Sunday, 30 July 2017

विकास व सुधार की यात्रा का हिस्सा बनने की मेघालय की इच्छा शक्‍ति

        केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग मंत्री, डॉ. जितेन्द्र सिंह को यहां लोक सभा सदस्य कोनराड संगमा के नेतृत्व में जन प्रतिनिधियों के प्रतिनिधि मण्डल ने मेघालय में जी.एस.टी के कार्यान्वन की प्रगति के बारे में जानकारी दी।

      डॉ. जितेन्द्र सिंह ने मेघालय के लोगों द्वारा ‘एक राष्ट्र एक कर’ जी.एस.टी सुधार को शेष राष्ट्र के साथ 30 जून व एक जुलाई के बीच मध्यरात्रि को अपनाने में सहयोग व निरंतर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने की प्रशंसा की।
        उन्होंने कहा कि यह न केवल पूर्वोत्तर राज्यों की शेष राष्‍ट्र में हो रहे आर्थिक सुधार का हिस्सा बनने की प्रवृत्‍ति का संकेत देता है बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में फास्‍ट ट्रेक विकास और सुधार की यात्रा का हिस्सा बनने की मेघालय के लोगों की इच्छा शक्‍ति का प्रतीक है। पिछले तीन वर्षों में केन्द्र सरकार द्वारा मेघालय राज्य में शुरू किये गए विकास की पहलों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि राज्य में रेलवे ट्रैक को बड़ी लाइन में बदलने का कार्य प्रगति पर है।
       उन्होंने कहा यह सरकार में लोगों के विश्वास को दर्शाता है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने श्री संगमा व प्रतिनिधि मण्डल के अन्य सदस्यों को जानकारी दी कि शिलाँग हवाई अड्डे पर हवाई पट्टी के उन्नयन के लिए फंडिग डोनर मंत्रालय द्वारा की जाएगी। 
       डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पिछले दो वर्षो के दौरान पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी के लिये भी प्रशंसा की और कहा कि वे विशेष तौर पर ‘गृह पर्यटन’ की प्रवृति से संतुष्ट है जो पिछले दो वर्षो में मेघालय द्वारा अपनाई गई है। उन्‍होंने कहा कि यह न केवल पर्यटकों के प्रवाह को बढ़ाती है बल्कि स्थानीय निवासी, खास तौर पर स्‍थानीय युवाओं के जीवनयापन का साधन भी उपलब्ध कराती है। 
      संगमा ने डॉ. जितेन्द्र सिंह के समक्ष चुंगी एवं सीमा-शुल्‍क मुख्‍य आयुक्‍त कार्यालय को शिलाँग से गुवाहाटी स्थानातरित करने के प्रस्ताव को रखा। उन्होने कहा जीएसटी के कार्यान्वन में चुंगी एवं सीमा-शुल्‍क आयुक्‍त कार्यालय द्वारा किये गए प्रशंसनीय ध्यान में रखते हुए इस योजना पर पुर्नविचार किया जा सकता है ताकि मुख्य आयुक्त कार्यालय शिलाँग में ही बना रहे।
          डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कौनराड संगमा से कहा कि वह केन्द्रीय वित मंत्री के सम्मुख चुंगी एवं सीमा-शुल्‍क मुख्‍य आयुक्‍त कार्यालय को शिलाँग में ही रखे जाने की संभावना और वांछनीयता विषय को रखेंगे।

नई दिल्ली में 12 स्लम युवा दौड़ को झण्डी

     युवा मामले और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने नई दिल्ली में 12वीं एवं अन्तिम स्लम युवा दौड़ को झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस दौड़ में लगभग 6000 युवाओं ने हिस्सा लिया। 

      केन्द्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बिरेन्दर सिंह एव ओलम्पिक कुश्ती विजेता पहलवान सुशील कुमार ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। यह दौड़ झण्डेवालान देवी मंदिर से आरम्भ होकर अजमल खॉ पार्क करोल बाग में समाप्त हुई। सभी प्रतिभागियों को मेडल और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। 
         दिल्ली की स्लम बस्तियों से आए युवाओं ने यह प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए मंत्रालय के प्रयासों की सरहाना की। विजय गोयल ने कहा कि स्लम युवा दौड़ युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए प्रोत्साहित करने का एक प्रयास है। इस तरह की प्रतियोगिताओं का उद्देश्य युवाओं को नशाखोरी, अपराधिक गतिविधियों एवं आतंकवाद से दूर रख कर रचनात्मक गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करना है। 
            गोयल ने यह भी बताया कि मंत्रालय, स्लम बस्तियों में छोटे युवा क्लब भी बनाएगा जो अपने क्षेत्रों में विकास और स्वच्छता के लिए कार्य करेंगे। उन्होने कहा कि हम फुटबाल, बॉलीबॉल आदि खेलों के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन भी करेंगे। इससे स्लम क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं का पता लगाने में मदद मिलेगी।
         केन्द्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बिरेन्दर सिंह ने स्लम युवा दौड़ के प्रयास की प्रशंसा की और कहा कि युवा हमारे देश का आधार है। ऐसी गतिविधियों से उनका सर्वांगीण विकास होता है और वे देश निर्माण के लिए प्रेरित होते है। ओलम्पिक पदक विजेता कुश्ती पहलवान सुशील कुमार ने कहा कि भविष्य के खिलाड़ियों के लिए इस तरह की प्रतियोगिताएं स्वर्णिम अवसर है। 
        सुशील कुमार ने दुसरी बार स्लम युवा दौड़ में हिस्सा लिया है। उन्होने कहा कि इस तरह के प्रयासों से खेल संस्कृति का विकास होगा और मंत्रालय को प्रतिभाशाली युवाओं को खोजने में मदद मिलेगी।स्लम युवा दौड़ युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय तथा नेहरू युवा केन्द्र संगठन द्वारा आरम्भ किए गए एडोप्ट स्लम अभियान का एक हिस्सा है। कुल 12 स्लम युवा दौड़ आयोजित की गई जिसमें दिल्ली के लगभग 60 हजार युवाओं ने हिस्सा लिया।

विशेषकर असम, गुजरात अति-वर्षा के कारण प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ी

        आकाशवाणी के मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा मनुष्य का मन ही ऐसा है कि वर्षाकाल मन के लिये बड़ा लुभावना काल होता है। 

    प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा पशु, पक्षी, पौधे, प्रकृति- हर कोई वर्षा के आगमन पर प्रफुल्लित हो जाते हैं। लेकिन कभी-कभी वर्षा जब विकराल रूप लेती है, तब पता चलता है कि पानी की विनाश करने की भी कितनी बड़ी ताक़त होती है। प्रकृति हमें जीवन देती है, हमें पालती है, लेकिन कभी-कभी बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायें, उसका भीषण स्वरूप, बहुत विनाश कर देता है।
         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा पिछले कुछ दिनों से भारत के कुछ हिस्सों में विशेषकर असम, गुजरात, राजस्थान, बंगाल के कुछ हिस्से, अति-वर्षा के कारण प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ी है। जहाँ हो सके, वहाँ मंत्रिपरिषद के मेरे साथी भी पहुँच रहे हैं। राज्य सरकारें भी अपने-अपने तरीक़े से बाढ़ पीड़ितों को मदद करने के लिए भरसक प्रयास कर रही हैं। सामाजिक संगठन भी, सांस्कृतिक संगठन भी, सेवा-भाव से काम करने वाले नागरिक भी, ऐसी परिस्थिति में लोगों को मदद पहुँचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं।
          प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा भारत सरकार की तरफ़ से, सेना के जवान हों, वायु सेना के लोग हों, हर कोई ऐसे समय आपदा पीड़ितों की सेवा करने में जी-जान से जुड़ जाते हैं। बाढ़ से जन-जीवन काफी अस्त-व्यस्त हो जाता है। खास कर के हमारे किसान भाइयों को, फ़सलों को, खेतों को जो नुकसान होता है।
         प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा इन दिनों मौसम का जो पूर्वानुमान मिलता है, उसके कारण क़रीब-क़रीब अनुमान सही निकलते हैं। धीरे-धीरे हम लोग भी स्वभाव बनाएँ कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अपने कार्यकलापों की भी रचना कर सकते हैं, तो उससे हम नुकसान से बच सकते हैं। जब भी मैं ‘मन की बात’ के लिये तैयारी करता हूँ, तो मैं देख रहा हूँ, मुझसे ज्यादा देश के नागरिक तैयारी करते हैं।

पारसी समुदाय का भारत के निर्माण में बहुमूल्य योगदान

       केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यहाँ कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार समावेशी विकास और अंत्योदय के संकल्प के साथ समाज के आखिरी व्यक्ति की समृद्धि-सुरक्षा-सम्मान के लिए काम कर रही है। 

     मुंबई में "जियो पारसी पब्लिसिटी फेज-2" के लॉन्च समारोह में बड़ी संख्या में उपस्थित पारसी समुदाय के लोगों और विभिन्न क्षेत्र की शख्सियतों को सम्बोधित करते हुए नकवी ने कहा कि पारसी समुदाय का भारत के निर्माण में बहुमूल्य योगदान रहा है और पारसी समुदाय अपनी संस्कृति-संस्कार के लिए हमेशा से ही अन्य समुदायों के लिए एक "रोल मॉडल" रहा है। पारसी समुदाय ने ऐसे कई महान लोग दिए हैं जो भारत निर्माण के आर्किटेक्ट रहे हैं।
          नकवी ने कहा कि भारत में पारसी समुदाय भले ही जनसँख्या के लिहाज से छोटा अल्पसंख्यक समुदाय हो लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि पारसी समाज उदारवादी, शिक्षा के प्रति जागरूक एवं शांति-सौहार्द का उदाहरण है। नकवी ने कहा कि जमशेतजी टाटा का भारत को उद्योग क्षेत्र में अपने पैरों पर खड़ा करने में योगदान, दादाभाई नौरोजी और भीकाजी कामा द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश की सेवा, होमी भाभा का भारत को एटॉमिक शक्ति बनाने में योगदान भारत के समृद्ध इतिहास का अभिन्न भाग है। 
       फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के सैन्य योगदान का भी अपना महत्व है। चाहे उद्योग हो, सेना हो, कानूनी पेशा हो, वास्तुकला हो या सिविल सेवाएं हो, पारसी समुदाय ने हर जगह शीर्ष पर पहुंचने की क्षमता दिखाई है। नकवी ने कहा कि पारसी समुदाय की घटती जनसँख्या चिंता का विषय है। 
       भारत में पारसी समुदाय की घटती जनसँख्या को रोकने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय "जियो पारसी" योजना चला रहा है। "जियो पारसी पब्लिसिटी फेज-1" की शुरुआत 2013 में की गयी थी। यह योजना पारसी समुदाय की घटती जनसँख्या के प्रति जागरूकता लाने में सफल हो रही है। "जियो पारसी" योजना के माध्यम से 101 पारसी समुदाय के बच्चों का जन्म हुआ है। 
        इस योजना का उद्देश्य वैज्ञानिक नवाचार और ढांचागत हस्तक्षेप अपनाकर पारसी आबादी के गिरते रुख को उलटना और भारत में पारसियों की जनसँख्या बढ़ाना है। इस योजना के तहत मंत्रालय द्वारा परामर्श एवं चिकित्सा सहायता मुहैय्या कराई जा रही है।
       नकवी ने कहा कि "जियो पारसी" योजना की सफलता में पारज़ोर फाउंडेशन, बॉम्बे पारसी पंचायत और फेडरेशन ऑफ जोरास्ट्रियन अंजुमंस ऑफ इंडिया की महत्वूर्ण भूमिका है। ये संगठन सेमिनार, वर्कशॉप, मीडिया, जागरूकता अभियान आदि के माध्यम से इस योजना का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।

बाघ वाले वन जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम करने में महत्त्वपूर्ण

        केन्द्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि बाघ वाले वन जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है। 

      विज्ञान भवन में वैश्विक बाघ दिवस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि बाघ स्वस्थ पर्यावरण का प्रतीक है। उन्होने कहा कि बाघों पर मंडराते खतरे की आशंका को देखकर इनके संरक्षण के प्रयासो में कोई कसर नही छोड़ी जा रही है।
         इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद बाघ संरक्षकों, स्वयं सेवी संगठनों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 तक बाघों की संख्या को दुगुना करने का सेन्ट पीटर्सबर्ग घोषणा का लक्ष्य सीमित है। लेकिन इस सामान्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रों को निरन्तर ध्यान देना होगा। 
     उन्होने कहा कि बाघ संरक्षण दिवस किसी विशेष दिवस पर आयोजित नही होना चाहिए बल्कि इसे हर दिवस के प्रत्येक क्षण में बाघों के संरक्षण की भावना के साथ मनाया जाना चाहिए। पर्यावरण मंत्री इस अवसर पर बच्चों की उपस्थिति से बेहद प्रभावित हुए। उन्होने कहा कि वे प्रतिदिन एक छोटे से अच्छे कार्य करने का उत्तरदायित्व ले, अन्य लोगों को ऐसा हितैषी, पर्यावरण की सुरक्षा व बाघ संरक्षण की सुरक्षा के लिए पर्यावरण हित का कार्य करने का उत्तरदायित्व ग्रहण करे तथा मानव के मित्र जीवों के लिए कार्य करे और अपने हृदय और आत्मा को अच्छे कार्यों के लिए ईमानदारी और निष्ठा से जोड़ दे।
         उन्होने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन एक नेक और पर्यावरण हितैषी कार्य का उत्तरदायित्व लेता है तो हम 125 करोड़ नेक और पर्यावरण हितैषी कार्यों को पूरा कर लेंगे। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि जिस दिन यह कार्य सम्पन्न हो जाएगा तब भारत विश्वगुरू हो जाएगा। मंत्री ने सुझाव दिया कि समाज में किसी भी संदेश के प्रसार के लिए बच्चों से श्रेष्ठ व सकारात्मक संदेश वाहक नही हो सकता। 
       डॉ. हर्षवर्धन ने बच्चों के लिए अनुशासन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होने कहा कि इस दिशा में अध्यापक विशेष भूमिका निभा सकते है। अनुशासन को किसी भी कीमत पर अनदेखा नही किया जाना चाहिए। इस अवसर पर मंत्री ने (टाईगर रिजर्व) बाघ रक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा और लेखा परीक्षण के संचालन के लिए प्रोटोकॉल भी जारी किया। 
         मंत्री ने बाघ संरक्षण मानदण्ड प्रमाणन सीए/टीएस पुरस्कार उत्तराखण्ड के लेन्सडाउन वन मंडल को प्रदान किया। इस डिविजन ने बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। सीए/टीएस डब्ल्यूडब्ल्यूएफ द्वारा विकसित किया गया है। 
      यह टाईगर रेंज देशों में बाघ संरक्षण के लिए कार्य करता है। इस अवसर पर कलाकार रंदीप हुड्डा ने कहा कि बाघ भारतीय विरासत का प्रतीक है। उन्होने लोगों से अनुरोध किया कि वह बाघ संरक्षण के लिए स्वयं को समर्पित करे। और लोगों को जागरूकता का संदेश दे।