाद, अभ्यास की कमियों, चुनौतियों और सुधार के तरीकों के बारे में विश्लेषण किया जाएगा।

              एनडीएमए विभिन्न आपदाओं के लिए तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्रों में सुधार लाने के अपने प्रयासों के रूप में पूरे देश में ऐसे नकली अभ्यास नियमित रूप से आयोजित करता है। एनडीएमए ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 500 से अधिक नकली अभ्यासों का आयोजन किया है। अगले महीने यह पुडुचेरी में बाढ़ और सुनामी की तैयारियों पर एक नकली अभ्यास का आयोजन करेगा।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट बाजार

            भारत ने प्रतिस्‍पर्धी कीमतों पर आसियान देशों को सुरक्षित आईसीटी उत्‍पाद देने की पेशकश की। इसके साथ ही ‘तकनीकी जानकारी’ एवं ‘वैज्ञानिक जानकारी’ साझा करने के अपने संकल्‍प को दोहराया। 

             असल में भारतीय दूरसंचार उत्‍पादों एवं सेवाओं को खरीदे जाने के लिए भारत दीर्घकालिक वित्‍त मुहैया कराने को इच्‍छुक है। यहां ‘भारत टेलीकॉम-2017’ का उद्घाटन करते हुए संचार मंत्री मनोज सिन्‍हा ने कहा कि भारतीय टेलीकॉम कंपनियां किसी भी मेजबान देश में समूचे दूरसंचार परितंत्र को विकसित करने के लिए प्रौद्योगिकियों को साझा करने और संयुक्‍त उत्‍पादन वाले उद्यमों की स्‍थापना करने की इच्‍छुक हैं। 

             आसियान-भारत संबंधों के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में मंत्री ने प्रतिभागी देशों से यह सुनिश्‍चित करने का आग्रह किया कि भारतीय दूरसंचार उत्‍पाद एवं सेवाएं उनकी पहली पसंद होनी चाहिए, क्‍योंकि वे डिजिटल कनेक्‍टिविटी से जुड़े कदम तेजी से उठा रहे हैं। सिन्‍हा ने यह जानकारी दी कि नवंबर, 2015 में आयोजित किए गए 13वें आसियान-भारत शिखर सम्‍मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अरब अमेरिकी डॉलर की ऋण रेखा देने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की थी, ताकि भारत और आसियान के बीच भौतिक एवं डिजिटल कनेक्‍टिविटी में सहायक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा सके। 

                   मंत्री ने कहा कि लोगों की जरूरतों की पूर्ति के लिए नई प्रौद्योगिकी एवं उत्‍पाद विकसित करने हेतु दोनों ही पक्षों के पास पूरक कौशल, विशाल बाजार एवं आवश्‍यक क्षमता हैं। सिन्‍हा ने कहा कि भारत के संचार उद्योग ने पिछले दशक के दौरान उल्‍लेखनीय प्रगति की है। 88 के समग्र दूरसंचार घनत्‍व एवं 53 के ग्रामीण दूरसंचार घनत्‍व के साथ भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार नेटवर्क बन गया है।

               दुनिया में न्‍यूनतम मोबाइल दरें भारत में भी होने का उल्‍लेख करते हुए सिन्‍हा ने कहा कि भारत पहले ही अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट बाजार बन गया है, जहां 220 मिलियन से भी ज्‍यादा ब्रॉडबैंड ग्राहक और 450 मिलियन से भी अधिक उपयोगकर्ता (यूजर्स) हैं। इस मामले में भारत केवल चीन से ही पीछे है। दूरसंचार सचिव जे.एस. दीपक ने कहा कि भारत एवं आसियान के बीच साझेदारी की असीम संभावनाएं हैं। जीएसएम, ब्रॉडबैंड, ई-एजुकेशन, टेली-मेडिसिन, आपदा प्रबंधन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में इस तरह की विशिष्‍ट साझेदारी को तलाशा जा सकता है, जो दोनों ही पक्षों के लिए फायदेमंद साबित हो।

भारत के उच्‍चतर शिक्षण संस्‍थानों की वैश्विक रैंकिंग अभी भी निम्‍न

            राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की स्‍थापना के 90वें वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। 

          इस अवसर पर, राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के उच्‍चतर शिक्षण संस्‍थानों की वैश्विक रैंकिंग अभी भी निम्‍न बनी हुई है। उन्‍होंने कहा कि कई वर्षों के प्रयासों के बाद, अब मैं संतुष्‍ट हूं कि देश में उच्‍चतर शिक्षा के कम से कम तीन संस्‍थानों ने शीर्ष स्‍थान प्राप्‍त किए हैं। श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, नई दिल्‍ली अच्‍छा प्रदर्शन करता रहा है। अब इसे अपने लिए उत्‍कृष्‍टता के उच्‍चतर मानकों को स्‍थापित करने के प्रयास करने चाहिए। राष्ट्रपति ने अनुसंधान एवं नवोन्‍मेषण के महत्‍व को रेखांकित करते हुए कहा कि जर्मनी 2008 की आर्थिक मंदी एवं यूरो जोन संकट से अप्रभावित रहने वाला एकमात्र देश था। ऐसा देश के भीतर अनुसंधान एवं विकास के लिए एवं विश्‍व स्‍तरीय संस्‍थानों के लिए ठोस बुनियाद के कारण संभव हो पाया जिसकी इसने स्‍थापना की है। 

             राष्ट्रपति ने कहा कि श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स दशकों से शिक्षा को एक उभरते देश की जरुरतों के अनुरुप जोड़ने की अनिवार्य आवश्‍यकताओं की पूर्ति करता रहा है। साथ ही, इसने व्‍यवसाय एवं अर्थव्‍यवस्‍था के क्षेत्र में आजीविका एवं व्‍यवसायिक कौशलों का भी विकास किया है। उन्‍होंने कहा कि यह देख कर काफी प्रसन्‍नता होती है कि इसके संस्‍थापक सर श्री राम के एक ऐसे संस्‍थान की स्‍थापना करने के विजन, जो उद्योग, व्‍यवसाय एवं आर्थिक प्रशासन की आवश्‍यकताओं को प्रबंधित करने के लिए युवा मस्तिष्‍कों को प्रशिक्षित करेगा, को व्‍यापक रूप से साकार कर दिया गया है। 

            राष्ट्रपति ने कहा कि आज हम उद्योग-शिक्षाविदों के बीच आपसी और परस्‍पर संपर्क की बात करते हैं जिसका श्रेय श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के संस्‍थापकों को जाता है कि लगभग एक सदी पहले उन्‍होंने शिक्षकों एवं छात्रों को वास्‍तविक जीवन उद्योग अनुभव पर जोर दिया।

अनुसूचित जातियों के कारीगरों एवं उनके परिवारों की सहायता

             सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति वित्‍त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी) और कपड़ा मंत्रालय के विकास आयुक्‍त (हस्‍तशिल्‍प) के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर यहां सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत और कपड़ा मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन इरानी की मौजूदगी में हस्‍ताक्षर किए गए।

            मंत्रालयों, विकास आयुक्‍त (हस्‍तशिल्‍प) के कार्यालय और एनएसएफडीसी के वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी इस अवसर पर मौजूद थे। एमओयू का मुख्‍य उद्देश्‍य हस्‍तशिल्‍प, बेंत (केन) एवं बांस, कृत्रिम आभूषण, कपड़ा (हस्‍त मुद्रित, हस्‍त कढ़ाई), गुड़िया एवं खिलौनों, पत्थर पर नक्काशी, फुटवियर इत्‍यादि के क्षेत्र में क्‍लस्‍टर स्‍तर पर उच्‍च कीमतों एवं गुणवत्‍ता वाले हस्‍तशिल्‍प उत्‍पादों के उत्‍पादन एवं विपणन को बढ़ावा देकर अनुसूचित जातियों के कारीगरों एवं उनके परिवारों की सहायता करना है। कृषि क्षेत्र के बाद हस्‍तशिल्‍प क्षेत्र को ही दूसरी सर्वाधिक आर्थिक गतिविधि माना जाता है। देश में अनुसूचित जातियों के लगभग 12 लाख कारीगर हैं।

                      अनुसूचित जातियों के ज्‍यादातर कारीगर विभिन्‍न हस्‍तशिल्‍प उत्‍पादों के उत्‍पादन में संलग्‍न हैं। असम में बेंत एवं बांस, गुजरात एवं पंजाब में वस्‍त्र (हस्‍त मुद्रित), उत्‍तर प्रदेश में धातुओं के बर्तन, कर्नाटक में गुड़िया एवं खिलौने, आंध्र प्रदेश में रंगमंच संबंधी वेशभूषा एवं कठपुतलियां इत्‍यादि इनमें शामिल हैं। अपने इन प्रयासों के तहत एमओयू पर हस्‍ताक्षर करने वाले दोनों ही पक्ष कारीगरों की बड़ी तादाद वाले क्षेत्रों में इलेक्‍ट्रॉनिक/प्रिंट मीडिया में दिए गए विज्ञापनों और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए अनुसूचित जातियों के कारीगरों के बीच विकास आयुक्‍त (हस्‍तशिल्‍प) की योजनाओं को लोकप्रिय बनाएंगे। 

              इसके साथ ही वे अपेक्षित परिणाम हासिल करने के लिए अनुसूचित जातियों के कारीगरों एवं उनके परिवारों के कौशल उन्‍नयन एवं आर्थिक विकास सहित क्षमता निर्माण हेतु आपस में सहयोग करेंगे। अनुसूचित जातियों के कारीगरों को विपणन संबंधी सहायता मुहैया कराने के लिए दोनों ही पक्षों द्वारा प्रदर्शनियां/मेले आयोजित किए जाएंगे, ताकि उनकी कमाई बढ़ सके।

             दोनों ही पक्ष क्‍लस्‍टरों में कार्यरत अनुसूचित जातियों के कारीगरों के कौशल के उन्‍नयन के लिए प्रासंगिक कौशल विकास कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे और इसके साथ ही वे अपने ज्ञान एवं अनुभवों को साझा भी करेंगे। इन प्रयासों से देश भर में कार्यरत अनुसूचित जातियों के कारीगरों/उद्यमियों को विपणन संबंधी संपर्क हासिल होंगे।

 

शहरी गरीबों के लिए 90,095 और किफायती मकान मंजूर

               आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय ने 5,590 करोड़ रुपये के निवेश एवं 1,188 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के हित में 90,095 और किफायती मकानों के निर्माण को मंजूरी दी। 

            मध्‍य प्रदेश के लिए 5260 करोड़ रुपये के निवेश एवं 1071 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 49 शहरों एवं कस्‍बों में 82,262 मकानों को मंजूरी दी गई है। इसी तरह जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए 240 करोड़ रुपये के निवेश एवं 74 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 24 शहरों एवं कस्‍बों में 4915 मकानों को मंजूरी दी गई है। वहीं, दादर एवं नागर हवेली की राजधानी सिलवासा के लिए 26 करोड़ रुपये के निवेश एवं 12 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 803 किफायती मकानों को स्‍वीकृति दी गई है। 

              प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लाभार्थी की अगुवाई वाले निर्माण (बीएलसी) घटक के तहत 46823 नए मकानों के निर्माण, बीएलसी के तहत जम्‍मू-कश्‍मीर में 773 मकानों के विस्‍तारीकरण और भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) घटक के तहत मध्‍य प्रदेश में 42499 नए मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई। मध्‍य प्रदेश में 39763 और नए मकानों का निर्माण बीएलसी घटक के तहत किया जाएगा, जिसके अंतर्गत किसी भी पात्र लाभार्थी को अपने स्‍वामित्‍व वाली भूमि पर एक मकान बनाने के लिए सहायता दी जाती है। 

                 मध्‍य प्रदेश में शहरवार मंजूरियों में ये शामिल हैं, इंदौर-30789 मकान, रतलाम-6419, सागर-3,156, उज्जैन-2884, कटनी-2800, शिवपुरी-2625, छिंदवाड़ा-2508, नागदा-2,073, जबलपुर-2,012, दतिया-1,726, सिंगरौली-1,716, डबरा-1720, विदिशा -1513, दमोह-1480, सीहोर-1,200, सिधी-1,057, आस्था-1000 और ऊंचेहारा-1,000 । जम्‍मू-कश्‍मीर में श्रीनगर के लिए 663 किफायती मकानों को स्‍वीकृति दी गई है। इसी तरह जम्‍मू-कश्‍मीर में अन्‍य मंजूरियों में ये शामिल हैं, हंदवाड़ा-602, बड़गाम-476, बारामूला-393, डोडा-306, पुलवामा-270, कारगिल-261, सोपोर-205, गांदरबल-185, भद्रवाह-176, शोपियां-159, आरएस पुरा-143, सांबा-121, किश्तवार-113, लेह-99 और पुंछ-96 ।

               इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मध्‍य प्रदेश के लिए स्‍वीकृत मकानों की कुल संख्‍या बढ़कर 187135 और जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए स्‍वीकृत मकानों की कुल संख्‍या बढ़कर 5864 हो गई है। गई मंजूरियों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 89072 करोड़ रुपये के कुल निवेश एवं 25819 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ शहरी गरीबों के हित में अब तक कुल मिलाकर 16,51,687 किफायती मकानों के निर्माण को स्‍वीकृति दी गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के बीएलसी और एएचपी घटकों के तहत हर लाभार्थी को 1.50 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता दी जाती है।

भूटान नरेश को जन्मदिन पर बधाई

           राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भूटान नरेश महामहिम जिग्मेखेसर नमग्येल वांगचुक को उनके  जन्मदिन पर बधाई और शुभकामनाएं दी गई है।

            अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा, "भारत सरकार और देश की जनता की ओर से महामहिम अपने जन्मदिन के विशेष अवसर पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें। शाही वारिस का जन्म होने और महामहिम आपके शासनकाल के दस वर्ष पूरे होने की खुशी के कारण वर्ष 2016 समारोहों के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण वर्ष रहा है। भारत और भूटान न केवल घनिष्ठ पड़ोसी हैं, बल्कि विशेष दोस्त भी हैं। 

           हमारे अनुकरणीय संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। आपसी हितों के सहयोग के लिए ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने में महामहिम आपके व्यक्तिगत योगदान को भारत बहुत महत्व देता है। इस अवसर पर आपके और शाही परिवार के सम्मानित सदस्यों के स्वास्थ्य और खुशी तथा भूटान के मैत्रीपूर्ण लोगों की सतत प्रगति और समृद्धि के लिए मैं अपनी शुभकामनाएं देता हूं।"

छत्रपति शिवा जी महाराज की जयन्‍ती पर श्रद्धांजलि

       प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयन्‍ती पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। 

           अपने संदेश में उन्‍होंने कहा है कि ‘‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जयन्‍ती पर मैं उन्‍हें नमन करता हूं। उनके जैसा वीर और महान आत्‍मा ने भारत की भूमि पर जन्‍म लिया, इस पर भारत को गर्व है। शिवाजी महाराज ने लोगों की बेहतरी को सर्वोपरि रखा। वे एक आदर्श शासक थे और उनकी प्रशासनिक दक्षता असाधारण थी।

        हम शिवाजी महाराज के आदर्शों को पूरा करने के लिए अनथक रूप से काम कर रहे हैं और ऐसा भारत बनाना चाहते हैं, जिस पर उन्‍हें गर्व हो।‘‘हाल में मुझे अरब सागर के पास शिवाजी महाराज की प्रतिमा के कार्यक्रम में भाग लेने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ। मैं उस अवसर को सदैव याद रखूंगा।’’

अनुसूचित जातियों के हस्‍तशिल्‍प कारीगरों के कल्‍याण के लिए एमओयू

             कपड़ा मंत्रालय व सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने आपस में हाथ मिलाया है, ताकि अनुसूचित जातियों के अनुमानित 12 लाख कारीगरों के आर्थिक विकास के लिए और भी ज्‍यादा आवश्‍यक कदम उठाये जा सकें। 

        कपड़ा मंत्रालय के विकास आयुक्‍त (हस्‍तशिल्‍प) और सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीनस्‍थ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति वित्‍त एवं विकास निगम (एनएससीएफडीसी) के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्‍य देश भर में कार्यरत उन कारीगरों की आमदनी बढ़ाने के लिए आपस में मिल-जुलकर काम करना है, जो अनुसूचित जातियों से जुड़ी श्रेणियों के अंतर्गत आते हैं। 

                  केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन इरानी व केंद्रीय सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्‍ताक्षर किए गए। वस्‍त्र सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा, सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में सचिव श्रीम‍ती लता कृष्‍ण राव भी इस अवसर पर उपस्थित थीं। इस एमओयू के तहत विकास आयुक्‍त (हस्‍तशिल्‍प) के कार्यालय और एनएससीएफडीसी के बीच निरंतर एवं विस्‍तृत सहयोग सुनिश्चित किया जायेगा। जिसके उद्देश्‍य जागरूकता शिविर लगाकर विभिन्‍न योजनाओं के बारे में प्रचार-प्रसार करके जरूरतों का आकलन करने के साथ-साथ संबंधित कमियों की पहचान करना। 

                 उन चिन्हित क्लस्‍टरों में जरूरत आधारित विस्‍तृत कौशल उन्‍नयन के काम पूरे करना भी एक अन्‍य उद्देश्‍य है जहां अनुसूचित जातियों के कारीगर बड़ी संख्‍या में मौजूद हैं। अनूठे एवं बाजार अनुकूल डिजाइनों के क्षेत्र में और आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों को अपनाने के लिए इन कारीगरों के कौशल का उन्‍नयन किया जायेगा। घरेलू एवं अंतर्राष्‍ट्रीय विपणन कार्यक्रमों में अनुसूचित जातियों के कारीगरों और उनके उत्‍पादक समूहों की भागीदारी बढ़ाना। 

           कपड़ा मंत्रालय और सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिए जाने वाले लाभों को आपस में संयुक्‍त करते हुए अनुसूचित जातियों के कारीगरों को रियायती दरों पर कार्यशील पूंजी से संबंधित ऋण मुहैया कराना। एमओयू में इस बात पर भी सहमति जताई गई है कि विकास आयुक्‍त (हस्‍तशिल्‍प) का कार्यालय अपनी विभिन्‍न योजनाओं के लिए परियोजना संबंधी रिपोर्टों को तैयार करने और अनुसूचित जातियों के कारीगरों की जरूरतों को चिन्हित करने के लिए क्षेत्र (फील्‍ड) संबंधी अध्‍ययन कराने के लिए एनएससीएफडीसी की सहायता करेगा।

             विकास आयुक्‍त (हस्‍तशिल्‍प) के कार्यालय के छह क्षेत्रीय कार्यालयों और 52 विपणन एवं सेवा विस्‍तार केंद्रों की सहायता का विस्‍तार करने के अतिरिक्‍त इस तरह की सहायता दी जाएगी।

अफ्रीकी देशों के साथ संबंध गतिशील बनाने के प्रयास

           भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा है कि भारत में भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन (आईएएफएस) के बाद, अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को और गतिशील बनाने के लिए नये सिरे से और अधिक केन्द्रित प्रयास किए जाने की जरूरत है। 

           उपराष्ट्र्पति रवांडा व उगांडा की पांच दिवसीय यात्रा के दौरान एयर इंडिया वन के विशेष विमान में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर, सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्य मंत्री, विजय सांपला के साथ-साथ अधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति ने तीन देशों और प्रधानमंत्री ने चार देशों का दौरा किया। अब वह पांच देशों का दौरा करने जा रहे हैं, उनकी यह यात्रा इस कड़ी में दो और देशों को जोड़ देगी। 

                उन्होंने कहा कि यह अफ्रीकी देशों के साथ उच्चतम राजनीतिक स्तर पर वार्तालाप को आगे बढ़ाने के सरकार के सकारात्‍मक प्रयास का एक अंग है। हामिद अंसारी ने कहा कि भारतीय कंपनियां रवांडा की गतिशील अर्थव्यवस्था का उपयोग करके रवांडा के माध्‍यम से अफ्रीका में प्रवेश का मार्ग प्रशस्‍त कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि विकास सहयोग के रूप में, भारत ने कई परियोजनाओं में रवांडा के साथ सहयोग किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि युगांडा में भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में हैं। वे युगांडा के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 

           उन्होंने कहा कि युगांडा के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं। हामिद अंसारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत विकास सहयोग का अद्वितीय उदाहरण है। अफ्रीकी भागीदारों ने इस प्राथमिकता को स्वयं परिभाषित किया गया है। भारत में अफ्रीकी नागरिकों की सुरक्षा के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने इस मामले में अपनी स्थिति बहुत स्पष्ट की है कि असामाजिक तत्वों के द्वारा इस तरह के हमलों के मामले बेहद छिटपुट हैं। हामिद अंसारी ने कहा कि इन मुद्दों को राजनयिक स्तर पर उठाया गया है। इस संदर्भ में हमारी प्रतिक्रिया व्यापक रही है।

             यह अफ्रीकी दोस्तों के लिए संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि इसने बड़ी संख्या में भारत आने वाले अफ्रीकी छात्रों के प्रवाह को प्रभावित नहीं किया है। अफ्रीकी देशों को भारत के सहयोग के के सवाल पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि अफ्रीकी देश  भारतीय कौशल और विशेषज्ञता का लाभ लेना चाहते है। इस मामले में जहां कहीं भी उनको भारतीय सहायता की आवश्‍यकता होगी, भारत मजबूत परियोजनाओं के रूप में इसे प्रदान करेगा।