सावधान ईरान भी अब धंसने लगा
खबर तो यही है कि ईरान की राजधानी तेहरान धीरे धीरे धंस रही है। अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि देश खतरे में हैं। तेल रिफाइनरियों से लेकर एयरपोर्ट तक दांव पर हैं।
ईरानी राजधानी के आस पास की जमीन धंसती जा रही है। खबर है कि वैज्ञानिक भूजल के अंधाधुंध दोहन को इसका कारण मान रहे हैं। राजधानी तेहरान समुद्र तल से 1,200 मीटर की ऊंचाई पर है।
खबर है कि बीते 100 साल में यह शहर लगातार बढ़ता गया। आज तेहरान की आबादी 1.3 करोड़ है। खबर है कि इस जनसंख्या ने पानी की आपूर्ति पर बहुत ज्यादा दबाव डाला है। 2018 में पूरे साल भर ईरान में सिर्फ 171 मिलीमीटर बारिश हुई।
खबर है कि पानी की कमी पूरी करने के लिए जमीन से खूब भूजल निकाला गया। कहा गया, "सतह के नीचे की जमीन में पानी और हवा मौजूद होते हैं, जब आप जमीन से पानी निकाल लेते हैं तो मिट्टी के बीच खाली जगह बच जाती है। धीरे धीरे ऊपरी दबाव के चलते जमीन धंसने लगती है और दरारें पड़ने लगती हैं.।" बारिश और बर्फबारी से भूजल रिचार्ज होता है, लेकिन ईरान बीते तीन दशकों से भीषण सूखे का सामना कर रहा है।
खबर है कि ईरान के मौसम विभाग के मुताबिक देश का 97 फीसदी हिस्सा सूखे का शिकार है। खबर है कि जर्मन सेंटर फॉर जियोसाइंसेस, पोट्सडाम के वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया है कि 2003 से 2017 के बीच पश्चिमी तेहरान का सपाट इलाका 25 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष की दर से धंस रहा है।
खबर है कि ईरान के पर्यावरण कार्यकर्ता कहते हैं, "यूरोपीय देशों में चार मिलीमीटर प्रतिवर्ष के धंसाव को संकट माना जाता है।" खबर है कि जर्मन वैज्ञानिकों के मुताबिक तेहरान के इमाम खमेनई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नीचे की जमीन हर साल पांच सेंटीमीटर धंस रही है।
