Thursday, 10 August 2017

आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना

          भारत सरकार ने दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के हिस्से के रूप में उप-योजना आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना लांच करने का निर्णय लिया है। डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह पिछड़े इलाकों में सड़क परिवहन सेवा संचालन करेंगे। 

     इससे समुदाय की निगरानी में सुरक्षित, किफायती ग्रामीण परिवहन सेवा मिलेगी और महत्वपूर्ण सेवाओं और सुविधाओं (बाजार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य) से दूर-दराज के गांव जुड़ेंगे और पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र रूप से आर्थिक विकास होगा। इससे स्वयं सहायता समूहों के लिए आजीविका के अतिरिक्त साधन उपलब्ध होगा। एजीईवाई की प्रमुख बातों पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में जून, 2016 में राज्य परिवहन मंत्रियों की हुई बैठक में विचार किया गया और राज्यों के परिवहन मंत्रियों ने इस पहल की प्रंशसा की। 
    डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत समुदाय आधारित संगठन (सीबीओ) को दिये जाने वाले समुदाय निवेश कोष (सीआईएफ) का उपयोग स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को समर्थन देने में किया जाएगा। समुदाय निवेश कोष से स्वयं सहायता समूह के लाभार्थी सदस्य को सीबीओ द्वारा वाहन खरीदने के लिए 6.50 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा। 
     वैकल्पिक तौर पर वाहन का स्वामित्व सीबीओ के पास होगा और सीबीओ स्वयं सहायता समूह के सदस्य को वाहन पट्टे पर चलाने और पट्टे का किराया सीबीओ को देने के लिए कहेगा। एजीईवाई प्रारंभ में पायलट आधार पर देश के 250 ब्लाकों में लागू किया जाएगा। प्रत्येक ब्लाक को परिवहन सेवा चलाने के लिए 6 वाहन दिये जायेंगे। चालू वर्ष के दौरान 8 राज्यों आंध्रप्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र,तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में 52 ब्लाकों इस योजना का लागू करने की स्वीकृती दी गई है और इसके लिए 16.06 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 
      इसमें से 10.16 करोड़ रुपये भारत सरकार देगी और शेष राशि संबंधित राज्यों द्वारा दी जायेगी। राज्य ब्लाकों का चयन उन ब्लाकों में से करेंगे जहां राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन सक्रिय रूप से लागू किया जा रहा है और जहां परिपक्व समुदाय आधारित संगठन पहले से काम कर रहे हैं। ब्लाकों तथा मार्गों के चयन में पिछड़ापन, परिवहन संपर्क का अभाव और सतत सेवा की संभावना जैसी बातों को ध्यान में रखा जाएगा। 
      राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) द्वारा चुने गए ब्लाकों में संभावना अध्ययन और यातायात सर्वेक्षण किया जाएगा। मार्गों तथा सतत आधार पर चलाए जाने वाहनों की संख्या और क्षमता की पहचान की जाएगी। यह अध्ययन तकनीकी रूप से उन मजबूत संगठनों द्वारा किया जाएगा जो परिवहन नेटवर्क नियोजन में विशेषज्ञता रखते हैं। 
     6.50 लाख की लागत सीमा के अंदर वाहन या तो ई-रिक्शा होगा या थ्री विहलर या फोर व्हिलर होगा। एसआरएलएम द्वारा वाहनों के लिए परमिट जारी करने के काम में राज्य परिवहन के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। वाहन चलाने वाले स्वयं सहायता समूह के सदस्य यह सुनिश्चित करेंगे कि वैध परमिट, रोड़ टैक्स परमिट, वैध बीमा पालिसी जैसी सभी आवश्यक कानूनी और वैधानिक आवश्यकता पूरी की गई है।

सांकेतिक भाषा में भारतीय राष्ट्रगान वीडियो लांच

      मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पांडे ने नई दिल्ली के फिल्म प्रभाग ऑडोटोरियम में सांकेतिक भाषा में तैयार भारतीय राष्ट्रगान वीडियो लांच किया। 

    इस वीडियो में विशाल लाल किले की पृष्ठभूमि में अमिताभ बच्चन दिव्यांग बच्चों के साथ सांकेतिक भाषा में राष्ट्रगान कर रहे हैं। इस फिल्म की अवधारणा वी केयर फिल्म फैस्टिवल के संस्थापक निदेशक सतीश कपूर की है। वी केयर फिल्म फैस्टिवल ने स्वयं सेवी संगठन ब्रदरहुड के अंतर्गत फिल्म निर्माण किया। 
      इसका निर्देशन गोविंद निहलानी ने किया है और संगीत स्वर्गीय आदेश श्रीवास्तव का है। इस अवसर पर डॉ. महेन्द्र नाथ पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन है कि भारत का विकास तभी पूरा होगा जब हमारे दिव्यांगजन इसका एकीकृत अंग बनेंगे और राष्ट्रनिर्माण में आगे आयेंगे। श्री मोदी ने विकलांग के स्थान पर दिव्यांग शब्द रखने का सुझाव दिया था।
      उन्होंने कहा कि हमें दिव्यांगजनों के लिए एक ऐसा माहौल तैयार करना होगा जिससे कि वे अपनी आजीविका प्राप्त कर सकें और किसी भी अन्य नागरिक की तरह स्वतंत्र जीवन यापन कर सकें। उन्हें मुख्य धारा में लाना और उनके लिए चीजों को सुगम बनाना हमारी जिम्मेदारी है ताकी वे पूरी तरह राष्ट्रीय जीवन में घुलमिल जाएं।
        उन्होंने सरकारी प्रतिष्ठानों में दिव्यांग जनो के लिए आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने के सरकार के निर्णय की प्रशंसा की।
       इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदेश वर्मा और वी केयर फिल्म फैस्टिवल के संरक्षक डेरेक सेगार, भारत और भूटान के लिए संयुक्त राष्ट्र सूचना केंद्र के निदेशक अल-अमीन-यूसूफ, दक्षिण एशिया के लिए संचार और सूचना सलाहकार सुरेश श्रीवास्तव, इंडियन फैडरेशन ऑफ यूनाइटेड नेशन्स एसोशियेशन के महासचिव उपस्थित थे।

अब राज्यसभा में दिखेगा अमित शाह का रणनीतिक प्रबंधन !

       भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकार अमित शाह ने बतौर अध्यक्ष भी तीन साल का कार्यकाल पूर्ण किया। रणनीतिकार एवं अध्यक्ष। अमित शाह दोनो ही तौर पर कामयाब दिखे। 

  अब भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यसभा में भी बतौर सदस्य पहंच गये। भारतीय जनता पार्टी के संरक्षक मण्डल के वरिष्ठ एवं पूर्व अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवानी ने भाजपा को हिन्दुत्व की मुख्यधारा से जोड़ा तो वहीं भाजपा को हिन्दुत्व की हार्टबीट बना दिया। 
      मौजूदा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा के कैनवास को रणनीतिक गुणा भाग से पूर्वोत्तर से दक्षिण तक ले गये। असम, मणिपुर, अरुणाचल आदि में भाजपा की धमक दिखी। अध्यक्ष अमित शाह कुशल रणनीतिकार के तौर पर दिख रहे। लिहाजा रणनीतिकार अमित शाह को राज्यसभा में बतौर सदस्य उच्च सदन में भेजना भी रणनीति का हिस्सा है।
       जिससे उच्च सदन में भाजपा अमित शाह के कुशल प्रबंधन एवं कुशल रणनीति का लाभ उठा सके। गौरतलब है कि गोवा, मणिपुर एवं अरुणाचल में पर्याप्त बहुमत न होने के बावजूद अमित शाह का कुशल प्रबंधन सरकार बनाने में कामयाब रहा तो अब यही सब देख कर भाजपा उच्च सदन में कुशल प्रबंधन एवं कुशल रणनीतिकार के तौर पर अमित शाह को लाई है जिससे उच्च सदन में भाजपा की प्रखरता दिखे।
      उच्च सदन में भी भाजपा ताकतवर हो। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिण में केरल तक पार्टी की धमक दिखा कर यह तो साबित कर दिया कि वह एक कुशल रणनीतिकार हैं। 
       सरकार में भाजपा के कद्दावर नेता वेंकैया नायडू को उप राष्ट्रपति बना कर अपेक्षित सम्मान दे दिया लेकिन सरकार में नायडू का रिक्त स्थान संभालने वाला कोई प्रखर एवं क्षमतावान नेता चाहिए लिहाजा संभावना है कि अमित शाह के कुशल प्रबंधन को देखते हुये सरकार में कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय का उत्तरदायित्व सौंप दिया जाये। जिससे सरकार में भी उनकी प्रखरता दिखे।       

दो हजार करोड लागत की 10 नमामी गंगे परियोजनाओं को मंजूरी

         राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन ने बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्‍तर प्रदेश में लगभग 2033 करोड़ रुपये लागत की 10 परियोजनाओ को मंजूरी दी है।

        इन 10 परियोजनाओं में से 8 परियोजनाएं जलमल बु़नियादी ढांचा और शोधन से संबंधित हैं। एक परियोजना नदी तट विकास और एक परियोजना गंगा ज्ञान केंद्र से संबंधित है। इन परियोजनाओं को राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन की कार्यकारी समि‍ति की 5वीं बैठक में मंजूरी दी गई। बिहार में बाढ़ और पटना में कंकड़बाग और दीघा में कुल 1461 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली तीन प्रमुख जलमल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। 
        इन परियोजनाओं से 161 एमएलडी (दीघा में 100 एमएलडी, कंकरबाग में 50 एमएलडी और बाढ में 11 एमएलडी) की अतिरिक्‍त जलमल शोधन क्षमता का स़ृजन होगा। वर्तमान में पटना के कंकरबाग और दीघा जलमल क्षेत्रों में कोई एसटीपी नहीं है। उल्‍लेखनीय है कि नमामी गंगे कार्यक्रम के तहत पटना के बेऊर, सैदपुर, करमालीचक और पहाड़ी जलमल क्षेत्रों में 200 एमएलडी जलमल शोधन क्षमताओं को जुटाने की पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। 
       पश्चिम बंगाल में 495.47 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली तीन परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। इन तीन में से दो परियोजनाएं जलमल बुनियादी ढांचे से संबंधित हैं जबकि तीसरी परियोजना नदी तट विकास के लिए है। हावड़ा में गंगा नदी के लिए तथा कोलकाता में गंगा की सहायक नदी टॉली नाला (आदि गंगा नाम से प्रसिद्ध) के प्रदूषण उपशमन और पुनर्वास कार्यों के लिए 492.34 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं से कोलकाता में 91 एमएलडी की अतिरिक्‍त जलमल शोधन क्षमता का सृजन होगा।
        पश्चिम बंगाल के नवद्वीप शहर में बोरल फैरी और बोरल स्‍नान घाटों के नवीकरण के लिए एक विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की मंजूरी भी दी गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 3.13 करोड़ रुपये है। इस परियोजना में नदी के किनारे का संरक्षण कार्य, प्रतीक्षा कक्षों, सीढि़यों और बैठने के स्‍थान आदि का निर्माण कार्य शामिल है। 
     उत्‍तर प्रदेश में मिर्जापुर जिले के चुनार शहर में 27.98 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले जलमल बुनियादी ढांचे के कार्य की मंजूरी दी गई है, जिसके तहत नालों के अवरोधन और डाइवर्जन के अलावा 2 एमएलडी क्षमता के एक एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। यह भी उल्‍लेखनीय है कि बिहार में पटना में कंकड़बाग और दीघा तथा पश्चिम बंगाल में हावड़ा और कोलकाता की परियोजनाओं का कार्य पीपीपी मॉडल के आधार पर हाइब्रिड एन्‍यूटी के तहत किया जाएगा।
        परियोजना 60 प्रतिशत पूंजी लागत का भुगतान 15 वर्ष की अवधि में उस ठेकेदार को किया जाएगा जिसने अपने कार्य प्रदर्शन के आधार पर अपशिष्‍ट जल शोधन के निर्धारित मानंदडो को हासिल किया हो। गंगा प्रवाह वाले पांच प्रमुख राज्‍यों में गंगा निगरानी केंद्रों की स्‍थापना करने से सबंधित एक परियोजना को भी मंजूरी दी गई है, जिसकी अनुमानित लागत 46.69 करोड़ रुपये हैं। 
        इस परियोजना के उद्देश्‍यों में प्रदूषण स्‍तर, बहाव स्‍तर, प्रदूषण के बिन्‍दु और गैर बिन्‍दु स्रोत, निगरानी के मानदंडों की एनएमसीजी एसपीएमजी जिला गंगा समिति को आवधिक रिपोर्ट भेजना और इसके आधार पर एनएमसीजी द्वारा उपचारात्‍मक कार्यवाही, डाटा सेटों का मिलान आदि सहित गंगा की संपूर्णता की कार्यकुशल निगरानी के लिए केंद्रों की पहचान करना और उन्‍हें स्‍थापित करना शामिल है।
      इसके अलावा जैवोपचारण विधि का उपयोग करके नालों के शोधन की दो प्रायोगिक परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। पटना में दानापुर नाला और इलाहाबाद में नेहरू नाले का इस प्रौद्योगिकी द्वारा 1.63 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से प्रशोधन किया जाएगा। सभी परियोजनाएं केंद्र सरकार द्वारा शत प्रतिशत वित्‍त पोषित होंगी।

उपराष्‍ट्रपति हामिद अंसारी की राज्‍य सभा में विदाई

      प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा एक दीर्घकालीन सेवा के बाद, आप नई कार्यक्षेत्र की तरफ प्रयाण करेंगे ऐसा मुझे पूरा भरोसा है। 

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा एक ऐसा परिवार जिसका करीब सौ साल का इतिहास सार्वजनिक जीवन का रहा हो, उनके नाना, उनके दादा कभी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष रहे, कभी संविधान सभा में रहे, एक प्रकार से आप उस परिवार की पृष्ठभूमि से आते हैं, जिनके पूर्वजों का सार्वजनिक जीवन में, विशेष करके कांग्रेस के जीवन के साथ और कभी खिलाफत मूवमेंट के साथ भी काफी कुछ सक्रियता रही। क्योंकि उनके हंसने का क्या अर्थ होता है, उनके हाथ मिलाने का तरीके क्या अर्थ होता है, तुरंत समझ नहीं आता है! क्योंकि उनकी ट्रेनिंग ही वही होती है। लेकिन उसको कौशल्य का उपयोग यह 10 साल यहां जरूर यहाँ हुआ होगा। यह सब को संभालने में, इस कौशल्य ने किस प्रकार से लाभ इस सदन को पहुंचाया होगा।
          उपराष्‍ट्रपति हामिद अंसारी के राज्‍य सभा में विदाई के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा लेकिन यह 10 साल एक अलग जिम्मा आपके हिस्से में आया और पूरी तरह एक एक पल संविधान, संविधान, संविधान के ही के दायरे में चलाना और आपने उसको बखूबी निभाने का भरपूर प्रयास किया। हो सकता है कुछ छटपटाहट रही होगी भीतर आपके भी, लेकिन आज के बाद वह संकट आपको नहीं रहेगा और मुक्ति का आनंद भी रहेगा और अपनी मूलभूत जो सोच रही होगी, उसके अनुसार आपको कार्य करने का, सोचने का, बात बताने का अवसर भी मिलेगा। 
      आपसे मेरा परिचय ज्यादा तो रहा नहीं, लेकिन जब भी मिलना हुआ, काफी कुछ आपसे जानने-समझने को मिलता था। मेरी विदेश यात्रा में जाने से पहले, आने के बाद, आपसे जब बात करने का मौका मिलता था, उसका मैं जरूर अनुभव करता था और वह मुझे चीजों को जो दिखती हैं, उसके सिवाय क्या हो सकती हैं, इसको समझने का एक अवसर देती थी और इसलिए मैं ह्रदय से आपका बहुत आभारी हूं, मेरी तरफ से हृदय से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।
    राष्ट्र के उप-राष्ट्रपति के रूप में, आपकी सेवाओं के लिए दोनों सदन की तरफ से, देशवासियों की तरफ से भी आपके प्रति आभार का भाव है और आपका यह कृतित्व, यह अनुभव और इस पद के बाद निवृत्ति, अपने आप में एक लम्बे अरसे तक, समाज जीवन में उस बात को एक वजन रखती है। राष्ट्र के संविधान की मर्यादाओं पर चलते हुए देश का मार्गदर्शन करने में आपका समय और शक्ति काम आएगा, ऐसी मेरी पूरी शुभकामनाएं हैं!