Friday, 13 October 2017

कोल इंडिया कर्मचारियों को दिवाली का तोहफा

  नई दिल्ली। केंद्रीय कोयला एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कोल इंडिया लि. एवं इसकी सहायक कंपनियों के लगभग 3 लाख गैर कार्यकारी कर्मचारियों को दिवाली की सौगात देते हुए घोषणा की कि दिवाली से पहले 17 अक्‍टूबर-धनतेरस से पहले प्रत्‍येक कर्मचारी को 40 हजार की 51 हजार रुपये एकमुश्‍त अग्रिम राशि दी जाएगी।

      गोयल के इस उदारता की ट्रेड यूनियनों ने सराहना की और इससे दिवाली के अवसर पर कोयला मजदूरों के बीच एक नई आशावादिता का संचार हुआ। एकमुश्‍त अग्रिम राशि का भुगतान उन कर्मचारियों को किया जाएगा, जो वर्तमान कंपनी की नामावली में हैं। 
  केंदीय कोयला मंत्री ने सीआईएल के कर्मचारियों की सितम्‍बर 2017 में कोयला उत्‍पादन में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने तथा अक्‍टूबर, 2017 में अभी तक 13 प्रतिशत की बढोत्‍तरी हासिल करने में उनकी कर्मठता और लगन की प्रशंसा की।
     उन्‍होंने कर्मचारियों से इसी मार्ग पर आगे बढ़ते रहने तथा उत्‍पादन के पिछले रिकॉर्डों को तोड़ने के लिए प्रेरित किया। गोयल ने कोयला मजदूरों को बताया कि उन्‍हें यह जानकर प्रसन्‍नता हुई है कि बिजली क्षेत्र को कोयला आपूर्ति सितम्‍बर 2017 में 21 प्रतिशत तथा 12 अक्‍टूबर तक लगभग 22 प्रतिशत के उच्‍चतर दायरे में है। उन्‍होंने दिवाली के अवसर पर सभी कर्मचारियों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं।

भारतीय अंतरस्थलीय जलमार्ग प्राधिकरण ने बांडों के जरिये जुटाये 660 करोड़

    नई दिल्ली। भारतीय अंतरस्थलीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने भारत सरकार पूर्ण सेवित बांडों के रूप में 660 करोड़ रूपये जुटाये हैं। 

    बांडों के द्वारा जुटाये गए संसाधन भारत सरकार की बजटीय सहायता के अतिरिक्त हैं। सरकार ने 2017-18 में भारत सरकार पूर्ण सेवित बांडों के माध्यम से 660 करोड़ रूपये जुटाने में आईडब्ल्यूएआई को सक्षम बनाने का निर्णय लिया था।
    आईडब्ल्यूएआई ने बांडों को जुटाने से पहले प्रबंधकों, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों, रजिस्ट्रारों एवं ट्रस्टियों की सेवाएं ली थीं। क्रिसिल एवं केयर दोनों ने ही आईडब्ल्यूएआई के प्रस्तावित इंस्ट्रूमेंट को ‘ट्रिपल ए:स्थिर’ की रेटिंग दी थी।
   बांडों को जुटाने के लिए ई-बीडिंग का आयोजन 300 करोड़ रूपये के इश्यू आकार तथा 360 करोड़ रूपये के ग्रीन शू ऑप्शन के साथ बीएसई पोर्टल पर 11 अक्तूबर, 2017 को किया गया था। यह इश्यू ओवर सब्सक्राइब हुआ था। 660 करोड़ रूपये की पूरी राशि 7.47 प्रतिशत की एक कूपन दर पर एकल भाग में जुटाई गई है। 
     बांडों से प्राप्त आय का उपयोग आईडब्ल्यूएआई द्वारा 2017-18 के दौरान विशिष्ट रूप से राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम-2016 के तहत राष्ट्रीय जलमार्ग (एनडब्ल्यू) के विकास के लिए पूंजी व्यय पर किए जाने का लक्ष्य है। 
    660 करोड़ रूपये के बराबर के ईबीआर के सम्बन्ध में मूल धन एवं ब्याज का वित्त पोषण भारत सरकार द्वारा जहाजरानी मंत्रालय की अनुदान मांग में उपर्युक्त बजटीय प्रावधान करने के द्वारा किया जाएगा, जिससे कि जब आवश्यकता पड़े तो बांड सर्विसिंग की आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके। ब्याज की अदायगी अर्द्धवार्षिक आधार पर तथा मूल धन की परिपक्वता पर की जाएगी।

दिल्ली-मुंबई रूट पर तीन दिन विशेष राजधानी

   नई दिल्ली। यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरी करने तथा दिल्ली एवं मुंबई के दो मेट्रो शहरों के बीच यात्रियों को त्वरित एवं सुविधाजनक सम्पर्क उपलब्ध कराने के लिए रेल मंत्रालय 16 अक्तूबर, 2017 से दिल्ली-मुंबई के बीच एक नई स्पेशल राजधानी एक्सप्रेस आरम्भ कर रहा है।

  इस रेलगाड़ी में परिवर्तनशील किराया प्रणाली व्यावहार्य नहीं होगी। भारतीय रेल पहले ही दिल्ली-मुंबई के बीच दो राजधानी एवं 30 से अधिक मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों को संचालन कर रही है। भारत की राजधानी दिल्ली एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक, परिवहन एवं सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में ऐतिहासिक महत्व का नगर है तथा भारत का राजनीतिक केन्द्र भी है।
    मुंबई भारत की व्यावसायिक एवं वित्तीय राजधानी है तथा महाराष्ट्र राज्य की राजधानी भी है। दोनों ही शहर देश के महत्वपूर्ण व्यावसायिक केन्द्र हैं। इसलिए, दोनों शहरों के बीच कारगर और प्रभावी परिवहन सम्पर्क की बेहद आवश्यकता है। नई राजधानी एक्सप्रेस से यात्रा समय में वर्तमान लगभग 15 घंटे 50 मिनट की तुलना में 13 घंटे 55 मिनट का समय लगेगा, जिससे यात्रा समय में लगभग 2 घंटे की बचत होगी।
      एक ही रेक के उपलब्ध होने के कारण नई सेवा के सप्ताह में तीन दिन चलने वाली विशिष्ट सेवा के रूप में योजना बनाई गई है, जो दिल्ली-मुंबई के बीच तेज रफ्तार रेल सम्पर्क उपलब्ध कराएगी और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगी। यात्रियों को प्राप्त होने वाली कुछ सुविधाएं इस प्रकार है, इससे यात्रियों के समय की बचत होगी। यह यात्रियों को ट्रैफिक के व्यस्ततम समय से बचाने में सक्षम बनाएगा। 
      यात्रियों को रेलगाड़ी में तरोताजा होने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि वह तड़के सुबह ही अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच जाएंगे। यात्री अपने रोजमर्रा के कार्यक्रम के अनुसार अपने कार्यालय पहुंच सकते हैं। यह रेलगाड़ी केवल कोटा, वडोदरा और सूरत स्टेशनों पर रूकेगी। पहली स्पेशल राजधानी हजरत निजामुद्दीन से 16 अक्तूबर, 2017 को रवाना होगी। स्पेशल राजधानी एक्सप्रेस में 1 फर्स्ट एसी वातानुकूलित कोच, 2 सेकेंड एसी एवं 12 थर्ड एसी और 1 पैन्ट्री कार होगा। बेहतर गतिवृद्धि, धीमी गति तथा उच्चतर रफ्तार के लिए दो लोकोमोटिव (2 डब्ल्यूएपी-5 (प्रत्येक 5400 हॉर्सपावर)) द्वारा इस रेलगाड़ी को खींचा जाएगा। 
   इस रेलगाड़ी की अधिकतम गति 130 किलोमीटर प्रतिघंटे होगी। 09004 (निजामुद्दीन-बांद्रा टर्मिनस): यह विशेष रेलगाड़ी निजामुद्दीन से सायं 1615 बजे रवाना होगी तथा अगले दिन सुबह 0610 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यात्रा में 13 घंटे 55 मिनट का समय लगेगा। निजामुद्दीन से रेलगाड़ी के रवाना होने के दिन बुधवार, शुक्रवार और रविवार हैं। 09003 (बांद्रा टर्मिनस- निजामुद्दीन): यह रेलगाड़ी बांद्रा टर्मिनस से सायं 1605 बजे रवाना होगी तथा अगले दिन सुबह 0600 बजे हजरत निजामुद्दीन पहुंचेगी। 
      यात्रा में 13 घंटे 55 मिनट का समय लगेगा। बांद्रा टर्मिनस से रेलगाड़ी के रवाना होने के दिन मंगलवार, गुरूवार और शनिवार हैं। यह रेलगाड़ी 16 अक्तूबर, 2017 से 16 जनवरी, 2018 तक तीन महीनों के लिए प्रायोगिक आधार पर चलाई जाएगी, जिससे कि वर्तमान परिवर्तनशील किराये के मुकाबले किराये में फ्लैट बढ़ोत्तरी की अवधारणा के बारे में यात्रा करने वाले लोगों के रिस्पान्स का पता लगाया जा सके।
   इसमें एआरपी के खुलने के दिन बुकिंग के लिए सभी बर्थ उपलब्ध होंगे, ऐच्छिक कैटरिंग की सुविधा होगी तथा व्यस्ततम घंटों से पहले ही मुंबई/दिल्ली में यात्री पहुंच सकेंगे। कैटरिंग सेवाएं, इस रेलगाड़ी में उपलब्ध सेवाओं का आयोजन रेलवे की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) के द्वारा किया जा रहा है। 
   राजधानी रेलगाड़ियों के वर्तमान मैन्यू एवं टैरिफ के अनुसार कैटरिंग सेवाएं ऐच्छिक होंगी। यात्रियों के पास कैटरिंग सेवाओं का लाभ न लेने का विकल्प होगा। शाम की चाय और डिनर का प्रावधान होगा। किराया संरचना, इस रेलगाड़ी की किराया संरचना में परिवर्तनीय किराया घटक नहीं होगा। इसका किराया या नई सेवाएं वर्तमान मुंबई राजधानी के लिए बिना परिवर्तनशील किराये के मूल किराये से 20 प्रतिशत अधिक होंगी।
    स्पेशल राजधानी में थर्ड एसी का किराया मुंबई राजधानी में थर्ड एसी के अधिकतम परिवर्तनशील किराये की तुलना में 500-600 रूपये सस्ता (अर्थात 19 प्रतिशत सस्ता) होगा। स्पेशल राजधानी में सेकेंड एसी का किराया मुंबई राजधानी में सेकेंड एसी के अधिकतम परिवर्तनशील किराये की तुलना में 700-800 रूपये सस्ता (अर्थात 19 प्रतिशत सस्ता) होगा।

वैश्‍विक प्रभावों को समझना आवश्‍यक, खासतौर से कारोबारी

     वॉशिंगटन। वित्‍त एवं कारपोरेट मामलो के मंत्री अरुण जेटली ने वॉशिंगटन डीसी में आयोजित जी-20 वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नरों की बैठक में हिस्‍सा लिया।

  बैठक के दौरान विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था और विकास रूप-रेखा, अफ्रीका के साथ संबद्धता और अंतर्राष्‍ट्रीय वित्‍तीय संरचना पर चर्चा की गई। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली इस समय अमेरिका के एक हफ्ते के दौरे पर हैं, जहां उन्‍हें अन्‍य संस्‍थानों सहित विश्‍व बैंक और अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष की वार्षिक बैठकों में शामिल होना है।
    जी-20 रूपरेखा कार्य समूह (एफडब्‍ल्‍यूजी) के सह-अध्‍यक्ष के रूप में भारत ने ‘विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था और विकास रूप-रेखा’ पर दूसरे दौर के सत्र के दौरान प्रमुख हस्‍तक्षेप किया था। इस दौर में ‘मजबूत, टिकाऊ और संतुलित विकास’ (एसएसबीजी) पर आईएमएफ जी-20 रिपोर्ट पर चर्चा की गई थी। 
    वित्‍त मंत्री जेटली ने कहा कि यह रिपोर्ट विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था के सामने मौजूद चुनौतियों को समझने और उनके लिए जी-20 की कारगर प्रतिक्रिया तैयार करने के लिए उपयोगी सामग्री प्रदान करती है। वित्‍तमंत्री ने कहा कि सदस्‍य देशों की घरेलू नीतिगत गतिविधियों के वैश्‍विक प्रभावों को समझना बहुत आवश्‍यक है। इसके संबंध में खासतौर से कारोबारी और वित्‍तीय नियमों को ध्‍यान में रखना होगा। 
     उन्‍होंने सुझाव दिया कि आईएमएफ एसएसबीजी रिपोर्ट को संभावित विश्‍लेषक उपायों की परख के लिए इस्‍तेमाल किया जाना चाहिए ताकि उनके द्वारा नीति प्रभावों को समझा जा सके। उन्‍होंने कहा कि इसे संभव बनाने के लिए सदस्‍यों को विस्‍तृत जानकारी उपलब्‍ध कराई जानी चाहिए।
   हर देश की नीति को स्‍पष्‍ट रूप से पेश किया जाए और प्रमुख चुनौतियों के संबंध में उपयुक्‍त कार्रवाई को आपस में साझा किया जाए। ऐसा करने से चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझने में सहायता होगी, जो सभी सदस्‍यों के लिए लाभप्रद है। 
     अफ्रीका के साथ संबद्धता पर जी-20 सत्र के दौरान विभिन्‍न विषयों तथा अफ्रीका सलाहकार समूह के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया गया। अंतर्राष्‍ट्रीय वित्‍तीय संरचना सत्र में पूंजी प्रवाह की निगरानी, विश्‍व वित्‍तीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने और संरचना निवेश के लिए वित्‍त पोषण के संबंध में एमडीबी की क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
     वित्‍त मंत्री अरुण जेटली अन्‍य संस्‍थानों सहित विश्‍व बैंक और अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष की वार्षिक बैठकों में शामिल होने के लिए इस समय अमेरिका के एक हफ्ते के दौरे पर हैं। उनके साथ भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल, आर्थिक मामलो के विभाग के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और अन्‍य अधिकारी भी गए हैं।

ग्रामीणों को किफायती जीवन बीमा सेवाएं मिलेंगी

    नई दिल्ली। संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने संपूर्ण बीमा ग्राम (एसबीजी) योजना और डाक जीवन बीमा के ग्राहकों की संख्या बढ़ाने की पहल का शुभारंभ किया। 

   यहां योजना का शुभारंभ करने के बाद मंत्री ने कहा कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को किफायती जीवन बीमा सेवाएं प्रदान करने के लिए डाक नेटवर्क के जरिये बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचार को आगे बढ़ाने की जरूरत है। 
    उन्होंने कहा कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत आने वाले सभी गांव इसकी सीमा में लाए जायेंगे। मंत्री ने कहा कि संपूर्ण बीमा ग्राम (एसबीजी) योजना के तहत देश के प्रत्येक राजस्व जिलों में कम से कम एक गांव (न्यूनतम 100 आवास के) को चिन्हित किया जाएगा। 
   जबकि प्रत्येक पॉलिसी की कम से कम एक आरपीएलआई (ग्रामीण डाक जीवन बीमा) के साथ चिन्हित गांव के सभी घरों को कवर करने का प्रयास किया जाएगा। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य संपूर्ण बीमा ग्राम के लिए चिन्हित गांव के सभी आवासों को कवर करना है।
     सिन्हा ने कहा कि डाक जीवन बीमा (पीएलआई) के ग्राहकों की संख्या बढ़ाने की योजना के अंतर्गत अब यह निर्णय लिया गया है कि पीएलआई के लाभ केवल सरकारी और अर्ध सरकारी कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं होंगे बल्कि यह डॉक्टरों, इंजीनियरों, प्रबंधन सलाहकारों, चार्टटेड एकाउंटेंट, वास्तुकारों, वकीलों, बैंक कर्मियों जैसे पेशेवरों और एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) तथा बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) के कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध होंगे। 
    यह फैसला सामाजिक सुरक्षा कवरेज को बढ़ाने और अधिकतम संख्या में लोगों को डाक जीवन बीमा (पीएलआई) के तहत लाने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि निजी बीमा की तुलना में डाक पॉलिसियों का बीमा शुल्क कम और लाभांश अधिक है। 
     मंत्री ने कहा कि सरकार इस देश के नागरिकों के संपूर्ण कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। डाक जीवन बीमा (पीएलआई) के ग्राहकों की संख्या बढ़ाना और देश के प्रत्येक जिले में संपूर्ण बीमा ग्राम के सभी घरों के लिए ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) का कवरेज सुनिश्चित करना इस दिशा में एक कदम है। ये दोनों प्रमुख पहलें डाक विभाग द्वारा शुरू की जा रही है, जिससे लोगों का जीवन सुरक्षित होने के साथ ही वित्तीय समेकन भी बढ़ेगा।
    1884 में शुरू किया गया डाक जीवन बीमा (पीएलआई) सरकारी और अर्ध सरकारी कर्मचारियों के लाभ के लिए सबसे पुरानी बीमा योजनाओं में से एक है। मल्होत्रा समिति की सिफारिशों पर 24 मार्च, 1995 को शुरू किये गये ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों विशेष रूप से इन क्षेत्रों में रहने वाले वंचित वर्गों और महिलाओं को बीमा कवर प्रदान किया जाता है। 
    कम बीमा शुल्क और उच्च लाभांश पीएलआई और आरपीएलआई योजनाओं का महत्वपूर्ण पहलू है। 31 मार्च, 2017 तक देश भर में 46.8 लाख पीएलआई और 146.8 लाख आरपीएलआई पॉलिसी धारक थे। वर्ष 2000 में बीमा क्षेत्र के उदारीकरण के बाद से देश के बीमा उद्योग में काफी बदलाव आया है।
     भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) का गठन किया गया है। ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में डाक जीवन बीमा (पीएलआई)/ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई) को स्वयं को दोबारा परिभाषित करना अत्यंत जरूरी है।

प्रधानमंत्री बिहार में 738.04 करोड़ की लागत वाली चार परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी कल पटना शहर के लिए 738.04 करोड़ रुपये की लागत वाली चार सीवरेज परियोजनाओं और 195 कि.मी. लम्‍बी 3031 करोड़ लागत वाली चार राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। शिलान्‍यास समारोह मोकामा में आयोजित किया जाएगा। 

  केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण, परिवहन और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी भी शिलान्‍यास समारोह में उपस्‍थित रहेंगे। इस अवसर पर बेऊर और सैदपुर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्‍लांट तथा सीवर नेटवर्क तथा करमालीचक में सीवरेज ट्रीटमेंट प्‍लांट का शिलान्‍यास होगा। 
 इन चार परियोजनाओं से बेऊर, करमालीचक और सैदपुर सीवरेज क्षेत्रों (जोन) के लिए 120 एमएलडी की नई एसटीपी क्षमता सृजित होगी और 20 एमएलडी की वर्तमान क्षमता का उन्‍नयन होगा। इसके अंतर्गत बेऊर और सैदपुर क्षेत्रों में 234.84 किलोमीटर लम्‍बा सीवर नेटवर्क भी शामिल है। 
   पटना में सात अन्‍य सीवरेज परियोजनाएं क्रियान्‍वयन के विभिन्‍न चरणों में हैं, जिनमें से दो परियोजनाओं को हाईब्रिड वार्षिकी आधारित पीपीपी मोड के तहत मंजूरी दी गई है। इनमें दीघा और कंकड़बाग सीवरेज क्षेत्र शामिल हैं, जिन पर 1402.89 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
    पटना शहर की आबादी फिलहाल 16,83,000 है और वर्तमान में इस शहर में 220 एमएलडी सीवेज का सृजन होता है। वर्ष 2035 तक सीवेज का भार (लोड) बढ़कर 320 एमएलडी हो जाने का अनुमान है। मौजूदा सीवेज सृजन की तुलना में सीवेज शोधन की मौजूदा क्षमता केवल 109 एमएलडी ही है।
   इसके अलावा, मौजूदा एसटीपी की निर्धारित समयावधि भी पूरी हो चुकी है। इनमें फिलहाल बेहद कम क्षमता के साथ सीवेज का शोधन हो रहा है। शहर में 11 प्रमुख नाले भी हैं, जिनका गंदा पानी सीधे गंगा नदी में प्रवाहित होता है। दीघा और कंकड़बाग जैसे क्षेत्रों में सीवेज के शोधन की कोई सुविधा नहीं है। अत: मौजूदा सीवेज शोधन क्षमता और सीवर प्रणाली का तत्‍काल पुनर्गठन करने तथा इस सुविधा से वंचित क्षेत्रों में इसका विस्‍ता‍रीकरण करने की जरूरत है। इसके अलावा, समुचित परिचालन और रख-रखाव भी अत्‍यंत आवश्‍यक है।
     शहर की वर्तमान सीवेज शोधन क्षमता और मौजूदा कचरा सृजन तथा वर्ष 2035 तक होने वाले भावी कचरा सृजन को ध्‍यान में रखते हुए छह क्षेत्रों (जोन) के लिए विश्‍व बैंक के वित्‍त पोषण के तहत कुल मिलाकर 11 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे 350 एमएलडी की एसटीपी क्षमता सृजित होगी और 1140.26 किलोमीटर लम्‍बा सीवरेज नेटवर्क स्‍थापित किया जाएगा। 
     इन पर 3582.41 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन 11 परियोजनाओं के पूरा हो जाने के बाद पटना एक ऐसे शहर में तब्‍दील हो जाएगा, जिसमें 100 प्रतिशत सीवरेज बुनियादी ढांचा होगा और कुछ भी मलजल (सीवेज) गंगा नदी में प्रवाहित नहीं होगा। नदी मुहाना (रिवर फ्रंट) विकास/घाट और शवदाहगृह (पटना आरएफडी सहित) से जुड़ी छह परियोजनाएं फिलहाल क्रियान्वित की जा रही हैं, जिन पर 337.58 करोड़ रुपये की लागत आएगी। 
    3.96 करोड़ रुपये की लागत वाली नदी तल सफाई परियोजना और 24.92 करोड़ रुपये की लागत वाली दो वनीकरण परियोजनाएं भी क्रियान्वित की जा रही हैं। नदी तल सफाई परियोजना के तहत एक कचरा झरनी (स्किमर) पटना में लगाई गई है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत बिहार में 4929.17 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 29 परियोजनाएं क्रियान्‍वयन के विभिन्‍न चरणों में हैं। 
      गंगा नदी को प्रदूषण मुक्‍त करने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन की ओर से कोई भी कसर नहीं छोड़ी जा रही है। इस अवसर पर राष्‍ट्रीय राजमार्ग-31 के आंटा-सिमरिया खण्‍ड और बख्‍तियापुर-मोकामा खण्‍ड को 4 लेन में परिवर्तन करने के कार्य का शिलान्‍यास किया जाएगा। 
   साथ ही, प्रधानमंत्री द्वारा 6 लेन वाले गंगा सेतु और राष्‍ट्रीय राजमार्ग-107 के महेशखूंट-सहरसा-पूर्णिया खण्‍ड पर और राष्‍ट्रीय राजमार्ग-82 पर बिहार शरीफ-बरबीघा-मोकामा खण्‍ड पर दो लेन के निर्माण कार्य का भी शिलान्‍यास किया जाएगा।