Wednesday, 7 June 2017

आंध्र प्रदेश की एक मुस्लिम महिला ने नई बहू को उपहार में दिया शौचालय

          केन्‍द्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने यहां राष्ट्रीय मूल्यों की बहाली के लिए फाउंडेशन (एफआरएनवी) के 9 वें स्थापना दिवस का उद्घाटन किया।

        इस कार्यक्रम को दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) द्वारा सह-प्रायोजित किया गया है। ‘स्वच्छ भारत’ इस कार्यक्रम की थीम है। एम.वेंकैया नायडू ने स्थापना दिवस की थीम के रूप में स्वच्छ भारत का चयन करने के लिए एफआरएनवी की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज भारत में स्वच्छता की कमी के साथ-साथ रहन-सहन की जो अस्वास्थ्यकर स्थिति देखने को मिल रही है वह तेजी से घट रहे मूल्यों और लुप्त होती संस्कृति को प्रतिबिंबित करती है। 

           उन्होंने कहा कि सड़कों पर कचरे के ढेर, सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी के अंबार और जंगलों को नष्ट करने की प्रवृत्ति‍ यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यहां दूसरों के साथ-साथ बुनियादी मानव मूल्यों के लिए सम्मान का पूर्ण अभाव है। मंत्री ने कहा कि कुछ चीजों को त्यागने के बजाय ‘परिसंपत्ति’ या ‘संसाधन’ के रूप में ‘कचरे’ को लेकर हमारी धारणा में व्‍यापक बदलाव लाने की जरूरत है। नायडू ने कहा कि अक्टूबर 2014 में लांच किया गया स्वच्छ भारत मिशन हमारे देश को स्‍वच्‍छ रखने की खातिर देशवासियों को जोड़ने का अब तक का सबसे बड़ा अभियान है।

              उन्होंने कहा कि इस अभियान में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कुछ उदाहरण भी पेश किए। महाराष्ट्र के वाशिम जिले के साईखेड़ा गांव की संगीता अहवाले ने शौचालय बनाने के लिए अपना ‘मंगलसूत्र’ बेच दिया है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कोटिभारी गांव की 104 वर्षीया कुंवर बाई ने शौचालय बनाने के लिए अपनी बकरियां बेच दी हैं। कोलरस ब्लॉक के गोपालपुर गांव की 20 वर्षीया प्रियंका आदिवासी अपने माता-पिता के पास वापस लौट आई है क्योंकि उनकी ससुराल में कोई शौचालय नहीं है और अब जाकर उनके पति ने एक शौचालय बनाने का वादाकिया है। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की एक मुस्लिम महिला ने अपनी नई बहू को शौचालय उपहार में दिया है क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि उसके परिवार की नई सदस्य को भी शौचालय के अभाव में ठीक वैसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़े जिनका सामना उन्‍हें अपने समय में करना पड़ा था। 

            कर्नाटक के एक स्कूल की लड़की लावाण्य ने अपने गांव के सभी 80 घरों में  शौचालय बनवाने की मांग करते हुए भूख हड़ताल कर दी। नायडू ने कहा कि इस मिशन ने पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि अब तक 33,76,793 व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों और 1,28,946 सामुदायिक शौचालय सीटों का निर्माण किया गया है। मंत्री ने कहा कि अब तक 688 शहरों एवं कस्‍बों को खुले में शौच मुक्‍त (ओडीएफ) घोषित किया गया है और इनमें से 531 शहरों एवं कस्‍बों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया गया है और फि‍र ओडीएफ के रूप में प्रमाणित किया गया है।

        उन्‍होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और गुजरात ने सभी शहरों एवं कस्बों को ओडीएफ घोषित कर दिया है। नायडू ने यह भी कहा कि 81,015 शहरी वार्डों में से 43,200 वार्डों ने शत-प्रतिशत घरों में जाकर शहरी ठोस कचरे के संग्रह एवं ढुलाई का लक्ष्‍य प्राप्‍त कर लिया है।

भारत व साइप्रस के बीच व्यापारिक नौवहन पर आधारित समझौते को मंजूरी

     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत व साइप्रस के बीच व्यापारिक नौवहन पर आधारित समझौते को पूर्व-प्रभाव से अपनी मंजूरी दे दी है, जिस पर अप्रैल 2017 में हस्ताक्षर किए गए थे! 


   व्यापारिक नौवहन समझौते से दोनों देशों के बीच समुद्री समुद्री मार्गों से होने वाले व्यापार को बढ़ाने के मार्ग में आने वाली किसी बाधा को हटाने में सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा ! इस समझौता ज्ञापन से इन देशों के बीच और तीसरी दुनिया के देशों के बीच भी जिंसों के परिवहन के क्षेत्र में भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा ! इसके अलावा, इस समझौते का लक्ष्य रोजगार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना, कार्य से संबंधित शर्तों में सुधार लाना और एक दूसरे के समुद्री जहाजों में नियोजित कर्मियों के कल्याण के लिए सहयोग बढ़ाना शामिल है !

देश के 673 में 125 कृषि विज्ञान केन्द्र जनजातीय बाहुल्य क्षे़त्रों में

          केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि सदियों से जनजातियों ने कृषि जैव-विविधता बनाने एवं संरक्षण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विगत तीन वर्षो में जनजातीय किसानों द्वारा कुल 5000 से अधिक प्रजातियों के पंजीयन हेतु कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से भारत सरकार की संस्था पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण को आवेदन किया गया है जो कि भविष्य में जलवायु अनुकूल प्रजाति के विकास में निर्णायक भूमिका अदा करेगी। 

      केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह बात नई दिल्ली में जनजातीय क्षेत्रों के किसानों के सशक्तिकरण पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही। इस मौके पर केन्द्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुआल ओरम भी उपस्थित थे। कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में जनजातियों का यदि उत्थान करना है तो कृषि के नये-नये आयामों को इनके खेतों तक पहुंचाना पड़ेगा, साथ ही साथ इस बात का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है कि हम इन क्षेत्रों को प्रकृति की धरोहर मान कर जैविक एवं नैसर्गिक खेती की ओर अग्रसर करें। इन क्षेत्रों में हमें मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, फल, फूल, सब्जियों के नये बीज व प्रजातियों को प्रतिस्थापित करना होगा, साथ ही साथ समेकित प्रबंधन, वर्षा आधारित कृषि की नवीन तकनीक, जल संरक्षण की उचित व्यवस्था के साथ-साथ सिंचाई की नवीन तकनीक, नवीन कृषि यंत्रों, पंक्ति बुआई पद्धति आदि अपनाना होगा। साथ ही साथ एकीकृत फसल प्रणाली, एकीकृत फार्मिंग सिस्टम माड्यूल पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

               सिंह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्र के जोत का आकार छोटा है, इसलिए इनके जोत के आकार के अनुसार नवीन कृषि व संबंधित तकनीकियों के प्रयोग से लाभ होगा, जिससे हम इन क्षेत्रों के कृषि विकास की परिकल्पना को सरल कर सकते है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि पूरे देश मे 673 कृषि विज्ञान केन्द्र है, जिनमे से 125 जनजातीय बाहुल्य वाले क्षे़त्रों में कार्य कर रहे हैं। स्थापित संस्थानों व केन्द्रों पर होने वाले व्यय के अतिरिक्त प्रतिवर्ष भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विशिष्ट कार्यों हेतु लगभग 75 से 100 करोड़ रूपये स्वीकृत किये जाते हैं जिससे विभिन्न प्रकार की परियोजनाएं सुचारू रूप से कार्यरत रहें। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा मशरूम, मछली पालन, मुर्गी पालन (बैकयार्ड पोल्ट्री), देशी प्रजातियों के चूजों की समुचित व्यवस्था, सूकर पालन, मधुमक्खी पालन आदि उपलब्ध कराई जा रही है जो सीमित संसाधनों के बावजूद जनजातियों के आय को 2022 तक दुगनी करने में सहायक सिद्ध हो पायेगा। 

            राधा मोहन सिंह ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने विगत तीन वषों में जनजातीय क्षेत्रों को सुदृढ़ करने हेतु अनेक प्रयास किये हैं। जहां आसाम एवं झारखंड में नये केन्द्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान स्थापित किये गये हैं वहीं उत्तर पूर्वी क्षेत्र में 6 महाविद्यालयों को स्थापित किया गया है। इन क्षे़त्रों में 10 नये कृषि विज्ञान केन्द्र भी खोले गये हैं। आई.सी.ए.आर. के सभी  संस्थानों को निष्चित रूप से कुछ धनराशि जनजातीय क्षेत्रों में कार्य करने के लिए स्वीकृत की जाती है। इस लिए सभी संस्थान जनजातीय क्षेत्रों में फसल उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, मछली उत्पादन, आदि क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में कार्यरत केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान वहां की जनजातियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर कार्य कर रहे हैं।
 

       केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि मौसम के अनुकूल फसलों का चयन एवं प्रजातियों को उगाने का अद्भूत ज्ञान जनजातियों में पाया जाता है। वर्षो तक एक ही क्षेत्र मे रहने, भ्रमण करने एवं वन-संपदा के संपर्क मे रहने से इनको पौधे की पहचान अत्यधिक रहती है जो कि किसी भी विषय-विशेषज्ञ से कम नहीं होती । पौध विज्ञान के खोजकर्ता को ऐसी अनुभवी जनजातियों की पहचान कर उनके अनुभव को उपयोग में लाना चाहिए। सिंह ने कहा कि कृषि के दृष्टिकोण से जनजातीय क्षेत्र बहुत ही उपजाऊ है। रसायनो के पहुच से दूर ये क्षेत्र कार्बनिक खेती व टिकाऊ खेती के लिए जानी जाती हैं। यहां के उत्पादों में विशेष गुण पाये जाते हैं, जैसे कड़कनाथ मुर्गी के मांस को विश्व के सबसे स्वादिष्ट एवं उपयोगी माना गया है।

              आवश्यकता इस बात की है कि इन क्षेत्रों में प्रचलित फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यहां के उत्पादों के विशेष गुणों एवं स्वाद का प्रचार प्रसार कर उनकी मांग बढ़ाई जाए जिससे यहां के किसानों की आमदनी बढ़ सके। इन क्षेत्रों में ऐसी-ऐसी फसलें आज भी विद्यमान हैं जैसे-नाईजर, तिल, मोटे अनाज; कोदो, काकुन, कुटरी, रागी इत्यादि जो औषधीय गुणों वाली होने के साथ-साथ काफी उच्च गुणवत्ता वाली हैं। इन क्षेत्रों में दलहन व मक्का मुख्य रूप से उगायी जाती है व इनकी उत्पादकता बढ़ाने के तमाम अवसर हमारे पास हैं। सिंह ने बताया कि जनजातियों द्वारा अनाज भंडारण एवं ग्रामीण स्तर पर प्रसंस्करण की विधियाँ भी काफी प्रचलित एवं महत्वपूर्ण हैं जिनको वैज्ञानिक अध्ययन के बाद अन्य क्षेत्रों में भी फैलाया जाना लाभदायक सिद्ध हो रहा है। 

       केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि विभिन्न पहलुओं को देखते हुए यह बात महत्वपूर्ण है कि जनजातीय युवाओं के लिए शिक्षा का पाठयक्रम एवं संरचना ऐसा बनाया जाये कि उनके व्यावहारिक ज्ञान को डिग्री या डिप्लोमा का रूप देकर इनकी दक्षता सुधार की जाये जैसे- कपड़े, आभूषण, मेटल क्राफ्ट, बाँस का उत्पाद, बर्तन बनाना इत्यादि जिससे इन जनजातियों का उत्पाद अधिक मात्रा मे बाजार को आये एवं बाजार से अधिक पैसे का प्रवाह इन इलाकों में हो सके।

देश के भविष्‍य के विकास के लिए 1.17 करोड़ से अधिक लोगों को कुशलता का प्रशिक्षण

           एनडीए सरकार के अंतर्गत समावेशी विकास एवं संवृ‍द्धि के 3 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्‍य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि स्किल इंडिया कार्यक्रम के आरंभ से मंत्रालय ने 1.17 करोड़ से अधिक प्रतिभा‍गियों को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीएम) की योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्‍यम से विभिन्‍न कौशलों में प्रशिक्षण प्रदान किया। 

       यह संख्‍या अन्‍य केंद्रीय मंत्रालयों के अधीन कौशल विकास योजना के अंतर्गत चलाये जाने वाले कार्यक्रमों और योजनाओं के अतिरिक्‍त है। एनडीए सरकार के 3 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रुडी ने कहा कि स्किल इंडिया एक मूक क्रांति है, जो जारी है। सरकार देश के भविष्‍य के विकास के लिए निजी साझेदारों के साथ मिलकर यह संयुक्‍त निवेश कर रही है। उन्‍होंने कहा कि इस मार्ग पर सावधानी से कदम आगे बढ़ाने होंगे क्‍योंकि इसमें हमारे देश के युवाओं का भविष्‍य शामिल है। 

            उन्‍होंने कहा कि आज जो हम बोएंगे, वहीं हम कल काटेंगे। इसीलिए हमने पहले 2 वर्ष का समय सही आधारशिला तैयार करने में लगाया, ताकि कौशल पर्यावरण का अपनी कौशल योग्‍यताओं के राष्‍ट्रीय मानकों के साथ मेल करा सके। रूडी ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जिसका शुभारंभ 15 जुलाई 2015 को किया गया था। अकेले इसके अंतर्गत 26.5 लाख लोगों को उनके चयनित कौशल क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया गया जिसमें 50 प्रतिशत महिला प्रत्‍याशी रही। उन्‍होंने कहा कि यह देखकर सुखद अनुभव होता कि ज्‍यादा से ज्‍यादा महिलाएं कौशल प्राप्‍त करने के लिए आगे आ रही हैं। पिछले वर्ष पीएमकेवीवाई के अंतर्गत महिलाओं की सहभागिता 40 प्रतिशत थी। 

           मंत्री ने कहा, “मैं यह देखकर प्रफुल्लित हो रहा हूं कि इस वर्ष हमारा महिला-पुरूष अनुपात बढ़कर समान हो गया। रूडी ने कहा, निजी/उद्योग क्षेत्र तभी साझेदार बनेगा जब उसे स्किल इंडिया के माध्‍यम से कुशल कार्यबल मिलता हुआ दिखाई देखा। हमें यह बदलाव धीरे-धीरे होता हुआ दिखाई दे रहा है। विभिन्‍न स्‍तरों पर ज्‍यादा से ज्‍यादा कार्पोरेट हमारे साथ साझेदारी कर रहे हैं। चाहे यह नौसिखियों को प्रशिक्षण देने की बात हो, अवसंरचना को प्रोत्‍साहन देना हो, सीएसआर निधियों के माध्‍यम से योगदान हो या फिर पारिश्रमिक संसाधनों को चुनने का विषय हो। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीएम) सचिव के पी कृष्‍णन ने कहा कि भारत के संविधान की 7वीं सूची के अंतर्गत समवर्ती सूची में वर्णित 52 विषयों में से व्‍यावसायिक शिक्षा एक बिंदू है।

             इसका अर्थ यह भी है कि मुख्‍य रूप से राज्‍यों को ही इस आदेश को राज्‍यभर में केंद्र के सहयोग से चलाना होगा। केंद्र का सहयोग निधि, राष्‍ट्रीय स्‍तर पर एकीकरण के रूप में होगा। उन्‍होंने कहा कि कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीएम) ने राज्‍य कौशल विकास मिशनों के साथ मिलकर अल्‍पकालीन प्रशिक्षणों को श्रेणीबद्ध करने का काम किया है और संकल्‍प जैसी विश्‍व बैंक की योजनाओं को भी राज्‍य स्‍तर पर लागू किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि हमारे प्रयासों से जल्‍द ही अंतिम दूरी भी तय हो जाएगी।

          मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि वे आपूर्ति आधारित कौशल विकास परिदृश्‍य से दूर हटकर मांग आधारित की ओर अग्रसर होने का प्रयास कर रहे हैं ताकि भारत में कौशलयुक्‍त युवा बेरोजगार न रहे।

दिव्यांगजनों को उपचार व उपकरण,  देश में पांच हजार तीन सौ शिविरों का आयोजन

          सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के राष्ट्रीय न्यास ने प्रमुख साझीदारों के सहयोग से एक सम्मेलन का आयोजन किया। समावेशी भारत पहल : एक समावेशी भारत की दिशा में  सम्मेलन का विषय था बौद्धिक और विकास संबंधी अपंगता के लिए समावेशी भारत पहल। 

      राष्ट्रीय न्यास का समावेशी भारत अभियान विशेष रूप से बौद्धिक और विकास संबंधी दिव्यांगों के लिए है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को मुख्यधारा में शामिल कराना और सामाजिक जीवन के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं शिक्षा, रोजगार और समुदाय के प्रति दृष्टिकोण बदलाव लाना है। इस सम्मेलन का उद्घाटन केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चन्द गहलोत ने किया।

            इस अवसर पर कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री राजीव प्रताब रूडी, युवा मामले और खेल राज्य मंत्री विजय गोयल, नीति आयोग के मुख्यकार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत, संयुक्त राष्ट्र के रेजीडेन्ट कॉर्डिनेटर अफानासीव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव एन.एस. कांग, राष्ट्रीय न्यास के अध्यक्ष कमलेश पाण्डे, राष्ट्रीय न्यास के मुख्यकार्यकारी अधिकारी मुकेश जैन और सामाजिक न्याय और अधिकारिता के मंत्रालय के कई अधिकारी उपस्थित थे। इस अवसर पर समावेशी भारत पहल पर एक दृष्टिपत्र जारी किया गया और राष्ट्रीय न्यास और उसके सहयोगियों के बीच समझौता पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। थावर चंद गहलोत ने कहा कि हमारा देश सदैव वसुधैव कटुम्बकम में विश्वास करता आया है और दिव्यांगजन हमारे समाज के अभिन्न अंग हैं। 

          गहलोत ने कहा कि दिव्यांगजनों को सटीक मार्गदर्शन की आवश्यकता है और राष्ट्रीय न्यास दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने लोगों से राष्ट्रीय न्यास की सभी दस योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने बताया कि उनका मंत्रालय दिव्यांगजन वित्त विकास निगम के माध्यम से दिव्यांगजनों को कौशल विकास का प्रशिक्षण देता है और उऩ्हें निर्भर बनाता है । अब दिव्यांगजनों को देश और विदेश में अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है। दिव्यांगजनों को देशभर में शिविरों के जरिए उपचार और आवश्यक उपकरण उपचार प्रदान किए जा रहे हैं। उनके मंत्रालय ने देशभर में पांच हजार तीन सौ शिविरों का आयोजन किया है जिसमे पांच सौ करोड़ रूपए उपचार और मददगार उपकरण वितरण पर खर्च हुए हैं।

              विजय गोयल ने कहा कि पिछले ओलंपिक खेलों में दिव्यांगजनों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। उन्होंने बताया कि उनके मंत्रालय ने आगामी ओलंपिक में खेलने वाले सभी दिव्यांगजनों सहित भविष्य के खिलाड़ियों के लिए एक पोर्टल शुरू किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिव्यांगजनों की प्रतिभा को तराशने के लिए उनका मंत्रालय हर संभव मदद करेगा। राजीव प्रताब रूडी ने कहा कि दिव्यांगों विशेषरूप से सक्षम व्यक्ति है और उनकी प्रतिभा को कौशल विकास के जरिए निखारा जा सकता है और उनका मंत्रालय इस संबंध में हर संभव सहयोग करेगा।
 

             नीति आयोग के मुख्यकार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने कहा कि दिव्यांगजन प्रतिभाशाली है और उनमें विशेष योग्याताएं है। इनके समेकित विकास के लिए कई नए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमें दिव्यांगजनों की क्षमताओं को निखरने देना चाहिए। समावेशी भारत पहल दिव्यांगजनों को सामाजिक तानेबाने में अधिकारों का  संरक्षण, बौद्धिक और विकास संबंधी दिव्यांगजनों की सक्रिय भागादारी और समान अवसर देने का एक प्रयास है। समेकित भारत अभियान के तहत तीन मुख्य बिन्दुओं पर ध्यान दिया जा रहा है जोकि समेकित शिक्षा, समेकित रोजगार और समेकित सामुदायिक जीवन हैं। समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। ताकि विद्यालयों और कॉलेजों को दिव्यांगजनों के लिए समेकित बनाया जा सके। 

            सरकारियों और निजी संस्थानों से जुड़ी संस्थाएं शैक्षणिक संस्थानों में आधारभूत ढांचे को उपयोगी और समेकित बनाने के लिए सभी जरूरी साधन, उपयोगी उपकरण, जरूरी सूचना और सामाजिक सहयोग प्रदान करेगी। अभियान के तहत औद्योगिक, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की दो हजार संस्थाएं वर्तमान वित्त वर्ष में दिव्यांगजनों के समेकित रोजगार के लिए जागरूकता फैलाएगीं। समेकित सामुदायिक जीवन के प्रयास को तभी सफल बनाया जा सकता है जब दिव्यांगजन, उनके परिवार और सीविल सोसाइटी संस्थाएं और राज्य सरकार के बीच आपस में सामंजस्य होता है। 

           समेकित भारत अभियान की शुरूआत दिव्यांगजनों के प्रति आमजनों के बीच जागरूकता फैलाना और लोगों को उनके प्रति संवेदनशील बनाने के लिए हुई थी। राष्ट्रीय न्यास सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का सांविधिक निकाए है। इसकी स्थापना 1999 के 44वें अधिनियम के तहत स्वलीनता, प्रमस्तिष्क पक्षाघात, मंद और बहुदिव्यांगजनों के कल्याण के लिए की गई थी। राष्ट्रीय न्यास की परिकल्पना का आधार दिव्यांगजनों और उनके परिवारों की क्षमता विकास, समान अवसर प्रदान करना, अधिकारों की प्राप्ति, दिव्यांगजनों के लिए बेहतर माहौल और समेकित समाज का निर्माण था।

भारत का सीफूड निर्यात 5.78 अरब अमरीकी डॉलर रहा

अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में फ्रोजन झींगा और फ्रोजन मछली की भारी मांग के मद्देनजर, भारत ने 2016-17 में अब तक का सबसे ज्‍यादा 5.78 अरब अमरीकी डॉलर (37,870.90 करोड़ रूपये) मूल्‍य का 11,34,948 मीट्रिक टन सीफूड का निर्यात किया, जो एक साल पहले 9,45,892 टन और 4.69 अरब डॉलर था।

     अमरीका और दक्षिण पूर्व एशिया लगातार सबसे ज्‍यादा आयात करने वाले देशों में रहे, जबकि यूरोपीय संघ से मांग में भी इस अवधि में इजाफा हुआ है। फ्रोजन झींगा निर्यात किए जाने वाली चीजों में 38.28 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर रहा। इससे 64.50 प्रतिशत (डॉलर में) कुल आय हुई। झींगा का निर्यात मात्रा में 16.21 प्रतिशत बढ़ा और डॉलर में 20.33 प्रतिशत। फ्रोजन मछली सबसे ज्‍यादा निर्यात की जाने वाली चीजों में 26.15 प्रतिशत के साथ दूसरे स्‍थान पर रही। इससे 11.64 प्रतिशत (डॉलर में) आय हुई। इसमें 26.92 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 
               अमरीका ने 1,88,617 मीट्रिक टन भारतीय सीफूड का आयात किया।  दक्षिण पूर्व एशिया 29.91 प्रतिशत के साथ (अमरीकी डॉलर में) भारत के समुद्री उत्पादों का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसके बाद यूरोपीय संघ (17.98 प्रतिशत ), जापान (6.83 प्रतिशत), मध्य पूर्व (4.78 प्रतिशत) चीन (3.50 प्रतिशत ) और अन्य देशों में (7.03 प्रतिशत ) रहा। दक्षिण पूर्व एशिया में कुल निर्यात मात्रा में 47.41 प्रतिशत, आय में 52.84 प्रतिशत रुपये में और 49.90 प्रतिशत डॉलर में वृद्धि हुई। 
        वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "एल वानैमी के उत्‍पादन में वृद्धि, मत्स्यपालन प्रजातियों के विविधीकरण, गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए किए गए निरंतर उपायों और मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन के लिए आधारभूत सुविधाओं में वृद्धि के कारण सीफूड के निर्यात में भारत की सकारात्‍मक वृद्धि हुई।"