आंध्र प्रदेश की एक मुस्लिम महिला ने नई बहू को उपहार में दिया शौचालय
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने यहां राष्ट्रीय मूल्यों की बहाली के लिए फाउंडेशन (एफआरएनवी) के 9 वें स्थापना दिवस का उद्घाटन किया।
इस कार्यक्रम को दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) द्वारा सह-प्रायोजित किया गया है। ‘स्वच्छ भारत’ इस कार्यक्रम की थीम है। एम.वेंकैया नायडू ने स्थापना दिवस की थीम के रूप में स्वच्छ भारत का चयन करने के लिए एफआरएनवी की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज भारत में स्वच्छता की कमी के साथ-साथ रहन-सहन की जो अस्वास्थ्यकर स्थिति देखने को मिल रही है वह तेजी से घट रहे मूल्यों और लुप्त होती संस्कृति को प्रतिबिंबित करती है।
उन्होंने कहा कि सड़कों पर कचरे के ढेर, सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी के अंबार और जंगलों को नष्ट करने की प्रवृत्ति यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यहां दूसरों के साथ-साथ बुनियादी मानव मूल्यों के लिए सम्मान का पूर्ण अभाव है। मंत्री ने कहा कि कुछ चीजों को त्यागने के बजाय ‘परिसंपत्ति’ या ‘संसाधन’ के रूप में ‘कचरे’ को लेकर हमारी धारणा में व्यापक बदलाव लाने की जरूरत है। नायडू ने कहा कि अक्टूबर 2014 में लांच किया गया स्वच्छ भारत मिशन हमारे देश को स्वच्छ रखने की खातिर देशवासियों को जोड़ने का अब तक का सबसे बड़ा अभियान है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कुछ उदाहरण भी पेश किए। महाराष्ट्र के वाशिम जिले के साईखेड़ा गांव की संगीता अहवाले ने शौचालय बनाने के लिए अपना ‘मंगलसूत्र’ बेच दिया है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कोटिभारी गांव की 104 वर्षीया कुंवर बाई ने शौचालय बनाने के लिए अपनी बकरियां बेच दी हैं। कोलरस ब्लॉक के गोपालपुर गांव की 20 वर्षीया प्रियंका आदिवासी अपने माता-पिता के पास वापस लौट आई है क्योंकि उनकी ससुराल में कोई शौचालय नहीं है और अब जाकर उनके पति ने एक शौचालय बनाने का वादाकिया है। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की एक मुस्लिम महिला ने अपनी नई बहू को शौचालय उपहार में दिया है क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि उसके परिवार की नई सदस्य को भी शौचालय के अभाव में ठीक वैसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़े जिनका सामना उन्हें अपने समय में करना पड़ा था।
कर्नाटक के एक स्कूल की लड़की लावाण्य ने अपने गांव के सभी 80 घरों में शौचालय बनवाने की मांग करते हुए भूख हड़ताल कर दी। नायडू ने कहा कि इस मिशन ने पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि अब तक 33,76,793 व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों और 1,28,946 सामुदायिक शौचालय सीटों का निर्माण किया गया है। मंत्री ने कहा कि अब तक 688 शहरों एवं कस्बों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है और इनमें से 531 शहरों एवं कस्बों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया गया है और फिर ओडीएफ के रूप में प्रमाणित किया गया है।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और गुजरात ने सभी शहरों एवं कस्बों को ओडीएफ घोषित कर दिया है। नायडू ने यह भी कहा कि 81,015 शहरी वार्डों में से 43,200 वार्डों ने शत-प्रतिशत घरों में जाकर शहरी ठोस कचरे के संग्रह एवं ढुलाई का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।





