Friday, 24 February 2017

भारत को वैश्‍विक ताकत बनाना लक्ष्‍य

             केंद्रीय युवा मामले और खेल राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने यहां नेहरू युवा केंद्र संगठन के अंतर्गत 9वें यूथ एक्‍सचेंज प्रोग्राम का उद्घाटन किया।

            इस एक्‍सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत झारखंड और छत्‍तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों के युवा राजधानी के विभिन्‍न क्षेत्रों का दौरा करेंगे। यहां की संस्‍कृति और जीवनशैली के बारे में जानेंगे। इस अवसर पर गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के विजन के तहत सरकार की बहुत सी ऐसी योजनाएं हैं, जिनका लक्ष्‍य युवाओं को सशक्‍त बनाना। भारत को एक वैश्‍विक ताकत बनाना है। इस अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए उन्‍होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे किसी एक अच्‍छे कार्य का दायित्‍व ग्रहण करें, जो न केवल समाज की सहायता करें, बल्‍कि उनके भीतर भी नेतृत्‍व के गुणों का विकास करें। 

             उन्‍होंने कहा, ‘’स्‍वच्‍छ भारत अभियान से लेकर स्‍टार्ट-अप इंडिया तक, सरकार की अनेक ऐसी पहलें हैं, जिनसे युवाओं को जुड़ना चाहिए और ‘एक भारत श्रेष्‍ठ भारत’ के निर्माण में सहायता प्रदान करनी चाहिए।‘’ गोयल के साथ बातचीत के दौरान प्रतिभागी युवाओं ने अपने करियर की प्रगति की राह में बाधा उत्‍पन्‍न कर रहे नक्‍सली आतंक और उचित शिक्षण संस्‍थानों के अभाव जैसे मामलों से जुड़ी अपनी चिंताओं के बारे में उन्‍हें अवगत कराया।

              गोयल ने भरोसा दिलाया कि उनका मंत्रालय खेल, शिक्षा या कौशल विकास जैसे विभिन्‍न क्षेत्रों में उनके सपनों को साकार करने में उनकी सहायता करेगा। नेहरू युवा केंद्र संगठन पहले भी 8 राज्‍यों में सफल एक्‍सचेंज प्रोग्राम का आयोजन कर चुका है। लगभग 250 विद्यार्थियों वाला मौजूदा बैंच राजधानी की अपनी इस यात्रा के दौरान राष्‍ट्रपति से भी मुलाकात करेगा।

खरीफ की फसल : रिकॉर्ड 297 मिलियन टन

            राजग सरकार ने लोगों को एक व्‍यवहार्य कैरियर विकल्‍प के रूप में कृषि को अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित करने के वास्‍ते स्‍थायी ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए योजनाएं शुरू की है।

   सरकार की योजना देश के सबसे पिछड़े जिलों में बदलाव कर इसे भारत में परिवर्तन का मॉडल बनाना है। इसमें कच्‍छ में गुजरात प्रयोग उपयोगी साबित हो रहा है। इस समय ध्‍यान देश के 100 सबसे पिछडे जिलों पर है, जिनमें से अधिकतर तीन राज्‍यों - बिहार, उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश में है। इन तीन राज्‍यों में ही पूरे देश के 70 सबसे अधिक पिछड़े जिले हैं। पूर्ववर्ती सरकारों ने कई योजनाएं विशेष रूप से सबसे पिछड़े जिलों के लिए शुरू की। वे शायद इसलिए असफल रही, क्‍योंकि उनमें अधिक ध्‍यान गरीबी उन्‍मूलन और अस्‍थायी रोजगार सृजन पर दिया गया था।

             उन्‍होंने ग्रामीण बुनियादी ढांचा तैयार नहीं किया था और सड़क‍ सिंचाई तथा संपर्क के अभाव में कृषि क्षेत्रों को भी लाभदायक नहीं बना सके। प्रधानमंत्री बनने से पहले मुख्‍यमंत्री के तौर पर नरेन्‍द्र मोदी ने भूकंप से तबाह हुए और निराश कच्‍छ के रन को आशावादी भूमि में परिवर्तित कर दिया। नरेन्‍द्र मोदी ने 2003 से 2014 तक गुजरात में दहाई के आंकड़े की कृषि वृद्धि का युग बनाने का नाबाद रिकॉर्ड कायम किया है, जबकि उस समय राष्‍ट्रीय औसत दो प्रतिशत से कम पर था। मोदी ने अगले चार वर्षों में भारतीय किसानों की आय को दोगुना करने की भी प्रतिज्ञा ली है। 

               गुजरात के कृषि क्षेत्र की इस सफल दास्‍तां से प्रेरित होकर मध्‍य प्रदेश छत्‍तीसगढ़ और महाराष्‍ट्र जैसे कई अन्‍य राज्‍यों ने एक ऐसे राज्‍य की तकनीकों को अपनाया है, जिसे कभी भी कृषि प्रधान राज्‍य नहीं माना जाता था। इसका सबसे बड़ा कारण राज्‍य का विशाल सौराष्‍ट्र क्षेत्र है जहां प्रतिवर्ष सूखा पड़ने से लोगों और जानवरों का पलायन होता था। कृषि क्षेत्र की वृद्धि की कार्यनीति बेहतर सिंचाई, खेती के आधुनिक उपकरण, किफायती कृषि ऋण की आसानी से उपलब्‍धता 24 घंटे बिजली और कृषि उत्‍पादों का तकनीक अनुकूल विपणन पर तैयार की गई थी। इन प्रत्‍येक पहलों में बड़ी संख्‍या में नवीन योजनाएं बनाई। उनका कार्यान्‍वयन किया गया था। 

            केंद्र की राजग सरकार उनके अनुभव को पूरे देश में दोहराने की कोशिश कर रही है। कृषि भूमि की स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति का पता लगाने के लिए मृदा जांच कृषि क्रांति की दिशा में एक प्रमुख कदम है, जबकि नीम लेपित यूरिया दूसरा कदम है। इस दिशा में अन्‍य कदम बांध निर्माण, जलाशयों और अन्‍य जल संरक्षण विधियों के जरिए जल संरक्षण, भू-जल स्‍तर बढ़ाना, टपक सिंचाई को बढ़ावा देकर पानी की बर्बादी कम करना, मृदा की उर्वरकता का अध्‍ययन कर फसलों के तरीकों में बदलाव करना, पानी की उपलब्‍धता और बाजार की स्थिति है।

           विद्युतीकरण, पंचायतों में कंप्‍यूटरीकरण, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के जरिए सड़क निर्माण के माध्‍यम से प्रौद्योगिकी उपलब्‍ध कराने से जमीनी स्‍तर पर विकास सुनिश्चित होगा। सड़क निर्माण से प्रत्‍येक गांव के लिए बाजार और इंटरनेट संपर्क उपलब्‍ध कराने में भी मदद मिलेगी। पहली बार देश के इतनी अधिक संख्‍या में गरीब बैंक खाताधारक बने है। जनधन योजना के अंतर्गत लगभग 35 करोड़ नए खाते खोले गए है। यह वित्‍तीय समावेशन गतिशील कृषि अर्थव्‍यवस्‍था का केंद्र है। वित्‍तीय वर्ष में सरकार ने सीधे नकद हस्‍तांतरण के जरिए 50,000 करोड़ रूपये की बचत की है। 50 मिलियन गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए नि:शुल्‍क रसोई गैस प्रदान करने से लाखों परिवारों के जीवन में बदलाव आ रहा है। 

             सबसे अधिक वार्षिक आवंटन और कृषि श्रमिकों की उपलब्‍धता सुनिश्चित कर ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को दोबारा तैयार किया गया है। इनसे श्रमिकों द्वारा अपनी पारंपरिक कृषि श्रम को छोड़कर शहरों की ओर पलायन भी कम होगा। कृषि क्षेत्र लाभदायक कैसे बन सकता है? इस दशक के अंत तक कृ‍षकों की आय दोगुनी कैसे हो सकती है? क्‍या इससे ग्रामीण ऋणग्रस्‍तता और किसानों की आत्‍म हत्‍या को  रोकना सुनिश्चित किया जा सकता है?  हां ये सब संभव हो सकता है अगर प्रधानमंत्री ने जो गुजरात में हासिल किया है उसे राष्‍ट्रीय स्‍तर पर दोहराने में सक्षम होते है तो। मोदी ने आम आदमी को अपने आर्थिक गाथा में महत्‍वपूर्ण स्‍थान पर रखा है। उन्‍होंने भारतीय किसानों के प्रति काफी विश्‍वास व्‍यक्‍त किया है। 

            अपनी वृद्धि की परिकल्‍पना में कृषि को केंद्रीय मंच पर लाये हैं। कृषि क्षेत्र में परिवर्तन के लिए आवंटन की नई योजनाओं से इस आकर्षक कहानी का पता लगता है। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए अगले वर्ष 1.87 लाख करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है। इसके लिए प्रमुख क्षेत्र मनरेगा तथा सरल कृषि ऋण और बेहतर सिंचाई की उपलब्‍धता है। सिंचाई कोष और डेयरी कोष में काफी वृद्धि की गई है। कृषि ऋण योजना के साथ फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल बीमा के लिए दस लाख करोड़ दिए गए है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। 

          अधिक ऋण से कृषि निवेश को बढ़ावा मिलेगा। खाद्य प्रसंस्‍करण औद्योगिकीकरण के लिए प्रेरणा मिलेगी। इससे किसानों को स्‍थायीत्‍व और बेहतर लाभ प्राप्‍त होगा। इससे ग्रामीण भारत  में रोजगार के अवसर भी बढ़ेगे। इस मौसम में रबी की आठ प्रतिशत से अधिक फसल लगाई गई है। खबरों में कहा गया है कि बेहतर वर्षा के कारण इस बार खरीफ की फसल रिकॉर्ड 297 मिलियन टन हो सकती है।

            बेहतर सड़क निर्माण, 2000 किलेमीटर की तटीय संपर्क सड़क और भारत नेट के अंतर्गत 130,000 पंचायतों को उच्‍च गति के ब्राडबैंड प्राप्‍त होने से निश्चित रूप से कृषि उत्‍पादों की मार्केटिंग में सुधार और बेहतर कीमतें मिलेंगी, जिसके कारण यह एक लाभदायक कैरियर विकल्‍प हो सकता है। इन नीति संचालित, लक्ष्‍य आधारित उपायों के कार्यान्‍वयन से कृषि उत्‍पादन में काफी उछाल आयेगा और सभी के लिए भोजन तथा देश से गरीबी पूर्ण रूप से समाप्‍त करने का सपना साकार होगा।

उद्यमिता शिक्षा को प्रोत्‍साहन: 15 लाख युवाओं को उद्यमिता

           कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय तथा वधवानी ऑपरेटिंग फाउंडेशन (डब्‍ल्‍यूओएफ) ने प्रधानमंत्री युवा योजना के साथ देश में उद्यमिता और कौशल विकास पहलों को संयुक्‍त रूप से विकसित और कार्यान्‍वित करने के लिए प्रारंभिक समझ को पूर्ण करने के लिए इस दिशा में प्रथम संयुक्‍त प्रयास के रूप में यहां दो समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए। 

            इन समझौतों पर मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव सुश्री ज्‍योत्‍सना सित्लिंग और डब्‍ल्‍यूओएफ के कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय केला ने हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री युवा योजना का शुभारंभ मंत्रालय द्वारा 2016 में देश भर के लगभग 15 लाख विद्यार्थियों को 3050 परियोजना संस्‍थाओं के माध्‍यम से ऑनलाइन उद्यमिता शिक्षा प्रदान करने के लक्ष्‍य के साथ किया गया था। इन संस्‍थाओं में उच्‍च शिक्षण संस्‍थान, स्‍कूल, आईआईटी और उद्यमिता विकास केंद्र, सरकारी और निजी दोनों, शामिल हैं। ऑनलाइन उद्यमिता मॉड्यूल्‍स को क्‍लासरूम आधारित प्रायोगिक शिक्षण कार्यकलापों और प्रेक्‍टिकम्‍स के साथ विधिवत सहायता दी जाएगी, जिन्‍हें शैक्षिक संस्‍थाओं के विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा सुगम बनाया जाएगा। मंत्रालय योजना के अंतर्गत विविध गतिविधियों को संचालित करने के लिए इन संस्‍थाओं को वित्‍तीय सहायता भी उपलब्‍ध कराएगी।

               पांच वर्षों की इस योजना के दौरान 23,000 से ज्‍यादा उद्यम स्‍थापित किए जाने की संभावना है। इसके परिणामस्‍वरूप देश में 2.30 लाख से ज्‍यादा रोजगार के प्रत्‍यक्ष और परोक्ष अवसरों का सृजन हो सकता है। इस योजना में उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में इच्‍छुक छात्रों को विशेष रूप से विकसित किए गए सामाजिक उद्यमिता मॉड्यूल प्रदान किए जाने की भी परिकल्‍पना की गई है। 

             ज्ञान साझेदार (नॉलेज पार्टनर) के रूप में डब्‍ल्‍यूओएफ योजना के अंतर्गत नि:शुल्‍क सॉफ्टवेयर, विषय-वस्‍तु तथा शिक्षक और फील्‍ड स्‍टाफ के प्रशिक्षण और कार्यक्रम परामर्श सेवाओं का योगदान दे रहा है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने इस अवसर पर अपने संबोंधन के दौरान विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि यह योजना एक उद्यमी भारत का निर्माण करने के वर्तमान केंद्र सरकार के विजन को साकार करने में सफल होगी। उन्‍होंने कहा, ‘निश्‍चित रूप से यह एक महान पहल है। 

            अब हम कौशल और उद्यमिता के लिए स्कूलों को साथ जोड़ रहे हैं। हम शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास उद्यमिता पाठ्यक्रम हैं। यह पहल इन्‍हें और ज्‍यादा उपयोगी बनाएगी।’

कुवैत के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संदेश

            राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कुवैत के राष्ट्रीय दिवस (25 फरवरी, 2017) की पूर्व संध्या पर वहां के अमीर और जनता को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। 

           कुवैत के अमीर महामहिम शेख सबाह अल-अहमद अल-जबेर अल-सबाह को भेजे अपने संदेश में राष्‍ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत सरकार, यहां की जनता और अपनी तरफ से, मुझे आपको और कुवैत की जनता को आपके देश के राष्‍ट्रीय दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए अपार हर्ष हो रहा है।  हमारे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्‍कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान और जनता के बीच आपसी संबंधों पर आधारित ऐतिहासिक, करीबी और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं।

             मुझे विश्‍वास है कि आने वाले वर्षों में विभिन्‍न क्षेत्रों में हमारी परस्‍पर लाभकारी सहभागिता और ज्‍यादा विविधतापूर्ण और मजबूत होगी।  महामहिम इस अवसर पर मैं आपकी सेहत और कल्‍याण की कामना के साथ ही साथ, कुवैत की मित्रवत् जनता की प्रगति और खुशहाली के लिए शुभकामनाएं देता हूं।‘’

आईएनएस बेतवा का परिचालन अप्रैल 2018 से  

           नौसेना गोदी, मुंबई और मैसर्स रिसोल्‍व मरीन द्वारा किए गए प्रयासों से पी-16ए वर्ग के पोत- आईएनएस बेतवा को दोबारा परिचालन के लिए खड़ा किया गया है। 

          रिसोल्‍व मरीन को इसके परिचालन का विशेष अनुबंध दिया गया था। 5 दिसंबर, 2016 से इस पोत की मरम्‍मत की जा रही है। युद्ध स्‍तर पर पोत को बचाने का काम किया जा रहा था। 29 दिसंबर, 2016 को पोत की शुरूआती स्थि‍रता हासिल कर ली गई थी। अप्रैल 2016 से पोत पर कई सुधार और आधुनिक उपकरण लगाए जा रहे थे।

 भारतीय नौसेना को विश्‍वास है कि अपने विशेषज्ञों और सतत प्रयासों से पोत को निर्धारित तिथि यानी अप्रैल 2018 तक दोबारा पूरी तरह से परिचालन के लिए तैयार हो जाएगा।

भारत सदैव ज्ञान व खोज का भंडार रहा

                 राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नई दिल्‍ली में ‘भारत बोध’ पर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। इसका आयोजन इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मुक्‍त विश्‍वविद्यालय (इग्‍नू) और भारतीय शिक्षण मंडल की ओर से किया गया है।

             इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने अपने उद्गार व्‍यक्‍त करते हुए इस सम्‍मेलन का आयोजन करने और ‘भारत बोध’ के विभिन्‍न पहलुओं को स्‍पष्‍ट करने के लिए बुद्धिजीवियों, शिक्षाविद्, और शोधकर्ताओं को एक साथ लाने के लिए इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मुक्‍त विश्‍वविद्यालय का भारतीय शिक्षण मंडल की सराहना की। उन्‍होंने इस बात पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि तीन दिन के इस महत्‍वपूर्ण सम्‍मेलन में ये दोनों सहयोगी अपनी-अपनी विशेषज्ञता और विद्वता को संजो कर लाए हैं। 

               राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत सदैव ज्ञान का खोज के भंडार के रूप जाना जाता रहा है। ऐसा ज्ञान जो मुक्ति प्रदान करता है। खोज जो मानवता और सह-‍अस्तित्‍व के गहन चिंतन की थाह लेती है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि सम्‍मेलन में होने वाला विचार विमर्श हमारे देश के बारे में हमारी धारणाओं को समृद्ध बनाएगा। 

           उन्‍होंने कहा कि भारत का विचार हमारी समृद्ध बौद्धिक परम्‍पराओं के शाश्‍वत विवेक से प्रवाहित होता है। हमारे मूल नागरिकता के मूल्‍य- जो आज भी उतने ही प्रासांगिक हैं। मातृभूमि के लिए प्रेम, कर्तव्‍य निवर्हन, सभी के लिए करुणा, बहुलवाद के लिए सहनशीलता, महिलाओं के लिए सम्‍मान, आचरण में आत्‍मसंयम, कार्य में उत्‍तरदायित्‍व और अनुशासन की बात कहते हैं। भारतीय विश्‍व दर्शन का निर्माण करते हैं।

एस्तोनिया के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संदेश



            राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एस्‍तोनिया गणराज्य के राष्ट्रीय दिवस (24 फरवरी, 2017) की पूर्व संध्या पर वहां की सरकार और लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। एस्‍तोनिया गणराज्‍य की राष्‍ट्रपति महामहिम सुश्री केरस्‍ती कालजुलेद को भेजे अपने संदेश में राष्‍ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत सरकार, भारत की जनता और अपनी तरफ से, मुझे आपको और एस्‍तोनिया गणराज्‍य की जनता को आपके देश के राष्‍ट्रीय दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए अत्‍यंत हर्ष हो रहा है। भारत और एस्‍तोनिया के बीच सदैव सौहार्दपूर्ण एवं मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं।

             मुझे पूरा विश्‍वास है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों की जनता के परस्‍पर लाभ के लिए हमारे संबंध निरंतर मजबूत और व्‍यापक होंगे। महामहिम इस अवसर पर मैं आपकी सेहत और कल्‍याण के साथ ही साथ, एस्‍तोनिया की मित्रवत् जनता की प्रगति और खुशहाली के लिए शुभकामनाएं देता हूं।‘’

Thursday, 23 February 2017

श्रम रजिस्टरों की संख्या अब 56 से घट कर केवल 5 रजिस्टर

           सरकार ने कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों में लगभग 5.85 करोड़ प्रतिष्ठानों के श्रम रजिस्टरों के रखरखाव कार्य को सरल कर दिया है। 

         ये रजिस्टर कर्मचारियों, उनके वेतन, ऋणों/ वसूली, हाजिरी इत्यादि से संबंधित हैं। इस कदम से इन प्रतिष्ठानों द्वारा रखरखाव किए जाने वाले रजिस्टरों की संख्या मौजूदा 56 से काफी घटकर केवल 5 रजिस्टर रह जाएगी। ओवरलैपिंग/ अनावश्यक क्षेत्रों वाले रजिस्टरों की संख्या कम कर देने से ही यह संभव हो पा रहा है। इससे इन प्रतिष्ठानों को अपनी लागत एवं प्रयासों में कमी करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही श्रम कानूनों का बेहतर अनुपालन भी सुनिश्चित होगा। विभिन्न केंद्रीय श्रम अधिनियमों के तहत कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों के प्रतिष्ठानों द्वारा अनेक रजिस्टरों का रखरखाव करना आवश्यक होता है, जो कर्मचारियों की संख्या की सीमा पर निर्भर करता है। 

           वर्ष 2013-2014 के दौरान की गई केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की छठी आर्थिक गणना के मुताबिक, भारत में कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों में संयुक्त रूप से लगभग 5.85 करोड़ प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 4.54 करोड़ प्रतिष्ठान गैर-कृषि क्षेत्र में हैं।  केंद्रीय अधिनियमों के तहत उपलब्ध कराए गए विभिन्न रिटर्न/रजिस्टर/फॉर्म भरने की जरूरत की समीक्षा करते वक्त ऐसे अनेक क्षेत्रों वाले रजिस्टर पाए गए, जो ओवरलैपिंग/अनावश्यक थे। जिनकी संख्या को तर्कसंगत करना संभव था। रजिस्टरों/आंकड़ों वाले क्षेत्रों की संख्या कम करने के लिए 4 नवम्बर, 2016 को एक प्रयोजन अधिसूचना जारी की गई थी।

              इसे संबंधित मंत्रालयों/ विभागों, राज्य सरकारों, अन्य हितधारकों के बीच प्रसारित किया गया था। इसके साथ ही इसे सार्वजनिक तौर पर भी पेश किया गया था। वास्तव में, विभिन्न अधिनियमों/नियमों के तहत परिकल्पित सभी पिछले रजिस्टरों को हटा दिया गया है। इनके स्थान पर केवल 5 सामान्य रजिस्टरों को ही रखा गया है। इस कदम से 5 रजिस्टरों में निहित आंकड़े वाले क्षेत्रों (डेटा फील्ड) की संख्या घटकर केवल 144 रह गई है, जबकि इससे पहले 56 रजिस्टरों में इस तरह के आंकड़े वाले क्षेत्रों की संख्या 933 थी। इसके साथ-साथ श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इन 5 सामान्य रजिस्टरों के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित करने का कार्य भी शुरू किया है।

            सॉफ्टवेयर के विकसित हो जाने के बाद इसे निःशुल्क डाउनलोड की सुविधा प्रदान करने के लिए श्रम और रोजगार मंत्रालय के श्रम सुविधा पोर्टल पर डाल दिया जाएगा। इसका उद्देश्य डिजिटल रूप में इन रजिस्टरों का रखरखाव सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय वित्त मंत्री की ब्रिटेन यात्रा

           केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलो के मंत्री अरूण जेटली ब्रिटेन की अपनी पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा के लिए लंदन रवाना होंगे। 24 फरवरी से शुरू होने वाला वित्त मंत्री का यह दौरा 28 फरवरी, 2017 को खत्म होगा। 

          25 फरवरी, 2017 (शनिवार) को वित्त मंत्री लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में ‘बदलते भारत : अगले दशक के लिए विजन’ विषय पर आयोजित एक चर्चा को संबोधित करेंगे। 26 फरवरी, 2017 (रविवार) वित्त मंत्री भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की), ब्रिटिश काउंसिल और ब्रिटेन में स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में भाग लेंगे। 27 फरवरी, 2017 (सोमवार) को वित्त मंत्री लंदन स्टॉक एक्सचेंज के मार्केट ओपनिंग सेरेमनी में भाग लेंगे। यहां वे प्रमुख निवेशकों के साथ बैठक करेंगे। तदुपरांत, वित्त मंत्री जेटली ब्रिटेन-भारत व्यापार परिषद (यूकेआईवीसी) के 100 से अधिक व्यापार जगत के वरिष्ठ प्रमुखों से मुलाकात करेंगे।

            इसके बाद वित्त मंत्री ब्रिटेन की विदेश सचिव बोरिस जॉनसन से मुलाकात करेंगे। वित्त मंत्री इसी दिन शाम को ब्रिटेन की महारानी द्वारा बंकिघम पैलेस में आयोजित स्वागत समारोह में भी भाग लेंगे। 28 फरवरी, 2017 (मंगलवार) को वित्त मंत्री जेटली ब्रिटेन के अपने समकक्ष से मुलाकात करेंगे। उसके बाद शाम को भारत लौटने से पहले वित्त मंत्री ब्रिटिश उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से मुलाकात करेंगे। ब्रिटेन की अपनी पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा को पूरा करने के बाद 1 मार्च, 2017 को दिल्ली पहुंचेंगे।

 भारत में 235 होम्‍योपैथिक अस्‍पताल, 8,000 क्‍लीनिक

                आयुष राज्‍य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने नई दिल्‍ली में ‘होम्‍योपैथिक औषध उत्‍पादों का नियमन : राष्‍ट्रीय एवं वैश्विक रणनीतियों’ पर विश्‍व एकीकृत चिकित्‍सा फोरम का उद्घाटन किया।

            इस अवसर पर आयुष मंत्री ने कहा कि भारत में होम्‍योपैथी ने काफी अच्‍छी तरह से संस्‍थागत स्‍वरूप हासिल कर लिया है। हमारे यहां सार्वजनिक क्षेत्र में 235 होम्‍योपैथिक अस्‍पताल और 8,000 से भी ज्‍यादा क्‍लीनिक हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत में ज्‍यादातर उत्‍पादन संयंत्र जीएमपी के अनुरूप हैं। ये गुणवत्‍ता, पैकेजिंग एवं वितरण से संबंधित नीतियों का पालन करते हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि ये सभी उत्‍पादन इकाइयां औषधि और प्रसाधन सामग्री कानून के दायरे में आती हैं। उनके लाइसेंस का नवीकरण नियमित गुणवत्‍ता परीक्षण एवं व्‍यापक निरीक्षण पर निर्भर करता है। 

              श्रीपद नाइक ने कहा कि एक ऐसे उच्‍चस्‍तरीय रणनीतिक आदान-प्रदान प्‍लेटफॉर्म की निश्चित तौर पर जरूरत है, जहां हितधारक अपने मूल कार्य संबंधी संदर्भों से इतर आपस में एकजुट हो सकें। उन्‍होंने कहा कि इस फोरम से इस जरूरत की पूर्ति की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि अन्‍य देशों में होम्‍योपैथिक दवाओं की अनुपलब्‍धता और इन दवाओं के लिए कठोर या नियामक प्रावधानों के अभाव के कारण होम्‍योपैथी का अब तक व्‍यापक रूप से उपयोग करना संभव नहीं हो पाया है। 

                 आयुष मंत्रालय में सचिव अजित एम.शरण ने भी इस बात पर खुशी जताई कि सीसीआरएच के जरिये मंत्रालय इस तरह के अनूठे कार्यक्रम का आयोजन करके वैश्विक स्‍तर पर अपनी अगुवाई का प्रदर्शन कर सकता है। सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. राज के.मनचंदा ने उम्‍मीद जताई कि इस फोरम से विश्‍वभर में नियामकीय ढांचे को मजबूत करने के लिए और ज्‍यादा परिचर्चाएं करने को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही इस बात का आश्‍वासन दिया जा सकता है कि होम्‍योपै‍थी के उपयोगकर्ताओं की व्‍यापक पहुंच उच्‍च गुणवत्‍ता वाली होम्‍योपैथिक दवाओं तक संभव हो सकती है। 

             विश्‍व एकीकृत चिकित्‍सा फोरम (डब्‍ल्‍यूआईएमएफ) के निदेशक डॉ. रॉबर्ट वैन हेजलेन के साथ-साथ फोरम के अंतर्राष्‍ट्रीय सलाहकारों ने भी इतने सारे देशों के नियामकों और होम्‍योपैथिक उद्योगपतियों को अपनी चिंताओं एवं विभिन्‍न मसलों को साझा करने के लिए एक प्‍लेटफॉर्म उपलब्‍ध कराने के चुनौतीपूर्ण कार्य को बढि़या ढंग से निभाने के लिए भारत सरकार का धन्‍यवाद किया। इस अवसर पर होम्‍यो‍पैथिक दवाओं के क्षेत्र में सहयोग के लिए होम्‍योपैथिक फार्माकोपिया कन्‍वेंशन ऑफ द यूनाइटेड स्‍टेट्स और भारत के संगठनों अर्थात भारतीय औषधि एवं होम्‍योपैथी के औषधकोश आयोग (पीसीआईएमएंडएच) और केन्‍द्रीय होम्‍योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किये गये। 

             इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन आयुष मंत्रालय और केन्‍द्रीय होम्‍योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) द्वारा किया जा रहा है। जिसमें भारतीय औषधि एवं होम्योपैथी के औषधकोश आयोग और केन्‍द्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से सहायता दी जा रही है। होम्‍योपैथिक दवा उद्योग की प्रगति में भारत के एक महत्‍वपूर्ण देश के रूप में होने को लेकर बढ़ती अन्‍तर्राष्‍ट्रीय अवधारणा को ध्‍यान में रखते हुए यह अपनी तरह का पहला फोरम है।

             दवा कानून निर्माता, नियामक, निर्माता एवं विभिन्‍न नियामक प्राधिकरणों के फार्माकोपियल विशेषज्ञ, जाने-माने वैज्ञानिक संगठन और 25 देशों के दवा उद्योगों के प्रतिनिधि इस फोरम की दो दिवसीय बैठक में भाग ले रहे हैं, जिसमें होम्‍योपैथिक दवा उद्योग के कार्रवाई योग्‍य पहलुओं की रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे इस क्षेत्र में वैश्विक स्‍तर पर अनुकूलन को बढ़ावा मिलेगा। फोरम की उपर्युक्‍त बैठक के दौरान अनेक मसलों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। विभिन्‍न देशों में मौजूदा नियाम‍कीय स्थिति, दुनिया के अनेक महत्‍वपूर्ण देशों में संभावित व्‍यापार अवसर, नियामकीय चुनौतियों के संभावित समाधान, राष्‍ट्रीय एवं वैश्विक स्‍तर पर चुनौतियों से कारगर ढंग से निपटने के लिए ज्ञान एवं नेटवर्क का निर्माण करना इत्‍यादि इन मसलों में शामिल हैं।

पूर्वोत्तर में उद्यमशीलता को प्रोत्साहन

            तेजपुर विश्वविद्यालय के व्यवसायिक प्रशासन विभाग और पूर्वोत्तर वित्त निगम लिमिटेड (एनईडीएफआई) के साथ मिलकर पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) संयुक्त रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक बिजनेस आइडिया चैलेंज का आयोजन करेगा। 

           वार्षिक उद्योग जगत, शिक्षाविद इंटरफेस कार्यक्रम “सम्पर्क” पहली बार पूर्वोत्तर मंत्रालय के इस कार्यक्रम में सहभागिता करेगा। इस क्षेत्र में उद्यमशीलता की भावना को मजबूत करेगा। इस कार्यक्रम का आयोजन 3 मार्च, 2017 को किया जाएगा। यह श्रृंखला का 17वां संस्करण होगा। कार्यक्रम के एक भाग के रूप में छात्रों को उद्यमशीलता के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए एक पायनियरिंग बिजनेस आइडिया चैलेंज 2017 का भी आयोजन किया जाएगा। 

             एक बिजनेस आइडिया के साथ प्रतियोगिता में पूर्वोत्तर क्षेत्र का कोई भी छात्र भाग ले सकता है। इस प्रतियोगिता के विजेता के पास न केवल पुरस्कार जीतने का मौका रहेगा बल्कि संभावित वित्त पोषण के लिए आर्थिक सहायता करने वाली एजेंसियों के सामने अपने विचारों को भी पेश करने का मौका मिलेगा। पहले पुरस्कार के रूप में 20 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 15 हजार रूपये तथा तृतीय पुरस्कार के रूप में 10 हजार रूपये दिए जायेंगे। प्रतियोगिता 26 फरवरी, 2017 तक खुली है।

              संकाय समन्वयक प्रो. सुभरंगशू शेखर सरकार ने केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास क्षेत्र मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मंत्रालय पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए गंभीर है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उद्यमिता विकास के लिए यह कार्यक्रम जागरूकता पैदा करने के साथ युवाओं को एक मंच प्रदान प्रदान करेगा। “संपर्क 2017” में छात्रों को प्रेरित करने के लिए विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जाएगा। जिसे उद्यमियों और प्रमुख स्टार्टअप्स द्वारा संबोधित किया जाएगा। ‘एक्ट इस्ट पोलिसी’ भी इस कार्यक्रम का एक हिस्सा होगा। यहां एक विशेष बातचीत सत्र का भी आयोजन किया जाएगा। 

यहां पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली एजेंसियों के प्रमुख भावी उद्यमियों और स्टार्टअप्स के विभिन्न सवालों के भी जवाब दिये जायेंगे। केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव नवीन वर्मा मुख्य अतिथि होंगे। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव एस. एन. प्रधान, पूर्वोत्तर विकास वित्त निगम लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बी. पॉल इस कार्यक्रम के प्रमुख गणमान्य व्यक्ति होंगे।

वस्‍तु एवं सेवा कर के लिए मोबाइल एप लांच

           सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान को ध्‍यान में रखते हुए केन्‍द्रीय उत्‍पाद एवं सीमा शुल्‍क बोर्ड (सीबीईसी) ने वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए एक मोबाइल एप लांच किया है।

          करदाता इसके जरिये जीएसटी से जुड़ी निम्‍नलिखित जानकारियां हासिल कर सकते हैं, कानून-मॉडल जीएसटी कानून, आईजीएसटी कानून और जीएसटी मुआवजा कानून, मसौदा नियम-पंजीकरण, रिटर्न, भुगतान, रिफंड और इनवायस से संबंधित नियम, जीएसटी पर अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न (एफएक्‍यू), जीएसटी से संबंधित विभिन्‍न संसाधन जैसे कि कोई वीडियो, लेख इत्‍यादि, मोबाइल एप्‍लीकेशन से करदाताओं को जीएसटी पर नवीनतम जानकारियां अच्‍छी तरह से सुलभ हो जाएंगी।

            करदाता इसके अलावा अपनी ओर से सुझाव (फीडबैक) भी दे सकते हैं। इसके साथ ही वे एक टोल फ्री नम्‍बर अथवा ईमेल के जरिये एक बटन दबाकर सीबीईसी की चौबीसों घंटे कार्यरत रहने वाली हेल्‍पडेस्‍क ‘सीबीईसी मित्र’ से संपर्क कर सकते हैं। मोबाइल एप को एंड्रायड प्‍लेटफॉर्मों पर नि:शुल्‍क डाउनलोड किया जा सकता है। इसके  आईओएस वर्जन को जल्‍द ही उपलब्‍ध कराया जाएगा। 

           अपने सहज एवं उपयोग में आसान इंटरफेस की बदौलत जीएसटी मोबाइल एप्‍लीकेशन कारोबार में और ज्‍यादा आसानी सुनिश्चित करने एवं करदाताओं को उत्‍कृष्‍ट सेवाएं मुहैया कराने की दिशा में सीबीईसी की एक और बढि़या पहल है।

मीडिया व मानवाधिकारों पर चर्चा

            भारतीय विधि संस्थान, दिल्ली और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ‘मीडिया और मानवाधिकार : मुद्दे और चुनौतियां’ विषय पर मीडिया कर्मियों और सरकारी जनसंपर्क अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया। 

           इस कार्यक्रम में 50 सरकारी जनसंपर्क अधिकारियों, मीडिया कर्मियों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों तथा छात्रों ने भागीदारी की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के संयुक्त सचिव (पी एंड सी) ने मानवाधिकारों के संरक्षण देने और उनका प्रचार करने में मीडिया की एतिहासिक भूमिका की चर्चा की।

                उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मीडिया लोगों की आवाज है। मीडिया अधिकार और पात्रता है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह दूरदराज तक पहुंचने में युवाओं को एकत्र करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। 

          अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर चर्चा करते हुए भारतीय विधि संस्थान, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिन्हा और अंतर्राष्ट्रीय विधि और मानवाधिकार के जाने - माने विशेषज्ञों ने मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए मीडिया के प्रभाव को रेखांकित किया।

केन्‍द्रीय विद्यालय के नये भवन की आधारशिला

            सरकार विद्यार्थियों को उच्‍च गुणवत्‍ता वाली शिक्षा मुहैया कराने की दिशा में काफी सक्रियता के साथ काम कर रही है, क्‍योंकि उसका स्‍पष्‍ट मानना है कि केवल उचित एवं गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा में ही सुदृढ़ चरित्र वाले अच्‍छे नागरिकों के विकास की क्षमता होती है।

            शाहदरा में केन्‍द्रीय विद्यालय के नये भवन के शिलान्‍यास समारोह में इस बात का उल्‍लेख करते हुए केन्‍द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्राथमिकता के आधार पर देशभर में विद्यार्थियों को दी जाने वाली शिक्षा को बेहतर करने के साथ-साथ गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने की जरूरत पर विशेष बल दिया। उन्‍होंने कहा कि केन्‍द्रीय विद्यालय उच्‍च गुणवत्‍ता वाली शिक्षा के पर्याय माने जाते हैं, क्‍योंकि अभिभावकों का यही सपना होता है कि उनके बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा मिले। 

             उन्‍होंने कहा कि शिक्षा के अलावा खेलकूद से जुड़ी गतिविधियां भी शिक्षा का एक महत्‍वपूर्ण पहलू है, क्‍योंकि खेलकूद के दौरान कड़ी मेहनत करने और पसीना बहाने के बाद विद्यार्थियों में खेलों के जरिये सामूहिक भावना पनपती है। जावड़ेकर ने कहा कि मैदान पर पसीना बहाने से ही बेहतर विद्यार्थी उभर कर सामने आते हैं। मं‍त्री ने कहा कि महानगरों के साथ-साथ अन्‍य जगहों पर भी जमीन की भारी कमी को देखते हुए सरकार ने देश में नये केन्‍द्रीय विद्यालयों के निर्माण के लिए भूमि की आवश्‍यकता संबंधी मानकों में ढील देने का निर्णय लिया है। 

              मंत्री ने कहा कि 6 महानगरों में इसके लिए भूमि संबंधी आवश्‍यकता को मौजूदा 4 एकड़ से घटाकर अब 2.5 एकड़ और देशभर में अन्‍य स्‍थानों पर इसके लिए भूमि की आवश्‍यकता को मौजूदा 8 एकड़ से घटाकर 5 एकड़ कर दिया गया है। जावड़ेकर ने कहा कि दाखिले के लिए बेहतर अवसर मुहैया कराने के उद्देश्‍य से फॉर्म भरने की प्रक्रिया को इसी सत्र से ऑनलाइन कर दिया गया है, ताकि लोगों को केन्‍द्रीय विद्यालयों में अपने बच्‍चों के दाखिले के लिए यहां-वहां भटकना न पड़े। उन्‍होंने कहा कि इस संबंध में केन्‍द्रीय विद्यालय संगठन की वेबसाइट पर एक लिंक उपलब्‍ध कराया गया है। 

            जावड़ेकर ने कहा कि शिक्षकों की भारी कमी को ध्‍यान में रखते हुए केन्‍द्रीय विद्यालय संगठन ने 6,000 से भी ज्‍यादा शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। उन्‍होंने कहा कि इसे जल्‍द ही अधिसूचित किया जाएगा। इस समारोह को मनोज तिवारी ने भी संबोधित किया, जो उत्तर-पूर्वी दिल्ली से वर्तमान लोकसभा सांसद हैं। तिवारी ने दिल्‍ली के शाहदरा जिले में प्रथम केन्‍द्रीय विद्यालय के निर्माण कार्य को मंजूरी देने के लिए प्रकाश जावड़ेकर का आभार व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने कहा कि प्रकाश जावड़ेकर प्रथम केन्‍द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री हैं, जिन्‍होंने इस क्षेत्र का दौरा किया है।

भारत एवं पोलैंड के बीच कृषि समझौता

            प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग पर भारत एवं पोलैंड के बीच एक समझौते पर हस्‍ताक्षर के लिए अपनी मंजूरी दी है। 

       इस समझौते के दायरे में कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति पर सूचनाओं के आदान-प्रदान, फसलों के पादप की स्थिति, हानिकारक जीवों से उत्‍पन्‍न खतरा और पशु संक्रामक रोगों से उत्‍पन्‍न खतरा सहित कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की विभिन्‍न गतिविधियां शामिल हैं। 

            इसमें कृषि एवं कृषि-खाद्य प्रसंस्‍करण से संबंधित मेलों, प्रदर्शनियों, सेमिनारों और सम्‍मेलनों में भागीदारी भी शामिल हैं। साथ ही यह दोनों देशों की कॉन्‍ट्रैक्टिंग पार्टीज के बीच कृषि-खाद्य व्‍यापार अथवा उसके समर्थन सहित संयुक्‍त आर्थिक गतिविधियों के विकास को भी बढ़ावा देगा।

             इस समझौते से एक संयुक्‍त कार्यसमूह (जेडब्‍ल्‍यूजी) के गठन का मार्ग भी प्रशस्‍त होगा जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जेडब्‍ल्‍यूजी सहयोग के लिए योजना तैयार करेगा और समझौते के कार्यान्‍वयन के दौरान उत्‍पन्‍न होने वाली समस्‍याओं के लिए समाधान भी मुहैया कराएगा।

 

भारत के दिव्यांग युवाओं को सम्मान

             सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने 21 से 25 नवंबर, 2016 को यांग्झू, चीन में आयोजित ग्लोबल आईटी चैलेंज (जीआईटीसी) 2016 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दिव्यांग युवाओं को यहां सम्मानित किया।

            उन्होंने इन युवाओं को इस दिव्यांग कार्यक्रम के लिए तैयार करने के मंत्रालय के प्रयास में मदद करने के लिए एनआईटी, कुरूक्षेत्र औऱ अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट, नई दिल्ली के शिक्षकों का भी सम्मानित किया। उन्होंने सभी युवाओं को उनके भविष्य की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। टीम ने कुल पांच पुरस्कार- व्यक्तिगत श्रेणी में चार और समूह श्रेणी में एक पुरस्कार प्राप्त किया।

                इस वैश्विक कार्यक्रम में भारत चीन और कोरिया के बाद तीसरे स्थान पर रहा। इसमें एशिया प्रशान्त क्षेत्र के 16 देशों के 270 प्रतिभागी शामिल हुए थे। भारत ने जकार्ता, इंडोनेशिया में आयोजित जीआईटीसी-2015 में भी 2 पुरस्कार जीते थे। इन दिव्यांग युवाओं का चयन जुलाई 2016 में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), कुरूक्षेत्र के सहयोग से विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की आईटी प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया गया था।

सार्वभौम स्वर्ण बांड- 2016-17 की चौथी श्रृंखला

            भारतीय रिजर्व बैंक के साथ सलाह करने के बाद भारत सरकार ने सार्वभौम स्‍वर्ण बांड- 2016-17 की चौथी श्रृंखला जारी करने का निर्णय किया है। बांड के लिए आवेदन 27 फरवरी, 2017 से 03 मार्च, 2017 तक स्‍वीकार किये जाएंगे। बांड 17 मार्च, 2017 को जारी होंगे। सभी बांड की बिक्री बैंकों, स्‍टॉक होल्डिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), निर्धारित डाकघरों और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज जैसे मान्यता प्राप्त शेयर बाजार के जरिए होगी। सार्वभौम स्‍वर्ण बांड 2016-17 श्रृंखला,  भारत सरकार की तरफ से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी।, बांड केवल भारत के निवासियों को दिए जाएंगे, जिनमें व्‍यक्ति, हिन्‍दू संयुक्‍त परिवार, न्‍यास, विश्‍वविद्यालय और धर्मार्थ संस्‍थान शामिल हैं।

 बांडों का मूल्‍यवर्ग स्‍वर्ण के संबंध में ग्राम के आधार पर होगा, जिसकी बुनियादी इकाई एक ग्राम होगी।, बांड की अवधि 8 वर्ष की होगी। ब्‍याज भुगतान की तिथि के आधार पर 5 साल में बांड भुनाने का विकल्‍प होगा। स्‍वीकृत न्‍यूनतम निवेश एक ग्राम स्वर्ण होगा। किसी कंपनी द्वारा प्रति वित्‍त वर्ष (अप्रैल-मार्च) प्रतिव्यक्ति 500 ग्राम से अधिक सोने में निवेश नहीं किया जा सकता है। इसके संबंध में स्‍वयं घोषणा करनी होगी। 

               संयुक्‍तधारक के मामले में 500 ग्राम निवेश की सीमा पहले आवेदक पर लागू होगी। बांडों का मूल्‍य भारतीय मुद्रा में तय किया जाएगा, जिसका आधार पिछले सप्‍ताह (सोमवार-शुक्रवार) का साधारण औसत होगा। इसके मद्देनजर इंडियन बुलियन एंड ज्‍वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने की अंतिम कीमत देखी जाएगा। बांड का भुगतान नगदी (अधिकतम 20,000 रुपये) या डिमांड ड्राफ्ट या चैक या इलैक्‍ट्रोनिक बैंकिंग के जरिए होगा। जीएस अधिनियम, 2006 के तहत भारत सरकार स्‍टॉक। निवेशकों को होल्डिंग सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।

             बांड डी-मेट फार्म में बदलने योग्‍य होंगे। बांड का वापसी मूल्‍य भारतीय मुद्रा में तय किया जाएगा, जिसका आधार पिछले सप्‍ताह (सोमवार-शुक्रवार) का साधारण औसत होगा। इसके मद्देनजर इंडियन बुलियन एंड ज्‍वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने की अंतिम कीमत देखी जाएगी। बांडों की बिक्री बैंकों, एससीएचआईएल और निर्धारित डाक घरों और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज जैसे मान्यता प्राप्त शेयर बाजार के जरिए होगी, जिन्‍हें सीधे या एजेंटों के जरिए अधिसूचित किया जाएगा। बांडों को ऋण लेने के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकेगा। इसका एलटीवी अनुपात समय-समय पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित साधारण स्‍वर्ण ऋण के बराबर होगा। 

         ग्राहक को पहचानो (केवाईसी) नियम वास्‍तविक सोने की खरीद जैसे ही होंगे। मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड/पैन या टैन/पासपोर्ट जैसे केवाईसी दस्‍तावेज आवश्‍यक होंगे। स्‍वर्ण बांड के ब्‍याज पर आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के तहत कर लगेगा और पूंजी की आय पर वही कर लगेगा, जो वास्‍तविक स्‍वर्ण के मामले में होता है।

सिक्किम ‘उदय’ योजना में शामिल

             भारत सरकार और सिक्किम ने उज्‍जवल डिस्‍कॉम एश्‍योरेंस योजना (उदय) के तहत राज्य के बिजली वितरण विभाग के परिचालन में सुधार के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए हैं। एमओयू पर हस्ताक्षर करने के साथ ही उदय के अंतर्गत आने वाले राज्यों की संख्या 22 हो गयी है।

             सिक्किम किफायती कोषों, एटी एंड सी में कमी और ट्रांसमिशन की खामी, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने जैसे तरीकों से ‘उदय’ के माध्यम से 481 करोड़ रूपए का कुल लाभ अर्जित करेगा। एमओयू से राज्य के बिजली वितरण विभाग की परिचालन क्षमता में सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा। बदलाव की प्रक्रिया के दौरान उत्‍तर प्रदेश और डिस्‍कॉम्‍स अनिवार्य फीडर और ट्रांसफामर्स मीटरों का वितरण, उपभोक्‍ता इंडेक्‍स एवं नुकसान की जीआईएस मैपिंग, ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड/बदलना, मीटर इत्‍यादि, बड़े ग्राहकों के लिए समार्ट मीटरिंग जैसे कदमों के जरिए परिचालन दक्षता लाने का प्रयास करेंगे। इससे पारेषण (ट्रांसमिशन) और एटीएंडसी के नुकसान को कम किया जा सकेगा। 

             इसके अलावा बिजली की आपूर्ति और वसूली के बीच के अंतर को समाप्‍त किया जा सकेगा। इस दौरान एटीएंडसी और ट्रांसमिशन नुकसान में क्रमश: 15 प्रतिशत और 3.50 प्रतिशत की कमी लाकर 453 करोड़ रूपए का अतिरिक्‍त राजस्‍व जुटाया जा सकेगा। ‘उदय’ के तहत ध्‍यान दिए जाने वाले बिंदुओं में से ऊर्जा दक्षता एक है। पीक लोड घटाने और ऊर्जा खपत को कम करने के लिए सिक्किम सरकार ऊर्जा दक्षता वाले एलईडी बल्‍बों, कृषि पंपों, पंखों एवं एयर कंडीशनरों, कुशल औद्योगिक उपकरणों को पीएटी (परफार्म, एचीव, ट्रेड) के जरिए बढ़ावा देगी।

                   इससे लगभग 25 करोड़ रूपए की बचत होने का अनुमान हैं। एक तरफ जहां राज्‍य सरकार द्वारा डिस्‍कॉम्स की परिचालन दक्षता में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। आगे बिजली आपूर्ति की लागत घटाई जाएगी वहीं केंद्र सरकार भी राज्‍य में बिजली के बुनियादी ढांचे में सुधार और आगे बिजली की लागत को कम करने के लिए डिस्‍कॉम्‍स और राज्‍य सरकार को प्रोत्‍साहन प्रदान करेगी। डीडीयूजीजेवाई, आईपीडीएस जैसी केंद्रीय योजनाएं, ऊर्जा क्षेत्र विकास निधि अथवा ऊर्जा मंत्रालय की अन्‍य योजनाएं और एमएनआरई, राज्‍य में ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए पहले से ही धन उपलब्‍ध करा रही हैं।

               अगर राज्‍य/डिस्‍कॉम्‍स योजनाओं के तहत निर्धारित परिचालन लक्ष्‍य को प्राप्‍त करते हैं तो उन्‍हें अतिरिक्‍त/प्राथमिकता के आधार पर भी अनुदान उपलब्‍ध कराने पर विचार किया जाएगा। इस एमओयू पर हस्‍ताक्षर होने का सबसे बड़ा लाभ सिक्किम के लोगों को होगा। डिस्‍कॉम्‍स द्वारा बिजली की उच्‍च मांग का अर्थ उत्‍पादन इकाइयों में अधिक पीएलएफ से होगा और ऐसा इसलिए बिजली की प्रति यूनिट की कम लागत का लाभ उपभोक्‍ताओं को मिलेगा। 

             डिस्‍कॉम्‍स एटीएंडसी नुकसान वाले क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति में वृद्धि करेगा। इस योजना से सिक्किम के अब भी बिजली से महरूम घरों में किफायती और त्वरित बिजली उपलब्‍ध कराने में मदद मिलेगी। बिजली से दूर गांवों/परिवारों को चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति से अर्थव्‍यवस्‍था को बल और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के अवसरों में सुधार आयेगा और राज्य के लोगों के जीवन में सुधार आएगा।

गुजरात के बेट द्वारिका दर्शन सर्किट को 16.27 करोड़

           शहरी विकास मंत्रालय ने केन्‍द्रीय स्‍कीम ‘धरोहर शहर विकास और संवर्धन योजना  (हृदय)’ के तहत 16.27 करोड़ रुपये की लागत से गुजरात में 6 किलोमीटर लंबे बेट द्वारि‍का दर्शन सर्किट के विकास को मंजूरी दे दी। 

             सचिव (शहरी विकास) राजीव गाबा की अध्‍यक्षता वाली हृदय राष्‍ट्रीय उच्‍चाधिकार प्राप्‍त समिति ने गुजरात के द्वारिका जिले में प्रसिद्ध द्वारिकाधीश हवेली और हनुमान दांडी को आपस में जोड़ने वाले सर्किट को मंजूरी दे दी है, जो हनुमान जी एवं उनके पुत्र मकरध्‍वज की मूर्तियों वाला एकमात्र मंदिर है। इस सर्किट के आसपास दो महत्‍वपूर्ण झीलें भी है, जिन्‍हें रणछोड़ तालाब और शंखुधर झील के नाम से जाना जाता है।

               दर्शन सर्किट के तहत जो कार्य शुरू किये जाने है, उनमें गलियों एवं पगडंडियों का विकास, समुद्र बीच के आसपास साइकिल चालन मार्ग बनाना, पौधरोपण, बेंच, विश्राम स्‍थलों, कपड़े बदलने के कमरों, पेयजल एवं शौचालय की सुविधाएं, शिल्‍प एवं खाद्य बाजार, संकेतकों को लगाना, एलईडी लाइटिंग की सुविधा, वेंडिंग स्‍थलों के लिए प्‍लाजा का इंतजाम करना इत्‍यादि शामिल हैं। 

           21 जनवरी, 2015 को शुरू की गई हृदय योजना के तहत अब तक 500 करोड़ रुपये की कुल लागत से 12 चिन्हित शहरों में धरोहरों से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास का कार्य शुरू किया जा रहा है, जिनमें द्वारिका-बेट द्वारिका भी शामिल है। सभी 12 मिशन शहरों के लिए 420 करोड़ रुपये के निवेश वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

Wednesday, 22 February 2017

हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में आपसी संबंध मजबूत

             पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) धर्मेन्‍द्र प्रधान हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में पड़ोसी देश के साथ क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के उद्देश्‍य से म्‍यांमार के आधिकारिक दौरे पर हैं।

            भारत और म्‍यांमार के बीच ऐतिहासिक एवं घनिष्‍ठ संबंध रहे हैं, जो समय के साथ निरंतर मजबूत होते रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि दोनों ही देश लंबी भूमि एवं समुद्री सीमा को साझा करते हैं। ‘लुक ईस्‍ट’ नीति के एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍से के तहत भारत म्‍यांमार को आसियान देशों के लिए मैत्री संपर्क के रूप में देखता है। प्रधान के इस दौरे से पहले म्‍यांमार के राजकीय काउंसलर डाव आउंग सैन सू कई ने अक्‍टूबर, 2016 में भारत की यात्रा की थी। प्रधान की यात्रा गत अक्‍टूबर माह के बाद दोनों देशों के बीच प्रथम मंत्रिस्‍तरीय दौरा है और इसके साथ ही यह पिछले 12 वर्षों में किसी भी भारतीय पेट्रोलियम मंत्री की पहली यात्रा है।

                अपनी यात्रा के दौरान प्रधान ने म्‍यांमार में अपने समकक्ष महामहिम यू पे जिन टुन से भेंट कीं, जो म्‍यांमार के केंद्रीय विद्युत एवं ऊर्जा मंत्री हैं। उन्‍होंने हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में द्विपक्षीय भागीदारी के विभिन्‍न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। अपस्‍ट्रीम क्षेत्र में दोनों ही नेताओं ने म्‍यांमार के अपस्‍ट्रीम क्षेत्र में भारत की तेल एवं गैस कंपनियों की मौजूदा एवं भावी भागीदारी पर विचार-विमर्श किया। वर्तमान में ओएनजीसी विदेश लि. (ओवीएल) और गेल ने म्‍यांमार के गैस उत्‍पादक ब्‍लॉकों में निवेश कर रखा है।

            ओवीएल और ऑयल इंडिया लि. ने उत्‍खनन ब्‍लॉकों में निवेश किया है। म्‍यांमार में होने वाले आगामी बोली दौर में भारतीय अपस्‍ट्रीम कंपनियों की रुचि होने के बारे में म्‍यांमार पक्ष को बता दिया गया है। 



 

गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता

           महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने बच्चों को जन्म देने के लिए  गर्भवती महिलाओं को सी-सेक्शन सर्जरी के लिए मजबूर करने की अस्पतालों की बढ़ती प्रवृत्ति के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की है। 

         विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि सी-सेक्शन सर्जरी सामान्य रूप से कुल डिलिवरी की 10 से 15 प्रतिशत होनी चाहिए। हालांकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण परिवार-4 रिपोर्टों में इस प्रतिशतता को बहुत अधिक बताया गया है। तमिलनाडु में यह प्रतिशतता 34 प्रतिशत और तेलंगाना में 58 प्रतिशत पायी गयी है। निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में यह स्थिति चिंताजनक रूप से बहुत अधिक है। तेलंगाना में, निजी अस्पतालों में सी-सेक्शन डिलिवरी करवाने वाली  महिलाओं की संख्या कुल डिलिवरी की 75 प्रतिशत है। श्रीमती मेनका संजय गांधी को सुबर्णा घोष की एक याचिका प्राप्त हुई है। 

           इस याचिका पर एक लाख से अधिक महिलाओं ने हस्ताक्षर कर रखे हैं। श्रीमती मेनका संजय गांधी ने इस मामले को स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा के साथ उठाया है। उन्होंने सुझाव दिया गया है कि इस खतरनाक प्रवृत्ति में कटौती करने का एक तरीका यह है कि सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम में होने वाले सामान्य प्रसवों की तुलना में सी-सेक्शन सर्जरियों के संबंध में जानकारी का सार्वजनिक खुलासा करने का आदेश दिया जाए है। उन्होने यह भी सुझाव दिया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से चिकित्सीय समुदाय के साथ भावी माताओं के साथ-साथ मिलकर एक अभियान चला सकता है। 

            स्वास्थ्य मंत्री को भेजे अपने संदेश में श्रीमती मेनका संजय गांधी ने इस ओर इशारा किया है कि सी-सेक्शन सर्जरी से न केवल माता के स्वास्थ्य पर बल्कि प्रसव के बाद उसके लगातार काम करने की क्षमता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। अधिकांश मामलों में सी-सेक्शन सर्जरी ने महिला के प्रजनन स्वास्थ्य को भी प्रभावित किया है।

अंत्योदय एक्सप्रेस राष्ट्र को समर्पित

                  रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने अंत्योदय एक्सप्रेस के 22 डिब्बों की नई रेक का निरीक्षण किया। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए. के. मित्तल, सदस्य (यातायात) मोहम्मद जमशेद, सदस्य (रोलिंग स्टॉक) रविंद्र गुप्ता, सदस्य (ट्रैक्शन) ए. के. कपूर, रेलवे बोर्ड के अन्य सदस्य और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आर. के.  कुलश्रेष्ठ तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे। 

             प्रभु ने नई अंत्योदय रेक की सराहना की है और इसे देश की आम जनता को समर्पित किया।  रेल गाड़ियों में यात्री सुविधाओं के स्तर में सुधार करने के लिए लगातार प्रयासों और एक मजबूत ब्रांड का सृजन करने के लिए रेलमंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने रेल बजट भाषण 2016-17 में यह घोषणा की थी कि इस सरकार का सचमुच मानना ​​है कि आम आदमी के जीवन में सुधार लाए बगैर भारत का भाग्य नहीं बदलेगा। आम आदमी न केवल हमारे नीति निर्माण का केंद्र बिंदु है बल्कि सार्वजनिक बहस और हमारी विचार धारा में भी सर्वव्यापी है।

              हम आम आदमी के लिए सघन मार्गों पर चलाई जाने वाली लंबी दूरी की पूरी तरह अनारक्षित, सुपरफास्ट ट्रेन सेवा शुरू करने का प्रस्ताव करते हैं। इस संबंध में 22 अंत्योदय डिब्बे इंटेग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई में तैयार किए गए। ये डिब्ब पूरी तरह अनारक्षित एलएचबी द्वितीय श्रेणी के हैं। जिनमें,  कुशन लगी सामान रैक जो सीटों के रूप में प्रयोग की जा सकती हैं।   डूरवे क्षेत्र में अतिरिक्त हैंडहोल्ड्स लगे हैं। सामान रैक के पास जे-हुक लगाए गए हैं।  

            डिब्बे के दोनों सिरों पर मल्टीपल यूनिट केबल लगाए गए हैं। डिब्बों में यात्रियों की आंतरिक आवाजाही के लिए गलियारे की व्यवस्था। पीने योग्य पानी की मशीन,  मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, चोरी रोकने के लिए ताले लगे अग्निशमन यंत्र, एफआरपी (फाइबर प्रबलित प्लास्टिक) मॉड्यूलर शौचालय, सुखदायक इंटीरियर रंग योजना,  शौचालय प्रयोग में होने की सूचना देने वाला डिस्प्ले बोर्ड,  एलईडी लाइट्स,  डोरवे और गैंगवे में एसएस स्लिप फ्री फर्श, बाह्य पेंटिंग के लिए रोधी भित्तिचित्र कोटिंग,। यात्री जनता को सस्ते मूल्य पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अंत्योदय एक्सप्रेस गाड़ियों की शुरूआत भारत रेलवे के प्रयास में एक प्रमुख कदम होगा। इससे भारतीय रेलवे एक मजबूत ब्रांड के रूप में उभरेगी।

साइबर स्वच्छता केंद्र : बॉटनेट क्लीनिंग एवं मालवेयर विश्लेषण केंद्र का शुभारंभ

               ‘स्‍वच्‍छ भारत’ अभियान का दायरा बढ़ाकर इसमें साइबर वर्ल्‍ड को भी लाते हुए इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने उन मालवेयर एवं बॉटनेट के विश्‍लेषण के लिए साइबर स्‍वच्‍छता केंद्र-बॉटनेट क्‍लीनिंग एवं मालवेयर विश्‍लेषण केंद्र का शुभारंभ किया जो नेटवर्कों एवं प्रणालियों को बुरी तरह प्रभावित कर देते हैं।

            यह इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान का एक हिस्‍सा है। जिसका उद्देश्‍य भारत में बॉटनेट के संक्रमण का पता लगाकर एक सुरक्षित साइबर स्‍पेस का सृजन करना,  अधिसूचित करने के साथ-साथ क्‍लीनिंग को सुनिश्‍चित करना,  अंतिम उपयोगकर्ताओं की प्रणालियों को सुरक्षित करना है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इस केंद्र का परिचालन इंडियन कंप्यूटर एमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) द्वारा किया जा रहा है। इस केंद्र का लक्ष्‍य सरकार और उद्योग जगत के बीच आपसी समन्‍वय को बढ़ाना है, ताकि सभी उपयोगकर्ताओं के बीच साइबर स्‍वच्‍छता को प्रोत्‍साहित किया जा सके। इसके साथ ही भारत में एक सुदृढ़ एवं सुरक्षित इंटरनेट परितंत्र का सृजन भी किया जा सके। 

                इस अवसर पर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘भारत पूरी दुनिया की अंकरूपण (डिजिटाइजेशन) प्रक्रिया की अगुवाई करने जा रहा है। भारत उन देशों के प्रतिष्‍ठित क्‍लब में शामिल हो गया जिन्‍होंने अपने नागरिकों के इस्‍तेमाल के लिए मालवेयर क्‍लीनिंग प्रक्रियाएं पहले से ही स्‍थापित कर रखी हैं। वर्तमान में हमारे यहां ऐसे 13 बैंक और इंटरनेट सेवा प्रदाता हैं, जो इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। देश में डिजिटल दायरे का विस्‍तार होने के साथ ही मुझे वर्ष के आखिर तक साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में स्‍टार्ट-अप की संख्‍या में काफी वृद्धि होने की उम्‍मीद है।’ 

                 रवि शंकर प्रसाद ने यह भी कहा, ‘विभिन्‍न क्षेत्रों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका और इंटरनेट के जरिए लेन-देन एवं डेटा के आदान-प्रदान में हो रही वृद्धि के साथ-साथ डिजिटल इंडिया की दिशा में तेजी से बढ़ते हमारे कदमों को देखते हुए साइबर सुरक्षा सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण कारक के रूप में उभर कर सामने आई है। प्रधानमंत्री ने यह बात दोहराई है। साइबर खतरों का सामना करना कोई ऐसा कार्य नहीं है जो सिर्फ सरकार अथवा किसी संगठन अथवा किसी व्‍यक्‍ति द्वारा ही संपन्‍न किया जाए।

                      इसके लिए भागीदारी की अवधारणा को अपनाने की जरूरत है। आज लांच किया गया यह केंद्र इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और उद्योग जगत के साथ तालमेल बैठाकर काम करेगा। यह केंद्र नागरिकों के बीच बॉटनेट और मालवेयर संक्रमण के बारे में जागरूकता भी बढ़ाएगा। इसके अलावा यह केंद्र लोगों की डिवाइस को सुरक्षित रखने के लिए आवश्‍यक कदम भी उठाएगा।’
 

              मंत्री ने साइबर स्‍वच्‍छता केंद्र का शुभारंभ करने के अवसर पर घोषणाएं कीं, राष्‍ट्रीय साइबर समन्‍वय केंद्र का परिचालन जून, 2017 तक शुरू हो जाएगा। क्षेत्रवार सीईआरटी का गठन किया जाएगा, जो सीईआरटी-इन के अंतर्गत काम करेंगी। सीईआरटी का गठन राज्‍य स्‍तर पर भी किया जाएगा।  10 और एसटीक्‍यूसी (मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन) इकाइयों की स्‍थापना की जाएगी। ऐसे किसी  भी स्‍टार्ट-अप को परीक्षण शुल्‍क देना होगा, जो साइबर सुरक्षा की तलाश में कोई डिजिटल प्रौद्योगिकी पेश करेगा, इसमें 50 प्रतिशत की कमी की जाएगी। सशक्त नामित फॉरेंसिक लैब्स साइबर अपराध को साबित करने वाले एक प्रमाणित प्राधिकरण के रूप में काम करेंगी। 

                केंद्र सरकार इस दिशा में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) और एंटी-वायरस कंपनियों के साथ अच्‍छा तालमेल बैठाते हुए कार्य करेगी। इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सचिव सुश्री अरुणा सुंदरराजन ने कहा, ‘हमारे देश में आईसीटी से जुड़े बुनियादी ढांचे के बढ़ते दायरे को देखते हुए साइबर सुरक्षा का खतरा अब और भी ज्‍यादा गंभीर एवं प्रत्‍यक्ष हो गया है। आज आम आदमी को हैंकिंग, स्‍पैमिंग, मालवेयर और आंकड़ों की चोरी होने की समस्‍याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इसके बावजूद इन मसलों के साथ-साथ इनसे संरक्षण के बारे में जागरूकता काफी कम है।

                इस दिशा में आपस में सहयोग करने के साथ-साथ साइबर स्‍वच्‍छता केंद्र जैसे सोल्‍यूशंस पेश करने की जरूरत है ताकि भारत के नागरिकों के लिए एक सुदृढ़ एवं सुरक्षित साइबर वर्ल्‍ड सुनिश्‍चित किया जा सके।’ यूएसबी प्रतिरोध, यह एक डेस्‍कटॉप सिक्‍योरिटी सोल्‍यूशन है, जो यूएसबी मास स्टोरेज डिवाइस के खतरों से रक्षा करता है। एपसंविद, यह एक डेस्‍कटॉप सोल्‍यूशन है, जो व्हाइट लिस्‍टिंग के जरिए वास्‍तविक एप्‍लीकेशन को इंस्‍टॉल करने की सुविधा देकर प्रणालियों की रक्षा करता है।

            इससे द्वेषपूर्ण एप्‍लीकेशन से होने वाले खतरों की रोकथाम करने में भी मदद मिलती है। एम-कवच, यह स्‍वदेश में ही विकसित किया गया एक सोल्‍यूशन है, जो मोबाइल में उभरने वाले सुरक्षा संबंधी खतरों का निवारण करता है।

दवाइयों की गुणवत्ता , विश्व का सबसे बड़ा दवा सर्वेक्षण

            स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने नकली और बिना मानक गुणवत्ता वाली दवाइयों की समस्याओं के लिए एक सर्वेक्षण करने से संबंधित कार्य राष्ट्रीय बायोलॉजिकल्स संस्थान (एनआईबी), नोएडा को सौंपा था। एनआईबी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। 

           आवश्यक दवाइयों की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) 2011 के 15 विभिन्न चिकित्सीय श्रेणियों से संबंधित 224 दवाई मोलेक्यूल्स को दवाई सर्वेक्षण के सांख्यिकीय डिजाइन में शामिल किया गया है। इस सर्वेक्षण के एक हिस्से के रूप में 23 खुराक फॉर्म्स नमूनों से संबंधित 47,954 दवा नमूनों को खुदरा ब्रिकी केंद्रों, सरकारी सूत्रों और आठ हवाई अड्डों और समुद्री बंदरगाहों सहित 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 654 जिलों की आपूर्ति श्रृंखला से लिया गया है। 

               1800 से अधिक नमूना लेने वाले अधिकारियों (एसडीओ) और सिविल सोसायटी / भारतीय फार्मेसी परिषद (पीसीआई) के प्रतिनिधियों को दवाई सर्वेक्षण पद्धति का राष्ट्रव्यापी प्रशिक्षण देश भर में 28 केंद्रों पर दिया गया। सिविल सोसायटी / भारतीय फार्मेसी परिषद (पीसीआई) के प्रतिनिधियों की भूमिका यह देखने की थी कि दवाओं के नमूने दवाई पद्धति के अनुसार लिए गए हैं। किसी पूर्वाग्रह को दूर करने के लिए अत्यधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती गई है।

                सभी नमूनों की परीक्षण / विश्लेषण भेषज आवश्यकताओं के अनुसार एनएबीएल से मान्यता प्राप्त केन्द्र और राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में की जाए। कुल मिलाकर 47,012 नमूनों में से 13 नमूने नकली पाए गए। 1,850 नमूने (एनएसक्यू) मानक गुणवत्ता के नहीं पाए गए। इस प्रकार भारत में बिना मानक क्वालिटी की दवाइयां 3.16 प्रतिशत और नकली दवाइयां 0.0245 प्रतिशत पाई गई।

             दवाइयों की गुणवत्ता निर्धारित करने के लिए किया गया। यह औषधि सर्वेक्षण अभी तक का वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किया गया सबसे बड़ा और पेशेवर रूप से निष्पादित किया गया सर्वेक्षण है। इस पूरी सर्वेक्षण रिपोर्ट को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट  तथा केन्द्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की वेबसाइट पर है।

कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 55.37 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल



         पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीनस्‍थ पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्‍लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के सूचना के अनुसार भारतीय बास्‍केट के कच्चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 55.37 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। यह 20 फरवरी, 2017 को दर्ज कीमत 54.97 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक है।

              रुपये के संदर्भ में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत 21 फरवरी, 2017 को बढ़कर 3708.85 रुपये प्रति बैरल हो गई, जबकि 20 फरवरी, 2017 को यह 3681.51 रुपये प्रति बैरल थी। रुपया 21 फरवरी, 2017 को 66.98 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।

राष्‍ट्रपति का गुयाना के गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर संदेश

             राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सहकारी गणराज्‍य गुयाना के गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वहां की सरकार और लोगों को बधाई तथा शुभकामनाएं दी हैं। 

           राष्ट्रपति मुखर्जी ने सहकारी गणराज्‍य गुयाना के राष्‍ट्रपति महामहिम ब्रिगेडियर (सेवा निवृत्‍त) डेविड आर्थर ग्रेन्‍जर को भेजे अपने संदेश में कहा, ‘मुझे, भारत सरकार, यहां के लोगों और अपनी ओर से गुयाना के गणतंत्र दिवस के अवसर पर महामहिम आपको बधाई देते हुए काफी प्रसन्‍नता हो रही है। भारत और गुयाना के बीच संबंध साझा मूल्‍यों और समान विचारों की ठोस नींव पर आधारित है।

        हाल ही में प्रधानमंत्री मोसेज नागामोतो की भारत यात्रा और सितम्‍बर 2016 में न्‍यूयॉर्क में संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा (यूएनजीए) से अलग गुयाना तथा भारत के विदेश मंत्रियों की बैठक से हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और बल मिला है।

             मुझे विश्‍वास है कि आगामी वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ेगा। मैं इस अवसर पर महामहिम आपके कल्‍याण और गुयाना के मित्रवत लोगों की सतत प्रगति और समृद्धि की कामना करता हूं।

राष्‍ट्रपति का ब्रुनेई दारुस्सलाम के राष्‍ट्रीय दिवस की पूर्व संध्‍या पर संदेश

             राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ब्रुनेई दारुस्सलाम के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर वहां के सुल्‍तान और लोगों को बधाई तथा शुभकामनाएं दी हैं।

             राष्ट्रपति मुखर्जी ने ब्रुनेई दारुस्सलाम के सुल्‍तान महामहिम हाजी हसन-अल बलकि़या मुइज्‍जा‍द्दीन वद्दौलाह को भेजे अपने संदेश में कहा, ‘मुझे, भारत सरकार, यहां के लोगों और अपनी ओर से ब्रुनेई दारुस्सलाम के राष्‍ट्रीय दिवस के अवसर पर महामहिम आपको और वहां के लोगों को बधाई देते हुए काफी प्रसन्‍नता हो रही है। भारत और ब्रुनेई दारुस्सलाम के बीच मित्रता और सहयोग के पारंपरिक नजदीकी संबंध है। 

              मुझे विश्वास है कि दोनों मित्र देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध और सुदृढ़ होंगे तथा आगामी वर्षों में इससे दोनों ओर के लोगों को फायदा होगा। महामहिम मैं आपके बेहतर स्वास्थ्य और कल्‍याण तथा ब्रुनेई दारुस्सलाम के मित्रवत लोगों की सतत प्रगति और समृद्धि की कामना करता हूं।

अमेरिका में नए प्रशासन के बाद द्विपक्षीय आवाजाही की एक अच्‍छी शुरुआत

           संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका के कांग्रेस के एक 26 सदस्‍यीय द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्‍त रूप से प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से मुलाकात की। 

          प्रधानमंत्री ने भारत में प्रतिनिधियों का स्‍वागत किया। उन्‍होंने कहा कि यह अमेरिका में नए प्रशासन व कांग्रेस के बाद द्विपक्षीय आवाजाही की एक अच्‍छी शुरुआत का शुभ संकेत है। प्रधानमंत्री ने राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ट्रंप के साथ हुई अपनी सकारात्‍मक बातचीत को याद किया। उन्‍होंने पिछले ढाई साल के दौरान उपजे संबंधों को और गहराई देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। 

             इस संदर्भ में उन्‍होंने भारत-अमेरिकी भागीदारी के लिए कांग्रेस के मजबूत द्विदलीय समर्थन को माना। प्रधानमंत्री ने उन संभावित क्षेत्रों के बारे में अपना दृष्टिकोण साझा किया जहां दोनों देश कहीं अधिक करीबी के साथ काम कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को कहीं अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई।

             जिससे एक-दूसरे की समृद्धि में योगदान करने में मदद मिली। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था और समाज को समृद्ध बनाने में कुशल भारतीय प्रतिभाओं की भूमिका का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कुशल पेशेवरों की आवाजाही पर एक विचारात्‍मक, संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण विकसित करने का आग्रह किया।

Tuesday, 21 February 2017

उच्‍च गुणवत्ता वाली स्‍वास्थ्‍य सेवा

            ‘भारत के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण (एनआरए) का विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) द्वारा किये गये आकलन के सफल निष्‍कर्ष से सरकार द्वारा उच्‍च गुणवत्ता वाली स्‍वास्‍थ्‍य सेवा मुहैया कराने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों को काफी बढ़ावा मिला है, जिसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।’

        यह बात केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री जे पी नड्डा ने यहां तब कही जब डब्‍ल्‍यूएचओ ने देश के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण के सफल आकलन के लिए उन्‍हें और मंत्रालय को बधाई दी। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी के गतिशील मार्गदर्शन एवं नेतृत्‍व में मंत्रालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवा क्षेत्र में इस तरह की और भी ज्‍यादा ख्‍याति अर्जित करने की दिशा में अग्रसर है। डब्‍ल्‍यूएचओ ने मंत्री को भेजे अपने पत्र में देश के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण की सराहना की है जिसे 4 के परिपक्‍वता स्‍तर के साथ ‘क्रियाशील’ घोषित किया गया है। 4 के  परिपक्‍वता स्‍तर को 5 कार्यों के संबंध में तय की गई मौजूदा विकसित परिभाषाओं के अनुसार सर्वोत्तम स्‍तर माना जाता है। 

               इसे 4 कार्यों के संबंध में 3 के परिपक्‍वता स्‍तर के साथ भी ‘क्रियाशील’ घोषित किया गया है। ‘परिपक्‍वता स्‍तर 4’ से अच्‍छे परिणामों के साथ-साथ निरंतर सुधार के लक्षण के बारे में संकेत मिलता है, जबकि ‘परिपक्‍वता स्‍तर 3’ सुव्यवस्थित प्रक्रिया पर आधारित अवधारणा, व्‍यवस्थित प्रक्रिया में सुधार के आरंभिक चरण, उद्देश्यों के लिए अनुरूपता के बारे में आंकड़ों की उपलब्‍धता और सुधार के लक्षण की मौजूदगी को दर्शाता है। मंत्री ने यह जानकारी दी कि डब्‍ल्‍यूएचओ ने भारतीय टीका नियामक प्रणाली के डब्‍ल्‍यूएचओ आकलन (बेंचमार्किंग) में शत-प्रतिशत अनुपालन करार दिया है, जो एक अन्‍य ‘उल्‍लेखनीय उपलब्‍धि‍’ है। भारतीय टीका नियामक प्रणाली का पिछला डब्‍ल्‍यूएचओ आकलन (बेंचमार्किंग) वर्ष 2012 में किया गया था, जिस दौरान एनआरए को मजबूती प्रदान करने के लिए संस्‍थागत विकास योजना (आईडीपी) के साथ-साथ खाका भी विकसित किया गया था।

             पंचयुक्त (पेंटावैलेंट) टीके को देश भर में पेश करने के साथ-साथ रोटावायरस टीके एवं खसरा रूबेला टीके को भी चरणबद्ध ढंग से पेश करते हुए देश के पूर्ण टीकाकरण कार्यक्रम के तहत नये टीकों को पेश करने का उल्‍लेख करते हुए नड्डा ने कहा कि मंत्रालय को यह भरोसा है कि भारत अपने इन ध्‍यान केन्द्रित प्रयासों के परिणामस्‍वरूप स्‍वास्‍थ्‍य सेवा क्षेत्र में अपनी समस्‍त प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लेगा। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि इसके अलावा ‘मिशन इंद्रधनुष’ ने सरकार के पूर्ण टीकाकरण अभियान को मजबूती प्रदान की है। डब्‍ल्‍यूएचओ गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित, प्रभावकारी एवं किफायती चिकित्‍सीय और स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संबंधी उत्‍पादों तक समान पहुंच को उच्‍च प्राथमिकता देता है। 

         चूंकि भारत भी टीकों, चिकित्‍सीय उपकरणों एवं परंपरागत दवाओं सहित जैविक औषधीय उत्पादों का एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता है। यह संयुक्‍त राष्‍ट्र की अनेक एजेंसियों को कई टीकों की आपूर्ति भी करता है, अत: इस तथ्‍य के मद्देनजर ‘उपर्युक्‍त सफल आकलन से भारत के औषधीय उत्‍पादों में वैश्विक भरोसा बढ़ाने में काफी मदद मि‍लेगी।’ डब्‍ल्‍यूएचओ ने यह बात भी रेखांकित की कि इससे भारत के प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ मंत्र को काफी बढ़ावा मिलेगा। पूरी तरह से क्रियाशील एनआरए टीकों की डब्ल्यूएचओ संबंधी पूर्व अर्हता के लिए पहली आवश्‍यकता है।

          इस दिशा में पात्र बनने के साथ-साथ पूर्व अर्हता संबंधी दर्जे को बनाये रखने के लिए एक अहम बात यह है कि डब्‍ल्‍यूएचओ द्वारा प्रकाशित एनआरए संकेतकों के मद्देनजर राष्‍ट्रीय नियामक प्राधिकरण (एनआरए) का आकलन क्रियाशील के रूप में किया जाये। स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण सचिव सी के मिश्रा ने भी समस्‍त टीमों को बधाई दी जिन्‍होंने देश के लिए यह उपलब्धि हासिल करने हेतु सही अर्थों में कड़ी मेहनत की है।  
  

प्रदूषण का अध्ययन सरकार खुद कराएगी

           मानव स्वास्थ्य पर प्रदूषण के असर का आकलन करने के लिए सरकार खुद अपनी ओर से अध्ययन कराएगी।

         
        पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे ने कहा कि सरकार वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों और उनके प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा किए गए कार्यों का विस्तृत ब्यौरा दिया। हाल ही में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के विभिन्न स्तरों की पहचान करने के लिए एक श्रेणीबद्ध कार्य योजना को अधिसूचित करने के लिए भेजा गया है।

               कई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सावधानी बरतने और इसका अध्ययन करने की जरूरत है। सरकार देशभर में वायु प्रदूषण की विभिन्न प्रवृत्तियों पर निगरानी रखने के लिए राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत निगरानी रख रही है। निगरानी नेटवर्क मैनुअल स्टेशनों के जरिए 29 राज्यों और 6 केन्द्रशासित प्रदेशों के 300 से अधिक शहरों में फैला है। मैनुअल स्टेशनों के अलावा 12 राज्यों के 33 शहरों में सतत् परिवेश, गुणवत्ता निगरानी स्टेशन मौजूद हैं। 

            सभी मेट्रों शहरों और कस्बों को कवर करने के लिए निगरानी नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। निगरानी के परिणामों से पता चलता है कि पार्टिकुलेट मैटर्स के स्तर की एक अस्थिर प्रवृति है। एसओ2 की दर सामान्य तौर पर तय सीमा के अंदर है, जबकि एनओ2 की दर में उतार-चढ़ाव है और यह तय सीमा से अधिक है। सरकार के मुख्य चिंता का कारण पार्टिकुलेट मैटर्स है और सरकार व्यवस्थित तरीके से इस समस्या का समाधान करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। 
  



रक्षा मंत्री ने प्रदान कीं सर्वश्रेष्ठ परेड दल ट्रॉफियां

          रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने यहां मद्रास सेपर्स और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को सर्वश्रेष्‍ठ परेड दल ट्रॉफियां प्रदान कीं।


      विजेताओं ने इस वर्ष नई दिल्‍ली के ऐतिहासिक राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में हिस्‍सा लिया था। मद्रास सेपर्स की तरफ से ब्रिगेडियर आर.के. सचदेवा और सीआईएसएफ की तरफ से बल के महानिदेशक ओ.पी. सिंह ने ट्रॉफियां प्राप्‍त कीं। समारोह में सेना प्रमुख जनरल बी.पी. रावत, नौ सेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा और वायु सेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बी.एस. धनोआ, रक्षा सचिव जी. मोहन कुमार तथा रक्षा मंत्रालय, तीनों सेनाओं और गृह मंत्रालय के आला अधिकारी उपस्‍थित थे। 

          अपने आदर्श-वाक्‍य ‘सर्वत्र’ के अनुरूप मद्रास इंजीनियर ग्रुप ने हमेशा अपने कर्तव्‍य पालन और अन्‍य गतिविधियों में सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन किया है तथा उसका 236 वर्ष का गौरवशाली इतिहास है। 

       अपनी समृद्ध परंपरा को कायम रखते हुए मद्रास सेपर्स ने एक बार फिर सर्वश्रेष्‍ठ परेड दल ट्रॉफी प्राप्‍त की है। उसे सेना दिवस और गणतंत्र दिवस परेड 2017 दोनों अवसरों पर ट्रॉफियां प्राप्‍त हुई है।   

दुर्घटनाओं की सूचना के लिए सड़क यातायात अनुसंधान

          सड़क दुर्घटनाओं की सूचना के लिए प्रारूप की समीक्षा के संबंध में सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।

             समिति की अध्‍यक्षता यातायात अनुसंधान शाखा की वरिष्‍ठ सलाहकार ने की। समिति में आईआईटी दिल्‍ली और आईआईटी खड़गपुर और डब्‍ल्‍यूएचओ के विशेषज्ञों सहित राज्‍यों के पुलिस और यातायात विभाग तथा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी शामिल थे। समिति ने अपने सुझाव सौंप दिए थे, जिन्‍हें सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्‍वीकर कर लिया है। यातायात अनुसंधान शाखा की वरिष्‍ठ सलाहकार और समिति की अध्‍यक्ष श्रीमती कीर्ति सक्‍सेना ने बताया कि दुर्घटना स्‍थल से पर्याप्‍त आंकड़े और सूचना न प्राप्‍त होने के कारण पुलिस थानों में प्राथमिकी सही तौर पर दर्ज नहीं हो पाती। 

           उन्‍होंने कहा कि दुर्घटनाओं की सूचना संबंधी मौजूदा प्रारूप की खामियों का जायजा लेने के लिए कई बार बैठक की गई। विभिन्‍न राज्‍यों और देश के अन्‍य स्‍थानों पर दुर्घटनाओं की सूचना के तरीकों का अध्‍ययन करने के बाद मंत्रालय को नया प्रारूप बनाने का सुझाव दिया गया। इसमें पुलिस की प्रमुख भूमिका होगी। समिति सदस्‍य आईआईटी दिल्‍ली की प्रो. गीतम तिवारी ने नए प्रारूप का विवरण दिया। उन्‍होंने बताया कि वर्तमान में सूचना पुलिस थानों में की जाती हैं। राज्‍य सरकारें केंद्र को रिपोर्ट भेजती हैं। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि नया प्रारूप खामियों को दूर करने में सफल होगा। 

            समिति सदस्‍य आईआईटी खड़गपुर की प्रो. सुदेष्‍णा मित्रा ने कहा कि दुर्घटना स्‍थल की रिकॉर्डिंग की अहम भूमिका है। उन्‍होंने कहा कि जीपीएस से दुर्घटना स्‍थल पर सड़क की बनावट को समझने में आसानी होगी। व्‍यापक चर्चा के बाद समिति ने एक एकीकृत  दुर्घटना रिकॉर्डें प्रारूप तैयार किया है। जिसे सभी राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस लागू करेगी। दुर्घटना रिकॉर्डें प्रारूप में पांच खंड हैं, जिसमें दुर्घटना स्‍थल, सड़क की हालत और दुघटना में लिप्‍त वाहन का विवरण और दुर्घटनाग्रस्‍त व्‍यक्‍तियों का ब्‍यौरा शामिल है।

           पहले खंड में दुर्घटना स्‍थल, वाहनों की किस्‍म आदि; दूसरे खंड में सड़क की हालत, टूट-फूट आदि; तीसरे खंड में वाहनों का विवरण; चौथे खंड में वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों की कथित अवहेलना और पांचवें खंड में वाहन चालकों के अलावा अन्‍य व्‍यक्‍तियों का विवरण दर्ज किया जाएगा।