Wednesday, 21 December 2016

गरीबों के लिए 72781 करोड़ खर्च होंगे, बनेंगे 13.43 लाख आवास  

       भारत सरकार शहरी गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए 72781 करोड़ खर्च करेगी जिससे 13.43 लाख आशियाने बनेंगे। उत्तर प्रदेश के 34 शहरों में 11286 आवास बनाये जायेंगे। 

उत्तर प्रदेश ने पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए आवास निर्माण हेतु पहला प्रस्ताव भेजा है। पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए अब तक 72,781 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 13.43 लाख मकानों को मंजूरी दी गई है। उत्तर प्रदेश शहरी गरीबों के लिए किफायती मकानों के निर्माण हेतु आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय को प्रस्‍ताव भेजने वाला 29वां राज्‍य बन गया है। उत्तर प्रदेश के 34 शहरों में शहरी गरीबों के लिए 11,286 मकानों के निर्माण हेतु इस तरह के पहले प्रस्‍ताव को आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी गई। इन मकानों के निर्माण में कुल मिलाकर 384 करोड़ रुपये का निवेश निहित है। मंत्रालय ने इस संबंध में 160 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता को मंजूरी दी है।

 उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) (शहरी) के लाभार्थी की अगुवाई वाले निर्माण घटक के तहत इन मकानों के निर्माण का प्रस्‍ताव रखा। इस घटक के तहत पात्र लाभार्थियों को उनकी भूमि पर नए मकानों के निर्माण अथवा मौजूदा मकानों की बेहतरी के लिए डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की केन्‍द्रीय सहायता दी जाती है।

         पीएमएवाई (शहरी) का शुभारंभ पिछले साल जून महीने में किया गया था। उत्तर प्रदेश के जिन-जिन शहरों/कस्‍बों में नये मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई है उनमें ये शामिल है। बरवार-925 मकान, इल्तिफातगंज-910, महोली-602, रानीपुर-574, सुरियावन-506, चुघुली-501, सिकंदरा-447, कथेरा-415, कोरा जहानाबाद-413, महरोनी-411, रानीपुर मारीहरन-367, चुर्क घुरमा-357, सरसावन-343 और बहुआ-316 मकान। जिन तीन शहरों/कस्‍बों के मौजूदा मकानों की बेहतरी को मंजूरी दी गई है, उनमें ये शामिल हैं: माघर-489 मकान, घुगुहुली-299 और शोहरतगढ़-73 मकान। इसके साथ ही आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय ने पीएमएवाई (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के लिए अब तक कुल मिलाकर 13,43,805 मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है, जिनमें 72,781 करोड़ रुपये का निवेश और 19,633 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय सहायता निहित है।

ई-भुगतान को प्रोत्साहन, लाखों के ईनाम  

       भारत सरकार डिजिटल एवं क्रेडिट कार्ड सहित अन्य ई-लेन-देन को हर संभव प्रोत्साहन देगी। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस आशय की घोषणा की है। 

भारत सरकार की इस प्रोत्साहन योजना में पचास रुपये से लेकर तीन हजार की छोटी खरीद-फरोख्त को पुरस्कार-ईनाम योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत प्रतिदिन पन्द्रह हजार उपभोक्ताओं को एक-एक हजार रुपये की धनराशि सीधे बैंक खातों में भेजेगी। इसके अलावा अन्य ढ़ेरों प्रोत्साहन एवं पुरस्कार इस योजना में शामिल होंगे। इसके पीछे ई-भुगतान को बढ़ावा देना है। डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्त् मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से जनता के हित को ध्यान में रखते हुए लेन-देन के लिए फीस चार्ज नहीं करने को कहा है। नकदी के बजाय कार्ड और डिजिटल साधनों से भुगतान को बढ़ावा देने हेतु भारतीय रिजर्व बैंक ने 1000 रूपये तक के तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस), एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) से लेन-देन को तर्कसंगत बनाते हुए 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक चार्जेज में छूट दी है। 

भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक डेबिट कार्ड से 2000 रूपये तक के लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को भी तर्कसंगत बनाया है। इससे आगे बढ़ते हुए डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), वित्त मंत्रालय ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को जनता के हित में तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) से भुगतान करने पर चार्ज नहीं लेने को कहा है। नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी सिर्फ सेवा कर ही लेने को कहा है। इसके साथ असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी पचास पैसे की छूट देने को कहा है। यह 31.03.2017 तक के सभी लेनदेन के लिए लागू होगा।