Monday, 31 July 2017

आयकर रिटर्न दाखिल करने की तिथि अब 5 अगस्‍त

     आयकर रिटर्न की ई-फाइलिंग के लिए फिलहाल ई-फाइलिंग वेबसाइट पर आधार अथवा आधार के लिए आवेदन करने पर मिली पावती संख्‍या को दर्ज कर देना ही पर्याप्‍त होगा। 

        इसके बाद आधार से पैन को वास्‍तव में 31 अगस्‍त, 2017 से पहले कभी भी जोड़ा जा सकता है। हालांकि, जब तक पैन से आधार को नहीं जोड़ा जाएगा या लिंक किया जाएगा, तब तक आयकर रिटर्न की प्रोसेसिंग नहीं होगी। 
  रिटर्न की ई-फाइलिंग में सहूलियत के लिए आयकर रिटर्न की ई-फाइलिंग की तिथि 5 दिन आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है। अब आयकर रिटर्न 5 अगस्‍त, 2017 तक दाखिल किया जा सकता है।

स्वच्छ गंगा मिशन ने 425 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी

     राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की कार्यकारी समिति ने यहां अपनी चौथी बैठक में सीवेज से जुड़े बुनियादी ढांचे, घाटों के विकास और शोध के क्षेत्र में 425 करोड़ रुपये की लागत वाली सात परियोजनाओं को मंजूरी दी। 

         उत्तर प्रदेश और बिहार में सीवेज (दूषित जल की निकासी) की तीन-तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। उत्तर प्रदेश में उन्नाव, शुक्लागंज और रामनगर के लिए जल अवरोधन यानी पानी का बहाव रोकने, बहाव में परिवर्तन और एसटीपी (सीवेज शोधन संयंत्र) से जुड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन तीनों परियोजनाओं का उद्देश्य 29 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की सीवेज शोधन क्षमता (उन्नाव में 13 एमएलडी, शुक्लागंज में 6 एमएलडी और रामनगर में 10 एमएलडी) सृजित करना है। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर 238.64 करोड़ रुपये की लागत आएगी। 
        वहीं, बिहार में सुल्तानगंज, नौगछिया और मोकामा में 175 करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं से 27 एमएलडी की सीवेज शोधन क्षमता (सुल्तानगंज में 10 एमएलडी, मोकामा में 8 एमएलडी और नौगछिया में 9 एमएलडी) सृजित होगी।
        इन सभी छह परियोजनाओं पर आने वाली परिचालन और रख-रखाव लागत को केन्द्र सरकार 15 साल तक वहन करेगी। इन परियोजनाओं के लिए 100 फीसदी केंद्रीय सहायता दी जाएगी। यहां पर इस बात का उल्‍लेख करना भी आवश्‍यक है कि उन्‍नाव और सुल्‍तानगंज परियोजनाओं का क्रियान्‍वयन हाइब्रिड वार्षिकी पर आधारित पीपीपी मॉडल के अंतर्गत किया जाएगा, जिसके तहत पूंजीगत लागत का 60 प्रतिशत एसटीपी का निर्माण करने वाले ठेकेदार को अगले 15 वर्षों की अवधि के दौरान दिया जाएगा। ठेकेदार को इस राशि का भुगतान शोधित अपशिष्‍ट जल के अपेक्षित मानकों पर खरा उतरने से संबंधित उसके कार्य प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।
      पानी और तलछट दोनों में ही गंगा नदी के गैर-दुर्गंधयुक्‍त गुणों को समझने के लिए 4.96 करोड़ रुपये की लागत वाले एक शोध अध्ययन को भी मंजूरी दी गई थी।यह अध्‍ययन राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग शोध संस्थान (एनईईआरआई) द्वारा किए गए शोध कार्य के एक विस्‍तार के रूप में होगा, ताकि नदियों के पानी में निहित विशेष गुणों के बारे में पता लगाया जा सके। इस शोध के तहत इन विशेष गुणों के पीछे के वैज्ञानिक कारणों पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि इन खूबियों को अक्षुण्‍ण बनाए रखने की रणनीति तैयार की सके।

6 लाख से कम आय वाले परिवार के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता

       केन्द्र सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के छात्रों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील है।

     उच्च शिक्षा में गरीब छात्रों की पर्याप्त भागीदारी के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है। केन्द्र सरकार की योजना के अंतर्गत कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों को छात्रवृत्ति योजना के तहत मदद दी जा रही है। इसके तहत 6 लाख प्रतिवर्ष से कम आय वाले परिवार के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के दौरान दैनिक खर्च के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। किसी बोर्ड परीक्षा में 10अ2 पैटर्न या इसके समकक्ष नियमित पाठ्यक्रम में सफल हुए छात्रों में से संबंधित संकाय में 80 फीसदी अंक प्राप्त करने वाले ऐसे छात्र योजना के तहत पात्र है जिन्हें किसी अन्य छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल रहा है।
         यह जानकारी केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. मेहन्द्र नाथ पाण्डेय ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होनें बताया की 4.50 लाख रुपये से कम आय वाले माता-पिता के बच्चे को पढ़ाई के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है। इसके तहत मान्यता प्राप्त व्यावसायिक पाठ्यक्रम की अवधि और अतिरिक्त के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है।

किशनगंगा परियोजनाओं से 4458.69 मिलियन यूनिट बिजली

       विद्युत, कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने राज्‍य सभा में एक लिखित प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया कि एनपीसी द्वारा अपनी दो निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाओं अर्थात पार्बती-क्ष्क्ष् पनबिजली परियोजना (800 मेगावाट) और किशनगंगा पनबिजली परियोजना (330 मेगावाट) से 4458.69 मिलियन यूनिट (एमयू) अतिरिक्‍त बिजली (डिजाइन ऊर्जा पर आधारित) का उत्‍पादन किया जाएगा। 

    हिमाचल प्रदेश स्‍थित पार्बती-क्ष्क्ष् पनबिजली परियोजना अक्‍टूबर, 2018 में चालू होगी, जबकि जम्‍मू-कश्‍मीर स्‍थित किशनगंगा पनबिजली परियोजना को जनवरी, 2018 में चालू किया जाएगा। देश में पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति की स्‍थिति के बारे में जानकारी देते हुए गोयल ने कहा कि वर्तमान समय में देश भर में कुल मिलाकर 11792.5 मेगावाट की 41 पनबिजली परियोजनाएं (25 मेगावाट से ज्‍यादा) निर्माणाधीन हैं। 
       मंत्री ने कहा कि उपर्युक्‍त सभी परियोजनाएं तय समय से पीछे चल रही हैं, जिसके कई कारण हैं। प्राकृतिक आपदाएं, भौगोलिक कारक, वन मंजूरी एवं भूमि अधिग्रहण में देरी और कानून एवं व्‍यवस्‍था की समस्‍याएं इन कारणों में शामिल हैं। गोयल ने सदन को बताया कि लंबित परियोजनाओं के त्‍वरित क्रियान्‍वयन के लिए सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। 
       केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 73 (एफ) को ध्‍यान में रखते हुए निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाओं (25 मेगावाट से ज्‍यादा) पर करीबी नजर रखी जा रही है। परियोजना स्‍थल का मुआयना करके और डेवलपरों तथा अन्‍य हितधारकों के साथ बातचीत करके हर परियोजना की प्रगति पर निरंतर नजर रखी जाती है।
       विद्युत मंत्रालय द्वारा गठित विद्युत परियोजना निगरानी पैनल (पीपीएमपी) भी स्‍वतंत्र रूप से पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति पर करीबी नजर रखता है। विद्युत मंत्रालय भी सीईए के संबंधित अधिकारियों, उपकरण निर्माताओं, राज्‍यों के उपक्रमों- परियोजना डेवलपरों इत्यादि के साथ मौजूदा पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति की संख्‍या नियमित रूप से करता है।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में 50 दिन अतिरिक्त अकुशल रोजगार उपलब्ध

         सरकार ने जानकारी दी कि कठिनाई के समय में होने वाले पलायन को रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। राज्य सभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि मंत्रालय ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा के तहत 50 दिन के लिए अतिरिक्त अकुशल रोजगार उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए हैं। 2016-17 के दौरान मनरेगा के अंतर्गत सात सूखा प्रभावित राज्यों को 150 दिन के काम की अनुमति दी गई। 

   वर्तमान वर्ष में इस प्रावधान के तहत केरल और पुद्दुचेरी को काम दिया गया है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ग्रामीण और शहरी अंतर को पाटने तथा ग्रामीण इलाकों से शहरी क्षेत्रों में होने वाले पलायन को रोकने के उद्देश्य से श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण केंद्रों का भी निर्माण कर रहा है। 
    मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि स्वतंत्र आकलनकर्ताओं के जरिये मंत्रालय द्वारा कराए गए अध्ययन में पाया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के परिणामस्वरूप विशेष मौसम में होने वाले पलायन में कमी आई है। अन्य अध्ययनों में भी दर्शाया गया कि घर के नजदीक काम देने और कार्यस्थल पर उचित माहौल उपलब्ध कराने से पलायन कम करने में मनरेगा का प्रत्यक्ष और सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
           उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा ऐसे अध्ययनों का सार ‘मनरेगा समीक्षा’ नामक प्रकाशन में दिया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की सिफारिश पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान ने पलायन की समस्या पर दो अध्ययन करवाए हैं। 
        इनके नाम हैं, कठिन समय में होने वाले पलायन पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम का प्रभाव : भारत के चयनित राज्यों का एक अध्ययन और जनजातीय लोगों के पलायन पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम का प्रभाव : पश्चिम बंगाल के जंगलमहल जिले में एक मामले का अध्ययन।

Sunday, 30 July 2017

विकास व सुधार की यात्रा का हिस्सा बनने की मेघालय की इच्छा शक्‍ति

        केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग मंत्री, डॉ. जितेन्द्र सिंह को यहां लोक सभा सदस्य कोनराड संगमा के नेतृत्व में जन प्रतिनिधियों के प्रतिनिधि मण्डल ने मेघालय में जी.एस.टी के कार्यान्वन की प्रगति के बारे में जानकारी दी।

      डॉ. जितेन्द्र सिंह ने मेघालय के लोगों द्वारा ‘एक राष्ट्र एक कर’ जी.एस.टी सुधार को शेष राष्ट्र के साथ 30 जून व एक जुलाई के बीच मध्यरात्रि को अपनाने में सहयोग व निरंतर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने की प्रशंसा की।
        उन्होंने कहा कि यह न केवल पूर्वोत्तर राज्यों की शेष राष्‍ट्र में हो रहे आर्थिक सुधार का हिस्सा बनने की प्रवृत्‍ति का संकेत देता है बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में फास्‍ट ट्रेक विकास और सुधार की यात्रा का हिस्सा बनने की मेघालय के लोगों की इच्छा शक्‍ति का प्रतीक है। पिछले तीन वर्षों में केन्द्र सरकार द्वारा मेघालय राज्य में शुरू किये गए विकास की पहलों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि राज्य में रेलवे ट्रैक को बड़ी लाइन में बदलने का कार्य प्रगति पर है।
       उन्होंने कहा यह सरकार में लोगों के विश्वास को दर्शाता है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने श्री संगमा व प्रतिनिधि मण्डल के अन्य सदस्यों को जानकारी दी कि शिलाँग हवाई अड्डे पर हवाई पट्टी के उन्नयन के लिए फंडिग डोनर मंत्रालय द्वारा की जाएगी। 
       डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पिछले दो वर्षो के दौरान पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी के लिये भी प्रशंसा की और कहा कि वे विशेष तौर पर ‘गृह पर्यटन’ की प्रवृति से संतुष्ट है जो पिछले दो वर्षो में मेघालय द्वारा अपनाई गई है। उन्‍होंने कहा कि यह न केवल पर्यटकों के प्रवाह को बढ़ाती है बल्कि स्थानीय निवासी, खास तौर पर स्‍थानीय युवाओं के जीवनयापन का साधन भी उपलब्ध कराती है। 
      संगमा ने डॉ. जितेन्द्र सिंह के समक्ष चुंगी एवं सीमा-शुल्‍क मुख्‍य आयुक्‍त कार्यालय को शिलाँग से गुवाहाटी स्थानातरित करने के प्रस्ताव को रखा। उन्होने कहा जीएसटी के कार्यान्वन में चुंगी एवं सीमा-शुल्‍क आयुक्‍त कार्यालय द्वारा किये गए प्रशंसनीय ध्यान में रखते हुए इस योजना पर पुर्नविचार किया जा सकता है ताकि मुख्य आयुक्त कार्यालय शिलाँग में ही बना रहे।
          डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कौनराड संगमा से कहा कि वह केन्द्रीय वित मंत्री के सम्मुख चुंगी एवं सीमा-शुल्‍क मुख्‍य आयुक्‍त कार्यालय को शिलाँग में ही रखे जाने की संभावना और वांछनीयता विषय को रखेंगे।

नई दिल्ली में 12 स्लम युवा दौड़ को झण्डी

     युवा मामले और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने नई दिल्ली में 12वीं एवं अन्तिम स्लम युवा दौड़ को झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस दौड़ में लगभग 6000 युवाओं ने हिस्सा लिया। 

      केन्द्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बिरेन्दर सिंह एव ओलम्पिक कुश्ती विजेता पहलवान सुशील कुमार ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। यह दौड़ झण्डेवालान देवी मंदिर से आरम्भ होकर अजमल खॉ पार्क करोल बाग में समाप्त हुई। सभी प्रतिभागियों को मेडल और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। 
         दिल्ली की स्लम बस्तियों से आए युवाओं ने यह प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए मंत्रालय के प्रयासों की सरहाना की। विजय गोयल ने कहा कि स्लम युवा दौड़ युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए प्रोत्साहित करने का एक प्रयास है। इस तरह की प्रतियोगिताओं का उद्देश्य युवाओं को नशाखोरी, अपराधिक गतिविधियों एवं आतंकवाद से दूर रख कर रचनात्मक गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करना है। 
            गोयल ने यह भी बताया कि मंत्रालय, स्लम बस्तियों में छोटे युवा क्लब भी बनाएगा जो अपने क्षेत्रों में विकास और स्वच्छता के लिए कार्य करेंगे। उन्होने कहा कि हम फुटबाल, बॉलीबॉल आदि खेलों के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन भी करेंगे। इससे स्लम क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं का पता लगाने में मदद मिलेगी।
         केन्द्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बिरेन्दर सिंह ने स्लम युवा दौड़ के प्रयास की प्रशंसा की और कहा कि युवा हमारे देश का आधार है। ऐसी गतिविधियों से उनका सर्वांगीण विकास होता है और वे देश निर्माण के लिए प्रेरित होते है। ओलम्पिक पदक विजेता कुश्ती पहलवान सुशील कुमार ने कहा कि भविष्य के खिलाड़ियों के लिए इस तरह की प्रतियोगिताएं स्वर्णिम अवसर है। 
        सुशील कुमार ने दुसरी बार स्लम युवा दौड़ में हिस्सा लिया है। उन्होने कहा कि इस तरह के प्रयासों से खेल संस्कृति का विकास होगा और मंत्रालय को प्रतिभाशाली युवाओं को खोजने में मदद मिलेगी।स्लम युवा दौड़ युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय तथा नेहरू युवा केन्द्र संगठन द्वारा आरम्भ किए गए एडोप्ट स्लम अभियान का एक हिस्सा है। कुल 12 स्लम युवा दौड़ आयोजित की गई जिसमें दिल्ली के लगभग 60 हजार युवाओं ने हिस्सा लिया।

विशेषकर असम, गुजरात अति-वर्षा के कारण प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ी

        आकाशवाणी के मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा मनुष्य का मन ही ऐसा है कि वर्षाकाल मन के लिये बड़ा लुभावना काल होता है। 

    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा पशु, पक्षी, पौधे, प्रकृति- हर कोई वर्षा के आगमन पर प्रफुल्लित हो जाते हैं। लेकिन कभी-कभी वर्षा जब विकराल रूप लेती है, तब पता चलता है कि पानी की विनाश करने की भी कितनी बड़ी ताक़त होती है। प्रकृति हमें जीवन देती है, हमें पालती है, लेकिन कभी-कभी बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायें, उसका भीषण स्वरूप, बहुत विनाश कर देता है।
         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा पिछले कुछ दिनों से भारत के कुछ हिस्सों में विशेषकर असम, गुजरात, राजस्थान, बंगाल के कुछ हिस्से, अति-वर्षा के कारण प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ी है। जहाँ हो सके, वहाँ मंत्रिपरिषद के मेरे साथी भी पहुँच रहे हैं। राज्य सरकारें भी अपने-अपने तरीक़े से बाढ़ पीड़ितों को मदद करने के लिए भरसक प्रयास कर रही हैं। सामाजिक संगठन भी, सांस्कृतिक संगठन भी, सेवा-भाव से काम करने वाले नागरिक भी, ऐसी परिस्थिति में लोगों को मदद पहुँचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं।
          प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा भारत सरकार की तरफ़ से, सेना के जवान हों, वायु सेना के लोग हों, हर कोई ऐसे समय आपदा पीड़ितों की सेवा करने में जी-जान से जुड़ जाते हैं। बाढ़ से जन-जीवन काफी अस्त-व्यस्त हो जाता है। खास कर के हमारे किसान भाइयों को, फ़सलों को, खेतों को जो नुकसान होता है।
         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा इन दिनों मौसम का जो पूर्वानुमान मिलता है, उसके कारण क़रीब-क़रीब अनुमान सही निकलते हैं। धीरे-धीरे हम लोग भी स्वभाव बनाएँ कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अपने कार्यकलापों की भी रचना कर सकते हैं, तो उससे हम नुकसान से बच सकते हैं। जब भी मैं ‘मन की बात’ के लिये तैयारी करता हूँ, तो मैं देख रहा हूँ, मुझसे ज्यादा देश के नागरिक तैयारी करते हैं।

पारसी समुदाय का भारत के निर्माण में बहुमूल्य योगदान

       केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार समावेशी विकास और अंत्योदय के संकल्प के साथ समाज के आखिरी व्यक्ति की समृद्धि-सुरक्षा-सम्मान के लिए काम कर रही है। 

     मुंबई में "जियो पारसी पब्लिसिटी फेज-2" के लॉन्च समारोह में बड़ी संख्या में उपस्थित पारसी समुदाय के लोगों और विभिन्न क्षेत्र की शख्सियतों को सम्बोधित करते हुए नकवी ने कहा कि पारसी समुदाय का भारत के निर्माण में बहुमूल्य योगदान रहा है और पारसी समुदाय अपनी संस्कृति-संस्कार के लिए हमेशा से ही अन्य समुदायों के लिए एक "रोल मॉडल" रहा है। पारसी समुदाय ने ऐसे कई महान लोग दिए हैं जो भारत निर्माण के आर्किटेक्ट रहे हैं।
          नकवी ने कहा कि भारत में पारसी समुदाय भले ही जनसँख्या के लिहाज से छोटा अल्पसंख्यक समुदाय हो लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि पारसी समाज उदारवादी, शिक्षा के प्रति जागरूक एवं शांति-सौहार्द का उदाहरण है। नकवी ने कहा कि जमशेतजी टाटा का भारत को उद्योग क्षेत्र में अपने पैरों पर खड़ा करने में योगदान, दादाभाई नौरोजी और भीकाजी कामा द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश की सेवा, होमी भाभा का भारत को एटॉमिक शक्ति बनाने में योगदान भारत के समृद्ध इतिहास का अभिन्न भाग है। 
       फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के सैन्य योगदान का भी अपना महत्व है। चाहे उद्योग हो, सेना हो, कानूनी पेशा हो, वास्तुकला हो या सिविल सेवाएं हो, पारसी समुदाय ने हर जगह शीर्ष पर पहुंचने की क्षमता दिखाई है। नकवी ने कहा कि पारसी समुदाय की घटती जनसँख्या चिंता का विषय है। 
       भारत में पारसी समुदाय की घटती जनसँख्या को रोकने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय "जियो पारसी" योजना चला रहा है। "जियो पारसी पब्लिसिटी फेज-1" की शुरुआत 2013 में की गयी थी। यह योजना पारसी समुदाय की घटती जनसँख्या के प्रति जागरूकता लाने में सफल हो रही है। "जियो पारसी" योजना के माध्यम से 101 पारसी समुदाय के बच्चों का जन्म हुआ है। 
        इस योजना का उद्देश्य वैज्ञानिक नवाचार और ढांचागत हस्तक्षेप अपनाकर पारसी आबादी के गिरते रुख को उलटना और भारत में पारसियों की जनसँख्या बढ़ाना है। इस योजना के तहत मंत्रालय द्वारा परामर्श एवं चिकित्सा सहायता मुहैय्या कराई जा रही है।
       नकवी ने कहा कि "जियो पारसी" योजना की सफलता में पारज़ोर फाउंडेशन, बॉम्बे पारसी पंचायत और फेडरेशन ऑफ जोरास्ट्रियन अंजुमंस ऑफ इंडिया की महत्वूर्ण भूमिका है। ये संगठन सेमिनार, वर्कशॉप, मीडिया, जागरूकता अभियान आदि के माध्यम से इस योजना का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।

बाघ वाले वन जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम करने में महत्त्वपूर्ण

        केन्द्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि बाघ वाले वन जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है। 

      विज्ञान भवन में वैश्विक बाघ दिवस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि बाघ स्वस्थ पर्यावरण का प्रतीक है। उन्होने कहा कि बाघों पर मंडराते खतरे की आशंका को देखकर इनके संरक्षण के प्रयासो में कोई कसर नही छोड़ी जा रही है।
         इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद बाघ संरक्षकों, स्वयं सेवी संगठनों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 तक बाघों की संख्या को दुगुना करने का सेन्ट पीटर्सबर्ग घोषणा का लक्ष्य सीमित है। लेकिन इस सामान्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रों को निरन्तर ध्यान देना होगा। 
     उन्होने कहा कि बाघ संरक्षण दिवस किसी विशेष दिवस पर आयोजित नही होना चाहिए बल्कि इसे हर दिवस के प्रत्येक क्षण में बाघों के संरक्षण की भावना के साथ मनाया जाना चाहिए। पर्यावरण मंत्री इस अवसर पर बच्चों की उपस्थिति से बेहद प्रभावित हुए। उन्होने कहा कि वे प्रतिदिन एक छोटे से अच्छे कार्य करने का उत्तरदायित्व ले, अन्य लोगों को ऐसा हितैषी, पर्यावरण की सुरक्षा व बाघ संरक्षण की सुरक्षा के लिए पर्यावरण हित का कार्य करने का उत्तरदायित्व ग्रहण करे तथा मानव के मित्र जीवों के लिए कार्य करे और अपने हृदय और आत्मा को अच्छे कार्यों के लिए ईमानदारी और निष्ठा से जोड़ दे।
         उन्होने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन एक नेक और पर्यावरण हितैषी कार्य का उत्तरदायित्व लेता है तो हम 125 करोड़ नेक और पर्यावरण हितैषी कार्यों को पूरा कर लेंगे। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि जिस दिन यह कार्य सम्पन्न हो जाएगा तब भारत विश्वगुरू हो जाएगा। मंत्री ने सुझाव दिया कि समाज में किसी भी संदेश के प्रसार के लिए बच्चों से श्रेष्ठ व सकारात्मक संदेश वाहक नही हो सकता। 
       डॉ. हर्षवर्धन ने बच्चों के लिए अनुशासन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होने कहा कि इस दिशा में अध्यापक विशेष भूमिका निभा सकते है। अनुशासन को किसी भी कीमत पर अनदेखा नही किया जाना चाहिए। इस अवसर पर मंत्री ने (टाईगर रिजर्व) बाघ रक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा और लेखा परीक्षण के संचालन के लिए प्रोटोकॉल भी जारी किया। 
         मंत्री ने बाघ संरक्षण मानदण्ड प्रमाणन सीए/टीएस पुरस्कार उत्तराखण्ड के लेन्सडाउन वन मंडल को प्रदान किया। इस डिविजन ने बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। सीए/टीएस डब्ल्यूडब्ल्यूएफ द्वारा विकसित किया गया है। 
      यह टाईगर रेंज देशों में बाघ संरक्षण के लिए कार्य करता है। इस अवसर पर कलाकार रंदीप हुड्डा ने कहा कि बाघ भारतीय विरासत का प्रतीक है। उन्होने लोगों से अनुरोध किया कि वह बाघ संरक्षण के लिए स्वयं को समर्पित करे। और लोगों को जागरूकता का संदेश दे।

Friday, 28 July 2017

जल के मुद्दों पर न हो राजनीति

         केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा है कि जल के मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्‍होंने राज्‍यों से आह्वान किया कि जल प्रबंधन एवं जल बटवारों के मुद्दों पर वे राज्‍य हित के साथ राष्‍ट्र हित को भी प्राथमिकता दें।

      नई दिल्‍ली में जल मंथन 4 राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि ‘पानी से आग कैसे निकल सकती है। यह तो आग को शांत करने का काम करता है।’ उन्‍होंने कहा कि कुछ राज्‍य जल बटवारे के मुद्दों पर राष्‍ट्रीय हित का अनदेखा करते है। वे विपक्ष से भी डरते है। सुश्री भारती ने कहा कि ‘’जल से संबंधित मुद्दों की जिम्‍मेदारी सत्‍ता पक्ष से अधिक विपक्ष पर है।
       हमने तय किया है कि आने वाले दिनों में हम जब भी राज्‍य सरकारों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे तो साथ में उस राज्‍य के विपक्षी नेताओं से भी चर्चा करेंगे।’ उन्‍होंने कहा कि जल बंटवारे के मुद्दों को लेकर केंद्र हमेशा संवेदनशील रहा है तथा हमारा प्रयास रहा है कि ऐसे मुद्दों का शांतिपूर्ण ढ़ग से समाधान निकले। 
        उन्‍होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्‍यमंत्रियों द्वारा जल विवाद के मुद्दे पर दिखाई गई राजनीतिक परिपक्‍वता की प्रशंसा की और अन्‍य राज्‍यों से भी ऐसे सामंजस्‍य की अपेक्षा की। नदी जोड़ो परियोजना का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने सम्‍मेलन में मौजूद उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इससे जुड़े लंबित मुद्दों का यथाशीघ्र समाधान करे ताकि केंद्र सरकार इस परियोजना के प्रथम चरण पर कार्य जल्‍द से जल्‍द शुरू कर सके। 
       उन्‍होंने कहा कि महाराष्‍ट्र और गुजरात पार-तापी और दमन गंगा- पिंजाल नदी जोड़ो परियोजनाओं पर केंद्र का पूरे मनोयोग से सहयोग कर रहे हैं और इन दोनों परियोजनाओं पर काम तेजी से चल रहा है। सुश्री भारती ने कहा कि कई बार सूचनाओं के अभाव में राज्‍य में नदी जोड़ो परियोजनाओं को लेकर गलत धारणाएं पैदा हो जाती है। 
       उदाहरण के लिए ओडिशा के कुछ लोग महानदी गोदावरी परियोजना का विरोध कर रहे थे। उनका सोचना था कि इस परियोजना से महानदी का पूरा पानी गोदावरी में चला जाएगा। लेकिन जब उन्‍हें बताया गया कि तीस्‍ता और संकोश का अतिरिक्‍त जल पहले महानदी में आयेगा और उसके बाद गोदावरी में जाएगा, तो इससे वे संतुष्‍ट हुए। केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार किसी भी राज्‍य के जल संसाधन को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहती। 
     सुश्री भारती ने आशा व्‍यक्‍त की कि इस संगोष्‍ठी में होने वाले विचार मंथन से जल संरक्षण प्रबंधन की नीति बनाने में सहायता मिलेगी और वर्तमान नीतियों में सुधार करने के रास्‍ते भी प्रशस्‍त होंगे। मंत्रालय के राज्‍य मंत्रियों वियज गोयल तथा संजीव कुमार बालियान द्वारा संगोष्‍ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया गया। हरियाणा के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ तथा आंध्रप्रदेश के जल संसाधन मंत्री देवीनेनि उमामहेश्‍वर राव भी उद्घाटन सत्र में मौजूद रहे। 
      जल क्षेत्र के विविध मामलों के समाधान के लिए विभिन्‍न हितधारकों के बीच व्‍यापक परामर्श और नए विचारों पर मंथन के प्रति अपनी संकल्‍पबद्धता के मद्देनजर जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा दो दिवसीय, जल मंथन 4 का आयोजन किया गया है। इस संगोष्‍ठी में संबंधित मंत्रालयों/विभागों के केंद्रीय मंत्री राज्‍यों/संघशासित प्रदेशों के सिंचाई/जल संसाधन मंत्री, जल क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञ, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि और केंद्र और राज्‍य सरकारों के वरिष्‍ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।
     प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और उसके कार्यान्‍वयन के बारे में परामर्श और विचार-विमर्श किया गया तथा त्‍वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) तथा कमान क्षेत्र विकास (सीएडी)आदि के अंतर्गत राज्‍यों द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
     वक्‍ताओं में बृजमोहन अग्रवाल, जल संसाधन मंत्री, छत्‍तीसगढ़ सरकार, गिरीश दत्‍तात्रेय महाजन, जल संसाधन मंत्री, महाराष्‍ट्र सरकार, टी हरीश राव, सिंचाई मंत्री, तेलंगाना सरकार, अमरजीत सिंह, सचिव, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय, ए बी पंड्या, पूर्व अध्‍यक्ष केंद्रीय जल आयोग और नरेन्‍द्र कुमार अध्‍यक्ष केंद्रीय जल आयोग शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम का उत्‍साह बढ़ाया

     प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने महिला विश्‍व कप क्रिकेट प्रतियोगिता में हिस्‍सा लेकर लौटी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाडि़यों और अधिकारियों से बातचीत की और उनका उत्‍साह बढ़ाया।

    खिलाडि़यों ने कहा कि उन्‍होंने पहली बार किसी प्रधानमंत्री को महिला क्रिकेट टीम के लिए ट्वीट करते हुए देखा है। उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें इस बात से काफी गर्व और प्रसन्‍नता की अनुभूति हुई है कि प्रधानमंत्री लगातार उनके प्रदर्शन पर ध्‍यान रखे हुए थे। 
       तनाव से निपटने के बारे में खिलाडि़यों द्वारा किए गए सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि मन, शरीर और क्रियाओं में बेहतर संतुलन स्‍थापित करने में योग सहायक है।
      उन्‍होंने यह भी कहा कि योगाभ्‍यास से ध्‍यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। प्रधानमंत्री ने खिलाडि़यों से कहा ‘वे हारी नहीं हैं। एक सौ पच्‍चीस करोड़ भारतीयों ने उनकी हार का बोझ अपने कंधों पर साझा किया है। यही उनकी सबसे बड़ी जीत है’।
        उन्‍होंने कहा कि देश की बेटियों ने कई अन्‍तर्राष्‍ट्रीय खेल स्‍पर्धाओं में भारत का मान बढ़ाया है। विभिन्‍न क्षेत्रो में महिलाओं की प्रगति से समाज लाभान्वित हो रहा है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने खेलों के अलावा दसवीं और बारहवीं कक्षा के परीक्षा परिणामों तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के महत्‍वाकांक्षी अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाली महिला वैज्ञानिकों का भी उल्‍लेख किया। खिलाड़ियों ने प्रधानमंत्री को हस्‍ताक्षरित बल्‍ला भी भेंट किया।

Thursday, 27 July 2017

एनआरआई विवाह के लिए एक विशेषज्ञ समिति

     सरकार ने भारतीय मूल के विदेशों में रह रहे नागरिकों से विवाह करने वाले भारतीय नागरिकों के सामने आने वाले मुद्दों और कठिनाइयों का पता लगाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। 

  वर्तमान कानूनों- नीतियों- नियमों में संशोधनों का सुझाव दिया है। ऐसा विवाहों के टूटने से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों में फंसे पुरूषों- महिलाओं (और उनके बच्चों) की बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बाद किया गया है। एनआरआई आयोग, पंजाब के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार गोयल के नेतृत्व में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। समिति के सदस्यों में पूर्व सांसद बलवंत सिंह रामूवालिया, महिला और बाल विकास मंत्रालय, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और दूर संचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और प्रोफेसर पैम राजपूत शामिल हैं। 
      एनआरआई विवाहों से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए अब तक विशेषज्ञ समिति की चार बैठकें हो चुकी हैं। महिलाओं और बच्चों से जुड़े विषयों से निपटने के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय प्रमुख मंत्रालय है। उसे विभिन्न व्यक्तियों, नागरिक समाज संगठनों/संस्थानों सहित विभिन्न साझेदारों से इस बारे में अनेक सुझाव मिल रहे हैं।
       इऩमें से कुछ सुझावों में विदेशी विवाह अधिनियम, 1969 सहित अनेक कानूनों में संशोधन; विदेश स्थित दूतावासों/मिशनों में पृथक प्रकोष्ठ का गठन ताकि लोग स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर सकें; प्रभावित इलाकों जैसे गांवों, कस्बों और शैक्षणिक संस्थानों में इस विषय में क्या करें और क्या न करें का प्रसार; केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड (सीएसडब्ल्यूबी) द्वारा गठित परिवार परामर्श केन्द्रों (एफएफसी) के जरिये विवाह से पहले और विवाह के बाद सलाह प्रदान करने; कानूनी और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए दूतावास संबंधी सार्थक डिवीजन का गठन; विवाह के लिए पंजीकरण अनिवार्य करना; मां को बच्चे का सहज अभिभावक बनाना और अऩेक अन्य सुझाव शामिल हैं।
      इन सभी सुझावों को महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा जांच के लिए विशेषज्ञ समिति के पास भेजा गया है। विशेषज्ञ समिति सभी सुझावों पर गौर करेगी और सरकार को अपनी सिफारिशें देगी। सरकार भविष्य की रणनीति तय करने के लिए बड़ी संख्या में साझेदार समूहों के साथ विचार-विमर्श कर सिफारिशों की जांच करेगी।
        अतः यह स्पष्ट किया जाता है कि महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा विशेषज्ञ समिति को भेजे गये सुझाव केवल प्रक्रिया का हिस्सा हैं ताकि विभिन्न साझेदारों के विचारों पर समिति द्वारा विधिवत विचार किया जा सके। इस संबंध में मंत्रालय की औपचारिक और अंतिम सिफारिशों के रूप में दी गई खबरें पूरी तरह गुमराह करने वाली और गलत हैं।
     मंत्रालय ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से कहा है कि वह ऐसे बच्चों के मामलों को देखे जिनके माता पिता का विवाह टूट चुका है। एनसीपीसीआर से कहा गया है कि वह इस मुद्दे पर विस्तृत विचार-विमर्श करे ताकि इस विषय से जुड़े सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, कानूनी और अन्य आयामों की जांच हो सके।

 

तुगलकाबाद में 10 मीटर राइफल व पिस्टल मिनी रेंज

       युवा मामले और खेल राज्यमंत्री विजय गोयल व सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल (सेवानिवृत्त) राज्यवर्धऩ राठौर ने यहां तुगलकाबाद स्थित डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में नवनिर्मित 10 मीटर राइफल और पिस्टल मिनी रेंज का उद्घाटन किया। 

     इस अवसर पर विजय गोयल ने कहा कि मंत्रालय का लक्ष्य खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्टेडियमों और अन्य बुनियादी ढांचों का इस्तेमाव करना है। उन्होंने कहा कि 10 मीटर मिनी रेंज किसी भी उम्र के उन नव आगन्तुकों को शूटिंग का बुनियादी प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है जो शूटिंग प्रतिस्पर्धा में शामिल होना चाहते हैं। 
         उन्होंने कहा कि इस नये मैनुअल इलेक्ट्रॉनिक्स 05 पोइंट लक्ष्य के शुरू होने के बाद वे न्यूनतम मानदंड हासिल करने में सक्षम होंगे और उन्हें इसके बाद कम्प्यूटरीकृत इलेक्ट्रॉनिक्स लक्ष्य प्रणाली में भेजा जा सकेगा जिसे आईएसएसएफ नियमों के अनुसार सर्वोत्कृष्ट शूटिंग प्रशिक्षण प्रतिस्पर्धाओं के लिए बनाया गया है। 
      गोयल ने कहा कि इससे न केवल प्रशिक्षकों की संख्या कई गुना बढ़ेगी बल्कि शूटर बनने की आकांक्षा रखने वालों के बीच शूटिंग लोकप्रिय बन जाएगी। मिनी रेंज पर नये प्रशिक्षण से निचले स्तर के शूटरों के लिए दरवाजे खुलेंगे जो प्रतिस्पर्धात्मक खेलों में उत्कृष्टता हासिल करना चाहते हैं। 
      कर्नल राठौर ने खेल मंत्री को बधाई देते हुए कहा कि शूटिंग को लोकप्रिय बनाने की दिशा में यह एक अच्छी पहल है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं की शूटिंग में दिलचस्पी और ओलंपिक में भारत के लिए संभावनाएं बढ़ेंगी। आम जनता के लिए इसमें क्रमशः 200 रुपये, 3000 रुपये और 36,000 रुपये की दर से दैनिक, मासिक और वार्षिक सदस्यता उपलब्ध है। 
       डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज विश्वस्तर का शूटिंग रेंज हैं जहां 72 एकड़ हरित क्षेत्र में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका निर्माण 9वें एशियाई खेलों के दौरान 1982 में किया गया था और बीकानेर के महाराजा डॉ. कर्णी सिंह जी के नाम पर इसका नामकरण किया गया जिन्हें 1961 में शूटिंग में पहला अर्जुन पुरस्कार मिला था।

भूकम्‍प मापदंडों के विस्‍तार के लिए इंडिया क्‍वेक एप

        विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान, पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने नई दिल्‍ली पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय की स्‍थापना दिवस के अवसर पर ‘इंडिया क्‍वेक’ लांच किया। 

       राष्‍ट्रीय भूकम्‍प केन्‍द्र (एनसीएस) 84 स्‍टेशनों के साथ राष्‍ट्रीय भूकम्पीय नेटवर्क का संचालन करता है। ये स्‍टेशन वास्‍तविक समय में डाटा संचार के लिए री-सैट के माध्‍यम से राष्‍ट्रीय भूकम्‍प केन्‍द्र से जुडे हुए हैं। भूकम्‍प आने की स्थिति में राष्‍ट्रीय भूकम्‍प केन्‍द्र अपने नेटवर्क से डाटा का उपयोग करते हुए इन स्‍टेशनों का पता लगा लेता है और एसएमएस, ईमेल तथा फैक्‍स के माध्‍यम से संबंधित सरकारी विभाग और अन्‍य हितधारकों में भूकम्‍प मापदंडों का प्रसार करता है। लेकिन इस प्रसार में कुछ देरी होती है और मापदंडों को प्राप्‍त करने में थोड़ा गतिरोध होता है।
         इस गतिरोध को दूर करने के लिए राष्‍ट्रीय भूकम्‍प केन्‍द्र द्वारा एक मोबाइल एप विकसित किया गया है। भूकम्‍प आने के बाद यह एप स्‍वचालित रूप से भूकम्‍प के स्‍थान, समय और उसकी तीव्रता (मापदंडों) का प्रसार करेगा। इस एप से तेजी से मापदंडों का प्रसार हो सकेगा।
         यह एप कोई भी नागरिक डाउनलोड कर सकता है और अपने मोबाइल पर वास्‍तविक समय पर भूकम्‍प स्‍थान की सूचना प्राप्‍त कर सकता है। एप के वैज्ञानिक और प्रशासनिक लाभों के अतिरिक्‍त इससे भूकम्‍प के दौरान लोगों की घबराहट कम करने में मदद मिलेगी। 
      उदाहरण के लिए यदि हिन्‍दकुश, (अफगानिस्‍तान) में भूकम्‍प आता है और इसे दिल्‍ली में गंभीरता से महसूस किया जाता है तो उस स्थिति में दिल्‍ली के लोग दो मिनट से भी कम समय में यह जान सकेंगे कि भूकम्‍प दिल्‍ली में नहीं बल्कि अफगानिस्‍तान में आया है।

किसानों को उपज बेचने के लिए नजदीक बाज़ार उपलब्ध हों

         केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि कृषि के विकास के बारे में विचार काफी समय से होता आ रहा है परन्तु आज़ादी के बाद से यह पहली सरकार है जो कृषि के विकास के साथ- साथ कृषकों के आर्थिक उन्नयन के बारे में भी धरातल स्तर पर बहुत तेजी के साथ कार्रवाई भी कर रही है।

      सिंह ने यह बात पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी में हुई परामर्श दात्री समिति की बैठक में कही। बैठक का विषय सॉयल हेल्थ कार्ड था। राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमन्त्री का सपना है कि वर्ष 2022 तक कृषकों की आय दोगुनी हो जाए और वे विकास की मुख्य धारा में अपनी भागीदारी को सहज भाव से महसूस करें क्ष् सिंह ने कहा इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 3 स्तंभों पर कार्रवाई करनी होगी। 
      सिंह ने कहा कि प्रथम स्तम्भ के अंतर्गत हमें अपने उत्पादन लागत को कम करना होगा तथा उत्पादकता को बढ़ाना होगा क्ष् दूसरे स्तंभ के रूप में किसानों को जरुरत है कि कृषि के साथ-2 इसे विविधीकृत करें और कृषि आधारित अन्य लाभकारी क्रियाकलापों यथा पशुपालन, मुर्गीपालन, बकरी पालन, मतस्य पालन, मधुमक्खीपालन, मेड़ों पर इमारती लकड़ी के पेड़ लगाने को भी अपनाएँ।
         तीसरा एवं सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ ये है की किसानों को उनकी उपज बेचने के लिए नजदीक में बाज़ार उपलब्ध हों तथा उनके उपज का उनको लाभकारी मूल्य मिल सके। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उत्पादन लागत कम करने तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने देश के सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना चलायी है। 
      सॉयल हैल्थ कार्ड में मृदा स्वास्थ्य सुधार और उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की जानकारी के साथ खेतों की पोषण स्थिति पर किसानों को सूचना दी जाती है। सिंह ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य स्थिति को नियमित रूप से प्रत्येक 2 वर्ष में आंकलित किया जाएगा ताकि पोषक तत्वों में कमी का पता लगाया जा सके और उसके अनुसार सुधार किया जा सके। 
      उन्होंने कहा कि सॉयल नमूनों के संग्रहण और प्रयोग शालाओं में परीक्षण पर एकीकृत दृष्टिकोण, देश में सभी भू-जोतो का एक रूप कवरेज, प्रत्येक 2 वर्षों के पश्चात सॉयल हेल्थ कार्ड जारी करना सॉयल हेल्थ कार्ड योजना की मुख्य विशेषताएँ हैं। सिंह ने कहा कि पहली बार एक एकीकृत सॉयल नमूना मापदंड अपनाया गया है। सिंचित क्षेत्र में 2.5 हैक्टेयर और गैर सिंचित क्षेत्र में 10 हैक्टेयर के ग्रिड में नमूनों को एकत्र किया जा रहा है। जीपीएस आधारित मिटृी के नमूने एकत्र करने को अनिवार्य कर दिया गया गया है ताकि सुव्यवस्थित डाटाबेस तैयार किया जा सके और पिछले वर्षों में मृदा की स्थिति में परिवर्तन को मॉनिटर किया जा सके। 
        केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि एकीकृत मृदा परीक्षण पद्धति को अपनाया जा रहा है जिसके अधीन व्यापक रूप से 12 स्वास्थ्य मानकों अर्थात प्राथमिक पोषकतत्व (एनपीके); द्वियतीयक पोषकतत्व (सल्फर); सूक्ष्म पोषकतत्व (बोरोन, जस्ता, मैंगनीज़, लोहा और तांबा), और अन्य (पीएच, ईसी और ओसी) का विश्लेषण किया जा रहा है। द्वियतीयक और सूक्षम पोषक तत्वों का विश्लेषण अब अनिवार्य है। सिंह ने कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड का एक समान प्रारूप अपनाया गया है। 
       सॉयल हेल्थ कार्ड में सॉयल जांच आधारित फसलवार उर्वरक सिफ़ारिश के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। पहले दो वर्षीय चक्र (2015-17) में दिनांक 25.07.2017 तक 253 लाख मिट्टी के नमूनों के लक्ष्य की तुलना में सभी 253 लाख मिट्टी के नमूने एकत्रित किए जा चुके हैं और 248 लाख नमूनों (98ऽ) का परीक्षण किया जा चुका है। 12 करोड़ मृदा स्वस्थ्य कार्ड के लक्ष्य के तुलना में अब तक 9 करोड़ कार्ड (75ऽ) किसानों को वितरित किए जा चुके हैं। 
      केन्द्रीय कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि इस योजना के माध्यम से न सिर्फ किसानों के लागत मूल्य में कमी आ रही है वरन सही पोषक तत्वों की पहचान एवं उपयोगिता भी बढ़ी है। वर्ष 2014-17 के दौरान इस योजना के अन्‍तर्गत 253.82 करोड की राशि जारी की गई है। वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2016-17 के दौरान रसायनिक उर्वरकों की खपत में 8 से 10 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत की समग्र वृद्धि हुई है। 
       सिंह ने कहा कहा कि कुछ राज्यों ने इसमें अच्छी प्रगति की है और 16 राज्यों ने पूर्ण लक्ष्य प्राप्त कर लिया है और 9 राज्य जुलाई 2017 के अंत तक पूर्ण लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे। लेकिन अभी भी 7 राज्यों में प्रगति धीमी चल रही है, ये राज्य हैं उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पंजाब, असम, जम्मू-कश्मी्र एवं मणिपुर। उन्होंने समिति के सदस्यों से अनुरोघ किया कि वे अतिशीघ्र अपने राज्य में पूर्ण लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयत्न करें।

रामेश्वरम में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्मारक का उद्घाटन

         प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रामेश्वरम में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्मारक का उद्घाटन किया। मोदी ने डॉ. कलाम की प्रतिमा का अनावरण किया और कलाम स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की। 

   प्रधानमंत्री ने डॉ. कलाम के परिवार के सदस्यों के साथ एक संक्षिप्‍त मुलाकात भी की। प्रधानमंत्री ने कलाम संदेश वाहिनी नामक एक प्रदर्शनी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बस देश के विभिन्न राज्यों में यात्रा करते हुए पूर्व राष्ट्रपति की जयंति यानि 15 अक्टूबर को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन पहुंचेंगी। 
        एक विशाल सार्वजनिक बैठक में, प्रधानमंत्री ने ब्लू क्रांति योजना के तहत चुने गये लाँग लाइन ट्रॉलरों के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से रामेश्वरम से अयोध्या के बीच एक नई एक्‍सप्रेस रेलगाड़ी श्रद्धा सेतु का शुभारंभ किया।
       उन्होंने ग्रीन रामेश्वरम परियोजना के सारांश जारी किए। राष्ट्रीय राजमार्ग-87 पर मुकुंदायरार चतिरम और अरिचलमुनई के बीच 9.5 किमी लिंक रोड राष्ट्र को समर्पित करते हुए एक पट्टिका का अनावरण किया। सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि रामेश्वरम पूरे देश के लिए आध्यात्मिकता का प्रतीक रहा है। अब इसे डॉ कलाम के साथ करीबी रूप से जुड़े स्थान के रूप में भी जाना जाता है।
         उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम रामेश्वरम की सादगी, गहराई और शांति का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. कलाम का यह स्मारक विशेष रूप से उनके जीवन और समयकाल का दर्शाता है। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जे. जयललिता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह एक ऐसी नेता हैं जिन्‍हें हम सभी याद करते हैं। 
       उन्होंने कहा कि यह सब देखकर वह बहुत खुश होंगी और अपनी शुभकामनाएं देंगी।प्रधानमंत्री ने कहा कि बंदरगाहों और रसद के क्षेत्र में परिवर्तन, भारत के विकास में महत्‍वपूर्ण योगदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि जहां तक स्वच्छ भारत मिशन का संबंध है, इसे लेकर राज्‍यों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है।
       प्रधानमंत्री ने कहा कि डा. कलाम ने भारत के युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा प्रगति की ऊंचाइयों को प्राप्‍त करके रोजगार प्रदाता बनना चाहते हैं।

सामाजिक-आर्थिक, गणना की लागत 4893.60 करोड़, गरीबों की बेहतरी का मार्ग

      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना 2011 (एसईसीसी 2011) की लागत में संशोधन करने संबंधी ग्रामीण विकास विभाग के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है।

     इसमें सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना 2011 की लागत को संशोधित करके 4893.60 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि इससे पहले स्‍वीकृत अनुमानित व्यय 3543.29 करोड़ रुपये था, जो सरकार द्वारा अनुमोदित 4000 करोड़ रुपये की सांकेतिक लागत के भीतर था। तय अवधि एवं लागत में बढ़ोतरी और इसके परिणामस्‍वरूप केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के कंसोर्टियम के लिए प्रति-रिकॉर्ड लागत की ऊपरी सीमा में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है।
        सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना-2011 परियोजना 31 मार्च, 2016 को पूरी हो चुकी है। इसके तहत तय धनराशि का परिव्‍यय पहले ही हो चुका है और परियोजना ने अपने सभी लक्ष्‍य प्राप्‍त कर लिए हैं। सरकार समाज के गरीब और अधिकार विहीन वर्ग की सहायता के लिए देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में गरीबी उन्मूलन और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर भारी मात्रा में धनराशि खर्च कर रही है।
       एसईसीसी ने गरीबों के लिए बेहतरी का मार्ग प्रशस्‍त किया है और गरीब परिवारों की स्थिति सुधारने के लिए साक्ष्‍य आधारित नियोजित हस्‍तक्षेप किया है। एसईसीसी के आंकड़ों की उपलब्‍धता से पहले, पात्र लाभान्वितों की सही पहचान करना एक प्रमुख चुनौती था। गरीबी रेखा से नीचे की सूची में पक्षपात के आरोपों के कारण सबसे गरीब को शामिल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। एसईसीसी के आंकड़े परिवारों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित हैं साथ ही परिवारों को यह अवसर प्रदान किया गया है कि वे एसईसीसी के एकत्र और प्रकाशित आंकड़ों के बारे में दावों और आपत्तियों को उठाएं। 
       अत: एसईसीसी के आंकड़े ग्रामीण विकास और अन्‍य विभागों द्वारा चलाई जा रही विभिन्‍न योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वितों की पहचान करने और प्राथमिकता का आधार तय करने के लिए परिवारों द्वारा दी गई जानकारी की एक प्रामाणिक सूची प्रदान करते हैं। 
        परिवारों का क्रम त्रिस्‍तरीय प्रक्रिया के जरिए तय किया गया है। इसमें गरीब-नहीं परिवार, गरीब परिवारों में सबसे गरीब के लिए पांच स्‍वत: शामिल मानदंड और गरीब परिवारों की पहचान करने के लिए सात आपद मानदंडों को शामिल किया गया है। सरकार ने गरीब की पहचान करने के लिए राज्‍यों को दीन दयाल अंत्‍योदय योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण आदि के अंतर्गत एसईसीसी आंकड़े और परिवारों की टीआईएन संख्‍या प्रक्रिया का इस्‍तेमाल करने की सलाह दी है। 
       एसईसीसी-2011 के इस्‍तेमाल से लाभान्वित के चयन में पारदर्शिता आई है और डीबीटी के साथ उसकी संरचित व्‍यापकता का शासन और जवाबदेही पर अधिकतम प्रभाव पड़ा है।

जहाजों के जरिये हज यात्रा दोबारा शुरू करने की संभावना

         अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय भारतीय हज यात्रियों के लिए अतिरिक्त विकल्प के रूप में जहाजों के जरिये हज यात्रा दोबारा शुरू करने की संभावना पर जहाजरानी मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है।

     जहाजरानी मंत्रालय ने जानकारी दी है कि यदि 1100 यात्रियों की क्षमता वाले जहाजों का इस्तेमाल किया जाता है तो उसके टिकट का खर्च विमान के खर्च के मुकाबले कम होगा। इसके अलावा यात्रियों के एकत्र होने और यात्रा समय सहित अन्य तार्किक प्रबंधों पर भी विचार करना जरूरी है। 
    जहाजरानी मंत्रालय द्वारा दी गई सलाह पर विदेश मंत्रालय के साथ भी सलाह मशविरा किया गया है। इस बारे में अभी भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं और कुछ भी तय नहीं किया गया है। अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

Wednesday, 26 July 2017

देश के 25348 डाकघरों का कम्प्यूटरीकरण

        सरकार चालू वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान ग्रामीण व्यवसाय और डाक नेटवर्क तक पहुंच योजना के तहत 81 उप डाकघर और डाकघरों की 100 नई शाखाएं खोलने की तैयारी में है। 

     संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान इस योजना के तहत डाक विभाग ने वाम अतिवाद से प्रभावित देश के 32 जिलों में नए पदों का सृजन करते हुए 66 डाकघर शाखाएं खोलने की भी योजना बनाई है। सिन्हा ने बताया कि देश के राज्यों में मौजूद 25,350 में से 25,348 डाकघरों का कम्प्यूटरीकरण कर दिया गया है।
      उन्होंने कहा कि डाक विभाग बाज़ार की बढ़ती मांग को पूरा करने और राजस्व कमाई बढ़ाने के वास्ते नई प्रौद्योगिकी लाने और प्रणाली को अत्याधुनिक करने के लिए समय-समय पर कदम उठाता रहा है। 
     सिन्हा ने कहा कि डाक उत्पादों और सेवाओं की दरों में वृद्धि या बदलाव एक अनवरत प्रक्रिया है जो समय-समय पर चलता रहता है।उन्होंने कहा कि प्रीमियम व्यवसाय विकास उत्पादों की दरों में बढ़ोतरी करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।

असम के लिए 40 हजार करोड़

         सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने असम में भारी वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय राजमार्गों की तत्काल मरम्मत के लिए पहली किश्त के रूप में 200 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है।

     असम के मुख्यमंत्री सर्वानन्द सोनोवाल की गडकरी से असम की स्थिति की समीक्षा के संबंध में मुलाकात के बाद यह घोषणा की गई। असम में भारी वर्षा के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों को नुकसान पहुंचा है। इस बीच, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों का एक विशेषज्ञ दल नुकसान का आकलन करने के लिए भेजा गया है।
       यदि जरूरत पड़ी तो एनएचएआई की टीम की रिपोर्ट के आधार पर कुछ और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। एनएचएआई की टीम के एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने की संभावना है। ब्रह्मपुत्र नदी में तलकर्षण कार्य के लिए अतिरिक्त 400 करोड़ रूपये की मंजूरी दी गई है। 
     तलकर्षण का कार्य 6 निकर्षण पोतों (ड्रेजर) का इस्तेमाल करते हुए सितंबर में शुरू किया जाएगा। तलकर्षण से नदी की गहराई बढ़ जाएगी और बाढ़ को रोका जा सकेगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र के साथ बेहतर सड़क संपर्क के लिए अगले पांच वर्ष के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी पर कुल सात पुलों का निर्माण किया जाना है।
      दो पुलों पर कार्य चल रहा है। तीन और पुलों के लिए राज्य सरकार द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जानी है। गडकरी ने राज्य सरकार से कहा कि वह नदी तटों पर 40 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले प्रस्तावित ब्रह्मपुत्र राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट दे।

विकास से जुड़े कार्यों में उद्योग जगत से साझेदारी का आह्वान

     मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री डॉ महेन्‍द्र नाथ पांडेय ने उद्योग जगत को आमंत्रित करते हुए कहा है कि वह विकास योजनाओं में साझेदारी करने, स्‍टार्ट अप्‍स की सहायता करने और नई पहल करने के लिए आगे आए। 

       उन्‍होंने शिक्षा के क्षेत्र में संलग्‍न अन्‍य कारकों का लाभ उठाने के लिए विविध उपायों की भी चर्चा की। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा केंद्र और राज्‍य का मामला है और इस बारे में समस्‍त राज्‍यों से व्‍यापक सहयोग अपेक्षित है।
       उन्‍होंने शिक्षा नीति के मसौदे और अन्‍य मामलों पर उद्योग के सदस्‍यों से सुझाव और टिप्‍पणियां आमंत्रित कीं। डॉ पांडेय कोलकाता में एसोचैम द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘शिक्षा और नवाचार के माध्‍यम से जीवन में बदलाव तथा शिक्षा उत्‍कृ‍ष्‍टता पुरस्‍कार 2017’ को संबोधित कर रहे थे। 
         इस कार्यक्रम में स्‍कूल पूर्व शिक्षा, प्राथमिक और माध्‍यमिक स्‍कूली शिक्षा और उच्‍च शिक्षा पर मुख्‍य रूप से ध्‍यान केंद्रित किया गया। इस अवसर पर हुआ विचार-विमर्श शिक्षा की गुणवत्‍ता, इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने वाले तकनीकी उपायों तथा संपूर्ण शिक्षा एवं स्‍कूल-पूर्व स्‍तर से शिक्षकों को साथ जोड़े जाने पर केंद्रित रहा। इस अवसर पर एसोचैम और कलकत्‍ता चैम्‍बर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

नौसैनिक अपतटीय गश्‍ती जहाज साची व श्रुति लांच

       रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड (आरडीईएल) ने गुजरात के पीपावाव शिपयार्ड में पहले दो नौ सैनिक अपतटीय गश्‍ती जहाज (एनओपीवी) को लांच किया। 

         ये जहाज भारतीय नौसेना के लिए पांच जहाज निर्माण परियोजना के हिस्‍सा हैं। दोनों अपतटीय गश्‍ती जहाज- साची और श्रुति- को वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा, वीपीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, एडीसी, पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ की पत्‍नी श्रीमती प्रीति लूथरा ने लांच किया। अपतटीय गश्‍ती जहाज सामान्‍यत: देश के विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की निगरानी का काम करते हैं।
    इसके अतिरिक्‍त जहाज पायरेसी विरोधी गश्‍ती, बेड़ों को समर्थन, अपतटीय परिसम्‍पत्तियों की समुद्री रक्षा, तटीय सुरक्षा तथा नौवहन मार्ग की रक्षा का काम भी करते हैं। एनओपीवी भारतीय नौ सेना की समुद्री निगरानी और गश्‍ती क्षमता को बढ़ाएंगे। 
      इस अवसर पर वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा ने कहा कि साची और श्रुति जहाज का लांच किया जाना महत्‍वपूर्ण घटना है क्‍योंकि ये दोनों जंगी जहाज निजी क्षेत्र में बने हैं। उन्‍होंने कहा कि नौ सेना द्वारा जंगी जहाजों को निजी क्षेत्र में बनाने की अनुमति देना एक अवसर है जिसका उपयोग निजी क्षेत्र को पूरी तरह करना चाहिए। यह राष्‍ट्रीय क्षमता जैसे महत्‍वपूर्ण क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने में सहायक हैं। 
         फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ ने कहा कि हमने कई अच्‍छे जहाज बनाये है और उतारे हैं फिर भी हमारे शिपयार्डों को गुणवत्ता, उत्‍पादकता के वैश्विक मानक हासिल करने के उद्देश्‍य से परिवर्तन के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि परियोजनाएं नियत समय में पूरी की जानी चाहिए।
          उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय आवश्‍यकताओं को पूरा करने के अतिरिक्‍त शिपयार्डों को निर्यात पर भी ध्‍यान देना चाहिए। फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ ने रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड और कंपनी के कर्मियों तथा नौ सेना के जहाज निरीक्षण तथा गुणवत्ता आश्‍वासन दल को उनके प्रयासों के लिए सराहना की। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि निकट भविष्‍य में साची और श्रुति भारतीय नौ सेना में शामिल किए जाएंगे।

Tuesday, 25 July 2017

राजमार्ग क्षेत्र के लिए सात लाख करोड़ निवेश की आवश्‍यकता

     सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने आकलन किया है कि देश में अगले पांच सालों के दौरान राष्‍ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए लगभग 6.92 लाख करोड़ रुपये की आवश्‍यकता होगी। 

   यह आवश्‍यकता मंत्रालय के कुल बजटीय समर्थन, केन्‍द्रीय सड़क निधि, चुंगी, टीओटी प्रणाली द्वारा राष्‍ट्रीय राजमार्गों से होने वाली आय, भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से लिये गये कर्ज और निजी क्षेत्र के निवेश के जरिए पूरी की जाएगी। 
     यह सूचना कल राज्‍यसभा में सड़क यातायात एवं राजमार्ग तथा नौवहन राज्‍य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ए‍क लिखित उत्‍तर में दी। 
        उन्‍होंने बताया कि सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर 208 रेलवे क्रॉसिंगों को चिन्हित किया है, जहां सेतु भारतम योजना के तहत आरओबी का निर्माण किया जाएगा। अब तक 87 आरओबी परियोजनाओं का अध्‍ययन किया जा चुका है।
           मंडाविया ने यह भी सूचना दी कि सरकार ने देश में मौजूद 1.15 लाख किलोमीटर राष्‍ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को बढ़ाकर दो लाख किलोमीटर तक कर दिया है। एक अलग लिखित उत्‍तर में मनसुख मंडाविया ने सदन को सूचित किया कि सरकार राष्‍ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में प्‍लास्टिक कचरे के इस्‍तेमाल को बढ़ावा दे रही है। यह काम खासतौर से उन शहरी क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिनकी आबादी पांच लाख या उससे अधिक है। 
    इसे 50 किलोमीटर के दायरे में लागू किया जाएगा। बहरहाल, इस समय किसी राष्‍ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में प्‍लास्टिक कचरे का इस्‍तेमाल नहीं किया जा रहा है।  

   

विश्व में भारत के दृष्टिकोण का महत्त्व

       भारत के राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के अवसर पर रामनाथ कोविन्द ने कहा कि आज पूरे विश्व में भारत के दृष्टिकोण का महत्त्व है। पूरा विश्व भारतीय संस्कृति और भारतीय परंपराओं की तरफ आकर्षित है। 

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि विश्व समुदाय अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिए हमारी तरफ देख रहा है। चाहे आतंकवाद हो, कालेधन का लेन-देन हो या फिर जलवायु परिवर्तन। वैश्विक परिदृश्य में हमारी जिम्मेदारियां भी वैश्विक हो गई हैं। यही भाव हमें, हमारे वैश्विक परिवार से, विदेश में रहने वाले मित्रों और सहयोगियों से, दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में रहकर अपना योगदान दे रहे प्रवासी भारतीयों से जोड़ता है।
          यही भाव हमें दूसरे देशों की सहायता के लिए तत्पर करता है, चाहे वो अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस का विस्तार करना हो, या फिर प्राकृतिक आपदाओं के समय, सबसे पहले सहयोग के लिए आगे आना हो। मुझे, भारत के राष्ट्रपति पद का दायित्व सौंपने के लिए मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मैं पूरी विनम्रता के साथ इस पद को ग्रहण कर रहा हूँ। 
        यहाँ सेंट्रल हॉल में आकर मेरी कई पुरानी स्मृतियां ताजा हो गई हैं। मैं संसद का सदस्य रहा हूं, और इसी सेंट्रल हॉल में मैंने आप में से कई लोगों के साथ विचार-विनिमय किया है। कई बार हम सहमत होते थे, कई बार असहमत। लेकिन इसके बावजूद हम सभी ने एक दूसरे के विचारों का सम्मान करना सीखा। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। 
          राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मैं एक छोटे से गांव में मिट्टी के घर में पला-बढ़ा हूँ। मेरी यात्रा बहुत लंबी रही है, लेकिन ये यात्रा अकेले सिर्फ मेरी नहीं रही है। हमारे देश और हमारे समाज की भी यही गाथा रही है। हर चुनौती के बावजूद, हमारे देश में, संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल मंत्र का पालन किया जाता है और मैं इस मूल मंत्र का सदैव पालन करता रहूँगा। 
         राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि मैं इस महान राष्ट्र के 125 करोड़ नागरिकों को नमन करता हूँ और उन्होंने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरने का मैं वचन देता हूं। मुझे इस बात का पूरा एहसास है कि मैं डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और मेरे पूर्ववर्ती श्री प्रणब मुखर्जी, जिन्हें हम स्नेह से ‘प्रणब दा’ कहते हैं, जैसी विभूतियों के पदचिह्नों पर चलने जा रहा हूँ।
            राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि हमारी स्वतंत्रता, महात्मा गांधी के नेतृत्व में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयासों का परिणाम थी। बाद में, सरदार पटेल ने हमारे देश का एकीकरण किया। हमारे संविधान के प्रमुख शिल्पी, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने हम सभी में मानवीय गरिमा और गणतांत्रिक मूल्यों का संचार किया। वे इस बात से संतुष्ट नहीं थे कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही काफी है।
         राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि उनके लिए, हमारे करोड़ों लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता के लक्ष्य को पाना भी बहुत महत्त्वपूर्ण था। अब स्वतंत्रता मिले 70 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। हम 21वीं सदी के दूसरे दशक में हैं, वो सदी, जिसके बारे में हम सभी को भरोसा है कि ये भारत की सदी होगी, भारत की उपलब्धियां ही इस सदी की दिशा और स्वरूप तय करेंगी।
       हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो आर्थिक नेतृत्व देने के साथ ही नैतिक आदर्श भी प्रस्तुत करे। हमारे लिए ये दोनों मापदंड कभी अलग नहीं हो सकते। ये दोनों जुड़े हुए हैं और इन्हें हमेशा जुड़े ही रहना होगा। देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है। विविधता ही हमारा वो आधार है, जो हमें अद्वितीय बनाता है। इस देश में हमें राज्यों और क्षेत्रों, पंथों, भाषाओं, संस्कृतियों, जीवन-शैलियों जैसी कई बातों का सम्मिश्रण देखने को मिलता है। हम बहुत अलग हैं, लेकिन फिर भी एक हैं और एकजुट हैं। 
       राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि 21वीं सदी का भारत, ऐसा भारत होगा जो हमारे पुरातन मूल्यों के अनुरूप होने के साथ ही साथ चौथी औद्योगिक क्रांति को विस्तार देगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि इसमें ना कोई विरोधाभास है और ना ही किसी तरह के विकल्प का प्रश्न उठता है। हमें अपनी परंपरा और प्रौद्योगिकी, प्राचीन भारत के ज्ञान और समकालीन भारत के विज्ञान को साथ लेकर चलना है।
          राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि एक तरफ जहां ग्राम पंचायत स्तर पर सामुदायिक भावना से विचार-विमर्श करके समस्याओं का निस्तारण होगा, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल राष्ट्र हमें विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचने में सहायता करेगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि ये हमारे राष्ट्रीय प्रयासों के दो महत्त्वपूर्ण स्तंभ हैं। राष्ट्र निर्माण अकेले सरकारों द्वारा नहीं किया जाता। सरकार सहायक हो सकती है, वो समाज की उद्यमी और रचनात्मक प्रवृत्तियों को दिशा दिखा सकती है, प्रेरक बन सकती है।
           राष्ट्र निर्माण का आधार है राष्ट्रीय गौरव: हमें गर्व है भारत की मिट्टी और पानी पर; हमें गर्व है भारत की विविधता, सर्वधर्म समभाव और समावेशी विचारधारा पर; हमें गर्व है भारत की संस्कृति, परंपरा एवं अध्यात्म पर; हमें गर्व है देश के प्रत्येक नागरिक पर; हमें गर्व है अपने कर्त्तव्यों के निवर्हन पर, और हमें गर्व है हर छोटे से छोटे काम पर, जो हम प्रतिदिन करते हैं। 
         देश का हर नागरिक राष्ट्र निर्माता है। हम में से प्रत्येक व्यक्ति भारतीय परंपराओं और मूल्यों का संरक्षक है और यही विरासत हम आने वाली पीढ़ियों को देकर जाएंगे। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले और हमें सुरक्षित रखने वाले सशस्त्र बल, राष्ट्र निर्माता हैं। जो पुलिस और अर्धसैनिक बल, आतंकवाद और अपराधों से लड़ रहे हैं, वो राष्ट्र निर्माता हैं। जो किसान तपती धूप में देश के लोगों के लिए अन्न उपजा रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है। 
       राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि और हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए, कि खेत में कितनी बड़ी संख्या में महिलाएं भी काम करती हैं। जो वैज्ञानिक 24 घंटे अथक परिश्रम कर रहा है, भारतीय अंतरिक्ष मिशन को मंगल तक ले जा रहा है, या किसी वैक्सीन का अविष्कार कर रहा है, वो राष्ट्र निर्माता है। जो नर्स या डॉक्टर सुदूर किसी गांव में, किसी मरीज की गंभीर बीमारी से लड़ने में उसकी मदद कर रहे हैं, वो राष्ट्र निर्माता हैं। 
       जिस नौजवान ने अपना स्टार्ट-अप शुरू किया है और अब स्वयं रोजगार दाता बन गया है, वो राष्ट्र निर्माता है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि ये स्टार्ट-अप कुछ भी हो सकता है। किसी छोटे से खेत में आम से अचार बनाने का काम हो, कारीगरों के किसी गांव में कार्पेट बुनने का काम हो या फिर कोई लैबोरेटरी, जिसे बड़ी स्क्रीनों से रौशन किया गया हो। वो आदिवासी और सामान्य नागरिक, जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में हमारे पर्यावरण, हमारे वनों, हमारे वन्य जीवन की रक्षा कर रहे हैं और वे लोग जो नवीकरणीय ऊर्जा के महत्त्व को बढ़ावा दे रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं।
         राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि वो प्रतिबद्ध लोकसेवक जो पूरी निष्ठा के साथ अपना कर्त्तव्य निभा रहे हैं, कहीं पानी से भरी सड़क पर ट्रैफिक को नियंत्रित कर रहे हैं, कहीं किसी कमरे में बैठकर फाइलों पर काम कर रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं।
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि वो शिक्षक, जो नि:स्वार्थ भाव से युवाओं को दिशा दे रहे हैं, उनका भविष्य तय कर रहे हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं। वो अनगिनत महिलाएं जो घर पर और बाहर, तमाम दायित्व निभाने के साथ ही अपने परिवार की देख-रेख कर रही हैं, अपने बच्चों को देश का आदर्श नागरिक बना रही हैं, वे राष्ट्र निर्माता हैं।
          राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि नागरिक ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, उन प्रतिनिधियों में अपनी आस्था और उम्मीद जताते हैं। नागरिकों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए यही जनप्रतिनिधि अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में लगाते हैं। लेकिन हमारे ये प्रयास सिर्फ हमारे लिए ही नहीं हैं। सदियों से भारत ने वसुधैव कुटुंबकम, यानि पूरा विश्व एक परिवार है, के दर्शन पर भरोसा किया है। ये उचित होगा कि अब भगवान बुद्ध की ये धरती, शांति की स्थापना और पर्यावरण का संतुलन बनाने में विश्व का नेतृत्व करे। 
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि एक राष्ट्र के तौर पर हमने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन इससे भी और अधिक करने का प्रयास, और बेहतर करने का प्रयास, और तेजी से करने का प्रयास, निरंतर होते रहना चाहिए। ये इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2022 में देश अपनी स्वतंत्रता के 75वें साल का पर्व मना रहा होगा। हमें इस बात का लगातार ध्यान रखना होगा कि हमारे प्रयास से समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े उस व्यक्ति के लिए, और गरीब परिवार की उस आखिरी बेटी के लिए भी नई संभावनाओं और नए अवसरों के द्वार खुलें।  
       राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि हमारे प्रयत्न आखिरी गांव के आखिरी घर तक पहुंचने चाहिए। इसमें न्याय प्रणाली के हर स्तर पर, तेजी के साथ, कम खर्च पर न्याय दिलाने वाली व्यवस्था को भी शामिल किया जाना चाहिए। देश के नागरिक ही हमारी ऊर्जा का मूल स्रोत हैं। मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि राष्ट्र की सेवा के लिए, मुझे इन लोगों से इसी प्रकार निरंतर शक्ति मिलती रहेगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि हमें तेजी से विकसित होने वाली एक मजबूत अर्थव्यवस्था, एक शिक्षित, नैतिक और साझा समुदाय, समान मूल्यों वाले और समान अवसर देने वाले समाज का निर्माण करना होगा।
        राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि एक ऐसा समाज जिसकी कल्पना महात्मा गांधी और दीन दयाल उपाध्याय जी ने की थी। ये हमारे मानवीय मूल्यों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। ये हमारे सपनों का भारत होगा। एक ऐसा भारत, जो सभी को समान अवसर सुनिश्चित करेगा। ऐसा ही भारत, 21वीं सदी का भारत होगा।

Monday, 24 July 2017

जेएनयू में बराक होस्टल की आधारशिला

      पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अन्तरिक्ष राज्य मंत्री डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय परिसर में बराक होस्टल की आधारशिला रखी। 

       इस अवसर पर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आज के इस समारोह की प्रतीक्षा लंबे समय से की जा रही थी। उन्होनें कहा कि जेएनयू में 8000 से ज्यादा विद्यार्थी है। इसमें से अधिकतर विद्यार्थी पूर्वोत्तर क्षेत्र के है। उन्होने बताया कि पिछले वर्ष बंगलौर विश्वविद्यालय में भी पूर्वोत्तर की छात्राओं के लिए छात्रावास की आधारशिला रखी गई थी।
      डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार का ध्यान शेष देश को पूर्वोत्तर भारत के निकट लाने पर है। उन्होने कहा कि पूर्वोत्तर विकास क्षेत्र मंत्रालय ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के इच्छुक युवा स्टार्ट अप और उद्यमियों के लिए ‘उद्यम पूंजी कोष’ बनाया है।
     उन्होनें कहा कि यह कार्यक्रम पूर्वोत्तर क्षेत्र को मिलने वाले सभी प्रोत्साहनों के अतिरिक्त है। उन्होनें पूर्वोत्तर क्षेत्र की साक्षरता दर पर बल देते हुए कहा कि केरल के बाद सबसे अधिक साक्षरता दर मिजोरम में है। इस अवसर पर डॉक्टर जितेन्द्र सिंह ने पूर्वोत्तर भारत के इतिहास, राजनीति और संस्कृति पर ‘फिस्सिटी एण्ड फ्लूइडिटी’ नामक एक पुस्तक का विमोचन किया। 
        पूर्वोत्तर विकास क्षेत्र मंत्रालय के सचिव नवीन वर्मा ने कहा कि जेएनयू अपनी साख के कारण विद्यार्थीयों के लिए संतोष का श्रोत है। जेएनयू में छात्रावास कि समस्या रही है और छात्रावास की आधारशिला इस कमी को पूरा करने के लिए रखी जा रही है। 
     उन्होने छात्रावास के शीघ्र बन जाने की आशा व्यक्त की। पूर्वोत्तर परिषद के सचिव राम मुविया ने कहा कि बराक होस्टल बनाने के काम में 100 प्रतिशत धन यानी 28.30 करोड़ रुपयें पूर्वोत्तर परिषद दे रही है। यह छात्रावास तीन वर्ष में बनकर तैयार हो जाएगा और इस में चार सौ विद्यार्थी रहेगें। 200 छात्र और 200 छात्राओं के लिए यह होस्टल है।

पंजाब ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वाधीनता आंदोलन का केन्द्र था

      उप राष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी ने कहा कि पंजाब ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वाधीनता आंदोलन का केन्द्र था। 

      अंसारी यहां डॉ. सुखचैन कौर बस्सी द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस इन पंजाब’ का विमोचन करने के बाद एकत्र जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के दमन की शिकार भारत की जनता की इच्छाओं और आकांशाओं के साथ खड़े होने के लिए उनकी नुमाइंदगी की। हमारे राजनैतिक परिदृश्य में महात्मा गांधी के आगमन के साथ ही, आंदोलन विशिष्ट वर्ग के अभियान से एक सच्चे जन आंदोलन में तबदील हो गया।
         उप राष्ट्रपति ने कहा कि पंजाब अविभाजित पंजाब में कांग्रेस का पहला वार्षिक सम्मेलन दादा भाई नौरोजी की अध्य़क्षता में 1893 में लाहौर में हुआ था। कांग्रेस और संगठन की तेजी से बढ़ती हुई गतिविधियां पंजाब से राजनैतिक नेताओं और स्वाधीनता सेनानियों की ऊर्जा और प्रयासों के रूप में हमारी आजादी के आंदोलन में पंजाब की जनता की सक्रिय भागीदारी की गवाह हैं।

    

यौन उत्‍पीड़न की शिकायत के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक बॉक्‍स

       केंद्रीय महिला और बाल विकास श्रीमती मेनका संजय गांधी ने नई दिल्‍ली में कार्य स्‍थल पर यौन उत्‍पीड़न से संबंधित शिकायतें दर्ज करने के लिए यौन उत्‍पीड़न इलेक्‍ट्रॉनिक बॉक्‍स एक ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन व्‍यवस्‍था का आरंभ किया। 

     यह शिकायत प्रबंधन व्‍यवस्‍था कार्य स्‍थल पर महिलाओं का यौन उत्‍पीड़न (निवारण, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का प्रभावी कार्यान्‍वयन सुनिश्चित करने के लिए विकसित की गई है। यह पोर्टल केंद्र सरकार के किसी भी कार्यालय में काम करने वाली या वहां जाने वाली महिलाओं को उक्‍त अधिनियम के अंतर्गत कार्य स्‍थल पर यौन उत्‍पीड़न से संबंधित शिकायतें दर्ज करने का मंच उपलब्‍ध कराने की दिशा में की गई एक पहल है।
        श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि हालांकि फिलहाल यह सुविधा केंद्र सरकार के कर्मचारियों को उपलब्‍ध कराई जा रही है। लेकिन जल्‍द ही इस पोर्टल के दायरे में निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को भी शामिल किया जाएगा। महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि कार्य स्‍थल पर महिलाओं के यौन उत्‍पीड़न का परिमाण उपलब्‍ध कराने वाले कुछ सर्वेक्षण कराये गए हैं।
         हालांकि, महिलाओं के यौन उत्‍पीड़न से संबंधित समस्‍या के आकार का आकलन करने और उसे समझने के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय यह सर्वेक्षण राष्‍ट्रीय स्‍तर पर करायेगा। भारत सरकार देश की सबसे बड़ी नियोक्‍ता है, जो अपने विविध कार्यों को अंजाम देने के लिए 30.87 लाख लोगों को नियुक्त करती है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की गणना 2011 के अनुसार महिलाएं केंद्र सरकार के नियमित कर्मचारियों की कुल संख्‍या 3.37 लाख है।

नई हज नीति-2018 जल्द, उद्देश्य हज की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना

       देश की सलामती, सुरक्षा और समृद्धि की दुआओं के साथ सुबह केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने हज 2017 के लिए 300 हज यात्रियों के पहले जत्थे को इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के हज टर्मिनल से रवाना किया। 

    नकवी ने हज यात्रियों को शुभकामनाएं दी। नकवी ने कहा कि इस बार अल्पसंख्यक मंत्रालय ने हज कमिटी ऑफ़ इंडिया एवं अन्य सम्बंधित एजेंसियों के साथ मिल कर हज 2017 की तैयारियां समय से बहुत पहले ही पूरी कर ली थी ताकि हज यात्रा को सरल-सुगम बनाया जा सके। 
          नकवी ने कहा कि नई हज नीति - 2018 जल्द ही तैयार कर ली जाएगी और अगले साल से हज इस नई हज पालिसी के अनुसार आयोजित किया जायेगा। नकवी ने कहा कि हज नीति 2018 तय करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द ही सौंप देगी। नई हज पालिसी का उद्देश्य हज की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है।
         इस नई पालिसी में हज यात्रियों के लिए विभिन्न सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जायेगा। समुद्री मार्ग से भी हज यात्रा को दोबारा शुरू करना भी इस नई हज पालिसी में शामिल है। हज यात्रियों के मुंबई से समुद्री मार्ग के जरिये जेद्दा जाने का सिलसिला 1995 में रुक गया था। हज यात्रियों को जहाज (समुद्री मार्ग) से भेजने पर यात्रा संबंधी खर्च करीब आधा हो जाएगा। 
      नई तकनीक एवं सुविधाओं से युक्त पानी का जहाज एक समय में चार से पांच हजार लोगों को ले जाने में सक्षम हैं। मुंबई और जेद्दा के बीच 2,300 नॉटिकल मील की एक ओर की दूरी सिर्फ दो-तीन दिनों में पूरी कर सकते हैं। जबकि पहले पुराने जहाज से 12 से 15 दिन लगते थे। हज 2017 के लिए सऊदी अरब द्वारा कोटे में की गई बड़ी वृद्धि के बाद हज कमेटी ऑफ इंडिया के माध्यम से 1,25,025 हाजी हज यात्रा पर जायेंगे।
         जबकि 45,000 हज यात्री प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के माध्यम से हज पर जायेंगे। इस वर्ष भारत में 21 केंद्रों से कुल 1,70,025 हज यात्री भारत से हज यात्रा पर जायेंगे। इस वर्ष भारत में 21 केंद्रों से 1 लाख 70 हजार से ज्यादा हज यात्री हज पर जा रहे हैं। दिल्ली से 1628 हज यात्री हज पर जायेंगे। 
        इसके अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ से हाजियों को मिलकर दिल्ली से 16,600 हज यात्री हज पर जा रहे हैं। नई दिल्ली के अलावा गोवा, गुवाहाटी, लखनऊ, मंगलौर, वाराणसी से भी हज यात्री सऊदी अरब जा रहे हैं। 
           25 जुलाई को श्रीनगर और कोलकाता से, 27 जुलाई को गया से, 8 अगस्त को रांची, कोलकाता, भोपाल और बैंगलोर से, 10 अगस्त को नागपुर से, 13 अगस्त को अहमदाबाद, औरंगाबाद, चेन्नई, कोचीन, जयपुर, 14 अगस्त को इंदौर और हैदराबाद से हज यात्री रवाना होंगे।
           21 हज यात्रा केंद्रों में दिल्ली, गोवा, गौहाटी, लखनऊ, मंगलौर, वाराणसी, श्रीनगर, कोलकाता, गया, रांची, भोपाल, बैंगलोर, मुंबई, नागपुर, अहमदाबाद, औरंगाबाद, चेन्नई, कोचीन, जयपुर, इंदौर, हैदराबाद शामिल हैं। 
       अहमदाबाद से 10958, कोचीन से 11657, लखनऊ से 12380, मुंबई से 5605, औरंगाबाद से 2729, बैंगलोर से 4641, चेन्नई से 3370, गौहाटी से 4483, हैदराबाद से 6273, जयपुर से 4777, कोलकाता से 10348, लखनऊ से 12380, मुंबई से 5605, नागपुर से 2187, रांची से 3159 हाजी हज यात्रा पर जा रहे हैं।

Sunday, 23 July 2017

राष्‍ट्रपति के लिए विदाई भोज का आयोजन

          सेना प्रमुखों की समिति ने राष्‍ट्रपति और सशस्‍त्र सेनाओं के सर्वोच्‍च कमांडर के सम्‍मान में विदाई भोज का आयोजन किया।

    इस अवसर पर उपराष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, रक्षा राज्‍य मंत्री, सेना प्रमुख, सेना के वरिष्‍ठ अधिकारी और सेवाओं तथा रक्षा मंत्रालय के सिवीलियन अधिकारी भी मौजूद थे। सादा किन्‍तु विशिष्‍ट समारोह का आयोजन मानेकशा सेंटर में किया गया।
      सशस्‍त्र सेनाओं के सुप्रीम कमांडर राष्‍ट्रपति ने सेना के वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ बातचीत में हिस्‍सा लिया। सेना प्रमुखों की समिति के अध्‍यक्ष एवं सेना अध्‍यक्ष ने राष्‍ट्रपति को धन्‍यवाद दिया और कहा कि राष्‍ट्रपति सशस्‍त्र सेनाओं के सभी कर्मियों के लिए प्ररेणा स्रोत रहे हैं। 
       राष्‍ट्रपति ने अपने विदाई भाषण में कहा कि उनकी शुभकामनाएं सशस्‍त्र सेना के सदस्‍यों एवं उनके परिवारों के साथ है। उन्‍होंने राष्‍ट्र के लिए अपनी जान न्‍यौछावर करने वाले शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की।