सूखा प्रबंधन केंद्र की स्थापना व सूखे की निगरानी
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के सभी मुख्यमंत्रियों को मौसम से संबंधित आकस्मिकता को प्रबंधित करने की तैयारियों की समीक्षा के लिए पत्र लिखकर आग्रह किया है, ताकि अगर मौसम का कोई भी संभव अग्रिम प्रतिकूल प्रभाव किसानों पर हो तो असर को कम किया जा सके।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने पत्र में लिखा है कि मौसम विभाग द्वारा खरीफ 2017 के दौरान मानसून से सम्बंधित प्रथम चरण का पूर्वानुमान जारी कर दिया गया है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस वर्ष दक्षिण पश्चिम मानसून अवधि में वर्षाताप दीर्धकालीन औसत की तुलना में 96ऽ रहने की संभावना है। मौसम विभाग द्वारा वर्षा की मात्रा तथा फैलाव के विषय में अधिक विस्तृत जानकारी जून माह में उपलब्ध कराई जायेगीक्ष् सिंह ने लिखा है कि वर्ष 2016-17 कृषि के दृटिकोण से संतोषप्रद रहा है। राज्य सरकारों के सहयोग से अच्छी वर्षा का लाभ लेकर देश के किसानो ने खाद्दान, दलहन, तिलहन, आदि फसलों में उत्पादन के नए एवं अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किये है।
इसके बावजूद तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पुदुचेरी तथा राजस्थान जैसे राज्यों व केंद्रशासित क्षेत्रो में मानसून के दौरान अल्पवर्षा के कारण सूखे की स्थिति उत्प्पन हुई। अतः यह आवशयक होगा कि समय से पहले वह सारे उपाए कर लिए जाए जो मानसून की विफलता से बनने वाली स्थिति को संभालने के लिए जरूरी हो। केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री ने पत्र में याद दिलाया है कि गत वर्ष प्रधानमंत्रीजी ने 2015-16 के सूखाग्रस्त राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठक कर सूखे से जूझने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की थी। सिंह को विश्वास है कि राज्य शासन द्वारा तदनुरूप मानसून के किसी भी विचलन का सामना करने के लिए वांछित रणनीति कर उसे कार्यान्वित करने की व्यवस्था कर ली गई होगी।
जिला कृषि आकस्मिक्ता योजना के अनुरूप तैयारियों की समीक्षा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अधीन जिला सिंचाई योजनाओं की प्रगति समीक्षा, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के अधीन जल संचयन एवं संरक्षण/यभूगर्भ जल रिचार्ज तथा संवधर्न के उपायों की प्रगति समीक्षा, राज्य में सूखा प्रबंधन केंद्र की स्थापना तथा सूखे की निगरानी व्यवस्था, सिंचाई नहरों की सफाई एवं मरम्मत, नलकूपों की मरम्मत, ट्रांसफार्मरों की व्यवस्था, पेय जल हैंडपम्पो/पेयजल योजनाओं की मरम्मत। सिंह ने ध्यान दिलाया है कि केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं का 25ऽ मात्राकरण फ्लैक्सीफंड के रुप में करने का निर्णय लिया गया है। इस फ्लैक्सीफंड का उपयोग राज्य सरकारों/केंद्र शासित क्षेत्रों के द्वारा आपदा के प्रभाव के न्यूनीकरण में किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधीन अधिक से अधिक बीमाकरण से आपदा की दशा में काश्तकारों को होने वाले फसल नुकसान के जोखिम को कम किया जा सकेगा। केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री ने उम्मीद जताई कि किसान हित में समस्त उपयोगी कदम उठाए जाएंगे।