Wednesday, 19 July 2017

राज्यसभा में : दिल्ली में अपराधों में कमी आयी

        दिल्ली में अपराधों में कमी आयी है। वर्ष 2015 में पंजीकृत जघन्य अपराधों की संख्या 11,187 से घटकर वर्ष 2016 में 8,238 रह गयी। वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2016 में जघन्य की संख्या में 26.36 प्रतिशत की कमी आयी है।

       वर्ष 2016 में डकैती के मामलों में 38.67 प्रतिशत, हत्या के मामलों में 7.37 प्रतिशत, हत्या की कोशिश के मामलों में 16.1 प्रतिशत, लूट के मामलों में 35.72 प्रतिशत, दंगों के मामलों में 39.23 प्रतिशत, उगाही के लिए अपहरण के मामलों में 36.11 प्रतिशत और बलात्कार के मामलों में 2 प्रतिशत की कमी आयी है।
          शहर में अपराध की घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा विभिन्न ठोस उपाये किये गये। जिनमें, अधिक अपराध संभावित क्षेत्रों की विशेष पहचान-चित्रण करना और पुलिस संसाधनो की कुशलता पूर्वक तैनाती करना। पिकेट्स लगाना, गश्त करना, पीसीआर वाहन की अधिक उपस्थिति दर्शाना और आपात स्थिति से निपटने वाले वाहनों (ईआरवी) की तैनाती करना और अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले अधिक अपराध संभावित थानों में त्वरित कार्रवाई दल (क्यूआरटी) तैनात करना तथा सभी थानों में नियमित समन्वित जांच करना शामिल है। 
         इनके अतिरिक्त अपराध के स्वरूप के आधार पर सामूहिक गश्त करना, किसी दुखद घटना को रोकने के लिए राजधानी में विभिन्न आसान स्थानों पर पराक्रम-वाहन तैनात करना, सक्रिय अपराधियों पर प्रभावी निगरानी रखना और त्वरित कार्रवाई के लिए अंधेरे वाले स्थानों के बारे में स्थानीय सेवा एजेंसियों के ध्यान में लाना भी इसमें शामिल है।
          उपरोक्त के अतिरिक्त कमजोर वर्गों जैसे महिलाएं, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक, और उत्तर पूर्व राज्यों के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा अन्य उपाय भी किये भी किये गये हैं। यह सूचना गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने राज्यसभा में मोतीलाल वोरा के प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रदान की।

लोकतंत्र की ताकत व भावना का ह्रास रोकना प्रतिनिधियों का कर्तव्य

          भारत के उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने लोकमत संसदीय पुरस्कार 2017 का वितरण किया। 

         इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की ताकत और भावना हमारी संसद की जीवन शक्ति है। इसका ह्रास रोकना जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कर्तव्य है।
        इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, पंजाब के पूर्व राज्यपाल शिवराज पाटिल, पूर्व केन्द्रीय शहरी विकास, आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू, केन्द्रीय परिवहन एवं राजमार्ग और शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी अनेक संसद सदस्य तथा गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
         उप राष्ट्रपति ने कहा कि संसदीय प्रतिनिधियों का निजी व्यवहार और विश्वनीयता संसदीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रभावकारिता में जनता का भरोसा पैदा करती है। 
           उन्होंने आगे कहा कि सांसद का लोकतंत्र में विश्वास होना चाहिए। उसे राष्ट्रीय हितों और स्थानीय कार्यों के बीच सेतु के रुप में कार्य करना चाहिए। उसके पास न्यूनतम शब्दों में प्रभावशाली संप्रेषण की योग्यता होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हम मानते हैं कि आज सांसदों के पास ये गुण पर्याप्त मात्रा में हैं।

अनुसूचित जाति, जनजाति व महिला लाभार्थियों को कोको आउटलेट्स

         सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, जनजाति मामलों के मंत्री जुआल ओराम तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र प्रधान ने कांस्‍टीट्यूशन क्‍लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व महिला लाभार्थियों को अस्‍थायी कोको आउटलेट्स के आबंटन पत्र प्रदान किये। 

      पहल की शुरूआत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा बाबासाहेब अम्बेडकर के समग्र भारत निर्माण के दर्शन को आगे बढ़ाने के लिए शुरू की गई पहलों के एक हिस्‍से के रूप की गई है।
           इस पहल का उद्देश्‍य गरीब, हाशिए पर रहने वाले और समाज के वंचित वर्गों के लोगों के जीवन में सकारात्‍मक सुधार लाना है, जिसकी परिकल्‍पना डॉ. बी.आर. अम्‍बेडकर ने की थी।
        पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पिछले वर्ष अनुमोदित की गई इस योजना में किये गये संशोधन में अस्थायी कोको आउटलेट्स का आबंटन लंबित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लेटर ऑफ इन्‍टेंट होल्‍डर (आशय पत्र धारकों) और जिनके माता-पिता की कोई आय नहीं है, ऐसी 40 वर्ष से अधिक आयु की विधवाओं और अविवाहित महिलाओं को आबंटित करने का प्रावधान है। 
          संशोधित योजना उन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों के डीलरों को सहायता उपलब्‍ध कराती है, जिन्‍होंने रिटेल आउटलेट्स सरकार या सरकारी निकाय द्वारा जमीन का अधिकरण करने के कारण गवां दिये है या ऐसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लेटर ऑफ इन्‍टेंट धारक जिन्‍हें रिटेल आउटलेट्स सौंपे गये थे, लेकिन वे न्‍यायालय मामले या कानूनी विवाद के कारण उनका कब्‍जा बरकरार नहीं रख सकें। 
      इस अवसर पर प्रधान ने कहा कि इस योजना का लाभ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को पहुंचाने की एक पहल के रूप में तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मार्गदर्शन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और लेटर ऑफ इन्‍टेंट धारकों और डीलरों को 525 अस्थायी कोको आउटलेट्स देने का प्रस्‍ताव किया है। 
       अभी तक 195 अनु‍सूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लेटर ऑफ इन्‍टेंट धारकों/डीलरों ने अस्‍थायी कोको आउटलेट्स के आबंटन के लिए लेटर ऑफ इन्‍टेंट जारी करने के लिए स्‍वीकृति दी है। 195 लाभार्थियों में से 114 महिलाएं है, इनमें 53 अनुसूचित जाति, 15 अनुसूचित जनजाति, 46 विधवाएं और 40 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित महिलाएं है। 
         इस योजना के एक हिस्‍से के रूप में लाभार्थियों को संबंधित तेल विपणन कंपनी द्वारा सभी मूल सुविधाओं से युक्‍त और पूरी तरह विकसित रिटेल आउटलेट्स के सौंपे जाएंगे। इसके अलावा इन आउटलेटों को चलाने के लिए कार्यशील पूंजी भी उपलब्‍ध कराई जाएगी।

 

कृषि क्षेत्र में प्रोटीनयुक्‍त दालों, खाद्य पदार्थों को पोषण युक्‍त बनाने की आवश्‍यकता

         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सरकार के शीर्ष वैज्ञानिक अधिकारियों के साथ बैठक की। इन अधिकारियों में नीति आयोग के सदस्‍य डाक्‍टर वी के सारस्‍वत, भारत सरकार के मुख्‍य वैज्ञानिक सलाहकार डाक्‍टर आर चिंदबरम और केन्‍द्र सरकार के विभिन्‍न विज्ञान विभागों के सचिव शामिल थे।

         बैठक में अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को विभिन्‍न क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान में हुई प्रगति की जानकारी दी। बैठक में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकि और नवाचार भारत की प्रगति और समृद्धि के लिए बेहद जरुरी है। 
       उन्‍होंने कहा कि देश की समस्‍याओं के समाधान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विज्ञान का इस्‍तेमाल सरकार की प्राथमिकता है। खेल जगत में प्रतिभाओं की खोज का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍कूली छात्रों में भी विज्ञान विषयों में इसी तरह प्रतिभाओं की खोज की एक प्रणाली विकसित की जानी चाहिए। 
      उन्‍होंने कहा कि जमीनी स्‍तर पर कई तरह के नवोन्‍मेषण हो रहे हैं। इन नवोन्‍मेषणों का लाभ सब तक पहुंचाने के लिए एक सक्षम व्‍यवस्‍था विकसित की जानी चाहिए। 
        उन्‍होंने इस संदर्भ में रक्षाकर्मियों द्वारा किए गए नवाचार का भी उल्‍लेख किया। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में प्रोटीन युक्‍त दालों, खाद्य पदार्थों को पोषण युक्‍त बनाने तथा तीसी में मूल्‍य संवर्धन को प्राथमिकता के तौर पर लेते हुए इस दिशा में तेजी से काम करने की आवश्‍यकता बताई। 
        ऊर्जा के क्षेत्र का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ईंधन के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सौर ऊर्जा के सर्वाधिक इस्‍तेमाल की संभावनाएं तलाशी जानी चाहिंए।आमलोगों का जीवन स्‍तर सुधारने तथा इस रास्‍ते में आने वाली चुनौतियों से निबटने में भारतीय वैज्ञानिको की क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से देश के स्‍वाधीनता के 75 साल पूरे होने के अवसर पर 2022 तक इस दिशा में एक निश्‍चित लक्ष्‍य तय करने का अनुरोध किया।

उत्‍पादन को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए सुधार की जरूरत

     उपराष्ट्रपति एम हामिद अंसारी ने कहा कि भारतीय उत्‍पादन को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए उत्पादकता और निपुणता के मामले में बहुत सुधार करने की जरूरत है। वे टाटा लिमिटेड के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को एएमएमए-जेआरडी टाटा कार्पोरेट लीडरशिप पुरस्‍कार प्रदान करने के बाद उपस्थिति जनों को संबोधित कर रहे थे। 

        उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी कंपनियों को व्यापार क्षमताओं को विकसित करने से पहले मूल्य श्रृंखला के शीर्ष पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपने आपको सुसज्जित करना है। लाभदायक विकास के लिए हमें लाभांश के लिए प्रयास करना होगा यह तभी अर्जित होगा जब हम उत्पादों का लक्ष्‍य रखें। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले डिजाइन, इंजीनियरिंग और विनिर्माण की जरूरत है।
         उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी कंपनियों को भविष्य में करोबार परिदृश्यों का सृजन करने और इंजीनियरिंग के अवरोधों को दूर करने में सक्षम होना चाहिए। इससे पहले उप राष्‍ट्रपति ने जोखिम निवारण, ऋण की लत और अनुसंधान विकास व्‍यय कम करने सहित कॉर्पोरेट क्षेत्र की अंतर्निहित कमजोरियों का उल्लेख किया।
       उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे कॉरपोरेट क्षेत्र को निवेश करना है और अनुसंधान तथा नवाचार में भारी निवेश करना है। उन्होंने आगे कहा कि केवल उद्योगों को प्रोत्साहन देना हमारे अभिनव विकास के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है। हमें नवाचार और उद्यमशीलता को प्रोत्‍साहित करने के लिए आवश्यक 'संस्कृति और व्यवहार' की शिक्षा की दिशा में काम करना चाहिए। 
       उप राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ साल पहले, दो प्रबंधन गुरुओं ने यह कहा था कि एक जटिल और गतिशील वैश्विक प्रतिस्पर्धा के माहौल में अनुकूल क्षमता अस्तित्व और विकास की कुंजी है और भारतीय व्यवसाय को अपने आपको त्‍वरित विकास का मार्ग तभी प्राप्‍त होगा जब वे सोचना और उसके अनुकूल काम करना सीख जाएंगे।
          वैश्विक विकास के लगातार चल रहे कम स्‍तरों, उत्पादन प्रौद्योगिकियों में हो रहे तेज़ी से बदलाव और उपभोक्ताओं के संदर्भों के मद्देनजर भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर के सामने यह चुनौती है कि मंदी के दौर में अपने विकास को कैसे कायम रखें। क्‍योंकि एक तेजी से विकसित तकनीकी परिदृश्य में प्रतिस्पर्धा करते हुए ये संरक्षणवादी शासन को जन्‍म देती हैं। 
         यह चिंता का मामला है कि कई भारतीय कंपनियां इस प्रतिस्पर्धी और प्रतिबंधात्मक परिदृश्य के अनुकूल होने के लिए इसे अपनाने में कठिनाई अनुभव कर रही हैं। उप राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे कुछ कठोर सच्चाइयों का उल्लेख करने की अनुमति दें। कई भारतीय कंपनियों के लिए, प्रतिस्पर्धा एक नई घटना है। भारतीय व्यवसायों में परंपरागत रूप से जोखिम का रुख रहा है। 
       कुछ महत्वपूर्ण उदाहरणों को छोड़कर ज्यादातर भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पर्याप्त आधारभूत और अनुभव की कमी है, क्योंकि घरेलू कारोबारी माहौल में गहन अंतर-फर्म प्रतिद्वन्दता नहीं है। इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक सरकारी संरक्षण ने उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लड़ाइयों के लिए बेपरवाह अनुभव करने और अधूरी तैयारी के लिए छोड़ दिया है। 
         भारतीय कंपनियों के आंतरिक माहौल में बदलाव की एक वास्तविक आवश्यकता है जो प्रतिस्पर्धी सोच और व्यवहार को बढ़ावा दे सकती है। हमारे कॉर्पोरेट की इन अंतर्निहित कमजोरियों को पिछले कुछ सालों में धीमे अंतर्राष्ट्रीय विकास और भारतीय फर्मों की तथाकथित 'ऋण-लत' से जोड़ा जाता है। चूंकि आर्थिक मंदी का संकेत स्पष्ट हो गया, इक्विटी बाजार में निवेश स्थिर हो गया, लेकिन कॉर्पोरेट इंडिया ने ऋण जुटाना जारी रखा है। 
         2009-2014 के मध्य भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र ने अपना कुल ऋण 20 लाख करोड़ से बढ़ाकर 41 लाख करोड़ कर दिया है। मौटे तौर पर यह 690 बिलियन डॉलर है। सीएमआईई प्रोवैस डाटाबेस में 18000 से अधिक कंपनियों के सर्वेक्षण में यह पता चला है कि पिछले 4 वर्षों में जबकि सकल राजस्व में 77 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई लेकिन उनका ऋण दोगुना हो गया है और ब्याज भुगतान 146 प्रतिशत बढ़ गया तथा कुल लाभ में 32 प्रतिशत गिरावट आयी। 
       भारत को वैश्विक रूप से अपने सेवा क्षेत्र के लिए जाना जाता है जिसका भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 60 प्रतिशत का योगदान है। जबकि इसका रोजगार जुटाने में केवल 15 प्रतिशत योगदान है। भारत जैसे बड़े और घनी आबादी वाले देश में बड़ी संख्या में रोजगार और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन का सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण हिस्सा होने की जरूरत है।
          हमारे देश में घरेलू खपत बढ़ रही है जिससे विदेशी बाजारों में तेज और गहरी पहुंच बनने से विकास की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी। लाभदायक विकास के लिए हमें लाभांश के लिए प्रयत्न करना चाहिए और यह तभी होगा अगर हम उत्पादों का लक्ष्य रखें जिसके लिए उच्च गुणवत्ता डिजाइन, इंजीनियरिंग और उत्पादन की जरूरत पड़ती है। 
       भारतीय उत्पादन को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए उत्पादकता और कुशलता के रूप में बहुत सुधार करने की जरूरत है। एशियाई उत्पादकता संगठन (एपीओ) के उत्पादकता डाटा बेस 2014 के अनुसार देश में औसत कुल कारक उत्पादकता टीएफपी जो 2000-2005 तक दो प्रतिशत थी 2005-2010 में बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गयी लेकिन यह अगले दो वर्षों में गिरकर 0.9 प्रतिशत पर आ गयी।
       2010-2012 में टीपीएफ ने भारत की जीडीपी प्रगति में 11 प्रतिशत योगदान किया। तुलनात्मक रूप से चीन की जीडीपी विकास में यह हिस्सा 26 प्रतिशत था। उप राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान में अधिकांश भारतीय कंपनियां अपने घटक या गैर-ब्रांडेड उत्पाद बेचकर वैश्विक मूल्य श्रृंखला में निचले स्तर पर हैं।
         यह सच सेवा क्षेत्र में भी हमारी कंपनियों के लिए देखने को मिलता है। हमारी कंपनियों को व्यापार क्षमता विकसित करने से पहले मूल्य श्रृंखला के शीर्ष पर मुकाबला करने के लिए अपने आपको सुसज्जित करना होगा। मेक इन इंडिया विजन को इसे ठीक करना होगा।
      विश्व स्तर पर बड़े उत्पादकों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए दिखावा लागत लाभ पर्याप्त नहीं हो सकता है।घरेलू बाजार के अपेक्षित आकार को छोड़ दें तो हमारी कंपनियां उस स्तर को प्राप्त करने में समर्थ नहीं होगी जो उनके प्रतियोगियों ने पूर्वी एशिया में अपने अनेक उत्पादों के लिए स्थापित कर रखा है।
          लाभ के स्तर के साथ-साथ लागत लाभ और मजबूत सरकारी सहायता अभी भी हमें बढ़ती हुई श्रम लागत के बावजूद अधिकांश उत्पादों के लिए उनके मूल्यों पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए चुनौती पेश कर रही है। इसके अलावा उत्पादन के बदलते स्वरूप--3-डी प्रिटिंग, रोबोटिक्स और आटोमेशन भारतीय कंपनियों के सामने नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं।

राष्ट्रपति आश्वस्त, देश का भविष्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा

       राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन के प्रेसीडेंट एस्टेट स्थित डॉ राजेन्द्र प्रसाद सर्वोदय विद्यालय के छात्रों के बीच 2017 में सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में सर्वोच्च नंबर लाने वाले अमन अग्रवाल को प्रणब मुखर्जी शैक्षिणिक उत्कृष्टता पुरस्कार किया।

       इस अवसर पर 2017 में सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में लड़कियों के वर्ग में सर्वोच्च अंक लाने वाली तथा सीबीएसई की 2017 में 12वीं की परीक्षा में लड़कियों में गणित विषय में सर्वोच्च अंक लाने वाली कुमारी मुस्कान शर्मा को राष्ट्रपति की सचिव श्रीमती ओमिता पॉल तथा राष्ट्रपति के अपर सचिव डॉ थामस मैथ्यू द्वारा क्रमश: ‘ओमिता पॉल शैक्षिणिक उत्कृष्टता पुरस्कार’ और ‘कुंजन्नाम्मा मैथ्यू अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।
         इस अवसर पर राष्ट्रपति ने विजेताओं को बधाई दी तथा उनसे जिंदगी के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रयास करने का आग्रह किया। नोबल पुरस्कार विजेता रविन्द्र नाथ टैगोर की कविता का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए की सेवा में ही खुशी है। 
        राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान शिक्षक दिवस के अवसर पर जब उन्होंने डॉ राजेन्द्र प्रसाद सर्वोदय विद्यालय के युवा छात्रों को पढ़ाया तो उन्हें एक सुखद अनुभूति हुई।
        उन्होंने कहा कि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं और जब वे उनके उज्जवल चेहरे और चमकती आंखों को देखते हैं तो वह इस बात के प्रति आश्वस्त हो जाते हैं कि देश का भविष्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इस महान देश की सेवा करने का मौका मिलेगा।
        उन्होंने कहा कि वह इस बात के प्रति आश्वत हैं कि बच्चे अपने अभिभावकों, मित्रों तथा पडोसियों की आशाओं पर खरा उतरेंगे।
       राष्ट्रपति की सचिव श्रीमती ओमिता पॉल ने कहा कि राष्ट्रपति के प्रेरणादायक मार्गदर्शन के तहत पिछले पांच वर्षों के दौरान देश में शैक्षिक ढांचे तथा गुणवत्ता के विकास के प्रति निरंतर प्रयास किए गए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को अपनी कुशाग्र बुद्धि को बनाये रखना चाहिए तथा समस्याओं के हल के लिए नये समाधान खोजने चाहिए।