Tuesday, 2 May 2017

इसराइल के राष्‍ट्रीय दिवस पर राष्‍ट्रपति का संदेश

           राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसराइल के राष्‍ट्रीय दिवस के अवसर पर इसराइल सरकार और जनता को अपनी शुभकामनाएं और बधाई दी है।

            इसराइल के राष्‍ट्रपति महामहिम रियुवेन रिवलिन को दिए गये अपने संदेश में राष्‍ट्रपति ने कहा, ‘‘आपके राष्‍ट्रीय दिवस के अवसर पर इसराइल और इसराइल के मैत्रीपूर्ण लोगों को मुझे भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से शुभकामनाएं देने में बेहद खुशी का अनुभव हो रहा है।’’ राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत और इसराइल अपने राजनयिक संबंधों के 25 वर्ष पूरे होने का जश्‍न मना रहे हैं और इस अवसर पर हम अपने साझा हितों के सभी क्षेत्रों में अपनी सरकारों और लोगों के बीच घनिष्‍ठ सहयोग की कामना करते हैं। 

           पिछले वर्ष नवम्‍बर में भारत की आपकी ऐतिहासिक यात्रा ने रक्षा, जल संसाधन विकास, कृषि, डेयरी कृषि पहल और वैज्ञानिक अनुसंधान तथा विकास सहित विभिन्‍न क्षेत्रों में हमारे संयुक्‍त प्रयासों के लिए नये अवसर खोले।

         राष्‍ट्रपति ने विश्‍वास जताया कि आने वाले वर्षो में दोनों देशों के लोगों के लाभ के लिए द्वीपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाईयों पर ले जाने के लिए हमारा सहयोग जारी रहेगा। राष्‍ट्रपति ने व्‍यक्‍तिगत रूप से इसराइल के राष्‍ट्रपति के बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य की भी कामना की।

पोलैंड के राष्ट्रीय दिवस पर राष्ट्रपति का संदेश

          राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पोलैंड के राष्‍ट्रीय दिवस के अवसर पर पोलैंड सरकार और उनकी जनता को अपनी शुभकामनाएं और बधाई दी है।

        पोलैंड के राष्‍ट्रपति महामहिम एंदरजेज सेबेस्‍टियन डूडा को दिए गये अपने संदेश में उन्‍होंने कहा, “पोलैंड के राष्ट्रीय दिवस पर अवसर पर आपको और पोलैंड की जनता को भारत सरकार और भारत की जनता की ओर से ढेरों शुभकामनाएं एवं बधाईयां। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मित्रता है और यह समय की कसौटी पर खरी उतरी है। भारत सभी क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच द्वीपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

          दोनों देशों आपसी आर्थिक सहयोग में वृद्धि के माध्‍यम से, द्विपक्षीय लाभप्रद आपसी साझेदारी की प्रबल क्षमता को साकार रूप देने में सक्षम होंगे। पोलैंड द्वारा हमारे प्रमुख कार्यक्रमों, विशेष रूप से 'मेक इन इंडिया' और 'इनवेस्ट इंडिया' में उत्साह दिखाया जा रहा है। मुझे उम्मीद है आने वाले दिनों में हमारे द्वपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। महामहिम आपके स्‍वास्‍थ्‍य और आपकी खुशहाली तथा पोलैंड की मैत्रीपूर्ण जनता की प्रगति और समृद्धि के लिए मेरी शुभकामनाएं स्‍वीकार करें।”

तुर्की की कंपनियों का भारत में निवेश पांच बिलियन डॉलर

            राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्‍ट्रपति भवन में तुर्की गणराज्‍य के राष्‍ट्रपति महामहिम रिसेप तईप एर्डोगन और श्रीमती एमिन एर्डोगेन का स्‍वागत किया। 

           उन्‍होंने उनके सम्‍मान में एक प्रीतिभोज का भी आयोजन किया। राष्‍ट्रपति ने तुर्की के राष्‍ट्रपति की भारत की उनकी पहली राजकीय यात्रा का स्‍वागत करते हुए अक्‍टूबर, 2013 में उनकी तुर्की की यात्रा का स्‍मरण किया। राष्‍ट्रपति ने विश्‍वास जताया कि राष्‍ट्रपति एर्डोगन की राजकीय यात्रा भारत और तुर्की के बीच द्विपक्षीय सहयोग को नई प्रेरणा देगी। राष्‍ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद हमारे समाजों के लिए एक बड़ा खतरा है। भारत एक स्‍वर से आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा करता है। हमारा विश्‍वास है कि अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय को इस खतरा का सामना करने के लिए घनिष्‍ठतापूर्वक आपस में सहयोग करना चाहिए।

             उन्‍होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय द्वारा सामूहिक, समन्वित कार्रवाई अब टाली नहीं जानी चाहिए। राष्‍ट्रपति ने कहा कि उन्‍हें ये जान कर बहुत खुशी हुई है कि भारत और तुर्की के बीच पिछले 10 वर्षों के दौरान द्विपक्षीय व्‍यापार कारोबार कई गुना बढ़ गया है। वर्तमान में यह लगभग पांच बिलियन डॉलर के स्‍तर पर है। उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार कारोबार क्षमता इससे कहीं अधिक है। हमारे व्‍यावसायिक समुदाय एवं दोनों देशों के निवेशकों को वर्तमान अवसरों का लाभ उठाने के लिए सक्रियतापूर्वक एकजुट होकर काम करना चाहिए।

                इसके बाद, अपने प्रीतिभोज संबोधन में राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत और तुर्की के बीच रिश्‍ते दो आधुनिक और स्‍वतंत्र देशों के रूप में हमारे राजनयिक संबंधों की स्‍थापना से बहुत पहले से बने हुए हैं। उन्‍होंने कहा कि सदियों पहले से और अपने साझा इतिहास के जरिए यह रिश्‍ता बना है और प्रगाढ़ हुआ है। भारतीय कला और स्‍थापत्‍य, हमारी भाषा, राजनीतिक और सैन्‍य संगठनात्‍मक संरचना, जिसका विकास हमारे देश में हुआ, हमारे कुछ कानून, परिधान, रीति-रिवाज और पाक कला में तुर्की का योगदान बेमिसाल है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि एक वैश्वीकृत दुनिया में दो उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं के रूप में हम वर्तमान अवसरों का लाभ उठाने के लिए अपने आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की कामना करते हैं। 

             भारत के हाल के आर्थिक सुधारों और प्रमुख पहलों ने हमें एक आकर्षक व्‍यवसाय गंतव्‍य बना दिया है। उन्‍होंने कहा कि भारत, तुर्की की कंपनियों द्वारा भारत में निवेश करने, विशेष रूप से ढांचागत क्षेत्र में जहां उनकी असाधारण विशेषज्ञता है, का स्‍वागत करता है। इसी प्रकार, हम भारतीय कंपनियों को भी प्रोत्‍साहित करते हैं कि वे तुर्की में संभावनाओं की तलाश करें।

विद्या वीरता अभियान की शुरूआत

              मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सशस्‍त्र बलों द्वारा अत्‍यंत कठिनाई में राष्‍ट्र की सेवा करने में उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। 

         मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि स्‍वतंत्रता के बाद यही हमारे असली नायक हैं, जबकि स्‍वतंत्रता सेनानियों ने स्‍वतंत्रता के लिए अत्‍याचारों का मुकाबला किया और अपना बलिदान दिया। सत्‍याग्रह के समय से ही स्‍वतंत्रता सेनानी हमारे स्‍वभाविक महानायक रहे हैं, जिनके प्रयासों से भारत को विदेशी शासन से मुक्‍ति मिली।

              जावड़ेकर ने कहा कि इस अभियान के जरिए देश भर के विश्‍वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘वीरता की दीवार’ बनाई जाएगी। इसके लिए स्‍वैच्‍छिक आधार पर छात्र और अध्‍यापक वित्‍त का प्रबंध करेंगे। उन्‍होंने कहा कि इस दीवार का आकार 15ज्र्20 फीट होगा, जिस पर सभी 21 परमवीर चक्र विजेताओं के पोट्रेट लगाए जाएंगे। मंत्री ने आशा व्‍यक्‍त की कि इससे युवाओं में देशभक्‍ति की भावना संचारित होगी। मंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजन से हमारे विश्‍वविद्यालयों और कॉलेजों का माहौल बदलेगा। इसका उद्देश्‍य हमारे युवाओं में देशभक्‍ति की भावना को दोबारा जीवित करना है। 

               उन्‍होंने कहा कि हम किसी को देशभक्‍ति की सीख देने में रुचि नहीं रखते, क्‍योंकि यह स्‍वत: स्‍फूर्त भावना होती है, परंतु इसको दोबारा उभारने की जरूरत है। जावड़ेकर ने कहा कि हम इसे किसी पर थोपना नहीं चाहते। आयोजन में विश्‍वविद्यालयों के कई कुलपति, विद्वान, पूर्व सैनिक और स्‍कूली बच्‍चे उपस्‍थित थे। परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार और योगेंद्र सिंह यादव ने अपने युद्धकालीन स्‍मृतियों और अनुभवों को उपस्‍थितजनों के साथ साझा किया और युवाओं में देशभक्‍ति की भावनाओं का निरूपण किया। समारोह को रक्षा राज्‍य मंत्री डॉ. सुभाष रामाराव भामरे और आयोजन के संयोजक तरुण विजय ने भी संबोधित किया। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यहां विद्या वीरता अभियान की शुरूआत की। 

             इस अवसर पर रक्षा राज्‍यमंत्री डॉ. सुभाष रामाराव भामरे, लेखक तरूण विजय, थल सेना, वायु सेना और नौसेना के वरिष्‍ठ अधिकारी क्रमश: ले.जन. सरत चंद्र, एयर मार्शल एच.एन. भागवत और रियर एडमिरल के.के. पांडेय तथा परमवीर चक्र प्राप्‍त ग्रेनेडियर संजय कुमार और सूबेदार योगेन्‍द्र सिंह उपस्‍थित थे। परमवीर चक्र विजेताओं पर फोटो पोट्रेट और पुस्‍तक भी जारी की गई और विश्‍वविद्यालयों के कुलपतियों को प्रस्‍तुत की गई।

राजस्थान को 588.34 करोड़ की सहायता

           उच्च स्तरीय समिति ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से राजस्थान को 588.34 करोड़ रुपए की सहायता स्वीकृत की है। 

          2016-17 के सूखे की स्थिति को देखते हुए राजस्थान को दी जाने वाली केन्द्रीय सहायता के बारे में एक उच्चस्तरीय समिति (एचएलसी) की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इस बैठक में दौरान केंद्रीय वित्त, कारपोरेट मामले और रक्षा मंत्री अरुण जेटली, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री एस एस अहलूवालिया, केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि और गृह, वित्त, कृषि मंत्रालय और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया। 

         समिति ने सूखा प्रभावित राजस्थान का दौरा करने वाले अंतर मंत्रालयी केन्द्रीय दल की रिपोर्ट के आधार पर प्रस्ताव की समीक्षा की। उच्च स्तरीय समिति ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से राजस्थान को 588.34 करोड़ रुपए की सहायता स्वीकृत की है।

जून से 'महाराजा एक्सप्रेस' के दो नए सर्किटों की शुरुआत

                रेलवे के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज़्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इस वर्ष अपनी शाही रेल महाराजा एक्सप्रेस के दो नए सर्किट शुरू करने का निर्णय लिया है। 

         इन दो सर्किटों को सदर्न सोजर्न और सदर्न जेवेल्स नाम दिया गया है। ये दोनों रूट पश्चिमी और दक्षिणी भारत के सभी प्रमुख गंतव्यों से होकर गुजरेंगे। सदर्न सोजर्न गोआ, हम्पी, मैसूर, एर्णाकुलम, कुमारकोम और त्रिवेंद्रम जैसे अहम गंतव्यों से होकर गुजरेगा, जबकि सदर्न जेवेल्स चेट्टिनाड, महाबलिपुरम, मैसूर, हम्पी और गोआ आदि अहम गंतव्यों से गुजरेगा। महाराजा एक्सप्रेस को पुराने ज़माने की शाही यात्रा को पुनः सजीव बनाने के तौर पर जाना जाता है। 

            यद्यपि इन दोनों ही रूटों पर नियमित रूप से यात्रा का लुत्फ इस वर्ष सितंबर 2017 से उठाया जा सकेगा, मगर घरेलू यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मानसून के मद्देनज़र जून-जुलाई 2017 से दो नई यात्राओं को इन रूटों पर शुरू करने के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। मानसून विशेष यात्राओं के लिए भारतीय रुपये के अनुसार किराया जारी किया जा चुका है। घरेलू यात्रियों को आकर्षित करने के लिए कई आकर्षक योजनाएं भी बनाई गई हैं। दो लोगों के द्वारा साझा की जाने वाली सीटों की बुकिंग के दौरान निर्धारित पूर्ण दर पर बुकिंग कराने पर दूसरे वयस्क की टिकट बुकिंग आकर्षक दर पर की जाएगी। 

               इसके अलावा, यदि कोई डीलक्स बुकिंग करता है, और उसे जूनियर स्यूट में अपग्रेड करने का मौका मिलता है तो वह दोनों श्रेणियों के बीच के कुल अंतर का 50 फीसदी पैसा देकर अपनी टिकट को जूनियर स्यूट में बदलवा सकता है। महाराजा एक्सप्रेस की मानसून स्पेशल रेल में पहली बार आंशिंक यात्रा की सुविधा शुरू की गई है। यात्रियों को निर्धारित 500 डॉलर अर्थात् 33250 रुपये प्रतिदिन, प्रतियात्री के हिसाब से दो यात्रियों के साझा करने वाली बुकिंग के लिए आंशिक यात्रा की अनुमति होगी। वहीं दूसरे ओर दो यात्रियों की क्षमता वाली साझा सीट को अकेले बुक कराने वाले यात्री 800 डॉलर अर्थात 53200 रुपये प्रतिदिन प्रतियात्री के हिसाब से आंशिक यात्रा की अनुमति होगी। किराए की इन दरों में टैक्स शामिल नहीं है। 

                  मानसून स्पेशल सदर्न सोजर्न 24 जून 2017 को मुंबई से अपनी यात्रा शुरू करेगी और गोआ, हम्पी, मैसूर, कोचिन, एलिप्पे से होते हुए त्रिवेन्द्रम में पहुंचकर अपनी यात्रा समाप्त करेगी। वहीं दूसरी ओर मानसून स्पेशल सदर्न जेवेल्स 01 जुलाई 2017 को त्रिवेन्द्रम से प्रस्थान करेगी और चेट्टिनाड, महाबलिपुरम, मैसूर, हम्पी और गोआ से होते हुए मुंबई में अपनी यात्रा का समापन करेगी। प्रत्येक यात्रा 08 दिन एवं 07 रातों की होगी। सदर्न सोजर्न की नियमित यात्रा 09 सितंबर 2017 को मुंबई से शुरू होगी और सदर्न जेवेल्स 16 सितंबर 2017 को त्रिवेन्द्रम से नियमित यात्रा शुरू करेगी। 

              इस यात्रा के दौरान प्रत्येक गंतव्य के अंतर्गत आने वाले स्मारकों और खूबसूरत जगहों के अतिरिक्त, अतिथियों को कोचिन में पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कोयर फैक्टरी का दौरा और एलेप्पी में पारंपरिक चेटिनाड भोजन के अलावा क्रूज़ में घूमने का मौका मिलेगा। बुकिंग और इस रेल के बारे में अन्य अहम जानकारियां महाराजा एक्सप्रेस की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती हैं अथवा आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। ऑनलाइन अथवा फोन के माध्यम से अतिथि बुकिंग के लिए, एक विशेष सुविधा निशुल्क मुहैया कराई जा रही है।

             इसके अंतर्गत प्रत्येक अतिथि को 250 डॉलर के प्रतिदेय वाउचर के रूप में इस सुविधा की पेशकश की जा रही है। चूंकि इन वाउचरों को नकदी के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, ऐसे में इन वाउचरों को शराब के बिल, यात्रा के दौरान की जाने वाली छोटी-मोटी खरीदारी और कपड़ा धुलाई आदि के बिल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। 

            महाराजा एक्सप्रेस का संचालन सबसे पहले वर्ष 2010 में किया गया था, तब से ही यह दुनियाभर की शाही रेलों के मामले में अग्रणी बन गई है। वर्ष 2012 के बाद यह रेल पिछले पांच वर्षों से लगातार प्रतिष्ठित अग्रणी लक्जरी ट्रेन ऑफ द वर्ल्ड अवॉर्ड को प्राप्त कर रही है। 23 डिब्बों वाली इस रेल में 88 अतिथियों की क्षमता है। यह रेल सभी पहलुओं से शाही है।

एक वर्ष में शहर अधिक स्वच्छ हुए

              18 लाख से अधिक नागरिकों के साथ किये गये अब तक के सबसे बड़े प्रतिदर्श सर्वेक्षण से पता चला है कि देश के शहरों और कस्बों में पिछले एक वर्ष के दौरान स्वच्छता की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। 

            इससे इस बात की पुष्टि होती है कि ‘स्वच्छ भारत अभियान’ से जमीनी स्तर पर बेहतर परिवर्तन के लिए लोगों की सोच बदल रही है। ‘स्वच्छ सर्वेक्षण – 2017’ के परिणामों से पुष्टि होती है कि स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत किये जा रहे प्रयासों से शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता पर सकारात्मक असर पड़ा है। शहरी विकास मंत्रालय द्वारा इस वर्ष जनवरी-फरवरी में कराये गये सर्वेक्षण में शहरों और कस्बों में स्वच्छता की स्थिति के बारे में उनकी धारणा जानने के लिए तैयार किये गये छह प्रश्नों के 18 लाख से अधिक नागरिकों ने उत्तर दिये। 

            इसके अलावा भारतीय गुणवत्ता परिषद के 421 सर्वेक्षकों ने 434 शहरों और कस्बों में 17,500 स्थानों का स्वयं जाकर निरीक्षण किया। जमीनी स्तर पर स्वच्छता का आकंलन करने के लिए तीसरे पक्ष द्वारा स्थान पर जाकर इन शहरों और कस्बों में 2680 आवासीय, 2680 व्यवसायिक और 2582 वाणिज्यिक तथा सार्वजनिक शौचालयों का निरीक्षण किया गया। शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर मंत्रालय के अधिकारियों और सर्वेक्षकों के साथ विस्तृत चर्चा करने के बाद ट्वीट में कहा ‘सर्वेक्षण के परिणाम अति उत्साहजनक हैं। पिछले एक वर्ष में स्वच्छता की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

               स्वच्छ भारत अभियान का असर जमीनी स्तर नजर आ रहा है। 434 शहरों और कस्बों का स्वच्छ रैंकिंग इस सप्ताह गुरूवार को घोषित किया जाएगा। रैंकिंग की तुलना में नागरिकों की धारणा और जमीनी स्तर की रिपोर्ट अधिक उत्साहवर्धक है।‘   दो महीने चले सर्वेक्षण के तहत कुल 37 लाख से अधिक नागरिकों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी। सर्वेक्षण करवाने वाली भारतीय गुणवत्ता परिषद  ने प्रतिक्रियाओं का सावधानीपूर्वक सत्यापन करने और एक से अधिक उत्तरों को हटाकर 18 लाख से अधिक प्रतिक्रियाओं पर विचार किया। स्वच्छ सर्वेक्षण – 2017 के निष्कर्ष, 83 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने बताया कि उनका क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में अधिक स्वच्छ हुआ। 

               82 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने स्वच्छता बुनियादी ढांचा और अधिक कूड़ेदान की उपलब्धता तथा घर-घर जाकर कूड़ा एकत्रित करने जैसी सेवाओं में सुधार के बारे में बताया। 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों तक बेहतर पहुंच के बारे में बताया। 404 शहरों और कस्बों के 75 प्रतिशत आवासीय क्षेत्र में अधिक स्वच्छता देखी गई। 

           185 शहरों में रेलवे स्टेशन के आसपास का पूरा इलाका स्वच्छ। 75 प्रतिशत सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय हवादार थे तथा वहां पर्याप्त रोशनी और जल आपूर्ति थी। 297 शहरों और कस्बों के 80 प्रतिशत वार्डों में घर-घर जाकर कूड़ा एकत्रित किया जा रहा है। 226 शहरों और कस्बों में 75 प्रतिशत निर्धारित वाणिज्यिक क्षेत्रों में दो बार सफाई की जा रही है। 166 शहरों और कस्बों में कूड़ा एकत्रित करने के लिए जीपीएस और आरएफआईडी आधारित वाहन चलाए जा रहे हैं।

            227 शहरों और कस्बों में स्वच्छता कर्मचारी के पदों की रिक्तियां दस प्रतिशत से कम हो गयी हैं, 158 शहरों में आईसीटी आधारित उपस्थिति निगरानी की जा रही है। सर्वेक्षण में सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों को अधिक बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों के अनुकूल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।