Sunday, 2 April 2017

रांची में रवींद्र भवन व हज घर की आधारशिला

                               राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने झारखंड की राजधानी रांची में रवींद्र भवन व हज घर की आधाशिला रखी। 

           इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि रवींद्र भवन व हज घर की आधारशिला रखने के अवसर पर रांची आने पर उन्‍हें बहुत खुशी हो रही है। यह वास्‍तव में हर्ष की बात है कि गुरुदेव और उनके परिवार ने राज्‍य पर लंबे समय तक न मिटने वाला छापा छोड़ा है जिसे रवींद्र भवन के निर्माण के माध्‍यम से मनाया जाएगा और याद रखा जाएगा। राष्‍ट्रपति ने कहा कि पूरे पूर्वी क्षेत्र और झारखंड के साथ उनका संबंध पिछले कई दशकों तक रहा। झारखंड उनके गृह राज्‍य पश्चिम बंगाल का पड़ोसी राज्‍य है। 

               पिछले सदी में अविभाजित बंगाल बिहार, झारखंड, ओडिशा और असम बंगाल प्रेसीडेंसी के लंबे समय तक हिस्‍सा रहे हैं। इस क्षेत्र की सांझी विरासत है जो स्‍वतंत्रता के बाद भी उस तरह साकार हो रही है। उन्‍होंने कहा कि हमारे मुस्लिम भाइयों के लिए मक्‍का की यात्रा उनके जीवन का सपना होता है। यह झारखंड सरकार का सराहनीय कदम है कि उसने  हज तीर्थयात्रियों को सुविधा प्रदान करने के लिए ‘हज  घर’ बनने की परियोजना लाई है। उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें विश्‍वास है कि यह हज घर इस क्षेत्र अैर राज्‍य के हज तीर्थयात्रियों को आवश्‍यक सूहूलियत प्रदान करेगा।

दक्षिण एशिया के आर्थिक सहयोग के वित्‍त मंत्रियों की बैठक

             केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली 03 अप्रैल,2017 को राजधानी के ताज पैलेस  के  शाहजहां  हॉल में दक्षिण एशिया के उप क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग (एसएएसईसी) के वित्‍त मंत्रियों की बैठक की अध्‍यक्षता करेंगे। 

           इस बैठक में भारत सहित बांग्‍लादेश, भूटान, मालदिव, म्‍यांमार, नेपाल और श्रीलंका के सात वित्‍त मंत्रियों के साथ ही इन देशों और एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के अधिकारी भी भाग लेंगे। दक्षिण एशिया के उप क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग (एसएएसईसी) की पहल के हिस्‍से के रूप में इस उप क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए सदस्‍य देशों ने एसएएसईसी विजन का विकास किया है। इस बैठक के दौरान इस विजन का केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली द्वारा शुभारंभ किया जाएगा।

                इसके बाद मंत्रियों के संयुक्‍त वक्‍तव्‍य पर विचार किया जाएगा। यह कार्यक्रम  इस उप क्षेत्र में सदस्‍य देशों को विचारों के आदान- प्रदान करने तथा बेहतर सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा। म्‍यांमार ने एसएएसईसी कार्यक्रम में सातवें सदस्‍य के रूप में इस बैठक में हिस्‍सा ले रहा है। इस कार्यक्रम के दौरान उसका आधिकारिक रूप से स्‍वागत किया जाएगा। इस कार्यक्रम में वित्‍त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिनाथ दास स्‍वागत भाषण करेंगे। इस प्रयास को एडीबी समर्थन दे रहा है। इस मौके पर एडीबी के उपाध्‍यक्ष भी लोगों को संबोधित करेंगे।

मिजोरम उदय में शामिल होने वाला 27 वां राज्‍य

           उदय के माध्‍यम से राज्‍य को कुल 198 करोड़ रुपए का लाभ होगा। उज्‍ज्‍वल डिस्‍कॉम अशुरेन्स योजना (यूडीएवाई) के तहत भारत सरकार और  मिजोरम सरकार के बीच राज्‍य के बिजली वितरण विभाग के परिचालन में सुधार के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए गए हैं।

         मिजोरम के इस समझौता ज्ञापन के हस्‍ताक्षर करने के साथ ही इस योजना में शामिल होने वाले राज्‍यों / केन्‍द्र शासित प्रदेशों की संख्‍या अब 27 हो गई है। इस बदलाव की अवधि में सस्‍ता कोष ,एटी एवं सी तथा पारेषण लॉस में कमी, ऊर्जा दक्षता में हस्‍तक्षेप आदि के माध्‍यम से उदय में शामिल होने से मिजोरम को करीब 198 करोड़ रुपए का कुल शुद्ध लाभ होगा। 

              यह समझौता ज्ञापन राज्‍य के बिजली वितरण विभाग के परिचालन की दक्षता में आवश्‍यक वितरण ट्रांसफॅार्मर मीटरिंग, उपभोक्‍ता सूचकांक और  लॉस की जीआईएस मैपिंग, ट्रांसफॅार्मरों के बदलाव और इनमें सुधार, अधिक खपत करने वाले उपभोक्‍ताओं के लिए र्स्‍माट मीटरिंग, फीडर ऑडिट आदि , एटी एवं सी लॉस और पारेषण लॉस में कमी के अलावा आपूर्ति लागत और समायोजन के बीच की खाई के समापन के माध्‍यम से सुधार लाएगा। इस अवधि के दौरान एटी एवं सी लॉस और पारेषण लॉस में क्रमश: 15 और 2.5 प्रतिशत तक कमी से करीब 166 करोड़ रुपए का अतिरक्ति राजस्‍व मिल सकता है।

पशुधन स्वास्थ्य रक्षा के लिए अनेक कदम

            केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि केन्द्र सरकार ने पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अनेक कदम उठाए हैं जिसका लाभ किसानों को हो रहा है।

              उन्होंने कहा कि पशुओं का स्वास्थ्य किसान हित से जुड़ा है, अगर पशु स्वस्थ होंगे तो किसानों की आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार की पहल का ही नतीजा है कि देश दुध उत्पादन में नंबर वन पर बना हुआ है। अंडा उत्पादन में तीसरे स्थान पर आ पहुंचा है। कृषि मंत्री ने यह बात भुवनेश्वर के अरुगुल जटनी स्थित अंतरराष्ट्रीय खुरपका एवं मुंहपका रोग केन्द्र- इंटरनेशनल सेंटर फॉर एफएमडी (आईसीएफएमडी) के उदघाटन के मौके पर कही। कृषि मंत्री ने इस मौके पर माना कि वायरस जनित खुरपका और मुंहपका रोग जैसी बीमारियां पशुधन के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है लेकिन साथ में उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार खुरपका एवं मुंहपका रोग के रोकथाम का पूरा प्रयास कर रही है।

                पशुओं के स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत खुरपका एवं मुंहपका रोग के लिए बेहतर प्रबंधन अपनाकर वर्ष 2013 की तुलना में 2015 में 377 प्रकोपों से घटाकर 109 पर ला दिया है। कृषि मंत्री ने बताया कि देश में पहली बार पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पशुधन संजीवनी-नकुल स्वास्थ्य पत्र योजना शुरू की गयी है। साथ ही, पशु यूआईडी द्वारा पशुओं की पहचान और राष्ट्रीय डाटा बेस बनाया जा रहा है। देश में पहली बार राष्ट्रीय बोवाइन प्रजनन एवं डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत देशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक नई पहल ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ की 500 करोड़ रूपये के आवंटन के साथ दिसम्बर 2014 में शुरुआत की गई। इस मिशन के तहत 14 गोकुल ग्रामों की स्थापना की जा रही है।

                        देशी नस्लों के सुधार लिए राष्ट्रीय बोवाइन जेनॉमिक केंद्र की स्थापना की गयी है। सरकार ने ई पशुधन हाट पोर्टल की भी शुरुआत की है। कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि जैव सुरक्षा और जैव नियंत्रण की सुविधाओं के साथ भुवनेश्वर की यह अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला वैश्विक भागेदारी और सार्क क्षेत्र में इस रोग के नियंत्रण में अहम भूमिका अदा करेगी। उन्होंने इस मौके पर इस प्रयोगशाला से जुड़े वैज्ञानिकों और अधिकारियों की उनके अच्छे काम के लिए सराहना की। कृषि मंत्री ने इसके बाद भुवनेश्वर के ओडि़शा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय में कृषि विज्ञान केन्‍द्र का शिलान्यास किया।

                 इस मौके पर केन्‍द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान, ओडि़शा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. पसुपालक भी उपस्थित थे। इस मौके पर कृषि मंत्री ने कहा कि ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय द्वारा आईसीएआर के 100 प्रतिशत वित्‍तीय सहयोग के साथ 31 कृषि विज्ञान केन्‍द्र स्‍थापित किए गए हैं जो कि ऑन-फार्म टैस्टिंग, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, कौशल उन्‍मुखता प्रशिक्षण, प्रक्षेत्र दिवस, किसान मेला आदि जैसी गतिविधियों के साथ बहुउद्देशीय प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण के अग्रदूत के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खोर्दा जिले में चलाया जा रहा कार्यक्रम का उद्देश्‍य भागीदारी के जरिए बदलाव लाकर फार्म उत्‍पादकता और लाभप्रदता में सुधार लाना है। 

                  कृषि उद्यम इनोवेशन में युवा शक्ति को आकर्षित करने के लिए राज्‍य के नयागढ़ जिले में आर्या परियोजना चलाई जा रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के माध्‍यम से भारत सरकार से प्रत्‍येक कृषि विज्ञान केंद्र के लिए रूपये 144.38 लाख के वित्‍तीय परिव्‍यय के साथ चार कृषि विज्ञान केंद्रों - पुरी, बोलानगीर, बरहामपुर में गंजाम- क्ष्क्ष् और जोशीपुर में मयूरभंज- क्ष्क्ष् के प्रशासनिक भवनों का यहां शिलान्‍यास करते हुए उन्हें बहुत खुशी हो रही है।

              कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह इसके बाद केन्‍द्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्‍थान (सीआईएफए), भुवनेश्‍वर के 31 स्थापना दिवस में शामिल हुए। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने संस्थान के अधिकारियों और समस्त कर्मचारियों को संस्थान के 31 स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि अपने काम की वजह से  मीठा जल जीवपालन के क्षेत्र में राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर इस संस्‍थान को एक विशेष पहचान मिली है। संस्‍थान की स्‍थापना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली के तत्‍वावधान में दिनांक 1 अप्रैल, 1987 को हुई थी।

               कृषि मंत्री ने इसके बाद भुवनेश्वर के आईडीसीओ एक्जिविशन ग्राउंड मैदान में उत्‍कल चेम्‍बर्स आफ कामर्स एंड इंडस्‍ट्री यूसीसीआई एक्‍सपो 2017 में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राष्‍ट्रीय कृषि नीति में अगले दो दशकों में भारतीय कृषि की अदोहित विकास क्षमता का  उपयोग करने, त्‍वरित कृषि विकास को समर्थन देने के लिए ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने तथा मूल्‍य परिवर्धन को बढ़ावा देने, कृषि व्‍यवसाय के विकास में तेजी लाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने, किसानों और कृषि कामगारों तथा उनके परिवारों के लिए जीवन यापन स्‍तर में सुधार करने, शहरी क्षेत्रों में पलायन को हतोत्‍साहित करने और आर्थिक उदारीकरण और वैश्‍वीकरण से उत्‍पन्‍न चुनौतियों से निपटने की व्‍यवस्‍था है।

भारत सहिष्‍णुता की भूमि : राष्‍ट्रपति

                  राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत सहिष्‍णुता की भूमि है। वे पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भारतीय प्रबंधन संस्‍थान के 52 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।  

            उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें देश के अग्रणी प्रबंधन शिक्षण संस्‍थान  के 52 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए हर्ष हो रहा है। उन्‍हें यह देख कर भी खुशी है कि परिसर ने अपना विशेष आकर्षण को बनाए रखा है। इसके साथ ही सुविधाओं को बढ़ाने और बुनियादी संरचना को और सुदृढ़ करने का काम चल रहा है। आईआईएम की स्‍थापना 14 नवंबर ,1961 को पंडित जवाहर लाल नेहरू के विजन को आकार देने के लिए किया गया था। 

              आईआईटी और आईआईएम की अभिकल्‍पना पंडित नेहरू द्वारा इंजीनियरिंग और प्रबंधन की शिक्षा में उत्‍कृष्‍ट राष्‍ट्रीय संस्‍थान के रूप में उच्‍च क्षमता के मानव पूंजी बनाने के लिए की गई थी। इन वर्षों के दौरान आईआईएम कोलकाता उत्‍कृष्‍टता के इस मार्ग पर चलने का प्रयास किया है। उन्‍होंने कहा कि हमारे देश के संस्‍थानों का माहौल शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार से हिंसा रहित होना चाहिए। भारत के लोगों को बहस करने वाला कहा जा सकता है लेकिन उन्‍हें कभी भी अ‍सहिष्‍णु नहीं कहा जा सकता। प्रचीन भारत में नालंदा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसे उच्‍च शिक्षा के संस्‍थान थे जो सही मायने विश्‍व सभ्‍यता के विचार एवं अभिकल्‍पना के संगम थे। 

              राष्‍ट्रपति ने गांधी जी का उदाहरण देते हुए कहा, मैंने नहीं चाहता कि मेरा घर चारों ओर दीवारों से घिरा हो और खिड़कियां भरीं हुई हैं। मैं चाहता हूं कि दुनिया की सभी संस्‍कृतियां मेरे घर में यथासंभव मुक्‍त रूप से विचरण करें लेकिन मैं किसी के द्वारा अपने पैर के उखाड़ दिए जाने को स्‍वीकार नहीं करूंगा। उन्‍होंने कहा कि अगर हमारे पैर मजबूती से जमीन पर हैं तो , हमारे पैर कोई भी बाहरी विचार उखाड़ नहीं सकता। भारत सहिष्‍णुता की धरती है।

       हम अपनाते हैं, स्‍वीकर करते हैं ओर अपने में समावेश कर लेते हैं लेकिन कभी भी किसी को खारिज नहीं करते। आइए बहस को होने दीजिए, असहमति और विरोधाभास के बावजूद कभी असहिष्‍णु न हों। राष्‍ट्रपति ने कहा कि उन्‍होंने हमेशा इस पर बल दिया है कि हमारे देश के उच्‍चतर शैक्षणिक संस्‍थान वैश्विक रैंकिंग में हमेशा स्‍थान प्राप्‍त करें। उन्‍हें इस बात की खुशी है कि इस मामले में कई संस्‍थानों को उनका उचित स्‍थान मिला है।  

पवन ऊर्जा : 5400 मेगा वाट की रिकार्ड वृद्धि

              नवीन और नवीकरणीय  ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई ) ने वर्ष 2016-17 में 5400 मेगा वाट की वृद्धि कर एक और नया रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 206-17 के दौरान 4000 मेगावाट वृद्धि का लक्ष्‍य रखा गया था। 

           इस वर्ष पिछले साल हुई 3423 मेगावाट की वृद्धि को पार की लिया गया है। वर्ष 2016-17 के दौरान पवन ऊर्जा में वृद्धि में आंध्र प्रदेश का 2190 मेगावाट , इसके बाद गुजरात का 1275 मेगावाट और कर्नाटक का 882 मेगावाट का येागदान रहा। इसके साथ ही वर्ष 2016-17 में मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, तमिलनाडु, महाराष्‍ट्र,तेलांगना और केरल का योगदान क्रमश 357 मेगावाट, 288 मेगावाट, 262 मेगावाट,118 मेगावाट, 23 मेगावाट और 8 मेगावाट का रहा। 

            वर्ष 2016-17 के दौरान नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा  पवन ऊर्जा के क्षेत्र में बोली लगाने की शुरूआत सहित रिपावरिंग नीति, पवन-सौर संकर नीति का मसौदा बनाने, नई पवन ऊर्जा परियोजना लगाने के लिए दिशा निर्देश की नीतिगत पहल की गई।