Monday, 8 May 2017

एक लाख मीट्रिक टन तूर की खरीद को मंजूरी

            चालू खरीफ सीजन 2016-17 के दौरान तूर की खरीद के लिए मूल्‍य समर्थन योजना (पीएसएस) के क्रियान्‍वयन के लिए प्रस्‍ताव महाराष्‍ट्र सरकार की ओर से प्राप्‍त हुआ था। इस प्रस्‍ताव में यह उल्‍लेख किया गया था कि महाराष्‍ट्र में 12.56 लाख मीट्रिक टन तूर का उत्‍पादन होने का अनुमान है। पीएसएस के क्रियान्‍वयन के लिए एक बार फिर महाराष्‍ट्र सरकार की ओर से अनुरोध किया गया। नये प्रस्‍ताव में राज्‍य सरकार ने 31 मई, 2017 तक 20 लाख क्विंटल (दो लाख मीट्रिक टन) तूर खरीदने का आग्रह किया। प्रस्‍ताव पर विचार करते हुए विभाग ने 31 मई, 2017 तक पीएसएस के तहत एक लाख मीट्रिक टन तूर की खरीद को मंजूरी दी है।

भारत सर्वसम्‍मति से संयुक्‍त राष्‍ट्र के मानव बस्‍ती कार्यक्रम ‘संयुक्‍त राष्‍ट्र- पर्यावास’ का अध्‍यक्ष निर्वाचित

                   भारत को 10 वर्षों के लम्‍बे अंतराल के बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र संगठन (यूएनओ) की एक इकाई संयुक्‍त राष्‍ट्र–पर्यावास का अध्‍यक्ष सर्वसम्‍मति से चुन लिया गया है। 

           संयुक्‍त राष्‍ट्र-पर्यावास विश्‍व भर में सामाजिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ मानव बस्तियों को बढ़ावा देता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र-पर्यावास अपनी रिपोर्ट संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के समक्ष पेश करता है। आज हुए इस निर्वाचन के साथ ही आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्री एम. वेंकैया नायडू आज से केन्‍या के नैरोबी में आयोजित की जा रही संयुक्‍त राष्‍ट्र-पर्यावास की 58 सदस्‍यीय शासी परिषद की चार दिवसीय बैठक की अध्‍यक्षता करेंगे। 

             नायडू अगले दो वर्षों तक संयुक्‍त राष्‍ट्र–पर्यावास की शासी परिषद की बैठक में होने वाली चर्चाओं की अध्‍यक्षता करेंगे। वर्ष 1978 में संयुक्‍त राष्‍ट्र-पर्यावास के अस्तित्‍व में आने के बाद भारत को केवल तीन बार ही इस महत्‍वपूर्ण संगठन का अध्‍यक्ष निर्वाचित किया गया है। भारत को इससे पहले वर्ष 1988 और वर्ष 2007 में संयुक्‍त राष्‍ट्र–पर्यावास का अध्‍यक्ष निर्वाचित किया गया था।

          संयुक्‍त राष्‍ट्र-पर्यावास की शासी परिषद एक अंतर-सरकारी नीति निर्माता एवं निर्णय लेने वाला संगठन है और इस नाते वह मानव बस्तियों के बारे में एकीकृत एवं व्‍यापक अवधारणा को बढ़ावा देता रहा है और मानव बस्‍ती से जुड़ी समस्‍याओं को सुलझाने में विभिन्‍न देशों एवं क्षेत्रों की मदद करता रहा है।

रबिन्‍द्रनाथ टैगोर की जयंती पर राष्‍ट्रपति का संदेश


          गुरुदेव रबिन्‍द्रनाथ टैगोर की जयंती की पूर्व संध्‍या पर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संदेश में कहा है, ‘‘गुरुदेव रबिन्‍द्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर मैं अपने देशवासियों के साथ भारत के इस महान व्‍यक्तित्‍व को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं जिन्‍होंने राष्‍ट्रीय गान की रचना की और साहित्‍य में एशिया का पहला नोबल पुरस्‍कार प्राप्‍त किया। एक महान बुद्धिजीवी टैगोर अपनी संस्‍कृति और साहित्य के बारे में ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से सभ्यताओं के मध्‍य बातचीत के विचार से मंत्रमुग्‍ध थे।

           वह ऐसे समय अपने देश के एक आदर्श राजदूत थे, जब बाहरी दुनिया में भारत के बारे में बहुत कम ज्ञान था। गुरुदेव टैगोर ने शांति और बिरादरी का दृष्टिकोण स्‍थापित किया जिसकी प्रासंगिकता वैश्विक अपील में लगातार जारी है। जाति, पंथ और रंग से भरी दुनिया में गुरुदेव टैगोर ने विविधता, खुले दिमाग, सहिष्णुता और सह-अस्तित्व के आधार पर एक नई विश्व व्यवस्था के लिए अंतर्राष्ट्रीयवाद को बढ़ावा दिया। 

          गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर एक महान आत्मा थे, जिन्‍होंने न केवल उसने अपने जीवन काल को प्रकाशमय बनाया, बल्कि वे आज भी मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। आइये, हम इस अवसर का टैगोर के मानवता की एकता के विचार से प्रेरणा प्राप्‍त करने के लिए उपयोग करें।"

आपराधिक प्रवृत्ति में कमी लाने के लिए प्रशिक्षण

           जेल सुधारों पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जेल प्रमुखों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन में अपनाए गए प्रस्तावों पर गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख सचिवों-गृह सचिवों (कारावास प्रभारी) को एक पत्र लिखा है।

             जेल सुधारों पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जेल प्रमुखों का पांचवां राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में 29- 30 सितंबर, 2016 को हुआ था। सम्मेलन का उद्घाटन गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने किया था, जिसमें राज्यों- केंद्र शासित प्रदेशों, सीपीओ, एनजीओ इत्यादि के 150 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। कारावास प्रशासन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई थी। सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकार किया था। राज्यों- केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे सुधारों पर गौर करें और उन्हें कार्यान्वित करें। इनका उद्देश्य कारावास प्रशासनिक प्रणाली को कारगर बनाना है। सुधारों में कारावास विभाग का नाम बदल कर ‘कारावास एवं सुधारात्मक प्रशासन’ किया जाएगा, जिसके तहत एकीकृत कारावास, सुधारात्मक और परिवीक्षा सेवाएं शामिल हैं। 

            हर राज्य को कारावास विभाग के तहत एक कल्याण शाखा स्थापित करनी होगी, जिसमें कल्याण अधिकारियों, विधि अधिकारियों, काउंसलर और परिवीक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। कारावास नियमों और कानूनों में बुनियादी एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने मौजूदा जेल मैनुअल की समीक्षा करें और गृह मंत्रालय द्वारा तैयार तथा मई, 2016 में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए आदर्श जेल मैनुअल, 2016 के प्रावधानों को लागू करें। शीघ्र सुनवाई और अदालतों तक विचाराधीन बंदियों को लाने-ले-जाने के खर्च में कमी लाने के लिए सभी जेलों को वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिये अदालतों से जोड़ा जाए। 

             कारावास विभागों में सभी पदों की मौजूदा रिक्तियों को जल्द भरा जाए। प्राथमिकता के आधार पर जेल ई-प्रणाली को अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणालियों (सीसीटीएनएस) तथा ई-न्यायालयों के साथ एकीकृत किया जाए। समय-समय पर विचाराधीन बंदी प्रबंधन के संबंध में जेल, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और न्याय पालिका का संयुक्त प्रशिक्षण आयोजित किया जाए। कैदियों की आपराधिक प्रवृत्ति और कट्टरता में कमी लाने के लिए अलग से प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे उपरोक्त सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए समेकित प्रयास करें।

           बंदियों की दशा सुधारने के लिए यह नितांत आवश्यक है। इसके लिए कारावास प्रशासन में भी सुधार लाया जाए। सरकारों और केंद्र शासित प्रशासनों से आग्रह किया जाता है कि वे उपरोक्त सलाह के क्रियान्वयन के संबंध में प्रगति की सूचना प्रदान करें।

डीआईपीपी व विपो प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सहायता केंद्र स्थापित करेंगे

            औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (विपो) ने प्रौद्योगिकी और नवाचार सहायता केंद्र (टीआईएससी) स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 

         विपो के प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सहायता केन्‍द्र (टीआईएससी) कार्यक्रम के तहत विकासशील देशों में अभिनव खोज करने वालों की पहुंच स्‍थानीय एवं उच्‍च गुणवत्‍ता वाली प्रौद्योगिकी सूचना एवं संबंधित सेवाओं तकसुनिश्चित की जाती है। इसके साथ ही इस तरह के लोगों की अभिनव संभावनाओं का दोहन करने तथा उनके बौद्धिक संपदा (आईपी) अधिकारों के सृजन, संरक्षण एवं प्रबंधन में उन्‍हें सहायता प्रदान की जाती है। 

            टीआईएससी द्वारा मुहैया कराई जाने वाली सेवाओं में ऑनलाइन पेटेंट एवं गैर-पेटेंट (वैज्ञानिक और तकनीकी) संसाधनों तथा आईपी से संबंधित प्रकाशनों तक पहुंच, तकनीकी सूचनाओं को ढूंढ़ने एवं उनकी प्राप्ति में मदद करना, डेटाबेस को ढूंढ़ने के बारे में प्रशिक्षण प्रदान करना, प्रौद्योगिकी और प्रतिद्वंद्वियों पर नजर रखना, औद्योगिक संपदा कानूनों पर बुनियादी सूचनाएं, प्रबंधन एवं रणनीति तथा प्रौद्योगिकी का वाणिज्यीकरण एवं विपणन शामिल किये जा सकते हैं। आईपीआर संवर्धन एवं प्रबंधन प्रकोष्‍ठ (सीआईपीएएम) को टीआईएससी राष्‍ट्रीय नेटवर्क के लिए राष्‍ट्रीय केंद्र बिंदु के रूप में नामित किया गया है। राष्‍ट्रीय केंद्र बिंदु के रूप में सीआईपीएएम संभावित मेजबान संस्‍थानों कीपहचान करेगा, उनकी क्षमताओं का आकलन करेगा और टीआईएससी परियोजना से जुड़ने में उनकी सहायता करेगा।

            सीआईपीएएम इसके अलावा विपो तथा टीआईएससी के मेजबान संस्‍थानों के बीच प्रमुख मध्‍यस्‍थ के तौरपर भी काम करेगा और इसके साथ ही राष्‍ट्रीय टीआईएससी नेटवर्क की गतिविधियों के बीच समन्‍वय स्‍थापित करेगा। 500 से भी ज्‍यादा टीआईएससी विश्‍व भर में कार्यरत हैं और भारत में टीआईएससी की स्‍थापना से मेजबान संस्‍थानों की पहुंच वैश्विक नेटवर्क तक सुनिश्चित हो जाएगी। 

             सीआईपीएएम ने आने वाले वर्षों में विश्‍वविद्यालयों, राज्‍य विज्ञान परिषदों, अनुसंधान एवं विकास संस्‍थानों इत्‍यादि में टीआईएससी की स्‍थापना करने की योजना बनाई है। टीआईएससी की स्‍थापना से ज्ञान को साझा करने, टीआईएससी के बीच सर्वोत्‍तमरीतियों को साझा करने, क्षमता निर्माण और बौद्धिक संपदा (आईपी) के सृजन एवं वाणि‍ज्यीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

सूखा प्रबंधन केंद्र की स्थापना व सूखे की निगरानी

             केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के सभी मुख्यमंत्रियों को मौसम से संबंधित आकस्मिकता को प्रबंधित करने की तैयारियों की समीक्षा के लिए पत्र लिखकर आग्रह किया है, ताकि अगर मौसम का कोई भी संभव अग्रिम प्रतिकूल प्रभाव किसानों पर हो तो असर को कम किया जा सके। 

           केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने पत्र में लिखा है कि मौसम विभाग द्वारा खरीफ 2017 के दौरान मानसून से सम्बंधित प्रथम चरण का पूर्वानुमान जारी कर दिया गया है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस वर्ष दक्षिण पश्चिम मानसून अवधि में वर्षाताप दीर्धकालीन औसत की तुलना में 96ऽ रहने की संभावना है। मौसम विभाग द्वारा वर्षा की मात्रा तथा फैलाव के विषय में अधिक विस्तृत जानकारी जून माह में उपलब्ध कराई जायेगीक्ष् सिंह ने लिखा है कि वर्ष 2016-17 कृषि के दृटिकोण से संतोषप्रद रहा है। राज्य सरकारों के सहयोग से अच्छी वर्षा का लाभ लेकर देश के किसानो ने खाद्दान, दलहन, तिलहन, आदि फसलों में उत्पादन के नए एवं अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किये है।

             इसके बावजूद तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पुदुचेरी तथा राजस्थान जैसे राज्यों व केंद्रशासित क्षेत्रो में मानसून के दौरान अल्पवर्षा के कारण सूखे की स्थिति उत्प्पन हुई। अतः यह आवशयक होगा कि समय से पहले वह सारे उपाए कर लिए जाए जो मानसून की विफलता से बनने वाली स्थिति को संभालने के लिए जरूरी हो। केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री ने पत्र में याद दिलाया है कि गत वर्ष प्रधानमंत्रीजी ने 2015-16 के सूखाग्रस्त राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठक कर सूखे से जूझने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की थी। सिंह को विश्वास है कि राज्य शासन द्वारा तदनुरूप मानसून के किसी भी विचलन का सामना करने के लिए वांछित रणनीति कर उसे कार्यान्वित करने की व्यवस्था कर ली गई होगी। 

                जिला कृषि आकस्मिक्ता योजना के अनुरूप तैयारियों की समीक्षा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अधीन जिला सिंचाई योजनाओं की प्रगति समीक्षा, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के अधीन जल संचयन एवं संरक्षण/यभूगर्भ जल रिचार्ज तथा संवधर्न के उपायों की प्रगति समीक्षा, राज्य में सूखा प्रबंधन केंद्र की स्थापना तथा सूखे की निगरानी व्यवस्था, सिंचाई नहरों की सफाई एवं मरम्मत, नलकूपों की मरम्मत, ट्रांसफार्मरों की व्यवस्था, पेय जल हैंडपम्पो/पेयजल योजनाओं की मरम्मत। सिंह ने ध्यान दिलाया है कि केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं  का 25ऽ मात्राकरण फ्लैक्सीफंड के रुप में करने का निर्णय लिया गया है। इस फ्लैक्सीफंड का उपयोग राज्य सरकारों/केंद्र शासित क्षेत्रों के द्वारा आपदा के प्रभाव के न्यूनीकरण में किया जा सकता है।

           इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधीन अधिक से अधिक बीमाकरण से आपदा की दशा में काश्तकारों को होने वाले फसल नुकसान के जोखिम को कम किया जा सकेगा। केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री ने उम्मीद जताई कि किसान हित में समस्त उपयोगी कदम उठाए जाएंगे।

8.76 लाख मीट्रिक टन दलहन की खरीद

           भारत के एक राष्ट्रस्तरीय सहकारी विपरण परिसंघ नाफेड ने 2017 के दौरान दलहन और तिलहन की रिकार्ड खरीददारी की है। 

           नाफेड देश में भारत सरकार की ऐसी अग्रणी एजेंसी के रूप में उभरा है, जिसने दालों और तिलहन की खरीददारी का दायित्व निभाया है। हाल में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान उसने 8.76 लाख मीट्रिक टन से अधिक दालों की खरीद की है, जिसमें चना 0.20 लाख मीट्रिक टन, मसूर 0.03 लाख मीट्रिक टन, मूंग 1.29 लाख मीट्रिक टन, उड़द 0.59 लाख मीट्रिक टन और अरहर 6.65 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। इसके अलावा 2.20 लाख मीट्रिक टन से अधिक मूंगफली, खोपरा और अन्य तिलहनों की भी खरीददारी की है। 

            नाफेड ने इस कार्य के साथ किसान समुदाय को वाजिब कीमत अदा करके उन्हें लाभ पहुंचाया है। इसके साथ ही दालों और तिलहनों की कीमतों में स्थिरता कायम की और देश में बफर स्टॉक तैयार किया। नाफेड ने 5916 करोड़ रुपये की कीमत के बराबर विभिन्न जिन्सों की खरीददारी की और इस वर्ष ब्याजपूर्व 106 करोड़ रुपये अस्थायी लाभ कमाया। पिछले दशक के दौरान यह आंकड़ा सबसे अधिक है और वित्तीय रूप से उसकी स्थिति मजबूत हुई है। संगठन सरकार की मजबूत ‘दाल इकाई’ के रूप में उभरा है।

          मौजूदा वर्ष के दौरान सरसों, सूरजमुखी, चना, मसूर इत्यादि जैसी रबी तिलहन तथा दालों की खरीद शुरू कर दी गई है। नाफेड ने 30 अप्रैल, 2017 तक 2.95 लाख मीट्रिक टन की खरीद कर ली है। भारत सरकार नाफेड के लिए वित्तीय पैकेज पर गौर कर रही है और उम्मीद है कि सीसीईए नोट को मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए मई, 2017 में पेश किया जाएगा।