Friday, 21 April 2017

मनरेगा में 2.82 करोड़ की परिसंपत्तियां सृजित

              महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम ने एक करोड़ परिसंपत्तियों को भू-चिन्हित करते हुए एक नई उपलब्धि हासिल की। 

      मनरेगा के अंतर्ग‍त सृजित परिसंपत्तियों का आकार अत्‍यन्‍त विशाल हो चुका है। वित्‍तीय वर्ष 2006-07 में प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक करीब 2.82 करोड़ रुपये मूल्य की परिसंपत्तियां सृजित की जा चुकी हैं। इसके अंतर्गत हर वर्ष औसतन करीब 30 लाख परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाता है, जिनमें अनेक कार्य शामिल होते हैं, जैसे जल संरक्षण ढांचों का निर्माण, वृक्षारोपण, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का सृजन, बाढ़ नियंत्रण के उपाय, स्‍थायी आजीविका के लिए व्‍यक्तिगत परिसंपत्तियों का निर्माण, सामुदायिक ढांचा और ऐसी ही अन्‍य परिसंपत्तियां शामिल होती हैं। 

             मनरेगा परिसं‍पत्तियों को भू-चिन्हित यानी जिआ-टैग करने की प्रक्रिया जारी है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत सृजित सभी परिसंपत्तियां जिआ-टैग की जाएंगी। राष्‍ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यों, विशेष रूप से जल संबंधी कार्यों को भू-चिन्हित यानी जिआ-टैग करने पर विशेष ध्‍यान केन्द्रित किया जा रहा है। जिआ-मनरेगा ग्रामीण विकास मंत्रालय का एक बेजोड़ प्रयास है, जिसे राष्‍ट्रीय दूर संवेदी केन्‍द्र (एनआरएससी), इसरो और राष्‍ट्रीय सुचना विज्ञान केन्‍द्र के सहयोग से अंजाम दिया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 24 जून 2016 को एनआरएससी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए थे। इसके अंतर्गत प्रत्‍येक ग्राम पंचायत के अंतर्गत सृजित परिसंपत्तियों को जिओ-टैग किया जाना है।

            इस समझौते के फलस्‍वरूप राष्‍ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्‍थान की सहायता से देशभर में 2.76 लाख कार्मिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उम्‍मीद की जा रही है कि भू-चिन्हित करने की प्रकिया से फीड स्‍तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

नमामि गंगे परियोजना का मॉडल राज्‍य उत्‍तराखण्‍ड

            उत्‍तराखण्‍ड के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने नई दिल्‍ली में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती से मुलाकात की। नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई की उत्‍तराखण्‍ड ने नमामि गंगे परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन में तेजी लाने की जरूरत है।

            बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने राज्‍य में नमामि गंगे परियोजनाओं के अब तक के कार्यान्‍वयन की समीक्षा की। कौशिक ने सुश्री भारती को आश्‍वासन दिया कि राज्‍य सरकार इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सभी आवश्‍यक सहयोग देगी। उन्‍होंने कहा कि वे सुनिश्‍चित करेंगे की उत्‍तराखण्‍ड नमामि गंगे परियोजना का मॉडल राज्‍य बने। उन्‍होंने यह भी कहा कि इसी तरह उनकी सरकार हरिद्वार को नमामि गंगे कार्यक्रम का मॉडल नगर बनाना चाहती है। सुश्री भारती ने कहा कि नमामि गंगे के सफल कार्यान्‍वयन के लिए राज्‍य सरकार का सहयोग बहुत जरूरी है। मदन कौशिक ने हरिद्वार में चंडी घाट पर नदी तट विकास कार्यों में और विस्‍तार लाने की आवश्‍यकता पर बल दिया। 

            इस पर सुश्री भारती ने राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन को निर्देश दिया कि वह इस मामले की समीक्षा करे। मंत्री ने राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन के महानिदेशक उपेन्‍द्र प्रसाद सिंह को जो इस बैठक में मौजूद थे निर्देश दिया कि वे शीघ्र ही मदन कौशिक के साथ मिलकर उत्‍तराखण्‍ड में गंगोत्री से लेकर हरिद्वार तक गंगा के किनारों का सर्वेक्षण करके अपनी रिपोर्ट दें।

राष्ट्रीय जलमार्ग के लिए विश्व बैंक से 375 मिलियन डॉलर का ऋण

                  देश की महत्वाकांक्षी जलमार्ग परियोजना को आगे बढ़ाने और नियत समय में इसे पूरा करने की दिशा में जलमार्ग विकास परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय जलमार्ग -1 की क्षमता में वृद्धि करने के लिए विश्व बैंक ने 375 मिलियन डॉलर की धनराशि को मंज़ूरी दी है। 

             सरकार हल्दिया से लेकर वाराणसी (1390 किलोमीटर) तक जलमार्ग विकास परियोजना के अंतर्गत 5369 करोड़ रुपये की लागत से एनडब्ल्यू-1 (गंगा नदी) को विकसित कर रही है। इस परियोजना को पूरा करने के लिए विश्व बैंक से तकनीकी एवं वित्तीय सहायता ली जा रही है। यह परियोजना 1500-2000 डीडब्ल्यूटी की क्षमता वाले जहाजों के व्यावसायिक नेविगेशन को सक्षम करेगी। परियोजना के अंतर्गत, वाराणसी (उत्तर प्रदेश), साहिबगंज (झारखंड) और हल्दिया (पश्चिम बंगाल) में तीन बहुआयामी टर्मिनल स्थापित किए जाएंगे। 

                   वहीं दूसरी ओर कालुघाट और गाज़ीपुर में दो अंतर-मॉडल टर्मिनल, पांच रॉल ऑफ रॉल ऑन टर्मिनल (आरओ-आरओ), वाराणसी, पटना, भागलपुर, मुंगेर, कोलकाता और हल्दिया में नौका सेवा का विकास, और पोत मरम्मत और रख-रखाव की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वाराणसी एवं साहिबगंज में बहु-मॉडल टर्मिनल और फरक्का में नवीन नेविगेशन लॉक को निर्मित करने के लिऑए अनुंबध किए जा चुके हैं, और इन साइटों पर काम शुरू किया जा चुका है, जबकि हल्दिया में बहु-आयामी टर्मिनल का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। 

                 साहिबगंज में बनने वाले बहु-आयामी टर्मिनल की आधारशिला 06 अप्रैल 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रखी थी। अगस्त 2016 में सड़क परिवहन, राजमार्ग और जहाज़रानी मंत्री नितिन गडकरी ने वाराणसी में बनाए जाने वाले बहु-आयामी टर्मिनल की आधारशिला रखी थी। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना भारत में पहली बार एनडब्ल्यू-1 पर गंगा सूचना सेवा प्रणाली को स्थापित करने के लिए आईडब्ल्यूए को सक्षम करेगी। नदी सूचना प्रणाली (आरआईएस) उपकरण, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर आधारित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) संबंधित सेवाएं हैं, जिसे अंतर्देशीय नेविगेशन में यातायात और परिवहन प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

              राष्ट्रीय जलमार्ग – 1 राष्ट्रीय महत्व का जलमार्ग है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरता है। यह इलाहाबाद, वाराणसी, गाज़ीपुर, भागलपुर, पटना, हावड़ा, हल्दिया और कोलकाता के प्रमुख शहरों सेवा में अग्रसर है और गंगा से सटे क्षेत्रों की औद्योगिक ज़रूरतों को पूरा करने में योगदान देता है। इस क्षेत्र में रेल और सड़क गलियारे काफी अधिक भरे हुए हैं। इसलिए, एनडब्ल्यू -1 का विकास, परिवहन के एक वैकल्पिक, व्यवहार्य, आर्थिक, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल तरीके की सुविधा प्रदान करेगा।

देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में कमी 

              देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 46.06 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 प्रतिशत है। 13 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के अंत में यह दर 31 प्रतिशत थी। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 133 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 106 प्रतिशत है। 

           इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। 

             इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.50 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 25 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 22 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 30 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है, लेकिन पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से यह कमतर है।

               पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.68 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 46 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 32 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 32 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। 

               पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 9.81 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 36 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 19 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 35 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

              मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 17.43 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 41 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 29 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 26 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

               दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 5.61 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 11 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 14 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 26 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कमतर है, और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है। 

         पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश,  उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), और तेलंगाना शामिल हैं। इसी अवधि के लिए पिछले साल की तुलना में कम संग्रहण करने वाले राज्यों में हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं।

डिजिटल लेनदेन : तेल ईंधन खरीदने वाले ग्राहकों को 0.75 फीसदी छूट

              पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के लिए सांसदों की सलाहकार समिति ने श्रीनगर में एक बैठक का आयोजन किया। ‘भुगतान के डिजिटल माध्यम – नकदरहित लेनदेन को प्रोत्साहन’ विषय पर एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दी गई। 

           नकदरहित लेनदेन के ज़रिए भुगतान के डिजिटल माध्यमों को प्रोत्साहित करने की दिशा में सांसदों अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। बैठक की अध्यक्षता करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र प्रधान ने परामर्श समिति के सभी सदस्यों का स्वागत किया। प्रधान ने ईंधन केन्द्रों पर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय एवं तेल विपणन कंपनियों द्वारा किए गए प्रयासों पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन अभियान में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मुख्य भूमिका निभाई है। ऐसा करने के लिए एक तीन आयामी रणनीति अपनाई गई, जिसमें ईंधन केन्द्रों पर डिजिटल भुगतान के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना, व्यापक जागरूकता अभियान चलाना और डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों को लाभांवित करना आदि शामिल हैं।

                    उन्होंने बताया कि वर्तमान में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से संबद्ध 38,128 रिटेल आउटलेट (खुदरा केन्द्र) पर प्वाइंट ऑफ सेल अर्थात पीओएस की सुविधा है और 86 फीसदी से भी अधिक रिटेल आउटलेटों पर डिजिटल लेनदेन से संबंधित आधारभूत सुविधाएं हैं। देशभर में चार मुख्य भाषाओं में करीब 35,000 ग्राहक जागरूरकता अभियान अब तक आयोजित किए जा चुके हैं। प्रधान ने कहा कि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तेल विपणन कंपनियां नकदरहित माध्यम से ईंधन खरीदने वाले ग्राहकों को 0.75 फीसदी की छूट उपलब्ध करा रही हैं। 72,000 से अधिक ई-वैलेट भी शुरू किए जा चुके हैं। प्रधान ने बताया कि दैनिक नकदरहित लेनदेन 150 करोड़ रुपये प्रतिदिन से बढ़कर 400 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर पहुंच गया है। 

              उन्होंने तेल एवं गैस संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए एमओपीएनजी ई- सेवा नामक एक समर्पित सोशल नेटवर्किंग मंच के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि स्वच्छ पेट्रोल पम्प एप एक ऐसी पहल है, जहां लोग ईंधन केन्द्रों (पेट्रोल पम्प आदि) पर बने शौचालयों की सफाई के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया (फीडबैक) दर्ज़ करा सकते हैं। मंत्री ने दोहराया कि मंत्रालय रविवार के दिन पेट्रोल पम्पों को बंद रखने की पेट्रोल पम्प संचालकों के एक धड़े की किसी भी पहल को न तो मंज़ूरी देता है और न ही इसकी पुष्टि करता है। 

             उन्होंने कहा कि मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत पीसीआरए और तेल विपणन कंपनियों द्वारा ईंधन संरक्षण को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। प्रधान ने बहुमूल्य सुझाव और सहयोग के लिए सलाहकार समिति के सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि सम्माननीय सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर गंभारता से विचार किया जाएगा और डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की दिशा में इन महत्वपूर्ण सुझावों की मदद ली जाएगी। 

             इस बैठक में भानु प्रताप सिंह वर्मा, चंद्रकांत भौराओ खैरे, हरिंदर सिंह खालसा, जनक राम, मुरली मोहन मगन्ती, नरसिम्हन थोटा, निनोंग अरिंग, सत्य पाल सिंह, रामदास चंद्रभानजी टाडस, डॉ. रविन्द्र बाबू पैंडुला, कर्नल (सेवानिवृत्त) सोना राम चौधरी, तमराध्वाज साहु, तारिक अनवर, विक्रम उसेन्दी, रन्जीब बिस्वाल और रवि प्रकाश वर्मा आदि संसद सदस्य शामिल हुए।

भारत-अमरीका के आर्थिक संबंधों की मजबूती

            केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने वाशिंगटन डीसी में अमरीकी वाणिज्य सचिव विलबर रॉस के साथ एक द्विपक्षीय बैठक की।

           बैठक के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ भारत के राजदूत नवतेज सरना और आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास भी उपस्थित थे। नेताओं ने भारत-अमरीका के आर्थिक संबंधों की मजबूती और वर्षों से चले आ रहे द्विदलीय सहयोग पर जोर दिया। वित्त मंत्री ने अमरीकी वाणिज्य सचिव को पिछले तीन वर्षों में भारत में प्रारंभ किए गए महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों और भारतीय अर्थव्यवस्था के सामर्थ्य की जानकारी दी।

              अमरीकी वाणिज्य सचिव रॉस ने जीएसटी पर कानून बनाने के लिए वित्त मंत्री को बधाई दी। वित्त मंत्री ने हाल ही के कार्यकारी आदेशों के तहत एच -1 बी वीजा व्यवस्था को सख्त बनाने की संभावना को देखते हुए यह मुद्दा भी उठाया। उन्होंने अमरीकी अर्थव्यवस्था में कुशल भारतीय पेशेवरों के उल्लेखनीय योगदान की चर्चा करते हुए आशा व्यक्त की है कि ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पूर्व अमरीकी प्रशासन इस पहलू को ध्यान में रखेगा।

इंस्‍टाग्राम उभरते नए भारत की कहानी

           सूचना और प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि सोशल मीडिया सरकार की संचार आवश्‍यकताओं तथा प्रधानमंत्री के ‘न्‍यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के विजन को क्रियान्‍वित करने का शक्‍तिशाली माध्‍यम है। 

        यह सुधारकारी परिवर्तन लाने का महत्‍वपूर्ण माध्‍यम और उभरते नए भारत के लिए उत्‍प्रेरक है। सरकार के लिए यह संचार प्‍लेटफॉर्म इंस्‍टाग्राम इंद्रधनुष की तरह है जिसमें नए उभरते भारत की तस्‍वीर देखी जा सकती है। सूचना और प्रसारण मंत्री यहां बेहतर सरकारी संचार के लिए इंस्टाग्राम पर कार्यशाला का उद्घाटन कर रहे थे। इस अवसर पर सूचना और प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्द्धन राठौर, पीआईबी के प्रधान महानिदेशक फ्रैंक नोरोन्‍हा तथा मंत्रालय और पीआईबी के वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्‍थित थे। 

               इंस्‍टाग्राम की भूमिका की चर्चा करते हुए नायडू ने कहा कि यह माध्‍यम नागिरकों तथा अन्‍य हितधारकों से विजुअल रूप से जुड़ने का सरकार के लिए उचित स्‍थान बन गया है। पुरानी कहावत एक तस्‍वीर हजार शब्‍दों से मूल्‍यवान होती हैं का उदारहरण देते हुए उन्‍होंने कहा कि विज्‍यूअल तस्‍वीरों के माध्‍यम से त्‍यौहारों, संस्‍कृतिक आचार, क्षेत्र विशेष परिधान से भारत के विविध रंगों को देखा जा सकता है। उन्‍होंने बल देकर कहा कि प्रधानमंत्री स्‍वयं सोशल मीडिया पर अत्‍यधिक सक्रिय रहते हैं और फेसबुक, ट्वीटर तथा इंस्‍टाग्राम पर विश्‍व के सबसे अधिक फॉलो किए जाने वाले नेताओं में से हैं। 

             शासन संचालन में सोशल मीडिया के अवसरों और चुनौतियों की चर्चा करते हुए नायडू ने कहा कि सोशल मीडिया नीति निर्माताओं को कार्रवाही योग्‍य सूचना और इनपुट प्रदान करता है ताकि बेहतर निर्णय लिए जा सकें। दूसरी ओर सोशल मीडिया ने पूरे विश्‍व में नागरिकों की सरकार से अपेक्षाओं को बढ़ा दिया है। नए डिजिटल युग में नागरिकों को महज सूचना से संतोष नहीं, बल्‍कि सूचना प्रदान करने की शीघ्रता और सूचना देने के तरीके से नागरिक संतुष्‍ट होते हैं। आज सोशल मीडिया कार्रवाही को आकार दे रहा है। समाचार चैनलों तथा समाचार पत्रों में विमर्श का विषय तय कर रहा है। 

            उन्‍होंने कहा कि नए विश्‍व में लोग जिस तरह से एक-दूसरे से संवाद कर रहे हैं, उसे देखते हुए सरकार को सफल होने के लिए नए तरीके से संचार के प्रयास करने चाहिए। सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि भारत सरकार कामकाज में सोशल मीडिया के सृजनात्‍मक और प्रणालीगत उपयोग के लिए संस्‍थागत रूप देने की दिशा में काम कर रही है। कार्यशाला का आयोजन प्रेस इंफॉरमेशन ब्‍यूरो तथा इंस्‍टाग्राम की ओर से संयुक्‍त रूप से किया गया। इंस्‍टाग्राम ने एशिया में पहली बार ऐसी कार्यशाला का आयोजन किया है।

            कार्यशाला का उद्देश्‍य इंस्‍टाग्राम प्‍लेटफॉर्म की विशेषताओं और एप्‍लीकेशनों से सरकारी अधिकारियों को परिचित कराना है ताकि सोशल मीडिया पर सरकार बेहतर संवाद कर सके और पहुंचे।