Monday, 24 April 2017

किसान विकास की मुख्य धारा का हिस्सा

            केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि आजादी के बाद से यह पहली सरकार है जो खेतीबाड़ी के विकास के साथ किसानों के आर्थिक उन्नयन के बारे में ना सिर्फ विचार कर रही है बल्कि किसानों की उन्नति के लिए धरातल पर ठोस कार्रवाई भी कर रही है। 

          केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने यह बात विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित राज्यों के एग्री- मार्केटिंग मंत्रियों की बैठक में कही। राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का सपना है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगनी हो जाए। किसान विकास की मुख्य धारा का हिस्सा बनें। यह तभी संभव है जब केंद्र एवं राज्य सरकारें एक साथ मिलकर काम करें। सिंह ने कहा कि  किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 3 स्तरों पर काम हो रहा है। प्रथम स्तर पर उत्पादन लागत कम किया जा रहा है और उत्पादकता  बढ़ायी जा रही है।  

            केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रहीं योजनाओं यथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्रधानमन्त्री सिंचाई योजना का राज्यों को पूरा लाभ उठाना होगा। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना से किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच होती है। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के जरिए किसानों के खेतों में पानी पहुंचाया जाता है। किसानों की आय बढ़ाने का दूसरा स्तर है कृषि के साथ कृषि आधारित अन्य लाभकारी क्रियाकलापों जैसे कि पशुपालन, मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन, मेड़ों पर इमारती लकड़ी के पेड़ लगाने के काम को अपनाना। सरकार ने इस दिशा में अनेक कदम उठाएं हैं। तीसरा एवं सबसे महत्वपूर्ण स्तर है किसानो को उनकी उपज बेचने के लिए नजदीक में बाज़ार उपलब्ध कराना ताकि उनकी उपज का उन्हें लाभकारी मूल्य मिले सके।

       केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अब तक परंपरागत मंडियों ने अच्छा काम किया है लेकिन अब वक्त आ गया है कि ये मंडिया बढ़ते सरप्लस देखते हुए मार्केटिंग की नयी रणनीति अपनाएं और किसानो, व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा मार्केटिंग व्यवस्था में अमूल चूल परिवर्तन करें। इस आवश्यकता को देखते हुए राज्य सरकारों के साथ मिल कर हमारे मंत्रालय ने वर्ष 2003 में मॉडल एक्ट तैयार कर राज्यों को अपने मंडी कानूनों में इसके अनुरूप सुधार करने हेतु संचालित किया था। 2003 के पश्चात लम्बे समय तक कोई बड़ा बदलाव कृषि विपणन क्षेत्र में नहीं किया गया।

        केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि हमारी सरकार बनाने के बाद हमने त्वरित गति से किसानो की आर्थिक दशा सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से  आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने 1 जुलाई 2015 को 200 करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ राष्ट्रीय कृषि बाजार (इ-नाम) स्कीम को अनुमोदित किया । इसके बाद प्रधानमंत्री के द्वारा 8 राज्यों की 23 मंडियों को "ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)" योजना के पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में 14/4/2016 को जोड़ा गया । यह योजना किसानों के इलेक्ट्रॉनिक व्यापार के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल प्रदान करती है। यह पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें किसानों को उनकी उपज का ज्यादा से ज्यादा प्रतिस्पर्धी मूल्य दिलाने की व्यवस्था है। 

          योजना के तहत एकीकृत विनियमित बाजारों में आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए उन्हें  30 लाख प्रति मंडी की दर से सहायता दी जाती है। वर्ष  2017-18 के बजट में इस सहायता राशि को बढाकर 75 लाख रुपये कर दिया गया है । अभी तक, 13 राज्यों के 417 विनयमित मंडियां इस योजना से जुड़ चुकी हैं, जो मार्च 2018 तक बढ़कर 585 हो जायेंगी । ई-नाम पोर्टल पर अब तक 42.18 लाख किसानों और 89,199 व्यापारियों का पंजीकरण हो चुका है। अब तक कुल कारोबार का मूल्य 16,163.1 करोड़ है जो कि 63.17 लाख टन के उत्पादों के विपणन से हुआ है। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य यही है की किसान एक स्थान पर बैठकर देश की विभिन्न मंडियों का भाव जान सके। जहाँ पर जो खरीदार उनको ज्यादा पैसा दे, किसान पारदर्शी तरीके से उन्हें अपनी उपज बेच सके।

       इस योजना का एक महत्वपूर्ण बिंदू यह भी है कि किसान को अपनी उपज का मूल्य गुणवत्ता अनुसार मिलता है क्योंकि उपज पर इलेक्ट्रॉनिक बोली लगने के पहले किसान के उपज की जांच होती है। इस योजना की सफलता के लिए राज्य सरकारों को सच्चे मन से सार्थक प्रयास करने की जरुरत है, जिसमे मंत्रियों की अहम् भूमिका है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ई-नाम, सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इसके अलावा मंडियों में कम्पोस्ट प्लांट उपलब्ध कराके, ई- नाम स्वच्छ भारत कार्यक्रम को भी बढ़ावा देगा। 

           केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों की मांग एवं विपणन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्रालय ने मॉडल एक्ट, 2017 तैयार किया है जिसे 6 जनवरी 2017 को मॉडल एक्ट का मसौदा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टिप्पणी के लिए भेजा गया है।  इसके अलावा आम जनता की टिप्पणी के लिए मॉडल एक्ट को कृषि विभाग की वेबसाइट पर भी डाला गया। सभी हितधारकों की टिप्पणियों को मिलाकर नए मॉडल एक्ट  2017  का अंतिम रुप तैयार किया गया है, जिसे राज्य सरकारों को लागू करने के लिए भेजा जा रहा है। मुख्यतः इस मॉडल एक्ट में विषय शामिल हैं: निजी क्षेत्र में बाजारों की स्थापना; डायरेक्ट मार्केटिंग यानि बाजार यार्ड के बाहर प्रोसेसर / निर्यातकों / थोक खरीददारों आदि द्वारा किसानों से उत्पाद की प्रत्यक्ष खरीद; किसान - उपभोक्ता बाजार यानि उपभोक्ताओं द्वारा किसानों द्वारा प्रत्यक्ष बिक्री ; और बाजार समिति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बाजार स्थापित किया जाना; अनुबंध खेती; ई-ट्रेडिंग; राज्य भर में बाजार शुल्क का एकल बिंदु लेवी; राज्य भर में एकल व्यापार लाइसेंस; मंडी परिसर में दुकान की अनिवार्यता के प्रावधानों को हटाना; एपीएमसी अधिनियम से फलों और सब्जियों को बाहर निकलना इत्यादि। सिंह ने कहा कि इस एक्ट को राज्यों द्वारा जल्दी अपनाने से 2022 तक किसानो की आय दुगनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को पूरा करने में मदद मिलेगी।

             सिंह ने इस मौके पर बताया कि इस एक्ट में प्रदेश स्तर पर एक ही बाजार का प्रावधान है और यह निजी क्षेत्र के बाज़ार एवं सीधा विपणन प्रोत्साहित करने के लिए बिज़नस के मॉडल पर आधारित है। राधा मोहन सिंह ने यह भी कहा कि नया मॉडल अधिनियम निर्वाचन कराके बाजार के प्रबंधन में किसानों की भागीदारी को बढ़ावा देता है। सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म को भी प्रतिस्पर्धात्मक बनाया गया है, मंडी शुल्क एवं कमीशन चार्जेज को भी तर्कसंगत किया गया है। इसके अतिरिक्त अन्तरराज्यीय व्यापार को भी बढ़ावा देने की व्यवस्था की गयी है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश में औसतन लगभग 462 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक विनियमित बाज़ार है जबकि किसानो पर गठित राष्ट्रीय आयोग की संस्तुति के अनुसार 5 किलोमीटर के रेडियस (80 वर्ग किलोमीटर) में एक बाज़ार होना चाहिए। इस लक्ष्य को पाने के लिए तथा बाज़ार किसानो के फार्मगेट के नज़दीक उपलब्ध कराने के लिए इसमें गोदामों/ शीतगृहों आदि को भी बाज़ार घोषित कराने का प्रावधान किया गया है।

           यदि राज्य सरकारें सही भावना के साथ इसे लागू करवाती हैं, तो किसान के पास यह विकल्प उपलब्ध होगा कि वे अपनी उपज को किस बाज़ार एवं किस खरीदार को बेचे, जहाँ उन्हें लाभकारी मूल्य मिल सके । केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा उठाए गया एक और महत्वपूर्ण कदम एक मॉडल अनुबंध खेती अधिनियम तैयार करने का निर्णय है। यह अधिनियम किसानों के लिए कुशल बाजार संरचना तैयार करके और विपणन दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा और उत्पादन में विविधता से जुड़े जोखिम को भी कम करेगा। यह अधिनियम सभी वस्तुओं के लिए मूल्य श्रृंखला का निर्माण करने में भी सहायक होगा और उपभोक्ताओं के रुपयों में उत्पादकों की हिस्सेदारी में सुधार करेगा।

      इसी मंशा के साथ, सरकार ने एक मॉडल संविदा कृषि अधिनियम तैयार करने के लिए, 28/2/2017 को अतिरिक्त सचिव (विपणन) की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। इसके अतिरिक्त फसल और विपणन के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए, विभाग ने गोदाम विकास एवं विनियमन प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) के साथ विस्तृत चर्चा की है, जिसके बाद 9/4/2017 को एक समिति गठित की गई है ताकि उप-बाज़ार यार्ड की स्थापना की जा सके। गोदामों / साइलो  को बाजार घोषित कर  बाजार को किसानो के करीब लाकर और उन्हें प्रतिज्ञा ऋण की सुविधा उपलब्ध करने का यह एक सार्थक प्रयास है। सिंह ने आगे कहा कि कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने पर जोर दिया जा रहा है। यह मॉडल अधिनियम, बाजार के बुनियादी ढांचे में उन्नत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के निवेश के लिए अवसर प्रदान करता है। आखिर में सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्यों के एक साथ मिलकर प्रयास करने से ये लक्ष्य हासिल किये जा सकते हैं।

आधुनिकीरण व समावेशी मानव संसाधन नीतियों को बल

              सेना कमांडरों का सम्मेलन संपन्नः सेना प्रमुख ने आधुनिकीरण व समावेशी मानव संसाधन नीतियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के समापन संबोधन के साथ ही सेना कमांडरों का सम्मेलन संपन्न हो गया।

           सेना प्रमुख ने सेना के मुकाबलों को प्रभावी बनाए रखने के लिए सहयोगात्मक तरीके से कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सेना के सतत और समग्र आधुनिकीकरण की आवश्यकता है, जिसमें मुकाबले, हथियार और वायु रक्षा तथा उड्डयन उच्च प्राथमिकता के क्षेत्र हैं। सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि राज्य सरकारों के माध्यम से बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने की एक व्यापक योजना बनाई जाए। 

           वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी.एस. धनोवा और नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए संयुक्त परिचालन दर्शन विकसित करने पर बल दिया। सम्मेलन के एक सत्र के दौरान प्रशासनिक और आधुनिकीकरण के मुद्दों पर कुशल कार्ययोजना विकसित करने के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ भी चर्चा की गई। चर्चा के दौरान मानव संसाधन नीति की जटिलता के महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी विचार विमर्श किया गया। अधिक व्यावहारिक मानव संसाधन योजना विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

            इस दौरान सेना प्रमुख ने नीति बनाने में अधिक सहभागिता के स्वरूप के बारे में बताया। इसी के अनुसार सेना मुख्यालय की संबंधित शाखाओं से कार्यालयों, शाखाओं और कर्मियों के साथ व्यापक बातचीत करने के निर्देश दिए गए। सेना कमांडरों का सम्मेलन भारतीय सेना की योजना बनाने और निष्पादन प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में 3.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान     

            केंद्रीय वित्त, रक्षा एवं कारपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि  वैश्विक अर्थव्यवस्था 2017 में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है जो 2018 में थोड़ी बेहतर होकर 3.6 प्रतिशत हो जाएगी। हाल के अनुमान यह पुष्टि करते हैं कि थोड़ी अवधि में वैश्विक बढ़ोत्तरी की इन अनुमानों से कहीं बेहतर होने की संभावना है। 

         दक्षिण एशिया खासकर हमारे क्षेत्र ने अपने वायदे को जारी रखा है। भारत की प्रगति 2017 में 7.1 प्रतिशत और 2018 में 7.5 प्रतिशत होने की संभावना है। बांग्लादेश में क्रमश: यह प्रगति 6.8 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। श्रीलंका में 2017-19 की अवधि के दौरान औसत वृद्धि 5.1 प्रतिशत की उम्मीद है। भूटान में औसत वृद्धि दर 11 प्रतिशत होने की उम्मीद है। हम भारत में महत्वपूर्ण सुधारों को जारी रखेंगे और निवेश को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे ताकि यह क्षेत्र निकट भविष्य में इन दरों पर प्रगति कर सके।
 

           केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वाशिंगटन डीसी में विश्व बैंक समूह और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की विकास समिति की समग्र बैठक में भाग लिया। वित्त मंत्री ने अन्य बातों के अलावा 2015 के लीमा रोडमैप के अनुसार वार्षिक बैठक 2017 तक चुनिंदा पूंजी वृद्धि (एससीआई) और सामान्य पूंजी बढ़ोत्तरी (जीसीआई) के बारे में निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्धता का नवीकरण करने का आह्वान किया। 


              केंद्रीय वित्त, रक्षा एवं कारपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने वाशिंगटन डीसी में विकास समिति (डीसी) की समग्र बैठक में भाग लिया। विकास समिति (डीसी) विकास के मुद्दों पर अंतर-सरकारी आम सहमति बनाने के लिए विश्व बैंक समूह और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का मंत्रिस्तरीय मंच है। इस बैठक में विश्व बैंक समूह 2030 के लिए एक विजन - प्रगति और चुनौतियां' पर विश्व बैंक द्वारा ध्यान केंद्रित करके 'फॉरवर्ड लुक' प्रक्रिया अपनाने के लिए विचार-विमर्श सत्र तथा शेयरहोल्डिंग समीक्षा पर प्रगति रिपोर्ट और सभी के लिए एक मजबूत विश्व बैंक समूह पर एक पेपर शामिल हैं। वित्त मंत्री ने 2015 के लीमा रोडमैप के अनुसार, वार्षिक बैठक 2017 तक चुनिंदा पूंजी वृद्धि (एससीआई) सामान्य पूंजी बढ़ोत्तरी (जीसीआई) के बारे में निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्धता का नवीकरण करने का आह्वान किया। 

                       उन्होंने कहा कि बैंक को स्पष्ट रूप से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इन दोनों के बारे में अधिक ध्यान देने की जरूरत है। वित्त मंत्री अरूण जेटली अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की स्प्रिंग बैठकों तथा अन्य कुछ बैठकों में भाग लेने के लिए आजकल वाशिंगटन डीसी के आधिकारिक दौरे पर हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ उर्जित पटेल, आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव, शक्तिकांत दास और मुख्य आर्थिक सलाहकार, अरविंद सुब्रमण्यन तथा अन्य अधिकारी भी उनके साथ इस दौरे पर गए हैं। ऐतिहासिक आईडीए 18 उन्होंने कहा पुनरीक्षण पैकेज की उपलब्धि के लिए विश्व बैंक समूह की प्रशांसा करते हुए उन्होंने कहा कि हमें यह विश्वास है कि आईडीए 18 विकास के संसाधन उपलब्ध कराकर दुनिया के गरीब देशों के लोगों के जीवन को बढ़ने के लिए मदद करेगा और उनके उत्थान के लिए अवसरों का सृजन करेगा। 

              केंद्रीय वित्त, रक्षा एवं कारपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हम महत्वपूर्ण विकास मुद्दों पर निधि और बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को सलाह देने के लिए विकास समिति में जनादेश देने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए एकत्र हुए हैं। इसके अलावा विकासशील देशों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अपेक्षित वित्तीय संसाधनों पर भी विचार-विमर्श करना है। 

             इसलिए फॉरवर्ड लुक और शेयरहोल्डिंग समीक्षा का हमारा एजेंडा, विकासशील देशों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अपेक्षित वित्तीय संसाधनों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से विचार-विमर्श करने हेतु बहुत ही उचित है कि विश्व बैंक समूह को किस प्रकार मजबूत बनाया जाए। आज अनेक क्षेत्रों में उस वैश्विक सहमति के बारे में प्रश्न उठाए जा रहे हैं, जिसे हमने विकास, प्रगति, गरीबी, न्यूनीकरण और वैश्विक जनता की उपलब्धियों के लिए वस्तुओं और सेवाओं की नियम-आधारित प्रवाह को संचालित करने वाले बहुपक्षवादवाद का विकास किया है।

               केंद्रीय वित्त, रक्षा एवं कारपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हमें मिलजुल कर विश्व को धीमी आर्थिक प्रगति, बढ़ती असमानता और बदलती जलवायु, संघर्ष और नाजुकता के चलते गिरावट से विश्व को रोकने की अपनी सहमति को नवीकरण के लिए एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। इसलिए मैं इस समग्र सभा का विकास समिति के जनादेश के प्रति पूरी प्रतिबद्धता तथा और सतत विकास लक्ष्यों और अपनी दोहरे लक्ष्यों को प्राप्त करने का आह्वान करता हूं।

            केंद्रीय वित्त, रक्षा एवं कारपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत की आशावादी वृद्धि दर का श्रेय प्रतिबद्ध राजनीतिक इच्छा, कुशल प्रशासन और आर्थिक सुधारों के सफल कार्यान्वयन को दिया जा सकता है। भारत ने सबसे बड़ी मुद्रा सुधार पहल को सफलतापूर्वक लागू किया है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को कम नकदी गति की तरफ ले जाएगी और इससे कर अनुपालन बढ़ेगा और नकली मुद्रा का खतरा कम होगा जो आतंक वित्तपोषण के स्रोत के रूप में कार्य करता है।

               सरकार ने भारत को एक एकल साझा बाजार बनाने और कर प्रणाली को करों और नियंत्रणों की बहुलता से मुक्त करने के लिए एकल बाजार बनाने के लिए देश में एकीकृत वस्तु एवं सेवाकर सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए हैं। यह देश का सुधार एजेंडा जारी रखने का एक क्रम है जो निजी पूंजी और उद्यमशीलता की भावना को बढ़ाने में मदद करता है। विशेष एजेंडा मतों के रूप में हम तीन अपडेट/प्रगति रिपोर्टों पर विचार कर रहे हैं जिनमें फॉरवर्ड लुक, शेयरहोल्डिंग रिव्यू, और मजबूत विश्व बैंक समूह की जरूरत शामिल है।
 

           केंद्रीय वित्त, रक्षा एवं कारपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि विकासशील देशों को एसडीजी अर्जित करने के लिए बड़े और बढ़ते हुए संसाधनों की आवश्यकता है इसके अलावा हमारे संस्थानों के दोहरे लक्ष्य प्राप्त करने की भी जरूरत है। सभी विकासशील देशों को यह भी जानते हैं कि बड़े घरेलू संसाधनों को जुटाने और देश तथा अंतरराष्ट्रीय निजी क्षेत्र से निवेश वित्त के बेहतर प्रवाह के लिए प्रस्थितियां जुटाने की जरूरत है तभी उनके विकास महत्वकांक्षाएं हासिल की जा सकती हैं।

            लेकिन इसी दौरान विशेष रूप से विश्व बैंक समूह को पहले की अपेक्षा अधिक मजबूत होने की जरूरत है ताकि इस विकास एजेंडे को वास्तविकता में बदलने की निर्णायक और सार्थक भूमिका निभाई जा सके। इस दिशा में हमने लीमा रोडमैप के एक हिस्से के रूप में शेयरहोल्डिंग समीक्षा की प्रगति रिपोर्ट का भी ध्यान रखा है। मैं आईबीआरडी के मामले में चुनिंदा पूंजी वृद्धि (एससीआई) के लिए अभी तक किए गए कार्यों की सराहना करता हूँ। हमें लीमा रोडमैप के अनुसार वार्षिक बैठक 2017 तक चुनिंदा पूंजी वृद्धि और सामान्य पूंजी बढ़ोत्तरी के निर्णय पर पहुंचने और विचार करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करना होगा। मैं फॉरवर्ड लुक के निष्कर्षों से पूरी तरह सहमत हूँ और अब तक किए गए कार्यों और प्रगति को देख रहा हूँ। हमारे क्षेत्र के देश एक बड़ी युवा उभार का सामना कर रहे हैं जो हर साल लाखों रोजगार सृजन की अपेक्षा रखते हैं। हम फॉरवर्ड लुक की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हैं कि विश्व बैंक समूह नवाचार और उद्यमता को बढ़ावा देगा और कौशल तथा शिक्षा परिणामों को मजबूत बनाकर रोजगार सेवा प्रदान करने के कार्य को मजबूत बनाएगा। हम अपने जनसांख्यिकीय लाभ को वास्तविक जनसांख्यिकीय लाभांश में परिवर्तित करने के लिए डब्ल्यूबीजी के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूँ।

             केंद्रीय वित्त, रक्षा एवं कारपोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि एक बड़े बैंक के लिए डब्ल्यूबीजी के विकास में अपने नेतृत्व की भूमिका निभाना पहली शर्त है, हमें भी इसे एक बेहतर बैंक बनाने के लिए कड़ी मेहनत और कल्पनाशीलता को अपनाना चाहिए।  विश्व बैंक विकास ज्ञान के लिए एक वैश्विक भंडार है और विकास परिदृश्य में ज्ञान के अंतराल को भरने के लिए इसका विशिष्ट स्थान है। विकास की चुनौतियां उसका वित्तपोषण और अपेक्षित ज्ञान समर्थन की भयावहता लगातार बदलती रहती है। यह विकास दृष्टिकोण की मांग करता है जो लगातार विकसित हो रहा है और वास्तविक साझेदारी पर आधारित है। हम बैंक को एक कुशल और सक्रिय बैंक समूह में बदलने की आशा करते हैं जो सदस्य देशों की विकास संबंधी जरूरतों में सेवा प्रदान करें और 2030 तक उनके सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करें।