Wednesday, 15 November 2017

बच्चों का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए नया कानून

     अर्जेटीना। महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा है कि भारत सरकार बाल श्रम के उन्मूलन के लिए सतत विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरन्तर कार्य करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 

    श्रीमती मेनका गांधी आज अर्जेटीना में ब्यूनस आयर्स में बाल श्रम के निरन्तर उन्मूलन के बारे में चौथे वैश्विक सम्मेलन के पूर्ण सत्र में वक्तव्य दे रही थी।
      सम्मेलन का आयोजन अर्जेटीना सरकार और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने संयुक्त रूप से किया। इस वक्तव्य से बाल अधिकार और बाल श्रम विषय पर सरकार और देश की स्थिति स्पष्ट होती है। 
  श्रीमती मेनका संजय गांधी ने कहा कि भारत नीतिगत और कानूनी सुधारों, स्थिर आर्थिक विकास, श्रम मानकों के सम्मान, समान शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पहलों के जरिए बाल श्रम की रोकथाम, उसे कम करने और उसके उन्मूलन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बाल श्रम कानून 1986 में संशोधन कर इस दिशा में व्यापक कदम उठाया है।
      इस संशोधन में किसी भी काम में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराने पर रोक है। इसमें किसी भी खतरनाक धंधे में 14-18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को रोजगार देने पर भी रोक लगाई गई है। 
     श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) कानून, 2015 बाल श्रम को ‘देखभाल और संरक्षण की जरूरत में बच्चों’ के रूप में देखता है। जिला स्तर की बाल कल्याण समितियों को उनके सम्पूर्ण कल्याण का अधिकार प्रदान करता है। 
     महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी कानून, 2005 दो अन्य महत्वपूर्ण कानून हैं जो अतिसंवेदनशील समुदायों को सुरक्षा नेटवर्क प्रदान करते हैं। बाल श्रम की रोकथाम में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह किसी भी देश द्वारा किए गए दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा उपायों में से है।
      उन्होंने बच्चों के लिए हेल्प लाइन (चाइल्ड लाइन-1098) की भूमिका को उजागर किया, जो परेशानी में पड़े बच्चों को निकालने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी सुविधा है। 
     श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि बच्चों के व्यावसयिक यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए भारत सरकार तस्करी पर एक नया कानून लाने की प्रक्रिया में है, जिसमें न केवल दंडात्मक उपायों पर जोर दिया गया है बल्कि तस्करी की रोकथाम, तस्करी करके ले जाए गए बच्चों के पुनर्वास और उन्हें परिवार से मिलाने के उपाए भी किए जाएंगे। उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए अर्जेटीना सरकार और आईएलओ को बधाई दी।

शहरी इलाकों में 18.76 मिलियन मकानों की कमी

    नई दिल्‍ली। आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री हरदीप एस. पुरी ने कहा है कि रियल एस्टेट कानून एक पथ प्रदर्शक कानून है, जिससे आने वाले समय में कायापलट होगी।

       उन्होंने कहा कि सरकार ने एक ऐसा तंत्र बनाया है जिसमें रियल एस्टेट क्षेत्र का उचित तरीके से संचालन और खरीददार को मजबूत बनाना सुनिश्चित किया जा रहा है। ‘मुझे इस बारे में कोई संदेह नहीं है कि भारत में रियल एस्टेट का इतिहास दो खंडों में देखा जाएगा, रेरा से पूर्व और रेरा के बाद। रेरा से पूर्व के चरण का वर्णन अनेक लोगों के घर का सपना और महत्वाकांक्षा के रूप में किया जा सकता है जिस सपने को कुछ लोगों ने थोड़े से समय में चकनाचूर कर दिया। हम अभी उस चरण से नहीं निकले हैं।’ 
    पुरी ‘नीति, सुधार और नियंत्रणः भारतीय रियल एस्टेट की रीढ़’ विषय पर आरआईसीएस रियल एस्टेट सम्मेलन को आज यहां संबोधित कर रहे थे। पुरी ने कहा कि धनराशि का अभाव मकान लेने में एक समस्या है। आवासीय क्षेत्र में बहुत कम पारदर्शिता है। झूठे वादे, अपूर्ण आवासीय परियोजनाएं उन अभागे नागरिकों की अनकही विपत्तियों को दर्शाती है जिन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी मकान खरीदने में लगा दी है।
     हम अभी भी उन थोड़े से लोगों के सफाये की प्रक्रिया के आखिरी चरण में है जिनकी चूक के कारण अनेक ऐसे डेवलपरों की छवि धूमिल हुई है जो अपना क्रय-विक्रय सही तरीके से कर रहे हैं। 2011 में कराए गए एक तकनीकी अध्ययन का जिक्र करते हुए जिसमें शहरी इलाकों में 18.76 मिलियन मकानों की कमी की जानकारी दी गई थी, जिसमें 96 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस खंड और एलआईजी हाउसिंग में थी, पुरी ने कहा कि इसके बाद किए गए आकलनों में इस आंकड़े में संशोधन हुआ है और इसका अंतिम विश्लेषण किया जा रहा है, मकानों की कमी 10 मिलियन इकाइयों के आस-पास अथवा इससे अधिक हो सकती है जिसे प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के जरिए दूर किया जाएगा। 
     पुरी ने कहा कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस), कम आय वाले समूह (एलआईजी) और मध्यम आय वाले समूह (एमआईजी) के लोगों के लिए आवास उपलब्ध कराना है। ‘हमने निजी भागीदारी के जरिए आवास को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न पीपीपी मॉडल जारी किए है। इस योजना की विशेषता है कि सरकार भूमि उपलब्ध कराएगी और प्रत्येक एलॉटी को सब्सिडी प्रदान करेगी और शेष धनराशि बैंकों से आसान शर्तों पर लेने में सहायता करेगी। 
    आवास महिला के नाम पर अथवा परिवार के पुरुष सदस्य के साथ संयुक्त रूप से होगा। इससे महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने में मदद मिलेगी। इसमें एक रसोई और शौचालय होगा तथा बालिका की सुरक्षा की व्यवस्था होगी।’
     आवासीय क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए पुरी ने कहा कि आवास और देश में बुनियादी ढांचे की मांग को पूरा करने में यह उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहा है और कृषि के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है जिसमें देश में 6.86 प्रतिशत कामगारों को रोजगार मिला हुआ है।

विकास व पर्यावरण संरक्षण एक साथ होना चाहिए

    नई दिल्‍ली। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार दिल्ली एनसीआर में राजमार्ग परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि क्षेत्र में भीड़भाड़ कम हो और वाहनों से होने वाले प्रदूषण के स्तर को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सके। 

     गडकरी ने एक ऐसी ही परियोजना एनएच 24 का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। गडकरी ने कहा कि एनएच 24 परियोजना का पहला चरण, जिसके तहत अक्षरधाम मंदिर से दिल्ली-यूपी सीमा तक कार्य हो रहा है इस वर्ष दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। 9 किलोमीटर, 14 लेन वाला राजमार्ग रिकॉर्ड 14 महीनें में तैयार हो रहा है, जो कि 30 महीने में पूरा होने का अनुमान था।
    इस राजमार्ग में कई ऐसी विशेषताएं हैं, जिससे प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। राजमार्ग में 2.5 मीटर चौड़ा साईकिल ट्रैक, यमुना पुल पर एक उद्यान, सौर प्रकाश व्यवस्था और ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पौधों को पानी देने की व्‍यवस्‍था शामिल है। 
   गडकरी ने कहा कि यह राजमार्ग लखनऊ तक विकसित किया जाएगा, जोकि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए जीवन रेखा के तौर पर साबित होगा। इस राजमार्ग से दिल्ली-मेरठ मार्ग पर जाम कम होगा, जिससे इस क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी। 
    गडकरी ने बताया कि दिल्ली के चारों ओर पूर्वी और पश्चिमी एक्सप्रेसवे का काम भी तेजी से चल रहा है और यह अगले वर्ष 26 जनवरी से पहले पूरा होने की उम्‍मीद है। एनएच -24 और एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद, पड़ोसी राज्यों की ओर आने-जाने वाले वाहन दिल्ली से बाईपास होकर जाएंगे, जिससे प्रदूषण में 50 प्रतिशत तक कमी आएगी।
    उन्‍होंने कहा कि दिल्ली को जाम मुक्‍त करने के लिए 40,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। इसमें धौला कुआं खंड, द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली के लिए एक रिंग रोड की योजना शामिल है, इसकी निर्माण लागत का भुगतान केंद्र और दिल्ली सरकार संयुक्त रूप से करेंगी। मंत्रालय राजमार्गों के तेजी से निर्माण के अलावा इस क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए भी कदम उठा रहा है।
      इसके तहत जैव ईंधन चलित वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को सक्रियता से प्रोत्‍साहित करना, राजमार्गों को हराभरा बनाना, धूल को रोकने के लिए निर्माण स्थलों को ढ़कना और जलमार्गों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
      उन्होंने कहा कि यमुना नदी से गाद को निकालने और जलमार्ग से दिल्ली और आगरा को जोड़ने के लिए निविदाएं जारी की गई हैं। गडकरी ने कहा कि पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और विकास साथ-साथ चलना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यह परियोजनाएं विकास, रोजगार सृजन, साफ-सुथरा वातावरण और लोगों के लिए सुविधाजनक यात्रा का मार्ग प्रशस्त करेंगी।