Thursday, 12 October 2017

डिजाइन से कालीनों की ब्रांडिंग

    वाराणसी। संपूर्णानंद संस्‍कृत विश्वविद्यालय में वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से कालीन निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा आयोजित 34वें अंतर्राष्ट्रीय कालीन मेला में अन्तर्राष्ट्रीय मार्केटिंग और ब्राडिंग की छाप स्टालों पर देखने को मिली है। 

    कालीन मेले में निर्यातकों के विश्वस्तरीय कारपेट स्टाल दिखाई दे रहे हैं। जिन्हे अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर डेवलप किया गया है। कालीन मेले में इस तरह के प्रयोग तेजी से बढ़ रहे हैं, इससे विदेशी आयातक इन स्टालों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। मेले में लगाए गए स्‍टालों में कालीनों के कलर संयोजन की तरह स्टाल में भी बेहतर कलर और डिजाईन का प्रयोग कर निर्यातक अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग कर रहे हैं साथ ही यह प्रयोग मेले को काफी आकर्षक बना रहा है।
    अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मार्केटिंग के लिए मेला एक बड़ा माध्यम साबित हो रहा है वहीं स्‍टालों के अंदर कालीन बनाने से संबंधित टूल्स, धागों आदि को प्रदर्शित करने के साथ कालीन हस्तशिल्पयों के जीवनशैली का भी चित्रण देखने को मिल रहा है। 
   मेले में कई ऐसे निर्यातक हैं जिन्‍होने पहली बार किसी फेयर में अपना स्टाल लगाया है इससे उन्हे फायदा भी मिल रहा है। मेंले में 274 स्टालों और सात हजार वर्ग मीटर क्षेत्र ने आयातकों को अपनी तरफ आकर्षित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 
       इस कारण निर्यातक ऐसे स्टाल बनाने पर जोर दे रहे हैं। जो आयातकों को अपने तरफ आकर्षित कर स्टाल में आने के लिए प्रेरित करें। इसके बारे में आरएमसी के निर्यातक अब्दुल रब का कहना है कि मेंले में स्थान और स्टाल का बनावट और उसमें प्रोडक्ट का डिस्प्ले मेले में भाग लेने वालों की सफलता का पैमाना तय करती है। 
    उन्होने अपने स्टाल को सफेद रंग दिया है साथ है उसमें बेहतरीन लाइटिंग का प्रयोग किया है। वहीं विवर नॉट के निर्यातक इमरान ने पहली बार मेले में कम जगह में ही ग्रीन कलर का प्रयोग करते हुए स्टाल को प्रदर्शित किया है उनका कहना है कि इससे उनका आयातकों के साथ अधिक जुड़ाव रहा।
   भदोही के निर्यातक जावेद रग्स ने अपने स्टाल को अंतराष्ट्रीय थ्रीडी डिजाइन का प्रयोग करते हुए उसे आकर्षक बनाया है। वहीँ सभी कालीन मेलों में भव्य व सुंदर स्टाल लगाने वाले ग्लोबल ओवरसीज के निर्यातक संजय गुप्ता ने कहा कि मेले में स्टाल के माध्यम से अगले छह महीने के लिए निर्यात ऑर्डर बुक करने का प्रयास होता है। 
     इस चार दिवसीय मेले में स्टाल लगाने के लिए पूरे वर्ष काम करना पड़ता है। हम प्रयास करते हैं की हमारा स्टाल अधिक से अधिक हमारे प्रोडक्ट को डिस्प्ले कर सके साथ ही स्टाल को सुंदर बना सके। इस बारे में परिषद के अध्यक्ष महावीर शर्मा का कहना है कि मेले को लेकर निर्यातक नए नए प्रयोग कर रहे हैं वहीं परिषद का यह मेला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चुका है। 
     यही कारण है कि अब नए देशों के आयातक भी मेले में काफी संख्या में आए हैं। भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों के प्रति उनका रूझान तेजी से बढ़ा है। परिषद़ के प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि पहला मेला सिर्फ 250 वर्ग मीटर के साथ शुरू किया गया था।
     उस दौरान काफी साधारण स्टाल बनाए जाते थे और कुछ निर्यातक ही उसमें शिरकत करते थे लेकिन आज यह मेला विश्‍व स्‍तर पर एक ब्रांड बन चुका है। वाराणसी के सम्पूर्णान्द संस्कृत विश्वविद्यालय में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा आयोजित 34वे कालीन के तीन दिनों में लगभग छह सौ आयातकों व् उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 
   इसके बारे में जानकारी देते हुए परिषद के अध्यक्ष महावीर शर्मा ने बताया कि तीन दिनों में 275 आयातक व आयातकों के 304 प्रतिनिधियों ने मेले में अपनी भागीदारी दिखाई।

हस्तशिल्प निर्यात 2016-17 में 13.15 प्रतिशत बढ़कर 24.392 करोड़

     ग्रेटर नोएडा। केन्द्रीय वस्त्र मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी ने निर्यातकों से आग्रह किया है कि वे कारीगरों के कल्याण का ध्यान रखें जो इस क्षेत्र की रीढ़ हैं। 

   श्रीमती इरानी ने कहा कि डिजाइन और उत्पाद का विकास विक्रय मूल्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और बदले में कारीगरों और उत्पादकों को अपने उत्पाद से लाभ मिलता है। दुनिया के सबसे बड़े हथकरघा और उत्पाद मेले आईएचजीएफ दिल्ली शरदकालीन मेले 2017 का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने यह उद्गार व्यक्त किए। 
     यह मेला ग्रेटर नोएडा में इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 12 से 16 अक्टूबर, 2017 तक आयोजित किया जाएगा। वस्त्र मंत्री ने हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने में हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद की भूमिका की सराहना की।
       उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प के निर्यात में वर्ष दर वर्ष वृद्धि हुई है। यह 2016-17 में 13.15 प्रतिशत बढ़कर 24.392 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। उन्होंने कारीगरों के बच्चों की शिक्षा के लिए कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के अंतर्गत ईपीसीएच द्वारा शुरू की गई योजनाओं की सराहना की।
   यह योजना ओपन स्कूलों के जरिये कारीगरों के बच्चों को शिक्षा में पूरी सहायता प्रदान करती है। 75 प्रतिशत खर्च ईपीसीएच द्वारा तथा 25 प्रतिशत निर्यातक सदस्य द्वारा उठाया जाएगा। श्रीमती इरानी ने कहा कि प्रधानमंत्री का स्वप्न है कि देश में कोई भी बच्चा निरक्षर न रहे। 
    वस्त्र मंत्री ने ईपीसीएच द्वारा डिजाइन पंजीकरण योजना शुरू करने की सराहना की जिससे सदस्य निर्यातक बिना किसी परेशानी के डिजाइन का पंजीकरण करा सकेंगे।
    उन्‍होंने कहा कि ईपीसीएच डिजाइन सेवाएं निश्चित रूप से बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र की मदद करेंगी और हस्तशिल्प का निर्यात बढ़ेगा जिससे कारीगरों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वस्त्र मंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री की पूर्वोत्तर को बढ़ावा देने की परिकल्पना को ईपीसीएच ने प्रभावी तरीके से लागू किया है। ईपीसीएच के पास पूर्वोत्तर क्षेत्र के हस्तशिल्प और हथकरघा विकास के लिए एक समन्वित कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत डिजाइन, मार्केटिंग और कौशल विकास प्रदान किया जाएगा। 
     श्रीमती इरानी ने कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र में पहली बार निर्यातकों और आयातकों दोनों के संयुक्त उद्यम के लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और अवसरों को बढ़ाने की पहल की जा रही है। इस पहल से विदेशी खरीददारों को तकनीकी जानकारी, निवेश, मार्केटिंग नेटवर्क को लाने का अवसर मिलेगा ताकि वे विश्व बाजार में भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त उद्यम स्थापित कर सकेंगे। 
    इस अवसर पर ईपीसीएच के अध्यक्ष ओ. पी. प्रहलादका ने प्रौद्योगिकी उन्नयन के बारे में अगले पांच वर्ष के लिए ईपीसीएच के विजन की चर्चा की।
      उन्होंने कहा कि ईपीसीएच ने हाल ही में डिजाइन और उत्पाद विकास प्रौद्योगिकी मिशन शुरू किया है। प्रहलादका ने जीएसटी को सरलता से लागू करने के लिए वस्त्र मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय से प्राप्त सहायता की सराहना की। 
      उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में विदेशी खरीददार शामिल हुए। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राकेश कुमार के अनुसार आईएचजीएफ दिल्ली मेले में घर, लाइफस्टाइल, फैशन, वस्त्र और फर्नीचर जैसे सामान को दिखाने वाले करीब 2980 प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। 110 देशों के 6000 से अधिक खरीददार मेले में आयेंगे। कुमार ने बताया कि इस मेले के प्रमुख आकर्षण में डिजाइनर फोरम और दोबारा उपयोग में आने वाले उत्पाद शामिल हैं।

पर्यटन पर्व में स्‍थानीय समुदायों की भागीदारी

    नई दिल्‍ली। स्‍थानीय समुदायों को पर्यटन पर्व के एक हिस्‍से के रूप में आयोजित की जा रही विभिन्‍न गतिविधियों में प्रमुखता से शामिल किया गया है।

   इस कार्यक्रम के जरिये देश के विभिन्‍न हिस्‍सों के ग्रामीण जीवन, कला और शिल्‍प, वस्‍त्र, हथकरघा, संस्‍कृति और स्‍थानीय समुदायों की विरासत को प्रदर्शित किया जा रहा है। पर्यटकों और आम जनता की भागीदारी के माध्‍यम से पर्यटन पर्व स्‍थानीय समुदायों को आर्थिक और सामाजिक दोनों ही लाभ प्रदान करेगा।
     पर्यटन मंत्रालय स्‍वदेश दर्शन योजना सहित विभिन्‍न योजनाओं के माध्‍यम से देशभर में फैले पर्यटन सर्किटों में पर्यटन के बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर अपना ध्‍यान केन्द्रित कर रहा है। इन सर्किटों में बुनियादी ढांचे के विकास से पर्यटन से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जो स्‍थानीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में बेहतरी सुनिश्चित करेंगी।
     इन प्रयासों के अलावा पर्यटन संबंधी विभिन्‍न पहलों में स्‍थानीय समुदायों को शामिल किया जा रहा है, जिनमें ‍ग्रामीण पर्यटन का विकास, घर में प्रवास के बारे में संवेदनशीलता, प्रचार और पर्यटन पर्व जैसे कार्यक्रम शामिल है। पर्यटन पर्व के आठवें दिन का आकर्षण तमिलनाडु यात्रा मार्ट (टीटीएम) का उद्घाटन था, जो पर्यटन समुदाय से हितधारकों के लिए एक वैश्विक आयोजन है। इसमें राज्य की संस्कृति, विरासत और पर्यटन क्षमता का प्रदर्शित किया जाएगा।
     केरल की राज्‍य सरकार द्वारा पर्यटन पर्व के हिस्‍से के रूप में लाइट हाऊस बीच, कोवालम में एक सांस्‍कृतिक संध्‍या का आयोजन किया गया। 
   तमिलनाडु सरकार के सहयोग के साथ इंडिया टूरिज्‍म चेन्‍नई ने मम्‍मलपुरम में एक सांस्‍कृतिक संध्‍या का आयोजन किया।
   राष्‍ट्रीय रूर्बन मिशन के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पितुक गोम्‍पा, लेह में पर्यटन के ढांचे, पर्यटन सूचना केन्‍द्र, मनोरंजन/थीम पार्क और पार्किंग सुविधाओं के विकास के लिए स्पितुक रूर्बन कलस्‍टर में पर्यटन परियोजनाओं की शुरूआत की है। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने ईटानगर में ट्रांसपोर्टरों, टूर ऑपरेटरों, होटल मालिकों, छात्रों, समुदायिक संवेदनशीलता के हितधारकों के लिए संवेदी कार्यक्रमों का आयोजन किया। 
   छत्‍तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने रायपुर के जे.एन.पांडे स्‍कूल और कल्‍याण पब्लिक स्‍कूल में स्‍कूली बच्‍चों के लिए भाषण, चित्रकारी और क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। 
    मध्‍य प्रदेश सरकार ने चंदेरी स्थित होटल ताना बाना में एक खाद्य महोत्‍सव का आयोजन किया तथा जबलपुर के होटल कलचुरी रेजीडेंसी में अन्‍तर्राष्‍ट्रीय सतत पर्यटन वर्ष पर एक संगोष्‍ठी का आयोजन किया। पर्यटन पर्व के रूप में गुजरात सरकार ने पाटन जिले के सिद्दपुर में पर्यटन की थीम ‘यूथ इन एक्‍शन’ पर विभिन्‍न कार्यक्रमों का आयोजन किया।
   राजस्‍थान सरकार उदयपुर में दिवाली मेले का आयोजन कर रही है, जो 22 अक्‍टूबर त‍क चलेगा, वहीं उत्‍तराखंड सरकार उत्‍तरकाशी में यमुनोत्री महोत्‍सव का आयोजन कर रही है। आईटीडीसी द्वारा होटल कलिंगा अशोक में तटीय खाद्य महोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है।
   आईएचएम के सहयोग से भारत पर्यटन कार्यालयों द्वारा देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में स्‍थानीय आबादी और हितधारकों के लिए विभिन्‍न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें संवेदी कार्यक्रम, नुक्‍कड़ नाटक, विरासत संबंधी कार्यक्रम, कार्यशालाएं आदि शामिल हैं।

गांधी की 150वीं जन्मशती के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय समिति

   नई दिल्‍ली। सरकार 2 अक्टूबर 2019 से 2 अक्टूबर 2020 तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जन्मशती मनाएगी। 

 महात्मा गांधी के संदेश का प्रसार करने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया गया है।
    इस उद्देश्य के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय समिति गठित की गई है। इस समिति में देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, राजनीतिक प्रतिनिधि, गांधीवादी विचारक और सभी क्षेत्रों के जाने-माने व्यक्ति शामिल होंगे।
     समिति समारोहों के लिए नीतियों, कार्यक्रमों, क्रियाकलापों का मार्गदर्शन करेगी और उन्हें मंजूरी देगी। यह समिति समय-समय पर लिए गए फैसलों के कार्यान्वयन का निरीक्षण करेगी।

प्रणब मुखर्जी को गुरू-संग्रह पुस्तक भेंट

    नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने नई दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ‘गुरू-संग्रह’ पुस्तक भेंट की।

    इस पुस्तक में प्रणब मुखर्जी द्वारा दिए गए दीक्षान्त भाषणों का संकलन है। यह पुस्तक नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने तैयार की है। इस अवसर पर प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि प्रणब मुखर्जी हमारे लिए हमेशा पथप्रदर्शक रहे।
    उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवीनता, अनुसंधान और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ख्याति प्राप्त व्यक्ति प्रणब मुखर्जी के लिए उपहार है। इसे विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में वितरित किया जाएगा। 
   प्रणब मुखर्जी ने कहा कि उनका हमेशा से मानना है कि यदि हमें पहले नम्बर की रैंकिंग हासिल करनी है तो हमें उच्च शिक्षा में गुणवत्ता व सुधार, खासतौर से अनुसंधान और नवप्रवर्तनशीलता पर विशेष ध्यान देना होगा। 
     उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि श्री जावड़ेकर के नेतृत्व में हम अपने शिक्षण संस्थानों के स्तर को सुधार सकेंगे। ताकि हम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों से मुकाबला कर सकें। उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की सराहना की और इस पुस्तक को लाने के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग में सचिव के. के. शर्मा भी मौजूद थे।

विश्व में भारत आधुनिक विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी देश बने

    नई दिल्‍ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने राज्यपालों एवं उप राज्यपालों के 48वें सम्मेलन में कहा, मैं आप सब का इस सम्मेलन में हार्दिक स्वागत करता हूँ। जो राज्यपाल और उप-राज्यपाल पहली बार इस सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं, उनका विशेष रूप से अभिनन्दन है।

   राज्यपालों एवं उप राज्यपालों के 48वें सम्मेलन में राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, सामान्यत: यह सम्मेलन वर्ष की शुरुआत में आयोजित होता है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, प्रधानमंत्री ने 'टीम इंडिया' की भावना को कार्यरूप देने के लिए जोर दिया है और इसी आधार पर ‘नीति आयोग’ का गठन किया गया है। ‘नीति आयोग’ में केंद्र और राज्य मिलकर विचार-विमर्श करके नीतियां और विकास की प्राथमिकताएं तय करते हैं।
     राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राज्यपालों द्वारा "संविधान के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण" तथा "जनता की सेवा और कल्याण में विरत रहने" का आपका संवैधानिक दायित्व और भी अहम हो जाता है। आप सब केंद्र और राज्यों के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। संविधान की धारा 168 के अनुसार, राज्यपाल अपने प्रदेश की विधायिका के एक अहम अंग होते हैं।
      राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा भारतीय संविधान के अंतर्गत, राज्यपाल का ओहदा बहुत ऊँचा होता है। आप संवैधानिक आदर्शों और मर्यादाओं के प्रतीक हैं। कुछ विशेषाधिकार केवल राज्यपालों को ही उपलब्ध हैं। राज्य की जनता की निगाहें राजभवन पर टिकी रहती हैं। राजभवन का सभी पर अनुकरणीय प्रभाव पड़ता है। राजभवनों में मूल्यों और आदर्शों के स्थापित होने से सार्वजनिक जीवन से जुड़े हुए बुद्धिजीवी, स्वयं सेवी संस्थान और समाज के सभी वर्ग के लोग प्रेरणा लेते हैं।
     इस सम्मेलन का आयोजन एक विशेष पृष्ठभूमि में हो रहा है। 2022 में आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण संकल्प तय किये जा रहे हैं। इन संकल्पों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तैयारी की जा रही है। यह एक ऐसा अवसर है जब देश में भावी पीढ़ी के लिए हम कुछ महान कार्य कर सकते हैं।
     आजादी की लड़ाई के समय देशवासियों ने जिस तरह संघर्ष का बीड़ा उठाया था तथा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिस जज्बे का उन्होने परिचय दिया था उसी भावना से काम करने का आज यह उपयुक्त समय है।
     राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, सामान्यतया, ऐसे अवसरों पर उत्सव मनाने की अग्रिम तैयारियां होने लगती है, परन्तु, भारत सरकार ने तय किया है कि सन 2022 तक हमारा देश सुरक्षित, समृद्ध, शक्तिशाली, सबको समान अवसर उपलब्ध कराने वाला तथा आधुनिक विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में विश्व में एक अग्रणी देश बने, इसके लिए पूरे देश को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
     इस प्रकार 2017 से 2022 तक के 5 वर्ष उस 'न्यू इंडिया' के निर्माण के लिए हैं, जहां भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण और अस्वच्छता के लिए कोई स्थान नहीं होगा। साथ ही साथ, भावी पीढ़ी के सुंदर भविष्य के लिए मजबूत नींव भी डाली जाएगी।
    राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, फ़िज़िकल और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा पब्लिक सर्विसेज के द्वारा हर व्यक्ति को ऐसी भरोसेमंद सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं जिससे कि वह अपनी क्षमताओं का विकास कर सके और उसका जीवन-स्तर बेहतर हो सके।
     मोबाइल कनेक्टिविटी ने आर्थिक पायदान पर सबसे नीचे खड़े व्यक्ति को बाज़ार, बैंकिंग, खेती संबंधी जानकारी, रेलवे बुकिंग तथा अन्य सुविधाओं से जोड़ा है। पूरे विश्व में बदलते हुए विज्ञान, तकनीकी और आर्थिक परिप्रेक्ष्य को देखते हुए हमारे देश में सभी क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ने के लिए नयी टेक्नोलॉजी और इन्नोवेशन का उपयोग किस ढंग से किया जाए, इस बारे में हमें सोचना है।
     राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, आज के डिजिटल युग में लोगों की यह अपेक्षा है कि सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के तरीके सरल हों, पारदर्शी हों और जवाबदेही के प्रावधान हों, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। हमारे देश के नागरिकों को विकसित देशों में उपलब्ध सार्वजनिक सुविधाओं के समकक्ष सुविधाएं मिलनी चाहिए।
    राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, नागरिकों की ऊर्जा को बेहतर कामों में लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने उन पर विश्वास जताते हुए अनेक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है; पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया सरल की है। नागरिकों का अधिकतर काम राज्य स्तर, ज़िला स्तर तथा पंचायतों या म्युनिसिपल बाडीज़ से होता है। इन स्तरों पर लोगों को पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ सार्वजनिक सेवाएँ मिलें, ऐसी व्यवस्था जरूरी है।
      राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, राष्ट्रीय लक्ष्यों को निश्चित समय सीमा में प्राप्त करने के लिए 'टीम इंडिया' एक ही दिशा में आगे बढ़े, यह सुनिश्चित करने के लिए राज्यपालों को अपने-अपने राज्यों के स्तर पर सभी स्टेकहोल्डर्स को राष्ट्रीय अभियानों से जोड़ने में सहायता करनी चाहिए।
      राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, युवाओं को राष्ट्र-निर्माण से जोड़ना अनिवार्य है। समाज में आ रही विकृतियों को दूर करने तथा नैतिक मूल्यों में गिरावट को रोकने की जरूरत है। देश का भविष्य युवा पीढ़ी की योग्यता, नैतिकता और संवेदनशीलता पर निर्भर करता है।
   वृद्धों की सेवा, स्वच्छता के प्रति आग्रह, पर्यावरण तथा जीव जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना, सामाजिक व्यवहार में संवेदनशीलता तथा ईमानदारी के मूल्यों से युक्त नई पीढ़ी अपने ज्ञान और कौशल के बल पर देश को नई ऊँचाइयों तक पहुंचा सकती है। इस संदर्भ में राज्य स्तर पर उच्च शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसीलिए सभी राज्यों में ऐसे शिक्षण संस्थानों की आवश्यकता है जो भावी पीढ़ी का निर्माण करने में समर्थ हों।
      राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, अनुमानतः देश के 69ऽ विश्व-विद्यालय राज्य सरकारों की देख-रेख में हैं, जिनमें देश के 94ऽ विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते हैं। ऐसी आम धारणा है कि केंद्र सरकार के संस्थानों और केंद्रीय विश्व-विद्यालयों के समकक्ष लाने के लिए राज्य स्तर के शिक्षण संस्थानों में और सुधार की आवश्यकता है।
    इसके लिए राज्यपालों को कुलाधिपति के तौर पर शिक्षण संस्थानों के साथ नियमित संवाद को प्राथमिकता देने की जरूरत है। इससे उन संस्थानों के वातावरण में बदलाव आयेगा। विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में आप नैतिक और शैक्षणिक रूप से योग्य व्यक्तियों की समयबद्ध तरीके से नियुक्ति के रास्ते सुझा सकते हैं।
     राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में समय पर कुलपतियों तथा अध्यापकों की नियुक्ति, शिक्षा के लिए अनुकूल वातावरण, ऑनलाइन एड्मिशन, समय पर परीक्षा एवं परिणाम की घोषणा, तथा समय पर दीक्षांत समारोह का आयोजन, यह अति आवश्यक है। इन सभी विषयों पर ध्यान देकर राज्य के शिक्षण संस्थानों को बेहतर बनाया जा सकता है।
     इन शिक्षण संस्थानों में खेल-कूद की अच्छी सुविधाएं हो तथा विद्यार्थियों को प्रोत्साहन दिया जाए ताकि अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं के लिए विश्व स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकें। मुझे आशा है कि सभी राज्यपाल उच्च शिक्षा के सर्वांगीण सुधार के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करते रहेंगे। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा देश में 20 विश्व-स्तरीय उच्च शिक्षण संस्थानों के निर्माण की योजना है, जिनमें 10 निजी क्षेत्र में होंगे और 10 सरकारी क्षेत्र में। आप सब अपने राज्य में ऐसे संस्थानों के निर्माण के लिये दिशा और प्रेरणा दे सकते हैं।
   राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, कठिन और दूरगामी लक्ष्यों को प्राप्त करने में संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अपने राज्यों में विधायिका का अहम अंग होने के नाते विधायकों के साथ संवाद स्थापित करके आप अपने राज्य के विकास को नए आयाम दे सकते हैं।
    राजभवन में उन्हें वर्ष में कम से कम एक बार बुलाकर विस्तृत संवाद करना चाहिए। इसी प्रकार उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के साथ भी समय-समय पर संवाद होना चाहिए। विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों तथा जागरूक नागरिकों से संवाद बना कर आप समाज और राज्य सरकार को सही दिशा दे सकते हैं। इस तरह आपके दायित्व बहु-आयामी हैं।
     राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा, देश के हर हिस्से में विकास के सन्दर्भ में संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूचियों में शामिल आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उनकी संस्कृति और भाषा के संरक्षण के साथ-साथ उनके विकास को गति प्रदान करने के प्रयास में सम्बद्ध राज्यों के राज्यपाल अपना बहुमूल्य योगदान देते रहेंगे।

नार्थ और साउथ ब्लॉक में नई प्रकाश व्यवस्था

   नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में गृह मंत्रालय के कर्मचारी महिपाल सिंह ने नार्थ और साउथ ब्लाक में नई प्रकाश व्यवस्था का शुभारंभ किया। 

   इस कार्यक्रम में बीस केन्द्रीय मंत्रियों ने भागीदारी की। एक जनवरी से राष्ट्रपति भवन को भी इसी तरह प्रकाशवान किया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी में राजपथ के अगल-बगल प्रतिष्ठित नार्थ और साउथ ब्लाक भवनों में रात्रि से नये गतिशील प्रकाश व्यवस्था के उद्घाटन के साथ ही उज्ज्वल रोशनी संयोजन का शुभारंभ हो गया।
   15 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित इस प्रकाश व्यवस्था में 16 मिलियन रंगों का संयोजन होगा। इस प्रणाली के उद्घाटन करने का सौभाग्य गृह मंत्रालय के वरिष्ठतम सहायक कर्मी महिपाल सिंह को मिला। महिपाल सिंह ने वर्ष 1975 में बतौर दफ्तरी पदभार ग्रहण किया था। 
       कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीस केन्द्रीय मंत्रियों ने भी भाग लिया। इनमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन और केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान महिपाल सिंह को प्रथम पंक्ति में बैठाया गया।
     उद्धाटन के पश्चात प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 10 दिनों में सेवानिवृत होने वाले महिपाल सिंह से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया। इस दौरान मंत्रियों, सरकारी वरिष्ठ अधिकारियों, मीडिया और भारी संख्या में उपस्थित नागरिकों के लिए नई प्रकाश व्यवस्था का 20 मिनट का लाइव प्रदर्शन किया गया। 
    आगामी एक जनवरी से नार्थ एवं साउथ ब्लाक भवनों के बीच में स्थित राष्ट्रपति भवन में भी नवीन प्रकाश प्रणाली की व्यवस्था की जाएगी। 
     इस नई प्रकाश व्यवस्था के आयोजन को देखने मंत्रियों में रामविलास पासवान, श्रीमती मेनका गांधी, वीरेन्द्र सिंह, राधामोहन सिंह, प्रकाश जावेडकर, रविशंकर प्रसाद, टीसी गहलोत, अशोक गजपति राजू, धर्मेद्र प्रधान, श्रीमती हरसिमरन कौर और डॉ.जितेन्द्र सिंह शामिल थे।