Monday, 11 September 2017

भारत-बेलारूस में व्यावसायिक शिक्षा व कौशल विकास में सहयोग

      नई दिल्‍ली। बेलारूस के शिक्षा मंत्री करपिएंका झार ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से मुलाकात की।

    दोनों नेताओं में भारत व बेलारूस के बीच व्यावसायिक शिक्षा व कौशल विकास में सहयोग संबंधी विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई। बेलारूस के मंत्री ने विनिर्माण क्षेत्र में विशेष संदर्भ के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता जाहिर की। 
    उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों के बारे में भी बताया जिनका विकास इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के रखरखाव और मरम्मत में प्रशिक्षण दिए जाने के लिए किया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने प्रशिक्षकों के ईको सिस्टम के निर्माण पर जोर दिया जिसके लिए भारत में मौजूदा 50 संस्थानों को उन्नत किया जा रहा है।
        ऐसे संस्थानों को वैश्विक उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में बदलने में बेलारूस की मदद काफी अहम होगी। दोनों नेताओं के बीच बैठक व्यावसायिक व प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग की भावना जारी रखने, एक दूसरे की क्षमता का लाभ उठाने के वादे के साथ संपन्न हुई।

इंफाल हवाई अड्डे पर एकीकृत कार्गो टर्मिनल का निर्माण

        मणिपुर। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के निर्यात योजना के लिए व्यापार इंफ्रास्ट्रक्चर (टीआईईएस) के तहत आर्थिक मदद हासिल करने के बाद इंफाल हवाई अड्डे पर एकीकृत कार्गो टर्मिनल का निर्माण कराएगा। 

    मणिपुर सरकार ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के एसाइड (एएसआईडीई) योजना के तहत इंफाल के तुलिहल हवाई अडडे पर आयात-निर्यात कार्गो टर्मिनल (ईआईसीटी) की स्थापना करने की योजना बनाई है। प्रस्तावित एकीकृत कार्गो टर्मिनल से हस्तशिल्प उत्पादों और नष्ट होने वाले सामानों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 
    इससे देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के सृजन में भी मदद मिलेगी, जिससे क्षेत्र का आर्थिक विकास हो सकेगा। इसके अलावा आयात-निर्यात कार्गो टर्मिनल से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ बेहतर संपर्क स्थापित होगा और इससे भारत और आसियान देशों के बीच व्यापार में तेजी आयेगी। 
     कार्गो टर्मिनल के निर्माण की अनुमानित लागत 16.20 करोड़ रुपये है। इसके लिए टीआईईएस के तहत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 12.96 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। निर्माण के लिए शेष राशि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के आंतरिक स्रोतों से जुटाई जाएगी।

ज्ञान व कौशल दोनों समान रूप से महत्‍वपूर्ण

        नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पंडित दीनदयान उपाध्‍याय शताब्‍दी समारोह और स्‍वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर नई दिल्‍ली के विज्ञान भवन में आयोजित छात्रों के सम्‍मेलन को सम्‍बोधित किया। 

    प्रधानमंत्री ने कहा कि 125 वर्ष पहले आज ही के दिन, जिसे हाल ही में 9/11 के रूप में जाना जाता है, मात्र कुछ शब्‍दों के साथ एक युवा भारतीय ने पूरे विश्‍व को जीत लिया था और पूरे विश्‍व को एकता की ताकत दिखाई थी। उन्‍होंने कहा कि 1983 का 9/11 प्‍यार, सद्भावना और भाईचारे का दिन था।
      प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद ने हमारे समाज में प्रवेश कर चुकी सामजिक बुराईयों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्‍होंने याद दिलाया कि, स्‍वामी विवेकानंद ने कहा था कि केवल रीति-रिवाज किसी व्‍यक्ति को ईश्‍वर से नहीं जोड़ते। उन्‍होंने कहा कि जन सेवा ही प्रभु सेवा है।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद उपदेश देने में विश्‍वास नहीं करते थे। उनके विचारों और आदर्शवाद ने रामकृष्‍ण मिशन के माध्‍यम से संस्‍थागत रूपरेखा का मार्ग प्रशस्‍त किया। प्रधानमंत्री ने उन सभी लोगों का खासतौर पर जिक्र किया जो स्‍वच्‍छ भारत के साथ अथक रूप से जुड़े हुए हैं। वे हैं जिन्‍होंने वंदे मातरम की भावना को आत्‍मसात किया है। 
      प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्र संगठनों को विश्‍वविद्यालय चुनावों के प्रचार के दौरान स्‍वच्‍छता को अधिक महत्‍व देना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि केवल वे लोग जो महिलाओं का सम्‍मान करते हैं, वे ही स्‍वामी विवेकानंद के सम्‍बोधन के शुरूआती शब्‍दों अमरीका के भाइयों और बहनों’ पर सही रूप में गर्व कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा के बीच पत्राचार यह दर्शाता है कि स्‍वामी जी का ध्‍यान भारत की आत्‍मनिर्भरता पर था।
     प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ज्ञान और कौशल दोनों समान रूप से महत्‍वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब लोग कहते हैं कि 21वीं सदी एशिया की सदी है। लेकिन काफी समय पूर्व स्‍वामी विवेकानंद ने वन एशिया का सिद्धांत दिया था और कहा था कि विश्‍व की समस्‍याओं का हल एशिया के माध्‍यम से होगा।
       प्रधानमंत्री ने कहा कि सृजनात्‍मकता और नवाचार के लिए विश्‍वविद्यालय परिसर से बढ़कर कोई और स्‍थान नहीं हो सकता। उन्‍होंने क‍हा कि एक भारत, श्रेष्‍ठ भारत की भावना को मजबूत करने के लिए संस्‍थानों की और विभिन्‍न राज्‍यों की संस्‍कृति और भाषा दिवस आयोजित करना चाहिए।
     प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत बदल रहा है, वैश्वि‍क स्‍तर पर भारत की प्रतिष्‍ठा बढ़ी है और ऐसा जन शक्ति के कारण हुआ है। उन्‍होंने छात्र समुदाय का आह्वान किया कि वे नियमों का पालन करें और भारत की विजय गाथा को आगे बढ़ायें।

भारत विश्‍व की आध्यात्मिक राजधानी

      नई दिल्ली। उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि देश के लोगों विशेषकर युवाओं को भारतीय संस्‍कृति की जड़ों, मूल्‍यों और इतिहास के बारे में संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। 

    उपराष्‍ट्रपति इंडस विश्‍वविद्यालय में इंडिया इन्‍स्‍पाअर्स फाउंडेशन द्वारा निर्मित कुंभ मेले पर आधारित डॉक्‍यूमेंट्री फिल्‍म कुंभ के प्रदर्शन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि देश के इतिहास के बारे में अधिकतर जानकारी विदेशी लेखकों के नजरिये से अधिकांश लोगों को प्राप्‍त हुई। 
      उन्‍होंने कहा कि कुंभ मेला अवगत कराता है कि भारत विश्‍व की आध्यात्मिक राजधानी है। एक ऐसा आयोजन है, जहां लोगों का आध्‍यात्मिक एकीकरण होता है। उन्‍होंने कहा कि यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है कि पिछले कुछ वर्षों में कुंभ मेले को सकारात्‍मक और सटीक तरीके से नहीं दर्शाया गया। 
      नायडू ने कहा कि कुंभ मेले की शुरूआत, इतिहास और महत्‍व के बारे में भारतीय नजरिये से समग्र जानकारी की बेहद जरूरत थी। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि कुंभ मेले में सर्वाधिक संख्‍या में श्रद्धालु जुटते हैं। ये भारत की समृद्ध आध्‍यात्मिक विरासत का प्रतीक है। 
     उन्‍होंने कहा कि लाखों लोग भारत और विदेशों से अपने शुद्धीकरण के लिए कुंभ मेले में एकत्र होते हैं। नायडू ने कहा कि कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन है, जहां इतनी बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसा माना जाता है कि पवित्र जल में डुबकी लगाने से मस्तिष्‍क और शरीर का शुद्धीकरण होता है, पुराने पाप धुल जाते हैं। मनुष्‍य को मोक्ष प्राप्‍त होता है।
       उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि संस्‍कृति और धर्म समान नहीं थे, जब हम संस्‍कृति की बात करते हैं, उस समय हम धर्म के बारे में चर्चा नहीं कर रहे होते, संस्‍कृति जीवन यापन का तरीका है, जबकि धर्म अराधना का माध्‍यम है। उपराष्‍ट्रपति ने कुंभ मेला डॉक्‍यूमेंट्री फिल्‍म बनाने वालों की सराहना करते हुए कहा कि यह फिल्‍म कुंभ मेले की शुरूआत और सनातन धर्म के लोगों का पथ प्रदर्शक बनने के बारे में जानकारी देती है। इसके जरिए हमें भारत की साधु संत परम्‍पराओं के बारे में भी जानकारी मिलती है।

नविका सागर परिक्रमा के लिए शुभकामनाएं

      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नविका सागर परिक्रमा के लिए 6 महिला अधिकारियों को अपनी शुभकामनाएं दी हैं, जो आईएनएसवी तारणी पर सवार होकर पूरे संसार की जल यात्रा की शुरूआत करेंगी। 

   प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया है कि वे नरेंद्र मोदी ऐप पर नविका सागर परिक्रमा की टीम के लिए अपनी शुभकामनाएं और प्रोत्साहित करने वाले शब्दों को साझा करें। प्रधानमंत्री ने कहा, आज एक विशेष दिन है! 
    नौसेना की 6 महिला अधिकारी आईएनएसवी तारणी पर सवार होकर पूरे संसार की जल यात्रा की शुरूआत कर रही हैं। पूरा देश नविका सागर परिक्रमा की महिलाओं की टीम को उनके उल्लेखनीय प्रयास के लिए शुभकामना देने के लिए एक साथ खड़ा है।
       नरेंद्र मोदी ऐप पर नविका सागर परिक्रमा की टीम के लिए अपनी शुभकामनाएं और प्रोत्साहन के शब्दों को साझा करें। यह पूरे संसार की पहली भारतीय जल यात्रा है जिसमें चालक दल के सभी सदस्य महिलाएं हैं। वे गोवा से अपनी जल यात्रा की शुरूआत करेंगी और संसार की जल यात्रा को पूरा करने के बाद उनके मार्च 2018 में गोवा वापस लौट आने की आशा है।
    इस अभियान को नविका सागर परिक्रमा का नाम दिया गया है। परिक्रमा को पांच चरणों में पूरा किया जाएगा और यह 4 बंदरगाहों पर रुकेगा: आस्‍ट्रेलिया के फ्रीमेंटल, न्‍यूजीलैंड के लाइटलेटन, फॉक्‍लेंड्स के पोर्टसिडनी और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन।