Thursday, 6 April 2017

भविष्य के लिए कृषि विकास की योजनाएं

             केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह और डा. जितेंद्र सिंह, राज्यमंत्री, परमाणु उर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग, पूर्वोत्तर क्षेत्र, कार्मिक और लोक शिकायत विभाग की उपस्थिति में नई दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत सृजित परिसंपतियों की निगरानी हेतु भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग के लिए कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के प्रभाग और राष्ट्रीय सुदूर एजेंसी के बीच समझौते पत्र पर हस्ताक्षर हुआ। 

          इस मौके पर, शोभना के पट्टनायक, सचिव, डीएसी एंड एफडब्ल्यू, डा. किरण कुमार, अध्यक्ष, इसरो, निदेशक, एनआरएसए, डीएसी और एनआरएसए के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। राधा मोहन सिंह ने इस अवसर पर बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) राज्यों को प्रोत्साहन देकर कृषि और संबंधित क्षेत्रों के विकास के लिए काम करती है। कृषि बागवानी, पशुपालन, मात्स्यिकी, डेरी आदि के क्षेत्र में अब तक इस योजना के तत्वाधान में 1.5 लाख से ऊपर परिसंपतियां सृजित/विकसित की गई है। कृषि और समवर्गी क्षेत्र के परिसंपति के निर्माण कार्यकलाप को समझने, मांग एवं आपूर्ति के अंतर को कम करने तथा उन्हें व्यवस्थित करने के लिए विकसित परिसंपतियों की राष्ट्रीय सूची बनाने की आवश्यकता है। 

                राधा मोहन सिंह ने कहा कि सरकार शासन में पारदर्शिता के प्रति वचनबद्ध है। परिसंपतियों की सूची तैयार करने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का विकास एवं उसका उपयोग एक स्वागत योग्य कदम है। सृजित परिसंपतियों की वास्तविक स्थिति जानना न केवल निगरानी व उपयोग में मदद करेगा किंतु भविष्य के लिए कृषि विकास की योजनाएं बनाने में भी अत्यंत उपयोगी होगा। सिंह ने बताया कि यह प्रयासों के दोहरीकरण से बचाने में भी मदद करेगा तथा मंत्रालय की विभिन्न स्कीमों के बीच सामंजस्य स्थापित करने में मदद देगा। 

           केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस मौके पर कहा कि उपग्रह एवं रिमोट सेंसिग प्रौद्योगिकी द्वारा कृषि विकास में अपार संभावनाएं हैं। सरकार चाहती है कि इसके जरिए कृषि योजनाओं का लाभ किसानों तक समय से पहुंचे। कृषि मंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के इस्तेमाल से किसान आदान परीक्षण/प्रदाता केंद्रों, भंडारण सुविधाओं, मंडियों, बाजार आदि मूलभूत सुविधाओं का समय पर उपयोग कर सकेंगे। सिंह ने कहा कि भू-संसाधन मानचित्रण, कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य मानचित्रण, सुव्यवस्थित कृषि, फसल उपज अनुमान, सूखा और बाढ़ जैसी आपदाओं की पहचान और मूल्यांकन, अंतर्देशीय मात्स्यिकी, पशु पहचान एवं भेड़ के विचरण व विकास के क्षेत्र में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का दोहन अभी बाकी है।

           यदि ऐसा होता है तो किसानों को जल्दी और सीधा लाभ मिलेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि वह दिन दूर नहीं जब किसान इंटरनेट और मोबाइल फोन के जरिए कृषि सेवाओं पर भू-स्थानिक सूचना प्राप्त कर सकेंगे। इसमें मृदा की स्थिति, उर्वरक की अपेक्षित मात्रा, बुआई हेतु अनुकूल स्थितियां, संभावित कीट आक्रमण, उपज का अनुमान, कस्टम हयरिंग के सुविधा केंद्रों का स्थान, भंडारण के लिए गोदाम और शीतागार, अपने उत्पाद को बेचने के लिए मंडी, पशु नस्लों की पहचान व उपलब्धता आदि जानकारियां शामिल है।

             केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस मौके पर आरकेवीवाई के तहत कृषि परिसंपति की निगरानी में अंतरिक्ष और रिमोट सेंसिग प्रौद्योगिकी को शामिल करने के लिए दोनों टीमों और राज्यों को उनके सराहनीय प्रयासों के लिए सराहना की।

वैश्विक आतंकवाद के विरूद्ध दक्षिण एशिया

           बंगलादेश के वरिष्‍ठ संपादकों और पत्रकारों के एक शिष्‍टमंडल ने यहां केन्‍द्रीय विद्युत, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल से मुलाकात की।

         शिष्‍टमंडल के सदस्‍यों को ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता तथा उत्‍तरदायित्‍व लाने के लिए सरकार द्वारा शुरू किये गये सुधार कार्यक्रमों व सभी के लिए रियायती, गुणवत्‍ता सम्‍पन्‍न 24न् 7 बिजली प्रदान करने के लक्ष्‍य के बारे में जानकारी दी गई। विद्युत मंत्री के साथ बंगलादेश के संपादकों और पत्रकारों की मुलाकात का आयोजन विदेश मंत्रालय द्वारा भारत के बिजली क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में शिष्‍टमंडल को अवगत कराने के लिए किया था।

               शिष्‍टमंडल के सदस्‍यों को प्रेजन्‍टेशन के माध्‍यम से बिजली क्षेत्र में विभिन्‍न मोबाइल एप्‍प तथा वेब पोर्टलों को लाने जैसे पारदर्शी कदमों के बारे में बताया गया। उन्‍हें क्षेत्र के शासन संचालन में पारदर्शिता और उत्‍तरदायित्‍व के परिवर्तनकारी कदम की भी जानकारी दी गई। शिष्‍टमंडल को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत और बंगलादेश ने सहयोग क्षेत्र को अप्रत्‍याशित रूप से व्‍यापक बनाया है। दोनों देशों के बीच पारस्‍परिक विश्‍वास ऊंचे स्‍तर पर पहुंचा है। उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे से सीखना है और विभिन्‍न क्षेत्रीय और वैश्विक महत्‍व के विषयों पर सहयोग करना है। 

               गोयल ने पड़ोसी बंगलादेश में ग्रामीण बैंक, कपड़ा क्षेत्र में क्रांति जैसी उपलब्धियों की सराहना की। उन्‍होंने कहा कि भारत और बंगलादेश एक दूसरे के पड़ोसी से कहीं अधिक हैं। गोयल ने अंत: क्षेत्रीय विदयुत गलियारा विकसित करने, और क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकवाद के विरूद्ध एक होकर दक्षिण एशिया क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बहाल करने जैसे क्षेत्रों में बंगलादेश से समर्थन का विश्‍वास व्‍यक्‍त किया। 

             उन्‍होंने कहा कि ऐसा करने से दोनों देशोंके बीच पारस्‍परिक और साझा हित के क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होगा। भविष्‍य में राष्‍ट्रों की आपसी सहयोग की चर्चा करते हुए गोयल ने बंगलादेश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र तथा ऊर्जा सक्षमता पहलों में समर्थन देने की भी इच्‍छा वयक्‍त की भारत को इन क्षेत्रों में व्‍यापक सफलता मिली है। गोयल ने कहा कि जिस तरह नवीकरणीय ऊर्जा का विस्‍तार हुआ है उससे बंगलादेश को भारत से सीखने में मदद मिलेगी और भविष्‍य में स्‍वच्‍छ ऊर्जा देश बनने में मदद मिलेगी।

दीन दयाल अंत्योदय योजना : आजीविका में बदलाव

           दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) 3.6 करोड़ से भी अधिक परिवारों के जीवन और आजीविका में अहम बदलाव ला रहा है। 

           यही नहीं, इन परिवारों की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में शामिल हो गई हैं। एसएचजी, ग्राम संगठनों (वीओ) और क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के अंतर्गत महिलाओं की सामूहिक संस्‍थाओं ने परिवर्तनकारी सामाजिक प्रधानता विकसित की है, जिससे महिला-पुरुष संबंधों में बदलाव आ रहा है, सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित हो रही है। ग्राम सभाओं एवं पंचायती राज संस्थानों में उनकी भागीदारी संभव हो पा रही है। इस कार्यक्रम से महिलाओं का विश्वास बढ़ा है जिसके फलस्वरूप वे आजीविका में विविधीकरण के लिए एक निरंतर समुदाय संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) के नेतृत्व में मार्गदर्शन के जरिए कौशल एवं सक्षमताओं का विकास करने के बाद आर्थिक गतिविधि के लिए बैंक से ऋण पाने का प्रयास करने लगी हैं। 1.50 लाख महिला समुदाय संसाधन व्यक्ति (सीआरपी), जो खुद गरीबी के दायरे से बाहर आ गई हैं, आज सतत कृषि को बढ़ावा देने, बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराने और पशुओं की देखभाल के लिए पैरा वेट्स का एक कैडर विकसित करने में परिवर्तन के महान कारकों (एजेंट) के रूप में उभर कर सामने आ चुकी हैं। 

             इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ये महिला सीआरपी गांवों में सामाजिक बदलाव लाने में भी अहम भूमिका अदा करने लगी हैं। वर्ष 2011 में इस कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर अब तक एसएचजी की महिला सदस्यों ने बैंक ऋण के रूप में 1.06 लाख करोड़ रुपये की राशि तक अपनी पहुंच सुनिश्चित कर ली है। वर्ष 2014-15 में 20,000 करोड़ रुपये के बैंक लिंकेज रहे, जबकि वर्ष 2015-16 में एसएचजी ने ऋण के रूप में 30,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि प्राप्त की। फरवरी 2017 तक 29,000 करोड़ रुपये से भी अधिक राशि का वितरण हो चुका है।

               वित्त वर्ष 2016-17 में लगभग 35,000 करोड़ रुपये से लेकर 38,000 करोड़ रुपये तक की राशि ऋण के रूप में जुटाये जाने का अनुमान है। वर्ष  2016-17 में बैंक लिंकेज के विश्लेषण से अनेक राज्यों जैसे कि असम, बिहार, ओडिशा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में क्रेडिट लिंकेज में उल्लेखनीय वृद्धि होने की जानकारी मिली है। यही नहीं, देश भर में बैंक लिंकेज का प्रसार हुआ है क्योंकि एसएचजी अनेक उत्तरी राज्यों में भी गरीबों के जीवंत एवं मजबूत संस्थानों के रूप में उभर कर सामने आये हैं। एसएचजी देश के दक्षिणी राज्यों में पहले से ही मजबूत एवं जीवंत रहे हैं।

              दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत टिकाऊ कृषि के तौर-तरीकों को बढ़ावा देने के लिए महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (एमकेएसपी) के अंतर्गत 30 लाख से भी अधिक महिला किसानों को सहायता सुलभ कराई गई है। दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) कार्यक्रम देश की लगभग एक तिहाई ग्राम पंचायतों में अपनी पहुंच सुनिश्चित कर चुका है। इसके साथ ही इस कार्यक्रम के समेकन एवं विस्तारीकरण के लिए भी निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं।

बौद्धिक ईमानदारी महत्‍वपूर्ण

           पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायतें, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि बौद्धिक ईमानदारी बौद्धिक विचार जितनी ही महत्वपूर्ण हैं और बौद्धिक क्षेत्र में अधिकांश संघर्ष तब पैदा होते हैं जब विचार ईमानदारी रहित होता है और बाहरी विचारों से प्रभावित होता है।

             विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा प्रसार भारती के सहयोग से आयोजित "कम्युनिकेटिंग इंडिया" विषय पर आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में दिए गए अपने उद्घाटन भाषण में डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक स्‍थिर आत्‍मविश्‍लेषण के साथ महत्‍वपूर्ण आंतरिक विश्‍लेषण से ही आखिरकार एक निष्पक्ष विश्वास या दृढ़ निश्‍चय प्राप्‍त होता है। युवा आकांक्षा को समकालीन भारत की विचार प्रक्रिया को निर्धारण करने वाला प्रमुख कारक बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवाओं से दृढ़ विश्वास के मूल से अपने मूल विश्वास को लेने की अपील की। डॉ. जितेंद्र सिंह के व्याख्यान के बाद सुस्‍पष्‍ट वार्ता हुई जिसमें विभिन्‍न शैक्षिक संकायों के युवाओं ने बड़े उत्‍साह से भाग लिया।

भारत के विकास का दुनिया में कोई मुकाबला नहीं

             सूचना और प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत के विकास और प्रगति की कहानी का दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व ने आज देश को बदल दिया है। इसे सुधार, प्रदर्शन और बदलाव के मंत्र के साथ विकास के तेज मार्ग पर स्‍थापित कर दिया है। मोदी (विकसित भारत का निर्माण) आंदोलन एक ऐसी कहानी थी जो पूरे देश में फैल रही है। 

           भारत की कहानी को एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था, बढ़ती हुई सुपरपॉवर, जीवंत लोकतंत्र, जिम्मेदार पावर और विश्व के सबसे बड़े और सबसे युवा कार्यबल के रूप में भारत पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। नायडू ने यह बात विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी, आईआईएमसी, प्रसार भारती और नेहरू मेमोरियल संग्रहालय के साथ मिलकर आयोजित कम्‍युनिकेटिंग इंडिया पर आयोजित सम्मेलन के समापन सत्र में कही। परंपरागत मीडिया और सोशल मीडिया और मीडिया के नए रूपों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नायडू ने कहा कि संचारण के दोनों रूप समाज के विभिन्न वर्गों और विभिन्न लक्षित दर्शकों के साथ एकीकृत और निर्बाध संबंध सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।

                  प्रधान मंत्री का उदाहरण देते हुए नायडू कहा कि प्रधान मंत्री अपने विचारों को व्‍यक्‍त करने के लिए ट्विटर मंच का व्यापक रूप से उपयोग करते हैं। देश के लोगों तक पहुंचने के लिए मन की बात कार्यक्रम के लिए रेडिया का नवाचार उपयोग करते हैं। देश के युवाओं की बढ़ती आकांक्षाओं पर बल देते हुए, नायडू ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी की प्राथमिकताएं, देश की प्रगति और विकास पर केंद्रित हैं। उन्‍होंने देश में अपने विचारों को व्‍यक्‍त करके विकास प्रक्रिया में भाग लिया है। बदलते हुए तकनीकी प्रौद्योगिकी प्रतिमान के साथ नागरिक पत्रकारिता का एक नया रुझान संचार क्षेत्र में उभरा है जहां नागरिक स्वयं लेखक, संपादक और प्रकाशक बन गए हैं। 

              नायडू ने कहा कि संचारण सुशासन एजेंडा में बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उल्‍लेख किया कि संचार राष्ट्रीय विकास के पहलुओं में सबसे महत्वपूर्ण भाग बन गया है, जिसने सरकार की प्राथमिकताओं का समर्थन किया है। इसने लोगों तक कार्यक्रम और लाभ को पहुंचाने में मदद की है। उन्‍होंने पिछले तीन वर्षों में अपनी मुख्‍य योजनाओं जैसे स्वच्छ भारत, कौशल भारत, बेटी बचाओ बेटी पढाओ और मेक इन इंडिया के लिए संचार रणनीति पर ध्‍यान केंद्रित करने के बारे में जोर दिया। सरकार की जन धन योजना और पहल (गीव इट अप) जैसी प्रमुख योजनाओं का उदाहरण देते हुए नायडू ने कहा कि पश्चिमी मीडिया को देश में चल रही विभिन्न विकास और अग्रणी पहलों को स्वीकार करना चाहिए, जिसने कई लोगों के जीवन में परिवर्तन किया है। 

              मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए नायडू ने कहा कि समाचार और विचारों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। भारत में मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि इसके पास पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने की जबरदस्त क्षमता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत आईटी सेक्टर और सामान्य मनोरंजन का सबसे बड़ा उत्पादक है। युवा कर्मचारियों भारत को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। भारत सामान्य मनोरंजन, संगीत, सिनेमा, टेलीविजन कार्यक्रम आदि के उत्पादन, वितरण और उपभोग के संबंध में एक अभूतपूर्व क्रांति के दौर से गुजरा है। सरकार ने पूरी सरकार की मशीनरी को बदलने के लिए कई पहलों की शुरूआत की है। लाल फीताशाही को अवसरों में बदलकर रेड कार्पेट में तब्दील किया गया है।